इस वीडियो में ईद के इतिहास और इब्राहिम अल सलाम की कहानी को 3000 वर्षों के संदर्भ में विस्तार से बताया गया है।
Key Takeaways
- ईद का त्योहार इब्राहिम अल सलाम के जीवन और उनके संदेश से जुड़ा है।
- मूर्तिपूजा के खिलाफ उनका संघर्ष और अल्लाह पर उनका भरोसा ईद के मूल में है।
- हाजर और इस्माइल की कहानी मक्का और हज के रीति-रिवाजों की उत्पत्ति है।
- ईद का त्योहार विश्व के अरब देशों और मुसलमानों के लिए सामाजिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है।
- इतिहास और धर्म के माध्यम से ईद का महत्व समझना जरूरी है।
What the video covers
- दुनिया के 2 बिलियन मुसलमान ईद का त्योहार मनाते हैं, जो 57 देशों में बड़े पैमाने पर सेलिब्रेट होता है।
- ईद का इतिहास इब्राहिम अल सलाम से जुड़ा है, जो लगभग 4000 साल पहले इराक के ऊर शहर में पैदा हुए थे।
- ऊर शहर उस समय की सबसे ताकतवर और महत्वपूर्ण सिटी थी, जहां इब्राहिम अल सलाम का जन्म हुआ।
- इब्राहिम अल सलाम ने मूर्तिपूजा के खिलाफ आवाज उठाई और बुतों को तोड़ दिया, जिससे उन्हें बादशाह की आग में फेंकने की सजा दी गई।
- अग्नि में फेंके जाने के बाद भी वे सुरक्षित बाहर निकले, जिससे लोगों में उनका सम्मान बढ़ा।
- इब्राहिम अल सलाम ने फलस्तीन (किनन) में अपनी फैमिली के साथ बसना शुरू किया, जहां उन्होंने औलाद के लिए दुआ की।
- उनकी बीवी हाजर और बेटे इस्माइल की कहानी मक्का के आसपास के इलाके से जुड़ी है, जहां हाजर ने पानी की तलाश में सफा और मरवा के बीच सात चक्कर लगाए।
- इस पानी का स्रोत जम जम कहलाया, जो आज भी हज के दौरान याद किया जाता है।
- इब्राहिम अल सलाम के जीवन की घटनाएं तौरा और कुरान दोनों में वर्णित हैं और आज भी ईद के त्योहार के पीछे की प्रेरणा हैं।
- वीडियो में ईद के धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को विस्तार से समझाया गया है।
Chapters
- 00:00ईद का महत्व और इब्राहिम अल सलाम की भूमिका
- 01:07इब्राहिम अल सलाम का जन्म और ऊर शहर का परिचय
- 02:18मूर्तिपूजा का विरोध और बुतों का विनाश
- 03:09इब्राहिम अल सलाम को आग में फेंकना और उनका बचाव
- 04:02इब्राहिम अल सलाम की औलाद के लिए दुआ और इस्माइल का जन्म
- 04:57हाजर और इस्माइल की मक्का में यात्रा और जम जम का पानी
- 05:58मक्का में बसावट और हज के रीति-रिवाजों की उत्पत्ति
- 07:01ईद के त्योहार का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
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Speaker A
ईद ईद मुबारक, ईद मुबारक, ईद मुबारक। अब एक बार फिर दुनिया के 2 बिलियन मुसलमान अपना सबसे बड़ा फेस्टिवल ईद मनाएंगे, जिसमें दुनिया के 57 कंट्रीज मतलब इन सारे कंट्रीज में बिजनेसेस, स्कूल्स, कोर्ट्स सब कुछ बंद हो जाएगा। और दुनिया के बड़े-बड़े लीडर्स इस दिन की मुबारकबाद देंगे। और सिर्फ यही नहीं, बल्कि दुनिया के बड़े-बड़े बिजनेसेस बिल्कुल हिल कर रह जाएंगे। लेकिन क्यों? इसके आखिर होने का मतलब क्या है? पूरी दुनिया में यह सब कुछ सिर्फ और सिर्फ एक इंसान की वजह से होगा, जिसका नाम था इब्राहिम अल सलाम।
Speaker A
आज से तकरीबन 4000 साल पहले इराक के इलाके ऊर में इब्राहिम अल सलाम पैदा हुए। यह कोई आम सिटी नहीं थी, बल्कि उस जमाने की एक बहुत ही स्ट्रांग और इंपॉर्टेंट सिटी थी। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आज से 4000 साल पहले जब इब्राहिम अल सलाम इस सिटी में आबाद थे, उसी टाइम का एक टेंपल सिटी में आज भी मौजूद है, जिसे जिगरा ऑफ उर कहा जाता है। यह ऐसी बिल्डिंग्स है जिन्हें आज भी बनाना बहुत ही मुश्किल और महंगा काम होगा।
Speaker A
और इसी बिल्डिंग की शेप को कॉपी करके यूनाइटेड किंगडम की सीक्रेट एजेंसी ए6 ने अपना हेड क्वार्टर बनाया। इब्राहिम अल सलाम का ऊर सिटी में पैदा होना हजारों साल तक सिर्फ तौरा में लिखा हुआ था, लेकिन आज से तकरीबन 100 साल पहले 193 में साइंटिस्ट को इराक के इसी इलाके से कुछ बहुत ही इंपॉर्टेंट टैबलेट्स मिलीं, जिनमें साफ-साफ इसी ऊर सिटी का बार-बार जिक्र है।
Speaker A
साइंटिस्ट को इन इंस्क्रिप्शन्स और खजानो को देखने के बाद अब दुनिया के बहुत सारे साइंटिस्ट इस बात को भी मानते हैं कि यह सिटी उस जमाने की दुनिया की सबसे पावरफुल और सबसे बड़ी सिटी थी। मतलब इब्राहिम अल सलाम किसी छोटे से गांव में नहीं, बल्कि उस वक्त दुनिया की सबसे ताकतवर सिटी में पैदा हुए थे।
Speaker A
जैसे कि आज कोई न्यूयॉर्क में पैदा हो, और इस सिटी में भी इब्राहिम अल सलाम किसी आम घराने में नहीं, बल्कि एक बहुत ही ताकतवर शख्स के घर में पैदा हुए थे, जिनका उस सिटी के बादशाह के साथ बहुत क्लोज ताल्लुक था। लेकिन इब्राहिम अल सलाम जवानी से ही इस सिटी में बिल्कुल भी खुश नहीं थे और हमेशा ही इस सिटी के स्कॉलर्स और उलमा के साथ झगड़ते रहते थे।
Speaker A
क्योंकि इस सिटी में लोग एक खुदा के बजाय बहुत सारे बुतों की इबादत किया करते थे, और इन बुतों में सबसे ताकतवर बुत था मर्दूक, जिसे यह सबसे बड़ा खुदा मानते थे। और इन सारे बुतों की इबादत के लिए इस सिटी में बहुत सारे टेंपल्स बनाए गए थे, जिनमें से एक एज आई सेड इतना आलीशान टेंपल आज भी दुनिया में मौजूद है।
Speaker A
एक दिन इब्राहिम अल सलाम अपने लोगों को एक बहुत ही इंपोर्टेंट पॉइंट समझाने के लिए इस सिटी के एक टेंपल के अंदर गए और एक कुल्हाड़ी लेकर इन सारे बुतों को तोड़ दिया, सिवाय सबसे बड़े बुत के। और फिर उस कुल्हाड़ी को इसी सबसे बड़े बुत के ऊपर डालकर वहां से चले गए।
Speaker A
जब इस शहर के लोगों ने आकर यह सब कुछ देखा तो वो सीधा इब्राहिम अल सलाम के पास गए। तो इब्राहिम अल सलाम ने कहा कि हो सकता है इस बड़े बुत को इन सारे पर गुस्सा आया हो, इसीलिए उसने इन सारे को मार दिया। उन्होंने कहा कि यह तुम क्या कह रहे हो? बुत थोड़ी कुछ कर सकता है?
Speaker A
तो इब्राहिम अल सलाम ने कहा, एग्जैक्टली, जब तुम्हें पता है कि ये कुछ भी नहीं कर सकते तो फिर इनसे मांगते क्यों? लेकिन इस बात पर इन सबको इतना गुस्सा आया कि उन्होंने इब्राहिम अल सलाम को इबरत बनाने के लिए उस सिटी के बादशाह की मदद से एक बहुत बड़ी आग तैयार की।
Speaker A
अब यहां पर एक कंफ्यूजन है कि यह बादशाह नमरूद था या नमरूद के अलावा कोई और था, क्योंकि तौरा और कुरान दोनों में इस बादशाह का नमरूद होने का कोई जिक्र नहीं है। अब जो भी हो, नमरूद या उस सिटी का जो भी बादशाह था, उसने उस सिटी के सारे लोगों को बुलाया और उनके सामने एक बहुत बड़ी आग जलाई।
Speaker A
यह इतनी बड़ी आग थी कि लोग इब्राहिम अल सलाम को इसमें फेंकने के लिए इसके करीब भी नहीं जा सकते थे। इसीलिए उन्होंने इब्राहिम अल सलाम को दूर से फेंकने के लिए उनके लिए एक कैटपल्ट या ऐसी कोई चीज तैयार की, ताकि उन्हें दूर से फेंका जा सके। यह सब कुछ उस सिटी का एक बहुत बड़ा क्राउड देख रहा था, जो उस वक्त दुनिया के सबसे ताकतवर लोग थे।
Speaker A
और इस सारे क्राउड में इब्राहिम अल सलाम को सपोर्ट करने वाला कोई भी नहीं था, सिवाय एक शख्स के, इब्राहिम अल सलाम के भतीजे लूत अल सलाम, जो इसी क्राउड के अंदर मौजूद थे। जैसे ही सारी तैयारियां कंप्लीट हुईं, तो आग में फेंके जाने से पहले इब्राहिम अल सलाम ने सिर्फ और सिर्फ एक ही बात कही कि मेरे लिए सिर्फ अल्लाह ही काफी है।
Speaker A
और आखिर इब्राहिम अल सलाम को उन्होंने आग की तरफ फेंक दिया, लेकिन इब्राहिम अल सलाम उस वक्त दुनिया के सबसे ताकतवर लोगों के सामने बिल्कुल सही सलामत इस आग के दरमियान से चलकर बाहर निकले। यह देखकर इस सिटी के सारे लोग बहुत हैरान हुए कि यह कैसे हो सकता है।
Speaker A
लेकिन इसके बाद यह सारे लोग इतने डर गए कि उन्होंने दोबारा कभी इब्राहिम अल सलाम को नुकसान पहुंचाने की कोशिश ही नहीं की। इस सबसे कुछ ही अरसे बाद इब्राहिम अल सलाम इस इलाके को छोड़कर अपनी बीवी सारा और अपने भतीजे लूत अल सलाम के साथ फलस्तीन, जिसे उस जमाने में किनन कहा जाता था, उसकी तरफ रवाना हुए।
Speaker A
फिर लूत अल सलाम इन्हें छोड़कर एक दूसरी सिटी की तरफ गए और वहां जो हुआ उसे हम फिर एक्सप्लेन करेंगे। तो सब्सक्राइब।
Speaker A
लूत अल सलाम के जाने के बाद इब्राहिम अल सलाम यही फलस्तीन के इलाके में अपनी फैमिली के साथ रहने लगे और आहिस्ता आहिस्ता यहां बहुत अच्छी तरह स्टेबल हो गए। मतलब यहूदियों की किताब तौरा में लिखा है कि इब्राहिम अल सलाम के पास एक ही टाइम पर 300 से ज्यादा नौकर थे।
Speaker A
लेकिन इतनी बड़ी जायदाद और इतने माल के बाद भी इब्राहिम अल सलाम की कोई औलाद नहीं थी। तो उन्होंने आखिर 86 साल की उम्र में अल्लाह से औलाद के लिए दुआ की, जिसे अल्लाह ने कबूल कर ली। लेकिन यहां से आगे तौरा में बहुत ही इंटरेस्टिंग बातें लिखी हैं, जो आज सारी की सारी पूरी हो चुकी हैं। तो उन्हें भी मेंशन करना लाजमी है।
Speaker A
तौरा में लिखा है कि जब इब्राहिम अल सलाम ने अल्लाह से औलाद की दुआ मांगी तो अल्लाह ने उसे कहा कि ऊपर आसमान की तरफ देखो। आसमान में तुम्हें जितने भी स्टार्स नजर आ रहे हैं, बिल्कुल इसी तरह तुम्हारी औलाद भी पूरी दुनिया में फैलेगी। और दुनिया के बहुत बड़े-बड़े बादशाह और नबी तुम्हारी औलाद से होंगे।
Speaker A
जिसके बाद इब्राहिम अल सलाम की बीवी हाजर से उनका बेटा इस्माइल अली सलाम पैदा हुआ। लेकिन जैसे ही इस्माइल अली सलाम की उम्र 11, 12, 13 के करीब हुई तो एक रात इब्राहिम अल सलाम ने ख्वाब देखा जिसमें वो अपने बेटे इस्माइल को जिबाह कर रहे थे।
Speaker A
लेकिन वेट, वेट, अब यहां पर थोड़ी कंफ्यूजन है। कुछ स्कॉलर्स यह समझते हैं कि यह वाकया फलस्तीन की नान में बे शया था, लेकिन ज्यादातर स्कॉलर्स कहते हैं कि यह वाकया मक्का में पेश है। सो लेट्स गो विद दैट।
Speaker A
रात में लिखा है कि इस्माइल अल सलाम के पैदा होने के बाद इब्राहिम अल सलाम ज्यादा अटेंशन अपनी बीवी सारा के बजाय हाजर और उसके बेटे इस्माइल की तरफ देने लगे, जिसकी वजह से उनकी बीवी सारा के दिल में हाजर और उसके बेटे इस्माइल के लिए थोड़ी जलन पैदा हुई।
Speaker A
लेकिन कुरान में सिर्फ इतना लिखा है कि यह सब इब्राहिम अल सलाम ने अल्लाह के कहने पर किया था। इब्राहिम अल सलाम अपनी बीवी हाजर और इस्माइल को लेकर फरान के डेजर्ट की तरफ रवाना हुए, जिसे ऑलमोस्ट आज यहूदी भी अरब में, यही मक्का के आसपास समझते हैं।
Speaker A
फलस्तीन और मक्का के दरमियान ऑलमोस्ट 1400 किमी का फासला है, जिसका मतलब है उन्होंने पैदल ऑलमोस्ट एक महीने का सफर किया होगा। और अगर घोड़े या ऊंट पर किया हो तो ऑलमोस्ट 17 या 18 दिन लगे होंगे।
Speaker A
इब्राहिम अल सलाम ने इन्हें फरान के डेजर्ट के बिल्कुल एक खाली और वीरान जगह पर लाकर छोड़ दिया और वहां से वापस फलस्तीन की तरफ रवाना हुए। उनकी बीवी हाजर ने दो बार पूछा, क्या आप कैसे हमें ऐसे अकेला छोड़कर जा सकते हैं? जिस पर इब्राहिम अल सलाम ने कोई जवाब नहीं दिया।
Speaker A
तीसरी बार उन्होंने पूछा कि क्या यह सब कुछ अल्लाह की तरफ से है? तो इब्राहिम अल सलाम ने मुड़कर देखा और कहा हां, और फिर वहां से चले गए। अब इसके कुछ ही अरसे बाद हाजर और इस्माइल के पास पीने का पानी बिल्कुल खत्म हो गया।
Speaker A
और इस्माइल अल सलाम, जो बिल्कुल छोटे से बच्चे थे, उनकी हालत प्यास से बहुत ही खराब हो गई। जिसे देखकर उनकी मां हाजर मदद ढूंढने के लिए सबसे करीब वाली पहाड़ी सफा पर चढ़ी, लेकिन वहां उन्हें दूर-दूर तक कोई नहीं दिखा।
Speaker A
फिर वह वहां से वापस नीचे आई और दूसरी पहाड़ी मरवा पर चढ़ी। और इस तरह उन्होंने सफा और मरवा के दरमियान सात चक्कर लगाए। अल्लाह को इस मां की अपने बेटे को बचाने की कोशिश इतनी अच्छी लगी कि इस वाकये से 4000 साल बाद आज भी पूरी दुनिया से लाखों लोग इसी तरह सफा और मरवा के दरमियान सात चक्कर लगाते हैं।
Speaker A
सात चक्कर के बाद हाजर ने देखा कि जिस जगह पर इस्माइल अल सलाम थे, वहीं पर जमीन के अंदर से पानी निकलना शुरू हो गया। तो उन्होंने फुल स्पीड भागकर इस पानी को जमा करने की कोशिश की, लेकिन यह पानी इतना तेजी से निकल रहा था कि वह बार-बार इसे जम जम कहने लगे।
Speaker A
ली मी स्टॉप, स्टॉप, जिसका मतलब है रुक जाओ, स्टॉप। यहां तक तो स्टोरी का सबको पता है, लेकिन इसके बाद हाजर और इस्माइल इसी इलाके मक्का में ही रहे। एक दिन यमन से एक कबीला बन जुर हम शाम की तरफ जा रहा था।
Speaker A
यमन और शाम के दरमियान जो नॉर्मल रास्ता था, उसके दरमियान कोई भी मक्का वाले इलाके में नहीं ठहरता था, लेकिन इस बार जब यह कबीला मक्का के पास से गुजर रहा था तो उन्होंने आसमान में कुछ ऐसे परिंदे देखे जो हमेशा डेजर्ट के पानी के ऊपर ही पाए जाते थे।
Speaker A
और इन परिंदों को फॉलो करते-करते यह लोग...
Speaker A
महीने का सफर किया होगा और अगर घोड़े या ऊंट पर किया हो ऑलमोस्ट 17 या 18 दिन लगे होंगे इब्राहिम अल सलाम ने इन्हें फरान के डेजर्ट के बिल्कुल एक खाली और वीरान जगह पर लाकर छोड़ दिया और वहां से वापस
Speaker A
फलस्तीन की तरफ रवाना हुए उनकी बीवी हाजर ने दो बार पूछा क्या आप कैसे हमें ऐसे अकेला छोड़कर जा सकते हैं जिस पर इब्राहीम अल सलाम ने कोई जवाब नहीं दिया तीसरी बार उन्होंने पूछा कि क्या यह सब कुछ अल्लाह
Speaker A
की तरफ से है तो इब्राहीम अल सलाम ने मुड़कर देखा और कहा हां और फिर वहां से चले गए अब इसके कुछ ही अरसे बाद हाजर और इस्माइल के पास पीने का पानी बिल्कुल खत्म हो गया और इस्माइल अल सलाम जो बिल्कुल
Speaker A
छोटे से बच्चे थे उनकी हालत प्यास से बहुत ही खराब हो गई जिसे देखकर उनकी मां हाजर मदद ढूंढने के लिए सबसे करीब वाली पहाड़ी सफा पर चढ़ी लेकिन वहां उन्हें दूर-दूर तक कोई नहीं दिखा फिर वह वहां से वापस नीचे
Speaker A
आई और दूसरी पहाड़ी मरवा पर चढ़ी और इस तरह उन्होंने सफा और मरवा के दरमियान सात चक्कर लगाए अल्लाह को इस मां की अपने बेटे को बचाने की कोशिश इतनी अच्छी लगी कि इस वाक से 4000 साल बाद आज भी पूरी दुनिया से
Speaker A
लाखों लोग इसी तरह सफा और मरवा के दरमियान सात चक्कर लगाते हैं सात चक्कर के बाद हाजर ने देखा कि जिस जगह पर इस्माइल अल सलाम थे वहीं पर जमीन के अंदर से पानी निकलना शुरू हो गया तो उन्होंने फुल स्पीड
Speaker A
भागकर इस पानी को जमा करने की कोशिश की लेकिन यह पानी इतना तेजी से निकल रहा था कि वह बार-बार इसे जम जम कहने लगे ली मी स्टॉप स्टॉप जिसका मतलब है रुक जाओ स्टॉप यहां तक तो स्टोरी का सबको पता है लेकिन
Speaker A
इसके बाद हाजर और इस्माइल इसी इलाके मक्का में ही रहे एक दिन यमन से एक कबीला बन जुर हम शाम की तरफ जा रहा यमन और शाम के दरमियान जो नॉर्मल रास्ता था उसके दरमियान कोई भी मक्का वाले इलाके में नहीं ठहरता
Speaker A
था लेकिन इस बार जब यह कबीला मक्का के पास से गुजर रहा था तो उन्होंने आसमान में कुछ ऐसे परिंदे देखे जो हमेशा डेजर्ट के पानी के ऊपर ही पाए जाते थे और इन परिंदों को फॉलो करते-करते यह लोग इस्माइल और हाजर तक
Speaker A
पहुंचे और यह सब पहली बार इस इलाके में इतना पानी देखकर बिल्कुल हैरान हो गए और इस तरह यह यमनी कबीला पहली बार मक्का में सेटल हो गए और आहिस्ता आहिस्ता बाकी लोग भी इसी इलाके में जमा होने लगे और कुछ ही
Speaker A
अरसे में मक्का शाम और यमन के दरमियान एक बहुत ही इंपॉर्टेंट सिटी बन गई मीन वाइल इब्राहिम अल सलाम फलस्तीन से मक्का की तरफ आया जाया करते थे लेकिन जैसे ही इस्माइल अल सलाम भागदौड़ के काबिल हुए तो इब्राहिम
Speaker A
अल सलाम ने एक रात ख्वाब देखा जिसमें उन्हें अपने इकलौते बेटे इस्माइल अल सलाम को जिबाह करने का हुकम दिया गया अब यहां पर फिर थोड़ी कंफ्यूजन है क्योंकि यहूदियों की किताब तौरा में लिखा है कि अल्लाह ने इब्राहिम अल सलाम को उसके दूसरे
Speaker A
बेटे इसहाक अल सलाम को जिबाह करने का हुक्म दिया था नॉट इस्माइल और कुरान में भी सिर्फ बेटी को जिबाह करने का हुकम है किसी का नाम नहीं लिया गया जिसकी वजह से मुसलमानों के भी कुछ पुराने स्कॉलर्स
Speaker A
इसहाक अल सलाम को ही जिबाह होने वाला बच्चा समझते थे लेकिन ज्यादातर मुसलमान आज इस्माइल अल सलाम को ही जबी समझते हैं क्योंकि कुरान में इब्राहिम अल सलाम की स्टोरी का सीक्वेंस इस तरह है कि पहले इस्माइल पैदा हुए फिर जिबा होने का वाकया
Speaker A
है और फिर इसहाक पैदा हुए इसके अलावा तौरा में आज भी ये क्लीयरली लिखा हुआ है कि अल्लाह ने इब्राहिम अल सलाम को अपने अपने इकलौते बेटे वन एंड ओनली सन को जिबाह करने का हुक्म दिया और सिर्फ इस्माइल अल सलाम
Speaker A
ही 14 साल तक इब्राहिम अल सलाम के इकलौते बेटे थे व्हिच मींस ज्यादा चांसेस इस्माइल अल सलाम के हैं इब्राहिम अल सलाम एक दिन फलस्तीन से मक्का की तरफ गए और अपने इकलौते बेटे जिसे उन्होंने बहुत दुआओं से
Speaker A
हासिल किया था उन्हें अल्लाह के हुकम के बारे में बताया जिस पर इस्माइल अल सलाम ने कहा कि आप बिल्कुल वैसा ही करें जैसा आपको हुकुम दिया गया है तो इब्राहिम अल सलाम ने मक्का में अपने बेटे को जिबाह करने के लिए
Speaker A
रवाना किया तो रास्ते में उन्हें शैतान ने रोकने की भी कोशिश की लेकिन उन्होंने शैतान को कंकरिया मार के वहां से भगा दिया इब्राहिम अल सलाम के शैतान को मारने का यह एक्ट भी हर साल पूरी दुनिया के मुसलमान हज
Speaker A
में कॉपी करते हैं और जैसे ही इब्राहीम अल सलाम ने इस्माइल अल सलाम को जिबाह करने के लिए लिटाया तो अल्लाह ने उन्हें उस एग्जैक्ट टाइम पर रोक दिए और उन्हें इस्माइल की बजाय एक मेंडा जबाह करने को
Speaker A
कहा और साथ यह भी कहा कि तुम्हारी इस कुर्बानी को हम आने वाले सारी नेशंस कायम रखें और फिर अल्लाह ने हुकम दिया कि इसे खुद भी खाओ और बाकियों को भी खिलाओ और इब्राहिम अल सलाम की इसी एक्ट पिछले 1400
Speaker A
साल से मुसलमान बिल्कुल इसी तरह कॉपी करते हैं मतलब हर कुर्बानी के तीन हिस्से किए जाते हैं एक फैमिली के लिए दूसरा रिश्तेदारों के लिए और तीसरा गरीबों के लिए यह एक इवेंट जो आज से 4000 साल पहले
Speaker A
एक बाप और बेटे के दरमियान एक छोटे से गांव मक्का में पेश आया था आज हर ईद में उसी दिन को सेलिब्रेट करने के लिए पूरी दुनिया में बिलियंस ऑफ डॉलर्स की इकॉनमी स्टिम्युलेट होती है मतलब पाकिस्तान में
Speaker A
तीन बिलियन इंडिया में चार बिलियन बांग्लादेश में पांच बिलियन और दुनिया के सबसे बड़े इस्लामिक मुल्क इंडोनेशिया में 14 बिलियन इसके अलावा सऊदी अरेबिया में 6 बिलियन और तुर्की में दो बिलियन और इसी तरह दुनिया के बाकी कंट्रीज में बिलियंस
Speaker A
ऑफ डॉलर्स का बिजनेस होता है कुर्बानी के इस वाकए के बहुत साल बाद इब्राहिम अल सलाम एक बार फिर फलस्तीन से मक्का की तरफ आए और इस बार उन्होंने अपने बेटे इस्माइल के साथ इस सिटी में अल्लाह की इबादत के लिए एक घर
Speaker A
बनाया काबा जिसके बाद इब्राहिम अल सलाम वापस फलस्तीन चले गए और कुछ अर्से बाद वहीं पर फौत हो गए इस्माइल अल सलाम के बाद पूरा अरब इसी तरह हज करने के लिए हर साल मक्का आया करता और सफा और मरवा पहाड़ी पर
Speaker A
भी जाया करता था और अरब में लोग कुर्बानी भी किया करते थे लेकिन अब 2500 साल गुजरने के बाद यहां के लोग बिल्कुल भूल चुके थे कि व यह सब कुछ आखिर क्यों करते हैं और उन्होंने काबा को दोबारा उसी तरह बुतों से
Speaker A
भर दिया था जिस तरह इब्राहिम अल सलाम के सिटी ऊर में भरे हुए थे तो अल्लाह ने दोबारा इन्हीं में से एक नबी चुना जिन्होंने बिल्कुल इब्राहिम अल सलाम की तरह काबा के अंदर सारे बुद्धों को तोड़ दिया और सारे अरबों को याद दिलाया कि वो
Speaker A
कौन है उनका बाप कौन था और उनका रब कौन था जिसके बाद आहिस्ता आहिस्ता पूरा अरब इब्राहिम अल सलाम के रिलीजन की तरफ वापस आ गया आज से 4 हज साल पहले जिस खाली और वीरान डेजर्ट इस्माइल अल सलाम को छोड़ा
Speaker A
गया था आज वो सिटी ऐसे दिखती है और जब उनके पास पीने को पानी नहीं था आज करोड़ों लोग वही पानी यूज करते हैं और उनकी कुर्बानी का वाकया पूरी दुनिया की इकन को हिला रखता है [संगीत]
Topics:ईदइब्राहिम अल सलाममुस्लिम त्योहारमूर्तिपूजाहाजरइस्माइलमक्काजम जमतौराकुरान











