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बोलने की ऐसी कला सीखो कि कोई भी आकर्षित हो जाए | Osho Hindi Speech | Life Changing Motivation

बोलने की कला नहीं, मौन से जन्म लेने वाले शब्दों की शक्ति समझें और प्रभावशाली बनें।

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Key Takeaways

  • सच्चा आकर्षण भीतर की शांति और ऊर्जा से आता है, न कि शब्दों की संख्या या स्वर से।
  • बोलने से पहले स्वयं को समझना और बदलना आवश्यक है।
  • सुनना और समझना बोलने से अधिक महत्वपूर्ण है।
  • अभिनय और बनावट से बचें, क्योंकि वे अस्थायी होते हैं।
  • मौन को अपनाकर ही प्रभावशाली और जागृत वाणी संभव है।

What the video covers

  • आकर्षण शब्दों में नहीं, बल्कि चेतना में होता है जहां से शब्द जन्म लेते हैं।
  • मौन को समझे बिना बोलने की कला संभव नहीं है।
  • सुनना सीखना जरूरी है, क्योंकि बिना समझे बोलना केवल शोर है।
  • शब्दों की शक्ति उनकी ऊर्जा और भीतर की शांति से आती है।
  • बोलना केवल जीभ का काम नहीं, पूरे व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति है।
  • मीठा बोलने का अभिनय अस्थायी होता है, असली परिवर्तन स्वीकृति से आता है।
  • शांत मन से निकले शब्दों में अद्भुत आकर्षण होता है जो लोगों को बिना मजबूर किए आकर्षित करता है।
  • ज्ञान का प्रदर्शन न करें, सरलता और सच्चाई में ही प्रभाव है।
  • सुनने की कला और शब्दों की गति भी प्रभावशाली बोलने में महत्वपूर्ण हैं।
  • मौन सबसे बड़ी शक्ति है, जो व्यक्ति मौन में सहज होता है वही सही समय पर सही शब्द बोल पाता है।

Answers

Questions about this video

बोलने की कला सीखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्या है?

बोलने की कला सीखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है मौन को समझना और अपने भीतर की शांति को विकसित करना। बिना शांति के प्रभावशाली शब्द संभव नहीं हैं।

क्या अधिक बोलना प्रभावशाली होने की निशानी है?

नहीं, अधिक बोलना प्रभावशाली होने की निशानी नहीं है। असली प्रभावशाली व्यक्ति कम बोलता है लेकिन उसके शब्दों में ऊर्जा और शांति होती है जो दूसरों को आकर्षित करती है।

कैसे पता चले कि हमारा बोलना प्रभावशाली है?

जब आपके शब्द सुनने वालों के हृदय को छूते हैं, उन्हें शांति और प्रेम का अनुभव होता है, और वे आपकी उपस्थिति को महसूस करते हैं, तब आपका बोलना प्रभावशाली माना जाता है।

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00:00
Speaker A
क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग बिना ऊंची आवाज, बिना तर्कों का ढेर लगाए, बिना किसी विशेष प्रयास के भी सबका ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं। और कुछ लोग घंटों बोलते रहते हैं। फिर भी कोई उन्हें याद नहीं रखता। असल में आकर्षण शब्दों में नहीं होता। आकर्षण उस चेतना में होता है, जहां से शब्द जन्म लेते हैं। आज मैं तुमसे बोलने की कला की नहीं बल्कि मौन से जन्म लेने वाले शब्दों की बात करूंगा। क्योंकि जो व्यक्ति मौन को नहीं जानता, वह बोलने की कला कभी नहीं जान सकता। मनुष्य बोलना तो बचपन से सीख जाता है, लेकिन सुनना कभी नहीं सीखता। और जो सुनना नहीं जानता, उसका बोलना भी केवल शोर बन जाता है। दुनिया में सबसे बड़ी समस्या यह नहीं कि लोग गलत बोलते हैं, बल्कि यह है कि लोग बिना समझे बोलते हैं। ध्यान से देखना। जब भी तुम किसी से बात करते हो, तुम्हारा उद्देश्य क्या होता है?
00:21
Speaker A
क्या तुम सामने वाले को समझना चाहते हो? या केवल उसे प्रभावित करना चाहते हो? यदि तुम्हारा उद्देश्य केवल प्रभावित करना है, तो तुम्हारे शब्दों में बनावट होगी और बनावट कभी भी हृदय तक नहीं पहुंचती। सच्चे शब्द वही हैं जो भीतर की शांति से निकलते हैं। ऐसे शब्दों में कोई दिखावा नहीं होता। लेकिन उनमें इतनी शक्ति होती है कि वे सीधे आत्मा को छू लेते हैं। तुमने देखा होगा कुछ लोगों के पास बहुत ज्ञान होता है, लेकिन लोग उनसे दूर भागते हैं और कुछ लोग बहुत कम बोलते हैं, फिर भी लोग उनके पास बैठना पसंद करते हैं। ऐसा क्यों? क्योंकि आकर्षण जानकारी से नहीं आता। ऊर्जा से आता है। तुम्हारी ऊर्जा ही तुम्हारे शब्दों का वास्तविक अर्थ तय करती है। यदि भीतर क्रोध है तो प्रेम के शब्द भी कठोर लगेंगे। यदि भीतर शांति है तो साधारण शब्द भी अमृत बन जाएंगे। याद रखना, बोलना केवल जीभ का काम नहीं है। बोलना तुम्हारे पूरे व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति है। तुम्हारी आंखें, तुम्हारा चेहरा, तुम्हारी मुस्कान, तुम्हारा मौन सब मिलकर बोलते हैं। इसलिए यदि तुम चाहते हो कि लोग तुम्हारी ओर आकर्षित हों, तो शब्द बदलने से पहले स्वयं को बदलो। हर सुबह कुछ देर मौन में बैठो। अपने विचारों को आते जाते देखो। धीरे-धीरे तुम्हारा मन शांत होने लगेगा।
00:46
Speaker A
और जिस दिन तुम्हारा मन शांत हो गया, उसी दिन तुम्हारे शब्दों में एक नई सुगंध आ जाएगी। फिर तुम्हें लोगों को अपनी ओर खींचने की कोशिश नहीं करनी पड़ेगी। लोग स्वयं तुम्हारी ओर आने लगेंगे क्योंकि इस संसार में हर व्यक्ति शांति की तलाश में है। जिसे कहीं भी शांति की झलक मिलती है, वह उसकी ओर खींचा चला जाता है। लेकिन एक बात और, कभी भी मीठा बोलने का अभिनय मत करना। अभिनय कुछ समय तक चलता है, फिर टूट जाता है। यदि भीतर कटुता है तो पहले उसे समझो। उसे दबाओ मत। उसे देखो। उसे स्वीकार करो। स्वीकृति से ही परिवर्तन जन्म लेता है। जिस दिन तुम्हारे भीतर प्रेम होगा, उस दिन तुम्हें प्रेम से बोलना नहीं पड़ेगा। प्रेम स्वयं तुम्हारी आवाज बन जाएगा। और तब तुम्हारे शब्दों में ऐसा आकर्षण होगा कि लोग केवल तुम्हारी बातें ही नहीं सुनेंगे, बल्कि तुम्हारी उपस्थिति को भी महसूस करेंगे। यही है बोलने की असली कला। यह भाषा की कला नहीं, चेतना की कला है। और जिसने इस कला को जान लिया, उसे किसी को प्रभावित करने की आवश्यकता नहीं रहती। उसका होना ही सबसे बड़ा संदेश बन जाता है। और जब तुम्हारा होना ही संदेश बन जाता है, तब तुम्हें शब्दों की भी उतनी आवश्यकता नहीं रहती। तब तुम्हारे मौन में भी लोग उत्तर खोजने लगते हैं। मनुष्य हमेशा सोचता है कि प्रभावशाली बनने के लिए उसे अधिक बोलना होगा। लेकिन मैंने जीवन में ठीक इसका उल्टा देखा है। जो जितना अधिक स्वयं को सिद्ध करना चाहता है, वह उतना ही भीतर से असुरक्षित होता है। और जो भीतर से निश्चिंत है, उसे किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती। तुम जब किसी से बात करो तो पहले अपने भीतर झांकना। क्या तुम उस व्यक्ति को बदलना चाहते हो या उसे समझना चाहते हो? क्योंकि बदलने की इच्छा अहंकार से आती है और समझने की इच्छा प्रेम से। याद रखना, दुनिया में सबसे मधुर आवाज उस व्यक्ति की होती है जिसके भीतर कोई संघर्ष नहीं बचा। उसकी वाणी में कोई जल्दबाजी नहीं होती, कोई भय नहीं होता, कोई प्रतियोगिता नहीं होती। वह केवल सत्य को बहने देता है। लोग पूछते हैं कि ऐसी आवाज कैसे मिले? मैं कहता हूं आवाज बदलने की कोशिश मत करो। जीवन बदलो। क्योंकि आवाज जीवन का दर्पण है। तुमने देखा होगा जब तुम क्रोधित होते हो तो वही शब्द तलवार बन जाते हैं। और जब तुम प्रेम में होते हो तो वही शब्द फूल बन जाते हैं। शब्द नहीं बदलते। बोलने वाला बदल जाता है। इसलिए बोलने की कला का पहला नियम है, अपने भीतर के शोर को समाप्त करो। मन के भीतर हजारों आवाजें चल रही हैं। कोई कहती है कि सामने वाले को हराना है। कोई कहती है कि अपनी छवि बचानी है। कोई कहती है कि लोग तुम्हारी प्रशंसा करें। जब तक यह आवाजें चलती रहेंगी, तब तक तुम्हारे शब्द कभी स्वतंत्र नहीं होंगे। ध्यान मन को शांत करता है और शांत मन से निकले शब्दों में अद्भुत आकर्षण होता है। ऐसे शब्द किसी को मजबूर नहीं करते, लेकिन फिर भी लोग उन्हें सुनना चाहते हैं। दूसरी बात, बोलते समय कभी भी अपने ज्ञान का प्रदर्शन मत करना। ज्ञान का प्रदर्शन अज्ञान का सबसे बड़ा प्रमाण है। जो वास्तव में जानता है, वह बहुत सरल होकर बोलता है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] वह कठिन शब्दों के पीछे नहीं छिपता। सत्य हमेशा सरल होता है। यदि तुम्हारे शब्द इतने कठिन हैं कि सामने वाला समझ ही ना सके, तो तुम्हारा ज्ञान किसी काम का नहीं। महान व्यक्ति वही है जो गहरी से गहरी बात को भी इतने सरल ढंग से कह दे कि एक बच्चा भी उसे महसूस कर सके। और सुनो, जब सामने वाला बोल रहा हो तो बीच में मत काटना। उसे पूरा होने दो। अधिकांश लोग उत्तर देने के लिए सुनते हैं, समझने के लिए नहीं, इसलिए उनके संबंध टूट जाते हैं। यदि तुम सचमुच किसी को आकर्षित करना चाहते हो तो पहले उसे यह अनुभव कराओ कि उसकी बात महत्वपूर्ण है। जब कोई व्यक्ति तुम्हारे सामने स्वयं को स्वीकार किया हुआ महसूस करता है, तो उसके हृदय का द्वार अपने आप खुल जाता है। यही कारण है कि प्रेम में शब्द कम और अनुभव अधिक होता है। एक और रहस्य समझ लो। तुम्हारे शब्दों की गति भी बहुत महत्व रखती है। बहुत तेज बोलोगे तो बेचैनी प्रकट होगी। बहुत धीमे बोलोगे तो कृत्रिमता आ सकती है। लेकिन जब तुम जागरूक होकर बोलते हो तो तुम्हारे शब्दों की अपनी एक लय बन जाती है। वही लय लोगों को तुम्हारे साथ बांध लेती है। याद रखना, प्रभावशाली बोलना कोई तकनीक नहीं है। यह तुम्हारे भीतर की जागरूकता का परिणाम है। जिस दिन तुमने अपने भीतर प्रेम, धैर्य और मौन को स्थान दे दिया, उसी दिन तुम्हारी वाणी साधारण नहीं रहेगी। लोग तुम्हारे शब्दों को केवल सुनेंगे नहीं, उन्हें अपने जीवन में महसूस करेंगे और तब तुम्हें लोगों को आकर्षित करने का प्रयास नहीं करना पड़ेगा। तुम्हारी उपस्थिति, तुम्हारी मुस्कान और तुम्हारे साधारण शब्द भी लोगों के हृदय में लंबे समय तक गूंजते रहेंगे।
01:05
Speaker A
यहीं से एक नई यात्रा शुरू होती है। और जब यह नई यात्रा शुरू होती है, तब तुम्हें पहली बार यह एहसास होता है कि जीवन का सबसे बड़ा आकर्षण सुंदर चेहरा नहीं, ऊंची आवाज नहीं, बड़ा पद नहीं और धन नहीं है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] जीवन का सबसे बड़ा आकर्षण है एक जागृत चेतना। जिस व्यक्ति के भीतर जागृति आ जाती है, वह चाहे कुछ भी बोले, उसके शब्दों में जीवन की खुशबू होती है। और जिसने स्वयं को नहीं जाना, वह चाहे कितनी भी मधुर भाषा बोल ले, उसके शब्द थोड़ी देर बाद अपना असर खो देते हैं। मनुष्य हमेशा दूसरों को बदलने में लगा रहता है। वह चाहता है कि लोग उसकी बात माने, उससे प्रभावित हो, उसकी प्रशंसा करें। लेकिन यह सब अहंकार की मांग है। जहां अहंकार है, वहां आकर्षण नहीं, केवल संघर्ष है। सच्चा आकर्षण तब जन्म लेता है जब तुम किसी से कुछ लेने नहीं बल्कि कुछ बांटने के लिए बोलते हो। यदि तुम्हारे शब्दों का उद्देश्य प्रेम बांटना है, साहस बांटना है, शांति बांटना है, तो तुम्हें किसी तकनीक की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। तुम्हारी वाणी स्वयं ही लोगों के हृदय तक पहुंच जाएगी। याद रखना, लोग तुम्हारे शब्द भूल सकते हैं, लेकिन तुम्हारे शब्दों से उन्हें जो अनुभव हुआ, उसे कभी नहीं भूलेंगे। यदि तुम्हारी बात सुनकर किसी के भीतर आशा जागी, यदि किसी के मन का अंधकार थोड़ा कम हुआ, यदि किसी के चेहरे पर मुस्कान आ गई, तो समझ लेना कि तुम्हारी वाणी सफल हो गई। सफल वक्ता वह नहीं जो सबसे अधिक तालियां बटोर ले। सफल वक्ता वह है जिसके जाने के बाद भी उसकी बात लोगों के भीतर जीवित रहे। इसलिए बोलने से पहले स्वयं से केवल एक प्रश्न पूछो। क्या मेरे शब्द किसी के जीवन में प्रकाश बढ़ाएंगे? यदि उत्तर हां है तो बोलो। यदि उत्तर नहीं है तो मौन अधिक सुंदर है। मौन से मत डरना। लोग सोचते हैं कि मौन कमजोरी है। नहीं, मौन सबसे बड़ी शक्ति है। जो व्यक्ति मौन में सहज हो जाता है, वही सही समय पर सही शब्द बोल पाता है। दुनिया में अधिकांश विवाद इसलिए होते हैं क्योंकि लोग प्रतिक्रिया देते हैं, उत्तर नहीं देते। प्रतिक्रिया क्रोध से आती है। उत्तर जागरूकता से आता है। जब कोई तुम्हारा अपमान करे, तुरंत उत्तर मत देना। कुछ क्षण रुक जाना। उस रुकने में तुम्हारी पूरी बुद्धि छिपी है। यदि तुम रुक गए तो तुम्हारे शब्द जहर नहीं बनेंगे। वे करुणा बन जाएंगे। यही कारण है कि ज्ञानी व्यक्ति कभी जल्दी में नहीं बोलता। वह जानता है कि एक गलत शब्द वर्षों का संबंध तोड़ सकता है और एक सही शब्द किसी टूटे हुए जीवन को फिर से जोड़ सकता है। अपने शब्द।
01:16
Speaker A
क्या तुम सामने वाले को समझना चाहते हो? या केवल उसे प्रभावित करना चाहते हो? यदि तुम्हारा उद्देश्य केवल प्रभावित करना है तो तुम्हारे शब्दों में बनावट होगी और बनावट कभी भी हृदय तक नहीं पहुंचती। सच्चे शब्द वही हैं जो भीतर की शांति से निकलते हैं।
01:43
Speaker A
ऐसे शब्दों में कोई दिखावा नहीं होता। लेकिन उनमें इतनी शक्ति होती है कि वे सीधे आत्मा को छू लेते हैं। तुमने देखा होगा कुछ लोगों के पास बहुत ज्ञान होता है लेकिन लोग उनसे दूर भागते हैं और कुछ लोग
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Speaker A
बहुत कम बोलते हैं फिर भी लोग उनके पास बैठना पसंद करते हैं। ऐसा क्यों? क्योंकि आकर्षण जानकारी से नहीं आता। ऊर्जा से आता है। तुम्हारी ऊर्जा ही तुम्हारे शब्दों का वास्तविक अर्थ तय करती है। यदि भीतर क्रोध है तो प्रेम के शब्द
02:25
Speaker A
भी कठोर लगेंगे। यदि भीतर शांति है तो साधारण शब्द भी अमृत बन जाएंगे। याद रखना बोलना केवल जीभ का काम नहीं है। बोलना तुम्हारे पूरे व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति है। तुम्हारी आंखें, तुम्हारा चेहरा तुम्हारी मुस्कान, तुम्हारा मौन सब मिलकर
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Speaker A
बोलते हैं। इसलिए यदि तुम चाहते हो कि लोग तुम्हारी ओर आकर्षित हो तो शब्द बदलने से पहले स्वयं को बदलो। हर सुबह कुछ देर मौन में बैठो। अपने विचारों को आते जाते देखो। धीरे-धीरे तुम्हारा मन शांत होने लगेगा।
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Speaker A
और जिस दिन तुम्हारा मन शांत हो गया उसी दिन तुम्हारे शब्दों में एक नई सुगंध आ जाएगी। फिर तुम्हें लोगों को अपनी ओर खींचने की कोशिश नहीं करनी पड़ेगी। लोग स्वयं तुम्हारी ओर आने लगेंगे क्योंकि इस संसार में हर व्यक्ति शांति की तलाश
03:33
Speaker A
में है। जिसे कहीं भी शांति की झलक मिलती है, वह उसकी ओर खींचा चला जाता है। लेकिन एक बात और कभी भी मीठा बोलने का अभिनय मत करना। अभिनय कुछ समय तक चलता है, फिर टूट जाता है। यदि भीतर कटुता है तो पहले उसे
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Speaker A
समझो। उसे दबाओ मत। उसे देखो। उसे स्वीकार करो। स्वीकृति से ही परिवर्तन जन्म लेता है। जिस दिन तुम्हारे भीतर प्रेम होगा उस दिन तुम्हें प्रेम से बोलना नहीं पड़ेगा। प्रेम स्वयं तुम्हारी आवाज बन जाएगा। और तब तुम्हारे शब्दों में ऐसा आकर्षण होगा
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Speaker A
कि लोग केवल तुम्हारी बातें ही नहीं सुनेंगे बल्कि तुम्हारी उपस्थिति को भी महसूस करेंगे। यही है बोलने की असली कला। यह भाषा की कला नहीं चेतना की कला है। और जिसने इस कला को जान लिया उसे किसी को
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Speaker A
प्रभावित करने की आवश्यकता नहीं रहती। उसका होना ही सबसे बड़ा संदेश बन जाता है। और जब तुम्हारा होना ही संदेश बन जाता है तब तुम्हें शब्दों की भी उतनी आवश्यकता नहीं रहती। तब तुम्हारे मौन में भी लोग उत्तर खोजने लगते हैं। मनुष्य हमेशा सोचता
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Speaker A
है कि प्रभावशाली बनने के लिए उसे अधिक बोलना होगा। लेकिन मैंने जीवन में ठीक इसका उल्टा देखा है। जो जितना अधिक स्वयं को सिद्ध करना चाहता है, वह उतना ही भीतर से असुरक्षित होता है। और जो भीतर से
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Speaker A
निश्चिंत है, उसे किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती। तुम जब किसी से बात करो तो पहले अपने भीतर झांकना। क्या तुम उस व्यक्ति को बदलना चाहते हो या उसे समझना चाहते हो? क्योंकि बदलने की इच्छा अहंकार से आती है और समझने
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Speaker A
की इच्छा प्रेम से। याद रखना दुनिया में सबसे मधुर आवाज उस व्यक्ति की होती है जिसके भीतर कोई संघर्ष नहीं बचा। उसकी वाणी में कोई जल्दबाजी नहीं होती, कोई भय नहीं होता, कोई प्रतियोगिता नहीं होती। वह केवल सत्य को बहने देता है। लोग पूछते हैं
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Speaker A
कि ऐसी आवाज कैसे मिले? मैं कहता हूं आवाज बदलने की कोशिश मत करो। जीवन बदलो। क्योंकि आवाज जीवन का दर्पण है। तुमने देखा होगा जब तुम क्रोधित होते हो तो वही शब्द तलवार बन जाते हैं। और जब तुम प्रेम में होते हो तो
06:23
Speaker A
वही शब्द फूल बन जाते हैं। शब्द नहीं बदलते। बोलने वाला बदल जाता है। इसलिए बोलने की कला का पहला नियम है। अपने भीतर के शोर को समाप्त करो। मन के भीतर हजारों आवाजें चल रही हैं। कोई कहती है कि सामने वाले को
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Speaker A
हराना है। कोई कहती है कि अपनी छवि बचानी है। कोई कहती है कि लोग तुम्हारी प्रशंसा करें। जब तक यह आवाजें चलती रहेंगी तब तक तुम्हारे शब्द कभी स्वतंत्र नहीं होंगे। ध्यान मन को शांत करता है और शांत मन से
07:05
Speaker A
निकले शब्दों में अद्भुत आकर्षण होता है। ऐसे शब्द किसी को मजबूर नहीं करते लेकिन फिर भी लोग उन्हें सुनना चाहते हैं। दूसरी बात बोलते समय कभी भी अपने ज्ञान का प्रदर्शन मत करना। ज्ञान का प्रदर्शन अज्ञान का सबसे बड़ा प्रमाण है। जो वास्तव
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Speaker A
में जानता है, वह बहुत सरल होकर बोलता है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] वह कठिन शब्दों के पीछे नहीं छिपता। सत्य हमेशा सरल होता है। यदि तुम्हारे शब्द इतने कठिन है कि सामने वाला समझ ही ना सके
07:49
Speaker A
तो तुम्हारा ज्ञान किसी काम का नहीं। महान व्यक्ति वही है जो गहरी से गहरी बात को भी इतने सरल ढंग से कह दे कि एक बच्चा भी उसे महसूस कर सके और सुनो जब सामने वाला बोल रहा हो तो बीच में
08:10
Speaker A
मत काटना उसे पूरा होने दो अधिकांश लोग उत्तर देने के लिए सुनते हैं समझने के लिए नहीं इसलिए उनके संबंध टूट जाते हैं। यदि तुम सचमुच किसी को आकर्षित करना चाहते हो तो पहले उसे यह अनुभव कराओ कि उसकी बात
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Speaker A
महत्वपूर्ण है। जब कोई व्यक्ति तुम्हारे सामने स्वयं को स्वीकार किया हुआ महसूस करता है तो उसके हृदय का द्वार अपने आप खुल जाता है। यही कारण है कि प्रेम में शब्द कम और अनुभव अधिक होता है। एक और
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Speaker A
रहस्य समझ लो। तुम्हारे शब्दों की गति भी बहुत महत्व रखती है। बहुत तेज बोलोगे तो बेचैनी प्रकट होगी। बहुत धीमे बोलोगे तो कृत्रिमता आ सकती है। लेकिन जब तुम जागरूक होकर बोलते हो तो तुम्हारे शब्दों की अपनी एक लय बन जाती है। वही लय
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Speaker A
लोगों को तुम्हारे साथ बांध लेती है। याद रखना प्रभावशाली बोलना कोई तकनीक नहीं है। यह तुम्हारे भीतर की जागरूकता का परिणाम है। जिस दिन तुमने अपने भीतर प्रेम धैर्य और मौन को स्थान दे दिया। उसी दिन तुम्हारी वाणी साधारण नहीं रहेगी। लोग
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Speaker A
तुम्हारे शब्दों को केवल सुनेंगे नहीं। उन्हें अपने जीवन में महसूस करेंगे और तब तुम्हें लोगों को आकर्षित करने का प्रयास नहीं करना पड़ेगा। तुम्हारी उपस्थिति, तुम्हारी मुस्कान और तुम्हारे साधारण शब्द भी लोगों के हृदय में लंबे समय तक गूंजते रहेंगे।
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Speaker A
यहीं से एक नई यात्रा शुरू होती है। और जब यह नई यात्रा शुरू होती है तब तुम्हें पहली बार यह एहसास होता है कि जीवन का सबसे बड़ा आकर्षण सुंदर चेहरा नहीं, ऊंची आवाज नहीं, बड़ा पद नहीं और धन नहीं है।
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Speaker A
[नाक से की जाने वाली आवाज़] जीवन का सबसे बड़ा आकर्षण है एक जागृत चेतना। जिस व्यक्ति के भीतर जागृति आ जाती है, वह चाहे कुछ भी बोले, उसके शब्दों में जीवन की खुशबू होती है। और जिसने स्वयं को नहीं
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Speaker A
जाना, वह चाहे कितनी भी मधुर भाषा बोल ले, उसके शब्द थोड़ी देर बाद अपना असर खो देते हैं। मनुष्य हमेशा दूसरों को बदलने में लगा रहता है। वह चाहता है कि लोग उसकी बात माने, उससे प्रभावित हो, उसकी प्रशंसा करें। लेकिन यह
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Speaker A
सब अहंकार की मांग है। जहां अहंकार है, वहां आकर्षण नहीं केवल संघर्ष है। सच्चा आकर्षण तब जन्म लेता है जब तुम किसी से कुछ लेने नहीं बल्कि कुछ बांटने के लिए बोलते हो। यदि तुम्हारे शब्दों का उद्देश्य प्रेम बांटना है, साहस बांटना
11:35
Speaker A
है, शांति बांटना है तो तुम्हें किसी तकनीक की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। तुम्हारी वाणी स्वयं ही लोगों के हृदय तक पहुंच जाएगी। याद रखना लोग तुम्हारे शब्द भूल सकते हैं। लेकिन तुम्हारे शब्दों से उन्हें जो अनुभव हुआ उसे कभी नहीं भूलेंगे। यदि तुम्हारी बात
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Speaker A
सुनकर किसी के भीतर आशा जागी, यदि किसी के मन का अंधकार थोड़ा कम हुआ, यदि किसी के चेहरे पर मुस्कान आ गई तो समझ लेना कि तुम्हारी वाणी सफल हो गई। सफल वक्ता वह नहीं जो सबसे अधिक तालियां बटोर
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Speaker A
ले। सफल वक्ता वह है जिसके जाने के बाद भी उसकी बात लोगों के भीतर जीवित रहे। इसलिए बोलने से पहले स्वयं से केवल एक प्रश्न पूछो। क्या मेरे शब्द किसी के जीवन में प्रकाश बढ़ाएंगे? यदि उत्तर हां है तो
12:50
Speaker A
बोलो। यदि उत्तर नहीं है तो मौन अधिक सुंदर है। मौन से मत डरना। लोग सोचते हैं कि मौन कमजोरी है। नहीं, मौन सबसे बड़ी शक्ति है। जो व्यक्ति मौन में सहज हो जाता है, वही सही समय पर सही
13:12
Speaker A
शब्द बोल पाता है। दुनिया में अधिकांश विवाद इसलिए होते हैं क्योंकि लोग प्रतिक्रिया देते हैं। उत्तर नहीं देते। प्रतिक्रिया क्रोध से आती है। उत्तर जागरूकता से आता है। जब कोई तुम्हारा अपमान करे तुरंत उत्तर मत देना। कुछ क्षण
13:34
Speaker A
रुक जाना। उस रुकने में तुम्हारी पूरी बुद्धि छिपी है। यदि तुम रुक गए तो तुम्हारे शब्द जहर नहीं बनेंगे। वे करुणा बन जाएंगे। यही कारण है कि ज्ञानी व्यक्ति कभी जल्दी में नहीं बोलता। वह जानता है कि एक गलत शब्द वर्षों का संबंध
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Speaker A
तोड़ सकता है और एक सही शब्द किसी टूटे हुए जीवन को फिर से जोड़ सकता है। अपने शब्दों को हल्का मत बनाओ। उन्हें इतना मूल्यवान बनाओ कि जब तुम बोलो लोग केवल सुने नहीं महसूस भी करें और यह तभी संभव
14:21
Speaker A
है जब तुम्हारा जीवन तुम्हारे शब्दों का प्रमाण बन जाए। यदि तुम प्रेम की बात करते हो तो तुम्हारे व्यवहार में प्रेम दिखाई देना चाहिए। यदि तुम सत्य की बात करते हो तो तुम्हारा जीवन सत्य से भरा होना चाहिए।
14:44
Speaker A
यदि तुम शांति की बात करते हो तो तुम्हारी आंखों में शांति झलकनी चाहिए। शब्दों से अधिक प्रभाव तुम्हारा जीवन छोड़ता है। लोग कानों से कम और आंखों से अधिक सीखते हैं। इसलिए अपने जीवन को ऐसा बना लो कि तुम्हें बार-बार
15:06
Speaker A
समझाने की आवश्यकता ही ना पड़े। तुम्हारा आचरण ही तुम्हारा सबसे बड़ा भाषण बन जाए। और अंत में मैं तुमसे केवल इतना कहना चाहता हूं। कभी ऐसा मत बोलो जिससे किसी का हृदय टूट जाए। कभी ऐसा मत बोलो जिससे
15:28
Speaker A
तुम्हारे भीतर पछतावा जन्म ले। और कभी ऐसा मत बोलो जो केवल तुम्हारे अहंकार को संतुष्ट करें। ऐसे शब्द चुनो जो किसी थके हुए मन को सहारा दें। ऐसे शब्द चुनो जो निराश व्यक्ति में विश्वास जगा दे। ऐसे शब्द चुनो जो लोगों को स्वयं से प्रेम
16:02
Speaker A
करना सिखाएं क्योंकि इस संसार में सबसे बड़ा दान धन का नहीं सही शब्दों का दान है। एक सही समय पर बोला गया। प्रेमपूर्ण वाक्य किसी की पूरी जिंदगी बदल सकता है। यही बोलने की वास्तविक कला है। यह लोगों को अपनी ओर खींचने की चाल नहीं है।
16:30
Speaker A
यह लोगों के हृदय में प्रकाश जलाने की साधना है। और जिस दिन तुम्हारे शब्द किसी के भीतर प्रकाश जला देंगे उसी दिन तुम्हें समझ में आ जाएगा कि आकर्षण बाहर पैदा नहीं होता। वह भीतर की शांति, प्रेम और जागरूकता से जन्म लेता है। तब
16:54
Speaker A
तुम किसी को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करोगे। तुम केवल स्वयं बनकर जिओगे और आश्चर्य यह होगा कि पूरी दुनिया तुम्हारी ओर आकर्षित होने लगेगी। क्योंकि जो स्वयं से मिल चुका है वही वास्तव में दूसरों के हृदय तक पहुंच सकता है। यही है
17:21
Speaker A
बोलने की सर्वोच्च कला। [गला साफ़ करने की आवाज़] यही है जागरूक वाणी का रहस्य। और यही है एक सुंदर जीवन का आरंभ।
Topics:बोलने की कलामौन की शक्तिप्रभावशाली बोलनाशांत मनसुनने की कलाआत्मिक ऊर्जाओशो भाषणप्रेरणादायक हिंदी भाषणस्वयं सुधारजागृत चेतना

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