इस वीडियो में हजरत अब्बास को इस्लाम का पहला गुप्त एजेंट बताया गया है, जिन्होंने मक्का में रहकर मुसलमानों की मदद की।
Key Takeaways
- हजरत अब्बास इस्लाम के पहले गुप्त एजेंट थे जिन्होंने मक्का में रहकर मुसलमानों की मदद की।
- उनकी सूचनाओं से मुसलमान मक्का वालों से एक कदम आगे रहते थे।
- बदर की जंग में बनू हाशिम के प्रति विशेष सम्मान और सुरक्षा का आदेश था।
- हजरत अब्बास ने कई महत्वपूर्ण जंगों में रणनीतिक भूमिका निभाई।
- उनकी गुप्त भूमिका के कारण कई मुसलमानों को भी उनकी असली पहचान का पता नहीं था।
What the video covers
- हजरत अब्बास रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के चाचा थे और मक्का में रहकर मुसलमानों के लिए गुप्त सूचना भेजते थे।
- मक्का में इस्लाम के शुरुआती विरोध और सहारा देने वाले खानदानों का वर्णन किया गया है।
- हिजरत मदीना और मदीना के मुसलमानों के साथ हजरत अब्बास की गुप्त बैठक का विवरण।
- बदर की जंग में बनू हाशिम के प्रति मुसलमानों की विशेष सावधानी और हजरत अब्बास की भूमिका।
- हजरत अब्बास का कैद होना और मुसलमान होने का खुलासा, साथ ही टैक्स देने से इनकार।
- हजरत अब्बास द्वारा मक्का से मदीना तक गुप्त सूचनाएं भेजना, जिससे मुसलमान हर जंग में आगे रहते थे।
- फतेह मक्का और जंग हुनैन में हजरत अब्बास की सक्रिय भागीदारी।
- रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुरक्षा के लिए हजरत अब्बास की बहादुरी।
- हजरत अब्बास की बाद की जिंदगी, उनके निधन और उनके प्रभाव का उल्लेख।
- इस्लाम के शुरुआती दौर में गुप्त एजेंट की भूमिका और रणनीति पर प्रकाश।
Chapters
- 00:00इस्लाम का पहला सीक्रेट एजेंट और मक्का के खानदान
- 01:32हिजरत और मदीना के साथ गुप्त बैठक
- 02:46बदर की जंग की तैयारी और बनू हाशिम की सुरक्षा
- 04:16हजरत अब्बास का कैद होना और मुसलमान होने का खुलासा
- 05:29मक्का से मदीना तक गुप्त सूचनाओं का आदान-प्रदान
- 06:18फतेह मक्का और जंग हुनैन में हजरत अब्बास की भूमिका
- 09:47रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुरक्षा में हजरत अब्बास की बहादुरी
- 12:55हजरत अब्बास का निधन और उनका इस्लामी इतिहास में योगदान
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Speaker A
इस्लाम का पहला सीक्रेट एजेंट। [संगीत] जिनकी सीक्रेट इंफॉर्मेशन से मदीना की रियासत अपने फैसले लिया करती थी। और ये इतना खतरनाक एजेंट था कि इवन बहुत सारे मुसलमानों को भी इस बात का पता नहीं था कि वो कौन है।
Speaker A
रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दादा अब्दुल मुतलिब के 10 बेटे थे। जिनमें से चार को आज तक याद किया जाता है। अबू लहब, अबू तालिब, हजरत हमजा और हजरत अब्बास। जैसे ही रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मक्का में अपनी नबूवत का ऐलान किया।
Speaker A
मक्का के सारे बड़े सरदार मिलकर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के खिलाफ हो गए। बल्कि रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का सबसे बड़ा दुश्मन उनका अपना ही चाचा अबू लहब था, जो एक बहुत ही सख्त और जालिम इंसान थे। जो
Speaker A
हर टाइम किसी न किसी तरीके से आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को नुकसान पहुंचाता रहता था। लेकिन पूरे मक्का में आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का सबसे अच्छा दोस्त भी उन्हीं के चाचा अबू तालिब थे, जो एक बहुत ही सॉफ्ट और रहम
Speaker A
दिल इंसान थे, जो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ हर दुश्मन के खिलाफ मजबूती से खड़े थे। और आखिर कुछ साल बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पहले चाचा ने इस्लाम कबूल किया। हजरत हमजा रज अल्लाह अनू, जो एक बहुत ही बहादुर और ताकतवर वॉरियर
Speaker A
थे। और अब बाकी रहे सिर्फ एक ही चाचा, हजरत अब्बास रज अल्लाह, जो एक बहुत बड़े बिजनेसमैन और जहीन इंसान थे, जो हमेशा छुप छुप कर रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मदद करते थे, लेकिन लोगों के सामने खामोश रहते थे। जैसे
Speaker A
ही मक्का में रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सबसे बड़े साथी अबू तालिब दुनिया से चले गए। उसके बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का मक्का में रहना इंपॉसिबल हो चुका था। क्योंकि मक्का वाले अबू तालिब के बाद मुसलमानों पर सख्त जुल्म करने लगे थे।
Speaker A
इसीलिए आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपने चाचा की वफात के बाद अब मक्का छोड़कर कहीं और हिजरत करने की प्लानिंग करने लगे। जिसके लिए उन्होंने अपने सहाबा अरब के डिफरेंट सिटीज की तरफ भेजे और खुद अरब की एक सिटी ताइफ की तरफ गए। और वहां जो हुआ वो
Speaker A
हम सबको पता है। [संगीत] ताइफ के वाक्य के बाद जब आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम वापस मक्का आए और मक्का वालों को ऐसा लग रहा था कि अब आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास कोई भी रास्ता नहीं है। अचानक एक दिन अरब की एक
Speaker A
छोटी सी सिटी मदीना के लोग मक्का हज करने आए। जिनमें से कुछ ने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से रात के अंधेरे में एक सीक्रेट मीटिंग की रिक्वेस्ट की, जिसे आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक्सेप्ट किया। और जैसे ही मक्का में रात
Speaker A
का अंधेरा हुआ और मक्का के सारे लोग सो गए, मदीना के कैंप से 73 मर्द और दो औरतें बाहर निकले और मक्का में एक पहाड़ की तरफ रवाना हुए। जैसे ही ये लोग मीटिंग की जगह पर पहुंचे, उन्होंने देखा कि सामने सामने से सिर्फ दो
Speaker A
लोग उनसे मिलने के लिए आ रहे हैं। जिनमें से एक तो मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम थे। लेकिन दूसरे आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के चाचा और अबू तालिब के बाद बनू हाशिम के बड़े सरदार हजरत अब्बास रज अल्लाह अनू थे।
Speaker A
तो सबसे पहले हजरत अब्बास आगे बढ़े और मदीना वालों से कहा कि ए मदीना वालों, यह बात याद रखो, अगर तुम मेरे भतीजे को अपने साथ लेकर जाओगे तो उसके बाद पूरा अरब तुम मदीना वालों के खिलाफ हो जाएगा। अगर तुम
Speaker A
मेरे भतीजे की हिफाजत कर सकते हो तो फिर ठीक है। लेकिन अगर तुम नहीं कर सकते तो फिर इन्हें यही छोड़ो। हम बनू हाशिम खानदान इनकी हिफाजत के लिए तैयार हैं। जिस पर मदीना वालों ने हजरत अब्बास से कहा कि
Speaker A
हम एक बहुत ही खतरनाक और एक वॉरियर कौम हैं। और हम अपने खून के आखिरी कतरे तक इनकी हिफाजत करेंगे। इसी के साथ मुसलमानों की हिजरत शुरू हुई। और सारे मुसलमान मक्का को छोड़कर मदीना की तरफ रवाना हुए।
Speaker A
लेकिन हजरत अब्बास रज अल्लाह अनू ने हिजरत नहीं की और वो यहीं मक्का में रहे। और मदीना पहुंचने के कुछ ही अरसे बाद इस्लाम की पहली जंग का वक्त आया, जंग बदर। जंग से पहले रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सारे सहाबा को जमा किया और इस
Speaker A
जंग की प्लानिंग करने लगे। इस जंग में सारे सहाबा मक्का में अपने-अपने खानदानों के साथ लड़ने के लिए बिल्कुल तैयार थे। लेकिन जैसे ही यह मीटिंग शुरू हुई, रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने सहाबा से कहा कि कोई भी सहाबी बदर की जंग में
Speaker A
मेरे खानदान बनू हाशिम को नहीं मारेगा। इस मीटिंग के बाद एक सहाबी बाहर निकले और उन्होंने अपने दोस्तों से कहा कि कितनी अजीब बात है। हम अपने खानदान को तो मारेंगे, लेकिन बनू हाशिम को कुछ नहीं कहेंगे। जब हजरत उमर को इस सब सहाबी की
Speaker A
बातों का पता चला, उन्होंने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से इजाजत मांगी कि मैं इसका सर काट देता हूं। लेकिन आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उन्हें रोक दिया। इसके कुछ ही दिन बाद जब दोनों फौजे एक दूसरे के आमने-सामने हुईं। काफिरों की फौज में हर
Speaker A
कबीले से बहुत सारे लोग थे। लेकिन बनू हाशिम से सिर्फ तीन लोग जंग के लिए आए थे, जिनमें से एक हजरत अब्बास भी थे। जैसे ही जंग शुरू हुई, मुसलमान जंग के बीच में अपने खानदान वालों से तो लड़ रहे थे।
Speaker A
लेकिन हर मुसलमान बहुत ही केयरफुली बनू हाशिम के लोगों से दूर रह रहे थे। आखिर काफी देर लड़ने के बाद मुसलमान ये जंग जीत गए। और जब मुसलमानों ने सारे कैदियों को पकड़ लिया, उन्होंने देखा कि इन कैदियों में आप
Speaker A
सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के चाचा हजरत अब्बास भी थे। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फैसला किया कि हर कैदी फिया टैक्स देकर अपने आप को आजाद कर सकता है। जिसके बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हजरत अब्बास के पास गए और
Speaker A
उन्हें कहा, टैक्स दो। लेकिन हजरत अब्बास ने कहा, नहीं, मैं क्यों टैक्स दूं? मैं तो पहले से मुसलमान हूं। असल में इससे 2 साल पहले हजरत अब्बास और मदीना वालों की मीटिंग के बाद मुसलमान तो हिजरत करके मदीना चले गए। लेकिन हजरत अब्बास मक्का
Speaker A
में ही रहे। कहा जाता है हजरत अब्बास मक्का के एक ऐसे आदमी थे जिन्हें मक्का की हर छोटी खबर का सबसे पहले पता चल जाता था। और अब वो मक्का में रहकर ही हर खबर मक्का से मदीना पहुंचाते रहते थे, जिससे आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को मक्का की हर खबर का पहले से पता होता था। जिसकी वजह से मुसलमान हमेशा मक्का वालों से एक स्टेप आगे रहते थे। मतलब हजरत अब्बास रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मक्का में एक बहुत ही सीक्रेट
Speaker A
एजेंट थे, जिनका किसी को पता नहीं था। इवन मुसलमानों को भी नहीं। इसीलिए जंग बदर से पहले मीटिंग में आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुसलमानों से कहा था कि बनू हाशिम के खिलाफ मत लड़ना। क्योंकि रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम नहीं चाहते थे कि उनका इतना
Speaker A
इंपॉर्टेंट एजेंट हजरत अब्बास इस जंग में मारा जाए। लेकिन अब जब हजरत अब्बास गिरफ्तार हुए, उन्होंने सबके सामने यह एक्सेप्ट किया कि वो तो पहले से ही एक मुसलमान थे और कहा, मैं क्यों टैक्स दूं? लेकिन रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनसे कहा कि
Speaker A
कोई बात नहीं, तुम्हें मुसलमान होने का बदला अल्लाह जरूर देगा, लेकिन यहां आपको टैक्स देना होगा। और हां, अपने साथ-साथ बनू हाशिम के दो लोगों का टैक्स आपने ही देना होगा। जिसके बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हजरत अब्बास को दोबारा मक्का भेजा
Speaker A
और वो वहीं से एक बार फिर मुसलमानों की मदीना में मदद करने लगे। इसीलिए अगले साल जब मुसलमानों की दूसरी जंग शुरू हुई, जंग ओहद। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को पहले ही मक्का की पूरी फौज का सब कुछ पता था।
Speaker A
क्योंकि हजरत अब्बास उन्हें मक्का से हर डिटेल सीक्रेटली पहुंचाते रहते थे। और इसी तरह खंदक की जंग में भी आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मक्का वालों से एक स्टेप आगे थे। जिसके बाद आखिर वो दिन आया जिसका सबको इंतजार था, फतेह मक्का।
Speaker A
और जैसे ही आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम 10,000 मुसलमानों के साथ मदीना से मक्का की तरफ रवाना हुए, और उधर मक्का में भी हजरत अब्बास को समझ आ गई कि अब और छुपने का कोई फायदा नहीं। इसीलिए वो भी अपने
Speaker A
खानदान के साथ मदीना की तरफ रवाना हुए और रास्ते में मुसलमानों की फौज से मिलकर वापस मक्का को फतह करने आए। और इस तरह मक्का फतह हो गया। मक्का फतह करने के कुछ ही दिन बाद मुसलमानों की एक और बड़ी जंग शुरू हुई।
Speaker A
जंग हुनैन। और यह पहली जंग थी जिसमें हजरत अब्बास अब एक स्पाई नहीं बल्कि एक वॉरियर की तरह जंग में मुसलमानों के साथ खड़े थे। और मुसलमान तेजी से अपने दुश्मन की तरफ बढ़ रहे थे। लेकिन जैसे ही मुसलमान इन दो पहाड़ों के
Speaker A
दरमियान पहुंचे, इन दोनों पहाड़ों से मुसलमानों की फौज पर तीरों की बारिश होने लगी। और इतनी तीरे बरसने लगीं कि मुसलमानों की पूरी फौज जंग छोड़कर पीछे हटने लगी। ये देखकर काफिरों की पूरी फौज ने मुसलमानों पर हमला कर दिया।
Speaker A
जैसे ही काफिरों की फौज आगे आई, वो यह देखकर हैरान रह गए कि मुसलमानों की पूरी फौज तो पीछे भाग रही है, लेकिन मुसलमानों में सिर्फ एक आदमी अपने साथियों के साथ बहादुरी से अपनी जगह पर खड़ा है। और वो थे
Speaker A
हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम। ये देखकर काफिरों की पूरी फौज ने सीधा रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर हमला कर दिया। लेकिन रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम भी पीछे हटने के बजाय दुश्मनों की तरफ आगे बढ़ने लगे। जैसे ही आप सल्लल्लाहु
Speaker A
अलैहि वसल्लम आगे बढ़े, उनके चाचा हजरत अब्बास ने उनके घोड़े की रस्सी पकड़ी ताकि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आगे ना बढ़ सके। लेकिन आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपने घोड़े से नीचे उतरे और दोबारा दुश्मन की तरफ बढ़ने लगे। और जब आप सल्लल्लाहु
Speaker A
अलैहि वसल्लम आगे बढ़ रहे थे, वो जोर-जोर से एक ही बात कह रहे थे, "अन नबी ला कद अनबन अब्दुल मुतलिब।" और ये कहते ही रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने चाचा अ...
Speaker A
अलैहि वसल्लम आगे बढ़ रहे थे वो जोरजोर से एक ही बात कह रहे थे अन नबी ला कद अनबन अब्दुल मुतलब और ये कहते ही रसूल्लाह सल्ला अलह वसल्लम ने अपने चाचा अब्बास से कहा कि मुसलमानों की पूरी फौज को जंग में
Speaker A
वापस आने की आवाज दो। क्योंकि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के चाचा अब्बास अभी भी एक जवान आदमी थे और वो रसूल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम से सिर्फ चार साल बड़े थे। हजरत अब्बास अपनी ऊंची आवाज से मुसलमानों को बुलाने लगे। इलिका
Speaker A
और कहने लगे कि ऐ मुसलमानों अपने नबी को छोड़कर कहां जा रहे हो? इलिका। इसके बाद हजरत अब्बास खुद कहते हैं कि मेरी आवाज मुसलमानों की फौज ने जैसे ही सुनी सबने अपने ऊंटों को उसी वक्त मोड़ दिया।
Speaker A
और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को बचाने के लिए फुल स्पीड भागने लगे। उस टाइम कुछ सहाबा ऐसे भी थे जो अपने ऊंटों को ना मोड़ सके और वो अपने ऊंटों को छोड़कर पैदल आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लिए रवाना हुए। इस तरह कुछ ही देर में
Speaker A
मुसलमानों की 12,000 की फौज दोबारा जंग में आई। और मुसलमान यह जंग जीत गए। ये जंग जीतने के बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपने सहाबा के साथ वापस मदीना चले गए। और इस बार वो अपने साथ अपने चाचा हजरत
Speaker A
अब्बास को भी लेकर गए। उन्होंने अपनी मस्जिद मस्जिद नबवी के पास ही हजरत अब्बास के लिए एक घर बनवाया। बल्कि हजरत अब्बास के घर की छत पर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खुद अपने हाथों से पानी का पाइप
Speaker A
लगवाया। जो बारिश का पानी निकालने के लिए था। जैसे ही हजरत अब्बास मदीना आए उसके कुछ ही अरसे बाद उनके भतीजे रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इस दुनिया से चले गए। लेकिन हजरत अब्बास रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बाद भी अपने बेटे
Speaker A
अब्दुल्ला बिन अब्बास के साथ मुसलमानों की खिलाफत के सबसे बड़े एडवाइज़र्स में से थे। लेकिन आखिर हजरत उमर की खिलाफत में हजरत अब्बास और हजरत उमर के दरमियान एक इख्तलाफ पैदा हुआ। एक दिन खलीफा उमर रज अल्लाह अनो
Speaker A
अपने घर से मस्जिद की तरफ जा रहे थे। रास्ते में वो जैसे ही हजरत अब्बास के घर के पास से गुजरे, हजरत अब्बास के घर की छत से हजरत उमर के कपड़ों पर गंदा पानी गिरा। यह देखकर हजरत उमर ने हजरत अब्बास के घर
Speaker A
का यह पाइप यहां से निकालकर दूसरी तरफ कर दिया और उन्हें हजरत उमर की इस बात का पता चला तो हजरत अब्बास सीधा मदीना की अदालत पहुंचे और वहां जाकर खलीफा उमर पर केस कर दिया। जैसे ही केस शुरू हुआ मदीना के जज
Speaker A
ने खलीफा उमर को अदालत आने का हुकुम दिया। जैसे ही खलीफा उमर अदालत पहुंचे, हजरत अब्बास ने जज से कहा, उमर ने मेरी इजाजत के बगैर मेरे घर के पानी का रास्ता बदल दिया है। जिस पर हजरत उमर ने कहा कि मैंने
Speaker A
ऐसा इसलिए किया ताकि इससे मुसलमानों को तकलीफ ना हो। लेकिन हजरत अब्बास ने हजरत उमर को कहा कि यह पानी का रास्ता जो आपने बदला है, यह कोई आम रास्ता नहीं था। कि जब मैं बहुत साल मक्का में रहने के बाद पहली
Speaker A
बार मुसलमानों के पास मदीना आया तो यहां आप सल्लल्लाह अलह वसल्लम ने मेरे लिए यह घर बनवाया और फिर इस घर की छत पर अपने हाथों से पानी का यही रास्ता बनाया था जो आज आपने बदल दिया। यह सुनते ही ऑफ कोर्स हजरत उमर अपनी बात
Speaker A
से पीछे हटे और हजरत अब्बास से यह केस हार गए। और सीधा हजरत अब्बास को लेकर उनके घर के पास पहुंचे और हजरत अब्बास को कहा मेरे कंधों पर चढ़कर दोबारा इस पाइप को उसी तरह कर जिस तरह रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि
Speaker A
वसल्लम ने लगाया था। लेकिन इसके कुछ ही साल बाद हजरत अब्बास ने यह घर खिलाफत के हवाले किया। और हजरत उमर ने मस्जिद नबवी के साइज को बढ़ाने के लिए इस घर और इसके आसपास सारे घरों को गिरा दिया। और आखिर
Speaker A
तीसरे खलीफा हजरत उस्मान के दौर में हजरत अब्बास रज अल्लाह अनो इस दुनिया से चले गए। कहा जाता है हजरत अब्बास के जनाजे में इतने लोग मदीना में जमा हुए कि मदीना के कब्रिस्तान में पांव रखने की जगह भी नहीं
Speaker A
थी। और इस इतनी रश में भी लोग हजरत अब्बास से इतनी मोहब्बत करते थे कि हर कोई यह कोशिश कर रहा था कि वो किसी तरह हजरत अब्बास की कब्र तक पहुंच सके। यहां तक कि खलीफा उस्मान भी मुसलमानों की
Speaker A
इसी रश में फंस गए थे। जिसके बाद हजरत उस्मान ने मुश्किलों से अपने आप को मुसलमानों की इस रश से बाहर निकाला और जब हालात और भी ज्यादा बिगड़ गए। हजरत उस्मान ने मदीना की पुलिस को बुलवाया और उन्हें
Speaker A
हुक्म दिया कि लोगों को हजरत अब्बास की कब्र से दूर कर और सिर्फ बनू हाशिम को हजरत अब्बास के पास रहने दो। और इस तरह रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के चाचा इस्लाम के पहले सीक्रेट एजेंट और आने वाली
Speaker A
अब्बासी खिलाफत के दादा हजरत अब्बास रज़ अल्लाह अनहु को मदीना में दफना दिया गया। हजरत अब्बास की वफात के बाद आहिस्ता-आहिस्ता खिलाफत रादा दुनिया से खत्म हो गई और दुनिया में मुसलमानों की एक नई हुकूमत बन गई। बनो उमैया की हुकूमत
Speaker A
और अगले कई सालों तक उन्होंने ही दुनिया पर राज किया। लेकिन ऑलमोस्ट 100 साल की हुकूमत के बाद हजरत अब्बास की नस्ल के ही कुछ लोगों ने बनो उमैया खानदान के खिलाफ बगावत कर दी और उनसे सारी हुकूमत छीन ली।
Speaker A
और दुनिया में एक नई खिलाफत बनाई। जिस खिलाफत का नाम उन्होंने अपने ही दादा हजरत अब्बास रज अल्लाह अनो पर रखा। और इस खिलाफत का नाम था अब्बासी खिलाफत। जिन्होंने आते ही दुनिया में अपना नया कैपिटल बनाया। बगदाद
Speaker A
और यहीं से दुनिया में मुसलमानों का एक नया दौर शुरू हुआ जिसे आज तक इस्लामिक गोल्डन एज कहा जाता है। सब्सक्राइब
Topics:हजरत अब्बासइस्लाम का पहला गुप्त एजेंटमक्कामदीनाबदर की जंगफतेह मक्कारसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लमहिजरतमुसलमानों की मददइस्लामी इतिहास











