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Why America Used Nuclear Weapon on Japan?

यह वीडियो अमेरिका द्वारा जापान पर न्यूक्लियर हमला करने के कारणों और पर्ल हार्बर हमले की पूरी कहानी हिंदी में बताता है।

Key Takeaways

  • पर्ल हार्बर हमला अमेरिका को द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल करने वाला मुख्य कारण था।
  • जापान की प्राकृतिक संसाधनों की कमी ने उसे आक्रामक नीति अपनाने पर मजबूर किया।
  • अमेरिका ने जापान को युद्ध में परास्त करने के लिए न्यूक्लियर हथियारों का उपयोग किया।
  • डर स्मॉलर जैसे बहादुर सैनिकों ने युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • न्यूक्लियर हमले ने युद्ध को समाप्त करने में निर्णायक भूमिका निभाई।

What the video covers

  • 7 दिसंबर 1941 को जापान ने पर्ल हार्बर पर अचानक हमला किया, जिससे अमेरिका वर्ल्ड वार 2 में शामिल हुआ।
  • जापान के पास प्राकृतिक संसाधन कम थे, इसलिए उसने पड़ोसी देशों पर कब्जा करना शुरू किया।
  • अमेरिका ने जापान को तेल सप्लाई बंद कर दी थी, जिससे जापान की स्थिति और खराब हो गई।
  • जापान ने पर्ल हार्बर पर हमला कर अमेरिकी नौसेना को कमजोर करने की योजना बनाई।
  • डर स्मॉलर नाम के अफ्रीकन अमेरिकन नौसेना जवान ने इस हमले में बहादुरी दिखाई और अवार्ड प्राप्त किया।
  • अमेरिका ने पर्ल हार्बर हमले के बाद जापान के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।
  • अप्रैल 1942 में अमेरिका ने जापान के टोक्यो पर पहला बमबारी हमला किया।
  • अगस्त 1945 में अमेरिका ने हिरोशिमा और नागासाकी पर दो न्यूक्लियर बम गिराए।
  • इन हमलों ने जापान को युद्ध समाप्ति के लिए मजबूर किया।
  • यह वीडियो अमेरिका-जापान युद्ध के प्रमुख घटनाक्रम और कारणों को विस्तार से समझाता है।

Answers

Questions about this video

अमेरिका ने जापान पर न्यूक्लियर हमला क्यों किया?

अमेरिका ने जापान को युद्ध में परास्त करने और जल्दी युद्ध समाप्ति के लिए हिरोशिमा और नागासाकी पर न्यूक्लियर बम गिराए।

पर्ल हार्बर हमला कब और क्यों हुआ?

7 दिसंबर 1941 को जापान ने पर्ल हार्बर पर अचानक हमला किया ताकि अमेरिका की नौसेना को कमजोर कर सके और दक्षिण पूर्व एशिया में अपने कब्जे को मजबूत कर सके।

डर स्मॉलर कौन थे और उन्हें क्या सम्मान मिला?

डर स्मॉलर एक अफ्रीकन अमेरिकन नौसेना जवान थे जिन्होंने पर्ल हार्बर हमले में बहादुरी दिखाई और उन्हें नेवी क्रॉस अवार्ड से सम्मानित किया गया।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
सेवंथ दिसंबर 1941, यह इतिहास का वह आखिरी दिन था जिसके बाद दुनिया का नक्शा हमेशा के लिए बदलने जा रहा था। उस नेवी की बेस पर एक आफत टूटने वाली थी, जिसका अंदाज़ किसी को भी नहीं था। बैटलशिप में मौजूद एक अफ्रीकन अमेरिकन बच्ची टॉरस मिलर सूरज निकलते ही नेवी ऑफिसर्स को नाश्ता सर्व करता है और उसके बाद उनकी लॉन्ड्री कलेक्शन के काम पर जाता है। सुबह के ठीक 7:57 पर ड्यूटी परिस को एक सायरन सुनाई देता है। वह सायरन जो शायद कोई सर्विस में सुनना ही नहीं चाहता। वह फौरन बाहर निकलता है और यह देखकर हैरान ज्यादा रह जाता है कि पूरा आसमान जापानी बॉम्बर एयरक्राफ्ट से भर गया है। पलक झपकते ही पूरी लेवल बेस पर तो जैसे कोई कयामत टूट पड़ी हो क्योंकि जापानी एयरक्राफ्ट्स ने चुन-चुन कर अमेरिकन शिप को तबाह करना शुरू कर दिया। यह हमला उसकी पर्ल हार्बर बेस पर किया गया था और आज हम जानेंगे कि जापान ने अमेरिका जैसे मुल्क पर हमला करने की इतनी बड़ी हिम्मत क्यों की थी। डर स्मॉलर नामी एक बावर्ची को अमेरिका का सबसे बड़ा अवार्ड क्यों दिया गया और अमेरिका ने जापान पर न्यूक्लियर हमला क्यों किया था। गेम टीवी की वीडियो में एक बार फिर से खुश हूं, नजरें हमारी इस इंटरेस्टिंग कहानी की शुरुआत 1941 में होती है, जब वर्ल्ड वार 2 में अमेरिका ने चीन को बचाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था। जी हां, वही चीन जिसके खिलाफ आज 2023 में अमेरिका खुलकर बात करता है। वह कुछ यूं था कि वर्ल्ड वार 2 को स्टार्ट हुए 3 साल गुजर चुके थे, जिसमें एक साइड पर जर्मनी और इटली थे, जबकि दूसरी साइड पर ब्रिटेन, नीदरलैंड्स और फ्रांस थे। इस जंग में अमेरिका का कोई पार्ट नहीं था। अमेरिका पूरी तरह से न्यूट्रल था क्योंकि वर्ल्ड वार वन में हुए नुकसान की वजह से अमेरिका खुद को यूरोप और एशिया में होने वाली जंग से बिल्कुल अलग रखना चाहता था। पर एक मुल्क था जो अमेरिका को लगातार सताए जा रहा था और वह था जापान। के पास नेचुरल रिसोर्सेस कम होने की वजह से वो अपने आप पड़ोस के मालिकों पर धड़ाधड़ कब्जा जमा रहा था ताकि वो अपनी नेचुरल रिसोर्सेस की डिमांड्स पूरी कर सके। कोरिया, ताइवान और चीन के बड़े इलाकों पर जापान कब्जा कर चुका था। पैसिफिक ओसियन में ही जापान के करीब फिलिपींस, मलेशिया और इंडोनेशिया पर भी इसकी नजर थी। पर मसला यह था कि मलेशिया ब्रिटिश कॉलोनी थी, इंडोनेशिया नीदरलैंड्स की और फिलिपींस न्यूट्रल रहने वाले अमेरिका की कॉलोनी थी। इन कंट्रीज को जापान का दूसरे मुल्कों पर कब्जा करना बिल्कुल भी ठीक नहीं लग रहा था क्योंकि जापान के पीछे अल में हिटलर का हाथ था और हिटलर ब्रिटेन और अमेरिका का दुश्मन था। जापान की यह हरकतें देखकर जुलाई 1941 में अमेरिका ने जापान को मिल देना बंद कर दिया। जापान के पास खुद का तेल नहीं था बल्कि उसकी डिमांड का 80% तेल वो अमेरिका से ही इंपोर्ट करता था। अमेरिका ने उसके सामने यह कंडीशन रखी कि पहले उसको चीन में अपना कब्जा छोड़ना पड़ेगा, फिर जाकर उसको तेल दिया जाएगा। जापान के लिए यह एक बहुत ही मुश्किल फैसला था। एक तरफ अगर वो चीन से अपना कब्जा छोड़ देता तो पूरी दुनिया समझती कि इसमें हिटलर की सपोर्ट के बावजूद अमेरिका के सामने अपने घुटने टेक दिए हैं। दूसरी तरफ तेल था जिसके बगैर जापान का हाल वैसे ही कमजोर पड़ जाना था। जापान ने फैसला किया कि वह चीन से अपने फोड़ दी वापस नहीं बुलवाएगा बल्कि अंदर ही अंदर उसने प्लान बनाया कि वो तेल के लिए इंडोनेशिया पर कब्जा करेगा। लेकिन ये कम इतना आसान नहीं था जैसा कि हम पहले भी जान चुके हैं कि इंडोनेशिया उस वक्त नीदरलैंड्स की कॉलोनी थी और वहां तक पहुंचने के लिए जरूरी था कि पहले फिलिपींस पर कब्जा किया जाए जो कि अमेरिका की कॉलोनी थी। जापान को अच्छी तरह मालूम था कि अगर उसने फिलिपींस पर हमला किया तो उसकी जवाबी कार्रवाई पैसिफिक ओसियन में ही मौजूद अमेरिकन लेवल बेस पर्ल हार्बर से की जाएगी। लेकिन क्योंकि जापान के पास अब तेल रिजर्व्स तेजी से खत्म होते जा रहे थे और उनके पास हमला करने के सिवा और कोई ऑप्शन नहीं बचा था। फिलिपींस पर नहीं बल्कि बलहर पर। जी हां, जापानी मिलिट्री लीडर ने फैसला किया कि वह अमेरिका की पर्ल हार्बर बेस पर एक सरप्राइज अटैक करके पूरी बेस को ही उड़ा डालेंगे ताकि उसके बाद जापान आसानी से फिलिपींस पर कब्जा कर सके। जवान अब चुपके से पर्ल हार्बर पर अटैक करने की तैयारी में लग चुका था। उसने अपनी फ्लीट तैयार करना शुरू कर दी जिसमें दो बैटलशिप, 39 सबमरीन, 30 डिस्ट्रॉयर और हेल्थएंगे 414 बॉम्बर एयरक्राफ्ट थे। इन एयरक्राफ्ट्स को 6 एयरक्राफ्ट कैरियर्स के जरिए पर्ल हार्बर की तरफ रवाना किया गया। दूसरी तरफ अगर पर्ल हार्बर पर खड़ी अमेरिकन फोर्स का अंदाज़ लगाया जाए तो इसमें आठ बैटलशिप, 59 एंटी एयरक्राफ्ट शिप, 30 सबमरीन और 390 एयरक्राफ्ट थे। देखा जाए तो अमेरिका के पास जापान का हमला नाकाम बनाने के लिए काफी फोर्स मौजूद थी लेकिन इसके लिए जरूरी था कि इनको पहले से इस हमले की जानकारी मिल जाए। पर जापान या अटैक हर तरह से सीक्रेट रखना चाहता था। इसीलिए जापानी कमांडर ने फैसला किया कि हमले से पहले वो किसी भी वायरलेस कम्युनिकेशन से दूर रहेंगे। जापान से निकालने वाली फोर्स करीब 8000 किलोमीटर का रास्ता तय करके अब पी बराबर से सिर्फ 370 किलोमीटर दूर थी और यही वह पॉइंट था जहां से एयरक्राफ्ट्स को हमला करने के लिए टेक ऑफ करवाया गया। सबसे बड़ा हमला होने वाला था जिसमें अमेरिका अभी तक शामिल ही नहीं था। सेवंथ दिसंबर 1941 की सुबह को 7:57 पर 350 जापानी एयरक्राफ्ट ने पर्ल हार्बर पर दो अलग-अलग ग्रुप में धावा बोल दिया। अमेरिकंस जो इस हमले से बिल्कुल अनजान थे, उन पर तो जैसे कयामत ही टूट पड़ी थी। जापानी के पहले ग्रुप ने गोलों की बारिश कर दी थी। 45 मिनट तक यह पर्ल हार्बर पर हमला करते रहे और फिर वापस चले गए। पहले तो यूं लगा शायद हमला खत्म हो चुका है लेकिन 10 मिनट बाद बंपर एयरक्राफ्ट का दूसरा ग्रुप आया और बेस को भी गोली बरसाकर तबाह कर दिया। पूरे 1 घंटे और 15 मिनट तक यह हमला जारी रहा जिसमें जापान का मकसद हर तरह से साफ था कि 20 वेसल, 8 बैटलशिप और 300 से भी ज्यादा प्लांस को खड़े-खड़े तबाह कर दिया गया था। जमीन को आज और आसमान को कल धोने के बादलों ने छुपा दिया था। इसी दौरान अमेरिका की एक बैटलशिप में अफ्रीकन अमेरिकन बावर्ची डर स्मृति भी था जिसका जिक्र हमने वीडियो की शुरुआत में किया था। लॉन्ड्री कलेक्शन के दौरान टॉरस को एक सायरन सुनाई दिया। यह खौफनाक सायरन सुनकर जब तक वह बाहर आता, एक जापानी टारपीडो मिसाइल उनकी शिप पर लग गई जिसमें शिप कैप्टन समेत बहुत ऑफिसर्स जख्मी हो गए। डर स्मृति अकेले ज़ख्मियों को सेफ जगह पर शिफ्ट किया और फिर एंटी एयरक्राफ्ट मशीन गन पर जाकर खुद जापानी एयरक्राफ्ट्स पर पलट कर वार किया। उसने बिना ट्रेनिंग के टोटल छह जापानी तैयार किए थे जबकि इस हमले में जापान था जिसको बाद में नेवी क्रॉस दिया गया अवार्ड। वह नेवी का सबसे बड़ा चक्की यूनाइटेड स्टेट्स में मेडल ऑफ ऑनर के बाद दूसरा बड़ा अवार्ड है। एक घंटे 15 मिनट हमलावर होने के बाद जापानी एयरक्राफ्ट तो वापस चले गए लेकिन वो अब अमेरिका को भी वर्ल्ड वार 2 में धकेल चुके थे। वही अमेरिका जो इस हमले से पहले वर्ल्ड वार 2 में शामिल ही नहीं था। अमेरिका ने पर्ल हार्बर पर हमले के अगले ही दिन जापान को सबक सिखाने का फैसला कर दिया और उनके खिलाफ खुली जंग का ऐलान भी कर दिया। अगले 3 महीने तक अमेरिका अपनी नवल बेस को वापस रिस्टोर करने में लगा रहा। खुशकिस्मती से कई शिप्स शैलो वाटर में डूबी थीं जो रिपेयर के काबिल भी थीं। 4 महीने के बाद अमेरिका ने जापान पर वैसे ही हमला किया जैसे उन्होंने पर्ल हार्बर पर किया था। जी हां, अप्रैल 1942 में अमेरिका ने जापान के कैपिटल टोक्यो पर बमों की बरसात कर दी। यह अमेरिका का वर्ल्ड वार 2 में किया जाने वाला पहला हमला तो था लेकिन इसके बाद अमेरिका ने बस नहीं की। अगले 4 सालों तक जापान और अमेरिका की शाही लड़ाई चलती रही जिसमें अब अमेरिका का पलड़ा भारी था। जापान इस जंग में बहुत कमजोर हो चुका था लेकिन वो किसी सूरत हार नहीं मान रहा था। अमेरिकंस के सामने सुरेंद्र नहीं कर रहा था। आखिरकार अगस्त 1945 में अमेरिका ने जापान के खिलाफ अपना आखिरी कार्ड इस्तेमाल कर ही डाला। सिक्स्थ अगस्त 1945 को सुबह के 8:00 बजे जापान के हिरोशिमा शहर के ऊपर एक बोइंग बी 29 सुपर फोर्ट्रेस एयरक्राफ्ट देखा गया। इस जहाज ने 4400 किलोग्राम वजन वाला लिटिल बॉय नामी बम हिरोशिमा के ऊपर गिरा डाला। एक्जेक्टली 43 सेकंड्स के बाद एक जोरदार धमाका हुआ और सब कुछ व्हाइट हो गया। उसके बाद एक फायर बॉल जमीन से आसमान की तरफ गया जिसने जमीन का टेंपरेचर 5000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा दिया। यह हिस्ट्री का पहला न्यूक्लियर अटैक था जिसने 80% से मिट्टी का ढेर बना दिया। जापानी मिलिट्री लीडर्स के तो जैसे पैरों तले जमीन ही खिसक गई थी। अभी वो कुछ और समझते कि तीन दिनों के बाद नाइंथ अगस्त को अमेरिका ने जापान के शहर नागासाकी पर भी न्यूक्लियर बम कर दिया। यह मार्क थ्री बम था जिसका कोड नाम फैट मैन रखा गया था। 4670 किलोग्राम वजन वाला इस बम ने कितने ही पूरे शहर को सफाई से ही मिटा दिया। ये वो दो न्यूक्लियर बम थे जो इंसानों पर इस्तेमाल हुए।
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Speaker A
अफ्रीकन अमेरिकन बच्ची टॉरस मिलर सूरज निकलते ही नेवी ऑफिसर्स को नाश्ता सर्व करता है और उसके बाद उनकी लॉन्ड्री कलेक्शन के कम पे ग जाता है सुबह के ठीक 757 पे दौरेरिस को एक सायरन सुने देता है वह सायरन जो शायद कोई सर्विस में सुना ही
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Speaker A
नहीं चाहता वो फौरन बाहर निकलता है और यह देखकर हैरत ज्यादा र जाता है की पूरा आसमान जापानी बॉमबर एयरक्राफ्ट से भारत हुआ है पलक झपके ही पुरी लेवल बेस पे तो जैसे कोई कयामत टूट पड़ी हो क्योंकि
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Speaker A
जापानी एयरक्राफ्ट्स ने चुन-चुन कर अमेरिकन शिप को तबाह करना शुरू कर दिया यह हमला उस की पर्ल हार्बर बेस पर किया गया था और आज हम जानेंगे की जापान ने अमेरिका जैसे मुल्क पर हमला करने की इतनी बड़ी
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Speaker A
हिम्मत क्योंकि थी डर स्मॉलर नामी एक बावर्ची को अमेरिका का सबसे बड़ा अवार्ड क्यों दिया गया और अमेरिका ने जापान पर न्यूक्लियर हमला क्यों किया था गेम टीवी की वीडियो में एक बार फिर से खुश हूं नजरे हमारी इस इंटरेस्टिंग कहानी की शुरुआत
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Speaker A
1941 में होती है जब वर्ल्ड वार 2 में अमेरिका ने चीन को बचाने के लिए अपना सब कुछ दावा पर लगा दिया था जी हां वही चीन जिसके खिलाफ आज 2023 में अमेरिका खुला कर बात करता है वह कुछ यूं था की वर्ल्ड वार
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Speaker A
2 को स्टार्ट हुए 3 साल गुर्जर चुके थे जिसमें एक साइड पे जर्मनी और इटली थे जबकि दूसरी साइड पे ब्रिटेन नीदरलैंड्स और फ्रांस थे इस जंग में अमेरिका का कोई पार्ट नहीं था अमेरिका पुरी तरह से न्यूट्रल था क्योंकि वर्ल्ड वार वन में
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Speaker A
हुए नुकसान की वजह से अमेरिका खुद को यूरोप और एशिया में होने वाली जंग से बिल्कुल अलग रखना चाहता था पर एक मुल्क था जो अमेरिका को मुसलसल सताए जा रहा था और वह था जापान के पास नेचुरल रिसोर्सेस कम होने की वजह
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Speaker A
से वो अपने आप पड़ोस के मालिकों पर धड़ाधड़ कब्जा जमा रहा था ताकि वो अपनी नेचुरल रिसोर्सेस की डिमांड्स पुरी कर सकें कोरिया ताइवान और चीन के बड़े इलाकों पर जापान कब्जा कर चुका था पेसिफिक ओसियन में ही जापान के करीब फिलिपींस मलेशिया और
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Speaker A
इंडोनेशिया पर भी इसकी नजर थी पर मसाला यह था की मलेशिया ब्रिटिश कॉलोनी थी इंडोनेशिया नीदरलैंड्स की और फिलिप न्यूट्रल रहने वाले अमेरिका की कॉलोनी थी इन कंट्रीज को जापान का दूसरे मुल्कों पर कब्जा करना बिल्कुल भी ठीक नहीं ग रहा था
02:43
Speaker A
क्योंकि जबान के पीछे अल में हिटलर का हाथ था और हिटलर ब्रिटेन और अमेरिका का दुश्मन था जापान की यह हरकतें देखकर जुलाई 1941 में अमेरिका ने जापान को मिल देना बैंड कर दिया जापान के पास खुद का तेल नहीं था
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Speaker A
बल्कि उसकी डिमांड का 80% तेल वो अमेरिका से ही इंपोर्ट करता था अमेरिका ने उसके सामने यह कंडीशन राखी के पहले उसको चीन में अपना कब्ज छोड़ना पड़ेगा फिर जाकर उसको तेल दिया जाएगा जापान के लिए यह एक
03:13
Speaker A
बहुत ही मुश्किल फैसला था एक तरफ अगर वो चीन से अपना कब्जा छोड़ देता तो पुरी दुनिया समझती की इसमें हिटलर की सपोर्ट की बावजूद अमेरिका के सामने अपने घुटने टेक दिए हैं दूसरी तरफ तेल था जिसके बगैर
03:26
Speaker A
जापान का हॉल वैसे ही कमजोर पद जाना था जापान ने फैसला किया की वह चीन से अपने फोड़ दी वापस नहीं बुलवाएगा बल्कि अंदर की अंदर उसने प्लेन बनाया की वो तेल के लिए इंडोनेशिया पर कब्जा करेगा लेकिन ये कम
03:40
Speaker A
इतना आसन नहीं था जैसा की हम पहले भी जान चुके हैं की इंडोनेशिया उसे वक्त नीदरलैंड्स की कॉलोनी थी और वहां तक पहुंचने के लिए जरूरी था की पहले फिलिपींस पर कब्जा किया जाए जो की अमेरिका की कॉलोनी थी जापान को अच्छी तरह मालूम था की
03:55
Speaker A
अगर उसने फिलिपींस पर हमला किया तो उसकी जवाबी करवाई पेसिफिक ओसियन में ही मौजूद अमेरिकन लेवल बेस पर्ल हार्बर से की जाएगी लेकिन क्योंकि जबान के पास अब तेल रिजर्व्स तेजी से खत्म होते जा रहे थे और उनके पास हमला करने के शिवा और कोई ऑप्शन
04:11
Speaker A
नहीं बच्चा था फिलिपींस पर नहीं बल्कि बलहर पर जी हां जापानी मिलिट्री लीडर ने फैसला किया की वह अमेरिका की पर्ल हार्पर बेस पे एक सरप्राइज अटैक करके पुरी बेस को ही उदा डालेंगे ताकि उसके बाद जापान आसानी
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Speaker A
से फिलिपींस पे कब्ज कर सके जवान अब चुपके से पर्ल हार्बर पर अटैक करने की तैयारी में ग चुका था उसने अपनी फ्लीट तैयार करना शुरू कर दी जिसमें दो बैटलशिप 39 सबमरीन 30 डिस्ट्रॉयर और हेल्थएंगे 414 बॉम्बर एयरक्राफ्ट थे इन एयरक्राफ्ट्स
04:44
Speaker A
को 6 एयरक्राफ्ट करियर्स के जारी पर्ल हार्बर की तरफ रावण किया गया दूसरी तरफ अगर पर्ल हार्बर पर खड़ी अमेरिकन फोर्स का अंदाज़ लगाया जाए तो इसमें आठ बैटलशिप 59 एंटी एयरक्राफ्ट शिप कर सबमरीन और ₹390 एयरक्राफ्ट थे देखा जाए तो अमेरिका के पास
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Speaker A
जापान का हमला नाकाम बनाने के लिए काफी फोर्स मौजूद थी लेकिन इसके लिए जरूरी था की इनको पहले से इस हमले की इनफॉरमेशन मिल जाए पर जापान या अटैक हर तरह से सीक्रेट रखना चाहता था इसीलिए जापानी कमांडर ने
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Speaker A
फैसला किया की हमले से पहले वो किसी किम की भी वायरलेस कम्युनिकेशन से दूर रहेंगे जापान से निकालने वाली फोर्स करीब 8000 किलोमीटर का फैसला ते करके अब पी बराबर से सिर्फ 370 किलोमीटर दूर थी और यही वह
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Speaker A
पॉइंट था जहां से एयरक्राफ्ट्स को हमला करने के लिए टेक ऑफ करवाया गया सबसे बड़ा हमला होने वाला था जिसमें अमेरिका अभी तक शामिल ही नहीं था सेवंथ दिसंबर 1941 की सभा को 757 पे 350 जापानी एयरक्राफ्ट ने पर्ल हार्बर पे दो अलग-अलग
05:52
Speaker A
ग्रुप में धावा बोल दी अमेरिकंस जो इस हमले से बिल्कुल ला इलम थे उन पर तो जैसे कयामत ही टूट पड़ी थी जापानी के पहले ग्रुप ने गोलू की बारिश कर दी थी 45 मिनट्स तक यह पाल हर बार पर हमला करते रहे
06:07
Speaker A
और फिर वापस चली गई पहले तो यूं लगा शायद हमला खत्म हो चुका है लेकिन 10 मिनट बाद बंपर एयरक्राफ्ट का दूसरा ग्रुप आया और बेस को भी गली बर्स बरसाकर तबाह कर दिया पूरे 1 घंटे और 15 मिनट तक ये हमला जारी
06:24
Speaker A
रहा जिसमें जापान का पालना हर तरह से भारत है की 20 वेसल 8 बैटलशिप और 300 से भी ज्यादा प्लांस को खड़े-खड़े तबाह कर दिया गया था जमीन को आज और आसमान को कल धोने के बादलों ने छुपा दिया था इसी दौरान अमेरिका की एक
06:41
Speaker A
बैटलशिप में अफ्रीकन अमेरिकन भावरची डर स्मृति भी था जिसका जिक्र हमने वीडियो की स्टार्टिंग में किया था लॉन्ड्री कलेक्शन के दौरान टॉरस को एक सायरन सुने दिया यह खौफनाक सायरन सुनकर जब तक वह बाहर आता एक जापानी टारपीडो मिसाइल उनकी शिव पर ए लगा
06:59
Speaker A
जिसमें शिव कैप्टन समेत बहुत ऑफिसर्स जख्मी हो गए डर स्नेहा अकेले ज़ख्मियों को सेफ जगह पे शिफ्ट किया और फिर एंटी एयरक्राफ्ट मशीन गण पे जाकर खुद जापानी एयरक्राफ्ट्स पर पलट कर वार किया उसने बगैर ट्रेनिंग के टोटल छह जापानी तैयार है
07:16
Speaker A
मार्ग आए थे जबकि इस हमले में जापान था जिसको बाद में नेवी क्रॉस दिया गया अवार्ड उस नेवी का सबसे बड़ा चक्की यूनाइटेड स्टेटस में मेडल ऑफ ऑनर के बाद दूसरा बड़ा अवार्ड है एक घंटे 15 मिनट हमलावर होने के बाद जापानी एयरक्राफ्ट तो
07:37
Speaker A
वापस चले गए लेकिन वो अब अमेरिका को भी वर्ल्ड वार 2 में धकेल चुके थे वही अमेरिका जो इस हमले से पहले वर्ल्ड वार 2 में शामिल ही नहीं था अमेरिका ने पर्ल हार्पर पर हमले के अगले ही दिन जापान को
07:51
Speaker A
सबक सीखने का फैसला कर दिया और उनके खिलाफ खली जंग का ऐलान भी कर दिया अगले 3 मीना तक अमेरिका अपनी नवल बेस को वापस रिस्टोर करने में लगा रहा खुशकिस्मती से कई शॉप्स शैलो वाटर में डूबी थी जो रिपेयर के काबिल
08:06
Speaker A
भी थी 4 मीना के बाद अमेरिका ने जापान पर वैसे ही हमला किया जैसे उन्होंने पहल हर्बल पे किया था जी हां अप्रैल 1942 में आमिर खान ने जापान के कैपिटल टोक्यो पर बंबू की बरसात कर दी यह अमेरिका का वर्ल्ड
08:20
Speaker A
वार 2 में किया जान वाला पहले हमला तो था लेकिन इसके बाद अमेरिका ने बस नहीं की अगले 4 सालों तक जापान और अमेरिका की शहीद लड़ाई चलती रही जिसमें अब अमेरिका का पालदा भारी था जबान इस जंग में बहुत कमजोर
08:35
Speaker A
हो चुका था लेकिन वो किसी सूरत हर नहीं मां रहा था अमेरिकंस के सामने सुरेंद्र नहीं कर रहा था आखिरकार अगस्त 1945 में अमेरिका ने जापान के खिलाफ अपना आखिरी कार्ड इस्तेमाल कर ही डाला सिक्स्थ अगस्त 1945 को सुबह के 8:00 बजे जापान के
08:54
Speaker A
हिरोशिमा शहर के ऊपर एक बोईंग बी 29 सुपर फोर्ट्रेस एयरक्राफ्ट देखा गया इस जहाज ने 4400 क वजी लिटिल बाय नामी बम हिरोशिमा के ऊपर गिरा डाला एक्जेक्टली 43 सेकेंड्स के बाद एक जोरदार धमाका हुआ और सब कुछ व्हाइट
09:12
Speaker A
हो गया उसके बाद एक फायर बाल जमीन से आसमान की तरफ गया जिसने जमीन का टेंपरेचर 5000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच दिया यह हिस्ट्री का पहले न्यूक्लियर अटैक नंबर 80% से मिट्टी का देर बना दिया जापानी मिलिट्री लीडर्स के तो जैसे पैरों तले जमीन ही खिसक
09:36
Speaker A
गई थी अभी वो कुछ और समझते के तीन दोनों के बाद नाइंथ अगस्त को अमेरिका ने जापान के शहर नागासाकी पर भी न्यूक्लियर बम कर दिया ये मार्क थ्री बम था जिसका कोड नाम फैट मां रखा गया था
09:50
Speaker A
4670 क वजनी इस बम ने कितने ही पूरे शहर को सफाई हस्ती से ही मित डाला ये वो दो न्यूक्लियर बम से जो इंसानों पर इस्तेमाल वीडियो में
Topics:पर्ल हार्बरजापानअमेरिकान्यूक्लियर हमलाद्वितीय विश्व युद्धडर स्मॉलरहिरोशिमानागासाकीजापानी आक्रमणइतिहास

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