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All 4 Engines Failed Over the Indian Ocean

ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट009 ने चारों इंजन फेल होने के बाद इंडियन ओशन में क्रैश लैंडिंग की, पायलट की बहादुरी से सभी सुरक्षित रहे।

Key Takeaways

  • चारों इंजन फेल होने के बावजूद पायलट की कुशलता से विमान को नियंत्रित किया गया।
  • ग्लाइडर पायलट के अनुभव ने इस इमरजेंसी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • इंजन फेलियर के दौरान भी कॉकपिट लाइट्स और ऑटो पायलट काम कर रहे थे, जो असामान्य था।
  • सुरक्षा के लिए विमान को तेजी से नीचे लाना जरूरी था ताकि ऑक्सीजन की कमी से बचा जा सके।
  • समंदर पर क्रैश लैंडिंग पहाड़ों से टकराने से बेहतर विकल्प था।

What the video covers

  • ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट009, बोइंग 747-200, 24 जून 1982 को जकार्ता से पर्थ की ओर जा रही थी।
  • फ्लाइट के दौरान चारों रॉल्स रॉयस RB211 इंजन अचानक फेल हो गए, जिससे विमान बिना पावर के ग्लाइड करने लगा।
  • कैप्टन एरिक हेनरी मूडी ने अपने ग्लाइडर पायलट अनुभव का उपयोग करते हुए विमान की नोज नीचे कर स्पीड मेंटेन की।
  • इंजन फेलियर के दौरान कॉकपिट में सेंट एल्मोस फायर जैसी अनोखी लाइटिंग देखी गई, जबकि मौसम साफ था।
  • इंजन फेल होने के बाद ऑक्सीजन मास्क गिर गए और केबिन में ऑक्सीजन की कमी होने लगी।
  • कैप्टन ने फर्स्ट ऑफिसर की सुरक्षा के लिए विमान को तेजी से 13,000 फीट तक नीचे लाया।
  • जकार्ता एयरपोर्ट तक पहुंचना मुश्किल था क्योंकि रास्ते में 10,500 फीट ऊंचे पहाड़ थे।
  • अंत में कैप्टन ने समंदर की ओर क्रैश लैंडिंग का फैसला किया, जो पहाड़ों से टकराने से बेहतर विकल्प था।
  • कैप्टन ने यात्रियों को शांत रखा और क्रू को इमरजेंसी के लिए तैयार रहने का संकेत दिया।
  • यह घटना एविएशन इतिहास में एक महत्वपूर्ण मिसाल बनी, जहां पायलट की कुशलता से बड़ी दुर्घटना टली।

Answers

Questions about this video

फ्लाइट009 के चारों इंजन क्यों फेल हुए थे?

ट्रांसक्रिप्ट में इंजन फेल होने के कारणों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन यह घटना थंडर स्टॉर्म्स के बिना हुई थी और सेंट एल्मोस फायर जैसी लाइटिंग भी देखी गई।

कैप्टन एरिक मूडी ने विमान को कैसे नियंत्रित किया?

कैप्टन ने ग्लाइडर पायलट के अनुभव का उपयोग करते हुए विमान की नोज नीचे कर स्पीड मेंटेन की और विमान को समंदर की ओर मोड़ दिया।

इस घटना में यात्रियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की गई?

कैप्टन ने यात्रियों को शांत रखा और केबिन क्रू को इमरजेंसी के लिए तैयार रहने का संकेत दिया, साथ ही ऑक्सीजन मास्क का उपयोग किया गया।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
ब्रिटिश एयरवेज का एक जहाज चारों इंजन फेल होने के बाद जकार्ता इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर क्रैश लैंडिंग के लिए जा रहा था। लेकिन यहां मसला यह था कि एयरपोर्ट और जहाज के बीच ऊंचे-ऊंचे पहाड़ थे और बिना इंजन पावर के पहाड़ों को क्रॉस करना कैप्टन के लिए नामुमकिन था। इतने में पायलट ने माइक उठाया और अनाउंसमेंट करके ढके छुपे अल्फाजों में फ्लाइट क्रू को इशारा दिया कि इमरजेंसी के लिए तैयार हो जा। लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ जिसने एिएशन की दुनिया में एक नई तारीख कायम कर दी। ZM टीवी की वीडियोस में एक बार फिर से खुशामदीद। नाजरीन, 24 जून 1982 की रात ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट का लंदन से न्यूजीलैंड तक इंतहाई लंबा सफर चल रहा था। यह लंबा सफर छोटे-छोटे हिस्सों में डिवाइडेड था। जैसे पहले इसने लंदन से बॉम्बे तक ट्रैवल किया। फिर मलेशिया में क्वालालमपुर तक और अब इसकी मंजिल थी ऑस्ट्रेलिया का शहर पर्थ। फिर मेलबर्न से होते हुए इसे ऑकलैंड तक जाना था। जहाज की बात की जाए तो यह 3 साल पुराना बोइंग 747-200 था। जिसमें चार रॉल्स रॉयस के RB211 जेट इंजंस लगे थे। प्लेन में 247 पैसेंजर्स और 15 क्रू मेंबर्स समेत टोटल 262 लोग सवार थे। इतना लंबा सफर करने के बाद क्वालालमपुर में फ्लाइट क्रू चेंज हुआ ताकि आगे के सफर के लिए क्रू बिल्कुल फ्रेश हो। फ्लाइट क्रू में शामिल कैप्टेन थे 41 इयर्स के एरिक हेनरी मूडी। 32 साल के फर्स्ट ऑफिसर रजर ग्रीव्स और 40 साल के फ्लाइट इंजीनियर बेरी टाउनले फ्रीमैन। आपको यहां बताता चलूं कि कैप्टन एरिक ने अपने करियर का आगाज ग्लाइडर पायलट के तौर पर किया था। और आज इनकी यही स्किल इनको बहुत काम आने वाली थी। कोलालमपुर में टेक ऑफ से पहले कैप्टन एरिक ने वेदर रडार चेक किया और फ्लाइट प्लान डिस्कस किया। उस रात मौसम बिल्कुल साफ था। ना कोई ज्यादा बादल थे और ना ही टर्बुलेंस की कोई फोरकास्ट मौजूद थी। रात 7:30 बजे के करीब फ्लाइट009 ने नॉर्मली टेक ऑफ किया और शुरुआती वक्त में इसे कैप्टन एरिक ही फ्लाई कर रहे थे। चंद मिनटों बाद जहाज 37,000 फीट तक पहुंच गया। इस पॉइंट पर दोनों पायलट्स थोड़ा रिलैक्स हुए क्योंकि क्रूजिंग एल्टीट्यूड पर ज्यादातर काम ऑटो पायलट करता है। टेक ऑफ के 45 मिनट बाद फ्लाइट इंडोनेशिया के ऊपर से गुजर रही थी और अब वो जकार्ता एयर ट्रैफिक कंट्रोलर से राब्ते में आ गए। डिनर करने के बाद कैप्टन एरिक मूडी ने दोबारा वेदर रिडार देखा। उनको स्क्रीन पर ना बादल दिखे और ना ही कोई गरज चमक। तभी उन्होंने फर्स्ट ऑफिसर रजर ग्रीव्स को कंट्रोल दिया और टॉयलेट इस्तेमाल करने के लिए कॉकपिट से बाहर निकल आए। यहां तक जो कुछ भी हुआ वो बिल्कुल नॉर्मल था। जब वो क्रू के टॉयलेट तक पहुंचे तो वह पहले से ऑक्यूपाइड था। तभी वह सीढ़ियां उतर कर नीचे फर्स्ट क्लास में चले गए। अभी वह नीचे उतरे ही थे कि उनको कॉकपिट में दोबारा बुलवाया गया। कैप्टन एरिक इसी कशमकश में वापस ऊपर चढ़े कि आखिर उन्हें फौरन क्यों बुलवाया गया है। तभी उन्होंने सीढ़ियों के पास जलने की बू महसूस की और इधर-उधर देखने पर उन्हें स्टेप्स के पास लगे एसी वेंट में से धुआं निकलता हुआ दिखा। यही सोचते हुए वह ऊपर चढ़े कि जरूर कोई मसला हुआ होगा। तभी उनको कॉकपिट में बुलवाया गया है। लेकिन जैसे ही वह कॉकपिट में एंटर हुए तो उनका इस्तकबाल विंड स्क्रीन पर खूबसूरत डांसिंग लाइट से हुआ। यह फिनोमिनान खतरनाक तो नहीं होता लेकिन पैदा तब होता है जब जहाज थंडर स्टॉर्म्स में से गुजर रहा हो जिसको सेंट एल्मोस फायर भी कहते हैं। कैप्टन एरिक फौरन अपनी सीट पर बैठे और एक मर्तबा फिर वेदर रेडार चेक किया। इस मौके पर वह काफी हैरान हुए क्योंकि रेडार की स्क्रीन पर पहले की तरह कोई थंडर स्टॉर्म नहीं था। यहां तक कि रेडार ने कोई बादल भी डिटेक्ट नहीं किए। इस दौरान जहाज की सामने वाली बॉडी, विंग्स और इंजन का लीडिंग एज खूबसूरत नीले रंग की रोशनी पैदा कर रहा था। जो कि पायलट्स के लिए एक नॉर्मल बात है अगर कभी वो रात के वक्त थंडर स्टॉर्म्स के पास से गुजर रहे हो। लेकिन कैप्टन एरिक परेशान थे क्योंकि उन्होंने सीढ़ियों के पास धुआं और जलने की बदबू महसूस की थी। अभी वह इस बारे में सोच ही रहे थे कि बिना थंडर स्टॉर्म के सेंट एल्मोस फायर क्यों जाहिर हुई है। ठीक 8:40 पर फ्लाइट इंजीनियर ने घबराई हुई आवाज में बोला कि इंजन नंबर फोर बंद हो गया है। इस आवाज के साथ ही कॉकपिट का माहौल सीरियस हो गया और कैप्टन ने फौरन इंजन शटडाउन की चेक लिस्ट पर अमल करने को कहा। फर्स्ट ऑफिसर ने इंजन नंबर फोर की चेक लिस्ट कंप्लीट की। इतने में फ्लाइट इंजीनियर की आवाज दोबारा आती है और इस बार उनका कहना था कि इंजन नंबर थ्री, टू और वन भी बंद हो चुके हैं। यह सब कुछ इतना जल्दी हुआ कि किसी को सोचने का मौका ही नहीं मिला। ब्रिटिश एयरवेज फ्लाइट जकार्ता के साउथ में इंडियन ओशन के ऊपर 37,000 फीट पर अब बगैर किसी पावर के ग्लाइड कर रही थी। यहां आपको बताता चलूं कि एयरक्राफ्ट में बिजली पैदा करने वाला जनरेटर भी इंजन के साथ ही कनेक्टेड होता है। अगर किसी वजह से जहाज के सारे इंजन फेल हो जाएं तो पूरा कॉकपिट अंधेरे में डूब जाता है। जिसका मतलब है कि ऑटो पायलट भी काम नहीं करेगा और डेक पर सारे इंस्ट्रूमेंट्स भी बंद हो जाएंगे। कैप्टन एरिक ने कुछ महीने पहले ही सिमुलेटर पर चारों इंजन फेलियर की प्रैक्टिस की थी और इस दौरान उन्होंने भी यही एक्सपीरियंस किया था। पर इस केस में कॉकपिट की लाइट्स बंद नहीं हुई थीं और ऑटो पायलट भी अभी तक चल रहा था। इसका मतलब था कि चारों में से एक इंजन अभी तक कुछ ना कुछ पावर दे रहा है। इस पॉइंट पर नीचे इंडियन ओशन था और 37,000 फीट ऊपर फ्लाइट009 के कॉकपिट में शदीद खौफ का आलम। इतने में वही हुआ जिसका डर किसी भी पायलट के दिल में होता है। आहिस्ता-आहिस्ता जहाज की स्पीड कम होने लगी। कैप्टन को मालूम था कि अगर यह स्पीड इसी तरह कम होती गई तो जहाज जो अभी ग्लाइड कर पा रहा है इंस्टॉल करके आउट ऑफ कंट्रोल हो जाएगा। इस मौके पर कैप्टन एरिक ने सबसे अच्छा काम यह किया कि उन्होंने जहाज की नोज थोड़ी नीचे की तरफ कर दी ताकि एयरक्राफ्ट की स्पीड कम ना हो और विंग्स पर एयर स्पीड मेंटेंड ही रहे। यह ट्रिक उन्होंने अपने ग्लाइडिंग करियर में सीखी थी और इनको इसकी अच्छी खासी प्रैक्टिस भी थी। इसके साथ-साथ कैप्टन ने जहाज को वापस जकार्ता की तरफ भी मोड़ दिया क्योंकि वह समंदर से हटकर जमीन की तरफ आना चाहते थे। इंजन बंद होने के 4 मिनट बाद 8:44 पर फर्स्ट ऑफिसर ने जकार्ता एयर ट्रैफिक कंट्रोलर से राब्ता किया और सारी सिचुएशन से आगाह किया। एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को भी समझ नहीं आई कि नए जहाज के चारों इंजंस फेल कैसे हो सकते हैं? और यही सवाल था जो उस वक्त पायलट्स के ज़हन में भी था। सबसे हैरानी की बात तो यह थी कि थंडर स्टॉर्म्स ना होने के बावजूद सेंट एल्मोस लाइट्स क्यों जाहिर हो रही थीं और क्या इनका इंजन फेलियर के साथ कोई डायरेक्ट कनेक्शन तो नहीं है। अभी सब इसी गहमागहमी में थे कि जहाज में वार्निंग अलार्म्स बजना शुरू हो गए। चारों इंजन फेलियर की वजह से केबिन का ऑक्सीजन गिरने लगा और पायलट समेत सबके ऑक्सीजन मास्क निकल आए। मुसीबतों ने तो जैसे फ्लाइट9 को चारों तरफ से घेर लिया था। ऑक्सीजन मास्क पहनते वक्त फर्स्ट ऑफिसर रजर का मास्क ठीक से फिट नहीं हो रहा था और बदकिस्मती से जोर लगाने पर उसकी ट्यूब ही टूट गई। इस मौके पर कैप्टन एरिक के पास सिर्फ दो रास्ते थे। यहां तो प्लेन को आराम-आराम से ग्लाइड करवाते नीचे लाते जो कि वह ऑलरेडी कर रहे थे। लेकिन इस ऑप्शन में खतरा था कि फर्स्ट ऑफिसर कहीं लो ऑक्सीजन की वजह से बेहोश ना हो जाए। और दूसरा ऑप्शन था कि तेजी से जहाज को नीचे लाया जाए। इससे जहाज के केबिन का ऑक्सीजन लेवल फौरन बेहतर तो हो जाता लेकिन फिर वो अपना कीमती एल्टीट्यूड जल्दी खो बैठते। हैरतंगेज तौर पर कैप्टन एरिक ने जहाज के एल्टीट्यूड की परवाह किए बगैर फर्स्ट ऑफिसर को बचाने के लिए जहाज को फौरन ड्राइव मोड में डाल दिया। चंद सेकंड्स में ही वह 13,000 फीट तक पहुंच गए। जहां नेचुरली हवा में ही ऑक्सीजन ज्यादा होता है। 13,000 फीट पर आते ही उन्होंने नोटिस किया कि सेंट एल्मोस फायर फिनोमिनॉन भी गायब हो गया है। कैप्टन का प्लान अब जकार्ता एयरपोर्ट पर ही क्रैश लैंडिंग का था। लेकिन अब यहां पर एक नया मसला आ खड़ा हुआ। उनका एटीट्यूड 13,000 फीट था जो कि तेजी से गिरता जा रहा था। जबकि जकार्ता एयरपोर्ट और जहाज के बीच एक तरफ 10,500 फीट ऊंचे पहाड़ थे और दूसरी तरफ समंदर। अब अगर इंजन स्टार्ट नहीं हुए तो वह एयरपोर्ट तक नहीं पहुंच सकेंगे। कैप्टन के पास सिर्फ एक ही ऑप्शन बचा था कि जहाज को समंदर की तरफ मोड़कर पानी पर क्रैश लैंडिंग करवाई जाए। समंदर पर इतने बड़े पैसेंजर प्लेन को लैंड कराना एक ऐसा एक्सपीरियंस होता है जिसके बारे में पायलट्स ने पढ़ा तो बेशक बहुत होता है लेकिन प्रैक्टिस नहीं की होती। अब एक छोटी सी भी गलती कई 100 मुसाफिरों की जान ले सकती है। लेकिन फिर भी यह पहाड़ से टकराने के मुकाबले में अच्छा ऑप्शन ही था। इस दहशत के माहौल में कैप्टन एरिक ने माइक उठाया और पैसेंजर से इंतहाई पुरसकून लहजे में कहा कि हमारे चारों इंजंस फेल हो चुके हैं और हम उन्हें दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश कर रहे हैं और आखिर में कहा कि क्या केबिन सर्विस डायरेक्टर फ्लाइट डेक में आ सकते हैं? यह आखिरी जुमला केबिन क्रू के लिए एक कोड वर्ड था कि क्रैश लैंडिंग के लिए तैयारी कर लो। इस अनाउंसमेंट के बाद जहाज के अंदर इमरजेंसी लैंडिंग की तैयारियां शुरू हो गईं। सबका दिल खौफ में डूब गया।
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Speaker A
के पहाड़ों को क्रॉस करना कैप्टन के लिए नामुमकिन था। इतने में पायलट ने माइक उठाया और अनाउंसमेंट करके ढके छुपे अल्फाजों में फ्लाइट क्रू को इशारा दिया कि इमरजेंसी के लिए तैयार हो जा। लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ जिसने एिएशन की दुनिया
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Speaker A
में एक नई तारीख [संगीत] कायम कर दी। ZM टीवी की वीडियोस में एक बार फिर से खुशामदीद। नाजरीन 24 जून 1982 की रात ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट का लंदन से न्यूजीलैंड तक इंतहाई लंबा सफर चल रहा था। यह लंबा सफर छोटे-छोटे हिस्सों में
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Speaker A
डिवाइडेड था। जैसे पहले इसने लंदन से बॉम्बे तक ट्रैवल किया। फिर मलेशिया में क्वालालमपुर तक और अब इसकी मंजिल थी ऑस्ट्रेलिया का शहर पर्थ। फिर मेलबर्न से होते हुए इसे ऑकलैंड तक जाना था। जहाज की बात की जाए तो यह 3 साल पुराना बोइंग
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Speaker A
747200 था। जिसमें चार र्स रॉयस के RB21 जेट इंजंस लगे थे। प्लेन में 247 पैसेंजर्स और 15 क्रू मेंबर्स समेत टोटल 262 लोग सवार थे। इतना लंबा सफर करने के बाद क्वालालमपुर में फ्लाइट क्रू चेंज हुआ ताकि आगे के सफर के लिए क्रू बिल्कुल
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Speaker A
फ्रेश हो। फ्लाइट क्रू में शामिल कैप्टेन थे 41 इयर्स के एरिक हेनरी मूडी। 32 साल के फर्स्ट ऑफिसर रजर ग्रीव्स और 40 साल के फ्लाइट इंजीनियर बेरी टाउनले फ्री मैन। आपको यहां बताता चलूं कि कैप्टन एरिक ने अपने करियर का आगाज ग्लाइडर पायलट के तौर
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Speaker A
पर किया था। और आज इनकी यही स्किल इनको बहुत काम आने वाली थी। कोलालमपुर में टेक ऑफ से पहले कैप्टन एरिक ने वेदर रडार चेक किया और फ्लाइट प्लान डिस्कस किया। उस रात मौसम बिल्कुल साफ था। ना कोई ज्यादा बादल
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Speaker A
थे और ना ही टर्बुलेंस की कोई फोरकास्ट मौजूद थी। रात 7:30 बजे के करीब फ्लाइट009 ने नॉर्मली टेक ऑफ किया और शुरुआती वक्त में इसे कैप्टन एरिक ही फ्लाई कर रहे थे। चंद मिनटों बाद जहाज 37,000 फीट तक पहुंच
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Speaker A
गया। इस पॉइंट पर दोनों पायलट्स थोड़ा रिलैक्स हुए क्योंकि क्रूजिंग एलटीट्यूड पर ज्यादातर काम ऑटो पायलट करता है। टेक ऑफ के 45 मिनट बाद फ्लाइट इंडोनेशिया के ऊपर से गुजर रही थी और अब वो जकार्ता एयर ट्रैफिक कंट्रोलर से राब्ते में आ गए।
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Speaker A
डिनर करने के बाद कैप्टन एरिक मोडी ने दोबारा वेदर रिडार देखा। उनको स्क्रीन पर ना बादल दिखे और ना ही कोई गरज चमक। तभी उन्होंने फर्स्ट ऑफिसर रजर ग्रीव्स को कंट्रोल दिया और टॉयलेट इस्तेमाल करने के लिए कॉकपेट से बाहर निकल आए। यहां तक जो
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Speaker A
कुछ भी हुआ वो बिल्कुल नॉर्मल था। जब वो क्रू के टॉयलेट तक पहुंचे तो वह पहले से ऑक्यूपाइड था। तभी वह सीढ़ियां उतर कर नीचे फर्स्ट क्लास में चले गए। अभी वह नीचे उतरे ही थे कि उनको कॉकपिट में
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Speaker A
दोबारा बुलवाया गया। कैप्टन एरिक इसी कशमकश में वापस ऊपर चढ़े कि आखिर उन्हें फौरन क्यों बुलवाया गया है। तभी उन्होंने सीढ़ियों के पास जलने की बू महसूस की और इधर-उधर देखने पर उन्हें स्टेप्स के पास लगे एसी वेंट में से धुआं निकलता हुआ
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Speaker A
दिखा। [संगीत] यही सोचते हुए वह ऊपर चढ़े कि जरूर कोई मसला हुआ होगा। तभी उनको कॉकपेट में बुलवाया गया है। लेकिन जैसे ही वह कॉकपेट में एंटर हुए तो उनका इस्तकबाल विंड स्क्रीन पर खूबसूरत [संगीत] डांसिंग लाइट से हुआ। यह फिनोमिनान खतरनाक
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Speaker A
तो नहीं होता लेकिन पैदा तब होता है जब जहाज थंडर स्टॉर्म्स में से गुजर रहा हो जिसको सेंट एल्मोस फायर भी कहते हैं। कैप्टन एरिक फौरन अपनी सीट पर बैठे और एक मर्तबा फिर वेदर रेडार चेक किया। इस मौके
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Speaker A
पर वह काफी हैरान हुए क्योंकि रेडार की स्क्रीन पर पहले की तरह कोई थंडर स्टॉर्म नहीं था। यहां तक कि रेडार ने कोई बादल भी डिटेक्ट नहीं किए। इस दौरान जहाज की सामने वाली बॉडी, विंग्स और इंजन का लीडिंग एज
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Speaker A
खूबसूरत नीले रंग की रोशनी पैदा कर रहा था। जो कि पायलट्स के लिए एक नॉर्मल बात है अगर कभी वो रात के वक्त थंडर स्टॉर्म्स के पास से गुजर रहे हो। लेकिन कैप्टन एरिक परेशान थे क्योंकि उन्होंने सीढ़ियों के
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Speaker A
पास धुआं और जलने की बदबू महसूस की थी। अभी वह इस बारे में सोच ही रहे थे कि बिना थंडर स्टार्म के सेंट एल्मोस फायर क्यों जाहिर हुई है। ठीक 8:40ों पर फ्लाइट इंजीनियर ने घबराई हुई आवाज में
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Speaker A
बोला कि इंजन नंबर फोर बंद हो गया है। इस आवाज के साथ ही कॉकपिट का माहौल सीरियस हो गया और कैप्टन ने फौरन इंजन शटडाउन की चेक लिस्ट पर अमल करने को कहा। फर्स्ट ऑफिसर ने इंजन नंबर फोर की चेक लिस्ट कंप्लीट
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Speaker A
की। इतने में फ्लाइट इंजीनियर की आवाज दोबारा आती है और इस बार उनका कहना था कि इंजन नंबर थ्री टू और वन भी बंद हो चुके हैं। यह सब कुछ इतना जल्दी हुआ कि किसी को सोचने का मौका ही नहीं मिला। ब्रिटिश
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Speaker A
एयरवेज फ्लाइट जकार्ता के साउथ में इंडियन ओशन के ऊपर 37,000 फीट पे अब बगैर किसी पावर के ग्लाइड कर रही थी। यहां आपको बताता चलूं कि एयरक्राफ्ट में बिजली पैदा करने वाला जनरेटर भी इंजन के साथ ही कनेक्टेड होता है। अगर किसी वजह से जहाज
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Speaker A
के सारे इंजन फेल हो जाए तो पूरा कॉकपिट अंधेरे में डूब जाता है। जिसका मतलब है कि ऑटो पायलट भी काम नहीं करेगा और डेक पर सारे इंस्ट्रूमेंट्स भी बंद हो जाएंगे। कैप्टन एरिक ने कुछ महीने पहले ही
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Speaker A
सिमुलेटर पर चारों इंजन फेलियर की प्रैक्टिस की थी और इस दौरान उन्होंने भी यही एक्सपीरियंस किया था। पर इस केस में कॉकपेट की लाइट्स बंद नहीं हुई थी और ऑटो पायलट भी अभी तक चल रहा था। इसका मतलब था
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Speaker A
कि चारों में से एक इंजन अभी तक कुछ ना कुछ पावर दे रहा है। इस पॉइंट पर नीचे इंडियन ओशन था और 37,000 फीट ऊपर फ्लाइट009 के कॉकपिट में शदीद खौफ का आलम। इतने में वही हुआ जिसका डर किसी भी पायलट
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Speaker A
के दिल में होता है। आहिस्ता-आहिस्ता जहाज की स्पीड कम होने लगी। कैप्टन को मालूम था कि अगर यह स्पीड इसी तरह कम होती गई तो जहाज जो अभी ग्लाइड कर पा रहा है इंस्टॉल करके आउट ऑफ कंट्रोल हो जाएगा। इस मौके पर
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Speaker A
कैप्टन एरिक ने सबसे अच्छा काम यह किया कि उन्होंने जहाज की नोज थोड़ी नीचे की तरफ कर दी ताकि एयरक्राफ्ट की स्पीड कम ना हो और विंग्स पर एयर स्पीड मेंटेंड ही रहे। यह ट्रिक उन्होंने अपने ग्लाइडिंग करियर
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Speaker A
में सीखी थी और इनको इसकी अच्छी खासी प्रैक्टिस भी थी। इसके साथ-साथ कैप्टन ने जहाज को वापस जकार्ता की तरफ भी मोड़ दिया क्योंकि वह समंदर से हटकर जमीन की तरफ आना चाहते थे। इंजन बंद होने के 4 मिनट बाद
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Speaker A
8:44 पर फर्स्ट ऑफिसर ने जकार्ता एयर ट्रैफिक कंट्रोलर से राब्ता किया और सारी सिचुएशन से आगाह किया। एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को भी समझ नहीं आई कि नए जहाज के चारों इंजंस फेल कैसे हो सकते हैं? और यही सवाल था जो उस वक्त पायलट्स के ज़हन में भी
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Speaker A
था। सबसे हैरानी की बात तो यह थी कि थंडर स्टॉर्म्स ना होने के बावजूद सेंट एल्मोस लाइट्स क्यों जाहिर हो रही थी और क्या इनका इंजन फेलियर के साथ कोई डायरेक्ट कनेक्शन तो नहीं है अभी सब इसी गहमागहमी
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Speaker A
में थे कि जहाज में वार्निंग अलार्म्स बजना शुरू हो गए। चारों इंजन फेलियर की वजह से केबिन का ऑक्सीजन गिरने लगा और पायलट समेत सबके ऑक्सीजन मास्क निकल आए। मुसीबतों ने तो जैसे फ्लाइट9 को चारों तरफ से घेर लिया था। ऑक्सीजन मास्क पहनते वक्त
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Speaker A
फर्स्ट ऑफिसर रजर का मास्क ठीक से फिट नहीं हो रहा था और बदकिस्मती से जोर लगाने पर उसकी ट्यूब ही टूट गई। इस मौके पर कैप्टन एरिक के पास सिर्फ दो रास्ते थे। यहां तो प्लेन को आराम आराम से ग्लाइड
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Speaker A
करवाते नीचे लाते जो कि वह ऑलरेडी कर रहे थे। लेकिन इस ऑप्शन में खतरा था कि फर्स्ट ऑफिसर कहीं लो ऑक्सीजन की वजह से बेहोश ना हो जाए। और दूसरा ऑप्शन था कि तेजी से जहाज को नीचे लाया जाए। इससे जहाज के
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Speaker A
केबिन का ऑक्सीजन लेवल फौरन बेहतर तो हो जाता लेकिन फिर वो अपना कीमती एलटीट्यूड जल्दी खो बैठते। हैरतंगेज तौर पर कैप्टन एरिक ने जहाज के एल्टीट्यूड की परवाह किए बगैर फर्स्ट ऑफिसर को बचाने के लिए जहाज को फौरन ड्राइव मोड में डाल दिया। चंद
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Speaker A
सेकंड्स में ही वह 13,000 फीट तक पहुंच गए। जहां नेचुरली हवा में ही ऑक्सीजन ज्यादा होता है। 13,000 फीट पर आते ही उन्होंने नोटिस किया कि सेंट एल्मोस फायर फिनोमिनॉन भी गायब हो गया है। कैप्टन का प्लान अब जकार्ता एयरपोर्ट पर ही क्रैश
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Speaker A
लैंडिंग [संगीत] का था। लेकिन अब यहां पर एक नया मसला आ खड़ा हुआ। उनका एटीट्यूड 13,000 फीट था जो कि तेजी से गिरता जा रहा था। जबकि जकार्ता एयरपोर्ट और जहाज के बीच एक तरफ 10,500 फीट ऊंचे पहाड़ थे और दूसरी
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Speaker A
तरफ समंदर। अब अगर इंजन स्टार्ट नहीं हुए तो वह एयरपोर्ट तक नहीं पहुंच सकेंगे। कैप्टन के पास सिर्फ एक ही ऑप्शन बचा था कि जहाज को समंदर की तरफ मोड़कर पानी पर क्रैश लैंडिंग करवाई जाए। समंदर पर इतने
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Speaker A
बड़े पैसेंजर प्लेन को लैंड कराना एक ऐसा एक्सपीरियंस होता है जिसके बारे में पायलट्स ने पढ़ा तो बेशक बहुत होता है लेकिन प्रैक्टिस नहीं की होती। अब एक छोटी सी भी गलती कई 100 मुसाफिरों की जान ले सकती है। लेकिन फिर भी यह पहाड़ से टकराने
09:43
Speaker A
के मुकाबले में अच्छा ऑप्शन ही था। इस दहशत के माहौल में कैप्टन एरिक ने माइक उठाया और पैसेंजर से इंतहाई पुरसकून लहजे में कहा कि हमारे चारों इंजंस फेल हो चुके हैं और हम उन्हें दोबारा स्टार्ट करने की
09:59
Speaker A
कोशिश कर रहे हैं और आखिर में कहा कि क्या केबिन सर्विस डायरेक्टर फ्लाइट डेक में आ सकते हैं? यह आखिरी जुमला केबिन क्रू के लिए एक कोड वर्ड था कि क्रैश लैंडिंग के लिए तैयारी कर लो। इस अनाउंसमेंट के बाद
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Speaker A
जहाज के अंदर इमरजेंसी लैंडिंग की तैयारियां शुरू हो गई। सबका दिल खौफ में डूबा जा रहा था और कैप्टन इरादा कर चुके थे कि वह समंदर में ही लैंडिंग करेंगे। लेकिन फिर 12,000 फीट पे अचानक चमत्कार हो गया। फ्लाइट इंजीनियर फौरन चिल्लाकर बोले
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Speaker A
कि इंजंस दोबारा स्टार्ट हो गए हैं। कैप्टन फर्स्ट ऑफिसर और फ्लाइट इंजीनियर के लिए तो यह मोजजा था ही, पर चारों इंजंस की आवाज सुनते ही मुसाफिरों की आंखों में भी आंसू आ गए। खुशकिस्मती से अगले कुछ मिनटों बाद ब्रिटिश एयरवेज फ्लाइट009 को
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Speaker A
जकार्ता इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बाहिफाजत लैंड करवा लिया गया। पर इस पूरी कहानी में सबसे अहम सवाल का जवाब अभी भी मिसिंग है कि आखिर 37,000 फीट पे ऐसा क्या हुआ जिसने चारों के चारों इंजंस को नाकारा बना दिया?
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Speaker A
सीढ़ियों के पास एसी वेंट से निकलने वाले धुएं की हकीकत क्या थी? और इस सबके बावजूद 12,000 फीट पे इंजंस दोबारा कैसे स्टार्ट हो गए? लैंड करने के बाद भी इन सवालों के जवाब ना ही पायलट के पास थे और ना ही एयर
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Speaker A
ट्रैफिक कंट्रोलर के पास। बाद में जो वजह सामने आई, उसने एिएशन की तारीख को हमेशा हमेशा के लिए बदल दिया। मालूम पड़ा कि जब फ्लाइट 009 इंडोनेशिया के ऊपर से गुजर रही थी तो जावा आइलैंड पर गालुंग नामी
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Speaker A
वोल्केनो पिछले कई महीनों से लावा उगल रहा था। जैसा कि आप सब जानते हैं कि वोल्केनिक एक्टिविटी में काला और सफेद धुआं निकल रहा होता है। यह वोल्केनिक ऐश होती है जिसमें माइक्रो मीटर से भी छोटे पार्टिकल्स मौजूद
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Speaker A
होते हैं। सेटेलाइट इमेज में देखा जाए तो वोल्केनिक ऐश कई 100 किलोमीटर दूर और हजारों फीट ऊपर आसमान में चली जाती है। ज्यादातर इसमें पत्थर, मिनरल्स और वोल्केनिक ग्लास के जर्रात शामिल होते हैं। अब क्योंकि उस दौर में वोल्केनिक ऐश
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Speaker A
को एिएशन इंडस्ट्री के लिए खतरा नहीं समझा जाता था, तभी किसी का ध्यान इसकी तरफ गया ही नहीं। इस ऐश के पार्टिकल्स इलेक्ट्रिकली चार्ज्ड होते हैं जिसमें थंडर स्टॉर्म्स की तरह बिजली भी नजर आती है। अब हुआ कुछ यूं था कि जब सैंड एल्मोस
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Speaker A
फायर का मंजर चल रहा था। उसी वक्त जहाज वोल्केनिक ऐश के बादल से गुजर रहा था। वही बादल जिसे रेडार ने डिटेक्ट ही नहीं किया क्योंकि वह सिर्फ पानी के जर्रात को डिटेक्ट करने के लिए डिजाइन था। वोल्केनिक
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Speaker A
ऐश के कुछ पार्टिकल्स का मेल्टिंग पॉइंट 1100° सेल्सियस होता है। और जब वो पार्टिकल्स इंजन के 1400 डिग्री टेंपरेचर में गए तो मेल्ट होकर टरबाइन ब्लेड्स, फ्यूल नोजल और मुख्तलिफ कॉम्प्लेक्स पार्ट्स के साथ शीशा बनकर चिपक गए। यही
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Speaker A
वजह थी कि इंजंस माल फंक्शन हो गए और एक-एक करके बंद होते गए। बाद में जब इंजंस का जायजा लिया गया तो उसमें से भारी मिकदार में ऐश बरामद की गई। जब कैप्टन जहाज को तेजी से 13,000 फीट पे लाए तो असल
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Speaker A
में वह ऐश क्लाउड से बाहर निकल आए। ठंडी हवा ने चिपके हुए शीशे को फ्रीज किया और फिर वह फ्रिक्शन से टूट कर बाहर निकल गए। जैसे ही ब्लेड्स आजाद हुए, इंजंस दोबारा स्टार्ट हो गए। इंजन स्टार्ट होने के बाद
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Speaker A
कैप्टन एरिक ने जहाज का खोया हुआ एल्टीट्यूड वापस पाने के लिए उसको क्लाइम मोड में डाला। लेकिन 15,000 फीट के पास वही सैंड एल्मोस फायर दोबारा लौट आई और इंजन नंबर टू दोबारा झटके मारने लगा। तभी उन्होंने जहाज को 12,000 फीट पर ही
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Speaker A
मेंटेंड रखा और पहाड़ों को क्रॉस करके जकार्ता की तरफ बढ़ते रहे। सब कुछ वापस लौट चुका था। लेकिन वोल्केनिक ऐश की रगड़ ने विंड स्क्रीन को बुरी तरह धुंधला कर दिया था। सिर्फ साइड पर एक ऐसा पैच था
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Speaker A
जहां से रनवे नजर आ रहा था। कैप्टन ने सिर्फ उस छोटी सी जगह से देखकर जहाज को बड़ी हिम्मत और हिफाजत से लैंड करवा लिया। ब्रिटिश एयरवेज फ्लाइट009 के इस हैरतंगेज वाक्य के बाद एिएशन की दुनिया में एक
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Speaker A
जबरदस्त तब्दीली लाई गई। इस हादसे से पहले एिएशन की दुनिया में वोल्केनिक ऐश को डिटेक्ट करने का कोई सिस्टम नहीं था। लेकिन इसके बाद पूरी दुनिया में नौ सेंटर्स बनाए गए जिनका काम दुनिया भर के एक्टिव वोल्केनोस पर 247 नजर रखना और
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Speaker A
एयरलाइंस को अलर्ट करना है। यही वो इंसिडेंट था जिसके बाद से वेदर रेडार्स में तब्दीली की गई जो कि अब ऐश क्लाउड्स और नॉर्मल क्लाउड्स को अलग-अलग आइडेंटिफाई करते हैं। इसके साथ-साथ फ्लाइट सिमुलेटर्स में नया चैप्टर ऐड किया गया जिसमें
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Speaker A
पायलट्स को [संगीत] ट्रेनिंग दी जाती है कि ऐश क्लाउड के अंदर घुसने की सूरत में उन्हें क्या कुछ करना है जिसमें फौरन 180° टर्न की प्रैक्टिस इंजन पावर को कम करना और इमरजेंसी एटीट्यूड कम करने की प्रैक्टिस शामिल है। करीब 45 इयर्स पहले
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Speaker A
फ्लाइट 009 की वह परवाज आज भी हमें यह सिखाती है कि मुसीबत चाहे कितनी ही बड़ी क्यों ना हो हाजिर दिमागी के जरिए हारी हुई बाजी को भी जीत में बदला जा सकता है। उम्मीद है zम टीवी की यह वीडियो भी आप लोग
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Speaker A
भरपूर लाइक और शेयर करेंगे। आप लोगों के प्यार भरे कमेंट्स का बेहद शुक्रिया। मिलते हैं अगली शानदार वीडियो में।
Topics:ब्रिटिश एयरवेजफ्लाइट009इंजन फेलियरइंडियन ओशनक्रैश लैंडिंगकैप्टन एरिक मूडीबोइंग 747सेंट एल्मोस फायरएविएशन हादसाइमरजेंसी लैंडिंग

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