4500 साल पुराने पिरामिड की निर्माण तकनीक और रहस्यों को रोबोटिक कैमरा और एक्सपर्ट्स की मदद से खोजा गया।
Key Takeaways
- प्राचीन इंजीनियरों ने बिना आधुनिक उपकरणों के अत्यंत सटीक और मजबूत पिरामिड बनाए।
- निर्माण में तारों और प्राकृतिक तत्वों का उपयोग कर दिशा और स्तर निर्धारित किया गया।
- पत्थरों की कटाई, परिवहन और ऊंचाई तक पहुंचाना जटिल लेकिन प्रभावी तकनीकों से संभव हुआ।
- ग्रेनाइट जैसे कठोर पत्थरों को भी विशेष तकनीकों से काटा गया।
- 4500 साल पुराने पिरामिड में अभी भी कई रहस्य और तकनीकी चमत्कार छुपे हैं।
What the video covers
- 4500 साल पुराने ग्रेट पिरामिड ऑफ गिज़ा की अंदरूनी संरचना और रहस्यों की खोज के लिए रोबोटिक कैमरा का उपयोग किया गया।
- पिरामिड की सटीक दिशा निर्धारण बिना कंपास के तारों और सितारों की मदद से किया गया था।
- जमीन को लेवल करने के लिए पानी का उपयोग कर सतह को समान किया गया था।
- पत्थरों को काटने के लिए कॉपर और सैनिक मिश्रित औजारों का इस्तेमाल किया गया, जो पत्थरों को घंटों की मेहनत से आकार देते थे।
- लाइमस्टोन पत्थरों को 250 किलोमीटर दूर से नदी के माध्यम से कश्तियों द्वारा पिरामिड स्थल तक पहुंचाया गया।
- पत्थरों को ऊंचाई तक पहुंचाने के लिए स्पाइरल ट्रैक या जिक-जैक रास्तों का इस्तेमाल किया गया।
- पिरामिड के अंदर ग्रेनाइट के पत्थरों का उपयोग हुआ, जिन्हें बिना दांत वाले आरे और बजरी की मदद से काटा गया।
- 4500 साल पहले के इंजीनियरों ने पिरामिड को भूकंप-प्रतिरोधी और सटीक कोणों पर बनाया।
- मजदूरों की बड़ी संख्या और जटिल उपकरणों के बिना यह विशाल निर्माण संभव हुआ।
- वीडियो के पार्ट-2 में पिरामिड के और भी रहस्यों और तकनीकों का खुलासा किया जाएगा।
Chapters
- 00:00पिरामिड के अंदर रोबोटिक कैमरे की खोज
- 00:31पत्थर के स्लैब में ड्रिलिंग और अंदर का मंजर
- 01:03ग्रेट पिरामिड ऑफ गिज़ा का परिचय और आकार
- 01:32पिरामिड निर्माण का उद्देश्य और इंजीनियरिंग चैलेंज
- 02:36चैलेंज 1: दिशा निर्धारण बिना कंपास के
- 03:07चैलेंज 2: जमीन को लेवल करना
- 04:06चैलेंज 3: पत्थर काटने की तकनीक
- 05:08चैलेंज 4: पत्थरों का परिवहन
- 06:11चैलेंज 5: पत्थरों को ऊंचाई तक पहुंचाना
- 07:08चैलेंज 6: ग्रेनाइट पत्थरों की कटाई और रहस्य
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Speaker A
कि जमीन से चार सौ अस्सी फीट ऊंचे 4500 साल पुराने इस पिरामिड के अंदर ऐसा क्या था, जिसको सिर्फ देखने के लिए रिसर्चर्स ने एक रोबोट, एक कैमरा परमिट के अंदर भेजा। एक जगह पर आकर रोबोटिक कैमरा रुक गया क्योंकि
Speaker A
अब उसके सामने पत्थर का एक स्लैब था। रिसर्चर्स का मानना था कि इस स्लैब के पीछे जरूर कोई ऐसा राज छुपा है जो पिछले चार हजार 500 सालों से दफन है। यह राज इनको हर कीमत पर जाना था, इसलिए उन्होंने रोबोट के
Speaker A
आगे एक ड्रिल मशीन लगाई, जिसने उस पत्थर के स्लैब में भारी छेद कर दिया। अब इस छेद के अंदर एक कैमरा भेजा गया, जिसने स्लैब के उस पार एक ऐसा मंज़र देखा जो पिछले चार हजार 500 सालों से किसी ने भी नहीं देखा
Speaker A
था। जब वीडियोस में एक बार फिर से खुशामदी नजर आई मिस्र यानि इजिप्ट में टोटल 138 ऊंचे तीन पैर मिर्च मौजूद हैं, जिन्होंने पिछले हजारों सालों से दर्जनों अर्थक्वेक्स और कई खतरनाक तूफान में का सामना किया। लेकिन मजाल है इनमें से
Speaker A
कोई एक भी इधर से उधर हुआ हो। इनमें से सबसे ऊंचा और बड़ा पर्व मेड द ग्रेट पिरामिड ऑफ़ ग़िज़ा के जाता है, और इस पर वैट की बेस का एरिया 31ए कर्ज है। यानी इस पिरामिड के अंदर हैरतअंगेज तौर पर एक दो
Speaker A
नहीं बल्कि पूरी नाइन फुटबॉल फील्ड फ्रॉम से फिट आ सकती है। एक्टिवेट हिसाब से इस पर वैट व टोटल त इस लाख बड़े-बड़े पत्थरों का इस्तेमाल हुआ, जिनमें से कई पत्थरों का वजन 50 टन भी था। मगर इसका टोटल वजन का
Speaker A
अंदाजा लगाया जाए तो इस पर वैट का वजन 60 लाख टन है, जो 12 बुर्ज खलीफा के वजन के बराबर बनता है। लेकिन इतने ऊंचे और आलिशान पिरामिड बनाने का आखिर मकसद क्या था? हजारों साल पहले जब इंसान के पास कोई
Speaker A
टूल्स भी मौजूद नहीं थे, तब इन फ्रॉम इट्स की दीवारों को कैसे इंच बाय इंच लेवल किया गया? कैसे 50 टन वजनी पत्थरों को स्क्वायर शेप में काट कर बगैर प्रेम के ही 480 फीट लंबाई तक पहुंचाया गया? और इनको बनाने में
Speaker A
ऐसे कौन से इंजीनियर्स का हाथ था, जिन्होंने इन पिरामिड्स को अर्थक्वेक प्रूफ के साथ-साथ इनकी तमाम साइड्स को एक्जेक्टली 51.5 डिग्री के एंगल पर सेट किया? यह सब आप जान सकेंगे आज की इस वीडियो में। तो आइए शुरू करते हैं चैलेंज नंबर वन।
Speaker A
कई सदियों से मुख्तलिफ रिसर्च टीम इस पिरामिड की कंस्ट्रक्शन टेक्निक जानने के लिए इस सर जोड़कर बैठी थी कि आखिर इस पिरामिड की हर साइड एक्जेक्टली नॉर्थ, साउथ, ईस्ट और वेस्ट पर बगैर कंपास के कैसे सेट की गई होंगी। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि
Speaker A
उस टाइम के आर्किटेक्ट ने सबसे पहले ऐसी ज़मीन तलाश की होगी जो लाखों टन वजनी पत्थरों का वजन ठेर सके। उसके बाद बॉलर स्टार, जानी वो सितारे जिनकी मदद से अर्थ के पोल्स का पता पड़ता है, उनकी मदद से
Speaker A
पिरामिड की हर साइड को मार किया गया। ना कोई कंपास और ना ही कोई ऑप्टिकल इंस्ट्रूमेंट। सिर्फ इस बेसिक टेक्निक से हजारों साल पहले इस पिरामिड में क्वेश्चन सेट की गई, और वह भी शेरों के साथ। चैलेंज नंबर 2। अगला चैलेंज था जमीन को
Speaker A
लेवल करने का। जिस तेरा एकड़ की जमीन पर इस पिरामिड को बनना था, उसका लेवल थोड़ा सा भी आउट होता तो 23 लाख पत्थरों के इस पहाड़ का खड़ा होना बिल्कुल भी मुमकिन नहीं था। अब इस जमीन को लेवल करने के लिए उस टाइम के
Speaker A
इंजीनियर के पास ना ही लेजर लेवलर था और ना ही बल है। वन एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंस्ट्रक्शन साइट की चारों साइड पर खड़ा करके उसमें पानी डाला गया होगा, और फिर एक साइड के पानी के लेवल से दूसरे साइड के
Speaker A
पानी के लेवल को मैच किया गया होगा। जो जमीन का हिस्सा पानी के लेवल से मैच नहीं कर रहा होगा, उसको छीनी और हथौड़ों की मदद से काटकर लेवल किया गया होगा। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंस्टेंट
Speaker A
एजुकेशंस ने इस सिंपल टूल का भी इस्तेमाल किया, जिसकी दोनों साइड पर लकड़ियां और उसके ठीक सेंटर पर एक रस्सी से पत्थर बंधा हुआ है। अगर पत्थर जब इसे टच हो गया और उसकी रसीद ठीक सेंटर लाइन पर आ रही होगी, तो इसका मतलब है कि 20
Speaker A
की जमीन परफेक्टली लेवल है। चैलेंज नंबर थ्री। अब पिरामिड कंस्ट्रक्शन साइट पर डायरेक्शंस भी सेट थी, मार्किंग भी हो चुकी थी, और जमीन का लेवल भी सेट था। अब बारी थी कंस्ट्रक्शन स्टार्ट करने की, जिसके लिए लाखों टन वजनी और बड़े पत्थर रिक्वेस्ट थे।
Speaker A
लेकिन यह पत्थर काटने के लिए ना ही उनके पास ग्राइंडर थे और ना ही चेक है मांस। लेकिन फिर भी उन्होंने 50 टन वजनी पत्थर काटे भी, और उनको स्क्वायर या रेक्टैंगल शेप भी दिया। लेकिन आखिर किसकी मदद से?
Speaker A
है जी हां, यही वह सिर्फ एक पौधा जिसकी मदद से पत्थरों को काटा गया। एक्सपर्ट का मानना है कि पिरामिड की कंस्ट्रक्शन पर इस्तेमाल होने वाली चीनी सिर्फ कॉपर से ही नहीं बनी थी, क्योंकि उनको भी यह बात मालूम थी कि
Speaker A
कॉपर नरम होता है और पत्थर नहीं काट सकता। इसलिए इसमें एक केमिकल और सैनिक भी शामिल किया गया था। कॉपर और सैनिक से बनाई जाने वाली यह चीनी की लकड़ियों के हथौड़ों से पत्थरों पर ठोंकी जाती थी, और कई घंटों
Speaker A
की मेहनत के बाद बड़े-बड़े पत्थर शेप में लाए जाते थे। चैलेंज नंबर फोर। अब जो कि यह खास किस्म का पत्थर, जिसको आज लाइमस्टोन कहा जाता है, उसकी कटाई पिरामिड कंस्ट्रक्शन साइट पिज्जा से ढाई सौ किलोमीटर दूर दौरा के शहर में हो रही थी।
Speaker A
अब मसला था यह पत्थर की जातक ट्रांसपोर्ट करने का। हर एक पत्थर 50 टन, यानी 50,000 के जी के बराबर था, जो तकरीबन तीन पैसेंजर बस के वजन के बराबर बनता है। और ऐसे कई लाख पत्थर सिर्फ एक पिरामिड में
Speaker A
धमाल होना थे। इतना ज्यादा वजन ट्रांसपोर्ट करने के लिए ना ही उस दौर में कोई जानवर काम आ सकता था, और ना ही उनके पास वृक्ष मौजूद थे। अतः के अगर आजकल के जगदीश तौर में भी यह काम करना पड़े तो ट्रांसपोर्ट
Speaker A
कंपनी इसको अच्छा खासा टॉप फाइव आएगा। हैरतअंगेज तौर पर यह काम भरकर और कश्तियों की मदद से किया गया। जी हां, टोरा और वीजा के दरमियान मौजूद रिवर का फायदा उठाया गया, और बड़ी-बड़ी कश्तियों में पत्थर लादकर पिरामिड पर पहुंचाए गए। एक्सपर्ट्स का
Speaker A
मानना है कि यह काम इतना आसान नहीं था। शिप्स में इतने बड़े पत्थर की लोडिंग और अनलोडिंग में कम से कम भी 500 मजदूरों की आर्मी एक ही वक्त में लगाई गई होगी। चैलेंज नंबर पांच। जो एक्सपर्ट्स की टीम स्पिरिट
Speaker A
की कंस्ट्रक्शन पर रिसर्च कर रही थी, उनको अब अपने कई सवालों के जवाब मिल चुके थे। लेकिन एक बात उनको हर वक्त सता रही थी कि लाइमस्टोन कट भी गए, ट्रांसपोर्ट भी हो गए, और कंस्ट्रक्शन के दौरान एक
Speaker A
आपके ऊपर एक लगना भी शुरू हो गए। मसला यह था कि पत्थर इतनी ऊंचाई तक आखिर पहुंचाए कैसे गए होंगे? कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि पिरामिड की कंस्ट्रक्शन से पहले ही यह प्लैन कर लिया गया था। या तो यह स्पाइरल
Speaker A
ट्रैक के जरिए ऊपर गए होंगे, यहां फिर जिक-जेक तरीके से। लेकिन यह बात तो तय है कि 50,000 के जी के पत्थर ऊपर मजदूरों की आर्मी की मदद से ही खींच कर गए होंगे। चैलेंज नंबर सिक्स। बात सिर्फ लाखों
Speaker A
मजदूरों, छैनी, हथौड़े से लाइमस्टोन काटने और इतने बड़े पत्थरों को ट्रांसपोर्ट करने की ही नहीं थी। इस पिरामिड के अंदर कंपार्टमेंट्स, उनके अंदर जाने का रास्ता और कई छोटी-छोटी सुरंगे भी बनाई गई थीं। बाकी सब चीजें तो ठीक हैं, लेकिन एक चीज
Speaker A
एक्सपर्ट्स को हैरान कर गई, और वह यह थी कि अंदर के कंपार्टमेंट में जो पत्थर इस्तेमाल हुआ था, वह लाइमस्टोन नहीं बल्कि ग्रेनाइट था। जी हां, ग्रेनाइट एक ऐसा पत्थर है जो डायमंड के बाद दुनिया का सबसे सख्त
Speaker A
तरिन स्टोन माना जाता है। या गूगल के मोटोरोला दौर में भी ग्रेनाइट बड़े-बड़े ग्राइंडर की मदद के सिवा काटा ही नहीं जा सकता। दुनिया भर से कई आर्केलॉजिकल एक्सपर्ट्स को पिरामिड का विजिट भी करवाया गया, लेकिन किसी को भी इस बात का
Speaker A
सुराख नहीं मिला कि 4500 साल पहले इजिप्शियंस ने ग्रेनाइट जैसे ठोस पत्थर को इतनी सफाई से कैसे काटा था। आखिरकार कई सालों के बाद एक्सपर्ट्स ने इस मिस्ट्री को भी सॉल्व कर दिया। टिप्स नए कर, ग्रेनाइट को इतनी सफाई से एक ऐसे आरे से काटा था जिसके
Speaker A
दांत ही नहीं थे। जी हां, बगैर दांत वाले आरे के दोनों साइडों पर वजन डालकर इसको ग्रेनाइट पर चलाया जाता था, और बीच में बजरी डाली जाती थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरीके से इतने बड़े पत्थर को काटने
Speaker A
में चार महीनों का वक्त लग जाता था। कि आखिर कहां पर रेमिडी बनाने का मकसद क्या था, इन पिरामिड्स को बनाने में कितने मजदूर एक ही वक्त में काम करते थे, और रोबोटिक कैमरा ने च पर वैट के अंदर पत्थर
Speaker A
के स्लैब में सोना किया तो उसके अंदर वह कौन सा मंजर देखा गया? फिर पिछले चार हजार 500 सालों से किसी ने भी नहीं देखा था। यह सब और इससे भी ज्यादा आप जान सकेंगे इस वीडियो के पार्ट-2 में। आप लोगों के प्यार
Speaker A
भरे कमेंट और लाइक का बेहद शुक्रिया। मिलते हैं वीडियो के अगले शानदार पार्ट में।
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