भारत की सबसे बड़ी गोल्ड स्मगलिंग नेटवर्क की कहानी, दाऊद इब्राहिम से लेकर आधुनिक काल तक का ₹30,000 करोड़ का छुपा हुआ सोना कारोबार।
Key Takeaways
- भारत में सोने की तस्करी एक बड़ा और जटिल नेटवर्क है जो दशकों से चलता आ रहा है।
- सरकारी नीतियां और टैक्स दरें तस्करी के पैमाने को प्रभावित करती हैं।
- तस्करी के तरीके लगातार विकसित हो रहे हैं, जिससे पकड़ना मुश्किल होता है।
- दाऊद इब्राहिम का गोल्ड स्मगलिंग नेटवर्क अंडरवर्ल्ड और राजनीतिक कनेक्शन से जुड़ा था।
- सोना सिर्फ क्राइम नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति और अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है।
What the video covers
- 2019 में मुंबई एयरपोर्ट पर 18 सूडानी महिलाओं से ₹10 करोड़ के सोने की जब्ती हुई।
- भारत में सोने की मांग बहुत ज्यादा है लेकिन ज्यादातर सोना विदेश से आता है।
- 1968 में गोल्ड कंट्रोल एक्ट लागू होने के बाद सोने की तस्करी का दौर शुरू हुआ।
- हाजी मस्तान मिर्जा ने दुबई से सोना तस्करी का पहला बड़ा नेटवर्क बनाया।
- दाऊद इब्राहिम ने हाजी मस्तान से नेटवर्क संभाला और स्मगलिंग को बड़े पैमाने पर बढ़ाया।
- सोने की तस्करी में नए-नए तरीके अपनाए गए जैसे गोल्ड कैप्सूल, पाउडर, डबल लेयर बैग आदि।
- हवाला सिस्टम के जरिए दुबई और भारत के बीच पैसे का लेन-देन होता था।
- 1991 में भारत की अर्थव्यवस्था खुलने के बाद टैक्स कम हुआ लेकिन तस्करी कम नहीं हुई।
- 2012-2013 में सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से तस्करी फिर से बढ़ गई।
- 2019 में मुंबई डोंगरी में सबसे बड़ा बस्ट हुआ जिसमें 4522 किलो सोना जब्त किया गया।
Chapters
- 00:00मुंबई एयरपोर्ट पर सोना तस्करी का खुलासा
- 01:08भारत में सोने की मांग और इतिहास
- 02:131968 के बाद सोने की तस्करी का दौर
- 03:23हाजी मस्तान मिर्जा और उनका नेटवर्क
- 04:29दाऊद इब्राहिम का उदय और हवाला सिस्टम
- 06:47सोने की तस्करी के नए तरीके
- 07:56भारत की अर्थव्यवस्था में बदलाव और तस्करी पर प्रभाव
- 09:082019 का सबसे बड़ा बस्ट और वर्तमान स्थिति
- 11:24गोल्ड स्मगलिंग का भविष्य और निष्कर्ष
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Speaker A
2 अप्रैल 2019, मुंबई एयरपोर्ट टर्मिनल पर 18 औरतों को चेकिंग काउंटर के पास रोक लिया गया। सब सूडान से आई थीं। डीआरआई के ऑफिसर्स ने जब चेकिंग शुरू की तो जो निकला वो देखकर सबके होश उड़ गए। एक औरत की
Speaker A
स्किन पे गोल्ड डस्ट लगा हुआ था। दूसरी के कपड़ों में छुपे हुए गोल्ड कैप्सूल्स थे। तीसरी ने अपने बॉडी के अंदर यानी पेट के अंदर गोल्ड के कैप्सूल्स छुपा रखे थे। एक औरत पे ₹1 करोड़ का गोल्ड था
Speaker A
और 18 औरतों पे कुल ₹10 करोड़। लेकिन यह तो सिर्फ एक दिन की बात थी। सिर्फ एक एयरपोर्ट की सिर्फ 18 औरतों की। असली खेल तो इससे कहीं ज्यादा बड़ा था। ₹00 करोड़ का हिडन इकॉनमी। हर साल चुपचाप बिना किसी
Speaker A
को पता चले। यह है इंडिया की गोल्ड स्मगलिंग की कहानी। जहां टैक्स बचाने के लिए लोग अपनी बॉडी के अंदर सोना छुपाते हैं। जहां डिप्लोमेटिक बैग्स में बाथरूम फिटिंग्स की जगह गोल्ड आता है और जहां अंडरवर के सबसे बड़े डॉन ने अपनी पूरी
Speaker A
एंपायर सोने पर बनाई। किसी को नहीं पता था कि यह रात सब बदलने वाली है। इस कहानी की शुरुआत होती है 1947 से जब इंडिया आजाद हुआ। नया देश, नए सपने। लेकिन एक पुरानी [संगीत] आदत, सोना खरीदने की। भारत में
Speaker A
सोना सिर्फ एक मेटल नहीं है। यह इज्जत है। यह सिक्योरिटी है। यह शादी का तोहफा है। दिवाली का ट्रेडिशन है। बैंक बैलेंस का बैकअप है। दुनिया में सबसे ज्यादा सोना चाइना खरीदता है। और इसके साथ ही नंबर टू
Speaker A
पे इंडिया। लेकिन प्रॉब्लम यह थी कि इंडिया में सोना मिलता नहीं है। 90% सोना बाहर से दुबई, अफ्रीका, म्यांमार से इंपोर्ट करना पड़ता है। 1968 में सरकार ने कानून बनाया। द गोल्ड कंट्रोल एक्ट मतलब क्या? मतलब कि अब कोई भी आदमी अपनी मर्जी
Speaker A
से सोना इंपोर्ट नहीं कर सकता था। सिर्फ ज्वेलरी बनाने वाले लोग ही सोना ला सकते थे। वह भी सरकार की परमिशन से। सरकार ने सोचा था कि इससे इंडिया का पैसा बाहर नहीं जाएगा। लेकिन हुआ [संगीत] उल्टा। जब चीज
Speaker A
मिलती नहीं तो लोग चुरा के लाते हैं। जब रास्ता बंद हो जाता है तो लोग छोटे रास्ते ढूंढ लेते हैं। और यही हुआ सोने के साथ। 1968 के बाद शुरू हुआ इंडिया का सबसे बड़ा स्मगलिंग जमाना। और इस जमाने का सबसे बड़ा
Speaker A
हीरो था हाजी [संगीत] मस्तान मिर्जा। हाजी मस्तान तमिलनाडु के एक छोटे से गांव पनेकुलम से बॉम्बे आया था। गरीब, अकेला, कुछ नहीं था उसके पास। लेकिन एक चीज थी जो हाजी को सबसे अलग बनाती थी। उसका दिमाग। उसने देखा कि दुबई से सोना लाने में कितना
Speaker A
पैसा है। वहां सोना सस्ता, यहां महंगा। बीच में सिर्फ एक प्रॉब्लम, इंडियन गवर्नमेंट का टैक्स। हाजी ने सोचा टैक्स देना जरूरी है क्या? अगर चुपचाप लाएं तो और यहीं से शुरू हुआ इंडिया का गोल्डन स्मगलिंग एरा। हाजी मस्तान ने एक पूरा नेटवर्क खड़ा कर
Speaker A
दिया। दुबई से शिप्स आती थी केरल के समुद्र के किनारे पे रात के अंधेरों में। गोल्ड बिस्किट्स चमकते हुए, भारी महंगा। उन शिप्स से छोटे फिशिंग बोट्स में लोड होते थे। फिशरमैन जो कल तक सिर्फ मछली पकड़ते थे, अब सोना पकड़ते थे। बोट से गोल्ड उठता,
Speaker A
समुद्र के किनारे पर आता, फिर गाड़ियों में भर के सीधा मुंबई। डोंगरी के कलबा देवी बाजार। यहीं पर गोल्ड बनता, ज्वेलरी यहीं से पूरे इंडिया में जाता। हजी मस्तान बॉम्बे का गोल्ड किंग बन गया। लेकिन हजी अलग था। वो वायलेंट नहीं था। लोगों की मदद
Speaker A
करता था। गरीब की शादी करवाता था। मस्जिद बनवाता था। लोग कहते थे चोर हैं लेकिन दिल का साफ है। 1988 तक हजी मस्तान ने स्मगलिंग छोड़ दी और पॉलिटिक्स में घुस गया। लेकिन जाते वक्त उसने अपना रिप्लेसमेंट चूज़ कर लिया, एक 19 साल के
Speaker A
लड़के को जो एक पुलिस कांस्टेबल का बेटा था, जो डोंगरी की गलियों में बड़ा हुआ था, जिसका नाम था दाऊद इब्राहिम। उसे नहीं पता था कि यह फैसला उसकी जिंदगी बदल देगा। एक दिन दाऊद ने वह देख लिया जो किसी और ने
Speaker A
नहीं देखा था। सोना कैसे लाएं? यह तो हजी ने सिखा दिया था, लेकिन दाऊद को समझ आ गया कि असली पैसा मार्जिनस में है। समझो ऐसे मान लो दुबई में सोना है ₹100 का। इंडिया में वही सोना ऑफिशियली बिकता है ₹115 में।
Speaker A
क्योंकि बीच में गवर्नमेंट 15% टैक्स लगाती है। अब अगर तुम सोना चोरी से लाओगे बिना टैक्स दिए तो तुम्हारा कॉस्ट है ₹100। तुम बेचोगे ₹110 में। खरीदने वाला खुश। उसने ₹5 बचाए ऑफिशियल रेट से। तुम भी खुश। तुमने ₹10 कमाए बिना टैक्स दिए।
Speaker A
गवर्नमेंट के पास कुछ नहीं गया। अब यह ₹10 लगता है छोटा। 1 किलो सोने पे यह बन जाता है ₹11 लाख का प्रॉफिट। 10 किलो पे ₹1 करोड़ से ज्यादा का प्रॉफिट और दाऊद लाता था टन्स में। दाऊद ने पहले छोटे स्केल पर
Speaker A
ट्राई किया। 50 किलो। काम कर गया। फिर 100 किलो। फिर 500 किलो। हर बार सफलता। अब दाऊद को यकीन हो गया था कि यह फार्मूला काम करता है। लेकिन सिर्फ सोना लाना ही काफी नहीं था। पैसा कैसे भेजोगे दुबई? और
Speaker A
इसका जुगाड़ था हवाला। हवाला सिस्टम समझो। मान लो तुम इंडिया में एक आदमी को ₹1 लाख देते हो। वो अपने दुबई के भाई को फोन करता है। दुबई वाला भाई तुम्हारे सप्लायर को ₹1 लाख दे देता है। ना बैंक, ना रिसीट, ना
Speaker A
रिकॉर्ड, सिर्फ ट्रस्ट। और पहचान कैसे होती थी? WhatsApp पर करेंसी नोट की फोटो। ₹1 का नोट अगर नंबर मैच कर गया, पैसा डिलीवर। इतना सिंपल, इतना पावरफुल। अब शुरू हुआ असली खेल। देखते ही देखते दाऊद इब्राहिम बॉम्बे का सबसे पावरफुल आदमी बन
Speaker A
गया। 1974 में वो सिर्फ 19 साल का था। 1985 तक वो बॉम्बे की अंडरवर्ल्ड का राजा था। उसकी ऑर्गेनाइजेशन का नाम डी कंपनी। 5000 से ज्यादा मेंबर्स, हर महीने करोड़ का टर्नओवर। गोल्ड स्मगलिंग का स्केल बढ़ा, डोंगरी से दुबई तक, केरल समुद्र का किनारा
Speaker A
से म्यांमार बॉर्डर तक। सब जगह दाऊद का नेटवर्क। लेकिन स्मगलिंग में मेथड्स बदलते रहे। पहले गोल्ड बिस्किट्स आते थे, फिर लोग स्मार्ट बनने लगे। गोल्ड को पिघलाते, छोटे-छोटे सीड जैसी शेप में डालते, फिर खजूर के बीच में छुपा देते या कैप्सूल
Speaker A
बनाकर जैसे दवाई की गोली और निगल। कुछ लोग गोल्ड को पाउडर बना लेते हैं और दूसरे मेटल के साथ मिक्स करके ओर जैसा दिखाते हैं। बेल्ट के बकल में छुपाओ, टॉर्च की बैटरी के अंदर छुपाओ, बैग की डबल लेयर में
Speaker A
छुपाओ और सबसे खतरनाक, बॉडी के अंदर छुपाओ। एक बार नौ औरतों को मुंबई एयरपोर्ट पर पकड़ा गया। 18 किलो सोना बॉडी में। दाऊद की जिंदगी भी बदल गई। डोंगरी की गलियों से जहां पानी भी ढंग से नहीं था, अब वह
Speaker A
Mercedes में घूमता था। बड़ा घर, बड़े लोग, पॉलिटिशियंस से दोस्ती, बैंकर्स से सेटिंग। मीडिया उसे बॉम्बे का डॉन बुलाता था। लेकिन 1986 में एक मर्डर केस में दाऊद को भागना पड़ा। दुबई। वहीं से उसने इंडिया में स्मगलिंग चलाना शुरू किया। अब
Speaker A
डिस्टेंस से 12 फरवरी 1989, कर्नाटक केरल बॉर्डर। तलपड़ी चेक पोस्ट। डीआरआई के ऑफिसर्स ने दो कार्स रोक ली। अंदर से निकले 10,600 गोल्ड बिस्किट्स। 190 किलो से ज्यादा। आज के हिसाब से ₹100 करोड़ का माल। दाऊद का भेजा गया माल था।
Speaker A
फिर 1991 में समुंदर के किनारे पर गार्ड ने एक पाकिस्तानी शिप को रोका। 9.5 टन सिल्वर ₹8 करोड़ का दाऊद के लिए आ रहा था। शिप के ड्राइवर ने रोकने के लिए मना किया। गार्ड ने फायरिंग कर दी। लेकिन दाऊद कभी
Speaker A
नहीं पकड़ा गया। 1991 में इंडिया ने इकॉनमी खोल दी। एलपीजी रिफॉर्म्स, सोने पर टैक्स कम हुआ। स्मगलिंग का प्रॉफिट गिर गया। दाऊद ने सोचा अब गोल्ड में क्या रखा है? ड्रग्स में जाते हैं और फिर 1993 बॉम्बे ब्लास्ट्स दाऊद के नाम पे।
Speaker A
यूनाइटेड नेशंस ने उसे टेररिस्ट डिक्लेअर कर दिया। अमेरिका ने ₹25 करोड़ का इनाम रखा उसके सर पे। आज भी वह पाकिस्तान के कराची में रहता है। लेकिन पाकिस्तान मानता नहीं। दाऊद चला गया लेकिन गोल्ड स्मगलिंग नहीं रुकी। क्योंकि एक वार्निंग साइन आ
Speaker A
रहा था जो किसी ने नहीं देखा। 2012 इंडिया की इकॉनमी प्रॉब्लम में थी। बहुत ज्यादा गोल्ड इंपोर्ट हो रहा था। फॉरेन एक्सचेंज का पैसा बह रहा था। सरकार ने सोचा टैक्स बढ़ाओ, स्मगलिंग रुकेगी। 2012 में गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी थी 2%। 2013 तक पहुंची
Speaker A
15%। मतलब अगर दुबई में ₹100 का सोना है, इंडिया में ऑफिशियल प्राइस ₹115 और गेस करो क्या हुआ। स्मगलिंग दोबारा जिंदा हो गई। पहले से भी ज्यादा ताकत के साथ। लेकिन अब मेथड्स और भी स्मार्ट थे। स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोंस यानी एसईजेड। जहां ड्यूटी
Speaker A
फ्री सोना आ सकता था ज्वेलरी एक्सपोर्ट के लिए। स्मगलर्स ने किया क्या? सोना मंगवाया ड्यूटी फ्री। बेच दिया लोकल मार्केट में। बाहर कॉपर भेज दिया ज्वेलरी कह के। सिस्टम को चीट कर दिया। दुबई से हर हफ्ते टन्स सोना आ रहा था। सूडान से, म्यांमार से,
Speaker A
नेपाल बॉर्डर से, अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर, दिवाली, धनतेरस। तब तो पीक होता था और फ्राइडे को सबसे ज्यादा, क्यों पता नहीं लेकिन डाटा कहता है फ्राइडे को दूसरे दिनों से डबल स्मगलिंग। 2023 से 24 में यानी सिर्फ एक साल में इंडिया के एयरपोर्ट
Speaker A
से पकड़ा गया 3714 किलो सोना ₹81 करोड़ का। टोटल सीज डीआरआई, कस्टम्स सब मिलाके 5 टन से ज्यादा। लेकिन यह सिर्फ पकड़ा गया माल है, जो नहीं पकड़ा गया उसका कोई हिसाब नहीं। एक्सपर्ट्स बोलते हैं इंडिया की 1/3 गोल्ड डिमांड इललीगल
Speaker A
सोने से पूरी होती है। मतलब हर साल ₹00 करोड़ का सोना चोरी से इंडिया आता है और 2019 में हुआ सबसे बड़ा बस्ट मुंबई डोंगरी। वही डोंगरी जहां से दाऊद उठा। डीआरआई को टिप मिली। रेड मारी गई। शुभ ज़ोदर वाला नाम
Speaker A
का आदमी ट्रैवल बिजनेस करता था। लेकिन असली में वो डोंगरी का सबसे बड़ा गोल्ड स्मगलर था। उसके नेटवर्क ने दुबई से 4522 किलो सोना मंगवाया था। ₹1473 करोड़ का। 18 सुदनीज औरतें जिनके बारे में हमने शुरू में सुना। वो इसी नेटवर्क की
Speaker A
थीं। हर औरत बॉडी में ₹10 करोड़ लेकर आई थी। एक दूसरे को
Speaker A
लेकिन असली ब्लास्ट होने वाला था केरला में। 5 जुलाई 2020 संडे तिरुवनंथापुरम एयरपोर्ट केरला। कस्टम्स ऑफिसर्स को एक बैग मिली। बैग पे लिखा था यूएई कॉन्सुलेट डिप्लोमेटिक कारगो। डिप्लोमेटिक बैग्स को चेक नहीं किया जाता। यह इंटरनेशनल लॉ है।
Speaker A
लेकिन उस दिन एक ऑफिसर की नजर उस बैग पर टिकी रह गई। कुछ अजीब लग रहा था। यूएई एंबेसी के एक सीनियर ऑफिसर को बुलाया गया। उनकी परमिशन से बैग खोला गया। अंदर बाथरूम इक्विपमेंट दिखा। टैब्स, फिटिंग्स, नॉर्मल
Speaker A
सामान। लेकिन जब उन फिटिंग्स को खोला, चमक उठी सोने की 30 किलो, 24 कैरेट गोल्ड, 14 करोड़ 82 लाख का। डिप्लोमेटिक बैग में यूएई कंसोलेट के नाम पर। इंडिया में पहली बार ऐसा हुआ था कि किसी दूसरे देश के
Speaker A
डिप्लोमेटिक चैनल का इस्तेमाल गोल्ड स्मगलिंग के लिए हुआ हो। फिर शुरू हुई इन्वेस्टिगेशन। निकला नाम स्वप्ना सुरेश। पहले यूएई कंसोलेट में काम करती थी। फिर केरल गवर्नमेंट के आईटी डिपार्टमेंट में कंसलटेंट थी और उसके कनेक्शन थे एम शिवाशंकर तक आईएएस ऑफिसर। केरला के चीफ
Speaker A
मिनिस्टर के प्रिंसिपल सेक्रेटरी एकदम से पॉलिटिकल अर्थक्वेक अपोजिशन ने सीएम से इस्तीफा मांगा। मीडिया में हंगामा, इंटरनेशनल एंबरेसमेंट, एनआईए ने केस रजिस्टर किया। पहली बार गोल्ड स्मगलिंग में एंटी टेरर लॉ लगाया गया। क्योंकि शक था कि यह पैसा टेरर फंडिंग में जा रहा था।
Speaker A
लेकिन यूएई कंसोलेट का जो अटैचे था, जो असली मास्टरमाइंड था, वह 12 जून को ही इंडिया छोड़कर भाग गया। इन्वेस्टिगेशन से पहले ही स्वप्ना को अरेस्ट किया गया लेकिन 60 दिन में कस्टम्स चार्जशीट फाइल नहीं कर पाई। उसे बेल मिल गई। शिव शंकर को सस्पेंड
Speaker A
किया गया। लेकिन कोर्ट ने बोला ईडी ने ऑफिसर पर प्रेशर डाला कि सीएम का नाम लो। कोई प्रूफ नहीं है। केस चल रहा है आज भी। लेकिन ट्रुथ पूरी तरह से बाहर नहीं आया। यही वो पल था जब पूरे इंडिया को पता चला।
Speaker A
गोल्ड स्मगलिंग सिर्फ दाऊद जैसों की कहानी नहीं है। यह पॉलिटिशियंस तक, सरकारी अधिकारी तक, डिप्लोमेटिक चैनल्स तक सब तक पहुंची हुई है। केरला स्कैंडल के बाद सरकार ने सोचा टैक्स ही प्रॉब्लम है। टैक्स कम करते हैं। जुलाई 2024 गोल्ड
Speaker A
इंपोर्ट ड्यूटी 15% से गिराई 6% पे। सरकार का लॉजिक अगर टैक्स कम होगा तो स्मगलिंग का फायदा नहीं रहेगा। लोग लीगल तरीके से लाएंगे। शुरू के कुछ महीने सच में स्मगलिंग थोड़ी कम हुई। लेकिन फिर क्या हुआ? सोने की इंटरनेशनल प्राइस उड़ गई। 1
Speaker A
साल में 67% बढ़ गई। अक्टूबर 2025 तक 10 ग्राम सोना ₹1,28,395 का हो गया। अब कैलकुलेशन देखो। टैक्स भले 6% हो लेकिन प्राइस इतनी बढ़ गई कि स्मगलर्स का मार्जिन फिर से 11.5 लाख प्रति किलो हो गया। पहले से भी ज्यादा
Speaker A
स्मगलिंग फिर बढ़ गई। मई 2026 सरकार ने टैक्स फिर से बढ़ा दिया। 6% से सीधा 15% सर्कल कंप्लीट वापस वही। आज भी हर दिन डीआरआई दो केस पकड़ती है। हर दिन हर हफ्ते किलो सोना पकड़ा जाता है। सुदान से औरतें
Speaker A
आती हैं। बॉडी में सोना छुपा के। म्यांमार से नेपाल बॉर्डर क्रॉस करके सोना आता है। दुबई से डिप्लोमेटिक बैग्स में बांग्लादेश बॉर्डर से पोरस रूट्स से। वेस्ट बंगाल, दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु सबसे ज्यादा स्मगलिंग यहीं होती है। केरला के कोडवल्ली
Speaker A
टाउन में कैलीकट एयरपोर्ट से जो सोना आता है उसका 70% वहीं हैंडल होता है। मुंबई के कलबादेवी में स्मगल्ड गोल्ड को लीगल ज्वेलरी [संगीत] बना दिया जाता है। करोल बाग में चांदनी चौक में छोटी-छोटी दुकानें, पीछे एक कमरा, उसमें भट्टी, सोना
Speaker A
पिघलाओ, नई शेप दो, बैंगल्स बन गए, चेन्स बन गई। कोई पता नहीं लगा सकता कि यह सोना लीगल है या इललीगल। और सबसे बड़ी आयरनी इललीगल सोना गवर्नमेंट को टैक्स रेवेन्यू में नुकसान देता है। लेकिन दूसरी तरफ इंडिया की ज्वेलरी एक्सपोर्ट इंडस्ट्री को
Speaker A
बूस्ट देता है। क्योंकि सस्ता सोना मिलता है तो ज्वेलरी भी सस्ती बन जाती है। स्मगलिंग से इकॉनमी को नुकसान भी है और फायदा भी। यह हैरान करने वाली बात है। इंडिया की सोने की प्यार और गवर्नमेंट की टैक्स पॉलिसी दोनों के बीच में बसा है यह
Speaker A
300 करोड़ का छुपा हुआ एंपायर। यह कहानी सिर्फ सोने की नहीं थी। यह कहानी है उस लालच की जो इंसान को इतना अंधा कर देता है कि उसे सही गलत का फर्क नहीं रहता। यह कहानी है उस साइकिल की जो कभी खत्म नहीं
Speaker A
होती। टैक्स बढ़ाओ, स्मगलिंग बढ़े। टैक्स कम करो, प्राइस बढ़े, स्मगलिंग फिर बढ़े। और यह कहानी है उन हजारों लोगों की जिन्हें पता तक नहीं कि उनकी शादी का सोना शायद दुबई की किसी अंधेरी [संगीत] गली से चोरी करके आया था। शायद किसी औरत ने अपनी
Speaker A
बॉडी में छुपा के लाया था। शायद किसी डिप्लोमेट ने अपने डिप्लोमेटिक बैग में इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है जब तक इंडियंस का सोने से प्यार है और जब तक गवर्नमेंट उस प्यार को टैक्स से कंट्रोल
Speaker A
करने की कोशिश करेगी तब तक यह स्मगलिंग चलता रहेगा। कोई दाऊद जाए, कोई दूसरा आ जाएगा। कोई स्वप्ना पकड़ी जाए, कोई और डिप्लोमेटिक बैग भेजेगा। क्योंकि यह सिर्फ क्राइम नहीं है। यह इकोनॉमिक्स है। यह कल्चर है। यह मैथ है और मैथ कभी नहीं
Speaker A
बदलता। डोंगरी की [संगीत] वो गलियां जहां दाऊद खेला करता था। आज भी सोने के लिए धड़कती है। केरला का वो समुद्र का किनारा जहां हाजी मस्तान के गोल्ड बिस्किट्स उतरते थे। आज भी रात को आवाजें सुनती है। और मुंबई
Speaker A
एयरपोर्ट की वो चेकिंग काउंटर जहां सूदानीज औरतें खड़ी थी। आज भी हर हफ्ते नई कहानी देखती है। ₹00 करोड़ का हिडन इकॉनमी चलता रहेगा चुपचाप अंधेरों में। क्योंकि इंडिया का सोने से रिश्ता सिर्फ बिजनेस का नहीं दिल का है। दोस्तों अगर यह वीडियो
Speaker A
पसंद आया हो तो एक लाइक जरूर करो। वीडियो को हाइप करो। चैनल को सब्सक्राइब करो ताकि ऐसे फाइनेंशियल क्राइम और मनी की असली कहानियां आप तक पहुंचती रहे। हम हर हफ्ते नई कहानी लाते हैं। स्कैम से लेकर स्मगलिंग तक, अंडरवर से लेकर गवर्नमेंट
Speaker A
ऑपरेशंस तक। तब तक के लिए अपना पैसा संभाल के रखना। और अगली बार जब सोना खरीदो तो एक बार जरूर सोचो यह आया कहां से?
Topics:गोल्ड स्मगलिंगदाऊद इब्राहिमहाजी मस्तान मिर्जाभारत की अर्थव्यवस्थासोना तस्करीमुंबई डोंगरीहवाला सिस्टमगोल्ड कंट्रोल एक्टसोना इंपोर्ट ड्यूटीडीआरआई











