हज्जाज बिन यूसुफ इस्लाम के इतिहास का सबसे जालिम व्यक्ति था जिसने सहाबा को शहीद किया और मुसलमानों पर अत्याचार किए।
Key Takeaways
- हज्जाज बिन यूसुफ इस्लाम के इतिहास के सबसे क्रूर और जालिम शासकों में से एक थे।
- उनकी क्रूरता ने मुसलमानों के बीच गहरा विभाजन और संघर्ष पैदा किया।
- यजीद की खिलाफत में हज्जाज ने अहम भूमिका निभाई और बगावती ताकतों को दबाया।
- अब्दुल्ला बिन जुबैर की बगावत और खलीफा बनने की कोशिश ने उमैया खिलाफत को कमजोर किया।
- हज्जाज की क्रूरता और अत्याचारों को इतिहास में नकारात्मक रूप में याद किया जाता है।
What the video covers
- हज्जाज बिन यूसुफ इस्लाम की इतिहास में सबसे जालिम और खूनी कातिल के रूप में जाने जाते हैं।
- उन्होंने कई सहाबा और लाखों मुसलमानों को शहीद किया और काबा पर पत्थर बरसाए।
- हज्जाज का जन्म बनू सकीफ कबीले में हुआ जो पहले पैगंबर मुहम्मद ﷺ पर पत्थरबाजी करने वाला कबीला था।
- हज्जाज ने उमैया खिलाफत के तहत यजीद की फौज में शामिल होकर मदीना और मक्का पर हमले किए।
- यजीद के खिलाफ अब्दुल्ला बिन जुबैर ने मक्का में बगावत की और खलीफा बनने की कोशिश की।
- हज्जाज ने उमैया खानदान की तरफ से अब्दुल्ला बिन जुबैर के खिलाफ लड़ाई लड़ी और उनकी खिलाफत खत्म करवाई।
- हज्जाज की क्रूरता और जुल्म ने मुसलमानों में भय और दहशत फैला दी।
- उनके आदेश पर मस्जिद अल-हरम पर तोपों से बमबारी हुई और काबा पर पत्थर बरसाए गए।
- हज्जाज ने कई सहाबा और उनके परिवारों को बेइज्जत और शहीद किया।
- उनकी जिंदगी के आखिरी दिनों में भी उन्होंने मुसलमानों पर अत्याचार जारी रखा।
Chapters
- 00:00हज्जाज बिन यूसुफ का परिचय और इतिहास में उनका स्थान
- 02:39यजीद की खिलाफत और मुसलमानों में असंतोष
- 04:41अब्दुल्ला बिन जुबैर की बगावत और मक्का पर हमला
- 06:47उमैया खानदान का पुनरुत्थान और अब्दुल मलिक का उदय
- 08:48हज्जाज की फौज में शामिल होना और क्रूरता
- 10:46मस्जिद अल-हरम पर हमला और काबा पर पत्थरबाजी
- 16:19अब्दुल्ला बिन जुबैर के खिलाफ लड़ाई और उनकी हार
- 22:10हज्जाज के अत्याचार और उनकी अंतिम दिनचर्या
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Speaker A
हज्जाज बिन यूसुफ इस्लाम की तारीख का सबसे जालिम आदमी था जिसने बड़े-बड़े सहाबा को शहीद किया था। लाखों मुसलमानों की गर्दनें उड़ाई और यहां तक कि काबा पर पत्थर बरसाए थे। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने दो बहुत ही खतरनाक लोगों के बारे में पूरी उम्मत को पहले ही बता दिया था। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया था कि अरब के बनू सकीफ कबीले के दो लोग दुनिया में आएंगे। एक बहुत बड़ा झूठा होगा और दूसरा इस कबीले में एक बहुत खतरनाक कातिल, एक मर्डरर पैदा होगा। तो अब इस झूठे आदमी के बारे में तो डिबेट्स होती रहती हैं, लेकिन इस खूनी कातिल को आज तक पूरी दुनिया अच्छी तरह जानती है। क्योंकि इस खूनी कातिल का नाम था हज्जाज बिन यूसुफ।
Speaker A
हज्जाज कोई हमारी तारीख का अच्छा इंसान नहीं था। हज्जाज के हाथों सैकड़ों ताबेई शहीद हुए। एंड दैट टाइटन हजाज बिन यू। हज्जाज बिन यूसुफ आज से 1400 साल पहले एक बहुत ही खतरनाक दौर में पैदा हुआ था। क्योंकि हज्जाज जब पैदा हुए उस वक्त दुनिया में मुसलमानों का पहला फितना चल रहा था। फतह कर लिया था और हजरत उमर की खिलाफत तक तो हालात बिल्कुल सही जा रहे थे। लेकिन हजरत उमर के बाद मुसलमानों का पहला फितना शुरू हुआ। पहली बार मुसलमानों के ही आपस में बड़ी-बड़ी जंग होने लगी।
Speaker A
आखिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के 30 साल बाद खिलाफत रास्ता दुनिया से खत्म हो गई। और एग्जैक्ट इसी साल जिस साल खिलाफत राश्ता खत्म हुआ, मक्का के पास ही एक इलाके ताइफ में बनू सकीफ कबीले में एक बच्चा पैदा हुआ जिसका नाम रखा गया हज्जाज बिन यूसुफ।
Speaker A
बनू सकीफ ताइफ में रहने वाला एक छोटा सा कबीला था और यह वही कबीला था जिसने सबसे साल पहले आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर ताइफ में पत्थर बरसाए थे और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को इतना जख्मी किया था कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जूते खून से भर गए थे। आगे जाकर ताइफ के इस कबीले ने इस्लाम कबूल कर लिया था।
Speaker A
और हज्जाज बिन यूसुफ भी इसी कबीले के अंदर पैदा हुआ था। तो अब जिस साल हज्जाज पैदा हुआ उसी साल दुनिया में मुसलमानों की एक नई खिलाफत आ चुकी थी, उमैया खिलाफत। हज्जाज उमैया खिलाफत के पहले साल में पैदा हुए और हज्जाज की फैमिली एक बहुत ही गरीब फैमिली थी और हज्जाज का बाप एक आम कुरान का टीचर था और बच्चों को कुरान पढ़ाया करता था।
Speaker A
हज्जाज का बाप चाहता था कि उसका बेटा हज्जाज भी बड़ा होकर कुरान का एक टीचर बने। लेकिन हज्जाज को बचपन से इन चीजों से ज्यादा कुछ और चीजों में इंटरेस्ट था। फौज, ताकत और ताकत। जैसे-जैसे हज्जाज बड़ा हो रहा था, आखिर हज्जाज को यह मौका मिल गया।
Speaker A
क्योंकि जैसे ही हज्जाज की उम्र 20 साल हुई, उमैया खिलाफत के पहले खलीफा हजरत मुआविया इस दुनिया से चले गए। लेकिन हजरत मुआविया ने जाने से पहले ही ऐलान कर दिया था कि उनके बाद मुसलमानों का नया खलीफा कौन होगा। ऑफकोर्स उनका बड़ा बेटा यजीद।
Speaker A
लेकिन इससे पहले खिलाफत में ऐसा कभी नहीं हुआ था। क्योंकि इससे पहले मुसलमान अपना खलीफा खुद चुनते थे। इसीलिए कुछ मुसलमान यजीद के खलीफा बनने से बिल्कुल भी खुश नहीं थे। और इनमें दो सबसे बड़े नाम थे, हजरत इमाम हुसैन रज़ अल्लाह अनहु और अब्दुल्लाह बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु।
Speaker A
इन दोनों सहाबा ने यजीद को खलीफा मानने से क्लियरली इंकार कर दिया था क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं मुसलमानों की ये खिलाफत बादशाहत ना बन जाए। लेकिन जो भी हो, आखिर यजीद बादशाह बन गया और बादशाह बनते ही यजीद ने एक ऐसा काम किया जिसे आज तक मुसलमान नहीं भूल सके। कर्बला, आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की फैमिली अहले बैत को बेरहमी से शहीद किया गया।
Speaker A
कर्बला के टॉपिक पर हम वीडियो जरूर बनाएंगे। लेकिन ये इतना मुश्किल टॉपिक है कि इसे पूरा रिसर्च करने में काफी टाइम लगेगा। तो थोड़ा हौसला रखें। एनीवेज, यजीद का ख्याल था कि कर्बला के बाद अब हालात थोड़े ठीक हो जाएंगे और बगावतें खत्म हो जाएंगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ बल्कि बगावतें और भी ज्यादा बढ़ने लगी।
Speaker A
कर्बला के बाद यजीद के खिलाफ सबसे बड़ी बगावत मक्का और मदीना में हुई। जहां मक्का और मदीना के सहाबा यजीद के खिलाफ खड़े हुए और यजीद को अपना खलीफा मानने से साफ इंकार कर दिया। तो अब इन बगावतों को कंट्रोल में रखने के लिए यजीद को कुछ ऐसे लोगों की जरूरत थी जिनके अंदर रहम नाम की कोई चीज ना हो जो मुसलमानों पर इतना जुल्म करे कि कोई भी मुसलमान यजीद के सामने अपना सर ना उठा सके, चाहे वो कोई सहाबी भी क्यों ना हो।
Speaker A
तो अब यजीद हर जगह ऐसे खतरनाक और जालिम लोगों को ढूंढने लगा और किसी तरह यह खबर ताइफ में बैठे हुए एक जवान 20 साल के लड़के तक पहुंची। हज्जाज बिन यूसुफ। और हज्जाज ने यह सुनते ही अपनी कुरान की टीचिंग छोड़ दी और सीधा जाकर यजीद की फौज में एक आम सोल्जर की तरह शामिल हो गया।
Speaker A
जैसे ही हज्जाज ने यजीद की फौज जॉइन की, यजीद ने अपनी फौज को मदीना पर हमला करने का हुक्म दिया और हज्जाज भी इस फौज में मदीना पर हमले के लिए रवाना हुए। इससे आगे जो हुआ वो हमारी सुन्नी किताबों में डिटेल से लिखा हुआ है। यजीद की फौज ने मदीना में हजारों लोगों को शहीद किया और मदीना के शहर को ही आग लगा दी।
Speaker A
मदीना पर इतना जुल्म करने के बाद अब यजीद को लगा कि फाइनली बगावतें खत्म हो जाएंगी और अब सारे सहाबा मुझे अपना खलीफा मान लेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मक्का में रहने वाला एक सहाबी अब भी यजीद के खिलाफ बहादुरी से खड़ा था। और इस सहाबी का नाम था अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु।
Speaker A
अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु ने मक्का में बाकी सहाबा को भी अपने साथ मिलाया और यजीद के खिलाफ खड़े हुए। इसीलिए यजीद ने अब मदीना से फारग होकर अपनी फौज को मक्का पर भी हमला करने का हुक्म दिया। जिसके बाद यजीद की फौज ने मक्का को हर तरफ से घेर लिया।
Speaker A
लेकिन इससे पहले कि यजीद मक्का में अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु को शहीद करता, अचानक खबर पहुंची कि मक्का से बहुत दूर दमश्क में बादशाह यजीद मर चुका है। इस एक खबर ने पूरी उमैया खिलाफत को हिला कर रख दिया। क्योंकि यजीद बिल्कुल उस टाइम मरा था जब उमैया खानदान के खिलाफ हर तरफ बगावतें हो रही थीं।
Speaker A
और अब यजीद के मरते ही उमैया खिलाफत अपनी सबसे कमजोर हालत तक पहुंची। और हालात और भी ज्यादा तब खराब हुए जब यजीद का बेटा भी बादशाह बनने के कुछ ही दिन बाद फौत हो गया। अब यजीद की नस्ल दुनिया से खत्म हो चुकी थी और उमैया खिलाफत का अब और कोई भी दूसरा खलीफा नहीं था।
Speaker A
इसीलिए यहां पर एक बहुत बड़ा चेंज आया। लोग उमैया खिलाफत को छोड़कर अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु के हाथ पर खिलाफत की बैत करने लगे। यहां से सारे हालात बिल्कुल बदलने लगे। क्योंकि आहिस्ता-आहिस्ता उमैया खानदान की ताकत कम होने लगी और अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु मुसलमानों के असल ताकतवर खलीफा बनने लगे।
Speaker A
इजिप्ट, इराक, ईरान, हिजास, यमन सब ने अब्दुल्लाह बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु को अपना नया खलीफा डिक्लेअर किया। यहां तक कि अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु के नाम से एक नई करेंसी भी शुरू हो चुकी थी। और कुछ देर के लिए वाकई में ऐसा लगने लगा कि उमैया खिलाफत अब खत्म हो जाएगी और एक बार फिर दुनिया में खिलाफत राश्ता जैसी एक नई खिलाफत बनेगी जिसका कैपिटल इस बार मक्का होगा।
Speaker A
मुसलमान खलीफा अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु के हाथ पर बैत करने लगे। लेकिन अब भी उमैया खानदान के कुछ वफादार लोग ऐसे थे जिन्होंने हजरत अब्दुल्ला बिन जुबैर के हाथ पर बैत नहीं की। जिनमें सबसे बड़ा और खतरनाक नाम था हज्जाज बिन यूसुफ।
Speaker A
और हज्जाज इस बात से बिल्कुल भी खुश नहीं था कि अब्दुल्ला बिन जुबैर मुसलमानों के खलीफा बने। और वो बस एक ऐसे मौके की तलाश में था कि किसी तरह उमैया खानदान दोबारा ताकत में आए। और आखिर उसे यह मौका मिल गया।
Speaker A
जैसे ही अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु की ताकत अपनी पीक पर पहुंची, यहां से सब कुछ बदलने लगा। क्योंकि दमशक में उमैया खानदान का एक नया लीडर आया, अब्दुल मलिक बिन मरवान।
Speaker A
अब्दुल मलिक जब बादशाह बना, दुनिया के ज्यादातर मुसलमान अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु के साथ खड़े थे। इसीलिए अब्दुल मलिक को पहले ही दिन से बहुत ही वफादार और खतरनाक जनरल की जरूरत थी जो अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु को हरा सके और आखिर उसे ये जनरल मिल गया।
Speaker A
एक दिन अब्दुल मलिक ने अपनी फौज को हुक्म दिया कि सब एक इलाके से दूसरे इलाके की तरफ जाओ। लेकिन जब उसकी फौज तक यह बात पहुंची, उन्होंने बादशाह अब्दुल मलिक की बात को सीरियस नहीं लिया और आराम से उधर बैठे रहे और आपस में मजाक करते रहे।
Speaker A
अचानक इन फौजियों के पास हज्जाज बिन यूसुफ आया और उनसे कहा, तुम्हें पता नहीं है बादशाह ने हुक्म दिया, उठो और चलो। क्यों यहां पर बैठे हुए हो? उठो और चलो। क्यों यहां बैठे हो? यह सुनकर फौज के लोग हज्जाज पर हंसने लगे।
Speaker A
बल्कि एक ने तो हज्जाज को गाली भी दी। "अबे चल अपना काम कर।" यह सुनकर हज्जाज को गुस्सा आया और वो वहां से चला गया। कुछ देर बाद हज्जाज अपने साथियों के साथ वापस आया और इन सबको कोड़े मारने लगा।
Speaker A
और इन सबके टेंट्स को आग लगाने का हुक्म दिया। फौजी हर तरफ भागने लगे।
Speaker A
बहुत बड़ा चेंज आया। लोग उमैया खिलाफत को छोड़कर [संगीत] अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु के हाथ पर खिलाफत की बैत करने लगे। यहां से सारे हालात बिल्कुल बदलने लगे। क्योंकि आहिस्ताआहिस्ता उमैया खानदान की ताकत कम होने लगी [संगीत] और अब्दुल्ला
Speaker A
बिन जुबैर रज अल्लाह अनो मुसलमानों के असल ताकतवर खलीफा बनने लगे। इजिप्ट, इराक, ईरान, हिजास, यमन सब ने अब्दुल्लाह बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु को अपना नया खलीफा डिक्लेअर किया। यहां तक कि अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु के नाम से एक नई
Speaker A
[संगीत] करेंसी भी शुरू हो चुकी थी। और कुछ देर के लिए वाकई में ऐसा लगने लगा कि उमैया खिलाफत अब खत्म हो जाएगी [संगीत] और एक बार फिर दुनिया में खिलाफत राश्ता जैसी एक नई खिलाफत बनेगी जिसका कैपिटल इस बार मक्का होगा।
Speaker A
मुसलमान खलीफा अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु के हाथ पर [संगीत] बैत करने लगे। लेकिन अब भी उमैया खानदान के कुछ वफादार लोग ऐसे थे जिन्होंने हजरत अब्दुल्ला बिन जुबैर के हाथ पर बैत नहीं की। [संगीत] जिनमें सबसे बड़ा और खतरनाक नाम था हज्जाज
Speaker A
बिन यूसुफ। [संगीत] और हज्जाज इस बात से बिल्कुल भी खुश नहीं था कि अब्दुल्ला बिन जुबैर मुसलमानों के खलीफा बने। [संगीत] और वो बस एक ऐसे मौके की तलाश में था कि किसी तरह उमैया खानदान दोबारा ताकत में आए।
Speaker A
और आखिर उसे यह मौका मिल गया। [संगीत] जैसे ही अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु की ताकत अपनी पीक पर पहुंची, यहां से सब कुछ बदलने लगा। [संगीत] क्योंकि दमशक में उमैया खानदान का एक नया लीडर आया। अब्दुल [संगीत] मलिक बिन मरवान।
Speaker A
अब्दुल मलिक जब बादशाह बना, दुनिया के ज्यादातर मुसलमान अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु के साथ खड़े थे। इसीलिए अब्दुल मलिक को पहले ही दिन से बहुत ही वफादार और खतरनाक जनरल की जरूरत थी जो अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु
Speaker A
को हरा सके और आखिर उसे ये जनरल मिल गया। एक दिन अब्दुल मलिक ने अपनी फौज को हुक्म दिया कि सब एक इलाके से दूसरे इलाके की तरफ जाओ। लेकिन जब उसकी फौज तक यह बात पहुंची, उन्होंने बादशाह अब्दुल मलिक की बात को
Speaker A
सीरियस [संगीत] नहीं लिया और आराम से उधर बैठे रहे और आपस में मजाक करते रहे। [हंसी] अचानक इन फौजियों के पास हज्जाज बिन यूसुफ आया। और उनसे कहा तुम्हें पता नहीं है बादशाह ने हुक्म दिया उठो और चलो।
Speaker A
क्यों यहां पर बैठे हुए हो? उठो और चलो। क्यों यहां बैठे हो? यह सुनकर फौज के लोग हज्जाज पर हंसने लगे। [हंसी] बल्कि एक ने तो हज्जाज को गाली भी दी। अबे चल अपना काम कर। यह सुनकर हज्जाज को
Speaker A
गुस्सा आया और वो वहां से चला गया। कुछ देर बाद हज्जाज अपने साथियों के साथ वापस आया [संगीत] और इन सबको कोड़े मारने लगा। [चीखने की आवाज़] और इन सबके [संगीत] टेंट्स को आग लगाने का हुक्म दिया। फौजी हर तरफ भागने लगे।
Speaker A
और हज्जाज की वजह से बादशाह के हुक्म को मानने लगे। वहां खड़े एक आदमी ने यह सब कुछ देखा और सीधा बादशाह के पास जाकर उसे यह सारी कहानी सुनाई [संगीत] और पहली बार बादशाह अब्दुल मलिक को हज्जाज बिन यूसुफ
Speaker A
के बारे में बताया [संगीत] कि हमारी फौज में एक ऐसा आदमी है जो आपके हुक्म के लिए कुछ भी कर सकता है। अब्दुल मलिक हज्जा से बहुत इंप्रेस हुआ और उसने हज्जाज को अपने पास बुलाया और उसे सिर्फ 30 साल की उम्र में [संगीत] एक आम
Speaker A
सिपाही से फौज का एक बड़ा जनरल बनाया। इसी के साथ सबसे पहले अब्दुल मलिक ने हज्जाज के साथ मिलकर अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़िल्ला अनहो के सबसे बड़े [संगीत] सूबे कूफा पर हमला किया। और इस तरह अब्दुल मलिक और हज्जाज ने
Speaker A
अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु से यह सारा इलाका छीन लिया। [संगीत] और अब्दुल्ला बिन जुबैर का सबसे पावरफुल सूबा कूफा जिसे आज हम इराक और ईरान कहते हैं उनके हाथ से [संगीत] निकल गया। अब उमैया खानदान के पास दोबारा ताकत आ
Speaker A
चुकी थी और उन्होंने यह सारा इलाका भी फतह कर लिया था। लेकिन अब भी बन उमैया के लिए एक बहुत बड़ा मसला था। मक्का में अब्दुल्लाह बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु। इसीलिए बगैर कोई टाइम जाया किए अब्दुल मलिक ने अपने सारे जनरल्स की एक मीटिंग
Speaker A
बुलाई। और इस मीटिंग में अपने सारे जनरल से पूछा कि तुम में से कौन है जो मक्का पर हमला करे?
Speaker A
कौन है जो मक्का पर हमला करेगा? और अब्दुल्ला बिन जुबैर को शहीद करे। लेकिन जब अब्दुल मलिक ने अपने जनरल से पूछा कि मक्का पर कौन हमला करेगा? तो सब डर कर खामोश रहे। क्योंकि कौन इतनी बड़ी बदनामी हमेशा के लिए अपने सर ले। अब्दुल
Speaker A
मलिक ने दोबारा पूछा लेकिन फिर भी सब खामोश [संगीत] रहे। आखिर जब उसने तीसरी बार पूछा तो आखिर अब्दुल मलिक के एक [संगीत] जनरल ने अपना हाथ उठाया और कहा मैं जाकर मक्का पर हमला करूंगा। मैं ही जाऊंगा मक्का [संगीत] को फतह करने।
Speaker A
बल्कि मैंने कल ख्वाब देखा है कि मैंने अब्दुल्ला बिन जुबैर की अपने हाथों से खाल उतारी है। और ऑफ कोर्स अब्दुल मलिक के इस जनरल का नाम था हज्जाज बिन यूसुफ। ये सुनकर अब्दुल मलिक खुश हुआ और हज्जाज
Speaker A
को एक बड़ी फौज देकर मक्का पर हमले के लिए रवाना जो मेरे आका का हुक्म हो मैं वो करूंगा। [संगीत] हज्जाज बिन यूसुफ मक्का की तरफ रवाना हुआ और मक्का को हर तरफ से घेर लिया। लेकिन हज्जाज को अच्छी तरह पता था कि वो
Speaker A
अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु को तलवारों से नहीं हरा सकता। क्योंकि अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु के साथ बड़े-बड़े सहाबा और सहाबा के बेटे खड़े थे। और हज्जाज की फौज में कोई भी सहाबी नहीं था। इसीलिए हज्जाज ने मक्का के
Speaker A
पहाड़ों पर अपने तोपों को खड़ा किया और अपने तोपों से मस्जिद अल हराम के ऊपर बमबारी करना शुरू की। हज्जाज [संगीत] ने मस्जिद-ल हराम पर इतने पत्थर बरसाए कि एक पत्थर तो सीधा जाकर काबा को लगा। और कहा जाता है जैसे ये पत्थर काबा पर
Speaker A
लगा। अचानक आसमान में बादल गरजने लगे। और यह देखकर हज्जाज की फौज डरने लगी। अंबारी रोक दो अल्लाह का अज़ाब आएगा। और अपनी तोपों को रोक दिया कि कहीं उन पर अल्लाह का अज़ाब [संगीत] ना आ जाए। हज्जाज
Speaker A
ने जब अपनी फौज को पीछे हटते हुए देखा तो हज्जाज खुद आगे बढ़ने लगा और अपने हाथों से पत्थर उठाकर तोप के अंदर रखा [संगीत] और दोबारा खुद काबा पर बमबारी करने लगा। और अपनी फौज से कहा कि डरो [संगीत] मत। इन
Speaker A
बादलों के गरजने का मतलब तो यह है कि अल्लाह हमारे साथ है। [रोने की आवाज़][चीखने की आवाज़] यह देखकर उसकी फौज भी आगे बढ़ी और दोबारा काबा पर बमबारी कर। अब काबा पर एक ही वक्त में बहुत सारे गोले
Speaker A
बरस रहे थे। जिसे देखकर मक्का के लोग काबा से दूर भागने लगे। लेकिन इस सारी बमबारी के दौरान सिर्फ एक आदमी काबा के पास खड़े होकर नमाज पढ़ रहा था। खलीफा अब्दुल्लाह बिन जुबैर रज़ अल्लाह। आहिस्ताआहिस्ता हज्जाज की फौज
Speaker A
मक्का के सेंटर की तरफ बढ़ने लगी। और हालात इतने खराब हुए कि सबको [संगीत] समझ आ गई कि अब खलीफा अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनो हज्जाज के हाथों से नहीं बचेंगे। इसीलिए यहां पर बहुत सारे लोग अब्दुल्ला
Speaker A
बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु को छोड़कर चले गए और अब्दुल्ला बिन जुबैर अपने कुछ ही साथियों के साथ आखिर तक खिलाफत को बचाने के लिए खड़े रहे। और आखिर एक दिन अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनो आखिरी बार अपनी मां से मिलने गए। उन्होंने अपनी
Speaker A
मां अस्मा बिनते अबू बकर रज अल्लाह अनो को सलाम किया। और कहा मां मुझे लगता है आज मेरी [संगीत] जिंदगी का आखिरी दिन है। मां मेरी फिक्र [गाना गाने की आवाज़] ना कर। अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु की
Speaker A
मां कोई आम औरत नहीं थी। बल्कि वो इस्लाम के पहले खलीफा अबू बकर रज़ अल्लाह अनू की बड़ी बेटी [संगीत] थी। और उम्मुल मोमिनीन हजरत आयशा रज़ अल्लाह अन्हा की बड़ी बहन थी। तो जब अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनू
Speaker A
ने अपनी मां से कहा कि आज मेरी जिंदगी का आखिरी दिन है तो उनकी मां अबू बकर रज अल्लाह अनहु की बेटी ने उन्हें रोका नहीं बल्कि उन्हें बहुत सारी दुआएं दी और कहा जाओ और आखिरी दम तक लड़ो नहीं
Speaker A
इसी के साथ अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु अपनी तलवार उठाकर हज्जाज बिन यूसुफ से लड़ने के लिए अपने घर से निकले [संगीत] जिसके बाद कुछ ही देर में खलीफा हजरत अब्दुल अब्दुल्लाह बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु को शहीद कर दिया गया। लेकिन ये
Speaker A
हज्जाज इतना जालिम [संगीत] इंसान था कि अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु को शहीद करने के बाद भी उसका गुस्सा ठंडा नहीं हुआ। उसने अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु का सर [संगीत] काट के उनके जिस्म को मक्का के एक खंभे पर
Speaker A
उल्टा लटका दिया। ताकि सारे मुसलमान यह बात अच्छी तरह जान लें कि बनू उमैया खानदान के खिलाफ खड़े [संगीत] होने का अंजाम क्या होता है। लेकिन इससे भी हज्जाज का गुस्सा कम नहीं हुआ। हज्जाज ने हुक्म दिया कि अब्दुल्ला
Speaker A
बिन जुबैर की मां अबू बकर रज़ अल्लाह अनू की बेटी अस्मा [संगीत] को मेरे पास लाया जाए। जब उन तक खबर पहुंची तो हजरत अस्मा ने कहा कि मैं हज्जाज के पास नहीं जाऊंगी। हज्जाज [संगीत] को जब इसका पता चला उसने हुक्म दिया कि
Speaker A
अबू बकर रज़ अल्लाह अनू की बेटी को बालों से घसीट [संगीत] कर मेरे पास लाया जाए। मेरे पास लाओ उसको। लेकिन हजरत अस्मा ने कहा कर लो अगर मुझे बालों से घसीट कर भी [संगीत] लेकर जाओगे तब भी मैं नहीं जाऊंगी। यह सुनकर हज्जाज
Speaker A
को और भी गुस्सा आया और वो खुद चलकर अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु [संगीत] की मां के घर पहुंचा। हज्जाज की एक आदत थी। वो अब्दुल्ला बिन जुबैर रज अल्लाह अनहु का मजाक उड़ाते हुए अब्दुल्ला बिन जुबैर रज अल्लाह अनहु को दो कमरबंद
Speaker A
वाली का बेटा कहा करता था। [संगीत] मतलब दो बेल्ट पहनने वाली का बेटा। तो अब जब हज्जाज अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु की मां के [संगीत] पास आया। तो उनकी मां ने हज्जाज से कहा कि मैंने सुना है
Speaker A
तुम मेरा मजाक उड़ाते हुए मुझे दो कमरबंद वाली कहते हो। [संगीत] तुम्हें पता है लोग मुझे यह नाम क्यों कहते हैं? क्योंकि जब हिजरत के वक्त रसूल अल्लाह सल्लल्लाह अलह वसल्लम और मेरे वालिद अबू बकर रज अल्लाह अनो मक्का वालों से दूर एक गार गारे सूर
Speaker A
में बैठे थे [संगीत] तो मैं उनके लिए रोजाना खाना लेकर जाती थी। उस वक्त एक बेल्ट मैंने अपने कपड़ों के लिए पहनी होती थी और दूसरी से मैंने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का खाना बांधा होता था। ये कितनी फक्र की बात थी। लेकिन
Speaker A
आज हज्जाज इसी बात का मजाक उड़ा रहा था। हज्जादज ने हजरत अस्मा से कहा कि क्या तुमने देखा मैंने तुम्हारे गुमराह बेटे के [संगीत] साथ क्या किया है? तो हजरत अस्मा ने कहा हां तुमने मेरे बेटे की दुनिया
Speaker A
तबाह की है और मेरे बेटे ने तुम्हारी आखिरत [संगीत] और रसूल्लाह सल्लाहु अलह वसल्लम ने हमें पहले ही बताया था कि बनू सकीफ कबीले में एक झूठा आएगा और एक [संगीत] जालिम आदमी आएगा। झूठे को तो हमने देख लिया लेकिन
Speaker A
हज्जाज वो जालिम तू है। और इस तरह बहुत कोशिश के बाद भी आखिर अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनो की खिलाफत खत्म हो गई। [संगीत] और उमैया खानदान दोबारा मुसलमानों के लीडर्स बने। [हंसी] अब चाहिए तो ये था कि
Speaker A
काबा पर बमबारी करने पर खलीफा अब्दुल मलिक हज्जाज को कोई तो सजा देता। लेकिन अब्दुल मलिक ने इसका बिल्कुल उल्टा काम किया। उसने हज्जाज बिन यूसुफ को मक्का मदीना और इस पूरे इलाके का गवर्नर बना दिया। और इस तरह उमैया खानदान का अब्दुल
Speaker A
मलिक पूरी मुसलमान दुनिया का अकेला खलीफा बना। [संगीत] और हज्जाज बिन यूसुफ उसका सबसे खतरनाक गवर्नर। और जो भी बनू उमया खानदान के सामने अपना सर उठाता था हज्जाज उसकी गर्दन उड़ा देता था। अब्दुल्ला बिन जुबैर रज़ अल्लाह अनहु
Speaker A
को शहीद करने के बाद अगले साल जब हज का वक्त आया हर तरफ से मुसलमान हज के लिए मक्का की तरफ आने लगे। जिनमें उस जमाने के सबसे बड़े [संगीत] सहाबी खलीफा उमर रज़ अल्लाह अनहु के बेटे अब्दुल्ला बिन उमर रज़
Speaker A
अल्लाह अनहु भी थे। लेकिन उनके आने से पहले हज्जाज ने मक्का में हर तरफ अपनी फौज खड़ी कर दी थी। और जैसे ही हाजी मक्का पहुंचे और रश बढ़ने लगा। अब्दुल्ला बिन उमर रज़ अल्लाह अनहु भी इसी [संगीत] रश के अंदर ही फंस गए। यह देखकर
Speaker A
हज्जाज का एक फौजी अब्दुल्ला बिन उमर रज़ अल्लाह अनहु के पास पहुंचा और उन्हें एक जहरीला नेजा स्पेयर मार दिया। और अब्दुल्ला बिन उमर रज़ अल्लाह अनहु जमीन पर गिर पड़े। [संगीत] लोग उन्हें उठाकर उनके घर ले गए
Speaker A
और अचानक वहां हज्जाज भी पहुंचे। और अब्दुल्ला बिन उमर से कहा कि ये आपके साथ किसने किया? ये आपके [संगीत] साथ किसने किया? तो अब्दुल्ला बिन उमर ने जवाब दिया कि मेरा कातिल तू है। तुमने ही हज में हथियार लाने की इजाजत दी [संगीत] थी।
Speaker A
और इसके कुछ ही दिन बाद खलीफा उमर रज़ अल्लाह अनहु के बेटे अब्दुल्ला बिन उमर भी हज्जाज बिन यूसुफ की ही वजह से [संगीत] इस दुनिया से चले गए। लेकिन हज्जाज का जुल्म यहां खत्म नहीं होता। बल्कि यह तो सिर्फ शुरुआत है।
Speaker A
अब्दुल्ला बिन उमर रज अल्लाह अनू को शहीद करने के [संगीत] बाद अब भी हालात ठीक नहीं हुए। बल्कि आहिस्ताआहिस्ता कूफा के सूबे में [संगीत] दोबारा उमैया खिलाफत के खिलाफ बगावतें शुरू होने लगी। तो अब इन बगावतों को भी क्रश करने के लिए एक बहुत जालिम
Speaker A
आदमी की जरूरत थी। इसीलिए अब्दुल मलिक ने हज्जाज को मक्का और मदीना के गवर्नरी से हटाकर उसे पूरे कूफा और बसरा का गवर्नर बना दिया। मतलब हज्जाज इस पूरे इलाके का गवर्नर बना। इन शॉर्ट हज्जाज अब खलीफा अब्दुल मलिक के
Speaker A
बाद पूरी दुनिया का दूसरा सबसे ताकतवर इंसान बन चुका था। मतलब एक गरीब टीचर का बच्चा अब दुनिया का दूसरा सबसे पावरफुल आदमी था। हज्जाज के आने से पहले कूफा और बसरा में उमैया खिलाफत के खिलाफ हर तरफ
Speaker A
बगावतें हो रही थी। लेकिन जैसे ही हज्जाज कूफा की मस्जिद पहुंचा, उसने वहां सारे मुसलमानों को जमा होने का हुक्म दिया और फिर सबके सामने आकर अपनी स्पीच शुरू की। अगर अब भी किसी को शक है कि हज्जाज एक
Speaker A
जालिम आदमी था या नहीं तो इस स्पीच के बाद आप समझ [संगीत] जाएंगे क्योंकि मुझे लगता है यह इस्लाम की तारीख की सबसे खौफनाक स्पीच है। हज्जाज सबके सामने खड़ा हुआ और अपनी स्पीच शुरू की। ए इराक के लोगों मुझे
Speaker A
तुम में से बहुत सों के सर ऐसे नजर आ रहे हैं जो बहुत जल्द कटने वाले हैं। तुम में से बहुत से लोगों की पगड़ियां और दाढ़ियां खून से लाल होने वाली है। इराक के लोगों याद रखो मुझे इस दुनिया में
Speaker A
कोई भी नहीं डरा सकता। मुझे यहां बनो उमैया खानदान ने बहुत सोच समझ कर भेजा है क्योंकि मैं उनका सबसे खतरनाक हथियार हूं। [संगीत] सब कान खोल कर सुन लो। मैं तुम्हारे जिस्मों से खालों को ऐसे उतारूंगा जैसे किसी पेड़ से छाल उतारी जाती है। तुम
Speaker A
में से एक-एक को कांटों की तरह काट डालूंगा। मैं अपनी तलवार से तुम्हारे बच्चों को यतीम और तुम्हारी बीवियों को बेवा बनाऊंगा। और खुदा की कसम जब मैं कोई वादा करता हूं उसे मैं जरूर पूरा करता हूं। और मैं कसम
Speaker A
खाता हूं अगर तीन दिन के अंदर-अंदर तुम लोग ठीक ना हुए तो मैं तुम में से एक-एक की गर्दन उड़ा दूंगा और उसकी सारी जायदाद छीन लूंगा। इसके बाद हज्जाज ने खलीफा अब्दुल मलिक का लेटर खोला और सबके सामने पढ़ने लगा। लेटर
Speaker A
का पहला वर्ड था अस्सलाम वालेकुम। जब हज्जाज ने इसे पढ़ा और कहा अस्सलाम वालेकुम। अस्सलाम वालेकुम। लोग बिल्कुल खामोशी से उसे देख रहे थे। तो हज्जाज ने ऊपर देखा और कहा अमीरुल मोमिनीन तुम्हें सलाम कह रहे हैं और तुम लोग चुप
Speaker A
करके बैठे हो। काटूं तुम सबकी गर्दनें। काटूं तुम सबकी गर्दनें। ये देखकर सब चीख-चीख कर कहने लगे इस तरह इस जालिम हज्जाज ने अपनी गवर्नरी शुरू की और एक के बाद एक बगावत को बहुत ही जुल्म से क्रश करने लगा [चीखने की आवाज़]
Speaker A
लेकिन जैसे ही हज्जाज गवर्नर बने कूफा में हज्जाज के खिलाफ एक और बड़ी बगावत हुई जिसमें एक बार फिर बहुत सारे सहाबा शामिल थे [संगीत] जिनमें सबसे बड़े सहाबी थे रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलह वसल्लम की खिदमत करने वाले अनस बिन मालिक र अल्लाह
Speaker A
अन [संगीत] ये बगावत एक बहुत बड़ी बगावत थी। लेकिन लोग चाहे जितनी भी कोशिश कर ले एक जालिम और खूनी जनरल को उसकी कुर्सी से हटाना कोई आसान काम नहीं होता। हज्जाज ने यह बगावत भी बुरी तरह क्रश कर
Speaker A
दी। और यह बगावत खत्म करने के बाद हज्जाज ने अनस बिन मालिक रज़ अल्लाह अनहो को अपने पास बुलाया और उनकी सख्त बेइज्जती की। इस बुक से मैं आपको एग्जैक्ट लाइंस पढ़ के सुनाता हूं। और फिर आप खुद फैसला करें कि
Speaker A
हज्जाज कैसा आदमी था। हज्जाज ने अनस बिन मालिक रज़ अल्लाह अनो से कहा ऐ गंदे आदमी हर फितने में तू सबसे आगे-आगे होता है। कभी आशस के साथ खड़ा होता है। कभी अब्दुल्ला बिन जुबैर के साथ खड़ा होता है
Speaker A
और कभी अली के साथ खड़ा होता है। क्योंकि हज्जाज रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के खानदान अहले बैत से बहुत नफरत करता था। और स्पेशली हजरत अली, हसन और हुसैन रज़ अल्लाह अनो से। अनस रज़ अल्लाह अनहु ने एक
Speaker A
नरम लहजे में हज्जाद से पूछा, "यह तुम [संगीत] किससे ऐसे बातें कर रहे हो?" क्योंकि हजरत अनस इस वक्त दुनिया के आखिरी सहाबा में से एक [संगीत] थे। और बाकी सारे सहाबा फौत हो चुके थे। इसीलिए हजरत अनस ने कहा कि तुम किससे ऐसे
Speaker A
बातें कर रहे हो? लेकिन हज्जाज ने पता है इसका क्या जवाब दिया? हज्जा ने हजरत अनस बिन मालिक रज़ अल्लाह अनहु से कहा, ओ बहरे, मेरी आवाज नहीं आ रही क्या? मैं तुमसे ही बात कर रहा हूं। बहरे, सुनाई नहीं दे रहा।
Speaker A
अगेन, यह सब सुन्नी किताबें हैं। और इन सारी किताबों का रेफरेंस डिस्क्रिप्शन में लिखा हुआ है। इसके बाद हज्जाज ने सारे बगावत करने वालों को अपने सामने जमा किया और सबको कहा कि मैं तुम लोगों को सिर्फ तब
Speaker A
ही माफ करूंगा। जब तुम सबके सामने आकर कहोगे कि मैं मुसलमान नहीं बल्कि एक काफिर हूं। तुम सब काफिर हो। काफिर हज्जाज बिन यूसुफ [संगीत] ऐसा इसलिए कर रहा था कि वो मुसलमानों की इस बगावत को एक गैर मुस्लिम किसी और कंट्री [संगीत] की
Speaker A
साजिश कहकर लोगों को इस बगावत से दूर कर देगा। हालांकि ये कोई साजिश नहीं थी बल्कि मुसलमानों का ही गुस्सा था। बागियों ने एक लंबी लाइन बनाई और एक-एक करके हज्जाज के सामने पेश होने लगे। और हर एक हज्जाज के सामने आकर कहने लगा कि
Speaker A
मैं काफिर नहीं मुसलमान हूं। मैं तो एक मुसलमान हूं और हज्जा हर एक की गर्दन काटने लगा। इस तरह हज्जाज ने बहुत सारे मुसलमानों को शहीद किया। लेकिन कुछ दरमियान में ऐसे भी थे जिन्होंने हज्जा के डर से अपने आप को काफिर कहा।
Speaker A
मैं काफिर हूं। और एक तो हज्जाज से इतना डरता था कि उसने हज्जाज के सामने खड़े होकर कहा कि मैं कोई आम काफिर नहीं। मैं फिरौन से भी बड़ा मैं तो फिरौन से भी बड़ा काफिर हूं। [हंसी] आखिर हज्जाज के इन सारे जुल्मों की वजह से
Speaker A
आहिस्ता-आहिस्ता बगावतें खत्म होने लगी और मुसलमान इस खिलाफत में डर और खौफ के साथ अपनी जिंदगियां गुजारने लगे। तो अब जब बगावतें खत्म हो चुकी थी तो एक बार फिर मुसलमानों की एंपायर का साइज और भी बढ़ने लगा। और इसी दौर में हज्जाज के एक भतीजे
Speaker A
ने पहली बार हिंदुस्तान पर हमला किया। और पहली बार सिंध को फतह किया जिसका नाम था मोहम्मद बिन कासिम। [संगीत] और इसी दौर में मुसलमानों ने पहली बार यूरोप पर हमला करके स्पेन को भी फतह किया। हज्जाज बिन यूसुफ की पूरी जिंदगी में एक
Speaker A
ऐसा अच्छा काम था जिसकी वजह से कुछ लोग उसे एक हीरो समझते हैं। और वो था कुरान के अरबी राइटिंग के ऊपर एराब लगाना। मतलब ज़बर ज़ेर पेश [संगीत] वगैरह। जिसे आज तक लोग पढ़ते हैं। लेकिन कुछ स्कॉलर्स ऐसे भी हैं
Speaker A
जो कहते हैं यह काम हज्जाज ने नहीं बल्कि इससे पहले ही एक मुसलमान स्कॉलर ने किया था। यहां पर इमाम ज़हबी कहते हैं कि अगर हज्जाज ने यह काम किया भी हो तब भी कयामत के दिन हज्जाज का यह अच्छा काम उसके
Speaker A
गुनाहों के समंदर में डूब जाएगा। आखिर 22 साल तक मुसलमानों पर जुल्म करने के बाद हज्जाज की जिंदगी के आखिरी दिन करीब आए। लेकिन जाने से पहले हज्जाज ने एक और बहुत बड़े नेक मुसलमान को बुरी तरह शहीद किया था।
Speaker A
सईद बिन जुबैर और कहा जाता है इस नेक मुसलमान ने मरने से पहले हज्जाज को आखिरी बद्दुआ यह दी थी कि अल्लाह करे मैं हज्जाज के हाथों से मरने वाला दुनिया का आखिरी मुसलमान बनूं। और एग्जैक्टली ऐसा ही हुआ।
Speaker A
इसके सिर्फ एक महीने बाद हज्जाज एक बहुत खतरनाक बीमारी स्टमक कैंसर से बहुत ही दर्दनाक मौत मरा। [चीखने की आवाज़][कराहने की आवाज़] मरने से पहले हज्जाज ने एक शेर पढ़ा था जिसका मतलब कुछ यूं है। या अल्लाह मुझे पता है कि पूरी [संगीत]
Speaker A
दुनिया के मुसलमान यह चाहते हैं कि मैं मरने के बाद जहन्नुम की आग में हमेशा हमेशा के लिए जलता रहूं। लेकिन इन्हें तेरी रहमत का क्या पता कि तू कितना माफ करने वाला है। मतलब इतने जुल्म करने के
Speaker A
बाद भी, [हंसी] बड़े-बड़े सहाबा को शहीद करने के बाद भी, लाखों बेगुनाह मुसलमानों को मारने के बाद भी और काबा पर बमबारी करने के बाद भी हज्जाज अब भी जन्नत जाने का सपना देख रहा था। लेकिन जब हसन बसरी तक यह बात पहुंची
Speaker A
तो उन्होंने कहा वाह हज्जा चाहता है कि वो जिंदगी भी अपनी मर्जी से गुजारे और आखिरत भी अपनी मर्जी से गुजारे। खैर जितना हज्जा से दुनिया के मुसलमान नफरत करते थे उतना ही हज्जाज से बनू उमैया के शहजादे मोहब्बत
Speaker A
करते थे। हज्जाज की बेटियों की शादी उमैया खानदान के शहजादों से हुई थी। बनू उमैया के बादशाह अपने बेटों के नाम हज्जाज रखते थे और उन्होंने मरने तक हज्जाज को अपना सबसे बड़ा गवर्नर बनाया था। लेकिन पूरे बन उमैया खानदान में एक ऐसा
Speaker A
आदमी था जो इस हज्जाज बिन यूसुफ से नफरत करता था। और हज्जाज के इन जुल्मों के बारे में हमेशा बोला करते थे। और ऑफकोर्स वो कोई और नहीं। वो थे इस्लाम की तारीख के पहले मुजद्दिद। इस्लाम के फ्यूचर खलीफा उमर बिन अब्दुल
Speaker A
अजीज। सब्सक्राइब
Topics:हज्जाज बिन यूसुफइस्लाम इतिहासउमैया खिलाफतयजीदअब्दुल्ला बिन जुबैरकर्बलामक्का मदीनासहाबामुसलमानों पर अत्याचारखलीफा











