तुर्की की 100 साल की आज़ादी और उस्मानिया खिलाफत के इतिहास की विस्तृत कहानी।
Key Takeaways
- तुर्की की आज़ादी उस्मानिया खिलाफत से मिली, जो अन्य उपनिवेशों से अलग थी।
- उस्मानिया सल्तनत ने मुस्लिम दुनिया में एक नई राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व स्थापित किया।
- इस्लामिक इतिहास में अब्बासी खिलाफत का विशेष महत्व है, जिसने विज्ञान और संस्कृति को बढ़ावा दिया।
- यूरोप की तकनीकी प्रगति ने मुस्लिम दुनिया को पीछे छोड़ दिया, खासकर प्रिंटिंग प्रेस के कारण।
- आंतरिक संघर्ष और सामाजिक बदलावों ने उस्मानिया सल्तनत की ताकत को कमजोर किया।
What the video covers
- 1923 में तुर्की को उस्मानिया खिलाफत से आज़ादी मिली, जो दुनिया के अन्य देशों से अलग थी।
- उस्मानिया सल्तनत ने 600 साल तक तीन महाद्वीपों पर शासन किया।
- 1400 साल पहले इस्लाम के आगमन के बाद टर्किश लोगों की स्थिति बदल गई।
- अब्बासी खिलाफत को इस्लाम का गोल्डन एज माना जाता है, जहां विज्ञान, तकनीक और कहानियों का विकास हुआ।
- सलजुक सल्तनत के बाद उस्मानिया सल्तनत ने यूरोप की तरफ विस्तार किया।
- सुल्तान मेहमद फाते ने कांस्टेंटिनोपल को फतह कर मुस्लिम दुनिया में ऑटोमन की बढ़ती ताकत दिखाई।
- सुल्तान सलीम ने खिलाफत को अरब से इस्तांबुल स्थानांतरित किया और उस्मानिया खिलाफत की शुरुआत की।
- ऑटोमन सल्तनत की पीक के बाद यूरोप में क्रांतिकारी बदलाव जैसे प्रिंटिंग प्रेस ने मुस्लिम दुनिया को पीछे छोड़ दिया।
- उस्मानिया सल्तनत के अंदर राजनीतिक और सामाजिक समस्याएं उत्पन्न हुईं, जिनमें महल की महिलाओं की सत्ता संघर्ष भी शामिल थी।
- प्रिंटिंग प्रेस पर पाबंदी ने मुस्लिम दुनिया की शिक्षा और ज्ञान में पिछड़ापन बढ़ाया।
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Speaker A
मुबारक, कांग्रेचुलेशन! इस साल तुर्की के 100 साल पूरे हो चुके हैं। आज से 100 साल पहले, 1923 में, दुनिया की सबसे बड़ी जंग टिल दैट टाइम वर्ल्ड वॉर के बाद तुर्की को आजादी मिली। और आज उसी दिन को तुर्की में बहुत जबरदस्त तरीके से मनाया गया। अमेजिंग, राइट? लेकिन तुर्की की आजादी और बाकी कंट्रीज के आजाद होने में बहुत बड़ा फर्क है, क्योंकि दुनिया के बाकी मुल्क ब्रिटिश, फ्रांस या इटली से आजाद होकर बने, लेकिन टर्की ने आजादी उस्मानिया खिलाफत से ली थी।
Speaker A
आज से 100 साल पहले टर्की के फाउंडर मुस्तफा कमाल अतातुर्क ने उस्मानिया खिलाफत को खत्म करके आखिरी खलीफा को तख्त से हटा दिया, जिसकी वजह से सिर्फ तुर्की नहीं बल्कि पूरी दुनिया से एक ऐसा निजाम जो पिछले 1300 साल से चल रहा था, खत्म हो गया।
Speaker A
खिलाफत सुल्तान अब्दुल मजीद, दुनिया के आखिरी खलीफा, अपनी फैमिली के साथ हमेशा के लिए टर्की छोड़कर चले गए। सुल्तान अब्दुल मजीद के खानदान, उस्मानिया ऑटोमन खानदान ने तुर्की पर 600 साल तक हुकूमत की। और सिर्फ तुर्की नहीं, इस खानदान ने तीन कॉन्टिनेंट्स पर इस पूरे इलाके पर भी हुकूमत की। लेकिन यह इलाका, दिस पीस ऑफ लैंड जिसे आज हम टर्की के नाम से जानते हैं, यह असल में कभी टर्की था ही नहीं। बल्कि किश लोग यहां से बहुत दूर, इस इलाके सेंट्रल एशिया के रहने वाले लोग थे जो आज कजाखिस्तान, उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान कहलाते हैं। और इस इलाके जिसे हम टर्की कहते हैं, यहां ज्यादातर ग्रीक और रोमन रहते थे। हिस्ट्री में कभी भी टर्किश लोगों की कोई इंपॉर्टेंस या हैसियत नहीं थी।
Speaker A
लेकिन आज से 1400 साल पहले इस्लाम के आने के बाद टर्किश लोगों की तारीख बिल्कुल बदल गई। असल में मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बाद सबसे पहली खिलाफत, खिलाफत रास्ता बहुत तेजी से फैलती गई और मुसलमानों ने कुछ ही अरसे में रोमन और पर्सियन एम्पायर दोनों को फतह कर लिया। लेकिन खिलाफत रास्ता सिर्फ 30 साल के बाद खत्म हो गई, जिसके बाद उमैर ने पूरे मुसलमानों पर हुकूमत की और इस इस्लामिक एम्पायर को काफी हद तक और भी बढ़ाया। लेकिन उम खिलाफत में एक मसला यह था कि इनकी हुकूमत दुनिया के बहुत बड़े हिस्से पर थी, लेकिन यह अपनी एम एयर में सिर्फ अरबियों को सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंस देते थे, जिसकी वजह से बाकी इलाके इनसे इतना खुश नहीं थे। और इवेंचुरी 90 इयर्स बाद एक नए खानदान ने इनसे यह खिलाफत छीन ली और दुनिया में एक नई खिलाफत शुरू हुई, अब्बासी खिलाफत।
Speaker A
अब्बासी खिलाफत और उम खिलाफत में एक बहुत बड़ा डिफरेंस यह था कि अब्बासी खिलाफत सिर्फ अरबियों को नहीं बल्कि अरब से बाहर रहने वाले बाकी मुसलमानों को भी अपनी हुकूमत में इंपॉर्टेंट पोजीशन देने लगे, जिसकी वजह से पूरी दुनिया के बेस्ट लोग इनके कैपिटल बगदाद में जमा होना शुरू हुए और यह सिटी बगदाद दुनिया की बेस्ट सिटी बन गई। अब्बासी खिलाफत के इस टाइम को इस्लाम का गोल्डन एज समझा जाता है। साइंस, मेडिसिन, टेक्नोलॉजी और इवन दुनिया की पहली फिल्म इंडस्ट्री, आई मीन स्टोरी इंडस्ट्री टाइप, जिधर से दुनिया की सबसे फेमस स्टोरीज पैदा हुईं जिन्हें आज तक पूरी दुनिया जानती है, जैसे कि अलादीन, अली बाबा, नोलि बाबा, सिन बाद जो आज भी बिलियंस ऑफ डॉलर्स कमा रहे हैं। इसको हम फिर डिस्कस करेंगे तो सब्सक्राइब।
Speaker A
आहिस्ता आहिस्ता इस्लामिक एम्पायर फैलती गई और सेंट्रल एशिया तक पहुंची, जहां पहली बार टर्किश कबीलों ने भी इस्लाम कबूल किया। और जिस टर्किश लीडर ने सबसे पहले इस्लाम कबूल किया, उसका नाम था सलज उक। इसी सलज उक की औलाद में से एक बेटे तो ने आगे जाकर इस पूरे इलाके को फतह कर लिया और यहां सलज उक एम्पायर बनाए। लेकिन इस सलज उक एम्पायर का बादशाह हमेशा सुल्तान कहलाता था, खलीफा नहीं। खलीफा सिर्फ उस अब्बासी सल्तनत के बादशाह को कहा जाता था जो हमेशा सिर्फ अरबी ही होता था। सलज उक सल्तनत की ताकत की वजह से टर्किश कबीले सेंट्रल एशिया से निकलकर हर तरफ फैलने लगे और आहिस्ता आहिस्ता यह सल्तनत अना तोलिया जिसे आज टर्की कहा जाता है, यहां तक पहुंची। और रोमन एम्पायर के साथ एक जंग में उन्हें बहुत बुरी तरह हरा दिया, जिसके बाद आज से हजार साल पहले टर्किश लोग आहिस्ता आहिस्ता इस इलाके टर्की में आबाद होने लगे।
Speaker A
सलज उक सल्तनत के सबसे पावरफुल टर्किश कबीले हमेशा उनके कैपिटल ईरान के बहुत करीब रहते थे और जो कमजोर कबीले थे, वह उनके कैपिटल से बहुत दूर इस एम्पायर के बॉर्डर्स के पास रहते थे। इन्हीं कमजोर कबीलों में से एक कबीले के सरदार का नाम उस्मान था। उस्मान के बारे में तारीख में बहुत कम ऑथेंटिक बातें लिखी हैं। सिर्फ इतना पता है कि उनकी अना तोलिया टर्की में एक बहुत ही छोटे इलाके पर हुकूमत थी और आगे जाकर उस्मान की औलाद ने आहिस्ता आहिस्ता इस पूरे इलाके को फतह कर लिया।
Speaker A
ऑटोमन एम्पायर और बाकी इस्लामिक एम्पायर्स में बहुत बड़ा डिफरेंस था क्योंकि बाकी इस्लामिक एम्पायर्स हमेशा आपस में लड़ते रहते थे, लेकिन ऑटोमन एम्पायर मुसलमानों को छोड़कर वेस्ट यूरोप की तरफ बढ़ने लगी और पहली दफा मुसलमान यूरोप को फत करने लगे। और आखिर इसी उस्मानिया सल्तनत के एक बादशाह सुल्तान मेहमद फाते ने कांस्टेंटिनॉपल को भी फतह कर लिया। और यह वही सिटी थी जिसके बारे में रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पहले ही फरमाया था कि एक दिन मुसलमान इसे जरूर फतह करेंगे।
Speaker A
इस्तांबुल की इस फतह को पूरी मुस्लिम दुनिया में बहुत जोर शोर से मनाया गया, जिसके बाद पूरी दुनिया के मुसलमान अरबियों से ज्यादा ऑटोमन को अपना लीडर मानने लगे। लेकिन उस्मानिया सल्तनत के बादशाह उस वक्त भी सिर्फ सुल्तान कहलाते थे, खलीफा नहीं। खलीफा तब भी अब्बासी खिलाफत के ही बादशाह को कहा जाता था, जो ऑ कोर्स अरबी था। लेकिन इस्तांबुल फतह करने के 50 साल बाद एक उस्मानी बादशाह सुल्तान सलीम ने यह सब कुछ बदल दिया और उसने यूरोप से अपनी अटेंशन हटाकर इजिप्ट में ममलुक सल्तनत पर हमला करके उसे तबाह कर दिया और सिर्फ एक साल में अपनी एम्पायर उस्मानिया सल्तनत के साइज को डबल कर दिया, मतलब इस सारे इलाके को फतह कर लिया।
Speaker A
सुल्तान सलीम उस वक्त के खलीफा मुतवक्किल को अपने साथ वापस इस्तांबुल लेकर आया और यहां दिस इज वेयर खिलाफत ट्रांसफर हुई। अब्बासी खलीफा मुतवक्किल ने अपनी खिलाफत सुल्तान सलीम के हवाले की और साथ ही रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तलवार और कुछ बाकी चीजें जो आज तक इस्तांबुल में मौजूद हैं। और इस तरह पहली बार खिलाफत अरब से निकलकर एक टर्किश बादशाह के पास आई। इसके बाद उस्मानिया सल्तनत, उस्मानिया खिलाफत बन गई। एंड नॉट ओनली दैट, बल्कि दुनिया की सबसे ताकतवर एम्पायर और दुनिया की सबसे बड़ी सुपर पावर जिसकी ताकत के सामने दुनिया में कोई भी खड़ा नहीं हो सकता था।
Speaker A
लेकिन अगर आज से 500 साल पहले मुसलमान दुनिया में इतने ही ताकतवर थे तो आज इस हालत तक कैसे पहुंचे जहां हर तरफ बस तबाही है? इसका क्रेडिट भी ऑटोमन एम्पायर को जाता है क्योंकि अब पूरे दुनिया के मुसलमान ओटोमंस को इस्लाम का लीडर मानते थे। लेकिन जैसे ही उस्मानिया सल्तनत अपनी पीक तक पहुंची, वहां से सब कुछ खराब होने लगा। वो यूरोप जिसकी उस्मानिया खिलाफत के सामने कोई हैसियत नहीं थी, वहां एक बहुत बड़ा चेंज आया। एक आदमी जिसका नाम क्रिस्टोफर कोलंबस था, उसने गलती से इंडिया ढूंढने के चक्कर में अमेरिका को दरयाफ्त किया, जिसकी वजह से यूरोप के पास इस पूरे इलाके की वेल्थ जमा होना शुरू हुई। और यूरोप आहिस्ता आहिस्ता ऑटोमन एम्पायर से आगे निकलना शुरू हुए। और सिर्फ ये नहीं बल्कि ऑटोमन एम्पायर के अंदर भी बहुत सारी खराबियां पैदा हुईं। आहिस्ता आहिस्ता उस्मानी बादशाह खलीफा अपनी आवाम से बहुत डिफरेंट दिखने लगे। फॉर एग्जांपल, सलीम द सेकंड जिसे उनके ब्लू आइज और ब्लड बाल की वजह से जाना जाता था और उन्हें सलीम द ब्लड भी कहा जाता है। हालांकि इससे पहले टर्किश लोग ऐसे बिल्कुल भी नहीं दिखते थे। और यह ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ऑटोमन बादशाह के लिए जो औरतें सेलेक्ट की जाती थीं, उनका ताल्लुक हमेशा यूरोप में यूक्रेन, रोमिया, ग्रीस वगैरह से होता था।
Speaker A
और ऐसा क्यों होता था? आमीन, यह ऐसी लड़कियां थीं जिनकी ना कोई तरबियत और ना कोई इस्लामिक वैल्यूज होती थीं। वह सिर्फ अपनी खूबसूरती की वजह से उस्मानिया खलीफा की मलका बन जाती थीं। और आहिस्ता आहिस्ता इन्हीं औरतों ने उस्मानी खलीफा हों को भी अपनी ताकत के लिए यूज करना शुरू किया। और कहा जाता है कि इनमें से एक कौसल सुल्तान ने अपनी ताकत बरकरार रखने के लिए उस्मानी खलीफा हों की जान भी ली। और इन मलका हों की यह लड़ाइयां 100 साल तक जारी रही, जिसकी वजह से उस्मानिया खिलाफत को बहुत नुकसान हुआ। लेकिन स्टिल सबसे बड़ा नुकसान जिसकी वजह से मुसलमान वेस्टर्न कंट्री से बहुत पीछे रह गई, जब उस्मानिया खिलाफत अपनी पीक पर थी।
Speaker A
उसी वक्त यूरोप में एक मशीन आजाद हुई, प्रिंटिंग प्रेस। इससे पहले दुनिया में किताबें सिर्फ हाथों से लिखी जाती थीं, लेकिन प्रिंटिंग प्रेस के बाद सारी बुक्स इस मशीन के जरिए बहुत तेजी से प्रिंट होने लगीं, जिससे यूरोप में किताबें हर तरफ फैल गईं और इल्म, नॉलेज बहुत तेजी से हर घर तक फैलने लगा। और यूरोप में लिटरेसी रेट बहुत तेजी से ऊपर जाने लगी। लेकिन जैसे ही यह इन्वेंशन उस्मानिया खिलाफत तक पहुंची, उनके मिनिस्टर्स और उलमा ने इसे हराम कहकर बंद कर दिया और पूरी खिलाफत में मुसलमानों के इस प्रिंटिंग प्रेस को यूज करने पर पाबंदी लगा दी, जिसकी वजह से यूरोप में एजुकेशन और नॉलेज बढ़ने लगी और मुस्लिम दुनिया इनसे बहुत पीछे रह गई। इस फैसले के 200 साल बाद उस्मानिया खिलाफत ने ये पाबंदी हटा दी, लेकिन इट वाज टू लेट। यूरोप मुसलमानों से तरक्की में बहुत आगे निकल चुका था। और आज पूरे इस्लामिक दुनिया में बुक्स, इवन कुरान भी प्रिंट होते हैं, व्हिच मींस आज पूरे दुनिया के मुसलमान उस्मा...
Speaker A
जिस टर्किश लीडर ने सबसे पहले इस्लाम कबूल किया उसका नाम था सलज उक इसी सलज उक की औलाद में से एक बेटे तो ने आगे जाकर इस पूरे इलाके को फतह कर लिया और यहां सलज उक एंपायर बनाए लेकिन इस सलज उक एंपायर का
Speaker A
बादशाह हमेशा सुल्तान कहलाता था खलीफा नहीं खलीफा सिर्फ उस अब्बासी सल्तनत के बादशाह को कहा जाता था जो हमेशा सिर्फ अरबी ही होता था सलज उक सल्तनत की ताकत की वजह से टर्किश कबीले सेंट्रल एशिया से निकलकर हर तरफ फैलने लगे और आहिस्ता
Speaker A
आहिस्ता यह सल्तनत अना तोलिया जिसे आज टर्की कहा जाता है यहां तक पहुंच और रोमन एंपायर के साथ एक जंग में उन्हें बहुत बुरी तरह हरा दिया जिसके बाद आज से हजार साल पहले टर्किश लोग आहिस्ता आहिस्ता इस इलाके टर्की में आबाद होने लगे सलज उक
Speaker A
सल्तनत के सबसे पावरफुल टर्किश कबीले हमेशा उनके कैपिटल ईरान के बहुत करीब रहते थे और जो कमजोर कबीले थे वह उनके कैपिटल से बहुत दूर इस एंपायर के बॉर्डर्स के पास रहते थे इन्हीं कमजोर कबीलों में से एक
Speaker A
कबीले के सरदार का नाम उस्मान था उस्मान के बारे में तारीख में बहुत कम ऑथेंटिक बातें लिखी सिर्फ इतना पता है कि उनकी अना तोलिया टर्की में एक बहुत ही छोटे इलाके पर हुकूमत थी और आगे जाकर उस्मान की औलाद
Speaker A
ने आहिस्ता आहिस्ता इस पूरे इलाके को फतह कर लिया ऑटोमन एंपायर और बाकी इस्लामिक अंपायर्स में बहुत बड़ा डिफरेंस था क्योंकि बाकी इस्लामिक अंपायर्स हमेशा आपस में लड़ते रहते थे लेकिन ऑटोमन एंपायर मुसलमानों को छोड़कर वेस्ट यूरोप की तरफ
Speaker A
बढ़ने लगी और पहली दफा मुसलमान यूरोप को फत करने लगे और आखिर इसी उस्मानिया सल्तनत के एक बादशाह सुल्तान मेहमद फाते ने कांस्टेंटिनॉपल को भी फतह कर लिया और यह व सिटी थी जिसके बारे में रसूलल्लाह सला सलम
Speaker A
ने पहले ही फरमाया था कि एक दिन मुसलमान इसे जरूर फतह करेंगे इस्तांबुल की इस फतह को पूरी मुस्लिम दुनिया में बहुत जोर शोर से मनाया गया जिसके बाद पूरी दुनिया के मुसलमान अरबि हों से ज्यादा ऑटोमन को अपना
Speaker A
लीडर मानने लगे लेकिन उस्मानिया सल्तनत के बादशाह उस वक्त भी सिर्फ सुल्तान कहलाते थे खलीफा नहीं खलीफा तब भी अब्बासी खिलाफत के ही बादशाह को कहा जाता था क्यों ऑ कोर्स अरबी था लेकिन इस्तांबुल फतह करने के 50 साल बाद एक उस्मानी बादशाह सुल्तान
Speaker A
सलीम ने यह सब कुछ बदल दिया और उसने यूरोप से अपनी अटेंशन हटाकर इजिप्ट में ममलुक सल्तनत पर हमला करके उसे तबाह कर दी और सिर्फ एक साल में अपनी एंपायर उस्मानिया सल्तनत के साइज को डबल कर दिया मतलब इस
Speaker A
सारे इलाके को फतह कर लिया सुल्तान सलीम उस वक्त के खलीफा मुत वक्किल को अपने साथ वापस इस्तांबुल लेकर आया और यहां दिस इज वेयर खिलाफत ट्रांसफर हुई अब्बासी खलीफा मुत वक्किल ने अपनी खिलाफत सुल्तान सलीम के हवाले की और साथ ही रसूलल्लाह
Speaker A
सल्लल्लाहु अल वसल्लम की तलवार और कुछ बाकी चीजें जो आज तक इस्तांबुल में मौजूद है और इस तरह पहली बार खिलाफत अरबि से निकलकर एक टर्किश बादशाह के पास आई इसके बाद उस्मानिया सल्तनत उस्मानिया खिलाफत बन गई एंड नॉट ओनली दैट बल्कि दुनिया की सबसे
Speaker A
ताकतवर एंपायर और दुनिया की सबसे बड़ी सुपर पावर जिसकी ताकत के सामने दुनिया में कोई भी खड़ा नहीं हो सकता था लेकिन अगर आज से 500 साल पहले मुसलमान दुनिया में इतने ही ताकतवर थे तो आज इस हालत तक कैसे
Speaker A
पहुंचे जहां हर तरफ बस तबाही है इसका क्रेडिट भी ऑटोमन एंपायर को जाता है क्योंकि अब पूरे दुनिया के मुसलमान ओटोमंस को इस्लाम का लीडर मानते थे लेकिन जैसे ही उस्मानिया सल्तनत अपनी पीक तक पहुंची वहां से सब कुछ खराब होने लगा वो यूरोप जिसकी
Speaker A
उस्मानिया खिलाफत के सामने कोई हैसियत नहीं थी वहां एक बहुत बड़ा चेंज आया एक आदमी जिसका नाम क्रिस्टोफर कोलंबस था उसने गलती से इंडिया ढूंढने के चक्कर में अमेरिका को दरयाफ्त किया जिसकी वजह से यूरोप के पास इस पूरे इलाके की वेल्थ जमा
Speaker A
होना शुरू हुई और और यूरोप आहिस्ता आहिस्ता ऑटोमन एंपायर से आगे निकलना शुरू हुए और सिर्फ ये नहीं बल्कि ऑटोमन एंपायर के अंदर भी बहुत सारी खराब आं पैदा हुई आहिस्ता आहिस्ता उस्मानी बादशाह खलीफा अपनी आवाम से बहुत डिफरेंट दिखने लगे फॉर
Speaker A
एग्जांपल सलीम द सेकंड जिसे उनके ब्लू आइज और ब्लड बाल की वजह से जाना जाता था और उन्हें सलीम द ब्लड भी कहा जाता है हालांकि इससे पहले टर्किश लोग ऐसे बिल्कुल भी नहीं दिखते थे और यह ऐसा इसलिए हुआ
Speaker A
क्योंकि ऑटोमन बादशाह के लिए जो औरतें सेलेक्ट की जाती थी उनका ताल्लुक हमेशा यूरोप में यूक्रेन रोमिया ग्रीस वगैरह से होता था और ऐसा क्यों होता था आमीन यह ऐसी लड़कियां थी जिनकी ना कोई तरबियत और ना कोई इस्लामिक वैल्यूज होती
Speaker A
थी वह सिर्फ अपनी खूबसूरती की वजह से उस्मानिया खलीफा की मलका बन जाती थी और आहिस्ता आहिस्ता इन्हीं औरतों ने उस्मानी खलीफा हों को भी अपनी ताकत के लिए यूज करना शुरू किया और कहा जाता है कि इनमें
Speaker A
से एक कौसल सुल्तान ने अपनी ताकत बरकरार रखने के लिए उस्मानी खलीफा हों की जान भी ली और इन मलका हों की यह लड़ाइयां 100 साल तक जारी रही जिसकी वजह से उस्मानिया खिलाफत को बहुत नुकसान हुआ लेकिन स्टिल
Speaker A
सबसे बड़ा नुकसान जिसकी वजह से मुसलमान वेस्टर्न कंट्री से बहुत पीछे रह गई जब उस्मानिया खिलाफत अपनी पीक पर थी उसी वक्त यूरोप में एक मशीन आजाद हुई प्रिंटिंग प्रेस इससे पहले दुनिया में किताबें सिर्फ हाथों से लिखी जाती थी लेकिन प्रिंटिंग
Speaker A
प्रेस के बाद सारी बुक्स इस मशीन के जरिए बहुत तेजी से प्रिंट होने लगी जिससे यूरोप में किताबें हर तरफ फैल गई और इल्म नॉलेज बहुत तेजी से हर घर तक फैलने लगा और यूरोप में लिटरेसी रेट बहुत तेजी से ऊपर जाने
Speaker A
लगी लेकिन जैसे ही यह इन्वेंशन उस्मानिया खिलाफत तक पहुंची उनके मिनिस्टर्स और उलमा ने इसे हराम कहकर बंद कर दिया और पूरी खिलाफत में मुसलमानों के इस प्रिंटिंग प्रेस को यूज करने पर पाबंदी लगा दी जिसकी वजह से यूरोप में एजुकेशन और नॉलेज बढ़ने
Speaker A
लगी और मुस्लिम दुनिया इनसे बहुत पीछे रह गई इस फैसले के 200 साल बाद उस्मानिया खिलाफत ने ये पाबंदी हटा दी लेकिन इट वाज टू लेट यूरोप मुसलमानों से तरक्की में बहुत आगे निकल चुका था और आज पूरे
Speaker A
इस्लामिक दुनिया में बुक्स इवन कुरान भी प्रिंट होते हैं व्हिच मींस आज पूरे दुनिया के मुसलमान उस्मानिया खिलाफत के इस फैसले को नहीं मानते इन फैसलों के बाद उस्मानिया खिलाफत का डिक्लाइन शुरू हुआ आखिर वर्ल्ड वॉर वन तक उस्मानिया खिलाफत
Speaker A
इस इतने बड़े एंपायर से सिर्फ इतने इलाके तक रह गई और वर्ल्ड वॉर वन में इनके एलाए जर्मनी के हारने के बाद उस्मानिया खिलाफत भी टूटने लगी और आर्बियों ने भी ब्रिटिश के साथ मिलकर उस्मानिया सल्तनत को तोड़ने
Speaker A
की फुल कोशिश की जिसके बाद आखिर 1923 में मुस्तफा कमाल अतातुर्क ने आखिरी खलीफा को मुल्क से हमेशा के लिए निकाल दिया और अतातुर्क की खिलाफत से इतनी नफरत थी कि खिलाफत खत्म करने के बाद उसने टर्की को
Speaker A
बिल बिल्कुल बदलने की कोशिश की और इस्लाम और खिलाफत को टर्की से हमेशा के लिए खत्म करने का प्लान बनाया जिसमें उसने बहुत ही अजीब किस्म की रिफॉर्म्स की फॉर एग्जांपल टर्किश हमेशा ऐसे अरबी स्टाइल में लिखी जाती थी अता तुर्क ने इसे ऐसे यूरोपियन
Speaker A
स्टाइल में बदल दिया और हिजाब पर भी पाबंदी लगा दी और इवन अजान पर भी पाबंदी लगा दी आई मीन अरबी अजान पर जिसके बाद तुर्की के मस्जिदों में 18 साल तक टर्किश जबान में अजान दी जाती थी और यह अजान देते
Speaker A
हुए अल्लाह को अल्लाह कहने की भी इजाजत नहीं थी बल्कि अल्लाह को टर्किश लफ्ज तंग र कहना जरूरी था जिसके बाद जो भी इन रिफॉर्म्स को चेंज करने की कोशिश करता था उसे टर्की की फौज कू कर के ताकत से हटा
Speaker A
देती थी और इस तरह आखिर 1924 में खिलाफत का निजाम दुनिया से खत्म हो गया और आज खिलाफत के इस निजाम को दुनिया से खत्म हुए 100 साल पूरे हो चुके हैं तो मुबारक और मे बी नॉट सब्सक्राइब
Topics:तुर्की इतिहासउस्मानिया सल्तनतखिलाफतअब्बासी खिलाफतसलजुक सल्तनतइस्लामिक इतिहासइस्तांबुल फतहप्रिंटिंग प्रेसमुस्लिम दुनियासुल्तान मेहमद फाते











