नीरव मोदी ने PNB बैंक से ₹14,356 करोड़ का घोटाला किया, जो भारत का सबसे बड़ा बैंक स्कैम है।
Key Takeaways
- बैंकिंग सिस्टम में कमजोर निगरानी से बड़े घोटाले संभव हैं।
- विश्वसनीयता और ट्रस्ट का दुरुपयोग कर लाखों करोड़ का घोटाला किया जा सकता है।
- एलओयू जैसे वित्तीय साधनों का दुरुपयोग रोकने के लिए कड़े नियम और ऑडिट जरूरी हैं।
- एक छोटे कर्मचारी की सतर्कता से बड़ा घोटाला रोका जा सकता था।
- धोखाधड़ी के खिलाफ समय पर कार्रवाई न होने पर नुकसान बढ़ता है।
What the video covers
- 16 जनवरी 2018 को PNB बैंक के ब्रेडी हाउस ब्रांच में ₹14,356 करोड़ के घोटाले का खुलासा हुआ।
- नीरव मोदी ने डायमंड बिजनेस को लग्जरी ब्रांड में बदला और ग्लोबल सेलिब्रिटी बन गए।
- एलओयू (लेटर ऑफ अंडरटेइंग) का गलत इस्तेमाल कर बिना कोलैटरल के बैंक गारंटी ली गई।
- PNB के गोकुलनाथ शेट्टी ने बिना सिक्योरिटी के फेक एलओयू जारी किए और सिस्टम में एंट्री नहीं की।
- नीरव मोदी ने पुराने एलओयू के पैसे चुकाने के लिए नए एलओयू लिए, जिससे स्कैम छुपा रहा।
- 2011 से 2017 तक 10,213 फेक एलओयू जारी हुए, कुल राशि ₹13,560 करोड़ से अधिक।
- नीरव मोदी ने हांगकांग, लंदन, न्यूयॉर्क में बुटीक खोले और हॉलीवुड सेलिब्रिटीज़ को ज्वेलरी दी।
- 2017 में गोकुलनाथ शेट्टी के रिटायरमेंट के बाद नीरव मोदी ने भारत छोड़ दिया।
- PNB ने 29 जनवरी 2018 को CBI में शिकायत दर्ज कराई और जांच शुरू हुई।
- यह कहानी लालच, धोखे और बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों की है।
Chapters
- 00:00घोटाले की शुरुआत और ₹14,356 करोड़ का खुलासा
- 01:11नीरव मोदी का डायमंड बिजनेस और लग्जरी ब्रांड की स्थापना
- 02:17लेटर ऑफ अंडरटेइंग (एलओयू) का परिचय और बैंकिंग प्रक्रिया
- 04:30PNB में गोकुलनाथ शेट्टी द्वारा फेक एलओयू जारी करना
- 05:35एलओयू का दुरुपयोग और स्कैम का विस्तार
- 07:49नीरव मोदी की ग्लोबल सफलता और सेलिब्रिटी बनना
- 08:58स्कैम का खुलासा और बैंक क्लर्क की सतर्कता
- 10:00शेट्टी का रिटायरमेंट और नीरव मोदी का देश छोड़ना
- 11:16स्कैम के बाद की कार्रवाई और नतीजे
- 14:48घोटाले की व्यापकता और सामाजिक प्रभाव
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Speaker A
16 जनवरी 2018, मुंबई। PNB बैंक के ब्रेडी हाउस ब्रांच में एक बैंक ऑफिसर अपनी कुर्सी पर बैठा था। उसके सामने एक फाइल थी। फाइल में लिखा था 14356 करोड़। उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं। इतना पैसा गायब और किसी को पता ही नहीं चला। यह
Speaker A
कहानी है नीरव मोदी की। एक ऐसा आदमी जिसने पूरे देश को चुना लगाया, जिसके डायमंड्स हॉलीवुड की एक्ट्रेसेस पहनती थीं। जिसके साथ बिलियर्स फोटो खिंचवाते थे। लेकिन किसी को नहीं पता था कि यह सब एक झूठी कहानी थी। और सबसे बड़ी बात उसने यह स्कैम
Speaker A
किया कैसे? सिर्फ एक कागज की मदद से। एक ऐसा कागज जिसे बैंक सेफ मानता था। लेकिन नीरव ने उसे अपना एटीएम बना दिया। और सबसे बड़ा ट्विस्ट। किसी को नहीं पता था कि यह आदमी अब तक देश छोड़कर भाग चुका था और जिस
Speaker A
बैंक ने उसे 14000 करोड़ दिए थे, उन्हें भी पता नहीं था कि उन्होंने पैसे दिए हैं। यह कहानी है इंडिया के सबसे बड़े बैंक स्कैम की। यह कहानी है उस आदमी की जो डायमंड्स बेचता था, लेकिन असली में सपने
Speaker A
बेचता था और वह भी झूठे सपने। इस कहानी की शुरुआत होती है 1989 से। नीरव मोदी नाम का एक 18 साल का लड़का बेल्जियम से इंडिया आया। वह पलनपुर गुजरात से था, लेकिन उसकी परवरिश यूरोप में हुई थी। उसकी फैमिली
Speaker A
डायमंड का बिजनेस करती थी। उसका मामा मेहुल चौक्सी बहुत बड़ा डायमंड मर्चेंट था इंडिया में। गीतांजलि जेम्स नाम की कंपनी थी उसकी। नीरव ने सोचा कि वह भी डायमंड्स का बिजनेस करेगा। लेकिन वह अलग करना चाहता था। देखो उस वक्त इंडिया में डायमंड
Speaker A
मर्चेंट्स सिर्फ होलसेल का काम करते थे। यानी बड़े-बड़े हीरों को कंपनियों को बेचना। लेकिन नीरव ने सोचा मैं लग्जरी ब्रांड बनाऊंगा। जैसे विदेश में कार्टियर और टिफनी हैं, वैसे इंडिया में बनाऊंगा। उसने अपनी कंपनी खोली फायर स्टार इंटरनेशनल।
Speaker A
शुरू में मुश्किल था। लोग कहते थे भाई इंडिया में कौन इतना महंगा ज्वेलरी खरीदेगा? लेकिन नीरव के दिमाग में एक चीज चल रही थी। इंडियंस अमीर हो रहे हैं। उन्हें शो ऑफ यानी दिखावा करना पसंद है। उनके पास पैसा है और डायमंड से अच्छा कुछ
Speaker A
भी नहीं दिखाने के लिए। 2010 में एक बड़ी चीज हुई। नीरव ने एक स्पेशल नेकलेस बनवाया। गोलकोंडा लोटस नेकलेस। इस नेकलेस में रेयर पिंक डायमंड्स थे। उसने इसको क्रिस्टीज़ ऑक्शन में बेचने के लिए दिया। क्रिस्टीज यह दुनिया की सबसे फेमस ऑक्शन
Speaker A
कंपनी है जहां अमीर लोग पेंटिंग्स और ज्वेलरी खरीदते हैं। और फिर धमाका हुआ। वो नेकलेस $3.5 मिलियन में बिका। यानी उस वक्त के हिसाब से लगभग ₹16 करोड़ और नीरव मोदी पहला इंडियन ज्वेलर बन गया जिसका फोटो क्रिस्टीज के कैटलॉग के कवर पर आया।
Speaker A
ओवरनाइट उसकी इमेज बदल गई। अब लोग उसको इंडिया का कार्टियर कहने लगे। न्यूज़पेपर्स में उसकी फोटो आई। टीवी पर इंटरव्यूज होने लगे। लेकिन नीरव को नहीं पता था कि उसका यह फैसला आगे चलकर क्या बनने वाला था। एक दिन नीरव ने वो देख लिया
Speaker A
जो किसी और ने नहीं देखा था। देखो डायमंड बिजनेस में एक प्रॉब्लम होती है। तुम डायमंड्स यूरोप या अफ्रीका से खरीदते हो। उन्हें इंडिया लाते हो। फिर उन्हें कट पॉलिश करके वापस दुनिया भर में बेचते हो। इस पूरे प्रोसेस में महीनों लग जाते हैं।
Speaker A
लेकिन सप्लायर्स को तुरंत पैसा चाहिए। तो अगर तुम्हारे पास इतना कैश नहीं है तो तुम क्या करोगे? यहां आता है एक चीज लेटर ऑफ अंडरटेइंग। लोग इसको एल ओ यू कहते हैं। समझो ऐसे। मान लो तुम्हें किसी विदेशी
Speaker A
दुकान से ₹1 लाख का माल खरीदना है। लेकिन तुम्हारे पास अभी ₹1 लाख नहीं है। तो तुम अपने बैंक के पास जाते हो और कहते हो भैया मुझे यह माल चाहिए। आप उस विदेशी दुकान को कह दो कि पैसा मैं दे दूंगा। आप गारंटी दे
Speaker A
दो। बैंक कहता है, ठीक है, हम उन्हें लेटर लिखते हैं कि अगर यह आदमी पैसा नहीं देगा, तो हम देंगे। यही एलओयू है। एक गारंटी का कागज। अब नॉर्मल केस में बैंक यह गारंटी तभी देता है जब तुम्हारे पास कुछ कोलैटरल
Speaker A
हो। मतलब कोई प्रॉपर्टी, कोई फिक्स्ड डिपॉजिट। कुछ तो हो जिससे बैंक को विश्वास हो कि तुम पैसा वापस करोगे। लेकिन नीरव को मिला एक ऐसा बंदा जो बिना कोलैटरल के गारंटी दे देता था। उसका नाम था गोकुलनाथ शेट्टी। PNB बैंक का डेपुटी मैनेजर। 2011
Speaker A
में नीरव की टीम PNB के ब्रेडी हाउस ब्रांच में गई। उन्होंने शेट्टी से कहा हमें डायमंड्स इंपोर्ट करने हैं। हमें एलओयू चाहिए। शेट्टी ने बोला कितने का? ₹1 करोड़ का। शेट्टी ने कहा ठीक है। लेकिन कोलैटरल? नीरव की टीम ने कहा देखिए हम तो
Speaker A
रेगुलर बिजनेस करते हैं। पिछले कई सालों से हम पैसा टाइम पर वापस करते आए हैं। यह झूठ था। लेकिन शेट्टी को पता नहीं चल पाया और ना ही उसने इतना इन्वेस्टिगेशन किया क्योंकि उनको ट्रस्ट था नीरव मोदी पर और
Speaker A
फिर शेट्टी ने एलओयू इशू कर दिया बिना किसी सिक्योरिटी के। लेकिन असली जादू यहां से स्टार्ट हुआ। नॉर्मली जब बैंक कोई एलओयू देता है तो वो अपने कंप्यूटर सिस्टम में एंट्री करता है। PNB का मेन सॉफ्टवेयर था फिनाकल। इसमें सारे ट्रांजैक्शंस
Speaker A
रिकॉर्ड होते हैं। ऑडिटर्स आते हैं तो फिनाकल चेक करते हैं। लेकिन शेट्टी ने क्या किया? उसने एलओयू इशू किया Swift के थ्रू। Swift एक इंटरनेशनल मैसेजिंग सिस्टम है। जब एक बैंक को दूसरे बैंक को मैसेज भेजना होता है तो Swift यूज करते हैं। तो
Speaker A
शेट्टी ने विदेशी बैंक को Swift पर मैसेज भेजा। PNB गारंटी देता है कि नीरव मोदी का ₹10 करोड़ सेफ है। लेकिन फिनाकल में कोई एंट्री नहीं हुई। मतलब विदेशी बैंक को लगता है PNB ने गारंटी दी, लेकिन PNB के
Speaker A
अपने रिकॉर्ड्स में कोई गारंटी है ही नहीं। समझे क्या हुआ? यह ऐसे है जैसे लाइब्रेरी में तुम्हारा दोस्त काम करता हो। तुम उससे कहते हो एक किताब इशू करो। वो तुम्हें किताब दे देता है लेकिन रजिस्टर में नाम नहीं लिखता। तो लाइब्रेरी
Speaker A
को लगता है किताब शेल्फ पे है। लेकिन असली में किताब तुम्हारे पास है। और जब तक तुम्हारा दोस्त लाइब्रेरी में काम कर रहा है किसी को पता नहीं चलेगा। नीरव ने पहली बार यह किया और यह ट्रिक काम कर गई। उसने
Speaker A
डायमंड्स खरीदे, बेच दिए, पैसा कमाया और वापस कर दिया। शेट्टी खुश, बैंक खुश, नीरव भी खुश। लेकिन नीरव के दिमाग में एक आइडिया आ गया। अगर मैं यही बार-बार करता रहूं, तो अब शुरू हुआ असली खेल। 2011 से
Speaker A
2017 तक यह थे नीरव मोदी के गोल्डन इयर्स। हर कुछ महीने में वह नए एलओयू लेने जाता। ₹1 करोड़, फिर ₹50 करोड़, फिर ₹100 करोड़, फिर ₹500 करोड़। और सबसे बड़ी बात वो नए एलओयू से जो पैसा आता था उससे पुराने वाले
Speaker A
एलओयू का पेमेंट कर देता था। यानी एक झूठ को छुपाने के लिए दूसरा झूठ। देखते ही देखते 7 सालों में 10,213 फेक एलओयू
Speaker A
बन चुके थे। जिसका टोटल अमाउंट था ₹1356 करोड़ यानी लगभग $ अरब डॉलर। और नीरव की
Speaker A
जिंदगी वो बॉलीवुड मूवी जैसी बन गई। 2015 में उसने अपना पहला बुटीक खोला हांगकांग में। फिर लंदन में, फिर 2017 में सबसे बड़ा वाला न्यूयॉर्क के मेडिसिन एवेन्यू पे। यहां पर दुनिया के सबसे महंगे स्टोर्स होते हैं। गुची, प्रादा सब यहीं हैं। नीरव
Speaker A
मोदी का बुटीक भी अब उनके बीच था। उसकी ज्वेलरी ऑस्कर्स में पहनी गई। हॉलीवुड एक्ट्रेसेस उसके डायमंड्स पहनकर रेड कारपेट पर आईं। प्रियंका चोपड़ा उसकी ब्रांड एंबेसडर थी। केट विंसलेट तक ने उसका ज्वेलरी पहना। नीरव मोदी अब सिर्फ
Speaker A
डायमंड मर्चेंट नहीं था। वो एक सेलिब्रिटी बन गया था। उसके पास Mercedes थी। प्राइवेट जेट थी। मुंबई में एक ₹100 करोड़ का बंगला था। अलीबाग में बीच फ्रंट प्रॉपर्टी। लंदन और न्यूयॉर्क में फ्लैट्स थे। 2018 में डब्ल्यू में जहां दुनिया के
Speaker A
सबसे पावरफुल लोग मिलते हैं, नीरव मोदी भी गया। वहां उसने डोनाल्ड ट्रंप के साथ फोटो खिंचवाई। मीडिया में उसकी तारीफ हो रही थी। इंडियन लग्जरी का ग्लोबल फेस, सेल्फ मेड बिलियर, डायमंड किंग। लेकिन किसी को नहीं पता था कि यह सब एक झूठी कहानी थी।
Speaker A
यह पैसा नीरव का नहीं था। यह पैसा PNB का था और PNB को पता भी नहीं था। एक जूनियर बैंक क्लर्क ने एक बार फाइल में कुछ अजीब देखा। उसने अपने सीनियर से पूछा, "सर, यह ट्रांजैक्शंस फिनाकल में क्यों नहीं हैं?"
Speaker A
सीनियर ने बोला, "यह स्पेशल अरेंजमेंट है।" तुम काम करो अपना। उस दिन अगर वो क्लर्क थोड़ा और पुश करता, तो शायद यह स्कैम वहीं रुक जाता। लेकिन नहीं, सब चलता रहा। नीरव अब ओवर कॉन्फिडेंट हो गया था। उसको लगता था कि उसे कोई नहीं रोक सकता।
Speaker A
लेकिन जिस चीज ने उसे ऊपर उठाया था, वही उसे गिरा भी देने वाली थी। उस वक्त नीरव मोदी इंडिया का सबसे चमकता हुआ नाम था। हर तरफ उसकी चर्चा थी। फोर्ब्स मैगजीन ने उसको इंडिया का रिचेस्ट ज्वेलर में गिना।
Speaker A
नेटवर्थ 1.75 बिलियन। न्यूज़पेपर्स में उसके बुटीक के एड्स आते थे। टीवी पर इंटरव्यूज होते थे। लोग उसको बिजनेस जीनियस बोलते थे। एक इंटरव्यू में नीरव ने कहा था लग्जरी सिर्फ चीजों में नहीं होती, लग्जरी एक फीलिंग है और मैं वो फीलिंग
Speaker A
बेचता हूं। और सच में वो फीलिंग्स ही बेच रहा था, झूठी फीलिंग्स। लेकिन जब कोई इतनी तेजी से ऊपर जाता है तो उसका गिरना भी उतना ही तेज होता है। 2017 के एंड में एक बात हुई।
Speaker A
गोकुलनाथ शेट्टी रिटायर
Speaker A
होने वाला था। वो बंदा जिसने 7 साल तक नीरव के लिए फेक एलओयू इशू किए थे। वो अब PNB छोड़ रहा था। नीरव को यह पता था। उसको समझ आ गया था कि मुश्किल आने वाली है। दिसंबर 2017 में नीरव ने अपने फैमिली
Speaker A
को मैसेज किया। उसने कहा सामान पैक करो क्वाइटली। किसी को बताना नहीं। 1 जनवरी 2018 नीरव मोदी, उसकी वाइफ अमी और उसका भाई निशाल तीनों फ्लाइट में बैठ गए। मुंबई से दुबई, दुबई से ब्रुसेल्स, ब्रुसेल्स से लंदन। देश छोड़ दिया। ओवरनाइट। किसी को शक भी
Speaker A
नहीं हुआ। उधर PNB बैंक में हालात कुछ औ...
Speaker A
बैंक के अपने रिकॉर्ड्स में इसके बारे में कुछ था ही नहीं। उसने तुरंत सीनियर ऑफिशियल्स को कॉल किया। इमरजेंसी मीटिंग हुई, फाइल्स चेक हुई। सब लोग दंग रह गए। 29 जनवरी 2018 को पीएनबी ने सीबीआई के पास कंप्लेंट फाइल की। 14 फरवरी 2018,
Speaker A
वैलेंटाइंस डे, उस दिन पीएनबी ने स्टॉक एक्सचेंज को ऑफिशियली बताया और जैसे ही न्यूज़ पब्लिक हुई, धमाका हो गया। मीडिया में हेडलाइंस छा गई। 14,356 करोड़ स्कैम। इंडियास बिगेस्ट बैंकिंग फ्रॉड नीरव मोदी फ्लीस कंट्री। PNB का शेयर प्राइस टूट गया। एक हफ्ते में 30%
Speaker A
गिर गया। हजारों करोड़ का मार्केट वैल्यू गायब। ताश का घर गिरने लगा। अब शुरू हुई नीरव मोदी को ढूंढने की कोशिश। सीबीआई ने केस फाइल किया। एनफोर्समेंट डिपार्टमेंट ने इन्वेस्टिगेशन शुरू किया। इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया। लेकिन नीरव
Speaker A
मोदी वो लंदन के एक महंगा फ्लैट में मजे कर रहा था। उसने बचने की कोशिश की। पैसा छुपाया। प्रॉपर्टीज अपने फैमिली के नाम कर दी। पार्टनर से दूर हो गया। लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी। इंडियन गवर्नमेंट ने उसकी
Speaker A
पासपोर्ट कैंसिल कर दी। प्रॉपर्टीज पर रेड हुई। मुंबई का ₹100 करोड़ का अलीबाग बंगलो गवर्नमेंट ने उसे डायनामाइट से ब्लास्ट करके गिरा दिया। वीडियो वायरल हुआ। पूरे इंडिया ने देखा। न्यूयॉर्क का $4.2 मिलियन डॉलर का अपार्टमेंट सीस। लंदन की
Speaker A
प्रॉपर्टीज सीस। पेंटिंग्स, कार्स, ज्वेलरी सब कुछ गवर्नमेंट ने पकड़ लिया। लेकिन नीरव को पकड़ना बाकी था। यूके गवर्नमेंट से एक्सट्राशन की रिक्वेस्ट हुई। लेकिन वो टाइम लगता है। मार्च 2019 लंदन के होलबर्न एरिया में एक बैंक क्लर्क काम कर रहा था। एक दिन वह ऑफिस जा रहा था।
Speaker A
अचानक उसकी नजर एक आदमी पर पड़ी। लंबी कोट, महंगा स्कार्फ और बीनी कैप। बैंक क्लर्क को लगा यह तो नीरव मोदी है। उसने तुरंत न्यूज़पेपर वाले को कॉल किया। टेलीग्राफ न्यूज़पेपर के जर्नलिस्ट आ गए। फोटो खींची और फिर वायरल। सब जगह वही फोटो
Speaker A
नीरव मोदी लंदन की सड़क पे। अपने 11,000 पाउंड के ऑस्ट्रच हाइट जैकेट में जैसे उसे कोई परवाह ही नहीं। इस फोटो ने सब बदल दिया। यूके पुलिस को प्रेशर आया। लोगों ने कहा फ्यूजिटिव खुलेआम घूम रहा है। कुछ दिन
Speaker A
बाद पुलिस ने नीरव मोदी को अरेस्ट कर लिया। अगर वह उस दिन दूसरा रास्ता ले लेता या कैप अच्छे से पहन लेता या बैंक क्लर्क थोड़ा लेट होता तो शायद वह आज भी बाहर होता। लेकिन किस्मत ने कुछ और ही सोचा था।
Speaker A
यही वह पल था जब सब बदल गया। नीरव मोदी को अरेस्ट कर लिया गया। लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं हुई। इंडिया ने यूके से रिक्वेस्ट की नीरव मोदी को वापस भेजो। यूके कोर्ट्स में केस चला। 2019, 2020, 2021, 2022 साल बीते गए। नीरव के लॉयर्स
Speaker A
ने हर तरीका ट्राई किया। उन्होंने कहा उसको मेंटल हेल्थ इश्यूज है। इंडिया की जेल सेफ नहीं है। वहां उसे टॉर्चर होगा। लेकिन यूके कोर्ट ने फाइनली 2022 में फैसला सुनाया। एक्स्ट्राडाइट नीरव मोदी टू इंडिया। लेकिन लीगल लूप होल्स की वजह से
Speaker A
वह आज भी लंदन की वंसवर्थ प्रजन में है। इंडिया वापस आना बाकी है। उधर इंडिया में हालात कुछ और थे। इस कैंप का सबसे बड़ा शिकार कौन था? आम लोग। वह लोग जिन्होंने PNB में अपनी लाइफ सेविंग्स रखी थी।
Speaker A
जिन्होंने सोचा था कि बैंक सेफ है। जिन्हें पता भी नहीं था कि एक आदमी बैंक के कंप्यूटर सिस्टम को हैक करके सालों से लूट रहा था। एक रिटायर्ड टीचर ने अपनी पूरी पेंशन पीएनबी में रखी थी। जब उसने
Speaker A
न्यूज़ देखी तो रात भर नींद नहीं आई। एक बिजनेसमैन ने अपनी बेटी की शादी के लिए पैसा सेव किया हुआ था। उसे लगा कि सब डूब गया। हालात इतने बुरे थे कि लोगों ने कहना शुरू कर दिया गवर्नमेंट बैंक सेफ नहीं है।
Speaker A
PNB को रिकवर करने में कई साल लग गए। उन्हें ₹1,000 करोड़ का नुकसान हुआ था। एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने नीरव मोदी की प्रॉपर्टीज बेचकर लगभग ₹600 करोड़ रिकवर किए। लेकिन बाकी पैसा खो गया। बैंक के अंदर भी बदलाव आए। शेट्टी और उसके साथियों
Speaker A
को अरेस्ट किया गया। इंटरनल इन्वेस्टिगेशन हुई। Swift और फिनाकल को कनेक्ट करने का सिस्टम बनाया गया ताकि ऐसा फिर से ना हो। लेकिन सबक बहुत महंगा पड़ा। वही आदमी जो मेडिसन एवन्यू पर बुटीक खोलने का सपना देखता था। आज एक आठ गुना 10 की जेल सेल
Speaker A
में है। वही आदमी जिसके साथ बिलियनर्स फोटो खिंाते थे। आज प्रिजनर्स के साथ खाना खाता है। पोएट एक जस्टिस हो गई। यह कहानी सिर्फ एक स्कैम की नहीं थी। यह कहानी है उस लालच की जो इंसान को इतना अंधा कर देता
Speaker A
है कि उसे सही गलत का फर्क ही नहीं रहता। नीरव मोदी के पास सब कुछ था। सक्सेसफुल बिजनेस, लग्जरी लाइफ, इज्जत लेकिन उसे और चाहिए था और जब और की चाहत हद से ज्यादा बढ़ जाती है, तब इंसान गिरता है। इस कहानी
Speaker A
से हमें यह सीख मिलती है कि कभी भी ऐसे स्कीम में पैसा मत लगाओ जहां गारंटी टू गुड टू बी ट्रू लगे। अगर कोई तुमसे कहता है 100% रिस्क फ्री रिटर्न्स तो समझ जाओ कि कुछ गड़बड़ है। दूसरी बात बैंकिंग
Speaker A
सिस्टम्स में चेकक्स एंड बैलेंसेस होने चाहिए। अगर PNB ने अपने Swift और फिनाकल को कनेक्ट रखा होता तो यह स्कैम पहले हफ्ते में पकड़ में आ जाता। 7 साल नहीं चलता। और तीसरी बात, सेलिब्रिटी इंडोर्समेंट या बड़े-बड़े बुटीकस देखकर
Speaker A
अंधे मत बनो। नीरव मोदी के पास सब कुछ था। शोरूम्स, ब्रांड एंबेसडर्स, मीडिया कवरेज। लेकिन वो सब झूठी इमारत थी। अंदर से बिल्कुल खोखला। आज मुंबई के ब्रडी हाउस ब्रांच की वो दीवारें आज भी याद करती होंगी उस दिन को जब 16 जनवरी 2018 को सच
Speaker A
सामने आया था। और नीरव मोदी, वो लंदन की जेल में बैठकर शायद सोचता होगा एक कागज ने मुझे बिलियनर बनाया और वही कागज मुझे जेल में ले आया। दोस्तों, अगर यह वीडियो पसंद आया हो तो एक लाइक जरूर करो। चैनल को
Speaker A
सब्सक्राइब करो ताकि ऐसे फाइनेंशियल स्टोरीज और स्कैम्स के बारे में आप जानते रहें। हम हर हफ्ते नई कहानी लाते हैं। स्कैम्स, बिजनेस वॉर्स, मार्केट क्रशेस सब कुछ। तब तक के लिए अपना पैसा संभाल के रखना और याद रखना अगर कोई चीज बहुत अच्छी
Speaker A
लग रही है तो शायद वह सच नहीं है।
Topics:नीरव मोदीPNB घोटालाबैंक स्कैमलेटर ऑफ अंडरटेइंगडायमंड बिजनेसगोकुलनाथ शेट्टीफेक एलओयूभारतीय बैंकिंगवित्तीय धोखाधड़ीक्रिस्टीज ऑक्शन











