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The ₹10,000 Crore Family Nobody Knows Behind Coca-Cola

भारत के लधानी परिवार की छुपी हुई कोका कोला बॉटलिंग कंपनी की कहानी, जिसकी वैल्यू ₹10,000 करोड़ से अधिक है।

Key Takeaways

  • कोका कोला की बॉटलिंग भारत में स्थानीय परिवारों द्वारा की जाती है, जिसमें लधानी परिवार सबसे बड़ा है।
  • लधानी परिवार ने कोका कोला के भारत में पुनः प्रवेश के समय सही समय पर सही निर्णय लेकर बड़ा बिजनेस बनाया।
  • परिवार ने मीडिया से दूरी बनाए रखी और अपनी पहचान गुप्त रखी।
  • परितोष लधानी ने कंपनी के बिजनेस मॉडल को बदलते समय के अनुसार ग्रीन एनर्जी और अन्य नए क्षेत्रों में विस्तार किया।
  • भारत में बड़े पैमाने पर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क बनाना कोका कोला जैसे ब्रांड के लिए सफलता की कुंजी है।

What the video covers

  • कोका कोला भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाले ब्रांडों में से एक है, लेकिन इसकी बोतलें कोका कोला कंपनी नहीं भरती।
  • एसएलएमजी बेरेजेस नामक कंपनी, जो लधानी परिवार के स्वामित्व में है, भारत में कोका कोला की बॉटलिंग करती है।
  • लधानी परिवार ने 1992 में कोका कोला के भारत में वापसी के समय बॉटलिंग पार्टनर बनने का निर्णय लिया।
  • उत्तर प्रदेश और बिहार सहित उत्तर भारत में एसएलएमजी के कई प्लांट और डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क हैं।
  • कोका कोला की एक बोतल का लगभग 20-30% मुनाफा बॉटलर को जाता है, जिससे लधानी परिवार का कारोबार हजारों करोड़ में पहुंच गया है।
  • परिवार ने कभी आईपीओ नहीं किया और मीडिया में उनकी जानकारी बहुत कम है, वे बहुत ही गुप्त और चुपचाप काम करते हैं।
  • शिवनाथ लधानी के निधन के बाद उनके बेटे परितोष लधानी ने कंपनी की कमान संभाली है।
  • परितोष लधानी ने कंपनी को बॉटलिंग से आगे बढ़ाकर ग्रीन एनर्जी, सोलर और विंड पावर, और वेस्ट टू एनर्जी जैसे नए वर्टिकल्स में निवेश शुरू किया है।
  • एसएलएमजी का अयोध्या प्लांट भारत के सबसे बड़े बॉटलिंग प्लांट्स में से एक है और इसमें रिन्यूएबल एनर्जी का उपयोग हो रहा है।
  • परिवार की सफलता का राज उनके स्थानीय नेटवर्क, मेहनत और दीर्घकालिक सोच में है।

Answers

Questions about this video

कोका कोला की बोतलें भारत में कौन भरता है?

भारत में कोका कोला की बोतलें कोका कोला कंपनी नहीं बल्कि भारतीय लधानी परिवार की एसएलएमजी बेरेजेस कंपनी भरती है।

लधानी परिवार ने कोका कोला के साथ कैसे साझेदारी की?

1992 में कोका कोला के भारत में वापसी के समय, जब कई बड़े नाम बॉटलिंग पार्टनर बनने से मना कर रहे थे, लधानी परिवार ने हां कहा और उत्तर भारत में बॉटलिंग नेटवर्क स्थापित किया।

परितोष लधानी ने कंपनी के लिए कौन से नए बिजनेस वर्टिकल चुने हैं?

परितोष लधानी ने ग्रीन एनर्जी, सोलर और विंड पावर, और वेस्ट टू एनर्जी जैसे नए क्षेत्रों में निवेश शुरू किया है ताकि कंपनी का भविष्य सुरक्षित हो सके।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
कोका कोला आज आपने पी है? कल पी थी या आज दोपहर पीने वाले हैं? ज्यादा संभावना हां, क्योंकि कोका कोला भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाले ब्रांडों में से एक है। हर साल अरबों बोतलें, हर शहर, हर गांव, हर दुकान। पर एक सवाल जो शायद आपने कभी नहीं सोचा। वो बोतल जो आपके हाथ में आती है, कौन भरता है? जवाब चौंकाने वाला है। कोका कोला कंपनी नहीं भरती। एक भारतीय परिवार भरता है। एक ऐसा परिवार जिसका नाम आपने शायद कभी नहीं सुना, जिसकी कहानी मीडिया में नहीं आती, जिसका कोई आईपीओ नहीं हुआ, जिसके बारे में कोई डॉक्यूमेंट्री नहीं बनी। पर वो भारत के सबसे चुपचाप बने बिजनेस परिवारों में से एक है। 10,000 करोड़ की कंपनी, 5 अरब डॉलर का मूल्यांकन और एक ऐसी विरासत जो 60 साल पुरानी है। नाम लदानी कंपनी का नाम एसएलएमजी बेरेजेस और यह कहानी आपने कभी नहीं सुनी होगी। आज सुनिए यह इंडियाज रिचेस्ट है। यहां हम वो कहानियां सुनाते हैं जो टीवी पर नहीं आती। नया एपिसोड हर दिन, सब्सक्राइब करिए, मुफ्त है। एक सेकंड के लिए सोचिए। आपके मोहल्ले की एक दुकान, एक छोटी सी फ्रिज। उसमें कोका कोला की बोतलें ठंडी हो रही हैं। वो बोतल आई कहां से? एक ट्रक से। ट्रक आया कहां से? एक डिस्ट्रीब्यूटर से। डिस्ट्रीब्यूटर ने कहां से ली? एक बॉटलिंग प्लांट से। और वो बॉटलिंग प्लांट कोका कोला कंपनी का नहीं है। समझिए? कोका कोला अमेरिका की कंपनी है। अटलांटा, जॉर्जिया में हेड क्वार्टर पर वो दुनिया भर में सीधे बोतलें नहीं भरती। वो कंसंट्रेट बनाती है। एक तरह का तीखा सिरप और हर देश में स्थानीय कंपनियों को लाइसेंस देती है। तुम यह सिरप पानी और चीनी से मिलाकर बोतल में भरो। हमारा लोगो लगाओ और बेचो। हम कमीशन लेंगे। यह सिस्टम पूरी दुनिया में चलता है और भारत में सबसे बड़े बॉटलिंग पार्टनर में से एक है एसएलएमजी यानी लधानी परिवार। पर यह कहानी इतनी सीधी नहीं है क्योंकि एक छोटे शहर के मारवाड़ी परिवार ने यह कैसे किया? कोका कोला जैसी कंपनी से डील कैसे की? और यह सब चुपचाप कैसे किया? जवाब के लिए हमें पीछे जाना होगा। एस एन लानी, शिवनाथ लधानी, उत्तर प्रदेश के लखनऊ का एक मारवाड़ी परिवार, बहुत बड़ा घराना नहीं था। मध्यवर्गीय व्यापारी परिवार, पिता एक छोटी सी ट्रेडिंग कंपनी चलाते थे। शिवनाथ ने वहीं से शुरू किया। उस जमाने का लखनऊ समझिए, 60-70 के दशक का नवाबों का शहर, कबाब, बिरयानी और बहुत बड़ा व्यापारिक केंद्र। उत्तर भारत के लिए दिल्ली के बाद सबसे बड़ा। मारवाड़ी समाज यहां पहले से था। राजस्थान से आए थे। ट्रेडिंग में थे। एक छोटा सा समुदाय पर बहुत संगठित। शिवनाथ लधानी ने अपने व्यापार के साथ एक चीज देखी। उत्तर प्रदेश एक बहुत बड़ा बाजार है। 25 करोड़ की आबादी और इसमें एक कमी थी। ठंडी चीजें मतलब सॉफ्ट ड्रिंक्स। पानी के अलावा कोई बड़ा ब्रांड पूरे यूपी में आसानी से नहीं मिलता था। थम्स अप था। लिमका था पर डिस्ट्रीब्यूशन कमजोर था और अमेरिकी कोका कोला भारत में नहीं थी। क्यों? 1977 में इंदिरा गांधी की सरकार ने एक नियम बनाया था। हर विदेशी कंपनी को अपनी फार्मूला भारत के साथ शेयर करनी होगी। कोका कोला ने मना कर दिया और भारत से चली गई। 16 साल कोका कोला भारत में नहीं थी। फिर 2003 में नहीं। 13 साल पहले, 1992 में आर्थिक उदारीकरण के बाद कोका कोला वापस आई और लधानी परिवार इस वापसी का हिस्सा बन गया। रुकिए, एक छोटी सी बात समझनी जरूरी है। जब कोका कोला 1992 में लौटी, भारत में एक और अमेरिकी कंपनी आ चुकी थी। पेप्सी जो 1987 में आ चुकी थी। मतलब पेप्सी पहले से बाजार में थी। हर शहर में, हर दुकान में। कोका कोला को कैचअप करना था और कैचअप के लिए सबसे जरूरी थी डिस्ट्रीब्यूशन। समझिए, एक बोतल बनाना आसान है। पर वो बोतल हर भारतीय दुकान तक पहुंचाना मुश्किल। बहुत मुश्किल। भारत में 25 लाख से ज्यादा छोटी दुकानें हैं। हर एक तक अपनी बोतल पहुंचाना एक मेहनत का काम है। हर शहर, हर गांव, हर सड़क और इस मेहनत के लिए कोका कोला को स्थानीय पार्टनर चाहिए थे। जिन्हें भारतीय बाजार पता हो, जो हर मोहल्ले के दुकानदार को जानते हो। लधानी परिवार बिल्कुल ऐसा ही था। 60 साल से लखनऊ में हर मारवाड़ी दुकानदार से रिश्ता, हर डिस्ट्रीब्यूटर का परिचय, हर थोक बाजार में पहुंच और इसीलिए जब कोका ने पार्टनर ढूंढा, लधानी सबसे आगे थे। समझिए जरा यह कैसे हुआ। 1992 में कोका कोला कंपनी ने भारत में फिर से एंट्री ली। उन्हें बॉटलिंग पार्टनर्स चाहिए थे। हर इलाके के लिए मुंबई के लिए एक, दिल्ली के लिए एक, दक्षिण के लिए एक और उत्तर प्रदेश बिहार के लिए कोका कोला ने कुछ कंपनियों से बात की। बड़े नामों से टाटा, पिडला, मित्तल ज्यादातर ने मना किया क्योंकि बॉटलिंग एक ग्लैमरस बिजनेस नहीं है। बहुत मेहनत, कम मार्जिन, बहुत इन्वेस्टमेंट। पर लधानी परिवार ने हां कही। शिवनाथ लधानी ने अपने पुराने ट्रेडिंग नेटवर्क को इस्तेमाल किया। एक छोटा सा प्लांट खोला। फिर एक और फिर एक और। और धीरे-धीरे पूरे यूपी में कोका कोला का बॉटलिंग नेटवर्क खड़ा कर दिया। समझिए यह कोई आसान काम नहीं था। एक सॉफ्ट ड्रिंक प्लांट लगाने में ₹1200 करोड़ लगते हैं और मुनाफा कम होता है, प्रति बोतल कुछ रुपए। तो आप तभी कमाते हैं जब आप बहुत सारी बोतलें बेचे। लधानी परिवार ने यही किया। रुकिए, एक संख्या से समझिए। कोका कोला कंपनी की एक बोतल रिटेल में ₹33 में बिकती है। उसमें से कितना हिस्सा कोका कोला कंपनी को जाता है? करीब 15-20%, मतलब ₹5। बाकी 80% बॉटलर, डिस्ट्रीब्यूटर और दुकानदार के बीच बंटता है। बॉटलर यानी लधानी जैसी कंपनी के पास सबसे बड़ा हिस्सा, शायद 20-30%, यानी एक बोतल पर ₹1 और एक प्लांट जो दिन में 2 लाख बोतलें बनाता है। साल में 78 करोड़ बोतलें, प्रति बोतल ₹1 का मुनाफा, ₹450 करोड़ एक प्लांट से एक साल में। और लधानी परिवार के पास कई प्लांट हैं। कई शहरों में मतलब पूरे साम्राज्य की कमाई हजारों करोड़ में हर साल। और यह सब एक बोतल भर के पीछे अगले 30 साल एक चुपचाप कहानी। प्लांट बढ़े, डिस्ट्रीब्यूशन फैला, दुकानें जुड़ी और लखनऊ का छोटा सा परिवार पूरे उत्तर भारत में फैल गया। लखनऊ, अयोध्या, बरेली, बिहार, झारखंड, हर बड़े शहर में एसएलएमजी का प्लांट, हर छोटे शहर में एसएलएमजी का डिस्ट्रीब्यूटर। और जब आप उत्तर प्रदेश में कहीं भी कोका कोला, थम्स अप, लिमका, स्प्राइट, मिनट मेड या कूलर पानी पीते हैं, बहुत संभावना है, वो लधानी परिवार ने भरी है। 2010 तक एसएलएमजी का सालाना राजस्व करीब ₹2000 करोड़। 2015 तक 4000 करोड़। 2020 तक 6000 करोड़। 2025 तक 8 से 10 हजार करोड़ के बीच और एक मूल्यांकन 5 अरब डॉलर के करीब, मतलब 40-50 हजार करोड़। रुकिए, यह संख्या समझिए। डाबर इंडिया आयुर्वेद का सबसे बड़ा ब्रांड 7500 करोड़। मारिको पैराशूट तेल वाले 500 करोड़। इमामी 400 करोड़ के करीब। लधानी का परिवार इन सबके बराबर। पर इन सबके मालिक टीवी पर हैं, फोर्ब्स में हैं, बिजनेस मैगजीन में हैं। लधानी कहीं नहीं। यही सबसे बड़ी विडंबना है। पैसा सबके पास है पर पहचान सिर्फ कुछ ही चुनते हैं। लधानी ने नहीं चुनी। यह कंपनी जब चाहे आईपीओ ले सकती है, नक्शा जैसा, पेटीएम जैसा, डिमार जैसा। पर लधानी परिवार ने नहीं किया। क्यों? यह बहुत बड़ा सवाल है और इसका जवाब शायद उनके दर्शन में है। अब रुकिए, एक बात बहुत जरूरी है। लधानी परिवार के बारे में पब्लिक डोमेन में बहुत कम जानकारी है। उनकी कोई वेबसाइट विस्तृत नहीं है। उनके कोई इंटरव्यू नहीं हैं। बिजनेस मैगजीन में कवर स्टोरीज नहीं हैं। मुझे ईमानदारी से कहना चाहिए, हम इस परिवार के बारे में बहुत सी बातें पक्के तौर पर नहीं जानते। शिवनाथ लधानी की पारिवारिक संरचना, उनके भाइयों का रोल, उनकी अगली पीढ़ी की सटीक भूमिकाएं जो हम जानते हैं वो यह है। शिवनाथ लधानी 2024-25 में 85 साल की उम्र में गुजर गए। उन्होंने अपने बेटे को कंपनी की कमान दी थी। नाम परितोष लधानी। परितोष आज एसएलएमजी के जॉइंट एमडी हैं। मुख्य निर्णय लेने वाले, अगली पीढ़ी का चेहरा। समझिए, एक भारतीय बिजनेस परिवार में बेटे के लिए कंपनी संभालना आसान नहीं है। पिता ने 60 साल मेहनत की है। हर रिश्ता बनाया है। हर डिस्ट्रीब्यूटर को जानते हैं। हर कोका कोला अधिकारी से उनका सीधा संपर्क है। बेटे को यह सब एक झटके में संभालना पड़ता है। बिना गलती के। परितोष ने यह संभाला और चुपचाप संभाला। बहुत कम लोगों ने मीडिया में देखा कि लधानी कंपनी में अब परितोष लधानी मुख्य हैं। पर अंदर एसएलएमजी के कर्मचारी, डिस्ट्रीब्यूटर और कोका कोला अधिकारी सब जानते हैं। एक नया दौर शुरू हो चुका है। और परितोष ने एक नई दिशा शुरू की है जो उनके पिता के द्वार से बहुत अलग है। परितोष लधानी ने एक चीज देखी। एसएलएमजी सिर्फ एक बॉटलर नहीं रह सकती। आगे के 20 साल में सॉफ्ट ड्रिंक्स का बिजनेस मुश्किल होगा। चीनी पर टैक्स बढ़ेगा। सेहत के बारे में लोग ज्यादा सोचेंगे और शायद कोका का बाजार धीमा होगा। तो परिवार को और रास्ते चाहिए। नए वर्टिकल्स, नए बिजनेस। और परितोष ने तीन दिशाएं चुनी हैं। पहली, ग्रीन एनर्जी। ग्रीन एनर्जी। एसएलएमजी का अयोध्या प्लांट भारत के सबसे बड़े बॉटलिंग प्लांट्स में से एक है और उसी प्लांट के अंदर परिवार ने एक सोलर पैनल इंस्टॉलेशन लगाया है। 15 मेगावाट डीसी और एक विंड पावर 9 1/2 मेगावाट, मतलब प्लांट की बिजली का बड़ा हिस्सा सूरज और हवा से। प्रदूषण कम, बिजली का बिल कम और एक नया बिजनेस रिन्यूएबल एनर्जी में। परितोष ने एक ऐलान भी किया है। ₹500 करोड़ वेस्ट टू एनर्जी में निवेश, मतलब कचरे से बिजली बनाना। यह भारत में एक नई इंडस्ट्री है। हर शहर कचरे से लड़ रहा है। अगर एसएलएमजी इसका हल बना सके तो वो सिर्फ बॉटलर नहीं, एक इंफ्रास्ट्र...
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Speaker A
दुकान। पर एक सवाल जो शायद आपने कभी नहीं सोचा। वो बोतल जो आपके हाथ में आती है। कौन भरता है? जवाब चौंकाने वाला है। CocaC कोला कंपनी नहीं भरती। एक भारतीय परिवार भरता है। एक ऐसा परिवार जिसका नाम आपने
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Speaker A
शायद कभी नहीं सुना जिसकी कहानी मीडिया में नहीं आती जिसका कोई आईपीओ नहीं हुआ जिसके बारे में कोई डॉक्यूमेंट्री नहीं बनी। पर वो भारत के सबसे चुपचाप बने बिजनेस परिवारों में से एक है। 10,000 करोड़ की कंपनी, 5 अरब डॉलर का मूल्यांकन
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Speaker A
और एक ऐसी विरासत जो 60 साल पुरानी है। नाम लदानी कंपनी का नाम एसएलएमजी बेरेजेस और यह कहानी आपने कभी नहीं सुनी होगी। आज सुनिए यह इंडियास रिचेस्ट है। यहां हम वो कहानियां सुनाते हैं जो टीवी पर नहीं आती।
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Speaker A
नया एपिसोड हर दिन सब्सक्राइब करिए मुफ्त है। एक सेकंड के लिए सोचिए। आपके मोहल्ले की एक दुकान, एक छोटी सी फ्रिज। उसमें Coca कोला की बोतलें ठंडी हो रही हैं। वो बोतल आई कहां से? एक ट्रक से। ट्रक आया
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Speaker A
कहां से? एक डिस्ट्रीब्यूटर से। डिस्ट्रीब्यूटर ने कहां से ली? एक बॉटलिंग प्लांट से। और वो बॉटलिंग प्लांट CC कोलाa कंपनी का नहीं है। समझिए? कोका कोला अमेरिका की कंपनी है। अटलांटा जॉर्जिया में हेड क्वार्टर पर वो दुनिया भर में
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Speaker A
सीधे बोतलें नहीं भरती। वो कंसंट्रेट बनाती है। एक तरह का तीखा सिरप और हर देश में स्थानीय कंपनियों को लाइसेंस देती है। तुम यह सिरप पानी और चीनी से मिलाकर बोतल में भरो। हमारा लोगो लगाओ और बेचो। हम
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Speaker A
कमीशन लेंगे। यह सिस्टम पूरी दुनिया में चलता है और भारत में सबसे बड़े बॉटलिंग पार्टनर में से एक है एसएलएमजी यानी लधानी परिवार। पर यह कहानी इतनी सीधी नहीं है क्योंकि एक छोटे शहर के मारवाड़ी परिवार ने यह कैसे किया? कोका कोला जैसी
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Speaker A
कंपनी से डील कैसे की? और यह सब चुपचाप कैसे किया? जवाब के लिए हमें पीछे जाना होगा। एस एन लानी शिवनाथ लधानी उत्तर प्रदेश के लखनऊ का एक मारवाड़ी परिवार बहुत बड़ा घराना नहीं था। मध्यवर्गीय व्यापारी परिवार पिता एक छोटी सी ट्रेडिंग
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Speaker A
कंपनी चलाते थे। शिवनाथ ने वहीं से शुरू किया। उस जमाने का लखनऊ समझिए 60-70 के दशक का नवाबों का शहर, कबाब, बिरयानी और बहुत बड़ा व्यापारिक केंद्र। उत्तर भारत के लिए दिल्ली के बाद सबसे बड़ा। मारवाड़ी समाज यहां पहले से था। राजस्थान से आए थे।
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Speaker A
ट्रेडिंग में थे। एक छोटा सा समुदाय पर बहुत संगठित। शिवनाथ लधानी ने अपने व्यापार के साथ एक चीज देखी। उत्तर प्रदेश एक बहुत बड़ा बाजार है। 25 करोड़ की आबादी और इसमें एक कमी थी। ठंडी चीजें मतलब सॉफ्ट ड्रिंक्स। पानी के अलावा कोई बड़ा
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Speaker A
ब्रांड पूरे यूपी में आसानी से नहीं मिलता था। थम्स अप था। लिमका था पर डिस्ट्रीब्यूशन कमजोर था और अमेरिकी कोका कोला भारत में नहीं थी। क्यों? 1977 में इंदिरा गांधी की सरकार ने एक नियम बनाया था। हर विदेशी कंपनी को अपनी फार्मूला
03:29
Speaker A
भारत के साथ शेयर करनी होगी। CocaC कोलाa ने मना कर दिया और भारत से चली गई। 16 साल CaC कोलाa भारत में नहीं थी। फिर 2003 में नहीं। 13 साल पहले 1992 में आर्थिक उदारीकरण के बाद कोका कोला वापस आई और
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Speaker A
लदानी परिवार इस वापसी का हिस्सा बन गया। रुकिए एक छोटी सी बात समझनी जरूरी है। जब कोला 1992 में लौटी भारत में एक और अमेरिकी कंपनी आ चुकी थी। Pepsi जो 1987 में आ चुकी थी। मतलब Pepsi पहले से बाजार
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Speaker A
में थी। हर शहर में हर दुकान में। कोका कोला को कैचअप करना था और कैचअप के लिए सबसे जरूरी थी डिस्ट्रीब्यूशन। समझिए एक बोतल बनाना आसान है। पर वो बोतल हर भारतीय दुकान तक पहुंचाना मुश्किल। बहुत मुश्किल। भारत में 25 लाख से ज्यादा छोटी दुकानें
04:25
Speaker A
हैं। हर एक तक अपनी बोतल पहुंचाना एक मेहनत का काम है। हर शहर, हर गांव, हर सड़क और इस मेहनत के लिए कोका कोला को स्थानीय पार्टनर चाहिए थे। जिन्हें भारतीय बाजार पता हो जो हर मोहल्ले के दुकानदार
04:42
Speaker A
को जानते हो। लधानी परिवार बिल्कुल ऐसा ही था। 60 साल से लखनऊ में हर मारवाड़ी दुकानदार से रिश्ता हर डिस्ट्रीब्यूटर का परिचय हर थोक बाजार में पहुंच और इसीलिए जब कोला ने पार्टनर ढूंढा लानी सबसे आगे थे। समझिए जरा यह कैसे हुआ। 1992 में
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Speaker A
कोलाa कंपनी ने भारत में फिर से एंट्री ली। उन्हें बॉटलिंग पार्टनर्स चाहिए थे। हर इलाके के लिए मुंबई के लिए एक, दिल्ली के लिए एक, दक्षिण के लिए एक और उत्तर प्रदेश बिहार के लिए कोका कोला ने कुछ
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Speaker A
कंपनियों से बात की। बड़े नामों से टाटा, पिडला, मित्तल ज्यादातर ने मना किया क्योंकि बॉटलिंग एक ग्लैमरस बिजनेस नहीं है। बहुत मेहनत कम मार्जिन, बहुत इन्वेस्टमेंट। पर लानी परिवार ने हां कही। शिवनाथ लधानी ने अपने पुराने ट्रेडिंग नेटवर्क को इस्तेमाल किया। एक छोटा सा
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Speaker A
प्लांट खोला। फिर एक और फिर एक और। और धीरे-धीरे पूरे यूपी में कोका कोला का बॉटलिंग नेटवर्क खड़ा कर दिया। समझिए यह कोई आसान काम नहीं था। एक सॉफ्ट ड्रिंक प्लांट लगाने में ₹1200 करोड़ लगते हैं और मुनाफा कम होता है प्रति बोतल कुछ रुपए।
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Speaker A
तो आप तभी कमाते हैं जब आप बहुत सारी बोतलें बेचे। लडानी परिवार ने यही किया। रुकिए एक संख्या से समझिए। CocaC कोला कंपनी की एक बोतल रिटेल में ₹330 में बिकती है। उसमें से कितना हिस्सा कोकाला कंपनी को जाता है? करीब 1520%
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Speaker A
मतलब ₹5 बाकी 80% बॉटलर डिस्ट्रीब्यूटर और दुकानदार के बीच बंटता है। बॉटलर यानी लधानी जैसी कंपनी के पास सबसे बड़ा हिस्सा शायद 2030% यानी एक बोतल पर ₹1 और एक प्लांट जो दिन में 2 लाख बोतलें बनाता है।
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Speaker A
साल में 78 करोड़ बोतलें प्रति बोतल ₹ का मुनाफा ₹450 करोड़ एक प्लांट से एक साल में और लधानी परिवार के पास कई प्लांट हैं। कई शहरों में मतलब पूरे साम्राज्य की कमाई हजारों करोड़ में हर साल और यह सब एक
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Speaker A
बोतल भर के पीछे अगले 30 साल एक चुपचाप कहानी प्लांट बढ़े डिस्ट्रीब्यूशन फैला दुकानें जुड़ी और लखनऊ का छोटा सा परिवार पूरे उत्तर भारत में फैल गया। लखनऊ, अयोध्या, बरेली, बिहार, झारखंड हर बड़े शहर में एसएलएमजी का प्लांट, हर छोटे शहर
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Speaker A
में एसएलएमजी का डिस्ट्रीब्यूटर और जब आप उत्तर प्रदेश में कहीं भी कोका कोला, थम्स अप, लिमका, स्प्राइट, मिनट मेड या किले पानी पीते हैं। बहुत संभावना है। वो लधानी परिवार ने भरी है। 2010 तक एसएलएमजी का सालाना राजस्व करीब ₹2000 करोड़
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Speaker A
2015 तक 4000 करोड़ 2020 तक 6000 करोड़ 2025 तक 8 से 10 करोड़ के बीच और एक मूल्यांकन 5 अरब डॉलर के करीब मतलब 40 500 करोड़ रुकिए यह संख्या समझिए daber इंडिया आयुर्वेद का सबसे बड़ा ब्रांड 75000 करोड़
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Speaker A
का मारिको पैराशूट तेल वाले 500 करोड़ का इमामी 400 करोड़ के करीब रदानी का परिवार इन सबके बराबर पर इन सबके मालिक टीवी पर है फर्ब्स में है बिजनेस मैगजीीन में है लदानी कहीं नहीं यही सबसे बड़ी विडंबना है
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Speaker A
पैसा सबके पास है पर पहचान सिर्फ कुछ ही चुनते हैं लदानी ने नहीं चुनी यह कंपनी जब चाहे आईपीओ ले सकती है nका जैसा paytm जैसा जैसा dमar जैसा पर लदानी परिवार ने नहीं किया क्यों यह बहुत बड़ा सवाल है और
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Speaker A
इसका जवाब शायद उनके दर्शन में है। अब रुकिए एक बात बहुत जरूरी है। लदानी परिवार के बारे में पब्लिक डोमेन में बहुत कम जानकारी है। उनकी कोई वेबसाइट विस्तृत नहीं है। उनके कोई इंटरव्यू नहीं है। बिजनेस मैगजीीन में कवर स्टोरीज नहीं है।
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Speaker A
मुझे ईमानदारी से कहना चाहिए हम इस परिवार के बारे में बहुत सी बातें पक्के तौर पर नहीं जानते। शिवनाथ लानी की पारिवारिक संरचना, उनके भाइयों का रोल, उनकी अगली पीढ़ी की सटीक भूमिकाएं जो हम जानते हैं वो यह है। शिवनाथ लानी
09:10
Speaker A
2024-225 में 85 साल की उम्र में गुजर गए। उन्होंने अपने बेटे को कंपनी की कमान दी थी। नाम परितोष लधानी। परितोष आज एसएलएमजी के जॉइंट एमडी हैं। मुख्य निर्णय लेने वाले अगली पीढ़ी का चेहरा समझिए एक भारतीय बिजनेस परिवार में बेटे के लिए कंपनी
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Speaker A
संभालना आसान नहीं है। पिता ने 60 साल मेहनत की है। हर रिश्ता बनाया है। हर डिस्ट्रीब्यूटर को जानते हैं। हर कोका कोला अधिकारी से उनका सीधा संपर्क है। बेटे को यह सब एक झटके में सुख संभालना पड़ता है। बिना गलती के। परितोष ने यह
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Speaker A
संभाला और चुपचाप संभाला। बहुत कम लोगों ने मीडिया में देखा कि लधानी कंपनी में अब परितोष लधानी मुख्य है। पर अंदर एसएलएमजी के कर्मचारी, डिस्ट्रीब्यूटर और कोका कोला अधिकारी सब जानते हैं। एक नया दौर शुरू हो चुका है। और परितोष ने एक नई दिशा शुरू की
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Speaker A
है जो उनके पिता के द्वार से बहुत अलग है। परितोष लदानी ने एक चीज देखी। एसएलएमजी सिर्फ एक बॉटलर नहीं रह सकती। आगे के 20 साल में सॉफ्ट ड्रिंक्स का बिजनेस मुश्किल होगा। चीनी पर टैक्स बढ़ेगा। सेहत के बारे
10:25
Speaker A
में लोग ज्यादा सोचेंगे और शायद कोला का बाजार धीमे होगा तो परिवार को और रास्ते चाहिए। नए वर्टिकल्स, नए बिजनेस और परितोष ने तीन दिशाएं चुनी है। पहली ग्रीन एनर्जी, ग्रीन एनर्जी। एसएलएमजी का अयोध्या प्लांट भारत के सबसे बड़े बॉटलिंग
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Speaker A
प्लांट्स में से एक है और उसी प्लांट के अंदर परिवार ने एक सोलर पैनल इंस्टॉलेशन लगाया है। 15 मेगावाट डीसी और एक विंड पावर 9 1/2 मेगावाट मतलब प्लांट की बिजली का बड़ा हिस्सा सूरज और हवा से प्रदूषण कम
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Speaker A
बिजली का बिल कम और एक नया बिजनेस रिन्यूएबल एनर्जी में परितोष ने एक ऐलान भी किया है। ₹500 करोड़ वेस्ट टू एनर्जी में निवेश मतलब कचरे से बिजली बनाना। यह भारत में एक नई इंडस्ट्री है। हर शहर कचरे से लड़ रहा है। अगर
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Speaker A
एसएलएमजी इसका हल बना सके तो वो सिर्फ बॉटलर नहीं एक इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी बन जाए। रुकिए एक बात समझिए। अयोध्या प्लांट कितना बड़ा है? रिपोर्ट्स कहती हैं भारत के सबसे बड़े सॉफ्ट ड्रिंक बॉटलिंग प्लांट्स में से एक 50 से ज्यादा
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Speaker A
एकड़ में फैला दिन में लाखों बोतलें हजारों कर्मचारी और अब इसी प्लांट के अंदर एक छोटा सा ग्रीन एनर्जी प्लांट 15 मेगावाट सोलर पैनल हजारों पैनल आसमान की तरफ देख रहे हैं और 9 1/2 मेगावाट विंड टरबाइन मतलब एक तरफ कोका कोला की बोतलें
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Speaker A
दूसरी तरफ सूरज और हवा हवा से बिजली। यह एक हाइब्रिड फैक्ट्री है। पुराने जमाने की बॉटलिंग और नए जमाने की एनर्जी एक ही प्लांट के अंदर। और शायद यही अगले 20 साल के भारतीय बिजनेस का चेहरा है। पुराने और
12:15
Speaker A
नए का संगम। दूसरी दिशा रियलस्टेट। लदानी परिवार ने एक कंपनी बनाई है सिंसियर डेवलपर्स। उत्तर भारत मेंसीय और व्यासायिक प्रॉपर्टीज और तीसरी एक 5 साल का विस्तार प्लान। एक अरब डॉलर मतलब अगले 5 छ साल में परिवार ₹8000 करोड़ और निवेश करेगा। नए
12:37
Speaker A
प्लांट्स में नए बाजारों में शायद विदेश में भी मतलब लदानी परिवार चुपचाप एक बहुत बड़ा कदम उठा रहा है। रुकिए एक अरब डॉलर का प्लान क्या यह यथार्थवादी है? देखिए 5 साल एक अरब डॉलर साल में $20 करोड़ मतलब
12:55
Speaker A
₹00 करोड़ हर साल। एसएलएमजी का सालाना मुनाफा कितना होगा? पक्की संख्या पब्लिक नहीं है। पर अगर हम माने कि 10,000 करोड़ का राजस्व और बॉटलिंग में 7-8% मार्जिन तो शायद 700800 करोड़ का मुनाफा। मतलब हर साल का मुनाफा सीधे एक्सपेंशन में चला जाएगा।
13:17
Speaker A
बैंक से कुछ कर्ज लेना पड़ेगा। पर परिवार की हैसियत इस प्लान को संभाल सकती है। और परितोष ने यह बात साफ कही है हम कई नए राज्यों में जाना चाहते हैं और शायद विदेश में भी विदेश यह बहुत बड़ी बात है। एक
13:35
Speaker A
उत्तर भारतीय बॉटलर अंतरराष्ट्रीय जाने का सोच रहा है। शायद अगले 10 साल में आप किसी दूसरे देश के सुपर मार्केट में जाएं और देखें कि वहां की कोका कोला की बोतल एक भारतीय परिवार ने भरी है। यह एक नई कहानी
13:50
Speaker A
होगी और लदानी परिवार उसे लिख रहा है। अब रुकिए एक तुलना सोचिए। बायजू ने सब कुछ तेजी से किया। अरबों डॉलर वीसी से लिए। हजारों कंपनियां खरीदी। Paytm ने सुपर ऐप बनाने की कोशिश की। दोनों आज मुश्किल में
14:05
Speaker A
है। लडानी परिवार ने कुछ और किया। 30 साल एक ही बिजनेस चुपचाप। एक बोतल के बाद दूसरी, एक प्लांट के बाद दूसरा, बिना मीडिया, बिना आईपीओ, बिना वीसी और आज एक चुपचाप बने 5 अरब डॉलर के एंपायर के मालिक
14:23
Speaker A
हैं। यह भारत के बिजनेस का एक नया मॉडल है जो धीरे चलता है पर लंबा चलता है। कामत भाइयों की तरह। आपने एपिसोड 26 में देखा राधाकिशन दामानी की तरह। एपिसोड 21 हल्दीराम की तरह। एपिसोड 18 हर एक चुपचाप
14:42
Speaker A
काम करने वालों की कहानी और हर एक आखिर में जीतने वालों की कहानी। एक छोटी सी बात समझनी जरूरी है। बॉटलिंग बिजनेस कैसा होता है? समझिए। आप कोकाला कंपनी से कंसंट्रेट खरीदते हैं। एक तीखा सिरप उसमें पानी मिलाते हैं, चीनी मिलाते हैं। कार्बन
15:00
Speaker A
डायोऑक्साइड डालते हैं और बोतल में भरते हैं। बोतल का खर्च, पानी का खर्च, चीनी का खर्च, प्लांट का खर्च, ट्रांसपोर्ट का खर्च, बिजली का खर्च, कर्मचारियों का खर्च सब मिलाकर एक बोतल पर मुनाफा बहुत कम होता है। शायद 510% पर अगर आप एक साल में 5 अरब
15:20
Speaker A
बोतलें बेचे और हर बोतल पर ₹1 का भी मुनाफा हो तो ₹5 अरब का मुनाफा यह स्केल का खेल है। बहुत बहुत बेचो बस और इसीलिए एसएलएमजी ने कभी ब्रांडिंग नहीं की। कोई एसएलएमजी का विज्ञापन नहीं देखा है आपने।
15:36
Speaker A
क्यों? क्योंकि उनका काम कोला बेचना है। कोकाला का ब्रांड पहले से दुनिया भर में मशहूर है। एसएलएमजी को सिर्फ बहुत सारी बोतलें भरनी है तेजी से सस्ते में। ब्रांडिंग का काम कोला का है। बोतल भरने का काम लानी का दोनों अपना काम चुपचाप
15:56
Speaker A
करते हैं। अब एक और बात लधानी परिवार सिर्फ कोला नहीं बनाते। उन्होंने एक चीज चुपचाप की है विविधकरण वो होरेका होटल रेस्टोरेंट कैटरिंग में भी है। मतलब बड़े होटलों को सीधे सॉफ्ट ड्रिंक्स सप्लाई शादियों और कैटरिंग को सप्लाई बहुत सारी
16:15
Speaker A
कंपनियां ऐसा करती हैं। पर लदानी ने एक मजबूत नेटवर्क बनाया है और रियलस्टेट अयोध्या में, लखनऊ में, बिहार में उन्होंने जमीन खरीदी है। बिल्डिंग बनाई है, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, प्रोजेक्ट्स मतलब परिवार का पैसा सिर्फ बैंक में नहीं रियलस्टेट में भी निवेश हुआ है। यह एक
16:35
Speaker A
पुरानी मारवाड़ी सोच है। पैसा कमाओ, पैसे को डंडे में लगाओ, ढंडा बढ़े फिर पैसे को जमीन में लगाओ। जमीन की कीमत बढ़े, फिर जमीन को ढंडे के लिए इस्तेमाल करो। यह रोलिंग कैपिटल का सिद्धांत है और लधानी परिवार ने इसे 60 साल से परफेक्ट किया है।
16:54
Speaker A
रुकिए और एक चीज समझनी जरूरी है। क्यों लदानी आईपीओ नहीं ले रहे? देखिए एक प्राइवेट कंपनी आज है। मुनाफा कमा रही है। परिवार के बीच पैसा बंट रहा है। कोई बाहरी शेयर होल्डर नहीं। कोई बोर्ड मीटिंग नहीं। कोई सेबी की निगरानी नहीं। अगर आईपीओ ले
17:11
Speaker A
लिया तो सब बदल जाएगा। हर तिमाही के नंबर सबको दिखाने पड़ेंगे। हर बड़ा निर्णय बोर्ड को बताना होगा। हर कोका कोला कॉन्ट्रैक्ट का खुलासा करना होगा। और सबसे जरूरी कोला कंपनी को यह पसंद नहीं आएगा। कोका कोलाa अमेरिका की एक पब्लिक कंपनी
17:28
Speaker A
है। पर वो अपने बॉटलिंग पार्टनर्स के निजी कॉन्ट्रैक्ट्स को सार्वजनिक नहीं करना चाहती। कितना कमीशन देती है, कितनी रॉयल्टी, कितना मार्केटिंग सपोर्ट, यह सब ट्रेड सीक्रेट है। अगर लडानी पब्लिक हो जाए तो यह सब सामने आएगा और कोका कोला
17:44
Speaker A
नाराज हो सकती है। मतलब आईपीओ का सीधा असर कंपनी के मुख्य ग्राहक पर और मुख्य ग्राहक से रिश्ता बिगड़ा तो पूरा बिजनेस खतरे में। इसलिए लानी ने तय किया है हम प्राइवेट रहेंगे। कम बोलेंगे, ज्यादा कमाएंगे। यह एक होशियार रणनीति है और यह
18:02
Speaker A
बहुत भारतीय परिवार बिजनेस की सोच है। तो आज क्या परितोष लधानी अब परिवार का चेहरा है। शायद 40-50 के बीच मीडिया में बहुत कम दिखते हैं। बिजनेस इवेंट्स में जाते हैं पर इंटरव्यू नहीं देते। परिवार के बाकी सदस्य हम पक्के तौर पर नहीं जानते। शायद
18:20
Speaker A
कुछ भाई हैं। शायद कुछ बेटे और बेटियां अगली पीढ़ी में आ रहे हैं। जो हम जानते हैं वो यह है एक परिवार 60 साल एक बिजनेस 10,000 करोड़ की कंपनी 5 अरब डॉलर का मूल्यांकन और एक नाम जो आपने आज पहली बार
18:36
Speaker A
सुना है लदानी। जिस तरह दामानी है एपिसोड 21 आप उन्हें नहीं जानते थे जब तक मैंने नहीं बताया। जिस तरह कामट भाई हैं एपिसोड 26 आप उन्हें नहीं जानते थे जब तक उनकी पडकास्ट नहीं आई। रधानी भी ऐसे ही है। पर
18:53
Speaker A
शायद और भी चुप। और शायद इसी चुप्पी में ही उनकी असली कामयाबी है। रुकिए एक छोटी सी बात इस चुप्पी में एक और सबक है। जब आप मीडिया में नहीं है तो आप पर हमले नहीं होते। आपके कॉम्पिटिटर्स आपकी रणनीति नहीं
19:08
Speaker A
देख पाते। आपके दुश्मन आपको निशाना नहीं बना पाते। बायजू को सब जानते थे। आपने एपिसोड 14 में देखा। हर गलती मीडिया में आई। हर इन्वेस्टर ने पीठ दिखाई। हर ग्राहक ने सब्सक्रिप्शन रद्द किया। लदानी को कोई नहीं जानता इसलिए कोई हमला नहीं, कोई
19:26
Speaker A
दुश्मन नहीं। बस चुपचाप काम। यह एक तरह की स्टेल्थ रणनीति है और भारत के बहुत से पारिवारिक कारोबार इसे अपनाते हैं। जब आप चुप रहते हैं तो आप ज्यादा लंबा खेल खेल सकते हैं। 20 साल, 30 साल, 60 साल लदानी
19:43
Speaker A
ने 60 साल यह किया और शायद अगले 60 साल और करेंगे। एक आखिरी बात जब आप अगली बार किसी दुकान पर कोका कोला की एक बोतल खरीदें एक सेकंड के लिए सोचिए वो बोतल अमेरिका से नहीं आई। वो अटलांटा में नहीं भरी गई। वो
19:58
Speaker A
एक भारतीय परिवार ने भरी। लखनऊ के पास किसी प्लांट में, उत्तर प्रदेश के एक छोटे शहर में, एक मारवाड़ी परिवार के नियंत्रण में और हर बोतल पर कुछ रुपए उस परिवार को जाते हैं 60 साल। चुपचाप बिना किसी को
20:14
Speaker A
बताए, बिना किसी आईपीओ के। यह भी एक इंडियास रिचेस्ट कहानी है। बस सबसे शांत वाली और शायद सबसे शानदार भी। क्योंकि असली अमीरी शोर में नहीं चुप्पी में बनती है। और लदानी परिवार ने यह बहुत पहले समझ लिया था। भारत में आज और भी बहुत से ऐसे
20:32
Speaker A
परिवार हैं जिनके नाम आप नहीं जानते जिनकी कंपनियां आप रोज इस्तेमाल करते हैं। पर जो पर्दे के पीछे हैं लधानी एक उदाहरण है शायद सबसे साफ उदाहरण बॉटलर चुप मारवाड़ी लखनऊ का 10,000 करोड़ का और जिनकी कहानी आज तक किसी ने नहीं सुनाई आज सुनाई है और
20:52
Speaker A
शायद आने वाले समय में और भी कई कहानियां सामने आएंगी। ऐसे ही चुपचाप बने हुए परिवारों की क्योंकि भारत के सबसे बड़े पैसे हमेशा सबसे ज्यादा शोर मचाने वालों के पास नहीं होते। कभी-कभी एक छोटे शहर में बैठे एक मध्यवर्गीय परिवार के पास
21:10
Speaker A
होते हैं जो 60 साल से एक ही काम कर रहे हैं बहुत अच्छे से और जिनका नाम आप अभी सीख रहे हैं लदानी। याद रखिए क्योंकि अगली बार जब आप एक बोतल खोलें आप जानेंगे वो कौन है जिसने भरी और यही इंडियास रिचेस्ट
21:26
Speaker A
का असली काम है उन परिवारों की कहानियां सुनाना जो हर भारतीय की रोजमर्रा जिंदगी में है पर जिनके नाम कोई नहीं जानता लदानी एक उदाहरण है हल्दीराम की तरह एपिसोड 18 में देखा दामानी की तरह एपिसोड 21 ये सब
21:44
Speaker A
परिवार चुप मेहनती और बहुत-बहुत बहुत अमीर और भारत के बारे में एक बात आपको याद रखनी चाहिए। यहां की असली अमीरी हमेशा फर्ब्स की लिस्ट में नहीं होती। बहुत बार वो किसी छोटे शहर के एक बंद ऑफिस में बैठती है। एक
22:00
Speaker A
मारवाड़ी परिवार के पास जो 60 साल से एक ही काम कर रहा है बहुत अच्छे से और बिना किसी को बताए। लदानी, एक नाम, एक परिवार और एक चुप कहानी जो शायद अगले 30 साल और चुप रहेगी और शायद और भी बड़ी होगी। एक
22:17
Speaker A
आखिरी सोच भारत में आज दो तरह के बिजनेस परिवार हैं। एक तरह जो मीडिया में हैं, टीवी पर इंटरव्यू देते हैं, दावोस में जाते हैं। फोब्स की लिस्ट में अपनी जगह के लिए लड़ते हैं। इन्वेस्टर्स से बातचीत करते हैं और हर तिमाही अपनी कंपनी के नंबर
22:35
Speaker A
मीडिया में रिलीज करते हैं। दूसरी तरह जो सब कुछ चुपचाप करते हैं। एक छोटे शहर में, एक मामूली ऑफिस में, एक सादे जीवन में और पीढ़ियों से एक ही काम कर रहे हैं। पहली तरह को हम सब जानते हैं। अंबानी, अडानी,
22:51
Speaker A
टाटा, बिरला दूसरी तरह को कोई नहीं जानता। पर शायद इन्हीं के पास सबसे ज्यादा असली अमीरी है। लदानी इसी दूसरी तरह में आते हैं। और जब आप भारत के रिचेस्ट की बात करें, सिर्फ पहली तरह को मत गिनिए। दूसरी
23:06
Speaker A
तरह को भी देखिए क्योंकि वह शायद असली कहानी है और लधानी की कहानी एक छोटी सी झलक है उस बड़े छुपे हुए भारत की जिसे हम सब रोज इस्तेमाल करते हैं पर देखते नहीं अगली बार जब आप कोई बोतल खोलें एक सेकंड
23:21
Speaker A
याद कीजिए कौन है पीछे कहां का है और क्यों चुप है जवाब शायद आपको चौंका दे लानी की कहानी आज खत्म हुई पर पीछे अभी कई और कहानियां हैं ऐसे ही चुप परिवारों की, ऐसे ही छोटे शहरों की, ऐसे ही पुराने पर
23:40
Speaker A
मजबूत बिजनेसों की और हर एक एक इंडियास रिचेस्ट है। बस एक ऐसा रिचेस्ट जो टीवी पर नहीं आता। जब आप उन्हें खोजेंगे, आपको भारत का असली नक्शा दिखाई देगा। और शायद आपकी अपनी बिजनेस सोच भी बदल जाएगी। क्योंकि असली अमीरी कभी शोर नहीं मचाती।
23:58
Speaker A
वह सिर्फ बहती है और जब वह रुकती है तो एक बहुत बड़ा साम्राज्य पीछे छोड़ देती है। लडानी का साम्राज्य अभी रुका नहीं है। वो अभी बढ़ रहा है चुपचाप मजबूती से और शायद हमेशा के लिए। एक छोटी सी आखिरी कहानी
24:14
Speaker A
सोचिए। उत्तर प्रदेश के एक छोटे गांव में एक चाय की दुकान है। चाय वाला हर सुबह बर्फ का बक्सा खोलता है और उसमें ठंडी हो रही कोका कोला की कुछ बोतलें। वो बोतलें किसी ट्रक से आई। ट्रक किसी
24:29
Speaker A
डिस्ट्रीब्यूटर से डिस्ट्रीब्यूटर एसएलएमजी के एक प्लांट से। प्लांट लखनऊ या अयोध्या में और प्लांट का मालिक एक मारवाड़ी परिवार जिनके पिता 85 साल जिनके बेटे आज कंपनी संभाल रहे हैं और जिनकी कहानी आज पहली बार आप सुन रहे हैं। यह
24:48
Speaker A
भारत है पुराना और नया चुप और बहता हुआ। दिखने वाला और छुपा हुआ और लदानी इसी छुपे हुए भारत का एक बड़ा हिस्सा है। एक ऐसा हिस्सा जो हर रोज हमारे साथ है। हर बोतल में, हर ठंडे घूंट में, हर चाय की दुकान
25:05
Speaker A
के बक्से में पर जिसे हम आज तक नाम से नहीं जानते थे। अब जानते हैं और शायद कभी नहीं भूलेंगे। क्योंकि एक बार जब आप पीछे देखना शुरू करते हैं, आप पुराने तरीके से दुनिया नहीं देख पाते। हर बोतल, हर पैकेट,
25:20
Speaker A
हर ब्रांड पीछे एक परिवार है। एक कहानी है। और शायद एक सबक भी, एक बहुत बड़ा सबक।
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