ईरान और अरब बादशाहों के बीच जंग और अमेरिका के मध्य पूर्व में सैन्य बेसिस की भूमिका का इतिहास।
Key Takeaways
- मध्य पूर्व में अमेरिका के सैन्य बेसिस अरब बादशाहों के नियंत्रण में नहीं बल्कि अमेरिकी नियंत्रण में हैं।
- ब्रिटिश एंपायर के पतन के बाद अमेरिका ने क्षेत्रीय प्रभुत्व स्थापित किया।
- सद्दाम हुसैन का कुवैत पर हमला अमेरिका की अप्रत्यक्ष सहमति से हुआ।
- ईरान ने अमेरिका और इजराइल के प्रभाव को कम करने के लिए सैन्य कार्रवाई की।
- मध्य पूर्व की राजनीति में बादशाहों, अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष जारी है।
What the video covers
- ईरान ने मुसलमान देशों पर हमले अमेरिका और इजराइल के बेसिस को निशाना बनाकर किए हैं।
- उस्मानिया खिलाफत के टूटने के बाद ब्रिटिश एंपायर ने अरब बादशाहों को पपेट्स बनाकर क्षेत्र पर नियंत्रण रखा।
- ब्रिटिश एंपायर के पतन के बाद अमेरिका ने अरब देशों में अपने सैन्य बेसिस स्थापित किए।
- सऊदी अरब के बादशाह शाह फैसल ने अमेरिका के बेसिस को हटाने का आदेश दिया था, लेकिन उनकी हत्या के बाद स्थिति बदली।
- सद्दाम हुसैन ने ईरान के खिलाफ युद्ध लड़ा, अरब बादशाहों से भारी कर्ज लिया और बाद में उनके साथ दुश्मनी हुई।
- सद्दाम हुसैन ने कुवैत पर हमला किया, जिसके लिए अमेरिका ने अप्रत्यक्ष रूप से अनुमति दी।
- अमेरिका ने अरब देशों में अपने सैन्य बेसिस बढ़ाए और ईरान ने इन बेसिस पर हमले किए।
- ईरान ने अमेरिका के कई एयरबेस और नौसैनिक जहाजों को निशाना बनाया।
- अमेरिका और अरब बादशाहों के बीच गठजोड़ और रणनीतिक हितों ने मध्य पूर्व की राजनीति को प्रभावित किया।
- ईरान, अमेरिका, इजराइल और अरब बादशाहों के बीच जटिल राजनीतिक और सैन्य संघर्ष का इतिहास।
Chapters
- 00:00ईरान और अरब देशों पर हमले का परिचय
- 01:44उस्मानिया खिलाफत का पतन और ब्रिटिश नियंत्रण
- 03:19ब्रिटिश एंपायर के सैन्य बेसिस और अरब बादशाहों की भूमिका
- 04:55वर्ल्ड वॉर टू के बाद अमेरिका का उदय और अरब में प्रवेश
- 06:26शाह फैसल का अमेरिका के बेसिस को हटाने का प्रयास
- 07:54सद्दाम हुसैन और ईरान के बीच युद्ध
- 09:13अरब बादशाहों और सद्दाम हुसैन के बीच आर्थिक विवाद
- 10:28कुवैत पर सद्दाम हुसैन का हमला और अमेरिका की भूमिका
- 11:50अमेरिका के अरब देशों में सैन्य बेसिस का विस्तार और ईरान के हमले
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Speaker A
आज बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो कह रहे हैं अगर ईरान की जंग इजराइल के साथ है। ऑपरेशन राइजिंग हमला इसराइल ने किया है। हमला अमेरिका ने किया है। तो फिर आखिर ईरान मुसलमान कंट्रीज पर क्यों हमला कर रहा है?
Speaker A
उसने क़तर के ऊपर मिसाइल फेंक दिया। उसने कुवैत के ऊपर मिजाइल फेंक दिया। उसने सऊदी अरब रियाज के ऊपर मिजाइल फेंक दिया। लेकिन ईरान कहता है कि वो मुसलमान कंट्रीज पर नहीं बल्कि इन मुसलमान कंट्रीज के अंदर अमेरिका और इजराइल के बेसिस को टारगेट कर
Speaker A
रहा है। अटैक्सिंग अगर ईरान की ये बात ठीक है। तो फिर यहां पर एक बहुत बड़ा क्वेश्चन पैदा होता है। आखिर इन मुसलमान कंट्रीज के अंदर अमेरिका के ये बेसिस कर क्या रहे हैं?
Speaker A
आर यूएस मिलिट्री बेस ह्यूज [संगीत] प्रेजेंस और क्यों इन अरब बादशाहों ने अमेरिका की फौज को अपने मुल्क के अंदर रहने की इजाजत दी है? अमेरिका के इन बेसिस को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा। ऑल द वे
Speaker A
टू वर्ल्ड वॉर वन। वर्ल्ड वॉर वन मुसलमानों की तरफ से उनकी आखिरी सुपर पावर बहुत ही बहादुरी से लड़ रही थी। उस्मानिया खिलाफत लेकिन बहुत बहादुरी से लड़ने के बाद भी वर्ल्ड वॉर वन में उस्मानिया खिलाफत हमेशा के लिए खत्म हो गई।
Speaker A
उस्मानिया खिलाफत के टूटने की वजह से वो सारे इलाके जहां पर उस्मानिया खिलाफत की हुकूमत थी वो सब आहिस्ता-आहिस्ता एक-एक करके उस्मानिया खिलाफत के हाथ से निकलने लगे [संगीत] और उन सारे इलाकों को ब्रिटिश एंपायर और उसके साथियों ने मुसलमानों से
Speaker A
छीन लिया। जिसके बाद इस पूरे इलाके को ब्रिटिश अंपायर ने कंट्रोल कर लिया। लेकिन ब्रिटिश एंपायर को पहले दिन से अच्छी तरह पता था कि अरब के आम मुसलमान कभी भी किसी अंग्रेज को अपना लीडर नहीं मानेंगे। [संगीत]
Speaker A
इसीलिए ब्रिटिश एंपायर ने अब इन अरब कंट्रीज को अपने कंट्रोल में रखने के लिए एक बहुत ही जबरदस्त और सीक्रेट प्लान बनाया। ब्रिटिश एंपायर ने अरब के बादशाहों से कहा कि आप ही इन सारे इलाकों के बादशाह रहेंगे।
Speaker A
यहां के मुसलमानों के सारे फैसले आप करेंगे। यहां की सड़कें, [संगीत] ब्रिजेस और बिल्डिंग्स आप ही बनाएंगे। ताकि अरब के लोग आपको ही अपना असल बादशाह समझे। लेकिन असल में ऐसा नहीं होगा। तुम बादशाह सिर्फ सड़कें और बिल्डिंग्स ही बना सकोगे।
Speaker A
लेकिन अरब दुनिया की सारी फौज और डिफेंस हमारे पास होगा। मतलब हमारी इजाजत के बगैर तुम बादशाहों की फौज कुछ नहीं कर पाएगी। इट हैड इट्स ओन किंग इट हैड इट्स ओन नेवी हैड इट्स ओन आर्मी बट द ब्रिटिश एंपायर वास
Speaker A
प्रोटेक्टिंग बाय ऑक्यूपाइंग कंट्रोलिंग रिसोर्सेज जिसके बाद पहली बार पूरी अरब दुनिया में ब्रिटिश एंपायर ने अपनी फौज के बेसिस बनाए और हिस्ट्री में पहली बार अंग्रेजों की फौज आकर पूरी अरब दुनिया में फैल गई। यह ब्रिटिश एंपायर का बहुत ही जबरदस्त
Speaker A
प्लान था क्योंकि मुसलमानों को लग रहा था कि उनका बादशाह एक मुसलमान और अरब है। लेकिन असल में ये सारे बादशाह बस पपेट्स थे और पूरी अरब दुनिया असल में ब्रिटिश एंपायर के इन्हीं बेसिस से चलती थी। आने
Speaker A
वाले कई सालों तक दुनिया इसी तरह चलती रही। लेकिन आखिर दुनिया में एक ऐसा वाकया हुआ जिससे ब्रिटिश एंपायर आहिस्ता-आहिस्ता हर तरफ टूटने लगा। वर्ल्ड वॉर टू वर्ल्ड वॉर टू में ब्रिटिश एंपायर और जर्मनी के हिटलर की लड़ाई शुरू।
Speaker A
ये जंग ब्रिटिश एंपायर जीत तो गए। लेकिन इस जंग में ब्रिटिश एंपायर का इतना नुकसान हुआ कि आहिस्ताआहिस्ता ब्रिटिश एंपायर टूटने लगे और ब्रिटिश एंपायर के पास अब इतना पैसा था ही नहीं कि वो पूरी दुनिया में अपने फौज
Speaker A
के बेसिस को मैनेज कर सके। इसीलिए आने वाले कई सालों में आहिस्ता-आहिस्ता ब्रिटिश एंपायर मुसलमान मुल्कों से अपनी फौजें निकालने लगी। और आखिर कुछ ही सालों में पूरी अरब दुनिया ब्रिटिश एंपायर की फौज से खाली हो गई। [संगीत]
Speaker A
वर्ल्ड वॉर टू के बाद ब्रिटिश एंपायर तो तबाह हो चुकी थी। लेकिन ब्रिटिश एंपायर के बाद अब दुनिया में एक नई सुपर पावर आ चुकी थी। अमेरिका एंड वी विल मेक अमेरिका ग्रेट अगेन। इसीलिए वर्ल्ड वॉर टू खत्म होने से पहले
Speaker A
ही अरब बादशाह अब ब्रिटिश एंपायर को छोड़कर अमेरिका के साथ मीटिंग्स करना शुरू कर चुके थे। इसीलिए ब्रिटिश एंपायर के टूटते ही अब ब्रिटिश एंपायर की जगह अमेरिका की फौज आकर अरब मुल्कों में अपने बेसिस बनाने लगी। लेकिन ये बेसिस बहुत ही छोटे-छोटे थे और
Speaker A
सिर्फ अरब की ऑयल की हिफाजत के लिए थे। लेकिन पहले ही दिन से अमेरिका बिल्कुल ब्रिटिश एंपायर की तरह अरब मुल्कों में अपने बड़े-बड़े बेसिस बनाना चाहता था। और अमेरिका चाहता था कि जिस तरह इससे पहले ब्रिटिश एंपायर अपने इन बेसिस से अरब के
Speaker A
बादशाहों को अपने कंट्रोल में रखता था। अब उसी तरह अमेरिका अपने बड़े-बड़े बेसिस बनाकर इन अरब बादशाहों को अपने कंट्रोल में रखे। लेकिन यह कोई आसान काम नहीं था क्योंकि अब अमेरिका के सामने एक ऐसा बादशाह आ चुका था
Speaker A
जो अमेरिका को ऐसा करने की इजाजत नहीं दे रहा था। और ऑफकोर्स यह वही बादशाह था जिसका नाम हम इस चैनल पे बार-बार लेते हैं। सऊदी अरब का बादशाह शाह फैसल। शाह फैसल ने आते ही सबसे पहले अमेरिका के
Speaker A
छोटे-छोटे बेसिस को सऊदी अरब से बाहर निकलने का हुक्म दिया। [संगीत] जो इससे पहले उसके बाप अब्दुल अजीज ने बनाए थे। शाह फैसल की पूरी बादशाहत में पूरी अरब दुनिया में सिर्फ एक अमेरिका के बेस के अलावा और कोई भी बेस नहीं था।
Speaker A
लेकिन जैसे ही शाह फैसल को अचानक धोखे से शहीद कर दिया गया। शाह फैसल के बाद उसका भाई खालिद सऊदी अरब का बादशाह बना। शाह खालिद बिल्कुल भी अपने भाई की तरह नहीं था कि वो सुपर पावर अमेरिका के सामने खड़ा हो
Speaker A
सके। इसीलिए अब शाह फैसल के जाने के बाद अमेरिका आसानी से अपने पुराने प्लान पर काम कर सकता था और सारे अरब कंट्रीज में अपने बेसिस बना सकता था। लेकिन हमेशा की तरह अब भी अमेरिका को एक ऐसे बहाने की जरूरत है।
Speaker A
जिससे वो अरब दुनिया की तरफ अपनी फौज भेजें और आखिर अमेरिका को यह बहाना मिल गया और अमेरिका के इस बहाने का नाम था सद्दाम हुसैन। [संगीत] जैसे ही सदाम हुसैन इराक का बादशाह बना। पहले तो वो अमेरिका और अरब के बादशाहों का
Speaker A
बहुत क्लोज दोस्त था। [संगीत] बल्कि इन्हीं के कहने पर सदाम हुसैन ने आते ही ईरान के खुमेनी पर हमला कर दिया। [संगीत] जिसके बाद सदाम हुसैन ने अगले 8 साल तक ईरान के साथ एक बहुत ही खतरनाक जंग लड़ी।
Speaker A
जंग के स्टार्टिंग में तो ऐसा लग रहा था कि सदाम हुसैन ये जंग जीत जाएगा। लेकिन जैसे-जैसे जंग गर्म होती गई [संगीत] और आहिस्ता-आहिस्ता सदाम हुसैन के पास यह जंग लड़ने के लिए पैसे खत्म होने लगे। [संगीत] इसीलिए अब सदाम हुसैन अपने आप को
Speaker A
बचाने के लिए अपने इन अरब दोस्तों से बहुत सारा कर्जा लेने लगा। यह देखकर अरब बादशाहों ने भी सदाम हुसैन को खुशी से बिलियंस ऑफ डॉलर्स का कर्जा दिया। [संगीत] कहा जाता है यह कर्जा 60 बिलियन डॉल था।
Speaker A
[संगीत] लेकिन यह सारा पैसा लेने के बाद भी 8 साल के बाद सदाम हुसैन यह जंग बुरी तरह हार गया। जंग खत्म होने के बाद अरब बादशाहों ने सदाम हुसैन से कहा कि अब तो जंग खत्म हो चुकी है। तो अब अच्छे बच्चों की तरह
Speaker A
हमारा सारा कर्जा हमें वापस दो। लेकिन यह सुनकर सद्दाम ने इन बादशाहों से कहा कि किस चीज के पैसे? यह जंग तो मैंने तुम लोगों के कहने पर लड़ी थी। और अब तुम लोग मुझसे कर्जा वापस मांग रहे हो।
Speaker A
मतलब सदाम हुसैन ने क्लियरली इन अरब बादशाहों को बता दिया कि मैं तुम्हें एक रुपया भी वापस नहीं दूंगा। और यहां से पहली बार अरब बादशाहों और सद्दाम हुसैन की आपस में दुश्मनी शुरू हुई। सदाम हुसैन की ये बातें सुनकर अरब
Speaker A
बादशाहों को बहुत गुस्सा आया। बल्कि एक अरब कंट्री कुवैत के बादशाह ने सदाम हुसैन की इकॉनमी को गिराने के लिए अपनी ऑयल की प्रोडक्शन बढ़ा दी। और पूरी दुनिया में ऑयल की प्राइसेस जबरदस्ती गिराने लगा। जिससे ऑफ कोर्स सदाम
Speaker A
हुसैन की इकॉनमी तेजी से गिरने लगी। ये देखकर वो सदाम हुसैन जो किसी जमाने में इन अरब बादशाहों का बहुत अच्छा दोस्त था। अब इन अरब बादशाहों से नफरत करने लगा। और आखिर सदाम हुसैन ने फैसला किया कि अब
Speaker A
वो कुवैत के बादशाह को सबक सिखाने के लिए पूरे कुवैत पर हमला करेगा। लेकिन हमला करने से पहले सदाम हुसैन को सिर्फ एक चीज का डर था और वो था सुपर पावर अमेरिका। सदाम हुसैन सदाम हुसैन को इस बात का डर था कि कहीं
Speaker A
ऐसा ना हो कि जैसे ही वो कुवैत पर हमला करे कुवैत को बचाने के लिए अमेरिका सामने आए। और उल्टा सद्दाम पर ही हमला कर दे। इसीलिए हमले से पहले सद्दाम हुसैन ने इराक में अमेरिका के एंबेसडर के साथ एक मीटिंग
Speaker A
की। और अमेरिका के एंबेसडर को क्लियरली बताया कि मैं कुछ ही दिन बाद कुवैत पर हमला करने वाला हूं। जिस पर अमेरिका के एंबेसडर ने जवाब दिया कि यह आप अरब बादशाहओं का आपस का मसला है। और अमेरिका
Speaker A
ने भी क्लियरली बताया कि अगर सद्दाम कुवैत पर हमला करेगा तो हम सद्दाम को नहीं रोकेंगे। और हमारा इस जंग से कोई ताल्लुक नहीं होगा। तो अब जब अमेरिका से सदाम हुसैन को इजाजत मिल चुकी थी। सदाम हुसैन ने अपनी
Speaker A
पूरी फौज को जंग के लिए रेडी होने का हुकुम दिया। और आज से 30 साल पहले रात के अंधेरे में सदाम हुसैन ने अपनी पूरी ताकत के साथ कुवैत पर हमला कर दिया। [संगीत] इराक की पूरी फौज कुवैत के अंदर घुस गई।
Speaker A
कुवैत इराक के पास एक छोटा सा मुल्क है जिसके पास अपनी कोई ज्यादा फौज थी भी नहीं। इसीलिए सदाम हुसैन ने सिर्फ दो दिन के अंदर-अंदर पूरा कुवैत फतह कर लिया। और कुवैत वताह करते ही सदाम हुसैन के पास
Speaker A
कुवैत की पूरी ऑयल का कंट्रोल भी आया। जहां हर दिन ऑयल के मिलियंस ऑफ बैरल्स बनते थे। और इस तरह सिर्फ दो दिनों में सदाम हुसैन अरब दुनिया का सबसे ताकतवर बादशाह बना। जिसका सदाम हुसैन और उसके बेटे जश्न मना
Speaker A
रहे थे। लेकिन सदाम हुसैन को पता नहीं था कि आगे उसके साथ क्या होने वाला है। जैसे ही सदाम हुसैन ने कुवैत को फतह किया इससे पहले अमेरिका ने सदाम हुसैन को कुवैत पर हमले की इजाजत दे दी थी और सद्दाम से कहा था कि
Speaker A
हम तुम्हें कुछ नहीं कहेंगे। लेकिन जैसे ही सदाम हुसैन ने कुवैत फतह कर लिया। अमेरिका ने अचानक अपना पूरा स्टंस बदल दिया और यहां से अमेरिका की एक ग्रैंड साजिश शुरू हुई। अमेरिका बिल्कुल सीक्रेट थी। अरब के बादशाहों से मिलने लगा और
Speaker A
उन्हें कहा कि सद्दाम सिर्फ कुवैत में बल्कि कुवैत के बाद एक-एक करके तुम सों को भी नहीं छोड़ेगा। [संगीत] अमेरिका ने सऊदी अरब के बादशाह को अपनी सेटेलाइट से तस्वीरें भी दिखाई कि किस तरह सद्दाम उन पर हमला करने वाला है। [संगीत]
Speaker A
जिसे देखकर सऊदी अरब का बादशाह वाकई में डरने लगा। लेकिन यह सब बिल्कुल झूठ था। और यह सब सिर्फ अमेरिका की एक बहुत बड़ी साजिश थी। और इस तरह अमेरिका ने सारे अरब बादशाहों को अपनी चाल में फंसा दिया था।
Speaker A
अरब के बादशाह अब अमेरिका से भीख मांगने लगे कि अमेरिका उन्हें सदाम हुसैन से बचाए। लेकिन अमेरिका ने इन बादशाहओं के सामने एक शर्त रखी कि मैं तुम्हें तब ही बचा पाऊंगा जब तुम बादशाह मुझे अरब की जमीनों पर
Speaker A
अमेरिका की फौज के बड़े-बड़े बेसिस बनाने की इजाजत दोगे। और ऑफ कोर्स सारे अरब बादशाहों ने अमेरिका के सामने अपना सर झुका दिया। जिसके बाद सबसे पहले अमेरिका ने अपना बेस सऊदी अरब में बनाया। और सऊदी अरब को देखकर अरब के बाकी
Speaker A
बादशाहों ने भी ऐसा ही किया। और इसी तरह अमेरिका ने अपना बेस क़तर, बहरेन, और यूएई में भी अपने बेसिस बनाए। [संगीत] यहां पर एक बात समझना लाजमी है। जिस तरह आज अमेरिका के प्रेसिडेंट पर इजराइल का एक
Speaker A
बहुत बड़ा इन्फ्लुएंस है। इसी तरह आज से 30 साल पहले भी इजराइल का अमेरिका पर एक बहुत बड़ा इन्फ्लुएंस था। अमेरिका मतलब अरब दुनिया में अमेरिका के ये बेसिस सिर्फ अमेरिका के लिए नहीं बल्कि किसी भी वक्त इजराइल के लिए भी यूज हो सकते थे।
Speaker A
जैसे ही अमेरिका के बेससेस तैयार हुए, अमेरिका ने इन्हीं बेसिस से कुवैत में सदाम हुसैन की फौज पर हमला कर दिया। और ऑफ कोर्स सदाम हुसैन भी कुछ ही दिन में कुवैत खाली करके वहां से वापस इराक चला
Speaker A
गया। और कुवैत अब अमेरिका के कंट्रोल में आया। और अमेरिका ने कुवैत में भी अपने बड़े-बड़े बेससेस बनाए। अब अमेरिका का बहाना खत्म हो चुका था और सदाम हुसैन कुवैत से जा चुका था। तो फिर चाहिए तो यह
Speaker A
था कि अमेरिका अरब दुनिया से अपने बेसिस को खत्म करके यहां से वापस चला जाए। लेकिन यहां पर पूरी दुनिया को समझ आई कि यह बस अमेरिका की एक साजिश थी और अमेरिका ने इन सबको अपनी चाल में फंसाकर हमेशा के लिए
Speaker A
अपने बेसिस अरब दुनिया में बना दिए थे। और इसी तरह उस दिन से लेकर आज तक अमेरिका की फौज अरब दुनिया में उसी तरह बैठी हुई है। और अब ईरान ने अमेरिका के हर एक बेस पर हमला किया है।
Speaker A
[संगीत] लेकिन आखिर ईरान को अमेरिका के इन बेसिस से प्रॉब्लम क्या है? क्योंकि पिछले 35 सालों से अमेरिका के ये बेसिस खामोश नहीं बैठे। बल्कि जिस मुसलमान कंट्री ने भी इजराइल और अमेरिका को आंखें दिखाने की कोशिश की है।
Speaker A
अमेरिका अमेरिका इन्हीं बेसिस से उन सबको तबाह करता रहा है। फॉर एग्जांपल आज से 25 साल पहले जब अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर्स पर हमला हुआ। अमेरिका ने इन्हीं बेसिस से अफगानिस्तान पर हमला कर दिया। और अफगानिस्तान की गवर्नमेंट को वहां से
Speaker A
हटाकर अमेरिका ने वहां भी अपना एक नया बड़ा बेस बनाया। बगराम एयरबेस। और अफगानिस्तान की 20 साल की जंग में अमेरिका इन्हीं बेसिसेस को यूज करता रहा। अफगानिस्तान के बाद अमेरिका ने अपना दूसरा हमला इराक के सदाम हुसैन पर किया। यह हमला
Speaker A
भी अमेरिका ने अपने इन्हीं बेसिस से किया था। और फिर अपने इन्हीं बेसिस से अमेरिका ने पूरे इराक को तबाह कर दिया। [संगीत] इन्हीं बेसिस से अमेरिका सीरिया पर भी बमबारी करता रहा। और इवन कद्दाफी को भी मारने में अमेरिका के इन बेसिस को कहीं ना
Speaker A
कहीं यूज किया गया। और सिर्फ यही नहीं बल्कि यही वो बेसिस है जिनसे अमेरिका हमेशा इजराइल को प्रोटेक्ट करता रहता है। फॉर एग्जांपल आज से कुछ साल पहले जब इजराइल ने गजा पर हमला किया। यह देखकर यमन की गवर्नमेंट ने ऐलान किया
Speaker A
कि आज के बाद इजराइल की तरफ जो भी कश्ती हमारे पास से गुजर कर जाएगी हम उसे उड़ा देंगे। जिससे इजराइल की इकॉनमी को एक बहुत बड़ा झजका भी मिला था। लेकिन अब जब इजराइल की इकॉनमी खराब हो रही थी। अमेरिका के इन्हीं
Speaker A
बेसिस से अमेरिका ने यमन पर 1000 मिसाइल फायर कर दी। यमन को ऐसा करने से रोक दिया और इस तरह अमेरिका ने इजराइल की इकॉनमी को दोबारा ठीक किया। इन शॉर्ट अरब दुनिया में अमेरिका के इन्हीं बेसिस ने पिछले 40 साल
Speaker A
से पूरी मुसलमान दुनिया को गर्दन से पकड़ा हुआ है। और इन्हीं बेसिस की वजह से दुनिया में कोई भी मुसलमान कंट्री अमेरिका के सामने अपना सर नहीं उठा सकती। आखिर 40 साल बाद जब अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया। यूनाइटेड
Speaker A
स्टेट्स मिलिट्री बिगेन मेजर कॉम्बैट ऑपरेशंस इन ईरान। ईरान पिछले 40 साल में पहला ऐसा इस्लामिक मुल्क बना जिसने अमेरिका के इन बेसिस पर हमले किए हैं। जैसे ही जंग शुरू हुई कहा जाता है सबसे पहले हमलों में से एक
Speaker A
अमेरिका ने दुबई के अलदफरा एयरबेस से ईरान पर किया था। इसी तरह कुवैत और बहरेन के बेसिस से भी ईरान पर हमले किए गए। [संगीत] इसीलिए ईरान ने भी इसके जवाब में अमेरिका के एक-एक एयरबेस को टारगेट करके हमले किए।
Speaker A
मिलिट्री बेससेस हैव [संगीत] बीन रिपीटली अटैक बाय ईरान। सबसे पहले ईरान ने कुवैत में अमेरिका के बेस कैंप आरिफ जान पर हमला किया। यह अरब दुनिया में अमेरिका का सबसे बड़ा वेयर हाउस था। जहां पर अमेरिका अपने ट्रक्स
Speaker A
टैंक्स और मिसाइल स्टोर किया करता था। और यहीं से अमेरिका के जहाजों और हेलीकॉप्टर्स पर मिसाइल फिट किए जाते थे। [संगीत] ईरान के हमलों के बाद सिर्फ कुछ लोगों के बजाय बाकी अमेरिका की पूरी फौज ये बेस खाली करके भाग गई। और कुवैत के
Speaker A
होटलों और बिल्डिंग्स में छुप गई। इसी तरह ईरान ने इराक में भी अमेरिका के बेसिस पर हमले किए। और यहां पर ईरान ने अमेरिका का एक बहुत बड़ा रिफ्यूलिंग जेट तबाह कर दिया। तीसरा हमला ईरान ने क़तर में अमेरिका के
Speaker A
बेसिस पर किया और क़तर में अमेरिका का यह बेस अमेरिका की फौज का सबसे बड़ा बेस था। और यहां पर ईरान के हमलों से अमेरिका का सबसे बड़ा रेडार सिस्टम तबाह हो गया। जिसकी कीमत $1 बिलियन से भी ज्यादा थी।
Speaker A
इसके बाद ईरान ने सऊदी अरब के अमेरिका के बेस पर भी हमला किया। [संगीत] और इस हमले में भी ईरान ने अमेरिका के पांच बड़े जहाजों को तबाह कर दिया। और आखिर ईरान ने यूएई में अमेरिका के बेस
Speaker A
पर भी हमला किया। और कहा जाता है यह वही बेस है जिससे अमेरिका ने ईरान में एक स्कूल पर हमला करके ऑलमोस्ट 200 बच्चियों को शहीद कर दिया था। ईरान ने यह हमले बहुत ही सोच समझ कर किए
Speaker A
थे। क्योंकि हमलों से पहले ईरान इन अमेरिका के बेसिस की तरफ 50 या 60 ड्रोंस भेजता था। और अमेरिका के बेसिस के डिफेंस सिस्टम इन ड्रोंस को गिराने में बिजी हो जाते थे। और जब ये डिफेंस सिस्टम बिजी
Speaker A
होता था तब ईरान अपने हाइपरसोनिक मिसाइल्स इन बेसिस पर हमला करता था। ये ऐसे मिसाइल्स हैं जो साउंड की स्पीड से भी तेज जाते हैं। लेकिन ईरान के इन सारे हमलों में एक बहुत बड़ा मसला था। ये सारे मिसाइल और ड्रोन
Speaker A
सिर्फ अमेरिका के बेसिस पर नहीं बल्कि अरब कंट्रीज के कुछ बिल्डिंग्स और होटलों पर भी लगे हैं। जिनमें से कुछ के लिए तो ईरान के प्रेसिडेंट ने माफी भी मांगी। िंग टू ईरान अरब नेबर लेकिन बाकियों के लिए ईरान ने कहा कि हमने
Speaker A
ये हमले किए ही नहीं है। तो फिर क्वेश्चन ये है कि आखिर कहां से अरब कंट्रीज में ये हमले हो रहे हैं?
Speaker A
कहा जाता है कतर, सऊदी और यूएई में बहुत सारे इजराइल के ऐसे एजेंट्स पकड़े गए हैं। जो इन अरब कंट्रीज में धमाके कर गए। ये दिखाना चाहते हैं कि यह धमाके ईरान ने किए हैं। इन कटार एंड सऊदी अरेबिया अथॉरिटी
Speaker A
अरेस्टेड मसा एजेंट्स प्लेिंग ऑन कमिटिंग्स इन दो कंट्री ताकि इजराइल एक बार फिर मुसलमानों में शिया सुन्नी वाली बातों को जिंदा करके मुसलमानों को आपस में लड़ा सके। इनके अलावा कुछ बिल्डिंग्स ऐसे भी हैं जिन्हें ईरान खुद टारगेट कर रहा है। और ईरान का
Speaker A
कहना यह है कि इन बिल्डिंग्स में सीआईए और मोसाद ने अपने सीक्रेट ऑफिसेस बनाए हुए हैं। [संगीत] और अमेरिका के इन बेसिस पर इतने प्रिसाइज हमले करने से ईरान ने अमेरिका को भी हैरान कर दिया है। हाउ मेनी
Speaker A
एक्सपेक्टेड दैट वी वर श और अब ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला मुस्तफा खामिनाई ने भी ऐलान कर दिया कि जब तक अमेरिका के बेसिस इन मुसलमान कंट्रीज में रहेंगे ये जंग इसी तरह चलती रहेगी। [संगीत] इजराइल वांट्स टू हर्ट अरान एंड कटार एंड
Speaker A
यूएई एंड सऊदी एंड एंड ओमान एंड एंड दे सक्सीडेड
Topics:ईरानअरब बादशाहअमेरिका सैन्य बेससद्दाम हुसैनब्रिटिश एंपायरमध्य पूर्व राजनीतिसऊदी अरबइराककुवैत हमलाइजराइल











