भारत का सबसे बड़ा जैन हवाला स्कैम जिसमें बीजेपी, कांग्रेस समेत कई पार्टियां फंसीं, और एक बिजनेसमैन ने राजनीति को झकझोर दिया।
Key Takeaways
- हवाला सिस्टम का इस्तेमाल राजनीतिक भ्रष्टाचार और ब्लैक मनी के लिए किया जाता है।
- राजनीतिक दबाव और बड़े घटनाक्रमों के कारण जांच अधूरी रह गई।
- एक सच्चा पत्रकार सिस्टम की कमियों को उजागर कर सकता है।
- भ्रष्टाचार के खिलाफ कानूनी और संस्थागत सुधार आवश्यक हैं।
- यह स्कैम भारत के राजनीतिक इतिहास में एक बड़ा पॉलिटिकल अर्थक्वेक था।
What the video covers
- 1991 में दिल्ली के एक फार्म हाउस पर सीबीआई ने जैन ब्रदर्स के हवाला नेटवर्क का भंडाफोड़ किया।
- एस के जैन नामक बिजनेसमैन ने हवाला के जरिए 115 से अधिक नेताओं और अधिकारियों को करोड़ों रुपये की रिश्वत दी।
- हवाला सिस्टम का इस्तेमाल ब्लैक मनी ट्रांसफर और आतंकवादी समूहों को फंडिंग के लिए किया गया।
- सीबीआई ने दो डायरी बरामद कीं जिनमें कोड नाम और करोड़ों रुपये के लेनदेन दर्ज थे।
- राजीव गांधी की हत्या और अन्य बड़े घटनाक्रमों के कारण जांच रुकी और फाइलें गायब कर दी गईं।
- जर्नलिस्ट विनीत नारायण ने इस केस को सुप्रीम कोर्ट में उठाकर जांच को पुनः सक्रिय किया।
- इस स्कैम ने भारतीय राजनीति और सिस्टम की भ्रष्टाचार की गहराई को उजागर किया।
- अंत में सभी आरोपी बरी कर दिए गए, लेकिन इस केस ने सीबीसी की स्थापना में मदद की।
- यह कहानी भ्रष्टाचार, राजनीतिक गठजोड़ और न्याय व्यवस्था की कमजोरियों को दर्शाती है।
- वीडियो में 2D एनीमेशन के माध्यम से इस जटिल स्कैम की पूरी कहानी सरल भाषा में बताई गई है।
Chapters
- 00:00सीबीआई की रेड और फार्म हाउस की खोज
- 01:06डायरीज और राजनीतिक दलों के नाम
- 02:13लाइसेंस राज और एस के जैन का सफर
- 03:18हवाला सिस्टम की व्याख्या
- 05:22एस के जैन की डायरी और हवाला नेटवर्क
- 06:37पार्टीज, रिश्वत और आतंकवादी फंडिंग
- 07:42अशफाक हुसैन लोन की गिरफ्तारी और खुलासे
- 09:02सीबीआई की रेड और डायरीज का महत्व
- 10:08राजीव गांधी हत्या और जांच का ठहराव
- 11:14विनीत नारायण की जर्नलिस्टिक लड़ाई और सुप्रीम कोर्ट
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Speaker A
3 मई 1991 दिल्ली, सीबीआई के ऑफिसर्स एक फार्म हाउस के गेट पर खड़े हैं। साउथ दिल्ली का एक बहुत बड़ा फार्म हाउस।
Speaker A
अंदर जाते ही उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं। बहुत सारा कैश, फॉरेन करेंसी के बंडल्स और
Speaker A
सबसे इंपॉर्टेंट दो छोटी सी डायरीज। इन डायरीज में लिखे थे नाम, कोड और उनके नाम के सामने करोड़ों के अंक। 65 करोड़ से ज्यादा का खेल था यह। 115 से ज्यादा नेता और ऑफिसर्स का नाम था उस डायरी में।
Speaker A
बीजेपी हो, कांग्रेस हो, जनता दल हो, सबका नाम था। लेकिन किसी को नहीं पता था कि यह रेड अगले 6 सालों तक इंडिया की राजनीति को हिला देने वाली है। किसी को नहीं पता था कि यह डायरीज इतनी खतरनाक हैं, कि उन्हें
Speaker A
छुपाने के लिए ऑफिसर्स को ट्रांसफर कर दिया जाएगा। फाइल्स गायब कर दी जाएंगी, इन्वेस्टिगेशन बंद करवा दी जाएगी। और सबसे बड़ी बात, जिस आदमी के पास यह डायरीज थीं, वह कोई बड़ा नेता नहीं था। वो एक बिजनेसमैन था। भिलाई से आया हुआ। एक सिंपल
Speaker A
सा आदमी जिसने इंडिया की सबसे बड़ी पॉलिटिकल पार्टीज को अपनी पॉकेट में रख लिया था। यह है जैन हवाला स्कैम की कहानी। एक ऐसे स्कैम की कहानी जिसमें कोई भी जेल नहीं गया। लेकिन पूरा इंडिया बदल गया। इस
Speaker A
कहानी की शुरुआत होती है 1980 के एंड से। भिलाई, छत्तीसगढ़, चार भाई थे। फैमिली बिजनेस था। इंजीनियरिंग का काम था। फैक्ट्री थी उनकी। नाम था भिलाई इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन। ठीक-ठाक जिंदगी चल रही थी। सबसे छोटा भाई था सुरेंद्र कुमार
Speaker A
जैन। सब उसे एस के जैन कहते थे। एस के जैन एक सपना देखता था। बड़ा सपना। वो बनना चाहता था इंडिया का अगला धीरूभाई [संगीत] अंबानी। छोटा बिजनेस नहीं, एंपायर बनाना चाहता था। लेकिन उस टाइम इंडिया में बिजनेस करना बहुत मुश्किल था। क्यों?
Speaker A
क्योंकि उस टाइम एक सिस्टम था जिसे कहते थे लाइसेंस राज। लाइसेंस राज मतलब यह अगर तुम्हें कोई भी बड़ा बिजनेस करना है तो तुम्हें गवर्नमेंट से लाइसेंस चाहिए, अप्रूवल चाहिए, परमिशन चाहिए, हर छोटी चीज के लिए। और यह लाइसेंस मिलता कैसे था?
Speaker A
सिर्फ एक ही तरीके से, नेता और ऑफिसर्स को खुश रखना पड़ता था। उन्हें गिफ्ट्स देना पड़ता था। रिश्वत देनी पड़ती थी। बिना कनेक्शन के कोई लाइसेंस नहीं। बिना लाइसेंस के कोई बिजनेस नहीं। एस के जैन ने यह बात समझ ली। उसने सोचा अगर मुझे बड़ा
Speaker A
बनाना है तो मुझे दिल्ली जाना होगा। वहां पॉलिटिशियंस के पास जाना होगा। उनका दोस्त बनना होगा और यही किया उसने। चार भाइयों में से दो भाई दिल्ली भेज दिए गए। काम था सिर्फ एक फैमिली के पॉलिटिकल इंटरेस्ट्स को संभालना। मतलब सिंपल पॉलिटिशियंस को
Speaker A
मैनेज करना। एस के जैन दिल्ली पहुंचा। उसने साउथ दिल्ली में एक बड़ा फार्म हाउस ले लिया। पार्टी शुरू की। पॉलिटिशियंस को बुलाना शुरू किया। धीरे-धीरे वो दिल्ली के पावरफुल लोगों के बीच फेमस होने लगा। पहले छोटे कॉन्ट्रैक्ट्स मिले। फिर बड़े। कोयल
Speaker A
इंडिया जैसे बड़े गवर्नमेंट कंपनी से ऑर्डर्स आने लगे। एस के जैन खुश था। बिजनेस बढ़ रहा था। पैसा आ रहा था। लेकिन उसने देखा कि पॉलिटिशियंस हमेशा ज्यादा मांगते हैं। छुपी पेमेंट्स [संगीत] मांगते हैं, ब्लैक मनी मांगते हैं। और यही वो पल
Speaker A
था जब एस के जैन ने वो रास्ता देखा जो किसी और ने नहीं देखा था। एक दिन एस के जैन को पता चला एक सिस्टम के बारे में। नाम था हवाला। अब यह हवाला होता क्या है?
Speaker A
बहुत सिंपल है। समझो ऐसे। मान लो तुम्हारे पास ₹1 लाख हैं। तुम्हें यह पैसा मुंबई में अपने दोस्त को देना है। लेकिन तुम नहीं चाहते कि बैंक में रिकॉर्ड हो। तुम्हें छुपा के देना है। तो तुम क्या करोगे? तुम्हारे शहर में एक अंकल ए रहता
Speaker A
है। तुम उसे ₹1 लाख कैश दोगे। अंकल ए अपने दोस्त अंकल बी को फोन करेगा जो मुंबई में है। अंकल बी तुम्हारे दोस्त को ₹1 लाख कैश दे देगा। बस खत्म। कोई बैंक नहीं, कोई चेक नहीं, कोई रिकॉर्ड नहीं। सिर्फ भरोसा।
Speaker A
अंकल ए और अंकल बी बाद में अपने ट्रांजैक्श सेटल कर लेंगे किसी और तरीके से। यही है हवाला। पैसा मूव नहीं होता। सिर्फ इंफॉर्मेशन मूव होती है। अब यह सिस्टम इललीगल क्यों है? दो रीजन हैं। पहला इसमें किसी का नाम नहीं होता। कोई नहीं
Speaker A
जानता कि किसने कितना पैसा दिया और किसने लिया। दूसरा यह इंडिया के फेरा लॉ को तोड़ता है। मतलब फॉरेन करेंसी को बिना बैंक के ट्रांसफर नहीं कर सकते। लेकिन एस के जैन ने सोचा अरे यही तो परफेक्ट है।
Speaker A
पॉलिटिशियंस को ब्लैक मनी देनी है। हवाला से देंगे। कोई रिकॉर्ड नहीं रहेगा। कोई पकड़ नहीं पाएगा और उसने यही किया। पहले छोटे टेस्ट किए। ₹1 लाख दिए, काम हो गया। फिर ₹50 लाख दिए। वह भी हो गया। एस के जैन
Speaker A
को विश्वास हो गया था यह फार्मूला परफेक्ट है। लेकिन एक बात थी जो उसे अलग बनाती थी दूसरे लोगों से। एस के जैन रिकॉर्ड्स रखता था। हर पेमेंट को वो एक डायरी में लिखता था। कोड नेम्स यूज करता था। इनिशियल्स
Speaker A
लिखता था, अमाउंट्स लिखता था। क्यों? क्योंकि अगर कभी किसी पॉलिटिशियन ने मुंह मोड़ा, तो वो उन्हें याद दिलवा सके कि कितना पैसा लिया है तुमने। यही डायरीज आगे चलकर उसकी सबसे बड़ी गलती बन गई। लेकिन उस वक्त उसे नहीं पता था। अभी तो उसने बस
Speaker A
शुरुआत की थी। अब शुरू हुआ असली खेल। फरवरी 1988 से मार्च 1991 तक। 3 साल, सिर्फ 3 साल। इन 3 सालों में एस के जैन और उसके भाई ने हवाला के थ्रू पॉलिटिशियंस को पेमेंट्स दी। टोटल ₹5 करोड़ से ज्यादा।
Speaker A
सोचिए ₹5 करोड़ उस टाइम। आज के हिसाब से यह हजारों करोड़ बनता है और कितने लोग थे?
Speaker A
115 से ज्यादा पॉलिटिशियंस और गवर्नमेंट ऑफिसर्स बीजेपी से, कांग्रेस से, जनता दल से, समाजवादी जनता पार्टी से, हर पार्टी से। एल के आडवाणी ₹68,50, माधवराव सिंधिया ₹75 लाख, आरिफ मोहम्मद खान 7 करोड़ 50 लाख। वीसी शुक्ला ₹65,8,000। लिस्ट बहुत लंबी थी। एस के जैन का फार्म
Speaker A
हाउस अब दिल्ली का सबसे फेमस जगह बन चुका था। हर हफ्ते पार्टीज होती थीं। पॉलिटिशियंस आते थे, बिजनेसमैन आते थे, शराब चलती थी, डील्स होती थीं। लोग कहने लगे थे जैन ब्रदर से दोस्ती हो तो कोई परेशानी नहीं। कॉन्ट्रैक्ट पक्का है और एस
Speaker A
के जैन वो खुश था। उसका सपना पूरा हो रहा था। वो बड़ा बन रहा था। पावरफुल बन रहा था। लेकिन एक और बात चल रही थी जो बहुत खतरनाक थी। एस के जैन सिर्फ पॉलिटिशियंस को ही पैसा नहीं दे रहा था। वो पैसा भेज
Speaker A
रहा था टेररिस्ट ग्रुप्स को भी। हिजबुल मुजाहदीन। कश्मीर में जो अटैक करते थे उन्हें फंडिंग मिल रही थी एस के जैन के हवाला नेटवर्क से। यह बात बहुत कम लोग जानते थे। एस के जैन छुपाया था इसे। लेकिन
Speaker A
अब यह राज बाहर आने वाला था। 25 मार्च 1991 दिल्ली में पुलिस ने एक आदमी को अरेस्ट किया। नाम था अशफाक हुसैन लोन। यह हिजबुल मुजाहदीन का आदमी था। पुलिस ने उससे सवाल किए। इंटेरोगेशन हुआ और वो टूट
Speaker A
गया। उसने बताया पैसा हवाला से आता है। एक नेटवर्क है, मिडिल मैन है, एजेंट्स हैं। एक नाम निकला शंभू दयाल शर्मा। यह एक हवाला एजेंट था। डिलीवरी मैन था। पुलिस ने शंभू दयाल शर्मा को भी पकड़ लिया। अब यह बंदा
Speaker A
सीधा साधा था। डर गया और पूरी लिस्ट दे दी। शंभू ने सीबीआई को 25 लोगों के नाम दिए जिन्हें उसने हवाला के पैसा डिलीवर किया था। एक नाम बहुत इंपॉर्टेंट था। 94 लाख डिलीवर किए थे एक दिल्ली के आदमी को।
Speaker A
जेके जैन। जेके जैन कौन था? वो एस के जैन का एंप्लई था। वह भी फैमिली का आदमी था। सीबीआई के ऑफिसर्स समझ गए यह कोई छोटा मामला नहीं है। 3 मई 1991 सीबीआई ने जे के जैन के साउथ दिल्ली फार्म हाउस पर रेड मार
Speaker A
दी। फार्म हाउस के अंदर घुसते ही सीबीआई ऑफिसर्स ने देखा बंडल्स ऑफ कैश, फॉरेन करेंसी, इंदिरा विकास पत्र और सबसे इंपॉर्टेंट दो डायरीज। सीबीआई के डीआईजी ओपी शर्मा खुद रेड पे गए थे। उन्होंने डायरीज उठाई, सिग्नेचर किए उनमें ताकि बाद में कोर्ट में प्रूफ हो सके कि
Speaker A
यह असली एविडेंस है। जब उन्होंने डायरीज खोले तो उन्हें यकीन नहीं हुआ। हर पेज पे इनिशियल्स लिखे थे। कोड नेम्स और सामने करोड़ में फिगर्स। ए 68 लाख, एमएस ₹75 लाख, एएमके 7.5 करोड़। ऐसी सैकड़ों एंट्रीज थीं। सीबीआई ने जेके जैन से पूछा यह क्या है?
Speaker A
जेके जैन ने जवाब दिया, मैं सिर्फ एंप्लई हूं। यह डायरीज मेरे मालिक के लिए मेंटेन करता हूं। जैन ब्रदर्स के लिए। सीबीआई को पता चल गया यह तो बहुत बड़ा स्कैम है। उन्होंने फाइल बनाई, इन्वेस्टिगेशन शुरू की। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
Speaker A
इस रेड के सिर्फ 19 दिन बाद, 22 मई 1991 को राजीव गांधी की हत्या हो गई। पूरे देश में हलचल मच गई। इलेक्शंस रुक गए। पॉलिटिक्स बदल गई। मीडिया का पूरा फोकस शिफ्ट हो गया और उसी बीच में जैन ब्रदर्स की डायरीज
Speaker A
वाली फाइल धीरे से एक तरफ रख दी गई। इन्वेस्टिगेशन रुक गई। सीबीआई को आर्डर आया। अभी इंपॉर्टेंट नहीं है यह। छोड़ो। डीआईजी ओपी शर्मा और उनकी टीम जिन्होंने रेड की थी, उनका ट्रांसफर कर दिया गया। दूसरी जगह भेज दिए गए। फाइल अलमारी में
Speaker A
बंद हो गई। डायरीज धूल खाने लगी। एस के जैन और उसके भाई सांस ली, उन्होंने बच गए थे। लेकिन यह कहानी यहां खत्म नहीं होती। 1992 आया। हर्षद मेहता स्कैम आया। ₹000 करोड़ का स्टॉक मार्केट स्कैम। पूरे देश
Speaker A
का ध्यान वहां चला गया। 1993 में बॉम्बे में बॉम्ब ब्लास्ट्स हुए और भी डिस्ट्रैक्शन। जैन ब्रदर्स की फाइल अब पूरी तरह से भुला दी गई थी। लेकिन एक आदमी था जो भुला नहीं। नाम था विनीत नारायण। विनीत नारायण एक जर्नलिस्ट था।
Speaker A
इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म करता था। बहुत ज्यादा पढ़ता था, बहुत ज्यादा खोजता था। 1993 में उसे पता चला जैन हवाला केस के बारे में। उसने रिसर्च किया, डॉक्यूमेंट्स इकट्ठे किए और फिर उसने कुछ ऐसा किया जो किसी ने सोचा नहीं था। उसने सुप्रीम कोर्ट
Speaker A
में एक पीआईएल फाइल कर दिया। पब्लिक इं...
Speaker A
को अरेस्ट कर लिया। पहले तो एस के जैन ने नकारा फिर उसने रियलाइज किया अब बच नहीं सकता। उसने 120 पेजेस की रिपोर्ट लिखी। पूरी कहानी बताई। सबका नाम लिया। कैसे हवाला काम करता था, कितना पैसा दिया, किस-किस को दिया, कैसे डिलीवर किया, कैसे
Speaker A
फॉरेन करेंसी कन्वर्ट की, सब कुछ लिख दिया। 1996 आया। और भाई, यह साल तो इंडिया की हिस्ट्री में गोल्डन लेटर्स में लिखा जाएगा। पहली बार इंडिया की हिस्ट्री में सिटी मिनिस्टरर्स, चीफ मिनिस्टर्स, गवर्नर्स और अपोजिशन लीडर्स सबको करप्शन
Speaker A
के लिए चार्जशीट की गई। पहली बार एल के आडवाणी जिनका नाम था उन्होंने कुछ ऐसा किया जो कोई नहीं करता। उन्होंने रिजाइन कर दिया। एमपी की सीट छोड़ दी। बाकी सब लड़ने लगे। गलत है, झूठ है, डायरीज फेक
Speaker A
हैं। सब भाग रहे थे। लेकिन आडवाणी ने कहा, "मैं दिल की सुन रहा हूं।" मैं जानता हूं मैंने क्या किया। मैं रिजाइन करता हूं। 2015 में जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा आई क्विट ओवर हवाला बिकॉज़ आई लिसन टू
Speaker A
माय इनर वॉइस। कांग्रेस के सात मिनिस्टर्स को रिजाइन करना पड़ा। जनता दल के प्रेसिडेंट को रिजाइन करना पड़ा। दिल्ली में हर रोज नए नाम लीक हो रहे थे। टीवी पर हर रोज ब्रेकिंग न्यूज़ आ रही थी। बीबीसी ने लिखा द बिगेस्ट पॉलिटिकल अर्थक्वेक टू
Speaker A
हैव हिट इंडिपेंडेंट इंडिया। पूरी पॉलिटिक्स हिल गई थी। लेकिन अभी ट्विस्ट बाकी था। कोर्ट में केसेस शुरू हुए। सीबीआई ने एविडेंस दिया, डायरीज दिखाई। एस के जैन की 120 पेज रिपोर्ट दिखाई। गवाह बुलाए। लेकिन डिफेंस लॉयर्स बहुत स्मार्ट
Speaker A
थे। उन्होंने कहा यह डायरीज क्या है? यह तो एस के जैन की पर्सनल नोटबुक है। यह तो उसने खुद लिखी है। इसमें कोई सिग्नेचर नहीं है जिनको पैसा मिला। कोई रिसीप्ट नहीं है। यह कोर्ट में एविडेंस कैसे बन
Speaker A
सकती है? कोर्ट ने सोचा। सच था। इंडियन एविडेंस एक्ट के हिसाब से सिर्फ डायरी एंट्री से किसी को गिल्टी नहीं ठहराया जा सकता। चाहिए सॉलिड प्रूफ, विटनेस चाहिए, रिसीट्स चाहिए। लेकिन हवाला में तो कोई रिसीट होती ही नहीं है। यही तो ब्यूटी है
Speaker A
हवाला की। गवाह वो भी डरे हुए थे। कोई कोर्ट में आकर बोलने को तैयार नहीं था। एक-एक करके गवाह पीछे हट गए। या फिर अपनी बात बदल दी और फिर 1997 से 98 में सबको एक्विट कर दिया गया। सब छूट गए। कोई जेल
Speaker A
नहीं गया। कोई सजा नहीं हुई। एस के जैन भी छूट गए। 2017 से 18 में फाइनली उसके अगेंस्ट भी [संगीत] सभी चार्जेस ड्रॉप कर दिए गए। यह सुन के लगता है ना सब बेकार गया। इतना बड़ा स्कैंडल और कोई पनिशमेंट
Speaker A
नहीं। लेकिन रुको। कहानी यहां खत्म नहीं होती। हां, कोई जेल नहीं गया लेकिन इंडिया बदल गया। कैसे? 18 दिसंबर 1997 को सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला सुनाया विनीत नरेंद्र वर्सेस यूनियन ऑफ इंडिया। यह एक लैंडमार्क जजमेंट बन गया। हिस्ट्री में याद रखा
Speaker A
जाएगा हमेशा। कोर्ट ने क्या कहा? कोर्ट ने कहा, सीबीआई को कोई पॉलिटिशियन कंट्रोल नहीं कर सकता। सीबीआई डायरेक्टर को फिक्स्ड टेन्योर मिलेगा। उसे बीच में हटा नहीं [संगीत] सकते। सीबीआई को अपना काम करने की पूरी आजादी होगी। कोर्ट ने
Speaker A
सेंट्रल विजिलेंस कमीशन सीबीसी को स्टचटरी बॉडी बना दिया। मतलब अब यह एक ऑफिशियल गवर्नमेंट बॉडी बन गई जो सीबीआई को मॉनिटर करेगी। 2003 में सीबीसी एक्ट बना। आज जो सीबीसी है वो डायरेक्ट [संगीत] इस केस का रिजल्ट है और पीआईएल पब्लिक इंटरेस्ट
Speaker A
लिटिगेशन इस केस के बाद पीआईएल की पावर बढ़ गई। आज कोई भी कॉमन सिटीजन कोर्ट जा सकता है अगर उसे लगता है कि कोई गलत हो रहा है। पॉलिटिकल फंडिंग पर भी डिबेट शुरू हुई। इलेक्ट्रोरल बॉन्ड्स पे सवाल उठने
Speaker A
लगे। आगे चलके 2G स्कैम हुआ, कोल स्कैम हुआ। उन सब केसेस में जैन हवाला केस की लीगल रीजनिंग यूज हुई। हां, इस केस में नुकसान उठाने वाले लोग थे। सबसे ज्यादा नुकसान किसका हुआ? सीबीआई के वो ऑफिसर्स जो इन्वेस्टिगेशन कर रहे थे। डीआईजीओपी
Speaker A
शर्मा और उनकी टीम जिन्हें ट्रांसफर कर दिया गया जिनकी मेहनत को दबा दिया गया। लोकतंत्र खुद नुकसान में था। सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता का हुआ। जिन्हें ईमानदार नेता मिलने चाहिए थे। लेकिन उनकी जगह भ्रष्ट नेता सत्ता तक पहुंच गए। लेकिन
Speaker A
सबसे बड़ी चीज यह थी इंडिया के लोग समझ गए कि सिस्टम करप्ट हो सकता है। पॉलिटिशियंस बिकाऊ हो सकते हैं। लेकिन अगर एक जर्नलिस्ट विनीत नरेंद्र अगर वो लड़ाई लड़े अगर वो हार ना माने तो सिस्टम बदल सकता है। कोर्ट ने पॉलिटिशियंस को मैसेज
Speaker A
दे दिया। अब तुम एजेंसीज को दबा नहीं सकते। सीबीआई को उस टाइम केज्ड पैरेट बुलाते थे। पिंजरे का तोता जो कुछ नहीं कर सकता। लेकिन इस केस के बाद [चीखने की आवाज़] धीरे-धीरे पैरेट को थोड़ी आजादी मिली। पूरा नहीं लेकिन शुरुआत
Speaker A
हुई। पॉलिटिकल सीन बिल्कुल तबाह हो गया था। 1996 से 2000 तक सिर्फ 4 साल में तीन जनरल इलेक्शंस हुए। पांच बार प्राइम मिनिस्टर की शपथ ली गई। पांच अलग पीएम गवर्नमेंट चल नहीं रही थी, लड़ रही थी। कोई पार्टी स्टेबल नहीं थी क्योंकि सबके
Speaker A
हाथ गंदे थे। यह कहानी सिर्फ एक स्कैम की नहीं थी। यह कहानी थी उस सिस्टम की जो सालों से चल रहा था जिसमें बिजनेस करने के लिए पैसा देना पड़ता था। पॉलिटिशियंस को खरीदा जाता था और सब चुप रहते थे। यह
Speaker A
कहानी थी एक जर्नलिस्ट की विनीत नारायण जिसने अकेले लड़के पूरी सिस्टम को चैलेंज किया। यह कहानी थी उन डायरीज की जो धूल खाने के लिए बनी थी। लेकिन उन्होंने पूरी दिल्ली को हिला दिया। और यह कहानी है उस
Speaker A
सुप्रीम कोर्ट की जो खड़ी हुई जिसने कहा नहीं अब बस अब कोई ऊपर नहीं है कानून से। आज भी जब सीबीआई अपना काम करता है इंडिपेंडेंट तरीके से तो उसमें कहीं ना कहीं इस केस का हाथ है। आज भी जब कोई कॉमन
Speaker A
आदमी पीआईएल फाइल करता है तो वह विनीत नारायण की दी हुई लड़ाई का रिजल्ट है। एस के जैन नहीं गया जेल। एल के आडवाणी दोबारा एमपी बन गए। सभी पॉलिटिशियंस एक्विट हो गए। लेकिन इंडिया की जुडिशरी ने उस दिन
Speaker A
डिसाइड कर लिया। हम पॉलिटिशियंस के नीचे नहीं है। यह सीख मिलती है इस कहानी [संगीत] से। कभी-कभी जीतना सिर्फ जेल भेजने में नहीं होता। जितना सिस्टम को बदलने में होता है और साउथ दिल्ली का वह फार्म हाउस जहां पार्टीज होती थी, जहां
Speaker A
करोड़ के डील्स होते थे, वह आज भी खड़ा है। शायद वहां अब कोई और रहता है। शायद वहां अब कोई पार्टीज नहीं होती। लेकिन अगर वहां की दीवारों को आवाज होती, तो शायद वो आज भी कहानियां सुनाती। उन डायरीज की, जिन
Speaker A
इनिशियल्स की और उन करोड़ की जो इंडिया की पॉलिटिक्स बदल के रख दिया। दोस्तों, अगर यह वीडियो पसंद आया हो, तो एक लाइक जरूर करो। वीडियो को हाइप करो, चैनल को सब्सक्राइब करो ताकि ऐसे फाइनेंशियल और पॉलिटिकल स्टोरीज आप तक पहुंचती रहे।
Speaker A
कमेंट्स में बताओ क्या तुम्हें लगता है कि आज भी हवाला चलता है? क्या आज भी पॉलिटिशियंस पैसा लेते हैं? हम हर हफ्ते नई कहानी लाते हैं इंडिया के स्कैम्स, बिजनेसेस और पैसा की दुनिया से। तब तक के लिए अपना पैसा संभाल के रखना।
Topics:हवाला स्कैमजैन ब्रदर्सभारतीय राजनीतिभ्रष्टाचारबीजेपीकांग्रेसजनता दलसीबीआई जांचब्लैक मनीविनीत नारायण











