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Seekho App Scam: ₹1 का लालच और ₹1,540 Crore की लूट की पूरी कहानी

सीखो ऐप की ₹1 ट्रायल से ₹1540 करोड़ की कंपनी बनने और विवादित सब्सक्रिप्शन मॉडल की पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • ₹1 के ट्रायल के नाम पर ऑटोमेटिक सब्सक्रिप्शन मॉडल ने यूजर्स को भारी नुकसान पहुंचाया।
  • सीखो ऐप ने तेजी से मार्केट में जगह बनाई लेकिन विवादास्पद बिजनेस प्रैक्टिसेज ने इसकी छवि खराब की।
  • टॉप वेंचर कैपिटल्स का निवेश इस मॉडल को वैधता देता है, लेकिन यूजर शिकायतों को नजरअंदाज करना सवाल खड़े करता है।
  • यूजर्स के लिए कैंसिलेशन प्रक्रिया जटिल और अस्पष्ट थी, जिससे पैसे कटते रहे।
  • एडटेक सेक्टर में तेजी से बढ़ती कंपनियों के साथ उपभोक्ता सुरक्षा का संतुलन जरूरी है।

What the video covers

  • सीखो ऐप की शुरुआत 2020 में तीन IIT कानपुर के दोस्तों ने की थी, जो शॉर्ट वीडियो के माध्यम से सीखने का प्लेटफॉर्म था।
  • शुरुआत में ऐप फ्री था, लेकिन 2022 तक यूजर्स बढ़ने के बावजूद कोई इनकम नहीं हुई।
  • 2023 में सब्सक्रिप्शन मॉडल ₹1 के ट्रायल के साथ शुरू किया गया, जो ऑटोमेटिक रिन्यू होता था और यूजर्स को इसकी जानकारी नहीं होती थी।
  • इस मॉडल से कंपनी को भारी रेवेन्यू मिला, और 2025 तक कंपनी की वैल्यू ₹1540 करोड़ तक पहुंच गई।
  • यूजर्स ने शिकायत की कि ऐप अनइंस्टॉल करने के बाद भी पैसे कटते रहे, कैंसिलेशन प्रक्रिया जटिल थी।
  • YouTube पर सीखो ऐप को सबसे बड़ा स्कैम बताया गया, जिससे विवाद और यूजर नाराजगी बढ़ी।
  • टॉप वेंचर कैपिटल्स ने भी इस कंपनी में भारी निवेश किया, जिससे सवाल उठे कि क्या वे डार्क पैटर्न्स से अनजान थे।
  • एडटेक इंडस्ट्री में सीखो की तेजी से ग्रोथ हुई, जबकि अन्य कंपनियां संघर्ष कर रही थीं।
  • कंपनी का लक्ष्य 2026 तक ₹600 करोड़ से अधिक का रेवेन्यू हासिल करना था।
  • वीडियो में इस पूरे विवाद और बिजनेस मॉडल की गहराई से जांच की गई है।

Answers

Questions about this video

सीखो ऐप का ₹1 ट्रायल मॉडल कैसे काम करता है?

यूजर ₹1 में 3 दिन का फ्री ट्रायल लेता है, लेकिन यह ट्रायल ऑटोमेटिकली सब्सक्रिप्शन में कन्वर्ट हो जाता है, जिससे हर महीने ₹149 या ₹199 कटते रहते हैं।

यूजर्स को कैंसिलेशन में क्या दिक्कत आती है?

कैंसिलेशन प्रक्रिया ऐप के अंदर कई स्टेप्स में होती है, जो खासकर छोटे शहरों के यूजर्स के लिए जटिल और समझना मुश्किल होती है।

क्या सीखो ऐप वास्तव में एक स्कैम है?

वीडियो में बताया गया है कि ऐप का बिजनेस मॉडल विवादास्पद है और कई यूजर्स को अनजाने में पैसे कटने की शिकायतें हैं, जिससे इसे स्कैम कहा जा रहा है।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:01
Speaker A
15 मार्च 2025, मुंबई। एक होटल का स्टाफ अपना फोन चेक कर रहा है। यूपीआई नोटिफिकेशन आती है। ₹199 कट गए। फिर एक और ₹199। फिर एक बार और ₹199। उसकी आंखें फटी की फटी रह जाती हैं। सिर्फ एक महीने में उसके अकाउंट से ₹1200 गायब हो चुके थे और वह जानता तक नहीं था। लेकिन क्यों? और जिस ऐप से पैसे कट रहे थे, उस ऐप का नाम था सीखो। और आज 2026 तक 160 मिलियन इंडियंस के फोन में यह ऐप डाउनलोड है। Google Play Store पर नंबर दो एजुकेशन ऐप है। 4.62 रेटिंग है और इन्वेस्टर्स ने पूरे भरोसे के साथ इसमें 42 मिलियन लगाए हैं और कंपनी की वैल्यू है ₹1540 करोड़। लेकिन इसकी दूसरी तरफ YouTube पर वीडियोस ट्रेंड कर रहे हैं। सीखो ऐप इज द बिगेस्ट स्कैम ऑफ 2025। लेकिन सच क्या है?
00:23
Speaker A
यह स्कैम है या जीनियस बिजनेस आइडिया? और सबसे बड़ी बात, अगर यह स्कैम है तो इंडिया की टॉप कंपनियां इसमें करोड़ क्यों लगा रही हैं? यह कहानी शुरू होती है ₹1 से। सिर्फ ₹1। लेकिन यह ₹1 बन गया ₹600 करोड़ का एंपायर और लाखों इंडियंस का सबसे बड़ा रिग्रेट। इस कहानी की शुरुआत होती है 2015 से। IIT कानपुर के तीन दोस्त रोहित चौधरी, कीर्ति अग्रवाल और यश बनवानी, सेम हॉस्टल, सेम सपने। इंजीनियर बनने के बाद अच्छे कॉर्पोरेट जॉब मिल गई। लेकिन दिल में कुछ और चल रहा था। रोहित एक टॉपर नाम की एटेक कंपनी में काम करने लगा। फिर 2018 में ज्वॉइन किया कुकू एफएम। वो ऐप जहां ऑडियो स्टोरीज सुनाई जाती थीं हिंदी में। वहां रोहित प्रोडक्ट लीड बना। थोड़े टाइम बाद उसके दोनों दोस्त कीर्ति और यश भी आ गए कुकू एफएम में। तीन दोस्त फिर से साथ मिले। लेकिन काम करते हुए उन्होंने एक चीज नोटिस की जो कि रोहित ने बाद में एक पॉडकास्ट में बताया। रोहित ने एक पॉडकास्ट में कहा,
00:40
Speaker A
हम देखते थे कि इंडिया के छोटे शहरों में लोग Instagram और YouTube पर घंटों स्क्रॉल करते हैं। लेकिन क्या सीख रहे हैं? कुछ नहीं। सिर्फ और सिर्फ टाइम पास। और फिर एक दिन रोहित के दिमाग में एक आइडिया आया। उसने सोचा क्या हो अगर लोग स्क्रॉल करते-करते कुछ सीख भी सके? शॉर्ट वीडियोस, स्वाइप करो, लेकिन कंटेंट हो यूजफुल। गिटार कैसे बजाएं? पब्लिक स्पीकिंग कैसे करें? सरकारी काम कैसे करवाएं? पैसे कैसे कमाएं? यह सब। 2020 में इंडिया में लॉकडाउन था और फिर TikTok बैन हो गया। लोगों के पास टाइम था, फोन था और इसके साथ ही अनलिमिटेड इंटरनेट भी था। उनको बस एक प्लेटफार्म चाहिए था जो उन्हें कुछ नॉलेज दे सके। तीनों दोस्तों ने कुकू एफएम छोड़ दिया। वापस चले गए उदयपुर, राजस्थान के एक शांत शहर में। एक छोटे से रूम में बैठकर उन्होंने अपना पहला ऐप बनाया और नाम रखा सीखो। कीर्ति कंटेंट हैंडल करता था। यश कोडिंग करता था और रोहित प्रोडक्ट और स्ट्रेटजी देखता था।
01:02
Speaker A
पहली बार जब उन्होंने ऐप लॉन्च किया दिसंबर 2020 में Google Play Store पर, तब तक उनके पास सिर्फ ₹ करोड़ थे फंडिंग में। यह पैसा दिया था रोहित के पुराने बॉस मोहम्मद जीशान ने जो टॉपर में थे। शुरुआत में सीखो बिल्कुल फ्री था। कोई पैसा नहीं मांगता था यूजर से। बस डाउनलोड्स बढ़ाओ और यूजर्स बढ़ाओ और बात बन गई। 2022 तक 3 लाख यूजर्स हो गए। लेकिन एक प्रॉब्लम थी। एक भी रुपया नहीं कमाया था अब तक। उन्होंने क्रिएटर्स को पैसे दिए वीडियोस बनाने के लिए। परफॉर्मेंस मार्केटिंग पर पैसे उड़ाए। एड्स पर पैसे उड़ाए। लेकिन इनकम जीरो। 2022 के बीच। तीनों फाउंडर्स के पास सिर्फ 1 महीने का पैसा बचा था। 100 से ज्यादा इन्वेस्टर्स के पास गए थे। लेकिन हर जगह से एक ही जवाब मिला। नहीं। रोहित ने पॉडकास्ट में बताया हम टूटे हुए थे। लगता था सब खत्म हो गया। लेकिन एक दिन तीनों ने मीटिंग की डिसीजन लेना था। या तो घर वापस चले जाओ और कोई नौकरी ढूंढो या एक आखिरी बार कुछ ट्राई करो। रोहित ने कहा चलो एक बार पे वॉल लगाते हैं। मतलब ऐप यूज करना है तो पैसा दो। यश ने कहा लेकिन कौन देगा पैसा? YouTube पर तो यह सब फ्री में मिल जाता है। रोहित ने जवाब दिया, देखते हैं। अगर नहीं चला तो रिग्रेट तो नहीं होगा। यह तो रहेगा कि एटलीस्ट ट्राई तो किया। और उन्होंने सब्सक्रिप्शन मॉडल शुरू किया। ₹199 पर ईयर। एक बार दे दो पूरी ऐप तुम्हारी और फिर जादू हो गया। पहले महीने में ही उन्हें ₹4 लाख मिल गए। पहली बार उन्होंने रेवेन्यू देखा था अपनी कंपनी का। रोहित ने अपनी टीम को सैलरीज क्लियर की। सब खुश थे। ऐप चल रहा था। लेकिन यह तो बस शुरुआत थी। असली खेल अब शुरू होने वाला था। अब समझो कि सीखो का बिजनेस मॉडल एक्चुअली काम कैसे करता है?
01:19
Speaker A
मान लो तुम YouTube पर स्क्रॉल कर रहे हो। अचानक एक ऐड आता है। सीखो ऐप डाउनलोड करो और सीखना शुरू करो। सिर्फ ₹1 में। तुम्हें लगता है? अरे ₹1 तो कुछ भी नहीं है। चलो ट्राई करते हैं। तुम ऐप डाउनलोड करते हो। बहुत सारे वीडियोस दिखते हैं। गिटार सीखो, फोटोशॉप सीखो, इंग्लिश बोलना सीखो, कोडिंग सीखो, सरकारी डॉक्यूमेंट्स कैसे बनाएं सब कुछ। लेकिन जब तुम कोई वीडियो खोलते हो, लॉक दिखता है। सब्सक्राइब करो। ऑप्शन आता है। ₹1 में 3 दिन फ्री ट्रायल शुरू करो। तुम सोचते हो सिर्फ ₹1 है। दे देते हैं। कैंसिल कर लेंगे बाद में अगर पसंद नहीं आया। तुम ₹1 पे करते हो यूपीआई से। ऐप खुल जाती है, वीडियोस चलने लगते हैं। लेकिन यहां पर असली सीक्रेट शुरू होता है। जब तुम ₹1 पे करते हो, एक्चुअली तुम यूपीआई ऑटो पे एक्टिवेट कर देते हो। मतलब 3 दिन के बाद ऑटोमेटिकली हर महीने ₹149 या ₹199 तुम्हारे अकाउंट से कट जाएंगे। और इसका नोटिफिकेशन तुम्हें ढंग से नहीं दिखता। फाइन प्रिंट में लिखा होता है छोटे-छोटे लेटर्स में। अब मान लो तुमने 3 दिन बाद सोच लिया कि नहीं चाहिए यह ऐप। तुम ऐप अनइंस्टॉल कर देते हो फोन से लेकिन ऑटो पे तो चालू है तो नेक्स्ट मंथ ₹199 कट गए। फिर नेक्स्ट मंथ ₹199 कट गए और तुम्हें पता भी नहीं चलता क्यों। सीखो का कहना है कि कैंसिलेशन इजी है। बस ऐप में जाओ, प्रोफाइल पर जाओ, फिर मोर पर जाओ, फिर सेटिंग्स पर जाओ, फिर माय सब्सक्रिप्शंस पर जाओ, फिर कैंसिल बटन दबाओ। लेकिन कितने लोग यह सब स्टेप्स ढूंढते हैं? खासकर वो लोग जो छोटे शहरों से हैं और उन्हें टेक्नोलॉजी की इतनी समझ नहीं है।
01:39
Speaker A
समझो ऐसे एक मिठाई की दुकान है। तुमसे कहते हैं ₹1 में एक मिठाई ट्राई करो। तुम खाते हो, अच्छी लगी। लेकिन वह तुमसे एक कागज पर साइन करवा लेते हैं। उस कागज में लिखा है छोटे लेटर्स में। हर महीने हम तुम्हारे घर से ₹200 ले लेंगे और मिठाई देंगे। तुम घर चले जाते हो। मिठाई खा ली, खत्म। लेकिन नेक्स्ट मंथ ₹200 गायब। फिर नेक्स्ट मंथ ₹200 गायब। रोकने के लिए तुम्हें उस दुकान में वापस जाना पड़ेगा। एक छुपे हुए ड्रॉर में से वह कागज ढूंढना पड़ेगा और फाड़ना पड़ेगा। लेकिन ज्यादातर लोग यह करते ही नहीं। वो सोचते हैं मिठाई तो ली नहीं हमने। फिर भी पैसे काट रहे हैं। स्कैम है। और यही सीखो के साथ भी होता है। फाउंडर्स के लिए यह मॉडल सोने की चिड़िया बन गया। ₹4 लाख से शुरू हुआ सफर 2023 तक ₹ लाख के फंडिंग पर आ गया एलिवेशन कैपिटल से। पहली बार उन्हें बेंगलुरु में ऑफिस मिला। टीम बढ़ी, $ लाख पेइंग यूजर्स हो गए। फिर दिसंबर 2024 में बड़ी खबर आई। लाइट स्पीड वेंचर पार्टनर्स ने 8 मिलियन दिए सीरीज ए फंडिंग में। कंपनी की वैल्यू बन गई ₹36 करोड़। देखते ही देखते सीखो इंडिया का नंबर दो एजुकेशन ऐप बन गया। हर दिन 1.2 लाख नए लोग डाउनलोड कर रहे थे। क्रिएटर्स भी खुश थे। शुरू में सीखो ने उन्हें सिर्फ ₹100 पर वीडियो दिए थे। लेकिन अब अच्छे पैसे मिलने लगे। 250 से ज्यादा क्रिएटर्स प्लेटफार्म पर आ गए। 10,000 प्लस वीडियोस बन गए। रोहित, कीर्ति और यश जो उदयपुर के छोटे से रूम से निकले थे, अब बेंगलुरु में बड़े ऑफिस में बैठे थे। मीटिंग्स हो रही थीं इन्वेस्टर्स के साथ। मीडिया में फीचर्स आ रहे थे। CNBC टीवी 18 पर इंटरव्यू दे रहे थे। रोहित ने एक इंटरव्यू में कहा हमारा मिशन है हर इंडियन को सीखना आसान बनाना। चाहे वो किसी भी शहर से हो, किसी भी बैकग्राउंड से हो। सीखो ने दावा किया हम एजुकेशन को डेमोक्रेटाइज कर रहे हैं। Netflix फॉर लर्निंग और नंबर्स तो कमाल के थे। फाइनल ईयर 2024 में कंपनी ने 11.5 करोड़ का रेवेन्यू किया। पिछले साल से 475% ग्रोथ। 2025 तक 40 लाख पेइंग सब्सक्राइबर्स हो गए। मतलब 40 लाख लोग हर महीने पैसे दे रहे थे। मंथली रेवेन्यू ₹50 करोड़ क्रॉस कर गया। और फिर सितंबर 2025 में सबसे बड़ी डील आई। बेसिमर वेंचर पार्टनर्स ने 28 मिलियन इन्वेस्ट किए। लाइट स्पीड, एलिवेशन और गुड वाटर कैपिटल। सब ने दोबारा पैसे लगाए। कंपनी की वैल्यू बन गई ₹1,540 करोड़ यानी ₹180 मिलियन। एडटेक इंडस्ट्री फंडिंग स्लोडाउन में थी। अनअकडमी जैसी कंपनियां स्ट्रगल कर रही थीं। लेकिन सीखो तो पूछो ही मत। दिन पर दिन उड़ रहा था। टारगेट था फाइनल ईयर 2026 में ₹600 करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू होगा। एक छोटे से उदयपुर रूम से निकले तीन दोस्त अब यूनिकॉर्न बनने की रेस में भाग रहे थे। लेकिन यह कहावत सुनी हो ना? जब कोई इतनी तेजी से ऊपर जाता है तो नीचे आना भी उसका उतना ही तेज होता है। जनवरी 2025, YouTube पर एक वीडियो वायरल होता है। सीखो ऐप इंडिया का बिगेस्ट स्कैम। वीडियो में दिखाया जाता है कि कैसे लोगों के अकाउंट से पैसे कट रहे हैं। बिना उन्हें पता चले। कमेंट्स पढ़ते हैं तो आंखें खुल जाती हैं। एक यूजर लिखता है, मैंने सीखो ऐप 3 महीने पहले डाउनलोड किया था। ₹1 ट्रायल लिया। 2 दिन बाद डिलीट कर दिया ऐप। लेकिन आज तक हर महीने ₹199 कट रहे हैं। जब कंप्लेंट की तो रिप्लाई आया। पॉलिसी के अकॉर्डिंग रिफंड नहीं मिलेगा। दूसरा यूजर लिखता है चोरी का ऐप है। मुझे पता है।
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Speaker A
उसके दोनों दोस्त कीर्ति और यश भी आ गए कुकू एफएम में। तीन दोस्त फिर से साथ मिले। लेकिन काम करते हुए उन्होंने एक चीज नोटिस की जो कि रोहित ने बाद में एक पॉडकास्ट में बताया। रोहित ने एक पॉडकास्ट
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Speaker A
में कहा। हम देखते थे कि इंडिया के छोटे शहरों में लोग Instagram और YouTube पर घंटों स्क्रॉल करते हैं। लेकिन क्या सीख रहे हैं? कुछ नहीं। सिर्फ और सिर्फ टाइम पास। और फिर एक दिन रोहित के दिमाग में एक
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Speaker A
आईडिया आया। उसने सोचा क्या हो अगर लोग स्क्रॉल करते-करते कुछ सीख भी सके? शॉर्ट वीडियोस, स्वाइप करो, लेकिन कंटेंट हो यूजफुल, गिटार कैसे बजाएं? पब्लिक स्पीकिंग कैसे करें? सरकारी काम कैसे करवाएं? पैसे कैसे कमाएं? यह सब 2020 में
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Speaker A
इंडिया में लॉकडाउन था और फिर TikTok बैन हो गया। लोगों के पास टाइम था, फोन था और इसके साथ ही अनलिमिटेड इंटरनेट भी था। उनको बस एक प्लेटफार्म चाहिए था जो उन्हें कुछ नॉलेज दे सके। तीनों दोस्तों ने कुकू
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Speaker A
एफएम छोड़ दिया। वापस चले गए उदयपुर, राजस्थान के एक शांत शहर में। एक छोटे से रूम में बैठकर उन्होंने अपना पहला ऐप बनाया और नाम रखा सीखो। कीर्ति कंटेंट हैंडल करता था। यश कोडिंग करता था और रोहित प्रोडक्ट और स्ट्रेटजी देखता था।
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Speaker A
पहली बार जब उन्होंने ऐप ल्च किया दिसंबर 2020 में Google Play Store पे तब तक उनके पास सिर्फ ₹ करोड़ थे फंडिंग में। यह पैसा दिया था रोहित के पुराने बॉस मोहम्मद जीशान ने जो टॉपर में थे। शुरुआत में सीखो
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Speaker A
बिल्कुल फ्री था। कोई पैसा नहीं मांगता था यूजर से। बस डाउनलोड्स बढ़ाओ और यूज़र्स बढ़ाओ और बात बन गई। 2022 तक 3 लाख यूज़र्स हो गए। लेकिन एक प्रॉब्लम थी। एक भी रुपया नहीं कमाया था अब तक। उन्होंने क्रिएटर्स
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Speaker A
को पैसे दिए वीडियोस बनाने के लिए। परफॉर्मेंस मार्केटिंग पर पैसे उड़ाए। एड्स पर पैसे उड़ाए। लेकिन इनकम जीरो। 2022 का बीच। तीनों फाउंडर्स के पास सिर्फ 1 महीने का पैसा बचा था। 100 से ज्यादा इन्वेस्टर्स के पास गए थे। लेकिन हर जगह
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Speaker A
से एक ही जवाब मिला। नहीं। रोहित ने पॉडकास्ट में बताया हम टूटे हुए थे। लगता था सब खत्म हो गया। लेकिन एक दिन तीनों ने मीटिंग की डिसीजन लेना था। या तो घर वापस चले जाओ और कोई नौकरी ढूंढो या एक आखिरी
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Speaker A
बार कुछ ट्राई करो। रोहित ने कहा चलो एक बार पे वॉल लगाते हैं। मतलब ऐप यूज करना है तो पैसा दो। यश ने कहा लेकिन कौन देगा पैसा? YouTube पर तो यह सब फ्री में मिल जाता है। रोहित ने जवाब दिया, देखते हैं।
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Speaker A
अगर नहीं चला तो रिग्रेट तो नहीं होगा। यह तो रहेगा कि एटलीस्ट ट्राई तो किया और उन्होंने सब्सक्रिप्शन मॉडल शुरू किया। ₹199 पर ईयर। एक बार दे दो पूरी ऐप तुम्हारी और फिर जादू हो गया। पहले महीने में ही उन्हें ₹4 लाख मिल गए। पहली बार
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Speaker A
उन्होंने रेवेन्यू देखा था अपनी कंपनी का। रोहित ने अपनी टीम को सैलरीज क्लियर की। सब खुश थे। ऐप चल रहा था। लेकिन यह तो बस शुरुआत थी। असली खेल अब शुरू होने वाला था। अब समझो कि सीखो का बिजनेस मॉडल
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Speaker A
एक्चुअली काम कैसे करता है? मान लो तुम YouTube पे स्क्रॉल कर रहे हो। अचानक एक ऐड आता है। सीखो ऐप डाउनलोड करो और सीखना शुरू करो। सिर्फ ₹1 में। तुम्हें लगता है?
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Speaker A
अरे ₹1 तो कुछ भी नहीं है। चलो ट्राई करते हैं। तुम ऐप डाउनलोड करते हो। बहुत सारे वीडियोस दिखते हैं। गिटार सीखो, फोटोशॉप सीखो, इंग्लिश बोलना सीखो, कोडिंग सीखो। सरकारी डॉक्यूमेंट्स कैसे बनाएं सब कुछ। लेकिन जब तुम कोई वीडियो खोलते हो, लॉक
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Speaker A
दिखता है। सब्सक्राइब करो। ऑप्शन आता है। ₹1 में 3 दिन फ्री ट्रायल शुरू करो। तुम सोचते हो सिर्फ ₹1 है। दे देते हैं। कैंसिल कर लेंगे बाद में अगर पसंद नहीं आया। तुम ₹1 पे करते हो यूपीआई से। ऐप खुल
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Speaker A
जाती है, वीडियोस चलने लगते हैं। लेकिन यहां पर असली सीक्रेट शुरू होता है। जब तुम ₹1 पे करते हो, एक्चुअली तुम यूपीआई ऑटो पे एक्टिवेट कर देते हो। मतलब 3 दिन के बाद ऑटोमेटिकली हर महीने ₹149 या ₹199
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Speaker A
तुम्हारे अकाउंट से कट जाएंगे। और इसका नोटिफिकेशन तुम्हें ढंग से नहीं दिखता। फाइन प्रिंट में लिखा होता है छोटे-छोटे लेटर्स में। अब मान लो तुमने 3 दिन बाद सोच लिया कि नहीं चाहिए यह ऐप। तुम ऐप अनइंस्टॉल कर देते हो फोन से लेकिन ऑटो पे
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Speaker A
तो चालू है तो नेक्स्ट मंथ ₹199 कट गए। फिर नेक्स्ट मंथ ₹199 कट गए और तुम्हें पता भी नहीं चलता क्यों। सीखो का कहना है कि कैंसिलेशन इजी है। बस ऐप में जाओ, प्रोफाइल पे जाओ, फिर मोर पे जाओ, फिर
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Speaker A
सेटिंग्स पे जाओ, फिर माय सब्सक्रिप्शंस पे जाओ, फिर कैंसिल बटन दबाओ। लेकिन कितने लोग यह सब स्टेप्स ढूंढते हैं? खासकर वो लोग जो छोटे शहरों से हैं और उन्हें टेक्नोलॉजी की इतनी समझ नहीं है। समझो ऐसे एक मिठाई की दुकान है। तुमसे कहते हैं ₹1
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Speaker A
में एक मिठाई ट्राई करो। तुम खाते हो अच्छी लगी। लेकिन वह तुमसे एक कागज पर साइन करवा लेते हैं। उस कागज में लिखा है छोटे लेटर्स में। हर महीने हम तुम्हारे घर से ₹200 ले लेंगे और मिठाई देंगे। तुम घर
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Speaker A
चले जाते हो। मिठाई खा ली खत्म। लेकिन नेक्स्ट मंथ ₹200 गायब। फिर नेक्स्ट मंथ ₹200 गायब। रोकने के लिए तुम्हें उस दुकान में वापस जाना पड़ेगा। एक छुपे हुए ड्रर में से वह कागज ढूंढना पड़ेगा और फाड़ना पड़ेगा। लेकिन ज्यादातर लोग यह करते ही
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Speaker A
नहीं। वो सोचते हैं मिठाई तो ली नहीं हमने। फिर भी पैसे काट रहे हैं। स्कैम है। और यही सीखो के साथ भी होता है। फाउंडर्स के लिए यह मॉडल सोने की चिड़िया बन गया। ₹4 लाख से शुरू हुआ सफर 2023 तक ₹ लाख के
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Speaker A
फंडिंग पर आ गया एलिवेशन कैपिटल से। पहली बार उन्हें बेंगलुरु में ऑफिस मिला। टीम बढ़ी $ लाख पेइंग यूज़र्स हो गए। फिर दिसंबर 2024 में बड़ी खबर आई। लाइट स्पीड वेंचर पार्टनर्स ने 8 मिलियन दिए सीरीज ए फंडिंग में। कंपनी की वैल्यू बन गई ₹36
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Speaker A
करोड़। देखते ही देखते सीखो इंडिया का नंबर दो एजुकेशन ऐप बन गया। हर दिन 1.2 लाख नए लोग डाउनलोड कर रहे थे। क्रिएटर्स भी खुश थे। शुरू में सीखो ने उन्हें सिर्फ ₹100 पर वीडियो दिए थे। लेकिन अब अच्छे
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Speaker A
पैसे मिलने लगे। 250 से ज्यादा क्रिएटर्स प्लेटफार्म पर आ गए। 10,000 प्लस वीडियोस बन गए। रोहित, कीर्तते और यश जो उदयपुर के छोटे से रूम से निकले थे। अब बेंगलुरु में बड़े ऑफिस में बैठे थे। मीटिंग्स हो रही
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Speaker A
थी इन्वेस्टर्स के साथ। मीडिया में फीचर्स आ रहे थे। सीएनबीसी टीवी 18 पर इंटरव्यू दे रहे थे। रोहित ने एक इंटरव्यू में कहा हमारा मिशन है हर इंडियन को सीखना आसान बनाना। चाहे वो किसी भी शहर से हो, किसी
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Speaker A
भी बैकग्राउंड से हो। सीखो ने दावा किया हम एजुकेशन को डेमोक्रेटाइज कर रहे हैं। Netflix फॉर लर्निंग और नंबर्स तो कमाल के थे। फाइनल ईयर 2024 में कंपनी ने 11.5 करोड़ का रेवेन्यू किया। पिछले साल से 475% ग्रोथ 2025 तक 40 लाख पेइंग सब्सक्राइबर्स
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Speaker A
हो गए। मतलब 40 लाख लोग हर महीने पैसे दे रहे थे। मंथली रेवेन्यू ₹50 करोड़ क्रॉस कर गया। और फिर सितेंंबर 2025 में सबसे बड़ी डील आई। बेसिमर वेंचर पार्टनर्स ने 28 मिलियन इन्वेस्ट किए। लाइट स्पीड, एलिवेशन और गुड वाटर कैपिटल। सब ने दोबारा
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Speaker A
पैसे लगाए। कंपनी की वैल्यू बन गई ₹1,540 करोड़ यानी ₹180 मिलियन। एडटेक इंडस्ट्री फंडिंग स्लोाउन में थी। अनअcडमी bjूस जैसी कंपनीज स्ट्रगल कर रही थी। लेकिन सीखो तो पूछो ही मत। दिन पर दिन उड़ रहा था। टारगेट था फाइनल ईयर 2026 में ₹600 करोड़
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Speaker A
से ज्यादा का रेवेन्यू होगा। एक छोटे से उदयपुर रूम से निकले तीन दोस्त अब यूनिकॉर्न बनने की रेस में भाग रहे थे। लेकिन यह कहावत सुने हो ना? जब कोई इतनी तेजी से ऊपर जाता है तो नीचे आना भी उसका
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Speaker A
उतना ही तेज होता है। जनवरी 2025 YouTube एक वीडियो वायरल होता है। सीखो ऐप इंडियास बिगेस्ट स्कैम वीडियो में दिखाया जाता है कि कैसे लोगों के अकाउंट से पैसे कट रहे हैं। बिना उन्हें पता चले। कमेंट्स पढ़ते हैं तो आंखें खुल जाती हैं। एक यूजर लिखता
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Speaker A
है, मैंने सीखो ऐप 3 महीने पहले डाउनलोड किया था। ₹1 ट्रायल लिया। 2 दिन बाद डिलीट कर दिया ऐप। लेकिन आज तक हर महीने ₹199 कट रहे हैं। जब कंप्लेंट की तो रिप्लाई आया। पॉलिसी के अकॉर्डिंग रिफंड नहीं मिलेगा।
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Speaker A
दूसरा यूजर लिखता है चोरी का ऐप है। मुझे पता ही नहीं था कि ऑटो पे ऑन हो गया। ₹1200 डूब गए। तीसरा यूजर यह लोग बहुत स्मार्ट हैं। अनइंस्टॉल करने से सब्सक्रिप्शन कैंसिल नहीं होता और कैंसिल करने का बटन ढूंढना इंपॉसिबल है। फिर
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Speaker A
मार्च 2025 में एक पोस्ट वायरल होता है ग्रेप वाइन पे। यह एक सीक्रेट प्लेटफार्म होता है जहां एंप्लोई अपनी कंपनीज़ के बारे में लिखते हैं। पोस्ट में लिखा था सीखो। Kuू FM, मोज़। यह सब सेम कांसेप्ट यूज कर
11:23
Speaker A
रहे हैं। यूपीआई ऑटो पे का फायदा उठा रहे हैं। वे लोग जिनका डिजिटल नॉलेज कम है उनको टारगेट कर रहे हैं। और इनके इन्वेस्टर्स लाइट स्पीड और एलिवेशन कैपिटल जिनके पास $8 मिलियन है इन्वेस्ट करने के लिए। क्या उन्हें पता नहीं है यह सब? और
11:38
Speaker A
इसके साथ ही नीचे लिखा था आई रिफ्यूज टू बिलीव दैट। फिर मई 2025 में द केन जो एक इन्वेस्टिगेटिव मीडिया प्लेटफार्म है एक डिटेल्ड आर्टिकल पब्लिश करता है जिसका टाइटल था डार्क पैटर्न्स शैडो यू पीआई ऑटो पेस एसेंट आर्टिकल में लिखा था कि कैसे
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Speaker A
सीखो जैसे प्लेटफॉर्म्स एक से ₹2 के ट्रायल के नाम पे ऑटो पे एक्टिवेट करते हैं। लेकिन यूज़र्स को क्लियरली नहीं बताते कि सब्सक्रिप्शन ऑटोमेटिकली रिन्यू हो जाएगा और ₹149 से ₹699 पर मंथ कटेंगे। और सबसे बड़ी बात कैंसिलेशन का प्रोसेस इतना
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Speaker A
मुश्किल बना देते हैं कि लोग हार मान लेते हैं। जून 2025 तक गवर्नमेंट एजेंसीज को भी कंप्लेंट्स आने लगती हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया आरबीआई के पास एक सीक्रेट लेटर आता है जिसमें लिखा था डिजिटल प्लेटफॉर्म्स सब्सक्रिप्शन ट्रैप्स यूज कर रहे हैं।
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Speaker A
ट्रायल ऑफर देते हैं लेकिन ऑटो डेबिट चालू कर देते हैं विदाउट क्लियर कंसेंट। यूज़र्स को पता ही नहीं चलता। सितेंंबर 2025 तक YouTube पर एक और वीडियो वायरल हो जाता है। सीखो ऐप इज द बिगेस्ट स्कैम ऑफ 2025।
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Speaker A
वीडियो में वह होटल के स्टाफ वाला इंसिडेंट दिखाया जाता है। स्टाफ का अकाउंट ₹1200 सिर्फ एक महीने में। कमेंट सेक्शन में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। मेरे साथ भी हुआ। स्कैम है। अनइंस्टॉल करो। गवर्नमेंट को एक्शन लेना चाहिए। लेकिन दोस्तों यहां
13:06
Speaker A
एक ट्विस्ट है। सीखो ऐप बंद नहीं हुई। कोई अरेस्ट नहीं हुआ। कोई लीगल केस नहीं बना। कंपनी चालू रही। एक्चुअली इसका उल्टा हुआ। जिस सितंबर में YouTube पे बिगेस्ट स्कैम वीडियो वायरल हुआ, उसी महीने सीखो ने 28 मिलियन इन्वेस्ट किए। तो स्कैम है या
13:26
Speaker A
नहीं? यह डिसीजन मैं आपके ऊपर छोड़ता हूं। लेकिन आज 2026 में सीखो का क्या हाल है?
13:34
Speaker A
160 मिलियन डाउनलोड्स। Google Play Store पे नंबर दो एजुकेशन ऐप और इसके साथ ही 4.62 रेटिंग वि 13 लाख रिव्यूज। हर दिन 1.2 लाख नए लोग डाउनलोड कर रहे हैं। ₹600 करोड़ से ज्यादा रेवेन्यू का टारगेट फाइनल ईयर 2026
13:54
Speaker A
के लिए। रोहित, कीर्ति और यश अभी भी एक्टिवली कंपनी चला रहे हैं। बेंगलुरु ऑफिस 64 एंप्लाइजस के साथ। इन्वेस्टर्स खुश हैं। लीगली सीखो एक जेन्युइन कंपनी है। रजिस्टर्ड है। टैक्स पे करती है। रूल्स फॉलो करती है। तो फिर स्कैम कैसे
14:11
Speaker A
हुई? यही तो सबसे इंटरेस्टिंग बात है इस कहानी की। सीखो स्कैम नहीं है। लेकिन एथिकल है? यह सवाल अभी भी है। देखिए टेक्निकली सीखो ने कुछ इललीगल नहीं किया। टर्म्स एंड कंडीशंस में सब कुछ लिखा है। ऑटो पे की इंफॉर्मेशन दी गई है। कैंसिलेशन
14:29
Speaker A
ऑप्शन है। लेकिन प्रॉब्लम क्या है? प्रॉब्लम यह है कि जिस तरीके से यह सब प्रेजेंट किया जाता है, वो डिजाइन किया जाता है लोगों को कंफ्यूज करने के लिए। इसको कहते हैं डार्क पैटर्न्स। मतलब ऐप का डिजाइन और फ्लो ऐसे बनाया जाता है कि यूजर
14:45
Speaker A
गलती से यह समझ नहीं पाए कि किस वजह से पैसे कट गए। एग्जांपल ₹1 ट्रायल बहुत बड़ा दिखता है। लेकिन ऑटो पे रिन्यूल की इंफॉर्मेशन बहुत छोटा कैंसिल बटन चार से पांच स्टेप्स के अंदर छुपा हुआ है। अनइंस्टॉल करने से सब्सक्रिप्शन कैंसिल
15:02
Speaker A
नहीं होता यह क्लियरली नहीं बताया जाता। और सबसे बड़ी बात यह टारगेट किसको कर रहे हैं? टिए टू और टिएर 3 सिटीज के लोग। मतलब मिडिल क्लास फैमिलीज को। और वह लोग जिनको डिजिटल चीजों का इतना ज्यादा नॉलेज नहीं
15:16
Speaker A
है, जिन्हें मंथली सब्सक्रिप्शन समझ नहीं आता, जिन्हें यूपीआई ऑटो पे का पता नहीं, जिन्हें लगता है ऐप डिलीट कर दिया तो पेमेंट भी रुक जाएगी। एक यूजर ने Google Play Store पर सीखो ऐप के रिव्यू में लिखा, "मुझे अंग्रेजी नहीं आती, टर्म्स
15:31
Speaker A
पढ़ नहीं पाया। अब पैसे कट रहे हैं। हेल्प करो। और सीखो का ऑफिशियल रिस्पांस आया जो प्ले स्टोर पर है। वी डोंट एंगेज इन एनी अन ऑथराइज्ड बिलिंग। यूज़र्स कैन कैंसिल एनी टाइम फ्रॉम ऐप सेटिंग्स। मतलब हम बिना
15:46
Speaker A
परमिशन के किसी का पैसा नहीं काटते। यूजर कभी भी ऐप सेटिंग से कैंसिल कर सकता है। टेक्निकली सही है। लेकिन प्रैक्टिकली नवंबर 2023 में इंडिया की डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स ने डार्क पैटर्न्स को बैन किया। 13 टाइप्स डिफाइन किए जिसमें
16:03
Speaker A
सब्सक्रिप्शन ट्रैप्स भी शामिल था। 2026 में आरबीआई ने भी ड्राफ्ट गाइडलाइंस निकाले। यूपीआई एप्स में मिसलीडिंग डिजाइन अलाउड नहीं है। लेकिन एक्शन क्या हुआ? कुछ नहीं। क्योंकि लीगली सब कुछ कंप्लेंट है। लेकिन लूप होल अभी भी है। तो यह कहानी
16:21
Speaker A
सिर्फ सीखो की नहीं है। यह कहानी है इंडिया की डिजिटल इकॉनमी की। जहां एक सुविधा भी हथियार बन सकती है। यह कहानी है यूपीआई ऑटो पे की जो इतना इजी है एक्टिवेट करना लेकिन इतना मुश्किल है कैंसिल करना।
16:37
Speaker A
यह कहानी है उस मिडिल क्लास इंडियन की जो ₹1 देखता है और लालच में आ जाता है। लेकिन फाइन प्रिंट नहीं पड़ता और सबसे बड़ी बात यह कहानी है इन्वेस्टर्स की भी। लाइट स्पीड, बेसिमर, एलिवेशन कैपिटल। दुनिया की
16:52
Speaker A
टॉप वीसी फर्म्स $42 मिलियन इन्वेस्ट किए सीखो में। क्या उन्हें पता नहीं था डार्क पैटर्न्स के बारे में? क्या उन्हें यूजर कंप्लेंट्स नहीं दिखे? या उन्होंने जानबूझकर इग्नोर किया। क्योंकि बिजनेस मॉडल तो काम कर रहा था। रेवेन्यू आ रहा
17:08
Speaker A
था। ग्रोथ हो रहा था। एक ग्रेप वाइन यूजर ने सही कहा था। आई रिफ्यूज टू बिलीव कि यह इन्वेस्टर्स नहीं जानते। तो सच क्या है?
17:17
Speaker A
सच यह है कि सीखो लीगली स्कैम नहीं है लेकिन एथिकली ग्रे जोन में है। सच यह है कि ऐप यूज़फुल है। बहुत लोग जेनुइनली सीख रहे हैं उस पे गिटार बजाना, इंग्लिश बोलना, एक्सेल चलाना। लेकिन सच यह भी है
17:33
Speaker A
कि हजारों लोगों के ₹199 हर महीने कट रहे हैं। जिन्हें पता भी नहीं। सच यह है कि ₹600 करोड़ का बिजनेस खड़ा हुआ है। लेकिन नीव में क्रैक्स हैं। और सबसे बड़ा सच सिस्टम को बदलना पड़ेगा। क्योंकि अगर एक सीखो आज चल रही है तो कल
17:52
Speaker A
10 और सीखो आ जाएंगे। जब तक यूपीआई ऑटो पे में ट्रांसपेरेंसी नहीं आएगी। जब तक कैंसिलेशन वन क्लिक नहीं होगा। जब तक डिजिटल लिटरेसी नहीं बढ़ेगी तब तक यह खेल चलता रहेगा। ₹1 का ट्रायल, ₹199 की मंथली ट्रैप और ₹600 करोड़ का एंपायर। दोस्तों,
18:13
Speaker A
अगर यह वीडियो पसंद आया हो तो एक लाइक जरूर करो। चैनल को सब्सक्राइब करो ताकि ऐसी फाइनेंशियल स्टोरीज आप तक पहुंचती रहे और वीडियो को हाइप करो ताकि यह वीडियो उन सब लोगों तक जल्द से जल्द पहुंच पाए जो इस
18:25
Speaker A
स्कैम के शिकार हैं। हम हर हफ्ते नई कहानी लाते हैं जो तुम्हारी लाइफ में वैल्यू ऐड करें। और कमेंट पर बताओ तुम्हारे साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि कोई सब्सक्रिप्शन भूल गए थे कैंसिल करना? तब तक के लिए अपना
18:39
Speaker A
यूपीआई ऑटो पे जरूर चेक कर लो। पता नहीं कौन सा ट्रायल अभी भी एक्टिव हो।
Topics:सीखो ऐपएडटेक स्कैमसब्सक्रिप्शन मॉडल₹1 ट्रायलऑटोमेटिक पेमेंटIIT कानपुरवेंचर कैपिटलएडटेक इंडस्ट्रीयूजर शिकायतेंफंडिंग

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