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Amazing Discovery made by robotic Camera Inside Pyramids

रोबोटिक कैमरे से पिरामिड के अंदर छिपे सीक्रेट चेंबर और निर्माण के रहस्यों का खुलासा। 4500 साल पुराने ग्रेनाइट ताबूत और निर्माण तकनीकें।

Key Takeaways

  • पिरामिड के अंदर कई सीक्रेट चेंबर मौजूद हैं जो अब तक छुपे थे।
  • पिरामिड के निर्माण में स्लेव्स नहीं बल्कि प्रशिक्षित मजदूरों ने भाग लिया।
  • पिरामिड की संरचना और स्थिति खगोलीय सितारों के पैटर्न पर आधारित थी।
  • रोबोटिक कैमरे ने पिरामिड के अंदर नए रहस्यों को उजागर किया।
  • पिरामिड का धार्मिक और आध्यात्मिक मकसद इंसान को दिव्यता से जोड़ना था।

What the video covers

  • करीब डेढ़ सौ साल पहले पिरामिड के पास एक आदमी ने एक जैकल को पत्थर फेंका, जिससे सीक्रेट चेंबर का पता चला।
  • पिरामिड के अंदर 4500 साल पुराने ग्रेनाइट से बने एक खाली ताबूत की खोज हुई।
  • रिसर्चर्स ने पाया कि पिरामिड के निर्माण में स्लेव्स नहीं बल्कि मेडिकल ट्रीटमेंट पाने वाले मजदूर शामिल थे।
  • पिरामिड के निर्माण में लगभग एक लाख मजदूरों ने भाग लिया था।
  • पिरामिड का मकसद इंसानों को खुदा बनाना था, जहां मरने के बाद इंसान सितारा बन जाता है।
  • तीन पिरामिड की स्थिति सितारों के पैटर्न के अनुसार बनाई गई थी।
  • 1993 में रोबोटिक कैमरा पिरामिड के अंदर एक सीक्रेट चेंबर तक पहुंचा, जहां लाल रंग की प्राचीन लिखाई मिली।
  • रोबोटिक कैमरे ने पत्थर के स्लैब और हैंडल्स देखे, जो पिछले 4500 सालों से छुपे थे।
  • डॉक्टर जाही हवास के अनुसार अभी भी एक और सीक्रेट चेंबर मौजूद है जिसे भविष्य में एडवांस कैमरे से देखा जाएगा।
  • पिरामिड के निर्माण और रहस्यों पर आज भी शोध जारी है और नई खोजें हो रही हैं।

Answers

Questions about this video

पिरामिड के अंदर रोबोटिक कैमरे ने क्या खोजा?

रोबोटिक कैमरे ने पिरामिड के अंदर एक सीक्रेट चेंबर में 4500 साल पुरानी लाल रंग की लिखाई और पत्थर के स्लैब देखे, जो पहले कभी नहीं देखे गए थे।

पिरामिड के निर्माण में कौन लोग शामिल थे?

रिसर्च से पता चला कि पिरामिड के निर्माण में स्लेव्स नहीं बल्कि मेडिकल ट्रीटमेंट पाने वाले प्रशिक्षित मजदूर शामिल थे, जिनकी हड्डियों पर सर्जरी के निशान मिले।

पिरामिड का असल मकसद क्या था?

पिरामिड का मकसद इंसानों को मरने के बाद दिव्यता प्रदान करना था, जहां उन्हें सितारा बनने और अपने साथियों की मदद करने का धार्मिक विश्वास था।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

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Speaker A
98100 यानी आज से करीब डेढ़ सौ साल पहले पेरेंट्स के बराबर से एक शख्स गुजर रहा था कि अचानक उसके सामने जाए कल आ गया। उस आदमी को इस बात का बिल्कुल भी इल्म नहीं था कि अगले ही लम्हे वह पेरेंट्स की कौन सी खास
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Speaker A
चीज देखने जा रहा है। आदमी ने जैकल की तरफ पत्थर फेंका तो वह जैकल पैरों में बने हुए एक छोटे से सुराख में घुस गया। यह मंजर देखते ही उस आदमी से रहा नहीं गया क्योंकि अब वह पर वैट में बने उस ब्रा के अंदर
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Speaker A
देखना चाहता था। जब भी वीडियोस में एक बार फिर से को शांत दिए अंदर दाखिल होते ही आदमी ने खुद को पैरों मिनट के अंदर बने एक सीक्रेट चेंबर में पाया, जिसकी दीवारों पर अजीबोगरीब लिखाई में कुछ लिखा हुआ था।
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Speaker A
नजरिए यही वह पॉइंट था जिसने दुनिया भर के सर्चर्स और आर क्यू लॉजिस्ट को झिंझोड़ कर रख दिया। यही वह दिन था जब दुनिया को मालूम पड़ा कि पेरेंट्स के अंदर सीक्रेट chambers भी मौजूद हैं, जिन पर आज तक रिसर्च
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Speaker A
चल रही है। इस विडियो के पाठ कि हमने देखा यह कैसे 4500 साल पहले इजिप्शियंस ने बगैर कंपास के ना सिर्फ परमिट की हर साइड को एकजुट डाइरैक्शन दी, बल्कि बगैर लेजर लेवल के जमीन को परफेक्टली लेबल भी किया। ना सिर्फ इतना
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Speaker A
बल्कि हम यह भी जाना कि उन्होंने कैसे बगैर मॉडर्न टूल्स के 50 टन वजनी पत्थरों को स्क्वायर शेप दिया और उनको बिना किसी क्रेन की मदद से पर वैट के टॉप तक भी पहुंचाया। यह तमाम चीजें जानने के बाद
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Speaker A
रिसर्चर्स परेशान थे कि किंग्स चेंबर में मौजूद वन पीस ग्रेनाइट से बनाया हुआ यह ताबूत अंदर इस छोटे सुराख से कैसे लाया गया। परवेज़ को बनाने का मकसद क्या था और रोबोट एक कैमरा ने जब पेमेंट के अंदर
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Speaker A
पत्थर के स्लैब में सुराख किया तो उसके अंदर वह कौन सा मंजर देखा गया जो पिछले साढ़े चार हजार सालों से किसी ने भी नहीं देखा था। यह सब आप जान सकेंगे वीडियो के इस पाठ में। तो आइए शुरू करते हैं। बैलेंस नंबर
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Speaker A
7 द अच्छी तरह मेड ऑफ़ बजाय तमाम परमिट के मुकाबले में सबसे ऊंचा और चौराहों पर अमिट है। उसके अंदर अभी तक दो हैडिंग chambers तलाश किए जा चुके हैं। एक को किंग्स चैंबर और दूसरे को को INS चेंबर का नाम दिया गया
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Speaker A
है। जब पहली बार किंग चेंबर के अंदर रिसर्चर्स की टीम गई तो उन्होंने उसके अंदर एक ऐसी चीज देखी तो बिल्कुल भी एक्सपेक्टेड नहीं थी। जी हां, उनको वहां 4500 साल पुराना ग्रेनाइट से बना हुआ एक ऐसा ताबूत मिला जो अंदर से खाली था। लेकिन
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Speaker A
हैरान करने वाली चीज ताबूत का मिलना नहीं था, बल्कि एक्सपर्ट्स यह देखकर हैरान रह गए कि इस चेंबर में अंदर आने का रास्ता और सिर्फ यह छोटा सा सुराख है जिसमें से इंसान भी मुश्किल से आ सकता है। तो आख्यान
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Speaker A
पीसकर नाइट का ताबूत अंदर कैसे आया। आखिरकार कई सालों की रिसर्च के बाद यह रिजल्ट निकाला गया कि पहले एक किंग्स चेंबर अंदर से बनाया गया और उसी वक्त यह ताबूत रखा गया था। उसके बाद चेंबर को सील
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Speaker A
आपके सिर्फ यह छोटा सा सुराख थोड़ा गया। चैलेंज नंबर 8 आखिर 4500 साल पहले वह कौन लोग थे जिन्होंने पैर मिर्च बनाने का इतना मुश्किल तरीके चैलेंज कंपलीट किया था। यह एक ऐसा सवाल था जिसके बारे में कई
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Speaker A
मुख्तलिफ इनक्रीस कर देश करती रही है। किसी ने बोला कि यह मुश्किल तरीन काम उन महिलाओं से करवाया जाता था जो होते इजिप्शियंस नहीं थे और उन महिलाओं से जोर-जबर्दस्ती इतना वजन उठाया जाता और पत्थर तोड़ पाए जाते थे। कभी यह बात सुनने
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Speaker A
को मिलती है कि हजारों साल पहले अर्थ पर एलियंस आए थे जो यह पैरंट्स बना कर वापस चले गए। लेकिन एक्सपर्ट्स ने कई सालों की मेहनत के बाद कुछ ऐसा एविडेंस तलाश किया है जिसने यह तमाम टू रिजेक्ट कर दिया है।
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Speaker A
जी हां, स्पर्श ने जब वहां मिलने वाले वर्कर्स की हड्डियों और स्केलेटन का मुआयना किया तो उनको एक हाथ चीज नजर आईं। कुछ मजदूरों की हड्डियों पर जोड़ भी लगे थे और कुछ की सर्जरी भी हो चुकी थी। रिसर्च
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Speaker A
का मानना है कि जिन लोगों ने पैरंट्स बनाए थे, वे किसी भी सूरत में स्लेव्स नहीं हो सकते क्योंकि पेरेंट्स की कंस्ट्रक्शन के दौरान उनकी मेडिकल ट्रीटमेंट भी होती रही है। लेकिन पुराने दौर में गुलामों पर इतनी अटेंशन नहीं दी जाती थी। ना सिर्फ इतना
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Speaker A
बल्कि माहिरी ने उन स्केलेटिन्स को रिकंस्ट्रक्ट भी किया जिससे यह जाहिर हो गया कि पैरंट्स को बनाने वाले लोग दिखते हैं कैसे थे। चैलेंज नंबर नाइन अब जो कि यह वंश भी सामने आ चुका था कि पैरंट्स को ना
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Speaker A
ही एलियंस ने बनाया है और ना ही स्लेव्स ने, तो अब यह जानना बाकी रह गया था कि आखिर कितने मजदूरों ने मिलकर यह आलीशान स्ट्रक्चर्स बनाए होंगे। क्योंकि आजकल के मॉडर्न दौर में कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स में इंसानों से ज्यादा मशींस का इस्तेमाल
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Speaker A
किया जाता है। इसी वजह से अक्सर प्रोजेक्ट 4 से 5 सालों में मुकम्मल हो जाते हैं। लेकिन हजारों साल पहले ना ही उनके पास कोई मशीन थी और ना ही मॉडल टूल्स। तो जाहिर है उस वक्त पर वैट बनाने के दौरान एक ही वक्त
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Speaker A
में काफी मजदूर लगे होंगे। लेकिन आखिर कितने? हिस्ट्री से यह बात मालूम हुई कि पैरंट्स को बनाने में कम से कम एक ही वक्त में 1 लाख मजदूरों की मदद ली गई और यह मजदूर पूरे मुल्क से इकट्ठे किए गए थे। चैलेंज
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Speaker A
नंबर-10 पैरंट्स की उलझी हुई पत्तियां अब सूरज ना शुरू हो चुकी थी। एक्सपर्ट्स और आर क्यू लॉजिस्ट अब एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां उन्होंने पैर मिर्च की कंस्ट्रक्शन के कई पोशीदा राज्यों को फाश कर दिया था।
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Speaker A
लेकिन कई राज अभी भी पोशीदा हैं जो बार-बार सर्चर्स को तंग कर रहे थे। उनमें से एक रास्ता पैर रेमिडी बनाने का मकसद। जी हां, 60 लाख टन से भी ज्यादा वजनी कई स्लॉट पत्थरों से बना सिर्फ एक पैर मेड और उनके
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Speaker A
अंदर बने सीक्रेट chambers का आखिर कोई तो मकसद होगा। रिसर्चर्स का मानना था कि सिर्फ मम्मी इसको दफनाने के लिए इतना ताम-झाम नहीं किया जा सकता बल्कि के इन पैरंट्स का कोई और हाउस मकसद भी था। इस मकसद को जानने
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Speaker A
के लिए दुनिया भर से मुख्तलिफ इदारों से मदद हासिल की गई और यह रिजल्ट झाला गया कि पैरंट्स का मकसद था इंसानों को खुदा बनाना। जी हां, इजिप्शियंस का मानना था कि जब इंसान मर जाता है तो वह ऊपर
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Speaker A
आसमान में जाकर एक सितारा बन जाता है और मरने के बाद भी वह पीछे रह गए अपने साथियों, अपनी फैमिली और अपनी धरती के काम आता रहे। उसके लिए उसको इन पर मिर्च में दफनाया जाएगा जो पैरंट्स की वॉल पर लिखी
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Speaker A
इन रिलीजियस लैंग्वेज की मदद से अपना मकसद हासिल कर सकेगा और यही शायद उनका ब्रिज था। लेकिन पैर मिर्च का असल मकसद यही है। यहां कोई और इसका अभी तक कोई ऐवडेंस नहीं मिल सका। चैलेंज नंबर-11 इंसीडेंट इंजीनियरिंग
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Speaker A
हिस्ट्री के इंच यह कार स्ट्रक्चर्स के डिजाइन ने एक बार फिर से एक्सपर्ट्स को मुसीबत में डाल दिया। यह मामला शुरू हुआ था गीजा के पिरामिड की एक कैरियर फोटोग्राफ से जिसमें देखा गया कि इन तीनों पर मिर्च
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Speaker A
का स्ट्रक्चर एक दूसरे से अलाइड नहीं है। यह मालूम नहीं हो पा रहा था कि जिन लोगों ने 4500 साल पहले इंच बाय इंच लेवल करके इतनी सफाई से पर मिल पाया है, उन्होंने इन तीन परमिट्स को एक दूसरे से अ लाइन क्यों
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Speaker A
नहीं किया। क्यों इन तीनों की पूरी शम्स आपस में किसी भी सूरत में मैच नहीं हो रही। पहले तो यह एक को इंसिडेंट समझा गया लेकिन सिर्फ तब तक जब तक रोबोट वालों ने यह कोड क्रैक नहीं किया था। रोबट वालों का मानना
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Speaker A
था कि यह सब एक कोइंसिडेंस नहीं बल्कि इन पैरंट्स की यह पोजीशन एक सोचे-समझे एयरप्लेन की वजह से रखी गई थी क्योंकि उस दौर में एजुकेशन सितारों को बहुत मानते थे। इसी वजह से उन्होंने आर्यंस बैंड के तीन
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Speaker A
सितारों की पॉजिशन उसके हिसाब से ही यह पैर मिक्सचर। अगर गौर किया जाए तो इन तीन सितारों में से दो ब्रेड सितारे हैं पर एक सितारा और दिन भी है और इन दोनों से हटा हुआ भी है। सितारों का यही एक पैटर्न
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Speaker A
पिज्जा के पेमेंट में भी इस्तेमाल किया गया। चलें इस नंबर 1298 में परमिट पर एक हाथ किस्म की एक्स-रे स्कैन की गई जिससे मालूम पड़ा कि कॉइन और किंग्स चेंबर के अलावा परमिट की टॉप पर एक और सीक्रेट चेंबर भी मौजूद है। डॉक्टर जाही
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Speaker A
हवास कमाना था कि शायद ही वह सिगरेट चेंबर है जिसके अंदर पर वैट के कई राज पोशीदा हैं। इस सीक्रेट चेंबर तक पहुंचने के लिए 15 सालों के टाइम में एक रोबोटिक कैमरा तैयार करवाया गया जिसको 1993 में इस छोटी सुरंग
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Speaker A
में भेजा है। ठीक 200 फीट के बाद रोबोटिक कैमरा रुक गया क्योंकि अब उसके सामने पत्थर का एक सिलेव था जिस पर दो कॉपर हैंडल्स भी लगे थे। लेकिन एक्सपर्ट्स को हर कीमत पर स्लैब के उस पार का मंजर देखना था
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Speaker A
जो पिछले साढ़े चार हजार सालों से किसी ने भी नहीं देखा था। इसके लिए मस्जिद आठ सालों की मेहनत के बाद एक ऐसा रोबोट तैयार किया गया जिसके आगे ड्रिल मशीन भी लगाई थी। 2001 में उस रिपोर्ट ने लाइम स्टोन से बने इस
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Speaker A
लैब में भारी घोषित कर दिया। इतना भारी कि सिर्फ एक कैमरा उसमें अंदर जा सके। जब कैमरा ने उस क्षेत्र के अंदर देखा तो उसके अंदर एक और पत्थर का सैलाब मौजूद था। लेकिन जब कैमरा का एंगल जमीन की
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Speaker A
ने किया गया तो कुछ ऐसा नजर आया जिसने सब के रोंगटे खड़े कर दिए। जी हां, जमीन पर लाल रंग से कुछ हासिल पाठ लिखे थे। यह आफ इवेंट्स इस छोटे पैसेंजर को सील करते वक्त 4500 साल पहले लिखे गए थे। ना ही
09:16
Speaker A
एक्सपर्ट्स को यह लिखा ही समझ आई और ना ही उसका मकसद समझ आया। लेकिन डॉक्टर जाही हवास का मानना है कि इस दूसरे स्लैप के उस पार जरूर एक सीक्रेट चेंबर मौजूद है जो पिछले चार हजार 500 सालों से किसी ने भी नहीं
09:30
Speaker A
देखा हो सकता है। आने वाले चंद सालों में कोई दूसरा एडवांस प्रोटेक्ट कैमरा इस चेंबर के अंदर देख सके। आप लोगों का इस बारे में क्या ख्याल है? मुझे कमेंट में जरूर बताएं। उम्मीद है जब टीवी का यह
09:42
Speaker A
एपिसोड भी आप लोग भरपूर लाइक और शेयर करेंगे। आप लोगों।
Topics:पिरामिडरोबोटिक कैमरासीक्रेट चेंबरग्रेनाइट ताबूतइजिप्शियंसपिरामिड निर्माणमेडिकल ट्रीटमेंटखगोलीय सितारेडॉक्टर जाही हवासप्राचीन रहस्य

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