नेपाल में 26 अगस्त को हिमालय में ग्लेशियर टूटने से आई तबाही और अर्ली वार्निंग सिस्टम की विफलता की विस्तृत जांच।
Key Takeaways
- हिमालय में ग्लेशियर टूटने की घटनाएं बढ़ रही हैं जो बड़े पैमाने पर तबाही ला सकती हैं।
- अर्ली वार्निंग सिस्टम्स की सीमाएं हैं, खासकर जब हादसा अचानक और बड़े पैमाने पर होता है।
- रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी सहायता की आवश्यकता है।
- ग्लोबल वार्मिंग हिमालय की स्थिरता को प्रभावित कर रही है, जिससे प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है।
- पहाड़ी विकास योजनाओं में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना जरूरी है।
What the video covers
- हिमालय को थर्ड पोल कहा जाता है जो साउथ एशिया के 200 करोड़ लोगों को पानी प्रदान करता है।
- 26 अगस्त 2023 को नेपाल-चाइना बॉर्डर पर एक विशाल ग्लेशियर टूटने से भयंकर सैलाब आया जिसमें 900 से अधिक लोगों की मौत हुई।
- यह घटना ग्लेशियल लेक आउटबस्ट फ्लड (ग्लॉफ) से अलग थी, क्योंकि यह एक बड़े ग्लेशियर के अचानक टूटने से हुई थी।
- इस हादसे ने नदी में टेम्परेरी झील बना दी, जो बाद में टूटकर भारी तबाही मचाने वाली बाढ़ में बदल गई।
- नेपाल और चीन के बीच अर्ली वार्निंग सिस्टम्स थे, लेकिन इस घटना में अलर्ट समय पर नहीं आ सका।
- रेस्क्यू ऑपरेशन में पहाड़ी रास्तों के टूटने, खराब मौसम और हेलीकॉप्टरों की उड़ान में बाधा के कारण भारी मुश्किलें आईं।
- इस प्रकार के ग्लेशियल हादसों में वार्निंग टाइम बहुत कम होता है, आमतौर पर 20 मिनट से भी कम।
- इतिहास में भी ग्लेशियल लेक आउटबस्ट फ्लड्स की कई बड़ी तबाहियां हो चुकी हैं, जैसे 1985 का माउंट एवरेस्ट के पास हादसा।
- नेपाल की हाइड्रो पावर परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा जिससे बिजली संकट उत्पन्न हुआ।
- यह वीडियो ग्लोबल वार्मिंग के हिमालय पर प्रभाव और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की चुनौतियों पर प्रकाश डालता है।
Chapters
- 00:00हिमालय और थर्ड पोल का परिचय
- 00:53ग्लेशियर लेकक्स और ग्लॉफ की परिभाषा
- 02:01ग्लॉफ और सामान्य बाढ़ में अंतर
- 03:0826 अगस्त 2023 का नेपाल-चाइना बॉर्डर हादसा
- 04:17हादसे के प्रभाव और तबाही
- 06:33हाइड्रो पावर और बिजली संकट
- 07:42रेस्क्यू ऑपरेशन की चुनौतियां
- 08:49अर्ली वार्निंग सिस्टम की विफलता
- 09:49इतिहास में ग्लेशियल आपदाएं
- 11:12पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की चुनौतियां
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Speaker A
हिमालय के इन हजारों फीट ऊंचे बर्फीले पहाड़ों को दुनिया का थर्ड पोल आखिर क्यों कहा जाता है? यह आइस टावर्स साउथ एशिया के 200 करोड़ लोगों की प्यास बुझाते हैं। लेकिन पिछले कुछ दहाइयों में कुदरत का यह शानदार बैलेंस एक खौफनाक टिकिंग टाइम बम में बदल चुका है। 26 अगस्त की सुबह नेपाल और चाइना के बॉर्डर पर जब 900 से ज्यादा [संगीत] लोगों की जान गई तो दुनिया को समझ आया कि क्लाइमेट चेंज की वजह से जिस तबाही का जिक्र हम फ्यूचर के लिए किया करते थे वह असल में आज का प्रेजेंट है। आखिर 26 अगस्त को पहाड़ों के ऊपर क्या हुआ था?
Speaker A
साइज्मोग्राफ्स पर रिकॉर्ड होने वाली वह अजीब वेव्स आखिर किस चीज का इशारा कर रही थी? अर्ली वार्निंग सिस्टम्स ने काम क्यों नहीं किया और तारीख में कितनी बार ऐसे ही हादसे पहले भी हो चुके हैं? ZM टीवी की
Speaker A
वीडियोस में एक बार फिर से खुशामदीद। नाजरीन दुनिया के सबसे ऊंचे और खूबसूरत पहाड़ी सिलसिले हिमालय में हजारों फीट की बुलंदी पर बर्फ के अनगिनत जखीरे मौजूद हैं। यह फ्रोजन टावर्स ना सिर्फ करोड़ों लोगों को मीठा पानी फराहम करते हैं बल्कि
Speaker A
कुदरत का एक ऐसा शानदार बैलेंस भी कायम रखते हैं जो पूरे साउथ एशिया के मौसम को कंट्रोल करता है। लेकिन पिछली कुछ दहाइयों में ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ते टेंपरेचर के बायस यह बर्फानी जखीरे अचानक एक खौफनाक तबाही में बदलने लगे हैं। हाई एल्टीट्यूड
Speaker A
ज़ोन में पिघलती हुई बर्फ से जहां लोगों को पीने का पानी दस्तियाब हो रहा है, वहीं हजारों ग्लेशियर लेकक्स भी वजूद में आ चुकी हैं। और यह लेकक्स नीचे आबाद बस्तियों के लिए आहिस्ता-आहिस्ता खामोश कातिल का रूप धार रही हैं। साइंटिफिक जबान
Speaker A
में इस कुदरती आफत को ग्लेशियल लेक आउटबस्ट फ्लड या फिर ग्लॉफ भी कहते हैं। आसान लफ्जों में कहा जाए तो ग्लॉफ उस सैलाब को कहा जाता है जो इन ग्लेशियर लेकक्स के फटने से आता है। यह हौलनाक कुदरती हादसा उस वक्त पेश आता है जब किसी
Speaker A
बर्फानी झील को रोकने वाली कुदरती दीवार जिसे मोरेन कहा जाता है और जो पत्थरों, मिट्टी और आइस कोर से बनी होती है अचानक टूट जाती है। जब यह मोरेन डैम टूटता है तो लाखों क्यूबिक मीटर पानी, पत्थर, मिट्टी
Speaker A
और बर्फ का एक शदीद सैलाबी तूफान हजारों फीट की बुलंदी से नीचे वादियों की तरफ दौड़ पड़ता है। इस किस्म के सैलाब आम रिवर फ्लड से बिल्कुल मुख्तलिफ होते हैं। आम सैलाबों में मसून की बारिशों की वजह से
Speaker A
पानी का लेवल आहिस्ता-आहिस्ता बढ़ता है। लेकिन ग्लॉव के दौरान पानी का लेवल चंद मिनटों में कई मीटर तक बुलंद हो जाता है। इस सैलाब में लाखों क्यूबिक मीटर पानी के साथ-साथ भारी पत्थर और मिट्टी का स्लरी मिक्सचर भी शामिल होता है जो रास्ते में
Speaker A
आने वाली हर शह मकानात, पुल, सड़क और हाइड्रो पावर प्लांट्स को आनन-फानन तबाह कर देता है। हिंदूकश हिमालय के इलाके में ऐसी 2000 से ज्यादा ग्लेशियर लेकक्स मौजूद हैं। जिनमें से सैकड़ों झील किसी भी वक्त फटने के शदीद खतरे में हैं। पर जो हादसा
Speaker A
26th अगस्त को नेपाल तिब्बत बॉर्डर पर पेश आया, वह ग्लॉव से कई गुना ज्यादा बड़ी चीज थी। नेपाल चाइना बॉर्डर पर इस दिन का सूरज बिल्कुल मामूल के मुताबिक निकला था। सुबह के तकरीबन 8:00 बजे रसुआ डिस्ट्रिक्ट के
Speaker A
इलाके में धूप खिली हुई थी और डिस्ट्रिक्ट हेड क्वार्टर्स में बारिश के आसार दूर-दूर तक नहीं थे। लोकल लोग और हजारों फॉरेन टूरिस्ट्स अपने रोजमर्रा के कामकाज में मशरूफ थे। लेकिन ऊंची पहाड़ी चोटियों पर एक खामोश और बेहद खौफनाक तबाही जन्म ले
Speaker A
रही थी। सुबह 8:37 पर जमीन अचानक शदीद झटकों से लरस उठती है। शुरुआती रिपोर्ट्स में यूएस [संगीत] जियोलॉजिकल सर्वे ने इन झटकों को 4.4 शिद्दत का टेक्टोनिक जलजला करार दिया। लेकिन रिक्टर स्केल पर बनने वाली वेव्स कुछ और ही कहानी बता रही थी।
Speaker A
नॉर्मली अर्थक्वेक में शार्प वेव्स बनती हैं। लेकिन इस केस में जो वेव्स बनी थी, वह पहले छोटी थी, फिर आहिस्ता-आहिस्ता बढ़ती गई। और ऐसा खासतौर पर लैंड स्लाइडिंग के दौरान ही होता है। बाद में जब साइजिक सेंसर्स और सेटेलाइट इमेज को
Speaker A
गौर से स्टडी किया तो हकीकत सामने आई कि कोई ज़रे जमीन जलजला नहीं आया था। हकीकत [संगीत] यह थी कि 5200 मीटर की बुलंदी पर एक बरफानी ग्लेशियर का तकरीबन 0.2 [संगीत] स्क्वायर किलोमीटर का हिस्सा अचानक टूटकर 1200 मीटर नीचे वादी में जा गिरा था।
Speaker A
दुनिया के सबसे छोटे मुल्क वेटिकन सिटी का एरिया 0.49 स्क्वायर कि.मी. है। यानी यह गिरने वाला ग्लेशियर वेटिकन सिटी के आधे साइज के बराबर था। या फिर यूं समझ लें 28 फुटबॉल फील्ड्स जितना बड़ा। इस जबरदस्त धमाके और बर्फ के गिरने से जमीन में 5.2
Speaker A
मैग्नीट्यूड के अर्थक्वेक के बराबर शॉक वेव्स पैदा हुई थी। बर्फ और पत्थरों का यह हौलनाक मलबा जब लैंडे कोला रिवर में गिरा तो इसने नदी के बहाव को रोक कर एक टेंपरेरी झील बना दी। ठीक ग्लॉव की तरह
Speaker A
लेकिन इंतहाई मैसिव स्केल पर। रिवर का पानी इस टेंपरेरी झील में जमा होता गया और चंद मिनटों में ही रिवर एक बहुत बड़ी झील की शक्ल इख्तियार कर गई जिसमें करोड़ों क्यूबिक मीटर पानी जमा हो गया। मलवे की
Speaker A
दीवार ने एक वक्त तक पानी का प्रेशर बर्दाश्त किया और उसके बाद वो एक ही झटके में टूट गई। यह मिट्टी, बची हुई बर्फ और पानी का 500 क्यूबिक मीटर पर सेकंड का सैलाब बहुत कोशी और त्रिशुली रिवर सिस्टम
Speaker A
में दाखिल हो गया। इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट के मुताबिक त्रिशुली रिवर में पानी की सतह सिर्फ 30 मिनटों के अंदर 9 मीटर या 30 फीट तक भर गई। सैलाबी रेले ने बैत्रावती, तिमूरे और सियाफू बेसी के आबाद इलाकों को ना सिर्फ
Speaker A
टारगेट किया बल्कि उनको सफा-ए-हस्ती से ही मिटा दिया। पहाड़ से आने वाले खौफनाक शोर और पानी के तूफान ने लोगों को संभलने का मौका तक नहीं दिया। सिर्फ चंद सेकंड्स में मल्टीस्टोरी बिल्डिंग्स, गाड़ियां और रास्ते पानी की जद में आकर गायब हो गए। इस
Speaker A
अचानक आने वाले सैलाब ने नेपाल और चाइना दोनों तरफ बेहद तबाही मचाई। [संगीत] चाइना और नेपाल के बॉर्डर पर मौजूद गिरोंग पोर्ट इस सैलावी दीवार की जद में आकर मुकम्मल तौर पर मिट्टी और मलबे तले दब गया। नेपाल
Speaker A
चाइना को मिलाने वाला हिस्टोरिक फ्रेंडशिप ब्रिज और अहम ट्रेड रूट्स भी पूरी तरह तबाह हो गए। ऑफिशियल रिपोर्ट्स के मुताबिक 31 अगस्त तक इस हादसे में 903 लोगों की जान जा चुकी है। जबकि 4240 लोग अभी भी मिसिंग हैं और यह नंबर्स हर
Speaker A
गुजरते घंटे बढ़ते ही जा रहे हैं। इसके अलावा हाइड्रो पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहद नुकसान पहुंचा। बहुत कोशी और त्रिशुली नदियों पर बने 10 से ज्यादा बिजली घर तबाह या शदीद मुतासिर हुए। जिनमें 111 मेगावाट रसुआ गादी चिली में और
Speaker A
त्रिशुली हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। इससे नेपाल की नेशनल ग्रिड को शदीद बिजली के बोहरान का सामना करना पड़ा। यह तो रहा सिर्फ तबाही का हाल लेकिन असली मसले से अभी तक लड़ा जा रहा है और वो है
Speaker A
रेस्क्यू ऑपरेशन। इस किस्म के एक्सट्रीम एलटीट्यूड डिजास्टर्स में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना दुनिया के मुश्किल तरीन कामों में से एक है। अगस्त 2026 के नेपाल डिजास्टर में रिलीफ टीम्स को शदीद मुश्किलात का सामना करना पड़ा। सबसे पहला मसला था
Speaker A
पहाड़ी रास्तों का खात्मा। सैलाब ने नेपाल और तिब्बत के दरमियान राब्ता कायम करने वाली 40 कि.मी. लंबी सड़क को जगह-जगह से बहाकर मिट्टी में मिला दिया। दर्जनों ब्रिज सैलाब में बह गए जिसकी वजह से रेस्क्यू व्हीकल्स के लिए विक्टिम्स तक
Speaker A
पहुंचना बिल्कुल नामुमकिन हो गया। दूसरा मसला था खराब मौसम। हिमालय में क्लाउड कवर की वजह से रेस्क्यू हेलीकॉप्टर्स अगले कई दिनों तक उड़ान ना भर सके। हिमालय में वैलीज की जियोमेट्री इतनी नैरो है कि हेलीकॉप्टर्स के लिए लो विजिबिलिटी में
Speaker A
फ्लाई करना इंतहाई खतरनाक होता है। जब तक पानी का लेवल और क्लाउड कवर कम नहीं हुआ एयर एंबुलेंस और सप्लाई फेंकना नामुमकिन था। चाइना और नेपाल ने मिलकर हिमालयन बेसन में अर्ली वार्निंग मॉनिटरिंग सिस्टम्स लगाए थे। इस सिस्टम ने बड़ी झीलों के फटने
Speaker A
के सात अलर्ट्स पहले भी जारी किए थे। तो सवाल पैदा होता है कि 26th अगस्त के हादसे में अलर्ट क्यों ट्रिगर नहीं हुआ? असल में यह हादसा नॉर्मल ग्लेशियल लेक आउटबस्ट से काफी बड़ा था। शुरुआती मिनटों में इसे
Speaker A
अर्थक्वेक ही तसवुर किया जा रहा था। लेकिन सेटेलाइट इमेज जब तक अपडेट हुआ तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 837 पे ग्लेशियर टूट कर गिरा और अगले 3 मिनटों में ही पहला फ्लैश फ्लड देखा गया। पानी और मलबे की यह तेज
Speaker A
लहर जब लहरी और बोते कोशी नदियों से होती हुई आगे बढ़ी तो 8:50ों पर स्याबर बेसी मॉनिटरिंग स्टेशन और 9:15ों के करीब रसुआ के आबाद इलाकों में तबाही मचाते हुए दाखिल हुई। अल्पाइन ग्लेशियोलॉजिस्ट के मुताबिक ऐसी हाई एलटीट्यूड आइस कोलैप्स में वार्निंग टाइम
Speaker A
20 मिनट से ज्यादा नहीं मिलता और 20 मिनट के बाद भी जब तक अलर्ट जारी हुए तब तक बहुत देर हो चुकी थी। यहां आपको बताता चलूं कि ग्लेशियल लेक आउटबस्ट फ्लड्स की तारीख बहुत खौफनाक रही है। यह तो 2026 में
Speaker A
वीडियोस का दौर है तभी इस दहशतनाक मंजर को दुनिया देख सकी। लेकिन तबाही पहले भी काफी मची थी। 4th अगस्त 1985 को नेपाल में ही माउंट एवरेस्ट के करीब नांगपो सांगपो वैली में 4300 मीटर की बुलंदी पर वाक डिक्ट शो
Speaker A
लेक पर अचानक एक ग्लेशियर आकर गिरा। इस एलांचं ने झील के अंदर बहुत बड़ी लहरें पैदा की जिन्होंने डैम की दीवार को ओवरटॉप करके तोड़ दिया। इसकी वजह से तकरीबन 350 मिलियन क्यूबिक फीट पानी अचानक वादी में बह निकला। 50 फीट ऊंची सैलाबी लहर ने 55
Speaker A
मील दूर डाउन स्ट्रीम तक तबाही मचाई। इस दौरान नमचे हाइड्रो पावर प्लांट सम
Speaker A
लेक पर अचानक एक ग्लेशियर आकर गिरा। इस एलांचं ने झील के अंदर बहुत बड़ी लहरें पैदा की जिन्होंने डैम की दीवार को ओवरटॉप करके तोड़ दिया। इसकी वजह से तकरीबन 350 मिलियन क्यूबिक फीट पानी अचानक वादी में बह निकला। 50 फीट ऊंची सैलाबी लहर ने 55
Speaker A
मील दूर डाउन स्ट्रीम तक तबाही मचाई। इस दौरान नमचे हाइड्रो पावर प्लांट समेत 14 ब्रिजेस, ट्रे्स और खेतीबाड़ी की जमीनें मुकम्मल तौर पर खत्म हो गई। इस हादसे ने दुनिया भर के ग्लेशियोलॉजिस्ट को ग्लॉफ के खतरात पर इन्वेस्टिगेशन करने पर मजबूर
Speaker A
किया। दुनिया की तारीख का सबसे डेडलीस्ट ग्लोफ इवेंट पेरू के कोडियरा ब्लंका माउंटेन रेंज में वाके लेक पालका कोचा में 13th दिसंबर 1941 को पेश आया था। माउंट पालका रुजा से ग्लेशियर का एक बहुत बड़ा हिस्सा टूट कर झील में गिरा। झील का डैम
Speaker A
फटने से मिट्टी और पानी का सैलाब नीचे वाकई वाराज़ शहर पर जा गिरा। इस अकेले इवेंट ने वारा शहर का 1/3 हिस्सा मुकम्मल तौर पर तबाह कर दिया और 1800 से ज्यादा लोगों की जान ले ली। 11th जुलाई 1981 को
Speaker A
तिब्बत में वाकई सिरेनमा को नामी लेक फटने से जो सैलाब आया उसने नेपाल में सनकोशी वाटर शेड को तबाह किया था। इस ट्रांस बाउंड्री फ्लड ने चाइना नेपाल फ्रेंडशिप ब्रिज को पहली बार बहाया था और नेपाल में 200 से ज्यादा अफराद की जान ली थी। इस
Speaker A
इवेंट ने 1981 में ही वाज़ कर दिया था कि हिमालय के बॉर्डर्स कुदरती आफत के आगे कोई मायने नहीं रखते। फरवरी 202 में इंडिया की चिमोली डिस्ट्रिक्ट में 27 मिलियन क्यूबिक मीटर आइस एोलॉन्ज ऋषि गंगा और धौलीगंगा रिवर्स में गिरा। इसके नतीजे में आने वाले
Speaker A
फ्लैश फ्लड्स ने 35 मेगावाट ऋषि गंगा और 520 मेगावाट विष्णुगढ़ हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स को तबाह कर दिया और 200 लोगों की जान छीन ली। ऐसे ही अक्टूबर 2023 में नॉर्थ सिक्किम में वाक लोनक लेक की मोरीन वॉल पिघलने और मिट्टी खिसकने से फट गई।
Speaker A
इसके नतीजे में टीस्ता रिवर में खौफनाक सैलाब आया जिसने ना सिर्फ 1200 मेगावाट डैम को बहाया बल्कि 100 से ज्यादा लोगों की जान लेने के साथ-साथ 90 हजार लोगों को बेघर भी कर दिया। पर आखिर ग्लॉव के ज्यादातर इवेंट्स हिमालय में ही क्यों हो
Speaker A
रहे हैं? 1985 और 2023 में डिजास्टर्स का मेन ट्रिगर मोरीन वॉल्स का इरोजन या ओवरटॉपिंग था। लेकिन 202 ऋषि गंगा डिजास्टर और अभी नेपाल के हादसे में जो तबाही मची वह किसी डेंजरस लेक के फटने से नहीं बल्कि ग्लेशियर कोलैप्स होकर वादी
Speaker A
में गिरने से हुई। एक्सपर्ट्स इस खतरे का बार-बार जिक्र कर रहे हैं कि बढ़ती हुई ग्लोबल वार्मिंग के बायस हाई एल्टीट्यूड पर मौजूद परमाफ्रॉस्ट यानी जमी हुई जमीन पिघल रही है जिससे पहाड़ों और ग्लेशियर्स की मैकेनिकल स्टेबिलिटी खत्म हो रही है।
Speaker A
रही बात कि ग्लोफ इवेंट्स का नुकसान पहले के मुकाबले में ज्यादा क्यों हो रहा है?
Speaker A
तो इसका जवाब यह है कि 1985 में जब डिक टूशूड लेक फटी तो डाउन स्ट्रीम में उस वक्त सिर्फ एक छोटा हाइड्रो पावर प्लांट था। लेकिन 2026 में नेपाल और चाइना ने इन्हीं तंग रिवर चैनल्स के अंदर मल्टी
Speaker A
बिलियन डॉलर हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स और इंटरनेशनल ट्रेड कॉरिडोर्स बना रखे थे। जाहिर है जितनी ज्यादा डेवलपमेंट होगी नुकसान भी उतना ही ज्यादा होगा। यही वजह है कि मॉडर्न ग्लॉफ इवेंट्स का असर तारीखी इवेंट्स के मुकाबले में कहीं ज्यादा होता
Speaker A
है। अगस्त 2026 का नेपाल डिजास्टर इस बात की खुल्लम खुल्ला वार्निंग है कि हिंदू हिमालयन रीजन में क्लाइमेट चेंज के असरात अब आने वाले वक्त की नहीं बल्कि आज की हकीकत है। यूएन रिपोर्ट्स के मुताबिक हिमालयन ग्लेशियर्स 2011 से 2020 के
Speaker A
दरमियान पहले के मुकाबले में 65% ज्यादा तेजी से पिघल रहे हैं। रीजन में 2000 से ज्यादा ग्लेशियर लेकक्स हैं। जिनमें से दर्जनों को हद से ज्यादा खतरनाक डिक्लेअ किया जा चुका है। हिमालय में फ्रोजन टावर्स का पिघलना सिर्फ एक मुल्क या एक
Speaker A
वादी का मसला नहीं है। हिंदूकश हिमालय रीजन को दुनिया का थर्ड पोल कहा जाता है। क्योंकि नॉर्थ और साउथ पोल के बाद सबसे ज्यादा बर्फ इन्हीं पहाड़ों पर मौजूद है और इसी बर्फ से निकलने वाली नदियां पूरे साउथ एशिया के 200 करोड़ लोगों की प्यास
Speaker A
बुझाती हैं। तरक्की की रेस में हमने इन पहाड़ी वादियों में हाइड्रो पावर डैम्स, हाईवेज और शहर तो खड़े कर दिए हैं, लेकिन हम उस कुदरत का ख्याल रखना भूल गए जो इन पहाड़ों की बुनियाद हैं। सवाल यह नहीं है
Speaker A
कि अगला ग्लॉफ या ग्लेशियर कोलैप्स आएगा या नहीं। बल्कि असल सवाल यह है कि क्या हम अगले 20 मिनट के वार्निंग टाइम के लिए तैयार हैं या नहीं? उम्मीद है ZM टीवी की यह वीडियो भी आप लोग भरपूर लाइक और शेयर
Speaker A
करेंगे। आप लोगों के प्यार भरे कमेंट्स का बेहद शुक्रिया। मिलते हैं अगली शानदार वीडियो में।
Topics:नेपाल डिजास्टरहिमालय ग्लेशियरग्लेशियल लेक आउटबस्ट फ्लडग्लॉफअर्ली वार्निंग सिस्टमक्लाइमेट चेंजहाइड्रो पावर नुकसानरेस्क्यू ऑपरेशननेपाल-चाइना बॉर्डरप्राकृतिक आपदा











