ईरान के नए सुप्रीम लीडर सैयद मुस्तबा खामिनाई की जीवन यात्रा, फौजी पृष्ठभूमि और राजनीतिक प्रभाव पर एक विस्तृत विश्लेषण।
Key Takeaways
- मुस्तबा खामिनाई ईरान के एक प्रभावशाली फौजी और राजनीतिक नेता हैं, जो अपने पिता से अलग एक वॉरियर लीडर के रूप में उभरे हैं।
- ईरान-इराक युद्ध ने मुस्तबा के जीवन और नेतृत्व शैली को गहराई से प्रभावित किया।
- परमाणु हथियारों को लेकर ईरान में गहरी धार्मिक और राजनीतिक बहसें हैं, जिनमें मुस्तबा का महत्वपूर्ण योगदान है।
- मुस्तबा की गुप्त राजनीतिक शक्ति और अमेरिका-इजराइल के साथ उनकी टकरावपूर्ण स्थिति ईरान की अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित करती है।
- परिवारिक नुकसान और राजनीतिक दबावों के बावजूद मुस्तबा खामिनाई ईरान की फौज और इंटेलिजेंस पर मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं।
What the video covers
- मुस्तबा खामिनाई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर माना जा रहा है, जो अपने पिता अली खामिनाई के बिल्कुल विपरीत एक फौजी नेता हैं।
- मुस्तबा बचपन से ही ईरान की फौज में सक्रिय रहे और इराक के खिलाफ युद्ध में भी शामिल थे।
- आयतुल्लाह खुमैनी के नेतृत्व में ईरान की राजनीतिक स्थिति और बादशाह रजा शाह के पतन का वर्णन।
- सद्दाम हुसैन के साथ ईरान-इराक युद्ध की पृष्ठभूमि और मुस्तबा की भूमिका।
- अली खामिनाई के सुप्रीम लीडर बनने की प्रक्रिया और मुस्तबा का फौज के साथ गहरा संबंध।
- इराक युद्ध के बाद अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर परमाणु हथियार बनाने के आरोप और विवाद।
- ईरान में परमाणु हथियार बनाने को लेकर धार्मिक और राजनीतिक बहसें, जिसमें मुस्तबा खामिनाई का समर्थन शामिल है।
- मुस्तबा खामिनाई की मीडिया से दूरी और उनकी गुप्त राजनीतिक शक्ति का खुलासा विकिलीक्स दस्तावेजों के माध्यम से।
- अमेरिका और इजराइल द्वारा मुस्तबा पर लगाए गए प्रतिबंध और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर दबाव।
- हाल के वर्षों में ईरान पर हमलों के दौरान मुस्तबा के परिवार को हुए नुकसान और ईरान के राजनीतिक परिदृश्य में उनकी भूमिका।
Chapters
- 00:00मुस्तबा खामिनाई का परिचय और विवाद
- 01:32मुस्तबा की फौजी पृष्ठभूमि और पिता से अंतर
- 02:34आयतुल्लाह खुमैनी और ईरान की राजनीतिक क्रांति
- 03:29इराक के सद्दाम हुसैन के साथ युद्ध
- 04:30मुस्तबा का फौज में शामिल होना और युद्ध में भूमिका
- 05:28आयतुल्लाह खुमैनी की मृत्यु और नए सुप्रीम लीडर का चुनाव
- 06:19मुस्तबा का फौज और स्कॉलर के रूप में विकास
- 07:19अमेरिका-इजराइल की रणनीति और ईरान का परमाणु विवाद
- 08:08मुस्तबा की गुप्त शक्ति और मीडिया से दूरी
- 09:12परिवारिक नुकसान और वर्तमान राजनीतिक स्थिति
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Speaker A
ईरान का नया सुप्रीम सैयद मुस्तबा मुस्तबा अली खामिनाई मुस्तबा जिसे पिछले कई सालों से ना कभी किसी ने देखा है और ना उसकी आवाज सुनी। लेकिन जैसे ही उसका नाम सुप्रीम लीडर के लिए सामने आया।
Speaker A
[संगीत] अमेरिका के डॉनल्ड ट्रंप इस नाम को सुनते ही इसे रिजेक्ट कर दिया।
Speaker A
[संगीत] क्योंकि आम लोग तो इस मुस्तफा को नहीं जानते। लेकिन अमेरिका की सीआईए और इजराइल की मौसाद को अच्छी तरह पता है कि मुस्तबा खामिनाई आखिर है कौन। और उन्हें पता है कि इससे पहले मुजतबा का बाप अली
Speaker A
खामिनाई एक बहुत ही सिंपल और सॉफ्ट इंसान था। लेकिन अब यह नया सुप्रीम लीडर मुजबा खामिनाई अपने बाप के बिल्कुल ऑपोजिट है। बल्कि वो बचपन से ईरान की फौज में एक सोल्जर की तरह लड़ता रहा है। ईरान की पूरी फौज इन्हें ही अपना
Speaker A
असल लीडर मानती है। और अब ईरान में पहली बार एक ऐसा सुप्रीम लीडर आया है। जो एक आलिम और स्कॉलर से ज्यादा एक वॉरियर सुप्रीम लीडर है। लेकिन आखिर मुस्तफा खामनाई यहां तक पहुंचा कैसे?
Speaker A
आज से ऑलमोस्ट 50 साल पहले जब ईरान में एक बहुत ही करप्ट बादशाह रजा शाह का राज था। मोस्ट [संगीत] प्रोस्परस कंट्रीज ऑफ द वर्ल्ड। इसी करप्ट बादशाह को चैलेंज करने के लिए ईरान में एक नया लीडर सामने आया।
Speaker A
आयतुल्लाह खुमेनी। आखिर खुमेनी की ताकत इतनी बढ़ गई कि ईरान का बादशाह मजबूरन ईरान को छोड़कर हमेशा के लिए भाग गया। एंड हव ईरान और इस तरह खुमेनी ईरान का पहला सुप्रीम लीडर बना। लेफ्ट। जैसे ही खुमेनी ईरान का सुप्रीम लीडर बना।
Speaker A
दुनिया की कोई भी सुपर पावर उसे पसंद नहीं करती थी। क्योंकि वो बाकी मुसलमान लीडर्स की तरह अमेरिका के जूते पॉलिश करने के बजाय सीधा अमेरिका की आंखों में आंखें डालकर उसे धमकियां दिया करता था। इसीलिए अमेरिका, इजराइल और बाकी सारे
Speaker A
लीडर्स पहले दिन से खुमेनी से अपनी जान छुड़ाना चाहते थे। और आखिर उन्हें यह रास्ता मिल गया। ईरान के पास ही एक मुल्क इराक में एक नया लीडर आया। जो इन सुपर पावर्स के लिए खुमेनी पर हमला करने के लिए
Speaker A
तैयार थे। और इस लीडर का नाम था सद्दाम हुसैन। बिस्मिल्लाहमानहीम। इसी के साथ सदाम हुसैन ने ईरान के खुमेनी पर हमला कर दिया। इराकी टैंक्स राउंड अक्रॉस द बॉर्डर इनू ईरान और मुसलमानों की आपस में जंग शुरू हुई।
Speaker A
लेकिन जैसे ही जंग शुरू हुई अचानक ईरान के प्रेसिडेंट को एक धमाके में मार दिया गया। जिसके बाद ईरान का नया प्रेसिडेंट अली खामिनाई बना। तो अब जब खामिनाई सदाम हुसैन के साथ जंग में बिजी था। उनके घर में उनका 12 साल का बेटा मुस्तफा
Speaker A
बिल्कुल आम बच्चों की तरह स्कूल जाया करता था। और मुस्तफा बचपन से ही ईरान की इस इतनी बड़ी जंग को गौर से देख रहा था। मतलब मुस्तफा का सारा बचपन एक जंग के बीच में ही गुजरा था। और आखिर जैसे ही मुस्तफा की
Speaker A
उम्र 17 साल हुई मुस्तफा भी एक आम सोल्जर की तरह ईरान की फौज में शामिल हुआ। [संगीत] और सदाम हुसैन के खिलाफ जंग में लड़ने लगा। इस वक्त मुजतबा खामनाई ईरान के प्रेसिडेंट का बेटा था। लेकिन कहा जाता है तब भी वो बिल्कुल एक आम
Speaker A
सोल्जर की तरह जंग के फ्रंट लाइंस में जाकर लड़ा करता था। [संगीत] इसी तरह मुस्तफा ईरान की आर्मी में अपने बटालियन के साथ इराक के अंदर घुस गया। और इराक में घुसकर मुजबा और उसके साथियों ने इराक के 30
Speaker A
पहाड़ों पर ईरान का झंडा लहराया। लेकिन अब जब यहां ये सब कुछ हो रहा था। अचानक इराक और ईरान ने इस जंग को खत्म करने का फैसला किया। [संगीत] और सारी फौजें अपनी जगहों पर वापस चली गई। जिससे ये 8 साल की जंग खत्म हो गई।
Speaker A
[संगीत] लेकिन इस जंग के सिर्फ एक साल बाद ईरान के पहले सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खुमे इस दुनिया से चले गए। अब यहां पर एक बहुत बड़ा क्वेश्चन था कि आखिर ईरान का नया सुप्रीम लीडर कौन होगा?
Speaker A
[संगीत] इसीलिए ईरान के 86 सबसे बड़े स्कॉलर्स एक मीटिंग के लिए जमा हुए और नए सुप्रीम लीडर के लिए वोटिंग शुरू हुई। इस इलेक्शन में 86 में से 60 बड़े स्कॉलर्स ने अली खामिनाई को वोट दिया। [संगीत] जो
Speaker A
70% वोट बनता था और इसी के साथ अली खामिनाई ईरान के नए सुप्रीम लीडर बने। अब मुजतबा सिर्फ प्रेसिडेंट ऑफ ईरान का नहीं बल्कि सुप्रीम लीडर ऑफ ईरान का बेटा था। लेकिन कहा जाता है वो फिर भी अपने बाप
Speaker A
के साथ नहीं बल्कि उसी तरह ईरान की फौज में रहा। और इसी तरह अगले 10 साल तक ईरान की फौज और मुस्तबा खामनाई का आपस में बहुत ही गहरा ताल्लुक बन गया। और अब तक मुस्तबा एक स्कॉलर की तरह नहीं
Speaker A
बल्कि हमेशा ईरान के एक फौजी का यूनिफार्म पहना करता था। आखिर 10 साल तक ईरान की फौज में रहने के बाद मुस्तफा एक फौजी होने के साथ-साथ एक स्कॉलर बनने की भी तैयारी करने लगा। जिसके बाद मुस्तबा को हर जगह पहली बार ऐसे
Speaker A
कपड़ों में देखा जाने लगा। इस तरह मुस्तबा ईरान के बड़े-बड़े स्कॉलर्स का स्टूडेंट बना। अब जब मुजतबा यहां पढ़ रहा था। इसी दौर में इराक के सद्दाम हुसैन और अमेरिका की भी दुश्मनी शुरू हो चुकी थी। स्टेज मिलिट्री ऑपरेशन
Speaker A
और सद्दाम अब बिल्कुल बदल चुका था और वो भी अब अमेरिका को धमकियां दिया गया। इसीलिए सद्दाम की धमकियों के बाद अब अमेरिका सद्दाम को भी हटाना चाहता था। सदाम हुसैन 48 आवर्स। इसीलिए अमेरिका और इजराइल मिलकर सद्दाम पर बार-बार झूठे इल्जाम लगाने लगे
Speaker A
कि सदाम हुसैन इराक के लिए एटम बम बनाने वाला है। टू अचीवप्स सदाम हुसैन बार-बार कहता रहा कि उसके पास कोई एटम बम नहीं है। लेकिन तब भी अमेरिका ने उसकी नहीं मानी और अपनी पूरी ताकत के साथ इराक पर हमला कर
Speaker A
दिया। और इराक में लाखों लोगों को मारने के बाद पूरी दुनिया ने देखा कि यह सब बस झूठ था और इराक में कोई एटम बम था ही नहीं। लेकिन अमेरिका और इजराइल अब भी नहीं रुके और इराक के बाद अब ईरान पर भी इल्जाम
Speaker A
लगाने लगे कि ईरान भी एटम बम बनाने वाला है। [संगीत] ये देखकर ईरान के बड़े स्कॉलर्स में एक बहुत बड़ी डिबेट स्टार्ट हुई कि अब हमें क्या करना चाहिए। कुछ ने कहा कि हमें एटम बम नहीं बनाना चाहिए। लेकिन कुछ ने कहा कि
Speaker A
अगर हम एटम बम बनाए या ना बनाएं एक दिन अमेरिका हम पर हमला जरूर करेगा। इसीलिए हमें एटम बम बनाना चाहिए। आखिर ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामिनाई ने यह डिबेट्स खत्म कर दी। और पूरी दुनिया के सामने ऐलान किया कि ईरान कभी भी एटम बम
Speaker A
नहीं बनाएगा। क्योंकि एटम बम बनाना इस्लाम में हराम है। हराम है। लेकिन अली खामिनाई के इस फतवे से ईरान में हर कोई खुश नहीं था। बल्कि कुछ बड़े स्कॉलर्स ऐसे थे जिनका अब भी यही ख्याल था कि ईरान को एटम बम बनाना चाहिए। और कहा
Speaker A
जाता है इन्हीं स्कॉलर्स के साथ खामनाई का अपना बेटा मुस्तबा खामनाई भी था। जो चाहता था कि ईरान भी एटम बम बनाए। लेकिन इस बात का ना ईरान में और ना ईरान से बाहर किसी को पता था बल्कि अब तक सिर्फ
Speaker A
कुछ पिक्चर्स के अलावा मुस्तफा खामनाई को ना कभी किसी ने देखा था और ना सुना था। मुस्तफा सुप्रीम लीडर का बेटा होने के बाद। [संगीत] पूरी दुनिया से बिल्कुल गायब था। लेकिन आज से 20 साल पहले अचानक दुनिया की
Speaker A
एक सीक्रेट ऑर्गेनाइजेशन विककी लीग्स में कुछ डॉक्यूमेंट्स रिलीज हुए। जिनमें लिखा था कि मुजतबा खामनाई मीडिया में तो किसी को नहीं दिखता लेकिन असल में मुस्तबा खामनाई ईरान के सबसे पावरफुल लोगों में से एक है। जिसे ईरान की फौज एक कैपेबल और
Speaker A
फोर्सफुल लीडर मानती है। और इन डॉक्यूमेंट्स में आज से 20 साल पहले लिखा था कि हो सकता है आगे जाकर एक दिन मुजतबा खामिनाई पूरे ईरान का सुप्रीम लीडर बने। सैयद मुस्तबा [संगीत] हुसैनी खामिनी क्योंकि उसके पास अभी से ईरान की फौज और
Speaker A
ईरान की इंटेलिजेंस पर एक बहुत बड़ा इनफ्लुएंस है। और इन लीक्स के अंदर यह भी लिखा था मुजतबा खामनाई का ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम मतलब एटम बम के साथ एक बहुत ही गहरा ताल्लुक है। और यहीं से अमेरिका और इजराइल आज से 20 साल पहले से
Speaker A
मुस्तबा खामनाई के हर स्टेप को गौर से मॉनिटर करने लगी। लेकिन इन लीक्स के बाद भी मुस्तबा खामिनाई पूरी दुनिया के कैमरों और। [संगीत] मीडिया से हमेशा दूर रहा और पिछले 15 सालों से मीडिया में मुस्तबा खामिनाई की इन कुछ
Speaker A
तस्वीरों के अलावा और कुछ भी नहीं है। लेकिन दुनिया की मीडिया से गायब होने के बाद भी आज से कुछ साल पहले अमेरिका ने मुस्तबा खामिनाई पर भारी सेंशंस और पाबंदियां लगाई क्योंकि उन्हें पता था कि मुस्तबा खामिनाई
Speaker A
का अब भी ईरान की फौज और इंटेलिजेंस पर एक बहुत बड़ा कंट्रोल है। और आज से कुछ साल पहले जब इजराइल बार-बार कहने लगा कि अब वो ईरान पर हमला करके रहेगा जिसके लिए वो अमेरिका पर प्रेशर डालने लगे।
Speaker A
कि वो भी ईरान पर हमला करें। वी हैव टू स्टॉप दिस कंट्री। यह देखकर ईरान के इंटेलिजेंस चीफ ने कहा कि हमें पता है कि हमारे सुप्रीम लीडर का एटम बम बनाने के खिलाफ एक फतवा है। हराम है।
Speaker A
लेकिन अगर अमेरिका और इजराइल हमें इसी तरह हर तरफ से घेरते रहे और हमारे लिए सारे रास्ते बंद करते रहे तो हम भी चुप नहीं बैठेंगे। बल्कि बिल्कुल एक कॉर्नर टाइगर की तरह हमें अपने एटम बम के प्रोग्राम को दोबारा
Speaker A
शुरू करना होगा। न्यूक्लियर प्रोग्राम और आखिर सुप्रीम लीडर के एडवाइजर अली लारेजानी ने ऐलान किया कि अगर अमेरिका ने हम पर हमला किया तो हमारे पास भी और कोई ऑप्शन नहीं बचेगा और हम अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम दोबारा शुरू करेंगे।
Speaker A
लेकिन तब भी अमेरिका ने ईरान की बात नहीं मानी और अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमला कर दिया। स्टक एट द हार्ट ऑफ यू न्यूक्लियर और इस हमले के पहले ही दिन मुस्तबा खामिनाई ने अपने बाप और सुप्रीम लीडर अली
Speaker A
खामिनाई को खो दिया। इज डेड अली हुसैनी। इन हमलों में मुस्तफा की मां भी इस दुनिया से चली गई। और फिर मुस्तफा की बीवी भी इन हमलों में शहीद हो गई। और इन हमलों म
Speaker A
जो इस जंग के दरमियान खड़ा हो और दोबारा ईरान का झंडा उठाकर ईरान के लोगों को अमेरिका और इजराइल से बचा सके। इसीलिए ईरान के सड़कों और बाजारों में हर जगह लोग मुजतबा खामिनाई के नारे लगा रहे थे।
Speaker A
लेकिन वहां इजराइल ने भी यह ऐलान किया था कि अली खामिनाई के बाद जो भी ऐलान का सुप्रीम लीडर बनेगा हम उसे भी बिल्कुल पहले की तरह मार डालेंगे। लेकिन मुस्तफा अपनी पूरी फैमिली को खोने के बाद अब पीछे हटने वाला नहीं था। इसीलिए
Speaker A
ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुनने के लिए एक बार फिर उसी तरह स्कॉलर्स जमा हुए। जिस तरह आज से 40 साल पहले हुमेनी के फौत होने के बाद जमा हुए थे। ये देखकर अमेरिका के प्रेसिडेंट ने कहा कि अगर मुजबा खामनाई
Speaker A
सुप्रीम लीडर बन गया तो हम ईरान के इस फैसले को नहीं मानेंगे। कंट्री आई वास डिसपॉइंटेड टू सी और डॉन्ड ट्रंप मुस्तबा को रोकने के लिए बार-बार धमकियां देने लगे। वी थिंक इट्स गना लीड टू जस्ट मोर ऑफ़ द सेम प्रॉब्लम
Speaker A
फॉर द कंट्री। लेकिन इन धमकियों के बाद भी ईरान के स्कॉलर्स नहीं रुके। और 88 स्कॉलर्स ने वोट देकर ऐलान किया कि आज के बाद ईरान का नया सुप्रीम लीडर कोई और नहीं। बल्कि अली खामिनाई का बेटा होगा।
Speaker A
सैयद मुजतबा अली खामद मुस्तबा सब्सक्राइब
Topics:मुस्तबा खामिनाईईरान सुप्रीम लीडरअली खामिनाईईरान-इराक युद्धआयतुल्लाह खुमैनीईरान परमाणु कार्यक्रमसद्दाम हुसैनअमेरिका-ईरान संबंधइजराइलईरान फौज











