राधाकिशन दामानी की कहानी, जो DMart के मालिक और भारत के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति हैं, एक सादगी और चुप्पी की मिसाल।
Key Takeaways
- सफलता के लिए सादगी और फालतू चीजों से बचना जरूरी है।
- शेयर बाजार में धैर्य और समझदारी से काम लेना लाभकारी होता है।
- बिजनेस में स्थिरता और नियंत्रण से बड़ा स्केल हासिल किया जा सकता है।
- शोहरत की भूख न होना भी एक बड़ी ताकत है।
- मीडिया से दूर रहकर भी बड़ा प्रभाव और सम्मान पाया जा सकता है।
What the video covers
- राधाकिशन दामानी, DMart के मालिक, भारत के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति हैं जिनकी निजी जिंदगी बेहद सादगी और गुप्त है।
- दामानी का जन्म 1954 में मुंबई के माहेश्वरी मारवाड़ी परिवार में हुआ और उन्होंने पढ़ाई बीच में छोड़कर परिवार का छोटा व्यापार संभाला।
- 1980 के दशक में उन्होंने बॉल बेयरिंग्स का बिजनेस बंद कर शेयर बाजार में कदम रखा और शॉर्ट सेलिंग से बड़ा मुनाफा कमाया।
- 1992 में हर्षद मेहता के बाजार बुलबुले के खिलाफ दामानी ने शॉर्ट सेलिंग की और करोड़ों का मुनाफा कमाया।
- दामानी ने शेयर बाजार में सम्मान और पैसा दोनों कमाए, लेकिन मीडिया और सोशल मीडिया से दूर रहे।
- 1999 में उन्होंने रिटेल बिजनेस में कदम रखा और DMart की शुरुआत की, जो आज भारत की बड़ी रिटेल चेन है।
- DMart के स्टोर्स में कीमतें अन्य रिटेलर्स से 10-15% कम होती हैं और यह मॉडल स्थिरता और स्केल पर आधारित है।
- दामानी का बिजनेस मॉडल पारंपरिक फ्रेंचाइजी मॉडल से अलग है, जहां नियंत्रण और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
- उनका निवेश पोर्टफोलियो भी विविध है, जिसमें कई पुराने और मजबूत स्टॉक्स शामिल हैं।
- दामानी की सफलता का राज उनकी सादगी, धैर्य, और शोहरत से दूर रहने की सोच है।
Chapters
- 00:00DMart और राधाकिशन दामानी का परिचय
- 01:58दामानी की निजी जिंदगी और मीडिया से दूरी
- 02:48परिवार और प्रारंभिक जीवन
- 04:16शेयर बाजार में कदम और शुरुआती संघर्ष
- 05:56दामानी की सोच और निर्णय लेने का तरीका
- 07:18हर्षद मेहता के खिलाफ शॉर्ट सेलिंग
- 08:43शेयर बाजार में सम्मान और सफलता
- 10:08रिटेल बिजनेस में प्रवेश और DMart की शुरुआत
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Speaker A
एक काम कीजिए, सोचिए पिछले हफ्ते कब आप किसी DMart में गए थे? शायद रविवार को, शायद शनिवार। सुबह गाड़ी पार्क की, ट्रॉली ली, अंदर गए। बड़ा हॉल, फ्लोरोसेंट लाइट्स, एक लंबी कतार में चावल, दाल, शक्कर, तेल, सब साधारण ब्रांड्स पर कीमतें बाकी सबसे 10-15% कम। आप ट्रॉली भरते हैं, चेकआउट पर लंबी कतार, कैशियर तेजी से बारकोड स्कैन करता है, बिल आता है, आप पैसे देते हैं ₹1000 बचे। बच्चे जो बिग बा या Reliance फ्रेश में नहीं बचते, खुशी से बाहर निकलते हैं और घर जाते हुए एक बार सोचिए यह स्टोर किसका है?
Speaker A
DMart एक नाम जो आप हजार बार सुन चुके हैं, पर यह कंपनी कौन चलाता है? एक मिनट सोचिए, आपको पता है DMart भारत की एक बड़ी रिटेल चेन है, पर इसका मालिक कौन है?
Speaker A
मुकेश अंबानी नहीं, रतन टाटा नहीं, गौतम अडानी नहीं, मिस्त्री परिवार नहीं। तो कौन? आप पूछेंगे मुझे, मुझे क्यों नहीं पता?
Speaker A
जवाब है क्योंकि वो आदमी नहीं चाहता कि आपको पता हो। उनका नाम है राधाकिशन दामानी। भारत का दूसरा सबसे अमीर आदमी। ₹1500 करोड़ की नेटवर्थ और इस आदमी का कोई इंटरव्यू नहीं है। कोई पब्लिक स्पीच नहीं है। सोशल मीडिया पर कोई अकाउंट नहीं है।
Speaker A
मीडिया में बहुत कम तस्वीरें हैं। अगर आप Google पर राधाकिशन दामानी टाइप करें और तस्वीरों पर जाएं, पांच-छह तस्वीरें मिलेंगी। बस, वो भी ज्यादातर 20-30 साल पुरानी। जिस आदमी के पास 1500 करोड़ हैं, उसकी ज्यादातर हाल की तस्वीरें नहीं हैं।
Speaker A
यह कैसे संभव है? यह कहानी है उसी की। यह इंडियाज रिचेस्ट है। यहां हम सिर्फ चमक के नहीं, चुप्पी की भी कहानी सुनाते हैं। नया एपिसोड हर दिन, सब्सक्राइब करिए। मुफ्त है। अब रुकिए। एक सवाल पहला उठता है। भारत के
Speaker A
बड़े बिजनेसमैन को हम सब जानते हैं। मुकेश अंबानी हर महीने मीडिया में हैं। गौतम अडानी हर बड़े इवेंट में। रतन टाटा हर पुस्तकालय में उनकी किताबें। आनंद मह्रा Twitter पर बहुत सक्रिय, नंदन नीलकणी हर मंच पर। यह सब अपनी पहचान बनाते हैं। वो
Speaker A
चाहते हैं दुनिया उन्हें जाने। पर राधाकिशन दामानी अलग हैं। उनकी सोच है दुनिया मुझे जाने या ना जाने, मेरा बिजनेस अच्छा चलता रहे, यही काफी है। यह सोच कहां से आई? जवाब के लिए हमें वापस जाना होगा। बहुत पीछे, 1954 मुंबई। एक मारवाड़ी परिवार
Speaker A
में एक लड़का पैदा हुआ। नाम राधाकिशन दामानी। परिवार माहेश्वरी मारवाड़ी था। राजस्थान के बीकानेर से उनके पुरखे आए थे। पीढ़ियां पहले मुंबई में बस गए थे और वहां एक छोटा सा व्यापार जमा लिया था। माहेश्वरी समाज एक खास तरह का व्यापारी
Speaker A
समाज है। बहुत मेहनती, बहुत हिसाबी और बहुत चुप, दिखावा कम, काम ज्यादा। यह संस्कृति राधाकिशन दामानी के डीएनए में थी। परिवार में एक छोटा सा बिजनेस था। पिताजी शिवकिशन दामानी बॉल बेयरिंग्स बेचते थे। मतलब एक ऐसा मशीन का पुरजा जो
Speaker A
हर फैक्ट्री में लगता है। बिजनेस बहुत बड़ा नहीं था, पर परिवार चलाता था। मुंबई के एक मामूली इलाके में रहते थे। बच्चे स्कूल जाते, मां खाना बनाती, पिताजी सुबह दुकान जाते। राधाकिशन दामानी ने स्कूल किया। फिर कॉमर्स कॉलेज में दाखिला लिया।
Speaker A
यूनिवर्सिटी ऑफ बॉम्बे। पर पढ़ाई पूरी नहीं की। बीच में छोड़ दी। क्यों? कई कारण थे। पिता बीमार थे। बिजनेस संभालना था। और एक चीज राधाकिशन दामानी को क्लासरूम में बैठने की जगह बाजार में रहना अच्छा लगता था। मारवाड़ी परिवारों में अक्सर एक कहावत
Speaker A
होती है। किताब से ज्यादा बाजार सिखाता है। यह सिर्फ एक कहावत नहीं है। यह एक तरीका है। आप पढ़ाई करते हैं। अगर आप वकील या डॉक्टर बनना चाहते हैं। पर अगर आपको व्यापारी बनना है तो दुकान पर बैठो।
Speaker A
ग्राहक से बात करो। पैसा गिनो, नुकसान सहो, तब सीखोगे। राधाकिशन दामानी ने यह रास्ता चुना। उन्होंने पिता का बिजनेस संभाला। बॉल बेयरिंग्स, दिन भर ग्राहकों से मिलते। शाम को हिसाब किताब। यह कोई बड़ा सपना नहीं था। एक मामूली बिजनेस, एक
Speaker A
मामूली जिंदगी। पर उनके मन में एक चीज चल रही थी। शेयर बाजार, मुंबई के बीच में दलाल स्ट्रीट, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, जहां हर रोज करोड़ों रुपए बनते और बिगड़ते थे। राधाकिशन दामानी को यह दुनिया खींचती थी, पर वह कूदे नहीं, पहले देखा, पढ़ा, समझा। 1980
Speaker A
के दशक की शुरुआत में जब पिता का देहांत हुआ, राधाकिशन दामानी ने एक निर्णय लिया। बॉल बेयरिंग्स का बिजनेस बंद किया और दलाल स्ट्रीट में कूद गए। यहां रुकिए। 1980 का दलाल स्ट्रीट कैसा था? बहुत अलग आज के
Speaker A
मुकाबले। आज सब डिजिटल, शेयर खरीदना आसान, एक मोबाइल ऐप, एक क्लिक। उस जमाने में सब हाथ से, पेपर के सर्टिफिकेट, ब्रोकर्स की एक छोटी सी दुनिया, हर सौदा फोन पर, हर ट्रांजैक्शन कागज पर। और बाजार में कुछ बड़े नाम थे। राकेश झुनझुनवाला, आगे चलकर
Speaker A
इंडिया का वॉरेन बफेट बनेंगे। हर्षद मेहता, आगे चलकर बाजार का सबसे बड़ा घोटाला करेंगे। मनुमानिक, एक और बड़े ट्रेडर। और एक नया खिलाड़ी आया, राधाकिशन दामानी। वो अलग थे। दूसरे ट्रेडर्स तेजी से बोलते, तेजी से सौदे करते, पार्टी करते, दिखावा
Speaker A
करते। राधाकिशन दामानी चुप थे, शांत थे और बहुत ध्यान से देखते थे। उनकी एक पहचान बनी, मिस्टर वाइट। क्यों? क्योंकि वह हमेशा सफेद कपड़े पहनते थे। एक सफेद शर्ट, एक सफेद पट, सादे जूते, कोई ब्रांड नहीं, कोई फैशन नहीं। बस सादगी। एक प्रसिद्ध
Speaker A
कहानी है। दलाल स्ट्रीट के एक ब्रोकर ने एक बार दामानी से पूछा, "आप हर रोज एक ही कपड़े क्यों पहनते हैं?" दामानी ने जवाब दिया, क्या आपको पता है अगर मैं हर रोज एक ही कपड़ा पहनूंगा, तो मुझे रोज सुबह एक
Speaker A
निर्णय कम लेना पड़ेगा। और जब आप बाजार में हैं, हर निर्णय महंगा है। मैं अपने निर्णय बाजार के लिए बचाता हूं। यह एक छोटी सी कहानी है। पर इसमें दामानी की पूरी सोच है। फालतू चीजों पर समय नहीं
Speaker A
देना। ध्यान सिर्फ जरूरी चीजों पर। और बाजार में जब हर कोई अनिश्चितता में था, दामानी एक स्थिरता थे। अब आइए एक बड़ी कहानी पर। 1992, हर्षद मेहता। बिग बुल, उस वक्त के दलाल स्ट्रीट का सबसे बड़ा नाम। हर्षद मेहता ने एक तरीका निकाला था।
Speaker A
बैंकों के पैसे का इस्तेमाल करके शेयर खरीदना, शेयर बढ़ाना, बेचना, पैसा कमाना। यह तकनीक काम कर रही थी। पूरे बाजार के शेयर ऊपर जा रहे थे। एससीसी सीमेंट 300 से 3000 तक गई, 20 गुना बढ़त कुछ ही महीनों
Speaker A
में। मीडिया हर्षद मेहता को नायक बना रहा था। बिजनेस मैगजीन में कवर, टीवी पर इंटरव्यू, उनकी कारें, उनके बंगले, उनकी जिंदगी। पर राधाकिशन दामानी कुछ अलग दिख रहे थे। उन्हें लग रहा था यह बढ़त असली नहीं है। शेयर्स की कीमतें कंपनी के असली
Speaker A
मुनाफे से कहीं ज्यादा हो गई हैं। यह एक बबल है। और दामानी ने एक बड़ा निर्णय लिया। उन्होंने हर्षद मेहता के खिलाफ शॉर्ट सेल किया। मतलब शॉर्ट सेलिंग एक तकनीक है। आप एक शेयर उधार लेते हैं। आज की कीमत पर बेचते हैं और बाद में जब कीमत
Speaker A
कम होती है, सस्ते में खरीदते हैं। मुनाफा आपका। पर यह जोखिम भरा है। अगर शेयर की कीमत और बढ़ती है, आप बर्बाद हो जाते हैं। राधाकिशन दामानी ने यह जोखिम लिया। हर्षद मेहता के पसंदीदा शेयर्स के खिलाफ। और
Speaker A
अप्रैल 1992 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने हर्षद मेहता को कर्ज चुकाने के लिए कहा। हर्षद मेहता के पास पैसा नहीं था। बाजार में चर्चा, डर, पैनिक। शेयर गिरने लगे तेजी से। एससीसी सीमेंट 3000 से वापस 500 तक आ गई।
Speaker A
राधाकिशन दामानी जो शॉर्ट थे, हर गिरते शेयर के साथ पैसा बना रहे थे। कुछ कहते हैं इस एक एपिसोड में दामानी ने 100 करोड़ बनाए। उस जमाने में 100 करोड़। आज की दृष्टि से 1000 करोड़ से ज्यादा। और एक
Speaker A
मजेदार बात, हर्षद मेहता की गिरावट के दौरान बहुत से ट्रेडर्स बर्बाद हुए। आत्महत्या तक की कुछ ने। बहुत से बैंक डूबने के करीब आए। राधाकिशन दामानी ने एक काम किया जो किसी ने नहीं किया। उन्होंने अपने मुनाफे का कुछ हिस्सा चुपचाप उन
Speaker A
ट्रेडर्स की मदद के लिए दिया जो बर्बाद हुए थे। यह कभी मीडिया में नहीं आया। कोई नाम नहीं, कोई पब्लिसिटी नहीं। पर बाजार के अंदर सब जानते थे। और इसी बात ने दामानी को एक ट्रेडर का ट्रेडर बना दिया। बाजार
Speaker A
में पैसा बहुत से लोग बनाते हैं। पर बाजार के लोगों का सम्मान बहुत कम लोग पाते हैं। दामानी ने दोनों पाए। अब रुकिए। यह कहानी क्यों जरूरी है? क्योंकि इसके बाद राधाकिशन दामानी एक मिथक बन गए। दलाल स्ट्रीट पर हर ट्रेडर मिस्टर वाइट का नाम
Speaker A
जानता था। राकेश झुनझुनवाला जो आगे चलकर इंडिया के वॉरेन बफेट बने, कई बार दामानी को अपना गुरु कहते थे। झुनझुनवाला ने एक इंटरव्यू में कहा था, अगर बाजार में कोई एक आदमी है जिसकी सलाह मैं बिना सवाल के
Speaker A
मानूंगा, वो है आर के दामानी। बाजार के अंदर दामानी एक देवता थे। बाजार के बाहर कोई नहीं जानता था। यह वह जगह थी जहां राधाकिशन दामानी रहना चाहते थे। अंदर सम्मानित, बाहर अनजान। अब आइए दूसरी कहानी पर। 1999, राधाकिशन दामानी 45 के थे। शेयर
Speaker A
बाजार में बहुत पैसा बना चुके थे। पर एक चीज उन्हें परेशान कर रही थी। बाजार में पैसा बनाना एक अलग खेल है। यह आपकी होशियारी पर निर्भर करता है। आपकी समय पर, आपके धैर्य पर। पर बाजार में पैसा बनाना
Speaker A
एक रियल बिजनेस नहीं है। आप कुछ नहीं बना रहे, कुछ नहीं बेच रहे। आप सिर्फ चीजें खरीद और बेच रहे हैं। दामानी कुछ बनाना चाहते थे। उन्होंने एक छोटी सी चीज की। मुंबई में अपना बाजार नाम की एक रिटेल चेन
Speaker A
थी। दामानी ने उसकी एक फ्रेंचाइजी ली। मतलब अपना बाजार के बैनर के नीचे एक स्टोर चलाया। यह काम कैसा रहा? बहुत अच्छा नहीं। फ्रेंचाइजी मॉडल में आपका नियंत्रण कम होता है। सामान का चुनाव, दाम, मार्केटिंग सब मुख्य कंपनी तय करती है। दामानी को यह
Speaker A
पसंद नहीं आया। पर उन्हें एक बात सीख मिली। रिटेल बिजनेस में बहुत संभावना है। भारत बदल रहा है। मध्य वर्ग बढ़ रहा है और लोग सस्ता अच्छा सामान एक ही जगह पर।
Speaker A
पसंद नहीं आया। पर उन्हें एक बात सीख मिली। रिटेल बिजनेस में बहुत संभावना है। भारत बदल रहा है। मध्य वर्ग बढ़ रहा है और लोग सस्ता अच्छा सामान एक ही जगह पर पाना चाहते हैं। पर इसके लिए एक नया मॉडल
Speaker A
चाहिए। राधाकिशन दामानी ने सोचा फिर सोचा फिर बहुत सोचा और 2002 में एक स्टोर खोला मुंबई के पवई में नाम रखा dमar डी दामानी से और यहां से शुरू हुई भारत के रिटेल इतिहास की सबसे शांत क्रांति पहला स्टोर बहुत छोटा था शायद 4 5000
Speaker A
स्क्वायर फीट कोई बड़ी मार्केटिंग नहीं कोई उद्घाटन समारोह नहीं कोई सेलिब्रिटी नहीं बस एक दिन स्टोर खुला पवन दुबई के लोगों को पता चला कि कोई एक नई दुकान खुली है। चावल वहां सस्ता है। दाल वहां सस्ती है। लोग आने लगे। फिर और लोग फिर मोहल्ले
Speaker A
के लोग फिर बाहर के मोहल्ले के लोग। स्टोर मुनाफे में आ गया। राधाकिशन दामानी ने तय किया। यह काम करता है। अगला स्टोर खोलते हैं। पर अगला स्टोर तुरंत नहीं खोला। दो-तीन साल इंतजार किया। पहला स्टोर मजबूत हुआ। फिर दूसरा फिर तीसरा। फिर चौथा 25
Speaker A
साल पहले एक स्टोर आज 400 से ज्यादा यह तेज नहीं था पर पक्का था dमar दूसरी रिटेल चेन से अलग कैसे थी समझिए बिग बा किशोर बयानी की कंपनी मॉल जैसा माहौल चमकीली लाइट्स बड़े डिस्काउंट साइंस ऐसी मार्केटिंग Reliance फ्रेश मॉडर्न लुक
Speaker A
ब्रांडेड सामान एक्सक्लूसिव लाइंस dमar बिल्कुल उलटा बहुत मामूली बिल्डिंग कम लाइट ऐसी कम साइंस कम मार्केटिंग बजट लगभग जीरो पर अंदर सब जरूरी सामान हर ब्रांड का बिग बाजार से 10-15% सस्ता हर बार कैसे दामानी का मॉडल बहुत सरल था पर बहुत जरूरी
Speaker A
एक स्टोर्स खुद के थे किराए पर नहीं जब आप किराया नहीं देते आपका खर्च कम होता है दो मार्केटिंग कम मीडिया में विज्ञापन नहीं टीवी पर नहीं ब्रांड एंबेसडर नहीं पैसा बचा। तीन कोई लग्जरी एक्सपीरियंस नहीं। डीमार्ट में जाना है तो सस्ती चीजें
Speaker A
खरीदने चमक के लिए नहीं। चार सप्लायर्स के साथ बहुत सख्त बातचीत। दामानी ने हर सप्लायर से मोलभाव किया। सबसे सस्ता दाम लिया। पांच सीमित विस्तार। दामानी ने हर साल थोड़े-थोड़े स्टोर्स खोले। तेजी से नहीं बढ़े। हर स्टोर मुनाफा कमाए तब अगला।
Speaker A
इस मॉडल में मार्जिन कम होते। पर एक स्थिरता होती। और एक स्केल जब बना तो बहुत बड़ा हो जाता। खासतौर पर पॉइंट नंबर एक स्टोर्स खुद के बहुत जरूरी है। समझिए जरा बिग बा ने अधिकतर स्टोर्स किराए पर लिए
Speaker A
मॉल्स में बड़े डेवलपर्स से। हर महीने लाखों रुपए रेंट। अगर बिजनेस अच्छा है, रेंट देना आसान। अगर बिजनेस गिरा, रेंट का बोझ कमर तोड़ देता है। dमar ने एक अलग चुनाव किया। दामानी ने अपनी जमीन खरीदी। उस पर स्टोर बनाया। अब रेंट का सवाल नहीं।
Speaker A
जमीन की कीमत समय के साथ बढ़ी और कंपनी की बैलेंस शीट पर एक स्थाई संपत्ति। जब कोविड आया 2020 में और हर स्टोर बंद होना पड़ा। बिग बा रेंट नहीं दे पाई। आपने एपिसोड 16 में देखा। डूबने लगी। dमar पर रेंट का बोझ
Speaker A
नहीं था। उसने धैर्य से दो-ती महीने झेले। फिर खुली बढ़ती रही। यह एक छोटा सा निर्णय था 20 साल पहले पर उसका असर आज तक है। 2002 से 2017 15 साल Dमar चुपचाप बढ़ा। एक स्टोर फिर पांच फिर 20 फिर 100 फिर 200 और
Speaker A
राधाकिशन दामानी हमेशा की तरह चुप रहे। मार्च 2017 मुंबई बीएसई डीमार्ट आईपीओ ले रही थी। आईपीओ मतलब कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट हो रही थी। प्राइस बैंड ₹290 से ₹300 रिटेल इन्वेस्टर्स को खरीदने का मौका। आईपीओ की मांग पूरे 104 गुना ओवर
Speaker A
सब्सक्राइब यानी ₹1 के शेयर के लिए ₹14 के आर्डर लिस्टिंग के दिन 21 मार्च 2017 शेयर ₹300 पर इशू हुआ था। पहले दिन के अंत में ₹622, 104% उछाल भारत के इतिहास के सबसे अच्छे आईपीओ में से एक और रातोंरात राधाकिशन
Speaker A
दामानी की नेटवर्थ ₹400 करोड़ के पार। पर एक बार ध्यान दीजिए। उस दिन कोई बड़ा सेलिब्रेशन नहीं था। कोई बीएसआई के घंटे बजाने की तस्वीर नहीं। कोई मीडिया कॉन्फ्रेंस नहीं। दामानी ने एक छोटा सा बयान जारी किया। हम अपने ग्राहकों और
Speaker A
कर्मचारियों के साथ खड़े रहेंगे। बाकी सब बातें बेकार हैं। बस इतना और चुप। अगले साल Dमar का शेयर बढ़ता गया। 2017 में लिस्टिंग प्राइस 300 2018 10500 2019 2000 2020 4000 के पार 2025 5000 मार्केट कैप ₹ लाख
Speaker A
करोड़ के करीब। समझिए जरा यह क्या है? 3 लाख करोड़ हल्दीराम की 85000 करोड़ की वैल्यू्यूएशन से तीन गुना से ज्यादा Maruti Suzuki के बराबर nstle इंडिया से ज्यादा एक ऐसी कंपनी जो ज्यादातर बाहर से एक मामूली सी रिटेल चेन दिखती है। स्टॉक
Speaker A
मार्केट में भारत की टॉप 25 कंपनियों में है। यह क्या है? यह साइलेंट कंपाउंडिंग का जादू है। हर तिमाही मुनाफा हर साल विस्तार 2025 साल और एक छोटा सा बीज एक विशालकाय पेड़ बन जाता है। राधाकिशन दामानी भारत के
Speaker A
दूसरे सबसे अमीर आदमी मुकेश अंबानी के बाद गौतम अडानी के बाद बाद कुछ साल पहले अडानी से भी ऊपर रहे। और इस पूरे दौर में दामानी ने कितने इंटरव्यू दिए? लगभग शून्य। टीवी पर कितनी बार आए? लगभग शून्य सोशल मीडिया
Speaker A
पर कितने पोस्ट लगभग शून्य यह एक आदमी है भारत का दूसरा सबसे अमीर पर मीडिया में लगभग अदृश्य अब आइए एक बात पर मिस्टर वाइट का दर्शन राधाकिशन दामानी की चुप्पी कोई दुर्घटना नहीं है। यह एक रणनीति है। समझिए
Speaker A
जरा जब आप मीडिया में हैं आप पर ध्यान रहता है। हर गलती बड़ी हो जाती है। हर बात विवादास्पद हो जाती है। हर कथन को बार-बार तोला जाता है। राधाकिशन दामानी को यह सब नहीं चाहिए था। उनका सारा ध्यान डीमार्ट
Speaker A
पर, कंपनी पर, बिजनेस पर। अगर मैं इंटरव्यू देने में समय लगाऊंगा तो dमar पर ध्यान कम होगा। अगर मैं सोशल मीडिया पर रहूंगा तो खरीदारी देखने का समय कम होगा। अगर मैं कॉन्फ्रेंस में जाऊंगा तो स्टोर मैनेजमेंट में कम। यह एक अपॉर्चुनिटी
Speaker A
कॉस्ट का सोच है। हर मिनट जो आप किसी एक चीज में लगाते हैं, किसी और चीज से छीनते हैं। दामानी का चुनाव मीडिया से छीनकर बिजनेस को दिया और परिणाम सामने है। dमar आज भारत की सबसे मुनाफे वाली रिटेल चेन
Speaker A
है। मार्जिन Reliance फ्रेश से दोगना। डेप्ट लगभग जीरो। हर क्वार्टर पिछले से बेहतर। बिग बाजार बंद हो गई। आपने एपिसोड 16 में देखा मॉल बंद हो रहे हैं। ब्रांडेड चे्स संघर्ष कर रही हैं। dमar चुपचाप बढ़ती जा रही है। अब आइए दामानी के बारे
Speaker A
में जो थोड़ी सी बातें हम जानते हैं वो मुंबई में रहते हैं। मालाबार हिल एक भव्य अपार्टमेंट उनकी एक प्रसिद्ध रियलस्टेट है। राधा महल दक्षिण मुंबई का एक प्रतिष्ठित बिल्डिंग। उनकी एक छोटी सी कार है। Maruti आम कोई फरारी नहीं कोई बent
Speaker A
नहीं। वह शाकाहारी हैं, धार्मिक हैं, अधिकतर समय मुंबई में बिताते हैं। एक प्रसिद्ध कहानी है दामानी कभी विदेश नहीं गए। हां, दूसरा सबसे अमीर भारतीय और शायद कभी विदेश नहीं गए। कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं। कुछ बार गए पर बहुत कम। उनके दो
Speaker A
बच्चे हैं मनीषा दामानी और ज्योति दामानी। मनीषा दामानी डीमार्ट का कुछ हिस्सा संभालती है। पर वह भी मीडिया से दूर हैं। उनके भाई गोपीशन दामानी भी एक बड़े इन्वेस्टर हैं। पर वह भी चुप। पूरा परिवार चुप एक साइलेंट डायनेस्टी। अब समझिए जरा
Speaker A
दामानी का पैसा कहां है? DMart उनकी सबसे बड़ी संपत्ति है। 3 लाख करोड़ की कंपनी में उनकी हिस्सेदारी 80% के करीब। मतलब dमar से उनकी निजी संपत्ति लगभग 2.5 लाख करोड़। पर dमar से बाहर भी दामानी ने बहुत
Speaker A
पैसा बनाया है। वीएसटी इंडस्ट्रीज तंबाकू कंपनी दामानी की बड़ी हिस्सेदारी ट्रेंड टाटा की रिटेल कंपनी दामानी का हिस्सा सुंदर रामन ब्रdर्स इंडिया सीमेंट्स ब्लू डार्ट एंड मानसी फूड और कई पुराने स्टॉक्स Hero Honda ACC सीमेंट HDFC बैंक जो
Speaker A
स्टॉक्स उन्होंने 2530 साल पहले खरीदे थे आज 50000 गुना बढ़े हैं। यह एक कंपाउंडिंग का जादू है समय में पैसा बढ़ाने का और दामानी जिनके पास सबसे ज्यादा समय था बाजार में सबसे ज्यादा कमाई की एक बात समझिए राकेश झुनझुनवाला दामानी के दोस्त
Speaker A
2022 में मरे उनकी मृत्यु पर पूरे देश में शोक टीवी पर खबरें बिजनेस मीडिया में विशेष कवरेज और दामानी दामानी कहीं नहीं दिखे ना श्रद्धांजलि सभा में ना मीडिया में ना सोशल मीडिया पर बाद में पता चला दामानी झुनझुनवाला के परिवार के साथ
Speaker A
चुपचाप मिले। उनकी बेटी को मदद की। उनकी कंपनी रेयर एंटरप्राइजेस के निवेश में सलाह दी। सब चुपचाप। यह दामानी और झुनझुनवाला की दोस्ती 70 के दशक की थी। दोनों ने मुंबई के बाजार में साथ शुरुआत की। दोनों ने 500,000 गुना रिटर्न देखे।
Speaker A
दोनों ने हर्षद मेहता को साथ-साथ पढ़ा। पर फिर रास्ते थोड़े अलग हुए। झुनझुनवाला ने मीडिया को अपनाया। टीवी इंटरव्यू दिए। बिजनेस चैनलों पर बहसें की। एक पब्लिक फिगर बने। दामानी ने मीडिया को टाला और एक इनविज़िबल फिगर बने। दोनों रास्ते अच्छे
Speaker A
थे। दोनों ने पैसा बनाया। दोनों ने इज्जत कमाई। पर दामानी का रास्ता थोड़ा अलग था। थोड़ा साइलेंट। जब झुनझुन वाला मरे पूरे देश ने रोया। जब दामानी मरेंगे शायद देश को बहुत बाद में पता चलेगा और शायद वही
Speaker A
तरीका है जो दामानी चाहते हैं। बाजार में अमर रहना एक चीज है। मीडिया में अमर रहना एक और दामानी ने बाजार वाला रास्ता चुना और शायद वही आखिर में अब बस ज्यादा गहरा अमर है। यह दामानी का तरीका है। बाहर से
Speaker A
कुछ नहीं दिखता। अंदर से सब हो जाता है। अब रुक कर एक तुलना सोचिए। पिछले एपिसोड में हमने मीर उस्मान अली खान देखा। दुनिया के सबसे अमीर पर पैसा अपने पास रखा। मरने के बाद बिखर गया। राधाकिशन दामानी भारत के
Speaker A
दूसरे सबसे अमीर पर पैसा बिजनेस में डाला। डीमार्ट बनाई हर साल और पैसा बनाया। दामानी ने एक चीज की जो निजाम ने नहीं की। उन्होंने पैसे को काम करवाया बस जमा नहीं किया। बायजू ने पैसे को बहुत तेजी से खर्च
Speaker A
किया और गमवाया। Paytm ने पैसे को बहुत जगह बांटा और सिकुड़ी। किशोर बयानी ने पैसा उधार लिया और हार गया। निजम ने पैसा जमा किया और बिखर गया। दामानी ने एक अलग रास्ता निकाला। पैसा कमाओ, पैसे को डंडे
Speaker A
में लगाओ, ढंडा बढ़े, पैसा फिर कमाओ, फिर लगाओ और चुप रहो। यह एक बहुत सरल सूत्र है। पर सबसे मुश्किल भी क्योंकि इसके लिए आपको शोहरत की भूख नहीं होनी चाहिए। और आज के जमाने में शोहरत की भूख सबसे आम बीमारी
Speaker A
है। एक आखिरी बात जब आप अगली बार डीमार्ट में जाएं एक बार रुकिए। वो शेल्व्स देखें, वो लाइट्स देखें, वो ट्रॉली देखें, वो कैशियर देखें। यह सब एक आदमी का काम है। जिसने 70 साल से दलाल स्ट्रीट में कुछ
Speaker A
नहीं कहा। जिसने 25 साल डीमार्ट चलाते हुए कुछ नहीं कहा। जिसकी आज भी ज्यादातर तस्वीरें 20 साल पुरानी है। राधाकिशन दामानी मिस्टर हाइट। और शायद आज के जमाने में सबसे बड़ा सबका यही है। आज सब कुछ लाउड है। हर कोई कहना चाहता है। हर कोई
Speaker A
दिखाना चाहता है। हर कोई वायरल होना चाहता है। पर पैसा असली पैसा चुप्पी में बनता है। दामानी ने यह सीख ली और दुनिया को सिखा रहे हैं बिना कुछ कहे। और शायद इसीलिए वह डीमार्ट आज भी बढ़ रहा है। जब
Speaker A
बाकी रिटेल कंपनियां संघर्ष कर रही हैं। जब बिग बाजार बंद हो गया। जब Reliance फ्रेश भारी निवेश के बावजूद मुनाफे के लिए लड़ रहा है। जब फोन पे और Google P के जमाने में पारंपरिक रिटेल को नया जीवन
Speaker A
देना मुश्किल है। डीमार्ट चुपचाप मुनाफा कमा रहा है। दामानी ने अपनी जिंदगी में एक भी ट्वीट नहीं किया। पर उन्होंने 1 करोड़ से ज्यादा परिवारों के घर का राशन सस्ता कर दिया। हर महीने एक ट्वीट या एक मुनाफा।
Speaker A
दामानी का जवाब साफ है और भारत के नौजवान बिजनेसमैन के लिए एक संदेश है। अगर आपको अमीर बनना है, चुप रहना सीखो। काम पर ध्यान दो और लंबा खेलो। राधाकृष्ण दामानी ने यह तीनों किए और भारत के दूसरे सबसे
Speaker A
अमीर आदमी बन गए। बिना किसी से कहे बिल्कुल चुप। और एक आखिरी सोच। राधाकिशन दामानी की कहानी सिर्फ एक आदमी की कहानी नहीं है। यह भारत के एक नए दौर की कहानी है। एक ऐसा दौर जहां आप शोर मचाए बिना भी
Speaker A
बड़े हो सकते हैं। जहां आप टीवी पर आए बिना भी भारत के दूसरे सबसे अमीर बन सकते हैं। जहां आप अपने नाम को ब्रांड बनाए बिना भी एक 3 लाख करोड़ की कंपनी खड़ी कर सकते हैं। यह संभव है। दामानी ने साबित
Speaker A
किया और यह शायद आज की भारत की सबसे प्रेरणादायक कहानी है। उन सबके लिए जो सोचते हैं मेरे पास इंस्टा फॉलोवर्स नहीं है। मेरा कोई ब्रांड नहीं है। मेरी कोई पहचान नहीं है। मैं कैसे आगे बढूंगा? जवाब काम करो, बेहतर करो। फिर और बेहतर और चुप
Speaker A
रहो। दामानी की कहानी इसी की पुष्टि है। अगर यह कहानी आपको कुछ सोचने पर मजबूर करे। सब्सक्राइब करें और इसे उस दोस्त को भेजें जो सोचता है कि कामयाबी के लिए शोर जरूरी है। पूछिए क्या वो मिस्टर वाइट के
Speaker A
बारे में जानते हैं? इंडियास रिचेस्ट नया एपिसोड कल मिलते
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