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The Deadliest River on Earth!

कांगो रिवर, दुनिया की सबसे खौफनाक और गहरी नदी, अपने तेज बहाव और खतरनाक जीवों के कारण जानलेवा साबित होती है।

Key Takeaways

  • कांगो रिवर दुनिया की सबसे गहरी और खतरनाक नदियों में से एक है।
  • इस नदी में तेज बहाव, गहराई और खतरनाक जीवों के कारण इंसानों के लिए जानलेवा खतरा है।
  • इतिहास और आधुनिक काल दोनों में इस नदी ने कई जानलेवा हादसे देखे हैं।
  • कांगो रिवर का पर्यावरणीय महत्व भी बहुत बड़ा है, क्योंकि यह विशाल रेन फॉरेस्ट का हिस्सा है।
  • इस नदी की गहराई और प्रवाह की ताकत आज भी वैज्ञानिकों के लिए एक रहस्य बनी हुई है।

What the video covers

  • अमेज़ॉन रिवर की तुलना में कांगो रिवर अधिक खतरनाक और गहरी है।
  • 1874 में हेनरी मॉन स्टैनली के नेतृत्व में 356 लोगों की टीम में से केवल 114 लोग जीवित बच सके।
  • कांगो रिवर में नाइल क्रोकोडाइल्स और अन्य खतरनाक जीव रहते हैं जो इंसानों के लिए जानलेवा हैं।
  • 2010 में प्रसिद्ध रिवर गाइड हेनरी कुड की कांगो रिवर में क्रोकोडाइल के हमले में मौत हो गई।
  • कांगो रिवर की लंबाई लगभग 4700 कि.मी. है और यह 10 देशों में फैली हुई है।
  • इस नदी का ड्रेनेज बेसिन 36 लाख स्क्वायर किलोमीटर में फैला है, जो इसे दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी नदी बनाता है।
  • कांगो रिवर का पानी प्रति सेकंड लगभग 12,50 क्यूबिक फीट मीठा पानी अटलांटिक महासागर में गिराता है, जो मिसिसिपी से दोगुना है।
  • लोअर कांगो में नदी की गहराई लगभग 720 फीट है, जो इसे दुनिया की सबसे गहरी नदी बनाती है।
  • नदी का तेज बहाव और संकीर्ण मार्ग इसे अत्यंत खतरनाक बनाते हैं, जिससे कई बार नाव दुर्घटनाएं हुई हैं।
  • कांगो रेन फॉरेस्ट नदी के दोनों किनारों पर फैला हुआ है, जो दुनिया के दूसरे सबसे बड़े ट्रॉपिकल रेन फॉरेस्ट में से एक है।

Answers

Questions about this video

कांगो रिवर को दुनिया की सबसे खतरनाक नदी क्यों माना जाता है?

कांगो रिवर तेज बहाव, गहराई, खतरनाक जीव जैसे नाइल क्रोकोडाइल्स और संकीर्ण मार्गों के कारण बेहद खतरनाक है, जिससे कई जानलेवा हादसे होते हैं।

कांगो रिवर की गहराई अमेज़ॉन रिवर से कितनी ज्यादा है?

कांगो रिवर की गहराई लगभग 720 फीट है, जो अमेज़ॉन रिवर की 330 फीट गहराई से दोगुनी से भी ज्यादा है।

कांगो रिवर के किन किन देशों में बहती है?

कांगो रिवर अफ्रीका के 10 अलग-अलग देशों से होकर गुजरती है, जो इसे एक विशाल और महत्वपूर्ण जल स्रोत बनाती है।

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Speaker A
हम जब भी दुनिया की सबसे खौफनाक और खतरनाक नदी के बारे में सोचते हैं, तो हमारे जहन में सबसे पहले अमेज़ॉन रिवर का नाम आता है। लेकिन आज जो सच आप जानने वाले हैं, उसके बाद आपका यह डर बदलने वाला है। क्योंकि
00:15
Speaker A
अमेज़ॉन तो सिर्फ एक शुरुआत है। सेंट्रल अफ्रीका के घने और ताज़ा जंगल के बीच एक ऐसी नदी बहती है जहाँ पानी की रफ्तार इंसानी जिस्म के टुकड़े-टुकड़े कर सकती है। और जहाँ सरफेस से 700 फीट से भी ज्यादा नीचे अजीबोगरीब दहशतनाक और अंधे
00:33
Speaker A
जानवर रहते हैं। एक ऐसी नदी जो दुनिया की सबसे गहरी नदी है, द कंगो रिवर। ज़ेम टीवी की वीडियोस में एक बार फिर से खुशामदीद। नाजरीन इस खौफनाक नदी के असली चेहरे को समझने के लिए हमें जाना पड़ेगा साल 1874
00:49
Speaker A
में। हेनरी मॉन स्टैनली नामी एक मशहूर जर्नलिस्ट ने 356 लोगों के एक बड़े ग्रुप के साथ सेंट्रल अफ्रीका को इस नदी के जरिए पार करने की कोशिश की। यह कोई आम सफर नहीं था। यह सीधा-सीधा मौत के मुंह में कदम
01:05
Speaker A
रखने जैसा था। और इस बात का खौफनाक अंदाजा उन्हें तब हुआ जब 999 दिनों के इस जहन्नमी सफर के बाद वह अटलांटिक ओशन के किनारे पहुंचे तो उन 356 लोगों में से सिर्फ 114 लोग ही जिंदा बचे थे। और सबसे खौफनाक बात
01:23
Speaker A
यह थी कि स्टैनली के साथ सफर शुरू करने वाला हर एक यूरोपियन रास्ते में ही दम तोड़ चुका था। कोई खौफनाक बीमारी का शिकार हुआ। कोई तेज बहाव में डूब गया तो किसी को पानी के खुफिया शिकारियों ने जिंदा निकाल
01:38
Speaker A
लिया। लेकिन अगर आपको लगता है कि 19th सेंचुरी में सेफ्टी और टेक्नोलॉजी ना होने की वजह से यह सब हुआ तो आप बिल्कुल गलत हैं। कांगो रिवर आज 21वीं सदी में भी बड़े से बड़े एक्सपर्ट्स की जान लेने में
01:52
Speaker A
जरा भी रहम नहीं दिखाती। 2010 में अफ्रीका के सबसे माहिर और मशहूर रिवर गाइड हेनरी कुड अपने दो अमेरिकन साथियों के साथ लुकगा रिवर पर कायक चला रहे थे जो कांगो रिवर की एक ट्रिब्यूटरी है। हेनरी को अफ्रीका की
02:08
Speaker A
नदियों और वहाँ के जंगली जानवरों से निपटने का हजारों घंटे का तजुर्बा था। वह जानते थे कि हिपोस और क्रोकोडाइल्स से कैसे बचना है। लेकिन एक नॉर्मल दिन जब पानी बिल्कुल खामोश था और उनकी कायक्स सिर्फ 4 से 5 फीट की दूरी पर तैर रही थी।
02:26
Speaker A
बिना किसी आहट के पानी के सरफेस से एक बहुत बड़ा नाइल क्रोकोडाइल बाहर निकला। उसने एक सेकंड के हजारवें हिस्से में हेनरी को उनकी कायक से खींचा और पानी के अंदर गायब हो गया। उनके साथियों के देखते ही देखते हेनरी हमेशा के लिए खत्म हो गए
02:43
Speaker A
और उनकी डेड बॉडी कभी नहीं मिल पाई। कांगो रिवर का खामोश पानी भी एक ऐसा मौत का जाल है जो सबसे माहिर लोगों को भी संभलने का मौका नहीं देता। सिर्फ इतना ही नहीं, इसी साल कश्ती उलटने से 138 लोग अपनी कीमती
03:00
Speaker A
जाने गवा बैठे। दिसंबर 2018 में रात के वक्त कांगो रिवर 100 लोगों को निगल गई। फरवरी 202 में कांगो रिवर का वायलेंट पानी एक और बोट को निकाल गया जिसमें 60 लोग जान से गए और बाकियों का कोई पता नहीं चला और
03:16
Speaker A
अक्टूबर 2023 में 140 लोग इस बेरहम नदी की जद में आकर अपनी जान से हाथ धो बैठे। पर इस रिवर को खतरनाक बनाने वाली चीज आखिर है क्या? इस नदी के असली खौफ को समझने के लिए पहले इसके बहाव और ताकत को समझना जरूरी
03:35
Speaker A
है। कांगो रिवर नॉर्थ ईस्टर्न जिंबिया के हाईलैंड से शुरू होती है और सेंट्रल अफ्रीका के दिल से होती हुई एक बहुत बड़े काउंटर क्लॉकवाइज आर्क में अटलांटिक ओशन की तरफ बहती है। इसकी कुल लंबाई लगभग 4700 कि.मी. है जो इसे दुनिया की नाइंथ सबसे
03:53
Speaker A
लंबी नदी बनाती है। लेकिन सिर्फ लंबाई से ही इस नदी के खौफ का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। कांगो रिवर का ड्रेनेज बेसिन 36 लाख स्क्वायर किलोमीटर के इलाके में फैला हुआ है और यह नदी 10 अलग-अलग मुल्कों में फैली
04:08
Speaker A
हुई है। लंबाई में तो इसका दुनिया में नौवां नंबर है लेकिन ड्रेनेज बेसिन के हिसाब से यह दूसरी बड़ी रिवर है। अगर आप मैप पर देखेंगे तो यह रिवर पूरे अफ्रीकन कॉन्टिनेंट के अंदर दौड़ने वाली खून की नसों की तरह नजर आती है। वॉल्यूम की बात
04:25
Speaker A
करें तो हर एक सेकंड में लगभग 12,50 क्यूबिक फीट मीठा पानी कांगो रिवर से निकलकर अटलांटिक ओशन में गिरता है। इसका कंपैरिजन अगर हम अमेरिका की सबसे बड़ी मिसिसिपी रिवर से करें तो वह हर सेकंड में सिर्फ 5900
04:42
Speaker A
क्यूबिक फीट पानी बहाती है। यानी कांगो रिवर मिसिसिपी के मुकाबले में डबल से भी ज्यादा पानी हर सेकंड ओशन में फेंकती है। इसका बहाव इतना तेज है कि ओशन के अंदर भी यह 800 किलोमीटर दूर तक जमीन को काट कर
04:57
Speaker A
अपना रास्ता बनाती है। यह एक ऐसा पानी का सैलाब है जो कभी नहीं रुकता। हर घंटे, हर दिन, हर साल यह फ्लो चलता रहता है। इस नदी के दोनों तरफ फैला हुआ है कांगो रेन फॉरेस्ट जिसका शुमार दुनिया के दूसरे सबसे
05:14
Speaker A
बड़े ट्रॉपिकल रेन फॉरेस्ट में होता है। यह 50 करोड़ एकड़ पर फैला हुआ जंगल हजारों किस्म के पौधों, कीड़े-मकोड़ों, परिंदों और जानवरों का घर है। यह जंगल इतना बड़ा है कि हवा से हजारों टन कार्बन डाइऑक्साइड अब्सॉर्ब करने में इसका दुनिया में दूसरा
05:31
Speaker A
नंबर है और तभी इसे सेकंड लंग ऑफ अर्थ भी कहते हैं। जियोग्राफर्स इस नदी को तीन हिस्सों में बांटते हैं। अपर कांगो, मिडिल कांगो और लोअर कांगो। अपर कांगो इसके सोर्स से शुरू होकर बोयोमा फॉल्स तक जाती है। मिडिल कांगो वो बड़ा आर्क बनाती है जो
05:49
Speaker A
पूरे कॉन्टिनेंट के सेंटर को डोमिनेट करता है। लेकिन सबसे खौफनाक और अनएक्सेक्टेड हिस्सा है लोअर कांगो। यह लोअर कांगो वाला पार्ट सिर्फ 320 कि.मी. लंबा है। लेकिन इसके अंदर वह सब कुछ मौजूद है जो इस नदी को दुनिया की हर दूसरी नदी से बिल्कुल अलग
06:08
Speaker A
और दहशतनाक बनाता है। यहाँ पानी की रफ्तार, गहराई और प्रेशर ऐसे रिकॉर्ड्स बनाते हैं जो साइंस के लिए भी एक हैरानक पहेली बने हुए हैं। लोअर कांगो के इलाके मलिबो पूल और पियोका के बीच डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में जब नदी की गहराई
06:25
Speaker A
नापी गई तो एक ऐसा नंबर सामने आया जिसने पूरी दुनिया के साइंटिस्ट को हिलाकर रख दिया। यहाँ कांगो रिवर की कंफर्म्ड गहराई लगभग 720 फीट है। जी हाँ, 720 फीट। आमतौर पर नदियाँ वाइड होती हैं और उनकी गहराई कम
06:42
Speaker A
होती है। लेकिन कांगो रिवर जमीन के अंदर एक ऐसा मौत का कुआं बनाती है जो सीधा जमीन के दिल में उतरता है। इस 700 फीट की गहराई को समझने के लिए एक मिसाल लेते हैं। अमेरिका का मशहूर स्टैचू ऑफ लिबर्टी अपने
06:56
Speaker A
बेस से टॉर्च की नोक तक लगभग 300 फीट ऊंचा है। अगर आप दो स्टैचू ऑफ लिबर्टी को एक के ऊपर एक खड़ा कर दें तब भी वह कांगो रिवर की सबसे गहरी जगह पर पूरी तरह पानी के अंदर डूब जाएगा और उसके ऊपर भी 110 फीट
07:13
Speaker A
पानी बचा रहेगा। नदी के किनारे खड़े होकर देखने पर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता कि इस पानी के नीचे वर्टिकल डायरेक्शन में कितनी बड़ी दुनिया छुपी हुई है। मैरीन साइंटिस्ट बताते हैं कि ओशन में 660 फीट की गहराई के नीचे एक ऐसा ज़ोन शुरू होता है
07:30
Speaker A
जहाँ सूरज की रोशनी पूरी तरह खत्म हो जाती है और पानी का प्रेशर साहिल समंदर के मुकाबले में 20 टाइम्स बढ़ जाता है। इस ज़ोन को मेजोपलाजिक ज़ोन या टॉयलाइट ज़ोन भी कहा जाता है। हैरानक बात यह है कि कांगो
07:45
Speaker A
रिवर की गहराई इस ओशन के टॉयलाइट ज़ोन को भी पार कर जाती है। इसके मुकाबले में अगर हम अमेज़ॉन रिवर को देखें तो अमेज़ॉन की डेप्थ सिर्फ 330 फीट है। यानी गहराई के मामले में कांगो ना सिर्फ डबल से भी
08:00
Speaker A
ज्यादा है बल्कि दुनिया की सबसे गहरी रिवर भी है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि 2009 तक किसी को पता ही नहीं था कि कांगो रिवर के नीचे यह गहरी दुनिया भी मौजूद है। 2009 में यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल
08:15
Speaker A
सर्वे के रिसर्चर्स ने जब लोअर कांगो के डीप में सोनार इक्विपमेंट डाला तो अनएक्सेक्टेडली उन्हें 700 फीट की गहराई का पता चला। हमारी जमीन का एक इतना इंपॉर्टेंट डाटा 21वीं सदी तक इंसानों से छुपा रहा। साइंटिस्ट का मानना है कि 720
08:32
Speaker A
फीट सिर्फ वो मिनिमम डेप्थ है जो उन्होंने कंफर्म की है। लोअर कांगो के बहुत से हिस्से इतने तेज और डेंजरस हैं कि वहाँ आज तक सोनार इक्विपमेंट डाला ही नहीं जा सका। इसका मतलब है कि नदी के नीचे इससे भी
08:46
Speaker A
ज्यादा गहरी खाइयां मौजूद हो सकती हैं जो अभी तक अनडिसकवर्ड हैं। सोनार इमेजेस से यह भी पता चला कि नदी का फ्लोर कोई नरम मिट्टी का नहीं है बल्कि वहाँ तेजधार पत्थर, गहरे खड्डे और खुरदरे पत्थर हैं जिसे तेज बहाव ने हजारों सालों में काटकर
09:04
Speaker A
बनाया है। अब सवाल पैदा होता है कि यह नदी इतनी गहरी हुई कैसे? इसका जवाब है इसकी एलिवेशन ड्रॉप और पानी की ताकत। ओशन में गिरने से पहले के आखिरी 100 कि.मी. में कांगो रिवर लगभग 656 फीट नीचे गिरती है।
09:20
Speaker A
अब इसका कंपैरिजन अमेज़ॉन से किया जाए तो अमेज़ॉन रिवर को 656 फीट की हाइट ड्रॉप करने के लिए 5000 कि.मी. का सफर तय करना पड़ता है। लेकिन कांगो इतनी ऊंचाई सिर्फ 100 कि.मी. में पूरी कर लेती है। इसका
09:36
Speaker A
मतलब है कि यहाँ पानी बहुत तेज ढाल से नीचे गिरता है। और सबसे खौफनाक बात यह है कि सराउंडिंग लैंडस्केप नदी को स्क्वीज़ कर देता है। एक तरफ लाखों क्यूबिक फीट पानी बाहर निकलने की कोशिश कर रहा होता है
09:51
Speaker A
और दूसरी तरफ पहाड़ नदी को तंग करके सिर्फ 820 फीट चौड़ी जगह से गुजरने पर मजबूर करता है। यहाँ तक कि अक्सर मकामात पर इसकी चौड़ाई सिर्फ 300 फीट हो जाती है। और यही चीज कांगो रिवर में पानी के बहाव को तेज
10:08
Speaker A
करती है। ठीक? जैसे पानी के पाइप को अगर हम दबाएं तो वही पानी तेज प्रेशर से निकलने लगता है। सोचिए हर एक सेकंड में 15 लाख क्यूबिक फीट पानी तंग पथरीली जगह से गुजरता है तो वहाँ क्या मंजर होता होगा?
10:23
Speaker A
पानी को फैलने की जगह नहीं मिलती तो वह जमीन को नीचे की तरफ तेजी से काटना शुरू कर देता है। इस वजह से बनने वाले वाटरफॉल्स को
10:37
Speaker A
है जो 350 कि.मी. तक फैला हुआ है और टोटल 900 फीट का ड्रॉप लेता है। यह दुनिया के सबसे ऊंचे वॉटरफॉल्स नहीं है। लेकिन अगर पानी के वॉल्यूम के हिसाब से देखा जाए तो यह दुनिया के सबसे बड़े वाटर फॉल्स जरूर
10:53
Speaker A
हैं। नायाग्रा फॉल्स या विक्टोरिया फॉल्स में से निकलने वाला पानी लिविंग स्टोन फॉल्स के सामने कुछ भी नहीं है। जबकि कांगो में पानी की रफ्तार और प्रेशर इतना ज्यादा होता है कि अगर कोई इंसान इसमें गिर जाए तो लंग्स में पानी भरने से पहले
11:09
Speaker A
ही हड्डियां टूटने से उसकी मौत [संगीत] हो जाएगी। इस गहरी और तारीक दुनिया के अंदर एक ऐसी मछली रहती है जो किसी नाइट मेयर जैसी लगती है। यह दुनिया की वाहिद अंधी मछली है जिसे सिक्लेड भी कहा जाता है। यह
11:23
Speaker A
मछली लोअर कांगो के सबसे गहरे हिस्से में 520 फीट से ज्यादा गहराई में रहती है। जहां परमानेंट डार्कनेस और क्रशिंग प्रेशर होता है। इस मछली का जिस्म बिल्कुल सफेद और ट्रांसलूसेंट होता है क्योंकि इसके जिस्म में कोई पिगमेंट नहीं होता और इसकी
11:40
Speaker A
स्किन के नीचे टिश्यूस नजर आते हैं। इसकी आंखें स्किन के अंदर दब चुकी हैं और यह बिल्कुल नहीं देख सकती। लोकल फिशरमैन अक्सर देखते थे कि नदी के किनारे यह अजीब सफेद मरी हुई मछलियां बहकर आ जाती थी।
11:56
Speaker A
लेकिन किसी ने उन्हें जिंदा नहीं देखा था। 2009 में साइंटिस्ट ने जब रिसर्च की तो उन्हें पता चला कि जब नदी के नीचे वायलेंट अपवेलिंग करंट्स बनते हैं तो वह इन मछलियों को 520 फीट की गहराई से खींचकर
12:10
Speaker A
सरफेस की तरफ ले आते हैं। और जैसे ही यह मछलियां सरफेस पर आती हैं, पानी का दबाव एकदम कम हो जाता है। इस वजह से इनके जिस्म के अंदर मौजूद गैसेस के बुलबुले बन जाते हैं और इनके इंटरनल ऑर्गन्स फट जाते हैं।
12:25
Speaker A
यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे एक डीप सी ड्राइवर अगर समंदर से एकदम तेजी से ऊपर आए तो उसे डीकंप्रेशन सिंड्रोम हो जाता है। इन मछलियों के लिए उनकी अपनी नदी का ऊपर का पानी जहर बन जाता है। 2025 की डीएनए
12:41
Speaker A
रिसर्च से पता चला कि हजारों सालों में इस मछली के वो जींस जो आंखें और रंग बनाते हैं वह पूरी तरह डीएक्टिवेट हो चुके हैं। लेकिन अगर हम सरफेस की तरफ आए तो कांगो रिवर के तेज पानी में दुनिया का सबसे
12:56
Speaker A
खौफनाक फ्रेश वाटर प्रिडेटर तैर रहा होता है। इसका नाम है गुलायत टाइगर फिश, जिसे लोकल जुबान में वाटर डॉग भी कहते हैं। यह कोई आम मछली नहीं, यह 4 से 5 फीट लंबी होती है और इसका वजन 40 से 50 किलो तक
13:12
Speaker A
होता है। इसका जिस्म एक मस्कुलर टॉर्पिडो की तरह होता है जो इसे तेज बहाव में भी गोली की रफ्तार से तैरने में मदद देता है। इसका सबसे खौफनाक हिस्सा इसका मुंह है। इसके मुंह में 32 बड़े और तेज दांत होते
13:27
Speaker A
हैं जो लगभग 1 इंच लंबे होते हैं। जब इसका जबड़ा बंद होता है तो इसके दांत जिपर की तरह एक दूसरे में इंटरलॉक हो जाते हैं। कांगो रिवर का खौफ सिर्फ वाटर डॉग्स में ही नहीं है। खामोश पानी में एक और शिकारी
13:43
Speaker A
भी छुपा होता है। यह है नाइल क्रोकोडाइल जिसे क्रोकोडिलस निकोटिकस भी कहते हैं। यह दुनिया के सबसे बड़े रेप्टाइल्स में से एक है। एक बड़ा नाइल क्रोकोडाइल 20 फीट तक लंबा और 725 केजी से ज्यादा भारी हो सकता
13:59
Speaker A
है। पूरे अफ्रीका में हर साल किसी भी दूसरे जानवर से ज्यादा इंसानी मौतों के लिए नाइल क्रोकोडाइल को जिम्मेदार माना जाता है। यह गंदे पानी में बिल्कुल खामोश रहते हैं। इनकी आंखें और नाक सर के ऊपर होती हैं जिससे इनका पूरा जिस्म पानी के
14:15
Speaker A
अंदर रहता है। जब कोई शिकार पानी के पास आता है तो यह सेकंड के हजारवें हिस्से में अटैक करके उसे पानी के नीचे खींच लेते हैं। 2010 में हेनरी कॉटजी के साथ भी यही हुआ था। उनका तजुर्बा और सेफ्टी रूल्स भी
14:31
Speaker A
नाइल क्रोकोडाइल के एंबुश अटैक के सामने बेकार साबित हुए। अगर आप पानी से बाहर निकलकर सराउंडिंग रेन फॉरेस्ट में कदम रखें तो वहां जहरीले सांप आपका इंतजार कर रहे होते हैं। ब्लैक मेंबा 5 मीटर पर सेकंड की स्पीड से चल सकता है और इसका जहर
14:48
Speaker A
बिना एंटी वेनम के 100% जानलेवा होता है। गैबून वाइपर के पास दुनिया के किसी भी सांप से ज्यादा वेनम पाया जाता है जो सिर्फ एक बाइट में कई लोगों को मार सकता है। इसके अलावा बुश वाइपर्स, बफ एडर्स और
15:03
Speaker A
कोबरास भी इस जंगल में आम है। सबसे बड़ा मसला यह है कि कांगो के घने जंगल में मेडिकल केयर या एंटी वेनम भी नहीं मिलता जिसकी वजह से सांप के काटने पर मौत यकीनन हो जाती है। अमेज़ॉन रिवर बेशक बहुत बड़ी
15:19
Speaker A
है। लेकिन कांगो रिवर के पास जो गहराई एलिवेशन ड्रॉप मेजोप्लाजिक डेप्थ और खतरनाक भूखे जानवर हैं, वह इसे दुनिया की सबसे खतरनाक और अनएक्सेक्टेड रिवर बनाते हैं। 720 फीट की गहराई से लेकर लिविंग स्टोन फॉल्स के वायलेंट रोिंग रैपिड्स तक
15:37
Speaker A
कांगो रिवर नेचर की एक ऐसी ताकत है जिसे इंसान आज तक नहीं जीत सका। उम्मीद है ZM टीवी की यह वीडियो भी आप लोग भरपूर लाइक और शेयर करेंगे। आप लोगों के प्यार भरे कमेंट्स का बेहद शुक्रिया। मिलते हैं अगली
15:51
Speaker A
शानदार वीडियो में।
Topics:कांगो रिवरखतरनाक नदियाँदुनिया की सबसे गहरी नदीनाइल क्रोकोडाइलकायाकिंग हादसेकांगो रेन फॉरेस्टतेज बहाव वाली नदियाँअटलांटिक महासागरफ्रेश वाटर प्रिडेटरसाइंस और नदी

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