पाकिस्तान में शुगर मम्मी कल्चर की सच्चाई और इसके सामाजिक प्रभावों पर एक एक्सक्लूसिव डॉक्यूमेंट्री।
Key Takeaways
- शुगर मम्मी कल्चर पाकिस्तान के बड़े शहरों में तेजी से फैल रहा है।
- यह संबंध पारंपरिक रिश्तों से अलग होते हुए आर्थिक और भावनात्मक जरूरतों पर आधारित हैं।
- इस कल्चर में शामिल दोनों पक्षों को लाभ और समझौता होता है, लेकिन यह सामाजिक और नैतिक विवादों को जन्म देता है।
- शुगर मम्मी कल्चर के कारण पारंपरिक रिश्तों और समाज की संरचना पर प्रभाव पड़ रहा है।
- समाज में इस विषय पर खुलकर चर्चा और जागरूकता की आवश्यकता है।
What the video covers
- वीडियो में पाकिस्तान के बड़े शहरों में बढ़ते शुगर मम्मी कल्चर की चर्चा की गई है।
- शुगर मम्मी वे बड़ी उम्र की महिलाएं होती हैं जो कम उम्र के लड़कों को आर्थिक सहायता देती हैं।
- यह संबंध म्यूचुअल अंडरस्टैंडिंग पर आधारित होते हैं, न कि असली मोहब्बत पर।
- वीडियो में कराची, लाहौर और इस्लामाबाद के विभिन्न केस स्टडीज प्रस्तुत की गई हैं।
- शुगर मम्मी कल्चर के कारण सामाजिक और नैतिक प्रश्न उठते हैं, जिनका वीडियो में विश्लेषण किया गया।
- इस कल्चर में शामिल लड़के आमतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं।
- वीडियो में शुगर मम्मी और शुगर बेबी के बीच के समझौतों और उनकी सीमाओं पर प्रकाश डाला गया।
- डॉक्टर्स और पुलिस के सामने आने वाले कुछ हैरान कर देने वाले केसों का जिक्र भी किया गया।
- वीडियो इस कल्चर की बढ़ती लोकप्रियता और इसके पीछे के कारणों को समझाने की कोशिश करता है।
- शुगर मम्मी कल्चर को लेकर पाकिस्तान में चल रही बहस और सामाजिक दृष्टिकोण को भी वीडियो में शामिल किया गया है।
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Speaker A
अगर आप 18 साल से कम उम्र हैं तो यह वीडियो आपके लिए नहीं है। कराची के पौश इलाके क्लिप्टन में वाके रेस्टोरेंट के सामने एक गाड़ी आकर रुकती है। कार में मौजूद तीन खवातीन जो हुलिए से काफी अमीर लगती हैं। एक वेटर खलील को इशारे से बुलाती हैं। खलील उनके पास जाता है। ऑर्डर लेता है। मगर इसी दौरान ड्राइविंग सीट पर बैठी मिडिल एज वूमन खलील से कहती है कि हमारे साथ चलो। हम तुम्हें अपना घर दिखाते हैं। ओनर वहां पहुंचा दिया करो। इस काम के तुम्हें बहुत अच्छे पैसे मिलेंगे। वो गाड़ी में बैठ जाता है। रास्ते में उसे एक खातून मिठाई खाने को देती है। और फिर खलील चार दिन बाद कयूमाबाद के इलाके से मिलता है। उसकी हालत इतनी खराब होती है कि चला भी नहीं जा रहा होता। खलील को सिविल अस्पताल ले जाया जाता है। जहां वह बताता है कि तीन खवातीन चार रोज तक उसे इस्तेमाल करती रही। उसे खास दवाई खिलाकर बिस्तर पर बांध दिया जाता और फिर वो कुछ होता जिसकी तफसील सुनकर पुलिस और डॉक्टर्स के होश उड़ गए। अगर आपको यकीन नहीं आता फरवरी 2009 के अखबारात उठाकर देख लीजिए सब पता चल जाएगा। यह वाकया पूरे पाकिस्तान में डिस्कस हुआ था कि हम आखिर किस तरफ जा रहे हैं। केस की हैरानक बात यह थी कि उन खवातीन का नाम ना किसी एफआईआर में डाला जाता है ना किसी तफ्तीश में कुछ सामने आता है। अगले चंद रोज में खलील भी मंजर से गायब हो जाता है। वो कहां गया उसके साथ क्या हुआ कुछ पता नहीं चलता। खैर हमारी आज की वीडियो का टॉपिक कोई इस तरह का केस तो नहीं लेकिन इससे मिलताजुलता जरूर है बल्कि शायद इससे भी ज्यादा अलार्मिंग है। क्योंकि खलील के साथ जो हुआ इट वाज़ अगेंस्ट हिज विल। मगर हम जो डिस्कस करने जा रहे हैं वो सब म्यूचुअल अंडरस्टैंडिंग से हो रहा है। जी हां, मैं बात कर रहा हूं मुआशरे में मौजूद शुगर मम्मी कल्चर की। आप सोच रहे होंगे कि यह सब आखिर है क्या? शुगर मम्मी होती कौन है? यह कल्चर पाकिस्तान में क्यों आम होता जा रहा है? यह किस तरह फैलता है? लोगों को इसमें शामिल किस तरह किया जाता है? आइए किताब के पन्ने पलटते हैं और जानते हैं कि इस पूरी कहानी की हकीकत क्या है। आंटी है और उसके साथ उसका ताल्लुक है और वो आंटी जो वो पैसे भी दे रही है। अपने नखरे उठवाने। उनको पराठा में घुमाती है। इनको लग्जरी लाइफ स्टाइल मिले विदाउट एनी हसल शुगर मोमीज़ बना लेते हैं। तफसील में जाने से पहले लाहौर में हुआ एक हैरतंगेज वाक्या सुनाता चलूं। इससे आपको समझने में थोड़ी आसानी होगी। डॉक्टर शाहिद सिद्दीकी कत्ल केस में सनसनी शफत कयूम ने दोस्त मिलकर बाप के कत्ल का मंसूबा बनाया। पुलिस जराय के मुताबिक मुलजिम कयूम आइस का नशा करता था और बुरी सोहबत में पड़ गया था। मुलजिम कयूम ने अपने वालिद से 13 करोड़ मालियत की लग्जरी गाड़ी मांगी थी। पीटीआई के बानी रुकन डॉक्टर शाहिद सिद्दीक को उनके बेटे कयूम शाहिद ने अपने अदाकार दोस्त मॉडल शहरियार शेख के साथ मिलकर कत्ल करवाया। शहरियार गरीब फैमिली से बिलोंग करता था लेकिन अंदाज शहाना थे। महंगी गाड़ियां, ब्रांड्स के कपड़े और जूते, रुपया, पैसा। तहकीकात में शहरियार ने जो इंकशाफात किए वो सुनकर आपका सर शर्म से झुक जाएगा। उसने बताया कि बड़ी उम्र की कई अमीर खवातीन उसकी शुगर ममीज है। वो उनकी ख्वाहिशात पूरी करता है और बदले में उसे यह सब कुछ मिलता है। शहरियार ने मालदार होने के जो दीगर तरीके बताए वो तो यहां डिस्कस भी नहीं किए जा सकते। उधर डॉक्टर शाहिद सिद्दीक के बेटे कयूम शाहिद ने भी मुबईना तौर पर बाप को एक औरत की खातिर मारा। यह खातून भी उम्र में कयूम शाहिद से 12 साल बड़ी थी। दोनों दोस्तों में बड़ी उम्र की औरतों से ताल्लुक की बीमारी थी और शायद यही वो शौक था जिसने दोनों को दोस्त बनाया था। इस वाक्य के बाद एक मर्तबा फिर पाकिस्तान में शुगर मम्मी और शुगर डैडी की बहस शुरू हो गई। कहा जाता है कि बड़े शहरों में ऐसी खवातीन की तादाद हजारों में है जो शुगर मम्मी बनने और किसी नौजवान को शुगर बेबी के तौर पर गोद लेने के लिए हर वक्त तैयार रहती है। मुझे नहीं पता था लेकिन मेरे कुछ बहुत अच्छे दोस्त उन्होंने बताया कि शुगर आंटीज भी एक्सिस्ट करती है। जो बड़ी-बड़ी रिच आंटीज हैं यू कांट इमेजिन कि वो किस हद तक ऑफर्स दे देती हैं जो लड़का उन्हें बड़ा पसंद आ जाए। शी सेड दैट कि तुम्हें कौन सी गाड़ी पसंद है। अच्छा। मैंने कहा Honda Civic तो कहती ओके। बड़ी उम्र की जो औरत है वो छोटे उम्र के लड़कों को जो है वो अपने साथ अटैच कर रही है। छोटी उम्र के लड़के कौन है? यह वही है जिनके पास पैसा नहीं है। एक जो है वो शॉर्टकट है कि एक आंटी है और उसके साथ उसका ताल्लुक है और वो आंटी जो है वो पैसे भी दे रही है और अपनी मर्ज़ियां भी करवा रही है। अगर आपने वीडियो यहां तक देख ली है तो एक काम कीजिए। इंकलाब को सब्सक्राइब कर लीजिए ताकि ऐसी वीडियोस आपको मिलती रहे। वीडियो को लाइक और शेयर भी कीजिएगा। और हां, आपने कभी कोई शुगर मम्मी या शुगर बेबी केस देखा? कमेंट में जरूर बताइएगा। चलिए आगे चलते हैं। आमतौर पर समझा जाता है कि शुगर मम्मीज़ बड़ी उम्र की वो खवातीन होती हैं जिनके पास पैसा होता है, स्टेटस होता है, पोजीशन होती है। जो गिफ्ट्स देकर, लैविश लाइफस्टाइल देकर, दौलत देकर, कम उम्र लड़कों के साथ रिलेशनशिप कायम करती हैं। और बदले में उन्हें क्या मिलता है? कंपैनियनशिप, इंटिमेसी, अवेलेबिलिटी, तवज्जो, प्यार, वक्त। फीमेल अगर अबव 40, 50, 60 है उसको अब एक नई चीज चाहिए जिसको वो अपने मुताबिक चला सके। इन्वेस्टमेंट है जो वो यंग लड़का कर रहा है उसमें उससे वो रीजनरेट होती है। यह ताल्लुक एक मुदे एक एग्रीमेंट के तहत होता है। लेकिन यह स्टैंप पेपर पर लिखा नहीं जाता। बातचीत में तय कर लिया जाता है। दोनों पार्टीज जानती हैं कि यह ना हकीकी मोहब्बत है और ना ही हकीकी ताल्लुक। दोनों बस किसी ना किसी फायदे की तवकको रखते हैं। मगरिब में इस किस्म के ताल्लुकात को सीकिंग अरेंजमेंट्स कहा जाता है। अवेलेबल रिकॉर्ड्स के मुताबिक दुनिया में इस वक्त 2 करोड़ से ज्यादा लोग यह सर्विसेस इस्तेमाल कर रहे हैं। जिनमें पाकिस्तानी खवातीनो हजरात भी शामिल हैं। याद रखिएगा कि यह फिगर्स वो हैं जो वेबसाइट्स के डाटा, पब्लिक सर्विस और एकेडमिक रिसर्च के रिकॉर्ड से हासिल किए गए हैं। मुकम्मल डाटा तो जाहिर है किसी भी मुल्क का दस्तियाब नहीं क्योंकि यह एक प्राइवेसी कंसर्न है लेकिन एक मोहतात अंदाजे के मुताबिक पाकिस्तान के बड़े शहरों में ऐसी खवातीन की तादाद सैकड़ों नहीं हजारों में है। यहां एक बात क्लियर कर दें कि हम इस किस्म की टर्म्स यानी शुगर मम्मी और शुगर डैडी वगैरह के सख्त खिलाफ हैं। ऐसे अल्फाज़, ऐसी टर्म्स मगरिब की तरफ से इसीलिए इस्तेमाल की जाती है ताकि पाकीजा रिश्तों का एहतराम खत्म कर दिया जाए। रिश्तों की तौहीन की जाए। तो हम इसे शुगर ममी के बजाय शुगर लेडी पुकारेंगे। शुगर असल में स्लैम था पैसे के लिए। यानी शुगर लेडी पैसे वाली औरत। खैर वो लड़के जो शुगर बेबीज बनते हैं उन पर हम बाद में बात करेंगे। लेकिन पहले जरा यह जानने की कोशिश करते हैं कि पाकिस्तान के अंदर आखिर यह खवातीन कौन सी हैं जिनको हम शुगर लेडीज कह सकते हैं वो क्यों यह रास्ता मुंतखब करती हैं वजूहात क्या हैं? हमने इस मौजू पर काम शुरू किया तो हमारी मुलाकात हुई मिसेज मायरा से। यह था केस नंबर वन। मेरे हस्बैंड अक्सर बिजनेस के सिलसिले में मुल्क से बाहर रहते थे। कभी शहर से बाहर, अगर शहर में हो तो अक्सर मीटिंग्स के लिए घर से बाहर। एक अकेलापन था जिंदगी में जो अंदर ही अंदर मुझे खत्म कर रहा था। सारी चीजें होने के बावजूद, हर आसाइश होने के बावजूद जिंदगी में एक कमी थी। मैं डिप्रेशन में जाती जा रही थी। वक्त ना देना, बातचीत ना कर पाना, बहुत सारी सोशल डिजायर्स थी जो नहीं पूरी हो पा रही थी। जरूरी नहीं है सिर्फ पैसा, अच्छा लाइफस्ट ही आपके लिए सब कुछ हो। कभी-कभी वक्त ना देना, साथ ना होना बहुत मैटर करता है। इस तरह के मसाइल तो कई खवातीन के साथ हो सकते हैं। सवाल यह है कि मिसेज मायरा के ज़हन में शुगर बेबी का ऑप्शन आया कैसे? यह बहुत कॉमन है। अब इनफैक्ट आप हर दूसरे घर में यह कहानी चल रही होती है। मेरी खुद इतनी फ्रेंड्स हैं जो अक्सर सोशल गैदरिंग्स में, किटी पार्टीज में हमारे बहुत सारी गेट टुगेदर्स होती हैं जिसमें किसी ना किसी बॉय के साथ आती थी। बड़ा लेफ्ट आउट फील होता था क्योंकि मेरे साथ मेरे हस्बैंड नहीं होते थे। तो बस इसी तरीके से मुझे चीजें पता चलती रही और फिर मुझे क्योंकि अजीब लगता था। तन्हाई तो थी ही। तो मैंने कहा क्यों नहीं मैं भी ट्राई करूं। मिसेज मायरा ने जो कुछ बताया उससे गिरें खुलना शुरू हो गई। फिर हमारे सामने आता है केस नंबर टू। 48 साल की मिसेज फर्रुख F7 इस्लामाबाद में रहती हैं। शौहर ब्यूरोक्रेट हैं। मशरूफ रहते हैं लेकिन घर आते हैं। उनकी शिकायत है कि शौहर से उन्हें फिजिकल प्लेजर तो मिलता है लेकिन इमोशनल सेटिस्फेक्शन नहीं मिलती। वो वक्त, वो प्यार, वो मोहब्बत नहीं मिलती, वो रोमांस नहीं मिलता जो एक औरत को हमेशा चाहिए होता है। तो मैं इन शुगर बेबीज को अपनी इमोशनल और रोमांटिक नीड्स के लिए इस्तेमाल करती हूं। फिर आता है केस नंबर थ्री। मिसेज इफ्तखार पीईसीएचएस में रहती हैं। उम्र 44 साल है। अब भी पुरकशिश है। वो Facebook ग्रुप पर लिखती हैं मेरे शौहर मुल्क से बाहर रहते हैं और बाहर से सिर्फ पैसा भेजते हैं। हां, कभी कबभार WhatsApp मैसेज भी कर देते हैं। खुद बाहर बैठकर पार्टियां
Speaker A
इशारे से बुलाती हैं। खलील उनके पास जाता है। ऑर्डर लेता है। मगर इसी दौरान ड्राइविंग सीट पर बैठी मिडिल एज वूमन खलील से कहती है कि हमारे साथ चलो। हम तुम्हें अपना घर दिखाते हैं। ओनर वहां पहुंचा दिया
Speaker A
करो। इस काम के तुम्हें बहुत अच्छे पैसे मिलेंगे। वो गाड़ी में बैठ जाता है। रास्ते में उसे एक खातून मिठाई खाने को देती है। और फिर खलील चार दिन बाद कयूमाबाद के इलाके से मिलता है। उसकी हालत इतनी खराब
Speaker A
होती है कि चला भी नहीं जा रहा होता। खलील को सिविल अस्पताल ले जाया जाता है। जहां वह बताता है कि तीन खवातीन चार रोज तक उसे इस्तेमाल करती रही। उसे [संगीत] खास दवाई खिलाकर बिस्तर पर बांध दिया जाता और फिर
Speaker A
वो कुछ होता जिसकी तफसील सुनकर पुलिस और डॉक्टर्स के होश उड़ गए। अगर आपको यकीन नहीं आता फरवरी 2009 के अखबारात उठाकर देख लीजिए सब पता चल जाएगा। यह वाकया पूरे पाकिस्तान में डिस्कस हुआ था कि हम आखिर किस तरफ जा रहे हैं। केस की
Speaker A
हैरानक बात यह थी कि उन खवातीन का नाम ना किसी एफआईआर में डाला जाता है ना किसी तफ्तीश में कुछ सामने आता है। अगले चंद रोज में खलील भी मंजर से गायब हो जाता है। वो कहां गया उसके साथ क्या हुआ कुछ पता
Speaker A
नहीं चलता। खैर हमारी आज की वीडियो का टॉपिक कोई इस तरह का केस तो नहीं लेकिन इससे मिलताजुलता जरूर है बल्कि शायद इससे भी ज्यादा अलार्मिंग है। क्योंकि खलील के साथ जो हुआ इट वाज़ अगेंस्ट हिज विल। मगर हम जो डिस्कस
Speaker A
करने जा रहे हैं वो सब म्यूचुअल अंडरस्टैंडिंग से हो रहा है। जी हां, मैं बात कर रहा हूं मुआशरे में मौजूद शुगर मम्मी कल्चर की। आप सोच रहे होंगे कि यह सब आखिर है क्या?
Speaker A
शुगर मम्मी होती कौन है? यह कल्चर पाकिस्तान [संगीत] में क्यों आम होता जा रहा है? यह किस तरह फैलता है? लोगों को [संगीत] इसमें शामिल किस तरह किया जाता है? आइए किताब के पन्ने पलटते हैं और जानते हैं कि इस पूरी कहानी की हकीकत क्या
Speaker A
है। आंटी है और उसके साथ उसका ताल्लुक है और वो आंटी जो वो पैसे भी दे रही है। अपने नखरे उठवाने। उनको पराठा में घुमाती है। इनको लग्जरी लाइफ स्टाइल मिले विदाउट एनी हसल शुगर मोमीज़ [संगीत] बना लेते हैं।
Speaker A
तफसील में जाने से पहले लाहौर में हुआ एक हैरतंगेज वाक्या सुनाता चलूं। इससे आपको समझने में थोड़ी आसानी होगी। डॉक्टर शाहिद सिद्दीकी कत्ल केस में सनसनी शफत कयूम ने दोस्त मिलकर बाप के कत्ल का मंसूबा बनाया। पुलिस जराय के मुताबिक मुलजिम कयूम आइस का
Speaker A
नशा करता था और बुरी सोहबत में पड़ गया था। मुलजिम कयूम ने अपने वालिद से 13 करोड़ मालियत की लग्जरी गाड़ी मांगी थी। पीटीआई के बानी रुकन डॉक्टर शाहिद सिद्दीक को उनके बेटे कयूम शाहिद ने अपने अदाकार दोस्त मॉडल शहरियार शेख के साथ मिलकर कत्ल
Speaker A
करवाया। शहरियार गरीब फैमिली से बिलोंग करता था लेकिन अंदाज शहाना थे। महंगी गाड़ियां, ब्रांड्स के कपड़े और जूते, रुपया, पैसा। तहकीकात में शहरियार ने जो इंकशाफात किए वो सुनकर आपका सर शर्म से झुक जाएगा। उसने बताया कि बड़ी उम्र की कई
Speaker A
अमीर खवातीन उसकी शुगर ममीज है। वो उनकी ख्वाहिशात पूरी करता है और बदले में उसे यह सब कुछ मिलता है। शहरियार ने मालदार होने के जो दीगर तरीके बताए वो तो यहां डिस्कस भी नहीं [संगीत] किए जा सकते। उधर
Speaker A
डॉक्टर शाही सिद्दीक के बेटे कयूम शाहिद ने भी मुबईना तौर पर बाप को एक औरत की खातिर मारा। यह खातून भी उम्र में कयूम शाहिद से 12 साल बड़ी थी। दोनों दोस्तों में बड़ी उम्र की औरतों से ताल्लुक की
Speaker A
बीमारी [संगीत] थी और शायद यही वो शौक था जिसने दोनों को दोस्त बनाया था। इस वाक्य के बाद एक मर्तबा फिर पाकिस्तान में शुगर मम्मी और शुगर डैडी की बहस शुरू हो गई। कहा जाता है कि बड़े शहरों में ऐसी
Speaker A
खवातीन की तादाद हजारों में है जो शुगर मम्मी बनने और किसी नौजवान को शुगर बेबी के तौर पर गोद लेने के लिए हर वक्त तैयार रहती है। मुझे नहीं पता था लेकिन मेरे कुछ बहुत अच्छे दोस्त उन्होंने बताया कि शुगर आंटीज
Speaker A
भी एक्सिस्ट करती है। जो बड़ी-बड़ी रिच आंटीज हैं यू कांट इमेजिन कि वो किस हद तक ऑफर्स दे देती हैं जो लड़का उन्हें बड़ा पसंद आ जाए। शी सेड दैट कि तुम्हें कौन सी गाड़ी पसंद है। अच्छा। मैंने कहा Honda Civic तो कहती
Speaker A
ओके। बड़ी उम्र की जो औरत है वो छोटे उम्र के लड़कों को जो है वो अपने साथ अटैच कर रही है। छोटी उम्र के लड़के कौन है? यह वही है जिनके पास पैसा नहीं है। एक जो है वो
Speaker A
शॉर्टकट है कि एक आंटी है और उसके साथ उसका ताल्लुक है और वो आंटी जो है वो पैसे भी दे रही है और अपनी मर्ज़ियां भी करवा रही है। अगर आपने वीडियो यहां तक देख ली है तो एक
Speaker A
काम कीजिए। इंकलाब को सब्सक्राइब कर लीजिए ताकि ऐसी वीडियोस आपको मिलती रहे। वीडियो को लाइक और शेयर भी कीजिएगा। और हां, आपने कभी कोई शुगर मम्मी या शुगर बेबी केस देखा? कमेंट में जरूर बताइएगा। चलिए आगे चलते हैं।
Speaker A
आमतौर पर समझा जाता है कि शुगर मम्मीज़ बड़ी उम्र की वो खवातीन होती हैं जिनके पास पैसा होता है, स्टेटस होता है, पोजीशन होती है। जो गिफ्ट्स [संगीत] देकर, लैविश लाइफस्टाइल देकर, दौलत देकर, कम उम्र लड़कों के साथ रिलेशनशिप कायम करती हैं।
Speaker A
और बदले में उन्हें क्या मिलता है? कंपैनियनशिप इंटिमेसी अवेलेबिलिटी तवज्जो, प्यार, वक्त। फीमेल अगर अबव 40, 50, 60 है उसको अब एक नई चीज चाहिए जिसको वो अपने मुताबिक चला सके। इन्वेस्टमेंट है जो वो यंग लड़का कर रहा है उसमें उससे वो
Speaker A
रीजनरेट होती है। यह ताल्लुक एक मुदे एक एग्रीमेंट के तहत होता है। लेकिन यह स्टैंप पेपर पर लिखा नहीं जाता। बातचीत में तय कर लिया जाता है। दोनों पार्टीज जानती हैं कि यह ना हकीकी मोहब्बत है और ना ही हकीकी ताल्लुक। दोनों बस किसी ना
Speaker A
किसी फायदे की तवकको रखते हैं। मगरिब में इस किस्म के ताल्लुकात को सीकिंग अरेंजमेंट्स कहा [संगीत] जाता है। अवेलेबल रिकॉर्ड्स के मुताबिक दुनिया में इस वक्त 2 करोड़ से ज्यादा लोग यह सर्विसेस इस्तेमाल कर रहे हैं। जिनमें पाकिस्तानी
Speaker A
खवातीनो हजरात भी शामिल हैं। याद रखिएगा कि यह फिगर्स वो हैं जो वेबसाइट्स के डाटा, पब्लिक सर्विस और एकेडमिक रिसर्च के रिकॉर्ड से हासिल किए गए हैं। मुकम्मल डाटा तो जाहिर है किसी भी मुल्क का दस्तियाब नहीं क्योंकि यह एक प्राइवेसी
Speaker A
कंसर्न है लेकिन एक मोहतात अंदाजे के मुताबिक पाकिस्तान के बड़े शहरों में ऐसी खवातीन की तादाद सैकड़ों नहीं हजारों में है। यहां एक बात क्लियर कर दें कि हम इस किस्म की टर्म्स यानी शुगर मम्मी और शुगर डैडी
Speaker A
वगैरह के सख्त खिलाफ हैं। ऐसे अल्फाज़, ऐसी टर्म्स मगरिब की तरफ से इसीलिए इस्तेमाल की जाती है ताकि पाकीजा रिश्तों का एहतराम खत्म कर दिया जाए। रिश्तों की तौहीन की जाए। तो हम इसे शुगर ममी के बजाय शुगर
Speaker A
लेडी पुकारेंगे। शुगर असल में स्लैम था पैसे के लिए। यानी शुगर लेडी पैसे वाली औरत। खैर वो लड़के जो शुगर बेबीज बनते हैं उन पर हम बाद में बात करेंगे। लेकिन पहले जरा यह जानने की कोशिश करते हैं कि
Speaker A
पाकिस्तान के अंदर आखिर यह खवातीन कौन सी हैं जिनको हम शुगर लेडीज कह सकते हैं वो क्यों यह रास्ता मुंतखब करती हैं वजूहात क्या हैं? हमने इस मौजू पर काम शुरू किया तो हमारी मुलाकात हुई मिसेज मायरा से। यह
Speaker A
था केस नंबर वन। मेरे हस्बैंड अक्सर बिजनेस के सिलसिले में मुल्क से बाहर रहते थे। कभी शहर से बाहर, अगर शहर में हो तो अक्सर मीटिंग्स के लिए घर से बाहर। एक अकेलापन था जिंदगी में जो अंदर ही अंदर मुझे खत्म कर रहा था। सारी
Speaker A
चीजें होने के बावजूद, हर आसाइश होने के बावजूद जिंदगी में एक कमी थी। मैं डिप्रेशन में जाती जा रही थी। वक्त ना देना, बातचीत ना कर पाना, बहुत सारी सोशल डिजायर्स थी जो नहीं पूरी हो पा रही थी।
Speaker A
जरूरी नहीं है सिर्फ पैसा, अच्छा लाइफस्ट ही आपके [संगीत] लिए सब कुछ हो। कभी-कभी वक्त ना देना, साथ ना होना बहुत मैटर करता है। इस तरह के मसाइल तो कई खवातीन के साथ हो सकते हैं। सवाल यह है कि मिज मायरा
Speaker A
[संगीत] के ज़हन में शुगर बेबी का ऑप्शन आया कैसे? यह बहुत कॉमन है। अब इनफैक्ट आप हर दूसरे घर में यह कहानी चल रही होती है। मेरी खुद इतनी [संगीत] फ्रेंड्स हैं जो अक्सर सोशल गैदरिंग्स में, किटी पार्टीज
Speaker A
में हमारे [संगीत] बहुत सारी गेट टुगेदर्स होती हैं जिसमें किसी ना किसी बॉय के साथ आती थी। बड़ा लेफ्ट आउट फील होता था क्योंकि मेरे साथ मेरे हस्बैंड नहीं होते थे। तो बस इसी तरीके [संगीत] से मुझे चीजें पता चलती रही और फिर मुझे क्योंकि
Speaker A
अजीब लगता था। तन्हाई तो थी ही। तो मैंने कहा क्यों नहीं मैं भी ट्राई करूं। मिज मायरा ने जो कुछ बताया उससे गिरें खुलना शुरू हो गई। फिर हमारे सामने आता है केस नंबर टू। 48 साल की मिसेज फर्रुख F7
Speaker A
इस्लामाबाद में रहती हैं। शौहर ब्यूरोक्रेट हैं। मशरूफ रहते हैं लेकिन घर आते हैं। उनकी शिकायत है कि शौहर से उन्हें फिजिकल प्लेजर तो मिलता है लेकिन इमोशनल सेटिस्फेक्शन नहीं मिलती। वो वक्त, वो प्यार, वो मोहब्बत नहीं मिलती, वो
Speaker A
रोमांस नहीं मिलता जो एक औरत को हमेशा चाहिए होता है। तो मैं इन शुगर बेबीज को अपनी इमोशनल और रोमांटिक नीड्स के लिए इस्तेमाल करती हूं। फिर आता है केस नंबर थ्री। मिसेज इफ्तखार पीईसीएचएस में रहती हैं। उम्र 44 साल है। अब भी पुरकशिश है।
Speaker A
वो Facebook ग्रुप पर लिखती हैं मेरे शौहर मुल्क से बाहर रहते हैं और बाहर से सिर्फ पैसा भेजते हैं। हां, कभी कबभार WhatsApp मैसेज भी कर देते हैं। खुद बाहर बैठकर पार्टियां करते हैं। शादी को 22 साल हो
Speaker A
चुके हैं, लेकिन शायद 22 मर्तबा भी कभी साथ बैठकर ढंग से बात नहीं हुई। मैं शदीद तनहाई का शिकार थी। फिर मेरी मुलाकात एक 24 साला लड़के से हुई। वो मेरे साथ वक्त गुजारता है। मेरी बात सुनता है। हम साथ
Speaker A
हंसते हैं, साथ घूमते हैं। मैं खुद को जवान महसूस करती हूं। जिंदा महसूस करती हूं। आई नो दिस इज आर्टिफिशियल बट आई एम हैप्पी। तहकीक के दौरान कुछ और चीजें भी हमें पता चली। जैसे जनरली कुछ कररेक्टर खवातीन होती
Speaker A
हैं। वो भी शुगर रिलेशंस में इनवॉल्व होती हैं। लेकिन वो हमारी बहस का मौजू नहीं। तो यह तो हुई शुगर लेडीज। अब यह देखते हैं कि वो नौजवान वो कम उम्र लड़के कौन होते हैं जो शुगर बेबीज का किरदार निभाते हैं। सबसे
Speaker A
पहले वसीम का केस समझ लेते हैं। वसीम बड़ी मुश्किल से हमारे साथ बात करने पर राजी हुए। वो उस वक्त सिर्फ 24 साल के थे जब इस रंगीन मगर खोखली दुनिया में दाखिल हुए। मैं मिडिल क्लास फैमिली से रखता था। तो
Speaker A
अक्सर बेता रोडों पे गाड़ियां देखना, सोशल मीडिया यूज़ करना Instagram पे अक्सर मैं एक चीज मैं देखता था कि बड़ी-बड़ी गाड़ियां, बड़ी-बड़े लाइफस्टाइल दिखाता था उसमें। मेरे भी बड़े ड्रीम्स थे। तो इस वजह से मैं मैंने मेरे पास एक
Speaker A
अपोरर्चुनिटी आई तो मैंने अेल किया। तो सबसे पहले तो आते हैं फाइनेंशियल प्रॉब्लम्स। नौकरियों में पैसा नहीं, वालदैन या घर की जिम्मेदारियां हैं। जिनके बोझ तले यह नौजवान फंसे हुए हैं। छोटी-छोटी चीज के लिए वह महीने की पहली
Speaker A
तारीख का इंतजार करते हैं। और सोने पर सुहागा यह कि इंटरनेट और सोशल मीडिया की मसनूई दुनिया ने दिमाग खराब कर दिए हैं। ख्वाहिशात को लामहदूद कर दिया है। ज्यादातर इसी तरह के नौजवान शुगर लेडीज का शिकार बनते हैं।
Speaker A
आंटियां जो ज्यादातर ना वो अच्छे-अच्छे बच्चे उठाती है और उनको पराडो में घुमाती है। आई गॉट यूट परफ्यूम, पोचेस एंड अ डायमंड रिंग। कितना सोचती हो मेरे बारे में। मैं तो इस लायक भी नहीं हूं। दूसरे नंबर पर वो नौ उम्र लड़के हैं जो
Speaker A
कोई काम नहीं करना चाहते। इजी मनी उनका पहला टास्क होता है। वो सोचते हैं कि कौन दिन रात मेहनत करे और चंद रुपए कमाए। बॉस की झिड़कियां अलग खाए। तो क्यों ना यह रास्ता इख्तियार कर लिया जाए। वो सिर्फ
Speaker A
काहिली और लालच की वजह से ऐसी औरतों के पास जाते हैं कि ज्यादा पैसा मिलेगा। बड़ी गाड़ी में फिरेंगे, फाइव स्टार होटलों में जाएंगे, बड़ी-बड़ी जगहों पर खाने [संगीत] खाएंगे। तीसरे नंबर पर वो हैं जो सिर्फ एंजॉयमेंट के लिए, अपने मजे के लिए ऐसी
Speaker A
खवातीन तलाश करते हैं। अपनी उम्र की लड़कियां उन्हें लिफ्ट नहीं करवाती। वह भी किसी लड़की के साथ रोमांटिक रिलेशनशिप की ख्वाहिश रखते हैं। [संगीत] लेकिन ऐसा हो नहीं पाता। तो जो औरत मिलती है यह उसी के साथ ताल्लुकात कायम करके
Speaker A
अपने मजे पूरे कर लेते हैं। बाज केसेस में तो कॉलेज और यूनिवर्सिटी स्टूडेंट की [संगीत] प्रोफेसर ही उनकी शुगर लेडी बन जाती हैं। यानी क्लास में रूहानी उस्ताद और बंगले में रूमानवी उस्ताद। अब यहां सवाल यह पैदा होता है कि शुगर
Speaker A
लेडीज़ को शुगर बेबीज मिलते कैसे हैं? वो कौन सी दुकान है जहां यह खरीदो फरोख्त होती है? यह आपस में कनेक्ट [संगीत] कैसे होते हैं?
Speaker A
आपको नहीं पता बहुत सारी सोशल गैदरिंग्स हैं, नाइट क्लब्स हैं, पार्टीज होती हैं, डांस पार्टीज होती हैं और अब तो काफी ऐसे कनेक्टर्स हैं जो मसाज सेंटर्स में, सो कॉल्ड मसाज सेंटर्स में और पार्लर्स में आपको कनेक्ट कराते हैं ऐसे लोगों से। प्लस
Speaker A
सोशल मीडिया इंटरनेट पर काफी ऐसी वेबसाइट्स हैं जो आजकल जो है वो कोई रिश्ता कराने के लिए तो किसी डेटिंग ऐप की तरह से चल रही हैं। तो ऐसे बहुत सारे तरीके हैं। आई गेस मुझे ऐसा लगता है कि
Speaker A
बच्चा-बच्चा जानता है कि उसको कहां से शुगर मॉमी चाहिए या शुगर एडी चाहिए। वेबसाइट और डेटिंग ऐप से याद आया कि पाकिस्तान में भी एक वेबसाइट ल्च की गई थी। लेकिन पीटीए ने उसे ब्लॉक कर दिया था। मैं नाम बताकर आपकी क्यूरियोसिटी बढ़ाना
Speaker A
नहीं चाहता। लेकिन हकीकत यह है कि इस वक्त सैकड़ों की तादाद में ऐसी वेबसाइट्स पाकिस्तान में ऑपरेट कर रही हैं जहां शुगर लेडीज अवेलेबल है और शुगर बेबीज धड़ाधड़ अपने प्रोफाइल बना रहे हैं। लिखा जाता है डेट पीपल हु मेक लाइफ बेटर। और साथ ही
Speaker A
बड़ी उम्र की खवातीन की तस्वीर है। लग्जरी डेटिंग के ऑप्शन अलग से मौजूद हैं। भाई यह लग्जरी डेटिंग होती क्या है? जरा इस ऑप्शन पर क्लिक करके चेक कर लें और हमें पता है कि आप ऐसा करेंगे जरूर तो हमने नाम को
Speaker A
ब्लर कर दिया है। आपका गुनाह हम अपने सर क्यों लें? लेकिन इन रिवायती तरीकों के अलावा नौजवान लड़कों को फांस का एक और जाल भी सामने आया। और आपको एक और बात बताती हूं। यह जो जॉब इंटरव्यूज आते हैं अक्सर
Speaker A
फलाना बंदा रिक्वायर्ड है इस जेडी के लिए, फलानी जेडी [संगीत] के लिए। एक्चुअली एक छोटा सा हंट होता है जो बेसिकली [संगीत] इसी चीज के लिए होता है। लेकिन वसीम को किस तरह से फंसाया गया ये तो एक बिल्कुल
Speaker A
ही ड्रामाई कहानी है। मैं बेसिकली बिग इन्वेस्टमेंट कंपनी में काम करता था। रियलस्टेट से रिलेटेड है। तो मेरी एक यूनिवर्सिटी फ्रेंड थी। उन्होंने मुझे इनका नंबर दिया था। तो मैंने जब इनको अप्रोच किया, इनसे जब बात की तो उन्होंने
Speaker A
बड़े अच्छे से बात की और मुझे अपना ऑफिस बुलाया। ऑफिस में मीटिंग हुई पहली तो उन्होंने मुझे छूटते कहा कि कल आप मेरे घर आ डिनर करें फिर हम इस पर मजीद इस पे फाइनलाइज करते हैं चीजों को [संगीत] तो
Speaker A
मैं जब वहां गया तो वो फिर अपनी थोड़ी सी पर्सनल लाइफ भी डिस्कस करने लगी उन्होंने मुझे फिर अपने ऑफर दिए [संगीत] हालांकि ये ताल्लुक बिल्कुल आर्टिफिशियल होता है। दोनों जानते हैं कि यह हकीकत नहीं बल्कि इसका आगाज ही इस अंडरस्टैंडिंग
Speaker A
के साथ होता है कि नो रियल इमोशंस बाउंड्रीज तय है। लेकिन जो ऑफर्स इन कम उम्र लड़कों को की जाती हैं वो इनसेन है नाकाबिल यकीन है। ऑफर वही होती है जो सामने वाले की रिक्वायरमेंट होती है। अब
Speaker A
डिपेंड करता है कि सामने वाला क्या चाहता है। कुछ लोग ब्रांडेड कपड़े, घड़ियां, जूते इन्हीं में खुश हो जाते हैं। कुछ लोगों को इसके साथ-साथ फाइव स्टार होटल्स में डेट्स, डिनार्स, फैमिली की शॉपिंग्स और काफी हैंडसम अमाउंट भी चाहिए होता है।
Speaker A
तो जिसकी जैसी रिक्वायरमेंट हो। इनफैक्ट कभी-कभी तो इंटरनेशनल ट्रिप्स भी होते हैं। बेसिकली वो मुझसे जानना चाह रही थी कि मैं क्या करता हूं? मेरी सैलरी कितनी है, ख्वाहिशत क्या है? तो इन बातों के दरमियान उन्होंने मुझसे डायरेक्टली कहा कि मैं
Speaker A
तुम्हें लमसम अमाउंट दूंगी हैंडसम अमाउंट दूंगी मंथली और जो जो गिफ्ट्स वगैरह होंगे वो भी इंक्लूडेड होंगे तुम मेरे साथ रिलेशन में आ जाओ। याद रखें कि यह रिलेशनशिप फितरी नहीं होती। दोनों की उम्रों में 15 से 25 साल
Speaker A
तक का फर्क होता है। यह बात शुगर लेडीज अच्छी तरह जानती हैं। यह कम उम्र लड़के साथ तो होते हैं, लेकिन जहनी तौर पर इसे मुश्किल से कबूल करते हैं। ऑफर एक्सेप्ट कर लेने के बावजूद एक स्ट्रगलिंग लड़के से
Speaker A
पहले यही कहा जाता है कि मैं तुम्हारी मेंटोर हो सकती हूं। तुम्हें आगे ले जा सकती हूं। बस कभी कबभार मुझसे मिल लिया करो। जब मैं बुलाऊं तो आ जाया करो। यूं यह सिलसिला आगे बढ़ता है और फिर होता क्या
Speaker A
है? शुरू-शुर में तो सिर्फ डिनर्स वगैरह पे जाते थे, पार्टीज में जाते थे। फिर वो आहिस्ता-आहिस्ते वो फिजिकल रिलेशन उनसे बनना शुरू हुआ। फिजिकल रिलेशन हुआ तो वो बेसिकली मुझे बाद में पता चला कि वो वो डायरेक्ट डायरेक्ट थी। अक्सर बहुत ही आउट
Speaker A
हो जाती थी। अजीब अजीब सी डिमांड करती थी। लेकिन मैं इतना फ्रस्ट्रेटेड होता था। लेकिन मैं क्या करता मजबूरन मेरी ख्वाहिशात और मेरे घर के अखराजात पूरे हो रहे थे तो मैं चक्कर में मैं ना चाहते हुए भी बहुत कुछ उनकी डिमांड को कबूल करता था।
Speaker A
रिसर्च बताती है कि ऐसा रिलेशनशिप मैक्सिमम 5 साल चलता है। या तो लड़का तंग आ जाता है या खातून उक्त आ जाती है या कोई दीगर मसाइल आ जाते हैं। सिचुएशन तब्दील हो जाती है और यह खत्म हो जाता है।
Speaker A
शुरू के दो-ती साल चला था ये सिलसिला। फिर उन्होंने पैसे भी बेचना बंद कर दिए। फिर थोड़े अरसे बाद मुझे किसी से पता चला कि वो उनका कोई दूसरा कोई बॉयफ्रेंड बन गया किसी और के साथ रिलेशन तो इस वजह से मैं
Speaker A
भी फिर पनाराशी कर। ये कम उम्र लड़के जो इस कल्चर का हिस्सा बन जाते हैं। अगर आप उनकी कहानी सुने तो हर लड़का यही कहता है कि चंद साल रिलैक्स करेंगे, अच्छा खासा पैसा बनाएंगे और जब शादी करेंगे तो सब छोड़ देंगे। लाइफ विल
Speaker A
बी बैक टू नॉर्मल। लेकिन क्या वाकई सब वैसा ही हो जाता है जैसे पहले था?
Speaker A
बाद में तो कुछ भी ठीक नहीं हुआ। बिल्कुल डीवैल्यू सा फील करने लगा मैं और अपने आप को तो सेल्फ रिस्पेक्ट तो मुझे अपने में दिखती नहीं थी। डिप्रेशन का मरीज अलग हुआ। पैसे आना बंद हो गए तो एक किल्लत तो थी
Speaker A
उसमें। थोड़े से बाद फिर मेरी शादी हो गई थी। शादी हुई तो उसमें भी एक गिल्ट तो था ना चीजों का पुराना उसका। तो वो भी एक बड़े मसले मसाइल्स रहे हैं मेरे साथ। अब यह है कि डिप्रेशन का मरीज हूं और
Speaker A
चल रही है लाइफ जैसी चल रही है। गरीब से अमीर होने में बहुत मजा आता है। लग्जरीज और फैसिलिटीज को एंजॉय करने का अपना ही नशा है। लेकिन अमीर से जब दोबारा गरीब होना पड़ता है, तब प्रॉब्लम आती है।
Speaker A
तब असल इम्तिहान होता है। इस ताल्लुक से शायद किसी की जाहिरी सेहत पर इतना असर ना पड़े। लेकिन इससे ज़हनियत बीमार होना शुरू होती है और फिर नफसियाती इमोशनल सेहत तबाह होकर रह जाती है। लेकिन क्या यह सिर्फ
Speaker A
शुगर बेबीज के साथ होता है? क्या शुगर लेडीज अपनी जिंदगी में वैसे ही मस्ट रहती हैं? क्या वो अपनी दौलत के बल पर हर मसला हल कर लेती हैं। गिल्ट बिल्कुल है जिंदगी में। लेकिन जाहिर सी बात है हर चीज का एक वे आउट होता है।
Speaker A
मुझे लगता था कि शायद मेरे डिप्रेशन एंजायटी की वजह यह है मैं इस तरह से करूंगी अकेलापन दूर करूंगी तो मैं चीजों को ओवरकम कर लूंगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वो गिल्ट डिप्रेशन [संगीत] और बढ़ता रहा। और आज भी कुछ ऐसा ही है। साइकेट्रिस्ट के पास
Speaker A
आना जाना, मेडिसिंस लेना, नींद की दवाइयां खा लेना यार बिल्कुल होता है हर इंसान को। तो किस्सा कुछ यूं है कि फिर दोनों के लिए यह सारी जिंदगी की प्रॉब्लम बन जाती है। क्योंकि पास्ट कभी आपका पीछा नहीं छोड़ता।
Speaker A
यह साए की तरह आपके साथ चिपक जाता है। फिर ड्रग्स का सहारा लेने में लगता है कि सुकून मिल रहा है। लेकिन यह एडिक्शन मजीद तबाही की तरफ ले जाती है। और यूं एक बेजर सा ताल्लुक एक यूं ही आसानी से बना हुआ
Speaker A
रिश्ता जिसमें कोई हार्म कोई डैमेज नजर नहीं आ रहा होता। आखिरकार एटम बम की तरह जिंदगी में फटता है और सब कुछ खत्म कर देता है। इसीलिए कुरान की कई आयात में अल्लाह ने सख्त अहकामात दिए हैं। सूर अल
Speaker A
फुरकान में क्लियरली फरमाया कि मोमिन जिना नहीं करते। सूर नूर में निगाहों की हिफाजत और पाक दामन रहने की हिदायत दी गई है। और सूर अल इसरा में तो अल्लाह का इंतहाई वाज़ हुकुम है। और जिना के करीब भी ना जाओ।
Speaker A
बेशक वह बेहयाई और बहुत बुरा रास्ता है। काबिले गौर बात यह है कि अल्लाह ने यह नहीं फरमाया कि जिना मत करो। बल्कि फरमाया कि जिना के करीब भी मत जाओ। यानी खुद को ऐसा कोई चांस ही ना दो जिससे गुनाह के
Speaker A
रास्ते पर चलने का कोई इमकान भी हो। लिहाजा रिक्वेस्ट यही है कि एक पाकीजा, स्पॉटलेस और बावाकार जिंदगी गुजारने की कोशिश करें। मीडिया के असरात को समझें। वेस्टर्न कल्चर को ब्लाइंडली फॉलो करने के चक्कर में अपने आप को तबाह ना करें। याद
Speaker A
रखें इज्जत आपके पहनावे से नहीं होती। इज्जत आपके दिखावे से नहीं होती। इज्जत आपके अमल से होती है। वकार से होती है। रिज़्क हलाल से होती है। अल्लाह हाफिज।
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