Skip to content

Patanjali in Trouble? The Rise and Fall of Baba Ramdev’s Empire | 2D Animation

पतंजलि की तेज़ उभरती कहानी, चुनौतियाँ और बदलाव, बाबा रामदेव के नेतृत्व में FMCG इंडस्ट्री में उनका उतार-चढ़ाव।

Key Takeaways

  • पतंजलि ने योग और आयुर्वेद के भरोसे FMCG मार्केट में क्रांति लाई।
  • स्वदेशी भावना ने ब्रांड को भारतीय उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय बनाया।
  • प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता नियंत्रण की चुनौतियों ने ग्रोथ को प्रभावित किया।
  • ब्रांड की विश्वसनीयता पर विवादों का असर पड़ा लेकिन कंपनी ने पुनः उभरने की कोशिश की।
  • व्यापार विस्तार और रणनीतिक फैसलों से पतंजलि ने नए सेक्टर्स में कदम रखा।

What the video covers

  • पतंजलि ने 2014-15 में FMCG इंडस्ट्री में तेज़ी से उभरकर कोलगेट, HUL जैसी कंपनियों को टक्कर दी।
  • रामदेव और बालकृष्ण ने योग और आयुर्वेद के भरोसे पतंजलि को एक बड़ा ब्रांड बनाया।
  • पतंजलि ने स्वदेशी भावना और आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स के ज़रिए करोड़ों भारतीयों का भरोसा जीता।
  • 2017 तक पतंजलि भारत की तीसरी सबसे बड़ी FMCG कंपनी बन गई थी।
  • प्रतिद्वंद्वियों ने आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स को अपनाकर पतंजलि की ग्रोथ को चुनौती दी।
  • 2018 के बाद पतंजलि की ग्रोथ धीमी पड़ गई और शहरों में बिक्री में गिरावट आई।
  • शहद मिलावट और मेडिकल एसोसिएशन के आरोपों ने ब्रांड की विश्वसनीयता को प्रभावित किया।
  • सुप्रीम कोर्ट में विवाद और बिक्री प्रतिबंध के बाद पतंजलि ने माफी मांगी।
  • पतंजलि ने रुचि सोया कंपनी खरीदकर फूड सेक्टर में विस्तार किया और शेयर बाजार में लिस्टेड हुई।
  • हालांकि टैक्स नोटिस और मार्जिन दबाव के बावजूद कंपनी ने फिर से तेज़ी से ग्रोथ हासिल की।

Answers

Questions about this video

पतंजलि ने FMCG इंडस्ट्री में इतनी तेजी से कैसे उभर पाया?

पतंजलि ने योग और आयुर्वेद के भरोसे, बिना विज्ञापन खर्च किए रामदेव के योग शिविरों के माध्यम से सीधे घर-घर पहुंचकर और स्वदेशी भावना को बढ़ावा देकर FMCG मार्केट में तेजी से अपनी पहचान बनाई।

पतंजलि की ग्रोथ में गिरावट के मुख्य कारण क्या थे?

प्रतिद्वंद्वियों द्वारा आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स अपनाना, प्रोडक्शन और क्वालिटी कंट्रोल की समस्याएं, और ब्रांड की विश्वसनीयता पर विवाद जैसे शहद मिलावट और मेडिकल एसोसिएशन के आरोप पतंजलि की ग्रोथ को प्रभावित करने वाले मुख्य कारण थे।

पतंजलि ने रुचि सोया कंपनी क्यों खरीदी और इसका क्या प्रभाव पड़ा?

पतंजलि ने रुचि सोया कंपनी को खरीदकर फूड सेक्टर में विस्तार किया, जिससे कंपनी का रेवेन्यू बढ़ा और वह शेयर बाजार में लिस्टेड हुई, हालांकि टैक्स नोटिस और मार्जिन दबाव के बावजूद कंपनी ने फिर से तेजी से ग्रोथ हासिल की।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
एक वक्त था जब पतंजलि के प्रोडक्ट्स खरीदने के लिए लोग दुकानों पर लाइन लगा देते थे। दंतकांत ने Colgate को टक्कर दी। पतंजलि की हनी, घी और केश का जैसे प्रोडक्ट्स घर-घर पहुंच गए और कंपनी ने कुछ ही सालों में एफएमसीजी की पूरी इंडस्ट्री को हिला दिया। साल 2014 से 15 में पतंजलि का कारोबार करीब ₹00 करोड़ था और सिर्फ 2 साल बाद यह बढ़कर ₹100 करोड़ से ज्यादा हो गया। उस वक्त ऐसा लग रहा था कि पतंजलि शायद इंडिया की अगली बड़ी एफएमसीजी कंपनी बनने वाली है। लेकिन दूसरी तरफ कहानी अचानक बदलने लगी। ग्रोथ की रफ्तार गिरने लगी। कॉम्पिटर्स ने पतंजलि के सबसे बड़े हथियार आयुर्वेदिक और नेचुरल प्रोडक्ट्स को ही अपना लिया और कंपनी को प्रोडक्शन, क्वालिटी कंट्रोल और डिस्ट्रीब्यूशन जैसी प्रॉब्लम्स का सामना करना पड़ा। जिस पतंजलि ने कभी, एचयूएल और डाबर जैसी कंपनियों को डिफेंसिव होने पर मजबूर कर दिया था। आज वही पतंजलि अपने पुराने एक्सप्लोसिव ग्रोथ को दोहरा क्यों नहीं पा रही है? और कहानी सिर्फ कंपटीशन की नहीं है क्योंकि पतंजलि ने जिस मॉडल के दम पर इतनी तेजी से ग्रोथ की थी उसी मॉडल की कुछ कमजोरियां बाद में उसकी सबसे बड़ी प्रॉब्लम बन गई। तो आखिर पतंजलि ने ऐसा क्या किया था कि एक योगा गुरु का ब्रांड कुछ ही सालों में इंडिया के सबसे बड़े एफएमसीजी चैलेंजर्स में शामिल हो गया। कैसे दंतकांत ने हर्बल टूथपेस्ट को मेन स्ट्रीम बना दिया। कैसे पतंजलि ने हजारों करोड़ का एंपायर खड़ा किया और फिर वह कौन सी गलतियां और चैलेंजेस आए जिन्होंने इसकी ग्रोथ की रफ्तार रोक दी और सबसे बड़ा सवाल क्या पतंजलि की कहानी सच में ट्रबल की कहानी है या फिर कंपनी ने बस अपना पूरा गेम बदल दिया है इस वीडियो में पतंजलि की पूरी कहानी शुरू से समझेंगे उसके एक्सप्लोसिव राइज से लेकर आज के बदलते बिजनेस मॉडल तक तो चलिए कहानी शुरू से शुरू करते हैं। [संगीत] इस कहानी की शुरुआत होती है 1965 से। हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के एक छोटे से गांव सैयद अलीपुर में एक किसान परिवार में एक बेटे का जन्म हुआ। नाम रखा गया रामकिशन यादव। घर में ना पैसा था ना सुविधा। बचपन में ही उसे लकवे जैसी बीमारी ने जकड़ लिया। डॉक्टर दवाई कुछ खास काम नहीं आया। तब उसने योग अपनाया और धीरे-धीरे पूरी तरह ठीक हो गया। यहीं से जिंदगी ने मोड़ लिया। संस्कृत पढ़ी, गुरुकुल गया, सन्यास लिया और रामकिशन यादव बन गया बाबा रामदेव। लगभग उसी वक्त नेपाल में एक और बच्चा बड़ा हो रहा था। गरीबी में कई रातें भूखे पेट। नाम था बालकृष्ण। संस्कृत और आयुर्वेद की पढ़ाई के दौरान हरियाणा के एक गुरुकुल में 1988 में उसकी मुलाकात हुई रामदेव से। दोनों की सोच मिली। 1995 में दोनों ने मिलकर हरिद्वार में एक छोटा सा ट्रस्ट खड़ा किया। दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट ना कोई फैक्ट्री ना कोई बड़ा दफ्तर। बस कुछ योग शिविर और एक छोटी सी आयुर्वेदिक फार्मेसी। उस वक्त किसी को अंदाजा नहीं था कि यही छोटा सा ट्रस्ट आगे चलकर Colgate, एचयूएल और दाबर जैसी कंपनियों की नींद उड़ा देगा। 2003 में रामदेव को एक मौका मिला आस्था टीवी पर सुबह योग सिखाने का और यही वह चीज हुई जिसने आगे पूरा खेल बदल दिया। हर सुबह करोड़ों घरों में बिना एक विज्ञापन पर खर्च किए रामदेव लोगों के लिविंग रूम में पहुंच रहे थे। समझो ऐसे कोई भी बड़ी कंपनी तुम्हारा भरोसा जीतने के लिए साल में सैकड़ों करोड़ रुपए सिर्फ विज्ञापन पर लगाती है। लेकिन अगर कोई रोज सुबह मुफ्त में तुम्हारी सेहत की फिक्र करें तो भरोसा अपने आप बन जाता है बिना एक भी विज्ञापन दिखाए। यही रामदेव के पास पहले से था और उन्होंने इसी भरोसे को एक नाम दे दिया पतंजलि। साथ में एक और चीज जोड़ी स्वदेशी मैसेज सीधा था। विदेशी कंपनियों को पैसा मत दो। अपने ही देश का सामान खरीदो। टूथपेस्ट हो या घी यह सिर्फ एक प्रोडक्ट नहीं था। यह एक भावना थी और भारत के करोड़ों घरों को यही [संगीत] भावना चाहिए थी। 2006 में पतंजलि आयुर्वेद को औपचारिक रूप से हरिद्वार में कंपनी की शक्ल दी गई। लेकिन असली खेल अभी शुरू होना बाकी था। साल 2014 से 15 में पतंजलि का कारोबार था करीब ₹00 करोड़। सिर्फ 2 साल में 2016 से 2017 तक यह बढ़कर ₹100 करोड़ के पार पहुंच गया। ग्रोथ रेट करीब 55% सालाना जबकि पूरी एफएमसीजी इंडस्ट्री सिर्फ 8 से 9% की रफ्तार से चल रही थी। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म्स सीएलएसए और एचएसबीसी ने भी लिखा। पतंजलि भारत की सबसे तेज बढ़ने वाली एफएमसीजी कंपनी है। दंतकांत टूथपेस्ट ने कोलगेट की मार्केट में सीधी सेंध लगा दी। केश का शैंपू, गाय का घी अकेले घी से ही एक साल में ₹1400 करोड़ से ज्यादा की सेल आई। फ्यूचर ग्रुप और Reliance रिटेल जैसे बड़े रिटेलर्स भी अपने स्टोर्स में पतंजलि के प्रोडक्ट्स रखने लगे। फाइनल ईयर 2017 आते-आते पतंजलि भारत की तीसरी सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी बन चुकी थी। Nestle, Godrej, Britannia और दाबर जैसी दिग्गज कंपनियों से भी आगे। सिर्फ एचयूएल और आईटीसी ही आगे बचे थे और यहीं रामदेव ने एक बहुत बड़ा लक्ष्य रख दिया। जल्द ही ₹00 करोड़ पार करने का। मतलब सीधा [संगीत] एचयूएल को टक्कर। मार्केट के जानकारी वक्त शक जताए थे। सिर्फ एफएमसीजी प्रोडक्ट्स के दम पर रेवेन्यू डबल करना इतना आसान नहीं होगा। रामदेव उस वक्त एक इंटरव्यू में बोले, अब तक लोग एफएमसीजी का मतलब सिर्फ विदेशी कंपनियां समझते थे, लेकिन हमने उनका दबदबा खत्म कर दिया है। बड़ी ग्लोबल कंपनियां यह सोचकर बेफिक्र हैं कि हम अभी छोटे हैं। लेकिन वे बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं। अखबारों में, टीवी चैनलों में हर जगह एक ही चर्चा थी। भारत के एफएमसीजी बाजार में एक नया बादशाह आ गया है। लग रहा था जैसे पतंजलि को अब कोई रोक ही नहीं सकता। Colgate, एचयूएल और DA जैसी कंपनियां चुपचाप अपनी रणनीति बदलने लगी थीं। और उन्होंने तय किया पतंजलि को उसी के हथियार से जवाब देंगे। आयुर्वेद और स्वदेशी से। Colgate ने अपना सस्ता हर्बल टूथपेस्ट चिबाका वेद शक्ति उतार दिया। सीधा दंतकांत को टक्कर देने के लिए। HUL ने अपना पुराना आयुर्वेदिक ब्रांड आयुष दोबारा लॉन्च किया। DA ने अपने दाम घटा दिए। जिस मैदान में अब तक पतंजलि अकेला खेल रहा था, अब वहां सब कूद पड़े थे और फिर आया असली झटका। फाइनल ईयर 2018 में जो रफ्तार थी, वह अचानक थम गई। ₹00 करोड़ का सपना तो दूर। कई साल बाद तक भी पतंजलि सिर्फ ₹9,000 करोड़ के आसपास अटका रहा। रिसर्च फर्म केंटार वर्ल्ड पैनल की एक रिपोर्ट में सामने आया शहरों में पतंजलि की बिक्री घटने लगी थी और गांव में जो ग्रोथ पहले करीब 45% थी वो गिरकर 1/3 से भी कम रह गई। इसी बीच कंपनी का अपना मैसेजिंग ऐप किo भी लॉन्च होते ही बंद करना पड़ा। जिस कंपनी को कोई रोक नहीं पा रहा था वो अब खुद अपने ही फैसलों में उलझने लगी थी। लेकिन असली सवाल कुछ और था। वो भरोसा जिसकी बुनियाद पर पूरा पतंजलि खड़ा हुआ था। क्या वह भी हिल सकता था? 2020 में जवाब आया। एक रिसर्च संस्था सीएसई ने शहद के सैंपल टेस्ट किए और दावा किया कि पतंजलि समेत कई बड़े ब्रांड्स का शहद मिलावटी निकला। आचार्य बालकृष्णा ने तुरंत इसे खारिज किया। उन्होंने कहा यह भारत के देसी शहद उद्योग को बदनाम करने की एक साजिश लगती है। कंपनी ने बार-बार दोहराया कि उनका शहद एफएसएसएआई के सारे मानकों पर खड़ा उतरता है। लेकिन जिस ब्रांड की पूरी पहचान ही शुद्ध और असली थी, उसके लिए यह सवाल उठना ही अपने आप में एक बड़ा झटका था और फिर 2022 में एक और लड़ाई शुरू हुई। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया कि पतंजलि के विज्ञापन आधुनिक इलाज को बदनाम कर रहे हैं और डायबिटीज, अस्थमा जैसी बीमारियों के पक्के इलाज का दावा कर रहे हैं। 27 फरवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा पूरे देश को गुमराह किया जा रहा है। रामदेव और बालकृष्ण अदालत में पेश होना पड़ा। मई 2024 में कुछ प्रोडक्ट्स की बिक्री पर अस्थाई रोक भी लगी। रामदेव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सफाई दी। हम कोर्ट, कानून और संविधान का सम्मान करते हैं। हमने कोई गलत प्रचार नहीं फैलाया लेकिन कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ और आखिरकार 13 अगस्त 2024 को दोनों ने बिना शर्त माफी मांगी [संगीत] और कोर्ट ने मामला बंद कर दिया सख्त चेतावनी के साथ। अब यहां कहानी में एक ट्विस्ट आता है क्योंकि जिस वक्त बाहर सवाल उठ रहे थे, अंदर बालकृष्ण और रामदेव एक बिल्कुल अलग खेल भी खेल रहे थे। 2019 में एक बड़ी खाद्य तेल कंपनी रुचि सोया दिवालिया हो चुकी थी। बैंकों का करीब ₹12,000 करोड़ बकाया था। इसकी बोली में पतंजलि का मुकाबला था बड़े कॉरपोरेट खिलाड़ी Adani Wilmar से। लेकिन पतंजलि ने ज्यादा बोली लगाई करीब ₹4350 करोड़ और Adani Wilmar को पीछे छोड़ दिया। आगे चलकर यही रूचि सोया बनी पतंजलि फूड्स। और आज यह कंपनी शेयर बाजार में लिस्टेड है। फाइनल ईयर 2025 में इस कंपनी ने अब तक का सबसे बड़ा रेवेन्यू दर्ज किया ₹34,000 करोड़ से ज्यादा। मुनाफा ₹1,300 करोड़ के पार। 2025 में कंपनी ने अपने शेयर धारकों को बोनस शेयर भी दिए। लेकिन कहानी अब भी सीधी नहीं है। अगली ही तिमाही में मुनाफा 21% गिर गया। सरकार ने खाने के तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी घटा दी और इसका सीधा असर मार्जिन पर पड़ा और फिर मई 2026 में टैक्स डिपार्टमेंट ने अचानक एक नोटिस थमा दिया ₹1352 करोड़ का। पुराने रिटर्न्स में गड़बड़ी का आरोप। कंपनी के इन्वेस्टर्स हिल गए। लेकिन 1 महीने के अंदर ही जून 2026 में वही नोटिस वापस ले लिया गया। कोई आर्थिक असर नहीं निकला और उसी दौर में कंपनी की एफएमसीजी सेल्स एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगी 35% तक। यानी एक तरफ रिकॉर्ड मुनाफा और तेज ग्रोथ।
00:15
Speaker A
इंडस्ट्री को हिला दिया। साल 2014 से 15 में पतंजलि का कारोबार करीब ₹00 करोड़ था और सिर्फ 2 साल बाद यह बढ़कर ₹100 करोड़ से ज्यादा हो गया। उस वक्त ऐसा लग रहा था कि पतंजलि शायद इंडिया की अगली बड़ी
00:31
Speaker A
एफएमसीजी कंपनी बनने वाली है। लेकिन दूसरी तरफ कहानी अचानक बदलने लगी। ग्रोथ की रफ्तार गिरने लगी। कॉमपिटर्स ने पतंजलि के सबसे बड़े हथियार आयुर्वेदिक और नेचुरल प्रोडक्ट्स को ही अपना लिया और कंपनी को प्रोडक्शन, क्वालिटी कंट्रोल और डिस्ट्रीब्यूशन जैसी प्रॉब्लम्स का सामना
00:49
Speaker A
करना पड़ा। जिस पतंजलि ने कभी, एचयूएल और daber जैसी कंपनियों को डिफेंसिव होने पर मजबूर कर दिया था। आज वही पतंजलि अपने पुराने एक्सप्लोसिव ग्रोथ को दोहरा क्यों नहीं पा रही है? और कहानी सिर्फ कंपटीशन की नहीं है क्योंकि पतंजलि ने जिस मॉडल के
01:05
Speaker A
दम पर इतनी तेजी से ग्रोथ की थी उसी मॉडल की कुछ कमजोरियां बाद में उसकी सबसे बड़ी प्रॉब्लम बन गई। तो आखिर पतंजलि ने ऐसा क्या किया था कि एक योगा गुरु का ब्रांड कुछ ही सालों में इंडिया के सबसे बड़े
01:19
Speaker A
एफएमसीजी चैलेंजर्स में शामिल हो गया। कैसे दंतकांत ने हर्बल टूथपेस्ट को मेन स्ट्रीम बना दिया। कैसे पतंजलि ने हजारों करोड़ का एंपायर खड़ा किया और फिर वह कौन सी गलतियां और चैलेंजेस आए जिन्होंने इसकी ग्रोथ की रफ्तार रोक दी और सबसे बड़ा सवाल
01:36
Speaker A
क्या पतंजलि की कहानी सच में ट्रबल की कहानी है या फिर कंपनी ने बस अपना पूरा गेम बदल दिया है इस वीडियो में पतंजलि की पूरी कहानी शुरू से समझेंगे उसके एक्सप्लोसिव राइज से लेकर आज के बदलते बिजनेस मॉडल तक तो चलिए कहानी शुरू से
01:52
Speaker A
शुरू करते हैं। [संगीत] इस कहानी की शुरुआत होती है 1965 से। हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के एक छोटे से गांव सैयद अलीपुर में एक किसान परिवार में एक बेटे का जन्म हुआ। नाम रखा गया रामकिशन यादव। घर में ना पैसा था ना सुविधा। बचपन
02:18
Speaker A
में ही उसे लकवे जैसी बीमारी ने जकड़ लिया। डॉक्टर दवाई कुछ खास काम नहीं आया। तब उसने योग अपनाया और धीरे-धीरे पूरी तरह ठीक हो गया। यहीं से जिंदगी ने मोड़ लिया। संस्कृत पढ़ी, गुरुकुल गया, सन्यास लिया और रामकिशन यादव बन गया बाबा रामदेव। लगभग
02:38
Speaker A
उसी वक्त नेपाल में एक और बच्चा बड़ा हो रहा था। गरीबी में कई रातें भूखे पेट। नाम था बालकृष्ण। संस्कृत और आयुर्वेद की पढ़ाई के दौरान हरियाणा के एक गुरुकुल में 1988 में उसकी मुलाकात हुई रामदेव से। दोनों की सोच मिली। 1995 में दोनों ने
02:57
Speaker A
मिलकर हरिद्वार में एक छोटा सा ट्रस्ट खड़ा किया। दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट ना कोई फैक्ट्री ना कोई बड़ा दफ्तर। बस कुछ योग शिविर और एक छोटी सी आयुर्वेदिक फार्मेसी। उस वक्त किसी को अंदाजा नहीं था कि यही छोटा सा ट्रस्ट आगे चलकर Colgate, एचयूएल
03:15
Speaker A
और दाबर जैसी कंपनियों की नींद उड़ा देगा। 2003 में रामदेव को एक मौका मिला आस्था टीवी पर सुबह योग सिखाने का और यही वह चीज हुई जिसने आगे पूरा खेल बदल दिया। हर सुबह करोड़ों घरों में बिना एक विज्ञापन पर
03:32
Speaker A
खर्च किए रामदेव लोगों के लिविंग रूम में पहुंच रहे थे। समझो ऐसे कोई भी बड़ी कंपनी तुम्हारा भरोसा जीतने के लिए साल में सैकड़ों करोड़ रुपए सिर्फ विज्ञापन पर लगाती है। लेकिन अगर कोई रोज सुबह मुफ्त में तुम्हारी सेहत की फिक्र करें तो भरोसा
03:49
Speaker A
अपने आप बन जाता है बिना एक भी विज्ञापन दिखाए। यही रामदेव के पास पहले से था और उन्होंने इसी भरोसे को एक नाम दे दिया पतंजलि। साथ में एक और चीज जोड़ी स्वदेशी मैसेज सीधा था। विदेशी कंपनियों को पैसा
04:06
Speaker A
मत दो। अपने ही देश का सामान खरीदो। टूथपेस्ट हो या घी यह सिर्फ एक प्रोडक्ट नहीं था। यह एक भावना थी और भारत के करोड़ों घरों को यही [संगीत] भावना चाहिए थी। 2006 में पतंजलि आयुर्वेद को औपचारिक रूप से हरिद्वार में कंपनी की शक्ल दी गई।
04:24
Speaker A
लेकिन असली खेल अभी शुरू होना बाकी था। साल 2014 से 15 में पतंजलि का कारोबार था करीब ₹00 करोड़। सिर्फ 2 साल में 2016 से 2017 तक यह बढ़कर ₹100 करोड़ के पार पहुंच गया। ग्रोथ रेट करीब 55% सालाना जबकि पूरी
04:44
Speaker A
एफएमसीजी इंडस्ट्री सिर्फ 8 से 9% की रफ्तार से चल रही थी। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म्स सीएलएसए और एचएसबीसी ने भी लिखा। पतंजलि भारत की सबसे तेज बढ़ने वाली एफएमसीजी कंपनी है। दंतकांत टूथपेस्ट ने कोलगेट की मार्केट में सीधी सेंध लगा दी।
05:03
Speaker A
केश का शैंपू गाय का घी अकेले घी से ही एक साल में ₹1400 करोड़ से ज्यादा की सेल आई। फ्यूचर ग्रुप और Reliance रिटेल जैसे बड़े रिटेलर्स भी अपने स्टोर्स में पतंजलि के प्रोडक्ट्स रखने लगे। फाइनल ईयर 2017
05:20
Speaker A
आते-आते पतंजलि भारत की तीसरी सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी बन चुकी थी। nstle, goddraj, britannia और दाबर जैसी दिग्गज कंपनियों से भी आगे। सिर्फ एचयूएल और आईटीc ही आगे बचे थे और यहीं रामदेव ने एक बहुत बड़ा लक्ष्य रख दिया। जल्द ही ₹00
05:39
Speaker A
करोड़ पार करने का। मतलब सीधा [संगीत] एचयूएल को टक्कर। मार्केट के जानकारी वक्त शक जता चुके थे। सिर्फ एफएमसीजी प्रोडक्ट्स के दम पर रेवेन्यू डबल करना इतना आसान नहीं होगा। रामदेव उस वक्त एक इंटरव्यू में बोले, अब तक लोग एफएमसीजी का
05:56
Speaker A
मतलब सिर्फ विदेशी कंपनियां समझते थे, लेकिन हमने उनका दबदबा खत्म कर दिया है। बड़ी ग्लोबल कंपनियां यह सोचकर बेफिक्र हैं कि हम अभी छोटे हैं। लेकिन वे बहुत बड़ी गलतफहमी में है। अखबारों में टीवी चैनलों में हर जगह एक ही चर्चा थी। भारत
06:11
Speaker A
के एफएमसीजी बाजार में एक नया बादशाह आ गया है। लग रहा था जैसे पतंजलि को अब कोई रोक ही नहीं सकता। Colgate, एचयूएल और DA जैसी कंपनियां चुपचाप अपनी रणनीति बदलने लगी थी। और उन्होंने तय किया पतंजलि को
06:26
Speaker A
उसी के हथियार से जवाब देंगे। आयुर्वेद और स्वदेशी से। Colgate ने अपना सस्ता हर्बल टूथपेस्ट चिबाका वेद शक्ति उतार दिया। सीधा दंतकांत को टक्कर देने के लिए। Holl ने अपना पुराना आयुर्वेदिक ब्रांड आयुष दोबारा लांच किया। DA ने अपने दाम घटा
06:44
Speaker A
दिए। जिस मैदान में अब तक पतंजलि अकेला खेल रहा था, अब वहां सब कूद पड़े थे और फिर आया असली झटका। फाइनल ईयर 2018 में जो रफ्तार थी, वह अचानक थम गई। ₹00 करोड़ का सपना तो दूर। कई साल बाद तक भी पतंजलि
07:01
Speaker A
सिर्फ ₹9,000 करोड़ के आसपास अटका रहा। रिसर्च फर्म केंटार वर्ल्ड पैनल की एक रिपोर्ट में सामने आया शहरों में पतंजलि की बिक्री घटने लगी थी और गांव में जो ग्रोथ पहले करीब 45% थी वो गिरकर 1/3 से भी कम रह गई। इसी बीच कंपनी का अपना
07:18
Speaker A
मैसेजिंग ऐप किo भी लॉन्च होते ही बंद करना पड़ा। जिस कंपनी को कोई रोक नहीं पा रहा था वो अब खुद अपने ही फैसलों में उलझने लगी थी। लेकिन असली सवाल कुछ और था। वो भरोसा जिसकी बुनियाद पर पूरा पतंजलि
07:33
Speaker A
खड़ा हुआ था। क्या वह भी हिल सकता था? 2020 में जवाब आया। एक रिसर्च संस्था सीएसई ने शहद के सैंपल टेस्ट किए और दावा किया कि पतंजलि समेत कई बड़े ब्रांड्स का शहद मिलावटी निकला। आचार्य बालकृष्णा ने तुरंत इसे खारिज किया। उन्होंने कहा यह
07:50
Speaker A
भारत के देसी शहद उद्योग को बदनाम करने की एक साजिश लगती है। कंपनी ने बार-बार दोहराया कि उनका शहद एफएसएसएआई के सारे मानकों पर खड़ा उतरता है। लेकिन जिस ब्रांड की पूरी पहचान ही शुद्ध और असली थी, उसके लिए यह सवाल उठना ही अपने आप में
08:06
Speaker A
एक बड़ा झटका था और फिर 2022 में एक और लड़ाई शुरू हुई। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया कि पतंजलि के विज्ञापन आधुनिक इलाज को बदनाम कर रहे हैं और डायबिटीज अस्थमा जैसी बीमारियों के पक्के इलाज का दावा कर रहे
08:23
Speaker A
हैं। 27 फरवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा पूरे देश को गुमराह किया जा रहा है। रामदेव और बालकृष्ण अदालत में पेश होना पड़ा। मई 2024 में कुछ प्रोडक्ट्स की बिक्री पर अस्थाई रोक भी लगी। रामदेव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में
08:39
Speaker A
सफाई दी। हम कोर्ट, कानून और संविधान का सम्मान करते हैं। हमने कोई गलत प्रचार नहीं फैलाया लेकिन कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ और आखिरकार 13 अगस्त 2024 को दोनों ने बिना शर्त माफी मांगी [संगीत] और कोर्ट ने मामला बंद कर दिया सख्त चेतावनी के साथ।
08:57
Speaker A
अब यहां कहानी में एक ट्विस्ट आता है क्योंकि जिस वक्त बाहर सवाल उठ रहे थे, अंदर बालकृष्ण और रामदेव एक बिल्कुल अलग खेल भी खेल रहे थे। 2019 में एक बड़ी खाद्य तेल कंपनी रुचि सोया दिवालिया हो चुकी थी। बैंकों का करीब ₹12,000 करोड़
09:16
Speaker A
बकाया था। इसकी बोली में पतंजलि का मुकाबला था बड़े कॉरपोरेट खिलाड़ी adानी विलmर से। लेकिन पतंजलि ने ज्यादा बोरी लगाई करीब ₹4350 करोड़ और adानी विलmer को पीछे छोड़ दिया। आगे चलकर यही रूचि सोया बनी पतंजलि फूड्स। और आज यह कंपनी शेयर बाजार में लिस्टेड
09:37
Speaker A
है। फाइनल ईयर 2025 में इस कंपनी ने अब तक का सबसे बड़ा रेवेन्यू दर्ज किया ₹34,000 करोड़ से ज्यादा। मुनाफा ₹1,300 करोड़ के पार। 2025 में कंपनी ने अपने शेयर धारकों को बोनस शेयर भी दिए। लेकिन कहानी अब भी
09:56
Speaker A
सीधी नहीं है। अगली ही तिमाही में मुनाफा 21% गिर गया। सरकार ने खाने के तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी घटा दी और इसका सीधा असर मार्जिन पर पड़ा और फिर मई 2026 में टैक्स डिपार्टमेंट ने अचानक एक नोटिस थमा दिया
10:13
Speaker A
₹1352 करोड़ का। पुराने रिटर्न्स में गड़बड़ी का आरोप। कंपनी के इन्वेस्टर्स हिल गए। लेकिन 1 महीने के अंदर ही जून 2026 में वही नोटिस वापस ले लिया गया। कोई आर्थिक असर नहीं निकला और उसी दौर में कंपनी की
10:30
Speaker A
एफएमसीजी सेल्स एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगी 35% तक। यानी एक तरफ रिकॉर्ड मुनाफा और तेज ग्रोथ दूसरी तरफ हर कुछ महीनों में कोई ना कोई नया झटका? तो सवाल वही है जिससे हमने शुरुआत की थी। क्या पतंजलि सच
10:48
Speaker A
में मुसीबत में है या सिर्फ इसका गेम बदल गया है? एक तरफ लोग कहेंगे भरोसा एक बार हिल जाए तो वह सालों में वापस बनता है। चाहे मुनाफा कितना भी बढ़ जाए। दूसरी तरफ लोग कहेंगे नंबर झूठ नहीं बोलते और नंबर
11:05
Speaker A
आज भी पतंजलि के साथ है। सच शायद इन दोनों के बीच कहीं है और यही इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सबक है। जिस चीज ने एक कंपनी को सबसे ऊपर पहुंचाया वही चीज जब सवालों में घिरती है तो कंपनी को सबसे ज्यादा चोट भी
11:23
Speaker A
वहीं से पहुंचती है। अगर तुम यह वीडियो यहां तक देख रहे हो तो इसका मतलब सिर्फ यह नहीं कि तुम्हें बिजनेस की कहानियां पसंद है। इसका मतलब है तुम किसी भी ब्रांड पर आंख बंद करके भरोसा करने से पहले उसके
11:37
Speaker A
पीछे की असली कहानी जानना चाहते हो और यही सोच तुम्हें बाकी लोगों से अलग बनाती है। अगर बाबा रामदेव और पतंजलि की इस पूरी यात्रा को और गहराई से जानना हो तो गॉड मैन टू टकून नाम की किताब एक अच्छी शुरुआत
11:53
Speaker A
है। और अगर तुम्हें लगा कि सिर्फ पतंजलि ही अपने ही भरोसे के जाल में उलझी है तो एक और कहानी है जो तुम्हें और चौंका देगी। पिछले हफ्ते पहले हमने एक ऐसी कंपनी की कहानी बताई थी जिसके स्टोर्स में लोगों को
12:08
Speaker A
पैर रखने की जगह नहीं मिल रही थी। फिर भी उसका शेयर लगातार गिर रहा था। वो कहानी है dमar की। अगर पतंजलि वाली यह कहानी तुम्हें हिला गई तो dमar वाली कहानी तुम्हें और भी सोचने पर मजबूर कर देगी।
12:23
Speaker A
वीडियो चैनल पर है। देख लेना। दोस्तों, अगर यह वीडियो पसंद आया हो तो एक लाइक जरूर करो। चैनल को सब्सक्राइब करो ताकि ऐसी ही फाइनेंशियल स्टोरीज [संगीत] तुम तक पहुंचती रहे। हम हर हफ्ते नई कहानी लाते हैं। तब तक के लिए अपना पैसा संभाल के
12:40
Speaker A
रखना।
Topics:पतंजलिबाबा रामदेवFMCGआयुर्वेदस्वदेशीदंतकांतरुचि सोयाबाजार विवादब्रांड ग्रोथभारतीय उपभोक्ता

Get More with the SozAI App

Transcribe recordings, audio files, and YouTube videos — with AI summaries, speaker detection, and unlimited transcriptions.

Or transcribe another YouTube video here →