Skip to content

Anushilan Samiti | Alipore Conspiracy Case UPSC | Khudi… — Transcript

यह वीडियो बंगाल के रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट, अनुशीलन समिति, जुगांतर ग्रुप और अलीपुर कंस्पायरेसी केस पर विस्तृत जानकारी देता है।

Key Takeaways

  • अनुशीलन समिति और जुगांतर ग्रुप बंगाल के प्रमुख रिवॉल्यूशनरी संगठन थे।
  • बरिंद्र कुमार घोष ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष को बढ़ावा दिया।
  • प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस ने ब्रिटिश अधिकारियों पर बम हमले किए।
  • ब्रिटिश सरकार ने क्रांतिकारियों को दबाने के लिए कठोर कानून और छापेमारी की।
  • बंगाल विभाजन ने रिवॉल्यूशनरी गतिविधियों को और तेज किया।

Summary

  • 1902 में कोलकाता में अनुशीलन समिति की स्थापना और इसके फाउंडर्स पर चर्चा।
  • अनुशीलन समिति के अंदर दो गुटों का गठन और बरिंद्र कुमार घोष का नेतृत्व।
  • जुगांतर ग्रुप और ढाका अनुशीलन समिति की स्थापना और उनके क्रांतिकारी कार्य।
  • बम बनाने की तकनीक और हेमचंद्र दास कानूनगो का योगदान।
  • प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस के बम हमलों और उनकी गिरफ्तारी।
  • ब्रिटिश सरकार द्वारा रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट को दबाने के प्रयास।
  • 1905 के बंगाल विभाजन और स्वदेशी आंदोलन का प्रभाव।
  • डुकानदार नामक वीकली न्यूज पेपर और क्रांतिकारी विचारों का प्रचार।
  • मंटोला गार्डन हाउस पर छापा और क्रांतिकारियों की गिरफ्तारी।
  • 1910 तक के प्रमुख घटनाक्रम और ब्रिटिश सरकार की कार्रवाई।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
हेलो हेलो फ्रेंड्स, आज की वीडियो में हम लोग बंगाल के रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट से रिलेटेड सभी मॉनिटर्स को कवर करेंगे, जैसे कि फॉर्मेशन ऑफ अनुशीलन समिति, जुगांतर ग्रुप, ढाका अनुशीलन समिति, रोक, बरिंद्र कुमार घोष, स्पीड मित्रा, पुलिन बिहारी दास,
00:15
Speaker A
हेमचंद्र कानूनगो और साथ हम देखेंगे बॉम्ब अटैक और लेफ्टिनेंट जनरल ऑफिस बंगाल, बंगाल और सर गुड। और यह जानते वक्त हम समझेंगे कि प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस का क्या रोल रहा इस रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट में, मानिक टो लॉ गार्डन के और अलीपुर कंस्पायरेसी केस
00:33
Speaker A
किया था। और हम यह देखेंगे कि ब्रिटिश गवर्नमेंट ने इस रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट को बंगाल में कैसे खत्म करने की कोशिश की, और क्या वाकई ब्रिटिश गवर्नमेंट बंगाल में रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट को ऐड कर पाई। तो चलिए शुरुआत करते हैं फॉर्मेशन ऑफ अनुशीलन
00:47
Speaker A
समिति से। साल 1902 में कोलकाता में एक रिवॉल्यूशनरी सीक्रेट सोसायटी फॉर्म हुई, जिसका नाम था अनुशीलन समिति। इसके फाउंडर थे परमार्थ मित्रा व ज्यादातर इन एपी मिश्रा के नाम किया जाता है। इस समिति की शुरुआत एक जिमखाना या कहें कि एक अखाड़े के रूप में
01:05
Speaker A
हुई। इसको बनाने का परपस था बंगाली युद्ध के अंदर फिजिकल स्ट्रेंथ और करियर जो लोग करना। यहां पर युवाओं को फिजिकल ट्रेनिंग दी जाती थी, लाठी चलाना सिखाया जाता था, सौंठ और एयरप्लेन जैसी कई सारी एक्टिविटीज मुन्ना ट्रेन किया जाता था।
01:21
Speaker A
युद्ध की फिजिकल स्ट्रेंथ और कर्ज को डेवलप किया जाता था। एक्चुअली स्पीड मित्रा बंकिमचंद्र चटर्जी की एक नावेल से बहुत ज्यादा प्रभावित थे। उस नावेल का नाम था अनुशीलन तत्व। इस नावेल में बंकिम चंद्र चटर्जी ने ऑल राउंड डेवलपमेंट, फिजिकल,
01:36
Speaker A
मेंटल, मोरल और स्पिरिचुअल डेवलपमेंट के कंसेप्ट को बहुत ही डिटेल में समझाया था। मित्रा ने इस नावेल से इंस्पायर होकर यह सीक्रेट सोसायटी बनाई और इसीलिए इस सीक्रेट सोसायटी का नाम अनुशीलन समिति रखा गया। तो अनुशीलन समिति तो 1902 में गई, जहां पर
01:52
Speaker A
लोगों को ट्रेंड किया जा रहा था। इसके बाद 1905 में गवर्नमेंट ने बंगाल का विभाजन कर दिया। इस विभाजन के अगेंस्ट नेशनल लीडर्स ने स्वदेशी एंड और मूवमेंट शुरू कर दिया था। स्वदेशी अवॉइड मूवमेंट हम पहले ही एक दूसरी वीडियो में कवर कर चुके
02:07
Speaker A
हैं। तो यहां पर नेशनल लीडर्स इस अप्रोच से अनुशीलन समिति के बहुत सारे लोग संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लग रहा था कि बंगाल पार्टीशन कोई बड़ा रिवॉल्यूशन होना चाहिए। स्वदेशी और वह रिकॉर्ड काफी नहीं है, लेकिन ई मित्रा अभी ब्रिटिश सरकार के खिलाफ
02:22
Speaker A
किसी भी वर्ड स्ट्रगल को बढ़ावा नहीं देना चाहते थे। और इस बात से अनुशीलन समिति के काफी सारे मेंबर्स में असंतोष था। और फिर इनको अनुशीलन समिति के अंदर ही अपना एक लीडर मिल गया, जो इनको ब्रिटिश सरकार के
02:35
Speaker A
खिलाफ वॉरंट स्ट्रगल में लीड करने के लिए तैयार था। इस लीडर का नाम था बरिंद्र कुमार घोष। यानी अनुशीलन समिति के अंदर ही दो गुट बन चुके थे और इस रेडिकल ग्रुप को लेफ्ट कर रहे थे बरिंद्र कुमार घोष। यह और
02:50
Speaker A
अरविंदो घोष के छोटे भाई थे। 1905 में इस ग्रुप ने भवानी मंदिर नाम के पॉलीटिकल प्लेटफॉर्म किए, जिन्हें लिखा था और विंदू घोष ने इस मेडिकल टेंपलेट्स में डिटेल प्लेन मेंशन किया गया था कि रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज का सेंटर कैसे ऑर्गनाइज किया जाए। 1906 में
03:08
Speaker A
इसी ग्रुप ने दुकानदार की शुरुआत की, जो कि एक वीकली न्यूज पेपर था। बरिंद्र कुमार घोष और विवेकानंद के छोटे भाई भूपेंद्र नाथ दत्ता अट थे। इसके बाद 1909 में नरेंद्र नाथ घोष ने एक लिखी, जिसका नाम था वर्तमान रणनीति।
03:25
Speaker A
रूस और हर क्रांतिकारी के लिए थी। मानकर चला जा सकता है कि किसी भी क्रांतिकारी की शुरुआत इसी से होती थी और आम जनता इन क्रांतिकारियों से जुड़ी हुई थी। के द्वारा जो कि देखते ही देखते क्रांतिकारियों की
03:41
Speaker A
रेलिंग बन चुका था। इस अखबार की लाइन से क्रांतिकारी विचार उठते थे। 1906 में पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया था और सभी नेताओं को दे दिया था। तो दुकानदार ने बहुत ही स्ट्रांग वर्ड्स करते हुए अपील की कि 30
03:58
Speaker A
करोड़ भारतीयों को अपने साथ और हाथ उठाने होंगे गुलामी के इस अभिशाप से मुक्त होने के लिए। फोर्सज मस्ट बे स्टॉप्ड बाय फोर्स। यह इन्होंने पुलिस के 1906 के कॉन्फ्रेंस पर लाठीचार्ज करने पर लिखा था। बारिसाल कॉन्फ्रेंस बेसिकली पूरे
04:12
Speaker A
बंगाल प्रोविंस के लीडर्स की हर साल होने वाली कांफ्रेंस थी। और 1906 की यह कॉन्फ्रेंस बहुत ज्यादा जरूरी थी क्योंकि जब 6 महीने पहले बंगाल का विभाजन हुआ था और यहां पर बंगाल के सभी लीडर्स इकट्ठा होने वाले थे। और प्लैन था बंगाल के लोगों
04:26
Speaker A
को हिंदू और मुस्लिम्स को एकजुट करने का। युगांतर अपने लेखों से लोगों को क्रांतिकारियों के साथ सीधे जोड़ रहा था। और इस अखबार को इसका नाम मिला था विश्वनाथ शास्त्री के सोशल नावेल युगांतर से। युगांतर को युगांतर भी कहा जाता है और इसका मतलब
04:43
Speaker A
होता है एक न्यू एरा। तो हमने देखा कि अनुशीलन समिति के अंदर एक दुकानदार ग्रुप चलने लगा था। और 1906 के सितंबर में जब टीम मित्रा ईस्ट बंगाल के दौरे पर थे, तो उनकी मुलाकात पुलिन बिहारी दास से हुई।
04:56
Speaker A
पुलिन बिहारी दास से वह काफी सारे इंप्रेस हुए थे और अपने नॉमिनेट किया कि आप इस बंगाल में अनुशीलन समिति का ढाका चैप्टर शुरू करें। पुलिन बिहारी दास ने अपनी तरह के इस बात को मानकर 1906 में ढाका अनुशीलन समिति
05:11
Speaker A
इस्टैबलिश्ड कर दी। यानी युगांतर ग्रुप के साथ-साथ ढाका अनुशीलन समिति भी कोलकाता अनुशीलन समिति से जुड़ी हुई थी। हल्की ढाका अनुशीलन समिति ने अपनी ब्रांच तेजी से खुली। शुरू होगी कि एक समय में 500 से ज्यादा ब्रांच सिर्फ ढाका अनुशीलन समिति
05:26
Speaker A
की थी। कुछ बैलेंस शेष तो बंगाल के बाहर वीणा का अनुशीलन समिति और कोलकाता अनुशीलन समिति के विचारों में भी कुछ फर्क आ गया था और अब यह इंडिपेंडेंटली व कर रहे थे। उधर जुबान तो ग्रुप ने अपने रिवॉल्यूशनरी
05:39
Speaker A
आइडिया, जिसको फंड करने के लिए डकैती और रोज करना शुरू कर दिया था, जो कि उनके रिवॉल्यूशनरी प्लांस के लिए बहुत ज्यादा जरूरी था। अपनी पिछली वीडियो में हमने कवर किया था कि डकैती करते समय एक प्लेट छोड़
05:51
Speaker A
दिया कर देते हैं, जिसमें लिखा होता था कि यह पैसा हम लोन के रूप में ले रहे हैं। और बिहार फॉर फ्यूचर नेशनल गवर्नमेंट ऑफ इंडिया भारत के आजाद होने के बाद अपना यह कि आप कमेंट से लेना। तो इस तरह की
06:03
Speaker A
विचारधारा के साथ अभिनय के हाथों में बंदूकें भी आ चुकी थीं। लेकिन अंग्रेजों के खिलाफ इस लड़ाई में बंदूकें काफी नहीं थीं, जरूरत थी जेम्स की। और उसी समय इनका एक साथी बम बनाने की टेक्निक पर फ्रांसीसी करा चुका था। इस साथी का नाम था हेमचंद्र
06:18
Speaker A
दास कानूनगो। अब पैसा भी था, वह बनाने की टेक्निक विधि तो माननीय गार्डन है, उसमें बम बनाने की फैक्ट्री लगा दी गई। यह सब काम सीक्रेट हो रहा था। इस फैक्ट्री में बनाए गए बम से तीन बड़े अटैक प्लान किए
06:31
Speaker A
गए। पहला अटैक अक्टूबर 1907 में बेनिफिट फ्लॉप लाइन किया गया, जो कि इस बंगाल के लेफ्टिनेंट गवर्नर थे। दूसरा टेक दिसंबर 1907 में एंट्री प्रिंस किया गया, जो कि बंगाल के लेफ्टिनेंट गवर्नर थे। और तीसरा डेड स्किन फूल पर, जो कि मुजफ्फरपुर के जज से
06:49
Speaker A
और जाने जाते थे। भारतीयों के छोटे छोटे अपराधों के लिए सीनियर से सीवियर पनिशमेंट देने के लिए। स्वदेशी मूवमेंट के दौरान इन्होंने भारतीय लोगों के छोटे से छोटे ऑफिस के लिए उन्हें उम्र खेमराज मीणा पुत्र को मारने की जिम्मेदारी
07:03
Speaker A
प्रफुल्ल चाकी को दी। डब्ड फुल रिज़्यूम बटन से बच गया। इसके बाद उसे जोर से ट्रेवल कर रहा था, उसे छुड़ाने की तैयारी की गई। बम के धमाके से ट्रेन पलट गई, कोई वृद्धि नहीं हुई। अब बारी थी कि किसी भी
07:19
Speaker A
तरह की कोई भी नहीं जा सकती थी। पहले दो मिनट हो चुके थे। इस बार जिम्मेदारी दी गई प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस को। इस अटैक से पहले भी को मारने की कोशिश की जा चुकी थी। एक-एक करके को ने रिसीव किया। बाद में
07:39
Speaker A
पुलिस ने अपनी कस्टडी में ले लिया और बम को डिफ्यूज कर दिया। और अब अप्रैल 1908 में प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस के काफिले पर बम फेंकने वाले थे। पूरी तैयारी हो चुकी थी और मुंबई का बटन बच गया। और इस
07:55
Speaker A
धमाके में शामिल महिलाएं मारी गई थीं। चारों तरफ इन अटैकर्स को खोज रही थी। प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस का पकड़ा जाना तय ही था। प्रभु जी ने अपने आप को गोली मार ली और शहीद हो गए। उधर खुदीराम
08:10
Speaker A
बोस इंसिडेंट के बाद भागकर काफी दूर निकल गए थे। रात भर चले और ऑलमोस्ट 40 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद इन्होंने टी स्टॉल पर पानी मांगा। वहां पर कुछ पुलिस कांस्टेबल भी थे। इन फैक्ट पुलिस इन्हीं
08:23
Speaker A
खोज रही थी। पुलिस की नजर इनके पास रखे रिवॉल्वर पर पड़ी और इन्हें पकड़ लिया। रेस्ट करने के बाद इन्हें फांसी की सजा सुनाई गई। इन्हें 11 अगस्त 1908 को फांसी दी गई। फांसी के वक्त यह मात्र 18 साल के थे। जिस समय जज
08:39
Speaker A
ने फांसी सुनाई थी, इनका इमीडिएट और स्पॉन्टेनियस रिस्पांस था इस्माइल एक केयरफ्री स्माइल। बहुत सारे न्यूज़ पेपर और जनरल्स ने यह बात कवर की थी। बाल गंगाधर तिलक ने भी उनके बारे में लिखा था। स्वराज्य न्यूज़ पर तो खुदीराम बोस की इस बलिदान
08:55
Speaker A
पर पोयम और इसकी जिसमें लोगों को कहा गया कि अफेयर को निकालने के लिए अगर आपको इन थे निकले तो धो। और यह लिखने की वजह से स्वराज्य यूज पर कैरियर को अगले ही दिन रेस्ट कर लिया गया। अब पुलिस रेगुलेशन इसको
09:09
Speaker A
किसी भी तरह का ब्रीडिंग स्पेस नहीं देना चाहती थी। महीना 1908 में मंटोला गार्डन हाउस पर छापा मार दिया गया, जहां से बम्स, डायनामाइट्स और कार्टेज इसके अलावा कई सारी क्रांतिकारी बुक भी मिली। अराउंड थ्री फोर अनुशीलन समिति और युगांतर ग्रुप के
09:24
Speaker A
मेंबर्स को अरेस्ट कर लिया गया। सभी बड़े नीरज पकड़े गए, बरिंद्र कुमार घोष और विंदू घोष, भूपेंद्रनाथ दत्त और हेमचंद्र दास कानू।
09:39
Speaker A
अलीपुर कंस्पायरेसी केस के नाम से जाना जाता है जज ने सभी को है वी एस पॉसिबल पनिशमेंट दी जेल में पुलिस ने इनके साथ इन ह्यूमर मेथड और थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया और गवर्नमेंट बंगाल में रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज को पूरी तरह से कुचलने के लिए
09:54
Speaker A
तैयार थी 9008 में क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट के जरिए कई सारी समिति और क्वेश्चसं को बैन कर दिया गया डागा अनुशीलन समिति को भी बैन कर दिया गया और 1910 में पुलिंद देश को भी अरेस्ट कर लिया गया इसके अलावा 1931 के इंडियन प्रेसिडेंट
10:10
Speaker A
ने दुकानदार को भी बदल के रख दिया अब दुकानदार द्वारा सिर्फ थोड़ी-बहुत अंडरग्राउंड एक्टिविटीज इन हो पा रही थी तो क्या बंगाल में रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया जी नहीं गवर्नमेंट थे रिप्रेसिव मेजरस
10:24
Speaker A
के बाद भी रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज पूरी तरह से नहीं रुकेगी और पुलिंदा स्कीयर्स के बावजूद 1910 से 90 के बीच बंगाल में जो ग्रुप सबसे ज्यादा एक्टिव था वह ढाका अनुशीलन समिति मीणा कुछ नए लीडर सुरेश आशुतोष दास गुप्ता माखनलाल अब यह लोग ढाका
10:42
Speaker A
अनुशीलन समिति को लीड कर रहे थे और इस दौरान कई बड़े और इनफेमस गवर्नमेंट ऑफिशल्स का मर्डर कर दिया गया पैसा इकट्ठा करने के लिए कई सारी डकैती डाली गई इफेक्ट 920 में वायसराय लॉर्ड हार्डिंग के ऊपर जो
10:54
Speaker A
बॉम्ब अटैक हुआ था उसमें भी बताया जाता है कि पंजाब रेवल्यूशन इसके साथ बंगाल विशेषता हुआ था और फिर 1948 सेठ के बीच फर्स्ट वर्ल्ड वार रेवल्यूशनरी इसके लिए फेवरेबल पीरियड था जर्मनी जो कि फर्स्ट वर्ल्ड वॉर में ब्रिटिश राज के खिलाफ लड़ रही थी उससे
11:12
Speaker A
इंडियन रेवेन्यू सर्विस को आर्म्स एंड अमुनिशन की मदद मिल पा रही थी और ब्रिटिश सरकार बंगाल में एवरेज को पूरी तरह से दबा नहीं पायी यह बात रोलट कमेटी की रिपोर्ट में साफ हो गई जिसमें कहा गया कि अकेले
11:24
Speaker A
बंगाल में 906 1971 के बीच 110 डे कटी हुई और 60 गवर्नमेंट ऑफिशल्स का मर्डर हुआ रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज इन विन गोल्ड प्लेटेड सभी इन्फॉर्मेशन इस वीडियो में हमने कवर कर ली है अब नेक्स्ट वीडियो में हम लोग रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज इन पंजाब
11:40
Speaker A
को कवर करेंगे इंडिया की हिस्ट्री और इंडियन पॉलीटिकल डिटेल में कवर करने के लिए उपभोक्ताओं की प्ले लिस्ट को फॉलो कीजिए लिंक आपको डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा थैंक यू सो मच फॉर वॉचिंग एंड सर्पोटिंग गुप्ता
Topics:अनुशीलन समितिजुगांतर ग्रुपअलीपुर कंस्पायरेसी केसखुदीराम बोसप्रफुल्ल चाकीबंगाल विभाजनब्रिटिश भारतक्रांतिकारी आंदोलनस्वदेशी आंदोलनबम हमला

Answers

Frequently Asked Questions

अनुशीलन समिति की स्थापना कब और क्यों हुई?

अनुशीलन समिति की स्थापना 1902 में कोलकाता में हुई थी, जिसका उद्देश्य युवाओं को युद्ध के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करना था। इसे बंकिमचंद्र चटर्जी के उपन्यास 'अनुशीलन तत्व' से प्रेरणा मिली थी।

खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी का रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट में क्या योगदान था?

खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने ब्रिटिश अधिकारियों पर बम हमले किए, जिससे वे ब्रिटिश सरकार के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष के प्रमुख चेहरों में शामिल हुए। दोनों को गिरफ्तार कर फांसी दी गई।

ब्रिटिश सरकार ने बंगाल के रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट को कैसे दबाया?

ब्रिटिश सरकार ने कठोर कानून बनाए, छापेमारी की और अनुशीलन समिति तथा जुगांतर ग्रुप जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाया। कई क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर फांसी दी गई।

Get More with the Söz AI App

Transcribe recordings, audio files, and YouTube videos — with AI summaries, speaker detection, and unlimited transcriptions.

Or transcribe another YouTube video here →