एफबीआई ने डार्क वेब की प्ले पेन साइट को एक्सपोज़ किया, जो बच्चों के साथ ज्यादती का सबसे बड़ा नेटवर्क था।
Key Takeaways
- डार्क वेब पर चलने वाले क्राइम नेटवर्क्स को पकड़ने के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है।
- ऑनलाइन प्राइवेसी और साइबर सिक्योरिटी के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है।
- एनआईटी जैसे टूल्स का इस्तेमाल कानून प्रवर्तन के लिए फायदेमंद लेकिन कंट्रोवर्शियल भी हो सकता है।
- प्ले पेन केस ने बच्चों के खिलाफ ऑनलाइन अपराधों को उजागर किया और वैश्विक स्तर पर कार्रवाई को प्रेरित किया।
- डार्क वेब की एनोनिमिटी का गलत इस्तेमाल अपराधियों को संरक्षण देता है, जिसे तोड़ना आवश्यक है।
What the video covers
- एफबीआई ने 2015 में डार्क वेब की प्ले पेन साइट को एक्सपोज़ किया जो बच्चों के साथ ज्यादती का सबसे बड़ा नेटवर्क था।
- प्ले पेन एक ब्लैक मार्केट था जहां 2 लाख से ज्यादा यूजर्स इलीगल कंटेंट का आदान-प्रदान करते थे।
- यह साइट टोर नेटवर्क पर थी और यूजर्स अपनी असली पहचान छुपाकर काम करते थे।
- एफबीआई ने ऑपरेशन पसिफर के तहत इस साइट को शटडाउन किया और 900 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया।
- इस ऑपरेशन में नेटवर्क इन्वेस्टिगेटिव टेक्निक (एनआईटी) नामक एडवांस टूल का इस्तेमाल किया गया।
- एनआईटी एक मालवेयर था जो यूजर्स के कंप्यूटर से आईपी एड्रेस, मैक एड्रेस और ब्राउजिंग हिस्ट्री ट्रैक करता था।
- यह केस ऑनलाइन प्राइवेसी, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल राइट्स पर महत्वपूर्ण सवाल उठाता है।
- प्ले पेन केस ने दिखाया कि कैसे ग्लोबल कोलैबोरेशन से डार्क वेब क्राइम्स का मुकाबला किया जा सकता है।
- इस केस ने एथिकल डिबेट्स को जन्म दिया कि क्या लॉ इंफोर्समेंट को यूजर्स की प्राइवेसी तोड़ने का अधिकार है।
- डार्क वेब की एनोनिमिटी और सुरक्षा को तोड़ना आसान नहीं है, इसलिए ऐसे केस टेक्नोलॉजी और कानून के बीच संतुलन की जरूरत बताते हैं।
Chapters
- 00:00परिचय और प्ले पेन साइट का खुलासा
- 00:52प्ले पेन का परिचय और ऑनलाइन प्राइवेसी पर सवाल
- 01:23प्ले पेन केस के राज और साइबर सिक्योरिटी प्रभाव
- 01:50डार्क वेब और टोर नेटवर्क की भूमिका
- 02:24प्ले पेन की स्थापना और सदस्य संख्या
- 03:04प्ले पेन पर अवैध गतिविधियां और एफबीआई की जांच
- 05:11ऑपरेशन पसिफर और एनआईटी टूल का उपयोग
- 06:54एनआईटी टूल की कार्यप्रणाली और एथिकल डिबेट्स
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Speaker A
एफबीआई ने डार्क वेब की एक ऐसी साइट को एक्सपोज़ किया जो बच्चों के साथ ज्यादती करने का सबसे बड़ा नेटवर्क था। यह एक ऐसा प्लेटफार्म था जिसको जानने के बाद आपकी रूह कांप जाएगी। कैन यू इमेजिन कि 2 लाख लोग एक ऐसी ब्लैक मार्केट पर जा रहे हैं जहां सिर्फ इलीगल चीजें अवेलेबल हैं। 2015 इंटरनेट की दुनिया का एक ऐसा हादसा सामने आया जिसे सुनने के बाद शायद आपकी हालत खराब हो जाए।
Speaker A
हैं जहां सिर्फ इलीगल चीजें अवेलेबल है 2015 इंटरनेट की दुनिया का एक ऐसा हादसा सामने आया जिसको सुनने के बाद शायद आपकी हालत खराब हो [संगीत] जाए एफबीआई ने डार्क वेब की एक ऐसी साइट को एक्सपोज किया जो बच्चों के साथ ज्यादती
Speaker A
एफबीआई ने डार्क वेब की एक ऐसी साइट को एक्सपोज़ किया जो बच्चों के साथ ज्यादती करने का सबसे बड़ा नेटवर्क था। इस ब्लैक मार्केट का नाम था प्ले पेन। प्ले पेन एक ऐसा केस था जो ऑनलाइन प्राइवेसी पर कई सवाल खड़े कर गया क्योंकि यह सब कुछ एक ऐसी जगह पर हो रहा था जहां लोग अपनी रियल आइडेंटिटी को छुपाकर कुछ भी कर सकते हैं। हर वह बुरा काम कर सकते हैं जो इंसान शायद इमेजिन भी नहीं कर सकता।
Speaker A
लोग अपनी रियल आइडेंटिटी को छुपाकर कुछ भी कर सकते हैं हर वह बुरा काम कर सकते हैं जो इंसान शायद इमेजिन भी नहीं कर सकता आज हम प्ले पन केस के हर छोटे राज को एक्सपोज करेंगे कि कैसे लोगों को इस काले नेटवर्क
Speaker A
आज हम प्ले पेन केस के हर छोटे राज को एक्सपोज़ करेंगे कि कैसे लोगों को इस काले नेटवर्क का पता चला और सबसे महत्वपूर्ण साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल राइट्स पर इसका क्या असर हुआ। आइए देखते हैं।
Speaker A
इस्तेमाल करके ही इस काली दुनिया को एक्सेस किया जा सकता है यह व जगह है जहां लोग अपनी पर्सनल आइडेंटिटी को छुपा कर रखते हैं और फेक आइडेंटिटी या एनोनिमिटी का फायदा उठाते हुए कई बुरे काम करते हैं
Speaker A
आज के इस वीडियो में डार्क वेब इंटरनेट की वो गहरी बली जगह है जहां कॉमन यूजर्स की पहुंच नहीं होती। टोर जैसे इंक्रिप्टेड नेटवर्क्स का इस्तेमाल करके ही इस काली दुनिया को एक्सेस किया जा सकता है। यह वह जगह है जहां लोग अपनी पर्सनल आइडेंटिटी को छुपा कर रखते हैं और फेक आइडेंटिटी या एनोनिमिटी का फायदा उठाते हुए कई बुरे काम करते हैं।
Speaker A
स्टार्ट होने के कुछ ही महीनों के बाद इसके 2 लाख से भी ज्यादा मेंबर्स हो गए कैन यू इमेजिन कि 2 लाख लोग एक ऐसी ब्लैक मार्केट प जा रहे हैं जहां सिर्फ इलीगल चीजें अवेलेबल है एंड तब यह सिर्फ इसका
Speaker A
इसी छुपी हुई खौफनाक दुनिया में अगस्त 2014 में प्ले पेन नाम का एक प्लेटफार्म बनाया गया। यह एक ऐसा प्लेटफार्म था जिसको जानने के बाद आपकी रूह कांप जाएगी।
Speaker A
खननी हरकतें करता रहा प्लेपन मार्केट का सिस्टम इतना ज्यादा एडवांस था कि लॉ इंफोर्समेंट एजेंसीज के लिए भी मुश्किल था कि वह इनके यूजर्स को ट्रैक और आइडेंटिफिकेशन और अनलॉफुल नेटवर्क्स को दुनिया भर में एस्टेब्लिश कर सकते हैं जहां मासूम बच्चों
Speaker A
प्ले पेन एक ब्लैक मार्केट थी जहां पर हर बुरा काम किया जाता था। प्ले पेन के स्टार्ट होने के कुछ ही महीनों के बाद इसके 2 लाख से भी ज्यादा मेंबर्स हो गए। कैन यू इमेजिन कि 2 लाख लोग एक ऐसी ब्लैक मार्केट पर जा रहे हैं जहां सिर्फ इलीगल चीजें अवेलेबल हैं।
Speaker A
रही है जहां खुलेआम पोर्नोग्राफी को होस्ट किया जा रहा है और उस ब्लैक मार्केट का नाम है प्लेपन कुछ मजीद इन्वेस्टिगेशन के बाद एफबीआई को सर्च वारंट मिल गया और इस वेबसाइट को शट डाउन करने और इसके ओनर को
Speaker A
और तब यह सिर्फ इसका स्टार्ट था। इस प्लेटफार्म पर सीपी यानी चाइल्ड सेक्सुअल मटेरियल खुलेआम शेयर और डिस्ट्रीब्यूट किया जाता था। इस नेटवर्क ने डार्क वेब की एनोनिमिटी का खुल के फायदा उठाया और कई महीनों तक यह लॉ इंफोर्समेंट एजेंसियों की नजरों से बच के खननी हरकतें करता रहा।
Speaker A
डायरेक्टली प्लेपन यूजर्स के कंप्यूटर में घुस के उनका इंपॉर्टेंट डाटा निकालने के लिए डिजाइन किया गया था इनका मकसद यूजर्स के आईपी एड्रेसस मैक एड्रेसस और ब्राउजिंग हिस्ट्री को ट्रैक करना था यह सारी वह इंफॉर्मेशन थी जो कहीं ना कहीं यूजर्स को
Speaker A
प्ले पेन मार्केट का सिस्टम इतना ज्यादा एडवांस था कि लॉ इंफोर्समेंट एजेंसियों के लिए भी मुश्किल था कि वह इनके यूजर्स को ट्रैक और आइडेंटिफाई कर सकें।
Speaker A
और एथिकल डिबेट्स को ले आया तुम खुद सोचो कि एक ऐसा मालवेयर जो किसी के भी कंप्यूटर में डाला जाए तो व उनकी आईपी ड्रेसेस उनके मैक एड्रेसस उनकी बहुत सी एक्टिविटी को ट्रैक कर सकता है और यह वायरस किसी के भी
Speaker A
और अनलॉफुल नेटवर्क्स को दुनिया भर में एस्टैब्लिश किया जा सकता है जहां मासूम बच्चों के साथ जुल्म होता है और किसी को कानों कान खबर भी नहीं होती।
Speaker A
मानना था कि ऐसे टूल्स या फिर हैकिंग टेक्निक्स का यूज करते हुए किसी भी शख्स की प्राइवेसी को ब्रेक किया जा सकता है यह लीगल और एथिकल डिबेट्स इस बात पर फोकस थी कि क्या लॉ इंफोर्समेंट एजेंसीज को इस बात
Speaker A
छह महीने तक यह वेबसाइट चलती रही और उसके बाद एफबीआई को एक फॉरेन लॉ इंफोर्समेंट एजेंसी से टिप मिली कि टोर नेटवर्क पर एक ऐसी ब्लैक मार्केट ऑपरेट हो रही है जहां खुलेआम पोर्नोग्राफी को होस्ट किया जा रहा है और उस ब्लैक मार्केट का नाम है प्ले पेन।
Speaker A
नेटवर्क को एक्सपोज कर सके और दूसरी तरफ उनके उन तरीकों को एक रीजनेबल बाउंड्री में रखना भी बहुत जरूरी था लाइक मैंने एक वीडियो बनाई थी पेगासस स्पाय वेर पे कि कैसे वो स्पाय वेर मोबाइल्स में इंस्टॉल किया जाता है और कैसे लोगों को स्पाई किया
Speaker A
कुछ मजीद इन्वेस्टिगेशन के बाद एफबीआई को सर्च वारंट मिल गया और इस वेबसाइट को शट डाउन करने और इसके ओनर को पकड़ने का ऑपरेशन शुरू किया गया।
Speaker A
कर ले खैर ऑपरेशन पसिफर के थ्रू जो इंफॉर्मेशन मिली उसने ऑनलाइन बच्चों के साथ ज्यादती के खिलाफ सबसे बड़ा इंटरनेशनल क्रैकडाउन शुरू कर दिया दुनिया भर में 900 से ज्यादा लोगों को अरेस्ट किया गया जिसमें साइट के एडमिन से लेके आम यूजर्स
Speaker A
और इस ऑपरेशन को ऑपरेशन पसिफर का नाम दिया गया। इस मिशन में एफबीआई ने एक खास और एडवांस टूल का इस्तेमाल किया जिसे नेटवर्क इन्वेस्टिगेटिव टेक्निक (एनआईटी) कहा जाता है।
Speaker A
के मुश्किल सवालात भी सामने रखे इस केस ने यह बताया कि डार्क वेब जैसे हिडन प्लेटफार्म को कैसे टारगेट किया जा सकता है लेकिन साथ यह भी बताया कि लॉ इंफोर्समेंट और एक इंडिविजुअल यूजर की प्राइवेसी के दरमियान एक बैलेंस रखना भी
Speaker A
ये असल में एक तरह का मालवेयर था जो डायरेक्टली प्ले पेन यूजर्स के कंप्यूटर में घुस के उनका इंपॉर्टेंट डाटा निकालने के लिए डिजाइन किया गया था।
Speaker A
इसने लॉ इंफोर्समेंट एजेंसीज को यह सिखाया कि ग्लोबल लेवल पर कोलबो मेशन कितनी जरूरी है ये केस एक एग्जांपल है कि कैसे मल्टीपल कंट्रीज क्राइम के खिलाफ लड़ सकती हैं जो बॉर्डर्स नहीं देखते क्राइम देखते हैं उसके खिलाफ लड़ने का तरीका देखते हैं
Speaker A
इनका मकसद यूजर्स के आईपी एड्रेस, मैक एड्रेस और ब्राउजिंग हिस्ट्री को ट्रैक करना था। यह सारी वह इंफॉर्मेशन थी जो कहीं ना कहीं यूजर्स को उनकी रियल आइडेंटिटी से लिंक करती थी।
Speaker A
कंट्रीज में अलग तरीके से होते हैं और हमारी कंट्री में अलग तरीके से होते हैं तो ये चीज भी कहीं ना कहीं मुश्किल पैदा करती है आज भी प्लेपन केस एक एग्जांपल है कि किस तरह से इंसाफ लेने के लिए कई
Speaker A
यह एडवांस्ड मालवेयर एफबीआई के लिए बहुत जरूरी था क्योंकि प्ले पेन की एनोनिमिटी और डार्क वेब की प्रोटेक्शन को तोड़ना आसान नहीं है।
Speaker A
खौफनाक हो सकती है ये कहानी हमें ये भी बताती है कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हमारे लिए बेहतर जरूर हो सकता है लेकिन उसी के साथ-साथ उतना ही नुकसानदेह भी हो सकता है लाइक जितनी ज्यादा टेक्नोलॉजी बढ़ेगी उतने ही ज्यादा साइबर क्राइम्स और क्राइम्स
Speaker A
लेकिन एनआईटी टूल का इस्तेमाल अपने साथ बहुत सी कंट्रोवर्सी और एथिकल डिबेट्स को ले आया।
Speaker A
दो-तीन साल ये मैक्सिमम टाइम है किसी डार्क व मार्केट प्लेस का सरवाइव करना उसके बाद उसको शट डाउन कर दिया जाता है खैर आई होप कि आपको यह वीडियो पसंद आई होगी पसंद आई तो इस वीडियो को लाइक करें
Speaker A
तुम खुद सोचो कि एक ऐसा मालवेयर जो किसी के भी कंप्यूटर में डाला जाए तो वह उनकी आईपी एड्रेस, उनके मैक एड्रेस, उनकी बहुत सी एक्टिविटी को ट्रैक कर सकता है और यह वायरस किसी के भी कंप्यूटर पर यूज किया जा सकता है।
Topics:डार्क वेबप्ले पेन केसएफबीआईऑनलाइन प्राइवेसीसाइबर सिक्योरिटीएनआईटी टूलऑपरेशन पसिफरचाइल्ड एब्यूजटोर नेटवर्कडिजिटल राइट्स











