कोहिनूर हीरे की रहस्यमयी और विवादित कहानी, जो अभिशापित मानी जाती है और सदियों से खून-खराबे का कारण बनी।
Key Takeaways
- कोहिनूर हीरा केवल एक कीमती रत्न नहीं, बल्कि इतिहास में कई राजनैतिक और सामाजिक घटनाओं का केंद्र रहा।
- इस हीरे के साथ जुड़ी कथाएं इसे एक अभिशापित वस्तु के रूप में प्रस्तुत करती हैं।
- कोहिनूर का सफर भारत से लेकर ईरान और अंततः ब्रिटेन तक फैला है।
- इतिहास में इस हीरे ने कई शासकों के पतन और संघर्षों को जन्म दिया।
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- कोहिनूर हीरा एक अभिशापित हीरा माना जाता है जिसने कई शासकों की तबाही का कारण बना।
- यह हीरा लगभग 5000 साल पुराना है और हिंदू धर्म ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है।
- कोहिनूर का पहला पक्का इतिहास 1300 के दशक में आंध्र प्रदेश की गोलकोंडा खदान से शुरू होता है।
- यह हीरा कई राजाओं और साम्राज्यों के बीच संघर्ष और धोखे का कारण बना।
- मुगल बादशाहों ने इसे अपने खजाने में रखा और शाहजहां ने इसे अपने पीकॉक थ्रोन में जड़वाया।
- नादिर शाह ने इसे दिल्ली से लूट कर ईरान ले जाया, लेकिन उसकी भी हत्या हो गई।
- कोहिनूर का नाम फारसी शब्दों 'कुह' (पहाड़) और 'नूर' (रोशनी) से बना है, जिसका अर्थ है 'रोशनी का पहाड़'।
- यह हीरा आज लंदन के टावर ऑफ लंदन में सुरक्षित रखा गया है और लाखों लोग इसे देखने आते हैं।
- हीरे के पीछे की कहानी खून, धोखे और अभिशाप की है, जो इसे दुनिया के सबसे विवादित हीरों में से एक बनाती है।
Chapters
- 00:00कोहिनूर हीरे की अभिशापित कथा
- 00:51लंदन टावर में कोहिनूर का संरक्षण
- 02:36कोहिनूर का प्राचीन इतिहास और हिंदू धर्म में उल्लेख
- 03:52गोलकोंडा खदान से कोहिनूर का उद्भव
- 04:59अलाउद्दीन खिलजी और कोहिनूर का दिल्ली पहुंचना
- 06:18मुगल बादशाहों के खजाने में कोहिनूर
- 09:26नादिर शाह का भारत पर आक्रमण और कोहिनूर का ईरान जाना
- 11:55नादिर शाह की हत्या और कोहिनूर का आगे का सफर
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Speaker A
एक ऐसा हीरा जिसके बारे में कहा जाता है कि वह अभिशापित था। जिसके भी पास वह गया, वो बर्बाद हो गया। किसी का साम्राज्य मिट गया। किसी की हत्या कर दी गई। किसी ने अपना सिंहासन खो दिया। तो किसी ने
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अपना पूरा जीवन सदियों तक लोग उसकी चमक के पीछे भागते रहे। लेकिन बदले में उन्हें मिली सिर्फ
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तबाही। क्या यह महज एक संयोग था या सच में यह हीरा अभिशापित था?
Speaker A
आज की कहानी है दुनिया की सबसे रहस्यमई और सबसे विवादित हीरे कोहिनूर
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की लंदन टावर ऑफ लंदन। दुनिया की सबसे मशहूर और सबसे सुरक्षित इमारतों में से एक। यहां एक कमरे में शीशे के एक बक्से में रखा है
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वो हीरा। 105.6
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कैरेट्स। दुनिया के सबसे बड़े और सबसे मशहूर हीरों में से एक। इसे देखने हर साल लाखों लोग आते हैं। टूरिस्ट इसकी
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चमक देखते हैं, तस्वीरें लेते हैं और चले जाते हैं। लेकिन इस चमक के पीछे एक ऐसी
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कहानी
Speaker A
है जिसे बहुत कम लोग जानते हैं। खून की कहानी, धोखे की कहानी और एक ऐसे अभिशाप की कहानी जिसने हर उस मर्द को तबाह किया जिसने इस हीरे को पहना।
Speaker A
और यह हीरा असल में है भारत का। शुरुआत
Speaker A
करते हैं शुरुआत से। आज से करीब 5000 साल पहले कहा जाता है कि कोहिनूर का जिक्र सबसे पहले हिंदू धर्म ग्रंथों में मिलता है। कुछ इतिहासकार
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मानते हैं कि यह वही हीरा है जिसका जिक्र महाभारत में संतक मणि के नाम से है। लेकिन इतिहास में
Speaker A
इसका पहला पक्का जिक्र मिलता है 1300 के
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दशक में। आंध्र प्रदेश की गोलकोंडा माइंस। दुनिया की सबसे अमीर हीरे की खदानें। यहीं से निकला कोहिनूर। उस वक्त इसका वजन था 793
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कैरेट्स। इतना बड़ा, इतना चमकदार, इतना
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दुर्लभ कि जिसने भी
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देखा बस देखता रह गया। और यहीं से शुरू हुआ वो सिलसिला खून का, तबाही का, अभिशाप का। गोलकुंडा के राजाओं के पास यह हीरा था।
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उन्होंने इसे अपनी देवी की मूर्ति की आंख
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में जड़ा हुआ था। भगवान की आंख, भगवान की रोशनी। लेकिन 1323 में अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति मलिक काफूर
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ने दक्षिण भारत पर हमला किया। देवी की आंख से वह रोशनी छीन ली गई और वो हीरा दिल्ली पहुंच
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गया। यहीं से शुरू हुआ कोहिनूर का वो सफर जो सदियों तक चला खून से, धोखे से और तबाही से। 1526 में
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दिल्ली सल्तनत से मोहल एंपायर बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराया। पानीपत
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की पहली लड़ाई और
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कोहिनूर जो दिल्ली के खजाने में था बाबर
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के हाथ लग गया। बाबर ने इस हीरे की कीमत आंकी। उसने लिखा अपनी ऑटोबायोग्राफी बाबरनामा
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में। यह हीरा इतना कीमती है कि इससे पूरी दुनिया को ढाई दिन खाना खिलाया जा सकता है। बाबर
Speaker A
ने इसे
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बाबर का हीरा कहा। लेकिन बाद में इसका नाम पड़ा कुहिनूर। फारसी में कुह मतलब पहाड़। नूर मतलब
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रोशनी। रोशनी का पहाड़। लेकिन यह रोशनी जिसके
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पास भी गई उसकी जिंदगी में अंधेरा ले आई। कोहिनूर मुगल एंपायर में बाबर से
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हुमायूं,
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हुमायूं से अकबर, अकबर से जहांगीर, जहांगीर से शाहजहां, शाहजहां
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जिसने ताजमहल बनवाया, उसने कोहिनूर को अपने मशहूर पीकॉक थ्रोन में जड़वाया। वो थ्रोन इतना शानदार था कि देखने वाले दंग रह जाते थे। सोने का जवाहरातों से भरा हुआ
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और उसके बीच
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में चमकता था कोहिनूर। लेकिन अभिशाप यहां भी पीछा नहीं छोड़ रहा था। शाहजहां
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को उसके अपने बेटे औरंगजेब ने कैद कर लिया और उसी कैद में आगरे के किले में शाहजहां की मौत हुई। कोहिनूर की चमक ने एक बार फिर अपना
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काम किया। 1739 ईरान के नादिर शाह ने भारत पर हमला किया। उसने दिल्ली को लूटा और कोहिनूर ईरान ले गया। लेकिन कहानी यह है कि नादिर शाह को कोहिनूर मिला नहीं था आसानी से। मुगल एंपायर मोहम्मद शाह ने हीरा छुपा लिया था अपनी
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पगड़ी में। नादिर शाह चालाक था। उसने एक पुरानी मुगल ट्रेडिशन का इस्तेमाल
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किया। उसने मोहम्मद शाह को दावत दी और दावत में एक पुरानी रस्म के तहत पगड़ियां बदलने का प्रस्ताव रखा। मोहम्मद शाह मना नहीं कर सका। पगड़ी बदली और कोहिनूर नादिर
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शाह के हाथ में। जब नादिर शाह ने पगड़ी खोली और कोहिनूर देखा उसके मुंह से निकला कोहनूर
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रोशनी का पहाड़ और इसी दिन से इस हीरे का नाम पड़ गया कोहिनूर। लेकिन नादिर शाह का अंत भी बुरा हुआ। 1747
Speaker A
में उसकी हत्या
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कर दी गई। उसके अपने ही सेनापतियों ने उसकी जान ले ली। कोहिनूर के अभिशाप ने एक और शिकार ले लिया। नादिर शाह की मौत के बाद कोहिनूर उसके जनरल अहमद शाह दुर्रानी के हाथ लगा।
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अहमद शाह
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