यह वीडियो इंसानियत के सफर, अल्लाह की हिदायतों और शैतान से बचाव की अहमियत पर आधारित है।
Key Takeaways
- इंसान का मकसद खुदा की बंदगी और सही रास्ते पर चलना है।
- शैतान इंसान का दुश्मन है, जिससे बचना जरूरी है।
- कुरान ही आज के समय में इंसान के लिए सही मार्गदर्शक है।
- हर इंसान को अपने कर्मों का हिसाब देना होगा।
- इंसानियत के सफर में तौबा और सही इरादे महत्वपूर्ण हैं।
What the video covers
- इंसानियत की शुरुआत और अल्लाह द्वारा मखलूकात का निर्माण।
- आदम और हव्वा की जन्नत से जमीन पर आना और इंसान के जीवन का उद्देश्य।
- शैतान का इंकार और इंसान को भटकाने की कोशिशें।
- नबी और रसूलों का इतिहास और उनका पैगाम।
- कुरान की अहमियत और आज के दौर में उसका ही मार्गदर्शन।
- दुनिया को छोड़कर रब की इबादत करने का संदेश।
- इंसान के दो रास्ते: रोशन और अंधेरा।
- इंसानियत के लिए इम्तिहान और तौबा की जरूरत।
- शैतान की चालों से बचाव और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा।
- अंतिम फैसला और जन्नत-जहन्नुम का महत्व।
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Speaker A
निजाम थे कैद के जैसे। दीवारें दिखती ना थीं, जंजीरें बांधी गईं पर आवाज़ ना आई। नाम बदले कभी हुकूमत, कभी यमन, कभी मुशरा, पर असल में वही चंद हाथ जिनमें लाखों की लकीरें थीं फैसला सुनाते गए। लिबास का रंग कौन सा होगा, इल्म किस सूरत में दिया जाएगा, रोटी किस दाम बिकेगी, मरहम किस जख्म तक पहुंचेगा। हर चीज़ का फैसला पहले से लिखा गया था। किताबें भी वही थीं जिनमें सवालात की गुंजाइश ना हो। फिक्र की चिंगारी से पहले सोच की मिट्टी भगा दी गई।
Speaker A
में दिया जाएगा रोटी किस दाम बिकेगी मरहम किस जख्म तक पहुंचेगा। हर चीज का फैसला पहले से लिखा गया था। किताबें भी वही थी जिनमें सवालात की गुंजाइश ना हो। फिक्र की चिंगारी से पहले सोच की मिट्टी भगा दी गई।
Speaker A
और जब सवाल उठा तो जवाब में कानून उतर गया। मंजूरी है जरूरी। है जरूरी। या तो कैद या तो कैद। तो जी हुजूर। [संगीत] जिंदा रहने के लिए खाक में घुलना लाजिम था। आज़ादी सिर्फ उसके लिए थी जो अपनी जंजीर को जेवर समझे। और फिर यह भी तय हुआ कि पैदा होने वाला डॉक्टर बनेगा या खून या दोनों। बस रंग अलग होंगे। हाथ उन्हीं के लिए काम करेंगे। जंग भी वही लिखते थे, अमन भी वही सुनाते थे। शहीद भी खुद बनाते थे और दुश्मन दुश्मन भी वही दिखाते थे। किताबें मुत्तिल हो गईं। स्क्रीन ने सब निगल लिया। सोचना बेकार था। महसूस करना एक जुर्म। आवाज़ बस यही रह गई। दौलत, शहरत, दुनिया और अंत में मौत। मगर यह दास्तान शुरू कहां से हुई? किस लम्हे रूह को जंजीर पहना दी गई? जहां सब कुछ था और कुछ भी ना रहा या जहां कुछ भी ना था और एक आवाज़ गूंज उठी।
Speaker A
जंजीर को जेवर समझे। और फिर यह भी तय हुआ कि पैदा होने वाला डॉक्टर बनेगा या खून या दोनों। बस रंग अलग होंगे। हाथ उन्हीं के लिए काम करेंगे। जंग भी वही लिखते थे, अमन भी वही सुनाते थे। शहीद भी खुद बनाते थे और
Speaker A
गुण अकबर अकबर। वो अल्लाह था जिसने आसमान और जमीन को छह दिनों में पैदा किया। आसमान और जमीन एक थे। फिर उसने उन्हें अलग कर दिया। फिर उसने आसमान की तरफ रुजू किया। जबकि वो धुआं था। और कहा जमीन और आसमान, आओ खुशी से या मजबूरी से। तो दोनों ने कहा हम खुशी से आते हैं। फिर उसने दो दिनों में सात आसमान बना दिए और जमीन में बरकत डाली। हर चीज़ का निजाम मुकर्रर कर दिया। चार दिनों में सब तालिबों के लिए बराबर। फिर रब ने फरिश्तों से कहा मैं मिट्टी से इंसान बनाने वाला हूं। फिर जब मैं उसे पूरी तरह बना दूं और उसमें अपनी रूह फूंक दूं तो तुम सब उसके लिए सजदे में गिर जाना। सजदा रब के हुकुम को था। जैसे हम काबा की तरफ रुख करके करते हैं। तो सब फरिश्ते सजदे में गिर गए। मगर इब्लीस ने इंकार किया। उसने तकब्बुर किया और काफिर बन गया। इसी वजह से उसे जन्नत से निकाल दिया गया। फिर अल्लाह ने कहा, ए आदम तुम और तुम्हारी बीवी जन्नत में रहो। और जो चाहो खाओ पियो। लेकिन इस दरख्त के करीब ना जाना। वरना तुम जालिमों में हो जाओगे। शैतान ने उन्हें बहका दिया और उस बहकावे में आकर उन्होंने वह फल खा लिया। अल्लाह ने कहा सब के सब जमीन पर उतर जाओ। तुम एक दूसरे के दुश्मन होगे और जमीन में एक वक्त तक तुम्हारा रहना और गुजारा है। फिर आदम अली सलाम ने अपने रब से कुछ कलमात सीखे और अल्लाह से माफी मांगी। अल्लाह ने उनकी तौबा कबूल कर ली। क्योंकि वह तौबा कबूल करने वाले निहायत मेहरबान है। अल्लाह ने कहा सब के सब जमीन पर उतर जाओ। जब मेरी तरफ से तुम्हारे पास कोई हिदायत आए तो जो लोग उसकी पैरवी करेंगे उन पर ना तो कोई खौफ होगा ना वह गमगीन होंगे। और इस तरह इंसान के सफर का आगाज हुआ।
Speaker A
लम्हे रूह को जंजीर पहना दी गई? जहां सब कुछ था और कुछ भी ना रहा या जहां कुछ भी ना था और एक आवाज गूंज उठी। गुण अकबर अकबर। वो अल्लाह था जिसने आसमान और जमीन को छह दिनों में पैदा किया। आसमान और जमीन
Speaker A
मखलूक से अशरफुल मखलूक बनने का सफर। यह सफर मुश्किल जरूर था। इंसान को अपने नफ्स पर काबू रखकर खालिक के लिए तकवा इख्तियार करना था। और शैतान जो इंसान का खुला दुश्मन है उससे भी बचना था। यह सफर तवील नहीं है। बस चंद सालों का मामला है। मगर हम यह समझने से कासिर हैं। हम करीब की चीजों को सच समझकर उन चीजों पर गौर ही नहीं करते जो हमसे दूर हैं। जैसे आसमान गहरा, घना और वसी। खता हमारी कि हम देखने से महरूम हैं। पर इसका मतलब यह तो नहीं कि आसमान है ही नहीं। अंधे हम हुए हैं जहां तो नहीं। और अल्लाह का मामला भी कुछ ऐसा ही है। आदम अली सलाम और बीबी हव्वा जमीन पर आ गए और यूं इंसानियत का आगाज हुआ। फिर नस्लें बनती गईं और लोगों में इख्तलाफ उठता गया। जबकि वो सब एक ही उम्मत थे। तब अल्लाह ने उनके दरमियान नबी भेजे। खुशखबरी देने वाले और डराने वाले और उनके साथ अल्लाह ने अहकामात भी भेजे ताकि वह उनके दरमियान फैसला करें जिन्हें आपस में कई बातों पर इख्तलाफ रहा। और बस फिर शैतान लोगों को हर लम्हे भटकाता रहा और अल्लाह अपने पैगंबर लोगों की इस्लाह के लिए भेजता रहा। जैसे हजरत नूह अल सलाम, हजरत लूत अल सलाम, हजरत इब्राहिम अल सलाम, हजरत दाऊद अल सलाम, हजरत मूसा अल सलाम, हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और आखिरी नबी के बाद रसूलों के सिलसिले पर मोहर लगा दी गई कि अब ता कयामत कोई रसूल पैदा ना होगा। अल्लाह के जितने पैगंबर गुजरे सबका पैगाम एक ही रहा। तुम्हारा रब एक है। उसकी इबादत करो और उसकी रस्सी को मजबूती से थामे रहो। यह दुनिया इम्तिहान है ताकि अल्लाह के बंदों को शैतान के पैरोकारों से अलग कर दिया जाए। ताकि जन्नत में सिर्फ वो लोग जाएं जो इस दुनिया के मुख्तसर से सफर में साबित कदम रहे। जो मुत्तकी रहे और वो रूहें जो शैतान की पैरवी में रही जैसे फिरौन, नमरूद, अबू लहब और आज के जमाने के कई और उनका ठिकाना जहन्नुम बने। यह वो कौमें थीं जो गुनहगार तो रही लेकिन अल्लाह सुभाना ताला इनकी इस्लाह के लिए अपने बंदे भेजते रहते थे ताकि लोगों पर शैतान की गिफ्ट कमजोर कर दी जाए और इन्हें वापस हक के रास्ते पर लाया जाए। पर सवाल यह था कि लोग हक के रास्ते से भटकते ही क्यों थे? क्योंकि उसमें मिलावट कर दी जाती थी जो पैगाम अल्लाह के नबी ले आते थे। उन आयतों को कुछ मानने और कुछ ना मानने के सबब टुकड़े-टुकड़े कर दिया जाता था। जो सच था उसमें झूठ की मिलावट करके ऐसे पेश किया जाता था जिससे बात भी सही लगे और सुनने वाले को दुनियावी फायदा भी पहुंचे। जो एक धोखा था खुद को दिया हुआ एक धोखा। अब हम उस दौर में हैं जहां रसूल नहीं आएंगे। जहां उस जहां से ताल्लुक का जरिया सिर्फ कुरान है। सिर्फ कुरान ही है जो दुनिया में आखिरत का नक्शा भी खींचता है। तुम्हारा रब कौन है? यह बताता है। तुम कौन हो? तुम्हारा मकसद क्या है? यह सब समझाता है। तो कौन हो तुम? शैतान के पैरोकार, माल के पीछे भागने वाले, दुनिया में बेहयाई फैलाने वाले, अल्लाह के अहकामात और उसकी निशानियों को ठुकराने वाले, जिंदगी भर इंसान होकर इंसान के आगे झुकने वाले, रब को भूलकर दुनिया को पूजने वाले, रब को सुनने के बजाय मौसी सुनने वाले, इबादत की जगह नाचने वाले, दीन की जगह दुनिया का सौदा करने वाले, सच में झूठ को मिलाने वाले, लोगों को राह से भटकाने वाले, जिस्म ढापने की जगह उसकी नुमाइश करने वाले, सबको धोखा देने वाले, लोगों का कत्ल करने वाले, नापोल में कमी करने वाले। कौन है तू?
Speaker A
और जमीन में बरकत डाली। हर चीज का निजाम मुकर्रर कर दिया। चार दिनों में सब तालिबों के लिए बराबर। फिर रब ने फरिश्तों से कहा मैं मिट्टी से इंसान बनाने वाला हूं। फिर जब मैं उसे पूरी तरह बना दूं और
Speaker A
तेरा मकसद क्या है? क्या ढूंढता है तेरा जहां क्या है? इस सच के सिवा तुझे आता क्या है? तू मुसाफिर मंजिल लापता है। ए रात अंधेरी तेरा जुगनू कहां है? तेरे हिस्से में क्या बस अंधेरा बचा है? कौन है तू? कौन है? वमा खत जिन व इ्लाह। [संगीत] मा उरीद रिमा उरी इन अल्लाहहु रजा कुत। पैदाइश में ना कोई खता थी, ना खेल था। हर जर्रा एक निजाम का हिस्सा था। हर रूह में एक मकसद छुपा था। वक्त के दामन से गिरती हुई रूहों का सिलसिला जिनका मकसद सिर्फ एक था। सिर्फ एक बंदगी। खुद ही का फना होना खुदा में। जिसका ना कोई अक्स ना मिसाल। जिस्म एक अज़ फनी रूह है, राजज़ अज़ल। और दोनों का ताल्लुक सिर्फ एक से। जमीन पर कदम रखना सिर्फ एक सफर था। मकाम यह कभी था ही नहीं। हर लम्हा एक इम्तिहान था। हर मौका एक गवाही। लौटना था वहां जहां से सब शुरू हुआ। जहां हिसाब भी होगा और फैसला भी। दो रास्ते थे। एक रोशन, एक अंधेरा। हर मंजिल अपने रास्ते से बनती है। और वक्त वक्त कभी नहीं रुकता। ना किसी के लिए पलटता है, ना किसी को मोहलत देता है। जो लिखा गया था वो कह दिया गया। या इबादना आनु इन वसु फ कुल न्स।
Speaker A
किया। उसने तकब्बुर किया और काफिर बन गया। इसी वजह से उसे जन्नत से निकाल दिया गया। फिर अल्लाह ने कहा, ए आदम तुम और तुम्हारी बीवी जन्नत में रहो। और जो चाहो खाओ पियो। लेकिन इस दरख्त के करीब ना जाना। वरना तुम
Speaker A
और ये कहकर खामोशी छा गई। तुम किस तरफ हो? तुम्हारे? तुम्हारा रब तुमसे सिर्फ बंदगी चाहता है। तुम्हारा मकसद रब है। दुनिया नहीं। यह अल्लाह ने खुद कहा और बात खत्म हुई। फैसला तुम्हारे हाथ में है। मगर वक्त नहीं। लौट आओ। इससे पहले तुम लौटाए जाओ।
Speaker A
रहना और गुजारा है। फिर आदम अली सलाम ने अपने रब से कुछ कलमात सीखे और अल्लाह से माफी मांगी। अल्लाह ने उनकी तौबा कबूल कर ली। क्योंकि वह तौबा कबूल करने वाले निहायत मेहरबान है। अल्लाह ने कहा सब के
Speaker A
सब जमीन पर उतर जाओ। जब मेरी तरफ से तुम्हारे पास कोई हिदायत आए तो जो लोग उसकी पैरवी करेंगे उन पर ना तो कोई खौफ होगा ना वह गमगीन होंगे। और इस तरह इंसान के सफर का आगाज हुआ।
Speaker A
मखलूक से अशरफुल मखलूक बनने का सफर। यह सफर मुश्किल जरूर था। इंसान को अपने नफ्स पर काबू रखकर खालिक के लिए तकवा इख्तियार करना था। और शैतान जो इंसान का खुला दुश्मन है उससे भी बचना था। यह सफर तवील
Speaker A
नहीं है। बस चंद सालों का मामला है। मगर हम यह समझने से कासिर हैं। हम करीब की चीजों को सच समझकर उन चीजों पर गौर ही नहीं करते जो हमसे दूर हैं। जैसे आसमान गहरा, घना और वसी। खता हमारी के हम देखने से महरूम। पर इसका
Speaker A
मतलब यह तो नहीं कि आसमान है ही नहीं। अंधे हम हुए हैं जहां तो नहीं। और अल्लाह का मामला भी कुछ ऐसा ही है। आदम अली सलाम और बीबी हव्वा जमीन पर आ गए और यूं इंसानियत का आगाज हुआ। फिर नस्लें बनती गई
Speaker A
और लोगों में इख्तलाफ उठता गया। जबकि वो सब एक ही उम्मत थे। तब अल्लाह ने उनके दरमियान नबी भेजे। खुशखबरी देने वाले और डराने वाले और उनके साथ अल्लाह ने अहकामात भी भेजे ताकि वह उनके दरमियान फैसला करें
Speaker A
जिन्हें आपस में कई बातों पर इख्तलाफ रहा और बस फिर शैतान लोगों को हर लम्हे भटकाता रहा और अल्लाह अपने पैगंबर लोगों की इस्लाह के लिए भेजता रहा। जैसे हजरत नूह अल सलाम, हजरत लूत अल सलाम, हजरत इब्राहिम
Speaker A
अल सलाम, हजरत दाऊद अल सलाम, हजरत मूसा अल सलाम, हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और आखिरी नबी के बाद रसूलों के सिलसिले पर मोहर लगा दी गई कि अब ता कयामत कोई रसूल पैदा ना होगा। अल्लाह के जितने पैगंबर
Speaker A
गुजरे सबका पैगाम एक ही रहा। तुम्हारा रब एक है। उसकी इबादत करो और उसकी रस्सी को मजबूती से थामे रहो। यह दुनिया इम्तिहान है ताकि अल्लाह के बंदों को शैतान के पैरोकारों से अलग कर दिया जाए। ताकि जन्नत
Speaker A
में सिर्फ वो लोग जाए जो इस दुनिया के मुख्तसर से सफर में साबित कदम रहे। जो मुत्तकी रहे और वो रूहें जो शैतान की पैरवी में रही जैसे फिरौन, नमरूद, अबू लहब और आज के जमाने के कई और उनका ठिकाना
Speaker A
जहन्नुम बने। यह वो कौमें थी जो गुनहगार तो रही लेकिन अल्लाह सुभाना ताला इनकी इस्लाह के लिए अपने बंदे भेजते रहते थे ताकि लोगों पर शैतान की गिफ्ट कमजोर कर दी जाए और इन्हें वापस हक के रास्ते पर लाया
Speaker A
जाए पर सवाल यह था कि लोग हक के रास्ते से भटकते ही क्यों थे क्योंकि उसमें मिलावट कर दी जाती थी जो पैगाम अल्लाह के नबी ले आते थे उन आयतों को कुछ मानने और कुछ ना मानने के सबब टुकड़े-टुकड़े कर दिया जाता
Speaker A
था जो सच था। उसमें झूठ की मिलावट करके ऐसे पेश किया जाता था जिससे बात भी सही लगे और सुनने वाले को दुनियावी फायदा भी पहुंचे। जो एक धोखा था खुद को दिया हुआ एक धोखा। अब हम उस दौर में हैं जहां रसूल
Speaker A
नहीं आएंगे। जहां उस जहां से ताल्लुक का जरिया सिर्फ कुरान है। सिर्फ कुरान ही है जो दुनिया में आखिरत का नक्शा भी खींचता है। तुम्हारा रब कौन है? यह बताता है। तुम कौन हो? तुम्हारा मकसद क्या है? यह सब
Speaker A
समझाता है। तो कौन हो तुम? शैतान के पैरोकार, माल के पीछे भागने वाले, दुनिया में बेहयाई फैलाने वाले, अल्लाह के अहकामात और उसकी निशानियों को ठुकराने वाले, जिंदगी भर इंसान होकर इंसान के आगे झुकने वाले, रब को भूलकर दुनिया को पूजने वाले, रब को
Speaker A
सुनने के बजाय मौसी सुनने वाले, इबादत की जगह नाचने वाले, दीन की जगह दुनिया का सौदा करने वाले, सच में झूठ को मिलाने वाले, लोगों को राह से भटकाने वाले, जिस्म ढापने की जगह उसकी नुमाइश करने वाले, सबको
Speaker A
धोखा देने वाले, लोगों का कत्ल करने वाले, नापोल में कमी करने वाले। कौन है तू?
Speaker A
तेरा मकसद क्या है? क्या ढूंढता है तेरा जहां क्या है? इस सच के सिवा तुझे आता क्या है? तू मुसाफिर मंजिल लापता है। ए रात अंधेरी तेरा जुगनू कहां है? तेरे हिस्से में क्या बस अंधेरा बचा है? कौन है
Speaker A
तू? कौन है? वमा खत जिन व इ्लाह [संगीत] मा उरीद रिमा उरी इन अल्लाहहु रजा कुत मती पैदाइश में ना कोई खता थी ना खेल था हर जर्रा एक निजाम का हिस्सा था। हर रूह में एक मकसद छुपा था। वक्त के दामन से गिरती
Speaker A
हुई रूहों का सिलसिला जिनका मकसद सिर्फ एक था। सिर्फ एक बंदगी। खुद ही का फना होना खुदा में। जिसका ना कोई अक्स ना मिसाल। जिस्म एक अज़ फनी रूह है राजज़ अज़ल। और दोनों का ताल्लुक सिर्फ एक से। जमीन पर
Speaker A
कदम रखना सिर्फ एक सफर था। मकाम यह कभी था ही नहीं। हर लम्हा एक इम्तिहान था। हर मौका एक गवाही। लौटना था वहां जहां से सब शुरू हुआ। जहां हिसाब भी होगा और फैसला भी। दो रास्ते थे। एक रोशन, एक अंधेरा। हर
Speaker A
मंजिल अपने रास्ते से बनती है। और वक्त वक्त कभी नहीं रुकता। ना किसी के लिए पलटता है ना किसी को मोहलत देता है। जो लिखा गया था वो कह दिया गया। या इबादना आनु इन वसु फ कुल न्स
Speaker A
और ये कहकर खामोशी छा गई तुम किस तरफ हो तुम्हारे तुम्हारा रब तुमसे सिर्फ बंदगी चाहता है। तुम्हारा मकसद रब है। दुनिया नहीं। यह अल्लाह ने खुद कहा और बात खत्म हुई। फैसला तुम्हारे हाथ में है। मगर वक्त
Speaker A
नहीं। लौट आओ। इससे पहले तुम लौटाए जाओ।
Topics:इंसानियतअल्लाहशैतानकुराननबीरसूलतौबाजन्नतजहन्नुमहिदायत











