Skip to content

The Most Insane Plan Ever Proposed to Recover Titanic

टाइटेनिक को समुद्र से निकालने के लिए सबसे पागलपन भरे प्लान और चुनौतियों की कहानी।

Key Takeaways

  • टाइटेनिक को समुद्र से निकालना अत्यंत कठिन और महंगा कार्य है।
  • अत्यधिक गहराई और प्रेशर के कारण रिकवरी तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है।
  • लिक्विड नाइट्रोजन से फ्रीज करने का प्लान आर्थिक और भौतिक रूप से असंभव था।
  • मलबे को छोटे-छोटे टुकड़ों में निकालना ही फिलहाल संभव है।
  • टाइटेनिक के मलबे की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय नियम लागू हैं।

What the video covers

  • टाइटेनिक के मलबे की गहराई, वजन और समुद्र का प्रेशर रिकवरी को बेहद मुश्किल बनाते हैं।
  • बीओसी ग्रुप ने लिक्विड नाइट्रोजन से टाइटेनिक को फ्रीज कर आइसबर्ग बनाने का प्लान बनाया था, जो फिजिबिलिटी में असंभव साबित हुआ।
  • टाइटेनिक के मलबे को उठाने के लिए कई आइडियाज आए, जैसे पिंग पोंग बॉल्स से तैराना, लेकिन वे सभी प्रेशर और वजन की वजह से असफल रहे।
  • 1994 और 1998 में टाइटेनिक के छोटे टुकड़े समुद्र से निकाले गए, लेकिन पूरे जहाज को निकालना अभी भी असंभव है।
  • टाइटेनिक के मलबे पर समुद्री जीवाणु स्टील को धीरे-धीरे नष्ट कर रहे हैं, जिससे मलबा भविष्य में पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
  • टाइटेनिक को बचाने और निकालने के लिए तकनीकी, आर्थिक और भौतिक बाधाएं बहुत बड़ी हैं।
  • 1985 में टाइटेनिक के मलबे की खोज के बाद से कई रिसर्च और प्रयास हुए हैं, लेकिन अभी तक कोई बड़ा सफल प्रयास नहीं हुआ।
  • यूनेस्को और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत टाइटेनिक को संरक्षित किया गया है, जिससे उसकी सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
  • वीडियो में टाइटेनिक की रिकवरी के इतिहास, तकनीकी चुनौतियों और असंभव योजनाओं का विस्तार से वर्णन है।
  • टाइटेनिक को समुद्र से निकालना एक बेहद जटिल और महंगा कार्य है, जिसमें अभी तक सफलता नहीं मिली है।

Answers

Questions about this video

टाइटेनिक को समुद्र से निकालना इतना मुश्किल क्यों है?

टाइटेनिक की गहराई लगभग 12,500 फीट है जहां समुद्री प्रेशर 6000 पीएसआई तक होता है, जो उपकरणों और संरचनाओं के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है। इसके अलावा मलबे का वजन लगभग 35,000 टन है और वह दो हिस्सों में बिखरा हुआ है, जिससे इसे एक साथ निकालना तकनीकी रूप से असंभव है।

बीओसी ग्रुप का लिक्विड नाइट्रोजन प्लान क्या था और क्यों असफल रहा?

बीओसी ग्रुप ने टाइटेनिक को समुद्र के नीचे फ्रीज करके एक आइसबर्ग बनाने का प्लान बनाया था, जिसमें हजारों टन लिक्विड नाइट्रोजन पंप करके जहाज को ठंडा किया जाना था। लेकिन कैलकुलेशंस से पता चला कि इतनी मात्रा में नाइट्रोजन लाना और तापमान को नियंत्रित करना आर्थिक और भौतिक रूप से असंभव था।

क्या टाइटेनिक के मलबे को निकालने के लिए कोई सफल प्रयास हुए हैं?

हाँ, 1994 और 1998 में टाइटेनिक के छोटे-छोटे टुकड़े समुद्र से निकाले गए और एक टुकड़ा लॉस एंजेलिस के म्यूजियम में रखा गया। लेकिन पूरे जहाज को निकालना अभी तक संभव नहीं हो पाया है।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
एक मर्तबा दुनिया की सबसे बड़ी गैस कंपनी ने टाइटेनिक को समंदर से निकालने के लिए पूरे जहाज को बर्फ का क्यूब बनाने का प्लान बनाया था। उनका प्लान था कि 12,500 फीट नीचे हजारों टन लिक्विड नाइट्रोजन पंप करके टाइटेनिक को फ्रीज कर दिया जाए।
00:19
Speaker A
लेकिन जब इस प्लान की कैलकुलेशन की गई और बाद में जब एक दूसरी कंपनी ने टाइटेनिक का सिर्फ एक छोटा सा टुकड़ा उठाने की कोशिश की तो दुनिया के होश ही उड़ गए। आखिर 3800 मीटर की गहराई में ऐसा क्या हुआ था?
00:36
Speaker A
ZM टीवी की वीडियोस में एक बार फिर से खुशामदीद। नाजरीन, टाइटेनिक का मलबा नॉर्थ अटलांटिक ओशन में 12,500 फीट नीचे समंदर के बॉटम पर मौजूद है। यह गहराई कितनी है?
00:47
Speaker A
इसका अंदाजा आप इस बात से लगा लें कि अगर चार खलीफा को भी एक के ऊपर एक रखकर ओशन में डाला जाए फिर भी टाइटेनिक का मलबा ढाई किमी नीचे होगा। इस गहराई में समंदर का प्रेशर 6000 [संगीत] पीएसआई होता है। जिसका मतलब है कि एक
01:05
Speaker A
कोल्ड ड्रिंक के ढक्कन जितने एरिया पर पूरी डबल केबिन पिकअप खड़ी कर दी जाए। इतने ज्यादा प्रेशर में इंसानी ऑर्गन्स पिचक जाएंगे और अगर इस गहराई में कोई सोडा कैन रखा जाए तो वह पलक झपकते ही कागज की
01:19
Speaker A
तरह पतला हो जाएगा। इस हौलनाक प्रेशर का अंदाजा दुनिया को तब हुआ जब जून 2023 में टाइटन नामी सबमर्सिबल पांच लोगों को टाइटेनिक का मलबा दिखाने नीचे गई थी। खराबी की वजह से उसका कार्बन फाइबर हल शदीद प्रेशर बर्दाश्त ना कर सका और बुरी
01:38
Speaker A
तरह इंप्लोड हो गया। नतीजा यह निकला कि ना सिर्फ पांचों लोग जान की बाजी हार गए बल्कि टाइटन का मलबा भी पूरे ओशन फ्लोर पर छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखर गया। 6000 पीएसआई की ताकत का अंदाजा शायद अब आपको
01:54
Speaker A
अच्छी तरह हो गया होगा। जरा सोचिए इस प्रेशर में सिर्फ टाइटेनिक को देखने के लिए ही जो सबमर्सिबल बनाई जाती है उसमें कितनी मेहनत लगती होगी। तो अगर हम टाइटेनिक को समंदर से उठाकर ऊपर लाने की बात करें तो इस केस में जो इक्विपमेंट्स
02:10
Speaker A
और मशीनंस बनाई जाएंगी उनमें क्या कुछ करना पड़ेगा? मिसाल के तौर पर अगर हमने ऐसे इक्विपमेंट बना भी लिए जो इतने शदीद प्रेशर को बर्दाश्त कर लेते हैं और अंधेरे फ्रीजिंग टेंपरेचर में ऑपरेट भी कर लेते हैं। फिर भी एक नई मुसीबत खड़ी हो जाएगी।
02:27
Speaker A
वो है टाइटेनिक का इंतहा से ज्यादा वजन। जी हां, 1912 में टाइटेनिक का टोटल वजन 52,000 टन था। और कई मैथमेटिकल कैलकुलेशंस के हिसाब से 100 से ज्यादा साल पानी के अंदर रहने के बाद जंग की वजह से अब इसका
02:44
Speaker A
वजन 35,000 टन के आसपास बचा है। यानी कि अटलांटिक ओशन की गहराई में टाइटेनिक के मलबे का वजन अभी भी 160 बोइंग 747 से ज्यादा है। आज तक ना दुनिया में ऐसी कोई कन बनी है जो इतना ज्यादा वजन बर्दाश्त कर
03:01
Speaker A
सके और ना ऐसी कोई स्टील केबल हम बना रहे हैं जिसकी मजबूती इस काबिल हो सके। इसके बावजूद भी अगर हम किसी तरह इतनी ताकत पैदा कर लें फिर भी हम टाइटेनिक को बाहर नहीं निकाल सकते क्योंकि ऐसा करने से टाइटेनिक
03:17
Speaker A
टूट कर बिखर जाएगी। 1912 में जब टाइटेनिक आइसबर्ग से टकरा कर डूबी थी तो वह उसी वक्त दो हिस्सों में डिवाइड हो गई थी। समंदर के बॉटम पर आज टाइटेनिक एक पीस में नहीं बल्कि दो हिस्सों में पड़ी है। इसका
03:31
Speaker A
फ्रंट सेक्शन जो अक्सर तस्वीरों में दिखाया जाता है जिसे बाऊ सेक्शन भी कहते हैं। काफी हद तक आपस में जुड़ा हुआ है। लेकिन पिछला हिस्सा किसी मलबे के ढेर की तरह 2000 फीट दूर बिखरा हुआ है। बाऊ सेक्शन जो आज सही सलामत दिखता है, उसका
03:48
Speaker A
लोहा भी काफी हद तक गलकर नाजुक हो चुका है। अगर किसी तरह केबल्स कनेक्ट करके इसे ऊपर उठाने की कोशिश की गई तो यह ऊपर आने के बजाय वहीं टूट जाएगा और फिर वह इस हालत में भी नहीं दिखेगा जैसे कि आज [संगीत]
04:03
Speaker A
है। पर क्या सिर्फ यही एक तरीका है टाइटेनिक को उठाने का? टाइटेनिक को अटलांटिक ओशन के बॉटम से रिकवर करने के आइडियाज तब से दिए जा रहे हैं जब 1985 में पहली मर्तबा इसको ढूंढा गया था। केबल्स और
04:18
Speaker A
कन से लिफ्टिंग का आईडिया तो फ्लॉप नजर आता है। लेकिन फिर लोगों ने ऐसे आइडियाज देना शुरू किए जिसमें केबल्स और केंस का काम ही नहीं था। जैसा कि टाइटेनिक शिप रैक को लाखों करोड़ों पिंक पोंग बॉल से भरा
04:32
Speaker A
जाए। पिंक पोंग बॉल में हवा भरी होती है जो पानी के ऊपर तैरते हैं। आर्कमिडीज प्रिंसिपल के मुताबिक एक नॉर्मल साइज की बॉल पानी में 33 ग्राम की अपवर्ड फोर्स पैदा करेगी। तो अगर हमें 35,000 टन वजनी टाइटेनिक शिप रेक को उठाना है तो इसके लिए
04:50
Speaker A
थ्योरेटिकली 106 करोड़ पिंग पोंग बॉल्स चाहिए होंगी। जब यह बॉल्स इतनी बड़ी क्वांटिटी में टाइटेनिक के अंदर डाली जाएंगी तो सबकी कंबाइंड ताकत शिप की बॉडी को अंदर से ऊपर धकेलेगी। किसी एक हिस्से पर जोर नहीं लगेगा और रैक आसानी से ऊपर आ
05:08
Speaker A
सकता है। लेकिन यह आईडिया सिर्फ पेपर्स में ही अच्छा लगता है क्योंकि यहां पर एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम है। वो यह कि बेशक पिंगपोंग बॉल 33 ग्राम का अपवर्ड फोर्स पैदा करेगी। लेकिन उस फोर्स का क्या जो 12,500 फीट नीचे है। 6000 पीएसआई प्रेशर।
05:27
Speaker A
जिस सेकंड यह बॉल्स शिप रैक तक पहुंचेंगी, उसी लम्हे यह प्रेशर इनको फाड़ कर रख देगा। टाइटेनिक को निकालने के लिए यह इकलौता आईडिया नहीं था। इसके बाद ऐसे कई आइडियाज फ्लोट हुए जो रियलिस्टिक नहीं थे। जिसमें शिप को पेट्रोलियम जेली से भरना भी
05:45
Speaker A
शामिल था। यहां आपको बताता चलूं कि 1980 में टाइटेनिक को बाहर निकालने के आइडियाज इस वजह से दिए जा रहे थे क्योंकि इंटरनेशनल सेल्वेज कन्वेंशन के मुताबिक अगर कोई शख्स किसी और की शिप या कारगो समंदर से बाहर निकालेगा तो उसे भारी इनाम
06:01
Speaker A
दिया जा सकता है जो कि शिप की वैल्यू का 50% तक हो सकता है। जैसा कि हम सब जानते हैं कि टाइटेनिक उस दौर की एक लग्जरी शिप थी जिसमें अमीर तरीन लोग सवार थे। सबको मालूम था कि शिप रैक में बहुत सा सोना,
06:16
Speaker A
कीमती अशिया और एंटीक चीजें मिलेंगी। और जब सितेंंबर 1985 में इसे रॉबर्ट बेलड ने ढूंढ लिया तो सेलविच कंपनीज के दिल में ख्याल आने लगा कि अगर वह टाइटेनिक को बाहर निकाल लें तो रातोंरात अमीर बन सकते हैं।
06:32
Speaker A
इस सब में एक कंपनी ऐसी थी जिन्होंने सीरियस [संगीत] होकर टाइटेनिक को बाहर निकालने के लिए एक अजीब आईडिया ना सिर्फ पेश किया बल्कि उसकी फिजिबिलिटी भी बनाना शुरू कर दी। बीओसी ग्रुप जो दुनिया की सबसे बड़ी इंडस्ट्रियल गैस कंपनीज में से
06:48
Speaker A
एक थी उसने टाइटेनिक को उठाने के लिए लिक्विड नाइट्रोजन से फ्रीज़ करने का कांसेप्ट दिया। उनका आईडिया था कि टाइटेनिक को किसी कन या केबल से खींचने के बजाय समंदर के अंदर ही फ्रीज करके आइसबर्ग बना दिया जाए और इस काम के लिए उन्होंने
07:05
Speaker A
मुख्तलिफ कैलकुलेशंस भी की थी। प्लान यह था कि समंदर की तह में टाइटेनिक के गिर्द तारों का एक जाल बनाया जाए और ऊपर से जहाजों के जरिए हजारों टन लिक्विड नाइट्रोजन नीचे पंप की जाए। -96 डिग्री सेल्सियस ठंडी नाइट्रोजन गैस टाइटेनिक के
07:23
Speaker A
अंदर और आसपास के पानी को मिनटों में सॉलिड बर्फ बना देगी। ऐसे एक बहुत बड़ा आइस क्यूब जिसके अंदर टाइटेनिक जमी होगी वह अपने आप सरफेस पर आ जाएगा और फिर कंट्रोलोल्ड एनवायरमेंट में उसे आहिस्ता-आहिस्ता पिघाला जाएगा। पर जब
07:40
Speaker A
बीओसी के इंजीनियर्स ने इस पर गहरी साइंटिफिक कैलकुलेशंस की तो उन्हें समझ आया कि यह फिजिकली और इकोनॉमिकली इंपॉसिबल है। कैलकुलेशन से पता चला कि टाइटेनिक जितने बड़े जहाज और उसके आसपास के पानी को फ्रीज करने के लिए तकरीबन 5 लाख टन
07:57
Speaker A
लिक्विड नाइट्रोजन चाहिए होगी। इतनी अजीम मिकदार में लिक्विड नाइट्रोजन समंदर के बीच लाना नामुमकिन था। जिसके लिए टाइटेनिक के ऊपर समंदर पर एक पूरा नाइट्रोजन लिक्विफिकेशन प्लांट कायम करना पड़ता। इसके अलावा 3800 मीटर की गहराई पर जब इतनी
08:16
Speaker A
ज्यादा फ्रीजिंग लिक्विड छोड़ी जाती तो पानी के एक्सट्रीम प्रेशर की वजह से टेंपरेचर मेंटेन रखना और थर्मल एक्सपेंशन को कंट्रोल करना इंपॉसिबल था। इस किस्म के सारे आइडियाज तब कचरे का ढेर लगने लगे जब 1994 में आरएमएस टाइटेनिक इनकॉररपोरेशन ने
08:34
Speaker A
टाइटेनिक की बॉडी का सिर्फ एक छोटा टुकड़ा ऊपर लाने का इरादा किया। यह एक छोटी कोस्टर की साइज जितना टुकड़ा था जिसमें खिड़कियों के शीशे अभी तक सलामत थे। प्लान यह था कि नीचे जाकर इस पीस को रस्सियों से
08:48
Speaker A
बांधा जाए और डीजल से भरे बैग्स कनेक्ट करके उसे ऊपर लाया जाए। इस काम के लिए तीन एक्सपिडिशन शिप्स अटलांटिक ओशन के ठीक उस पॉइंट पर लाई गई। इस मंजर को देखने के लिए टिकट रखी गई और दो क्रूज शिप्स तो सिर्फ
09:04
Speaker A
ऑडियंस से भरी हुई थी। डीजल बैग्स टाइटेनिक के टुकड़ों से बांधे गए और 2 घंटे का सफर तय करने के बाद वो टुकड़ा आखिरकार सरफेस तक आ गया। 100 सालों बाद टाइटेनिक का यह टुकड़ा पहली बार जब हवा
09:18
Speaker A
में आने ही वाला था तो अचानक समंदर में तूफान आ गया। डीजल बैग्स की रस्सियां टूट गई और एक मर्तबा फिर वही हिस्सा समंदर की गहराई में डूब गया। इस फील्ड मिशन में अभी तक 2 सालों की मेहनत और लाखों डॉलर्स का
09:33
Speaker A
खर्चा लग चुका था। लेकिन फिर भी कामयाबी नहीं मिली। उल्टा सारी टीम को वहां से जान बचाकर भागना पड़ा। 2 सालों बाद 1998 में रिकवरी टीम ने एक नया प्लान बनाया कि टाइटेनिक के इस हिस्से को विंच के जरिए
09:49
Speaker A
ऊपर खींचा जाए। इस बार इन्हें कामयाबी मिली और ऊपर लाने के बाद इसे रिकवरी वेसल में डालकर लॉस एंजेलिस के एक म्यूजियम में रख दिया गया। लेकिन इस कामयाबी की हकीकत थी चार सालों की मेहनत, दो मिशनंस और
10:04
Speaker A
लाखों डॉलर्स का खर्चा और इसका वजन था सिर्फ 15 टन। जबकि पूरे टाइटेनिक शिप रैक का वजन 35,000 टन है। यह देखकर सारी सेलविज कंपनीज को आईडिया हो गया कि टाइटेनिक को निकालना एक इंपॉसिबल टास्क है। जब टाइटेनिक को निकालने का ख्वाब
10:21
Speaker A
धुंधला होने लगा तो सेलविज टीम्स ने रैकेज
10:39
Speaker A
मिलने वाला टेलीग्राफ अपनी आखिरी पोजीशन पर सेट था। यानी कि फुल स्टर्न। जिसका मतलब है कि 1912 में आइसबर्ग से टकराने के बाद कैप्टन ने इंजीनियर्स को पैगाम दिया था कि इंजन को फुल पावर में उल्टा चलाया जाए
10:54
Speaker A
[संगीत] ताकि स्पीड कम हो सके। हर एक चीज को ऊपर लाने में स्पेशल सबमर्सिबल की जरूरत पड़ी जिसमें लाखों डॉलर्स का खर्चा भी आया। हम इंसान तो अभी तक यह बहस कर रहे हैं कि टाइटेनिक को कैसे बचाया जाए। लेकिन समंदर
11:10
Speaker A
के अंदर एक और ही मखलूक इस जहाज को जिंदा खा रही है। अगर आपने टाइटेनिक की तस्वीरें देखी हो तो जहाज के ढांचे पर रेड कलर के धागे लटके नजर आते हैं। इंजीनियर्स इसे रस्टिकल्स कहते हैं। यह कोई आम जंग नहीं
11:25
Speaker A
है बल्कि यह नमकीन पानी में रहने वाले बैक्टीरिया की कॉलोनीज हैं जो स्टील को चबाकर खोखली नालियां छोड़ देते हैं। जिन्हें हाथ लगाने पर लोहा मिट्टी की तरह झड़ने लगता है। कनाडा के एक इंस्टट्यूट ने जब इन बैक्टीरिया पर रिसर्च की तो मालूम
11:42
Speaker A
पड़ा कि इनमें से कुछ ऐसे बैक्टीरियास भी थे जो दुनिया में कहीं और नहीं पाए जाते। इसीलिए इनका नाम हेलमोनास टाइटनाइकी रखा गया है। यह बैक्टीरिया खासतौर पर टाइटेनिक के स्टील को खाने के लिए ही अडॉप हुआ है
11:57
Speaker A
जो रोजाना सैकड़ों पाउंड लोहा चबा जाता है। आज जहाज की छतें अंदर की तरफ गिर रही हैं और जो चीजें 1980 की फोटोज में साफ दिखती थी, वह अब मिट्टी के ढेर में तब्दील हो चुकी हैं। साइंटिस्ट का मानना है कि
12:12
Speaker A
अगले 20 से 30 सालों में टाइटेनिक मुकम्मल तौर पर समंदर में डिसॉल्व होकर खत्म हो जाएगी। 1985 में जब रॉबर्ट बेलड ने इस मलबे को ढूंढा तो पहले चंद लम्हों की खुशी के बाद उन्हें इस खौफनाक हकीकत का एहसास
12:28
Speaker A
हुआ कि यह खुशी का लम्हा नहीं बल्कि वो 1500 लोगों की कब्र के ऊपर खड़े हैं। बैक्टीरिया ने लोहे को ही नहीं छोड़ा तो इंसानी जिस्म का क्या कसूर वो तो चंद महीनों में ही गल चुका होगा। लेकिन समंदर
12:43
Speaker A
के बॉटम पर जूतों के जोड़े आज भी वैसे के वैसे पड़े हैं। जिनमें केमिकल की वजह से बैक्टीरिया और दूसरी मखलूक उनके करीब नहीं जाती। मिट्टी पर एक मां के जूतों के बराबर उसकी बेटी के छोटे जूते आज भी मौजूद हैं
12:58
Speaker A
जो कि उस दिन के खौफनाक मंजर की गवाही देते हैं। 2012 में यूनेस्को ने टाइटेनिक को प्रोटेक्टेड कल्चरल हेरिटेज करार दिया। उसके बाद 2019 में यूएस और यूके ने एक एग्रीमेंट साइन किया जिसके तहत अब किसी को भी टाइटेनिक के 1 कि.मी. रेडियस में बिना
13:17
Speaker A
परमिशन जाने या कुछ भी हटाने की इजाजत नहीं है। सच्चाई तो यह है कि हम टाइटेनिक को ऊपर ला ही नहीं सकते। क्योंकि उसकी कंडीशन ही कुछ ऐसी है। लेकिन असूलन हमें ऐसा करना भी नहीं चाहिए। क्योंकि यह ना
13:32
Speaker A
सिर्फ 1500 लोगों की आखिरी आरामगाह है बल्कि दुनिया की सबसे गहरी खबर भी। उम्मीद है ZM टीवी की यह वीडियो भी आप लोग भरपूर लाइक और शेयर करेंगे। आप लोगों के प्यार भरे कमेंट्स का बेहद शुक्रिया। मिलते हैं
13:47
Speaker A
अगली शानदार वीडियो में।
Topics:टाइटेनिकसमुद्र से रिकवरीलिक्विड नाइट्रोजनटाइटेनिक मलबासमुद्री प्रेशरबीओसी ग्रुपटाइटेनिक इतिहासटाइटेनिक रिकवरी प्लानटाइटेनिक सबमर्सिबलटाइटेनिक संरक्षण

Get More with the SozAI App

Transcribe recordings, audio files, and YouTube videos — with AI summaries, speaker detection, and unlimited transcriptions.

Or transcribe another YouTube video here →