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Why Surah Al-Ma’un was revealed I The World’s First AI-Visualized Quran Series!

सूरह अल-माऔन के उत्थान का इतिहास और इसका आज के जीवन में महत्व। इस्लाम में दीन और दुनिया के संतुलन की गहरी समझ।

Key Takeaways

  • सूरह अल-माऔन गरीबों, यतीमों और मिसकीनों के अधिकारों की रक्षा करती है।
  • दीन और दुनिया को संतुलित करना इस्लाम का महत्वपूर्ण सिद्धांत है।
  • नमाज और इबादत के साथ-साथ सामाजिक न्याय भी जरूरी है।
  • अमीरों का गरीबों पर अन्याय इस सूरत के नादिर होने का मुख्य कारण था।
  • पैगंबर मोहम्मद ने इंसानियत और बराबरी का संदेश फैलाया।

What the video covers

  • सूरह अल-माऔन मक्का के उस दौर में नाजिल हुई जब काबा की देखभाल करने वाले अमीर लोग गरीबों का शोषण कर रहे थे।
  • यह सूरत गरीबों, यतीमों और मिसकीनों के अधिकारों की रक्षा का संदेश देती है।
  • सूरह अल-माऔन में दीन और दुनिया को एक साथ बांधने का महत्व बताया गया है।
  • इस्लाम में नमाज और तहज्जुद के बावजूद अगर इंसान दूसरों के अधिकारों की अनदेखी करता है तो वह जहन्नुम का पात्र है।
  • मक्का के अमीरों का गरीबों और गुलामों के प्रति अन्यायपूर्ण व्यवहार इस सूरत के नादिर होने का कारण था।
  • पैगंबर मोहम्मद ने अमीरी और गरीबी के बीच की दीवार तोड़कर इंसानियत को सर्वोच्च स्थान दिया।
  • सूरत हमें यह लिटमस टेस्ट सिखाती है कि क्या हम वास्तव में दीन के साथ दुनिया को सही तरीके से निभा रहे हैं।
  • सूरह अल-माऔन की आयतें इंसान के चरित्र और उसके व्यवहार की गहराई से समीक्षा करती हैं।
  • गरीबों और यतीमों के प्रति समाज की जिम्मेदारी और उनके अधिकारों की रक्षा इस्लाम का मूल संदेश है।
  • यह वीडियो कुरान की इस सूरत के ऐतिहासिक संदर्भ और आज के सामाजिक महत्व को समझाता है।

Answers

Questions about this video

सूरह अल-माऔन कब और क्यों नाजिल हुई?

सूरह अल-माऔन मक्का के उस दौर में नाजिल हुई जब काबा की देखभाल करने वाले अमीर लोग गरीबों का शोषण कर रहे थे और इस सूरत ने उनके अन्याय को उजागर किया।

सूरह अल-माऔन का मुख्य संदेश क्या है?

इस सूरत का मुख्य संदेश गरीबों, यतीमों और मिसकीनों के अधिकारों की रक्षा करना और दीन व दुनिया के बीच संतुलन बनाए रखना है।

क्या सूरह अल-माऔन आज के समय में भी प्रासंगिक है?

हाँ, सूरह अल-माऔन आज भी हमारे सामाजिक और धार्मिक जीवन में न्याय, समानता और दीन-दुनिया के संतुलन की सीख देती है।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
यह बात है कुरान की। ए मोहम्मद के मानने वालों, जरा सोच कर जवाब दो। क्या दिया है तुम्हारे अल्लाह ने तुम्हें भूख और गरीबी के अलावा? काश तुम समझ पाते उकबा, हमारे अल्लाह ने हमें इज्जत दी है। बराबरी का दर्जा दिया है।
00:20
Speaker A
अल्लाहु अकबर। यह बात है उस इंसान की जिसकी इबादत उसके लिए जहन्नुम बन गई। या अल्लाह, या अल्लाह। क्या तुम इसी तरह जाओगे तवाफ करने?
00:38
Speaker A
हां, बिल्कुल ऐसे ही [संगीत] जाऊंगा। दिमाग ठिकाने है तुम्हारा? ये कपड़े पहन कर जाओगे कहा?
00:44
Speaker A
इन कपड़ों में कोई परेशानी है क्या? अरे, उतारो ये गुनाह वाले कपड़े। अल्लाह के घर का तवाफ वैसे करो जैसे तुम दुनिया में आए थे।
01:00
Speaker A
तुम्हारा मतलब बिना कपड़ों के?
01:16
Speaker A
हां, बिल्कुल। ये बात है अल्लाह के उस अहकाम की जिसने
01:39
Speaker A
दीन और दुनिया को एक ऐसी गांठ में बांध दिया जिसको कयामत तक खोला नहीं जा सकता। चल बेटा, शाबाश। जल्दी से वो खराब वाली खजूरें इन अच्छी खजूरों के नीचे लगा दे।
01:58
Speaker A
ये तो गलत है ना बाबा।
02:15
Speaker A
अरे बेटा, कारोबार में यह सब चलता है।
02:19
Speaker A
चल जल्दी लगा दे। मैं नमाज पढ़ कर आता हूं। [संगीत]
02:31
Speaker A
यह बात है सूर माउ की। बचपन में कुरान की आखिरी 10 सूरतों को याद करने के बावजूद भी हम में से ना जाने कितने लोग अक्सर सूर माउ को भूल जाते हैं।
02:45
Speaker A
सादिया, आप सुनाएं सूर माउन कुल या अुल काफिरून? सूर काफिरून नहीं, सूर माउन। और आज हमारी सोसाइटी में ना जाने कितने ऐसे मुसलमान हैं जो अक्सर यह सवाल पूछते नजर आते हैं।
03:02
Speaker A
ओके, इन इस्लाम दीन और दुनिया को लेके चलो।
03:28
Speaker A
व्हाट इज मोरेंट? दीन और दुनिया। पर अफसोस हम में से बहुत थोड़े हैं जो यह जानते हैं कि दीन और दुनिया को बैलेंस किया ही नहीं जा सकता। कल एक सहाबी बता रहे थे कि सूर माऊन में अल्लाह और उसके नबी ने बता दिया कि दीन
03:41
Speaker A
में ही दुनिया है। तो क्या इसका मतलब यह है कि दोनों एक ही हैं?
03:58
Speaker A
और नहीं तो क्या? क्या है सूर माउ के नादिल होने के पीछे का वाकया और किस तरह यह सूरत हमारी दुनिया को हमारे दीन [संगीत] से जोड़ती है। और हां, एक और इंपॉर्टेंट बात कि सूरत हमें ऐसा कौन सा
04:16
Speaker A
लिटमस टेस्ट सिखाती है जिससे हम बड़ी आसानी से पता कर सकते हैं कि कहीं नमाज और तहज्जुद का पाबंद होने के बावजूद भी हम जहन्नुम की आग का ईंधन तो नहीं। सलाम हाफिज जी। तीन महीने हो गए, अगर आप
04:32
Speaker A
पेमेंट कर देते तो मेहरबानी होती।
04:46
Speaker A
ओए सुन, मिल जाएगी तेरी पेमेंट। अभी काम ठंडा पड़ा है। अगली बार फोन करे तो गाली बक कर फोन काट देना। परेशान कर रखा है। [संगीत] और सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट 1400 साल पुरानी इस सूरत का आज हमारी जिंदगी में
04:55
Speaker A
क्या काम है? इन सब सवालों के जवाब जानेंगे [संगीत] इस वीडियो में। यतीम वाला मिसकीन स्कॉलर्स कहते हैं कि सूर मक्का के उस दौर में नाजिल हुई जब आस बिन वाइल, अबू लहब, अबू जहल जैसे लोग काबा के जिम्मेदार थे।
05:09
Speaker A
वो काबा की देखभाल करते। हाजियों के हज का इंतजाम करते। यमन और शाम के सफर को मैनेज किया करते। और इन दुनिया भर में किए जाने वाले तिजारती सफरों से मक्का में किए जाने वाले हजों से होने वाली कमाई को मक्का के
05:23
Speaker A
आम लोगों की तरक्की के लिए इस्तेमाल करते हैं। ऐ गुलामों, याद रहे हाजियों की खातिरदारी में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए। पानी, कालीन और इत्तर सब वक्त पर तैयार होना चाहिए। और हां, कुछ लकड़ी वालों को बोल के काबा के
05:37
Speaker A
दरवाजों की लकड़ी ठीक करवाओ। [संगीत] मगर यह सब एक झूठ था, एक फरेब। असल में गुजरते वक्त के साथ इन लोगों [संगीत] ने अल्लाह के घर काबा को सियासत और कमाई की दुकान बना दिया था। बनू तमीम के लोग कपड़े उतार कर तवाफ कर
05:53
Speaker A
रहे हैं। कोई बात नहीं। वो जैसे [संगीत] हज करना चाहे, करने दो। उन्हें नाराज करना मतलब कारोबार का नुकसान। इसके अलावा काबा के बाहर कुछ खोमचे भी लगवाए [संगीत] हैं। जाकर उनसे किराया वसूल कर लो।
06:03
Speaker A
जी, बेहतर। चलो चलें।
06:16
Speaker A
हर गुजरते दिन के साथ ये लोग बद से बदतर होते चले गए। यह गरीबों को खाना तो खिलाते लेकिन दिखावे के लिए। यह मिसकीनों की मदद करते मगर दिखावे के लिए। ये काबा का तवाफ करते। अपने बुतों की इबादत करते। मगर वो
06:24
Speaker A
भी दिखावे के लिए। दावत बहुत लाजवाब। [हंसी] जल्दी-जल्दी बोलो। अब क्या मांगने आए हो?
06:39
Speaker A
कासिम के घर खाने को कुछ नहीं है। अगर आप थोड़ा अनाज दे देते तो मेहरबानी होती।
07:00
Speaker A
तुम लोग तो रोज भूख का रोना लेकर आ जाते हो। हर जुमे रात मैं पूरे मक्का के लिए दो बढ़िया ऊंट जिबा करवाता हूं।
07:23
Speaker A
हां, सही कहा। बिल्कुल। फिर भी तुम लोगों की भूख नहीं मरती। देख लीजिए अगर कुछ हो सके। तो चलो भागो यहां से, बाद में आना।
07:45
Speaker A
कबीले के सरदारों के इस रवैया ने मक्का के अंदर एक ऐसा माहौल पैदा कर दिया जिसमें गरीब, बेबस और लाचारों के लिए कोई जगह नहीं थी। वहां सिर्फ ताकत का बोलबाला था। यह पैसे और ताकत वाले लोग जिस तरह चाहते, उस तरह गरीब और मिसकीनों के साथ पेश आते। अपने गुलामों को बुरी तरह ट्रीट करते। और
07:59
Speaker A
सबसे बड़ी बात यह, ऊंच, भेदभाव, जुल्म करना उनके लिए कोई गुनाह नहीं था। बल्कि उनके लिए एक आम बात थी। एक नॉर्मल कल्चर था। मैंने सोचा तुम सबको बता दूं। कल से 5 साल के बच्चे भी हमारी गुलामी करेंगे। जितनी
08:19
Speaker A
जल्दी शुरू करेंगे, उतनी जल्दी सीखेंगे। और हां, कोई बीमारी, बुखार का बहाना नहीं। हम समझे?
08:41
Speaker A
और जब पैगंबर मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इस्लाम की दावत दी तो इन लोगों को यह बात सबसे ज्यादा चुभती थी कि आप गरीबों की हिमायत करते हैं। उन्हें बराबर का हक देते हैं। इन लोगों को लगता था कि
09:08
Speaker A
अगर यह काले हबशी लोग हमारे गुलाम नहीं रहेंगे तो हमारे काम कौन करेगा? क्या हम इनके साथ बैठकर खाना खाएंगे?
09:24
Speaker A
आप बुजुर्ग हैं मक्का के। जरा सोच कर देखिए। कैसा लगेगा आपको? अपने हबशी गुलामों के साथ बैठकर खाना खाना? वक्त रहते कुछ कीजिए वरना यह परेशानी और बढ़ जाएगी। तुम ठीक कहते हो उखबा। हम अबू लहब से बात
09:44
Speaker A
करते हैं ताकि वो अपने भतीजे को समझाए।
10:12
Speaker A
बेहतरीन ख्याल है। और एक दिन आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने वो किया जिसने अमीरी और गरीबी के बीच की दीवार को गिराकर इंसानियत का परचम सबसे ऊंचा कर दिया। मक्का की हवा उस दिन कुछ ज्यादा ही खामोश
10:40
Speaker A
थी। जलता सूरज आसमान से काबा को निहार रहा था और इन्हीं गलियों [संगीत] में एक छोटा सा नन्हा यतीम लड़का फटे पुराने कपड़े पहने सर पर दौड़ रहा था। यह मक्का का सबसे कमजोर इंसान [संगीत] था। गुजरे साल एक लंबी बीमारी में उसके बाप की
11:00
Speaker A
मौत हो गई। कुछ दिनों बाद उसकी मां भी गुजर गई। अब उसके पास ना बाप की शफकत [संगीत] थी, ना मां की मोहब्बत। ना किसी कबीले का सहारा था, ना किसी बड़े की सिफारिश। [संगीत] वो बस अकेला था। बेइंतहा अकेला। [संगीत]
11:39
Speaker A
लेकिन फिर भी इस यतीम के दिल के नन्हे से किसी कोने में एक [संगीत] उम्मीद बची थी कि शायद आज अबू जहल उसका माल लौटा देगा। वो माल जो उसके बाप ने कुछ साल पहले अमानत के तौर पर अबू जहल के पास रखा था।
11:59
Speaker A
यह अमानत बड़ी जिम्मेदारी है मेरे ऊपर। रशीद [संगीत] जल्दी ही मुझसे ले लेना। [हंसी] लड़के के पैर धूल से भरे हुए थे। उसकी सांस उखड़ रही थी। उसका गला पानी की प्यास से सूख गया था। लेकिन वो बिना रुके, बिना थमे अबू जहल के
12:21
Speaker A
बाग पहुंच गया था अपना हक लेने। अबू जहल के बागों में वक्त गुजारने का मजा ही अलग है। [हंसी] बदबख्त बिल्कुल। मुफ्तखोर कहीं के। हर हफ्ते चले आते हैं। मेरा माल खाने। ओ अबू जहल, यारों के यार, हिसाब बाद में कर
12:39
Speaker A
लेना। आओ हमारे साथ आकर बैठो। बस अभी आया। अच्छा अच्छा, जल्दी आओ। अरे वो देखो रशीद का लड़का। हुजूर, वो देखिए सामने ये बदबख्त फिर से चला आया। हद है। अब देखना तमाशा। इससे पहले कि वो लड़का कुछ कहता, अबू जहल
12:53
Speaker A
उसकी तरफ पलटा। उसने उसकी तरफ देखा और जहर बुझी आवाज में उससे कहा। तो फिर [संगीत] आ गया भीख मांगने। चल दफा हो यहां से।
13:10
Speaker A
मैं भीख नहीं मांगता, बल्कि अपने बाबा की वो अमानत मांगता हूं जो आपके पास है।
13:17
Speaker A
तेरी इतनी हिम्मत कि तू अब मुझसे मुंहजोरी भी करने लगा। चल। अरे अरे, दफा हो यहां से। बेचारा बच्चा। [हंसी] अबू जहल का ये रवैया देखकर बच्चे का दिल टूट गया। बिल्कुल उस तरह जिस तरह जमीन पर गिर कर कांच टूट जाता है।
13:24
Speaker A
अगर दोबारा यहां नजर आया तो तेरी खाल खिंचवा दूंगा। बड़ा जालिम है अबू जहल। [हंसी] उसकी आवाज भर्रा गई। उसकी आंखों में समुंदर तैर गया। उसने कुछ कहना चाहा लेकिन वो कुछ कह ना सका। [संगीत]
13:39
Speaker A
और तभी इन जालिमों को एक शरारत सूझी।
13:52
Speaker A
ऐ रशीद के बेटे, इधर आ। अरे आ ना, चल जल्दी आ। बहुत गलत किया अबू जहल ने बेचारे के साथ। कोई बात नहीं। देख तेरा माल सिर्फ मोहम्मद ही दिलवा सकते हैं। जा उनके पास जा। इन जालिमों का इरादा यह था कि यह अल्लाह
14:07
Speaker A
के नबी और अबू जहल के बीच होने वाली झड़प देखेंगे। मजे लेंगे। इन्हें क्या खबर कि अब जो होने वाला है उसकी गवाही खुदा आसमान देगा। अब होगी खूब तफरी। [हंसी] अरे दौड़ के जा बेटा। शाबाश दौड़ के जा।
14:23
Speaker A
[हंसी] बच्चा दौड़ता हुआ नबी के पास पहुंच गया। मौला या सल्स [संगीत] द उसने उन्हें सारी बात बताई और उसकी बात सुनते ही अल्लाह के नबी फौरन खड़े हो गए। उन्होंने उसका हाथ थामा। वो हाथ जिसको आज तक सबने झटका था। सल्ली
15:12
Speaker A
बच्चे का दिल एक अजीब सुकून से भर गया। सल्ली आसमान ने निगाहें जमीन पर टिका दी। सूरज ने अपनी किरणों को समेट लिया। लोगों की आंखों में हैरानी झांकने लगी। क्योंकि आज तक किसी ने ऐसा मंजर नहीं देखा था। जहां
15:31
Speaker A
एक इज्जतदार कबीले का आदमी एक गरीब के साथ कदम से कदम बढ़ाकर चल रहा हो। लेकिन यह रहमतुल आलमीन थे। आपके और मेरे प्यारे नबी सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम थे। नबी उ वो देखो शादमान, आप है मोहम्मद, आपके पैगाम के चर्चे मुल्क
15:45
Speaker A
शाम तक हैं। अरे वो देख, आप जा रहे हैं। जा जल्दी से खजूर उन्हें दे आ और कहना तोहफा है। लो आ गए मोहम्मद। अब होगा तमाशा। देखना मजा आएगा। अल्लाह के नबी को देखते ही अबू जह
16:01
Speaker A
अक्सर हम लोग बड़ी शरारत करते हैं तो अम्मी अब्बा से क्या कहती हैं? आप देख रही है इसकी हरकतें?
16:07
Speaker A
सब देख रहा हूं। कई दिनों से देख रहा हूं। [संगीत] तो अगर अलम तरह का लफ्ज यहां पर होता तो बात होती क्या आपने आंखों से देखा उसको। लेकिन जब अरायता की बात आ रही है तो यहां पे सिर्फ महसूस करने की बात हो रही है।
16:23
Speaker A
जैसे अल्लाह कह रहे हैं क्या नोटिस किया अलदी यानी कि सिंगुलर पर्सन की बात हो रही है। किसी एक आदमी की बात हो रही है। युकजब बिद दीन युकजब यानी झुठलाता है। किसको झुठलाता है? दीन को झुठलाता है। तो यहां
16:36
Speaker A
पर जो दीन का लफ्ज इस्तेमाल किया गया है, उसके मायने हैं आखिरत का दिन। जब अल्लाह के आगे हम सबको खड़े होकर अपने आमाल का हिसाब और किताब देना है तो इस आयत में क्या बात हो रही है कि अल्लाह ताला आप
16:52
Speaker A
सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम से कह रहे हैं कि ए मेरे प्यारे नबी क्या आपने नोटिस किया उसको जो आखिरत के दिन को झुठलाता है। आयत नंबर दो फजालिक लज़ यदुक यतीम और यही वो इंसान है जो यतीम को धक्के देता
17:07
Speaker A
[संगीत] है। इस आयत में उस इंसान की खासियत बताई जा रही है। उसके कैरेक्टर को डिफाइन किया जा रहा है। यदुउक का यह जो लफज़ है, यह बताता है कि यह इंसान वायलेंटली, फिजिकली, इमोशनली हर लिहाज से वो यतीम का हक मारता है और वो यह कभी-कभी
17:23
Speaker A
नहीं करता बल्कि उसके लिए बात नॉर्मलाइज हो चुकी है। उसको लगता ही नहीं कि वो कुछ गलती कर रहा है तो उसके लिए एक आम बात हो चुकी है। अब यहां पर जो यतीम का लफज़ इस्तेमाल किया गया है, यतीम वो होता है
17:35
Speaker A
जिसके पास कोई सपोर्ट नहीं होता। सोसाइटी का सबसे ज्यादा कमजोर इंसान एक यतीम है। तो इस आयत के अंदर यह समझाया जा रहा है कि यह इंसान इतना ज्यादा बेहस है, इतना नालायक है कि यह [संगीत] कमजोर से कमजोर
17:50
Speaker A
इंसान का भी हक मार लेता है। तो फिर आ गया भीख मांगने। चल दफा हो यहां से। [संगीत] अब तीसरी आयत वलाद व मिसकीन और यह दूसरों को भी मोटिवेट नहीं करता मिसकीन को खाना खिलाने के लिए। अब ये बात बड़े कमाल की
18:08
Speaker A
है। अरे भाई जब दूसरी आयत में यह बात बता दी गई कि यह आदमी इतना जालिम है, इतना बेकार है कि वो गरीब का यतीम का हक मार लेता है तो फिर वो किसी को क्यों कहेगा कि उसको खाना खिलाया जाए। लेकिन क्योंकि
18:22
Speaker A
कुरान एक समुंदर है तो जरूर इसमें कोई ना कोई गहराई है। चलिए [संगीत] इसे जरा छू कर देखते हैं। अब यहां पर जो लफज़ है ना अला तमिल मिसकीन इसके बारे में उलमा ये कहते हैं कि अगर यहां पर इतमुल मिसकीन का लफज़
18:35
Speaker A
होता तो इसका मतलब होता कि सिर्फ खाना खिलाना या चैरिटी करना या एहसान करना। लेकिन [संगीत] यहां पर तामिल मिसकीन का लफज़ इस्तेमाल करने से यह बात साफ हो गई कि यह जो खाना आप मिसकीन को खिलाने वाले हैं, यह कोई
18:49
Speaker A
एहसान नहीं है। बल्कि [संगीत] यह उस मिसकीन का ही खाना है जो तुमने अपने पास दबा रखा है। यहां पर लख हुद्दू का जो लफज़ है, यह बता रहा है कि वो इनकरेज ही नहीं करता खाना देने के लिए या खाना खिलाने के
19:02
Speaker A
लिए। तो इस आयत में इसकी दूसरी खासियत बताई जा रही है कि यह खुद तो हक मारता ही मारता है। दूसरों को भी इनकरेज नहीं करता कि वह मिसकीन को खाना खिलाएं। उसको उसका हक दें। बजाय इसके कि वो खाना नहीं खिलाते बल्कि
19:16
Speaker A
ये कि उन्होंने कहा वो खिलाने पर किसी को आमादा भी नहीं करते। गोया के इसी अंदे से कि कहीं पलट कर उससे ना कह दिया जाए कि तुम खिलाओ। चलिए अब आयत चार और पांच को समझते हैं। अब यहां से नोट करने वाली बात
19:29
Speaker A
यह है आयत नंबर एक, दो और तीन के अंदर सिंगुलर पर्सन में बात हो रही है। अब पूरे ग्रुप की खासियत बताई जाएगी। फुल ल मुस्लीन अलज़ अन सलाते साहू। तो ऐसे नमाजियों के लिए बर्बादी है जो अपनी
19:45
Speaker A
नमाजों की तरफ से गाफिल रहते हैं। वल यानी के अफसोस [संगीत] है, बेइंतहा अफसोस है, हलाकत है, बर्बादी है। इसके अलावा जहन्नुम के अंदर एक वादी है जिसका नाम वल है। वल का लफज़ मैंने अ किया। जहन्नुम की एक
19:59
Speaker A
ऐसी वादी का नाम भी वेल है जिससे खुद जहन्नुम पनाह मांगती है। और वेल से पहले ये जो फ़ा का इस्तेमाल किया गया है इससे डायरेक्ट कनेक्शन बन जाता है पिछली तीन आयतों के साथ। यानी के बर्बादी है हलाकत है उन लोगों के लिए जिनके अखलाक
20:19
Speaker A
बेकार हैं। जिनकी बात पिछली तीन आयतों में की गई है। अब यहां कुछ अल्लाह का खौफ रखने वाले नमाज़ी लोग कहेंगे। क्या मेरी नमाजों के लिए भी अल्लाह ताला ने यह कहा है कि मुझे जहन्नुम मिलेगी क्योंकि मैं भी तो
20:30
Speaker A
अपनी नमाज में अक्सर भूल जाता हूं या भूल जाती हूं। स्कॉलर्स कहते हैं कि अगर यहां पर फी सलाते साहून कहा जाता तो बात होती कि वो भूल जाते हैं अपनी नमाजों के अंदर इन द प्रेयर। लेकिन यहां क्या बात हो रही
20:45
Speaker A
है? अन सलाते साहून। यानी वो अपनी नमाजों से ही गाफिल हैं। अबाउट द प्रेयर्स नॉट इन द प्रेयर्स। स्कॉलर्स के अकॉर्डिंग नमाज में भूल जाना कोई ऐब नहीं। कोई बुराई भी नहीं। क्योंकि बार-बार बार-बार आप अपने आप को वापस से लेकर आते हैं और फिर से नमाज़
21:04
Speaker A
में फोकस करते हैं। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी में भी एक ऐसा मौका आया कि अल्लाह सुभाना ताला ने उन्हें नमाज़ का एक हिस्सा भुलवा दिया। ताकि उम्मत को यह सिखाया जा सके कि सजदा सहू कैसे करते हैं।
21:17
Speaker A
नमाज भूल जाने पे हमारा क्या एटीट्यूड, क्या रवैया, क्या तरीका इख्तियार होना चाहिए? तो अगर आपको साहब कभी होता ही ना तो उम्मत को कैसे मालूम होता कि अगर नमाज में साहब हो गया तो क्या करूं?
21:28
Speaker A
तो यहां उन लोगों की बात हो रही है तो या तो नमाज पढ़ते ही नहीं। और अगर नमाज पढ़ते भी हैं तो वो अम्मी ने धक्के देके उठा दिया। मोबाइल स्क्रॉल कर रहे हैं। बस किसी सूरत हाल बस चलो। यह बोझ सर पर पड़ा हुआ
21:41
Speaker A
है। इसे उतार के एक तरफ फेंको और फटाफट वापस अपने कामों में लग जाओ। यहां उन नमाजियों की बात हो रही है। अब यहां कुछ लोग कहेंगे कि यार मकतू भाई ये क्या बात हुई? जब तो नमाज आई ही नहीं थी मक्का के
21:53
Speaker A
अंदर। फिर ये लोग नमाज कैसे पढ़ा करते थे? ये तो मुसलमान भी नहीं थे। [संगीत] तो देखिए सलाह के बहुत सारे मायने होते हैं। उसका मतलब सिर्फ नमाज नहीं है। बल्कि इबादत करना, कनेक्शन बनाना, रिलेशनशिप बनाना अपने अल्लाह के साथ। तो जैसे सू
22:07
Speaker A
काफून में हम पढ़ चुके हैं कि उन्हें लगता तो यह था कि वह एक अल्लाह की इबादत कर रहे हैं। लेकिन वह एक अल्लाह की इबादत नहीं थी बल्कि उनका अपना बनाया हुआ कोई अलग ही निजाम, कोई अलग ही सेटअप था। जैसे सीरत की
22:19
Speaker A
किताब में आप पढ़ेंगे कि उनमें इतना बिगाड़ आ चुका था कि वो लोग तवाफ करने से पहले अपने कपड़े तक उतार दिया करते थे। कुरैश की एक बिदत यह भी थी तो मर्द नंगे तवाफ करते और औरतें अपने सारे कपड़े उतार
22:31
Speaker A
कर सिर्फ एक छोटा सा खुला हुआ कुर्ता पहन लेती और उसी में तवाफ करती आयत नंबर छह अलजीना युरा और वो जो दिखाते हैं अपनी नेकियों को अपनी इबादत को यराऊ दिखावा करना शोफ करना रियाकारी करना आयत नंबर सात व यमनामा
22:51
Speaker A
और आम इस्तेमाल की छोटी-छोटी चीजें भी एक दूसरे के साथ शेयर शेयर नहीं करते। माउन के यहां पर दो मतलब हैं। पहला मतलब छोटी-छोटी चीजें जैसे पेन, पेंसिल, बर्फ, नमक, चीनी और माउन का दूसरा मतलब होता है जकात के। क्योंकि जकात भी आपके माल का
23:08
Speaker A
बहुत छोटा हिस्सा है। और इसका एक तो मफूम ये लिया गया है कि इससे मुराद जकात है। आप कहेंगे जकात हकीर कैसे हुई? जकात क्योंकि 1/40 है तो हकीर है। थोड़ा सा ही दिया जा रहा है। आपसे ये तो नहीं कहा गया कि आप
23:21
Speaker A
अक्सरों बेस्टर दे दीजिए। तो क्या बात हो रही है इस आयत में कि इन लोगों के मामले इतने ज्यादा बिगड़ चुके थे कि यह एक दूसरे के साथ छोटी-छोटी चीजें भी शेयर नहीं किया करते थे। उनका हक भी उन्हें दिया नहीं
23:33
Speaker A
करते थे। तो चलिए अब इस पूरी आयत को फटाफट समझ लेते हैं कि इस पूरी आयत में बात हुई क्या है? तो पहली आयत में अल्लाह सुभान ताला नोटिस करवाने वाले अंदाज में अपने नबी [संगीत] से कह रहे हैं कि ऐ मेरे
23:45
Speaker A
प्यारे नबी क्या आपने नहीं देखा? क्या आपने नोटिस नहीं किया? उसको जो आखिरत के दिन को झुठलाता है और यही तो वह है जो यतीम को धक्के देता है। उसको दुत्कारता है जिसके पास कोई सपोर्ट नहीं है। और यही वो
23:59
Speaker A
इंसान है जो दूसरों को भी नहीं कहता कि तुम सामने वाले का हक दे दो। तो बर्बादी है, अफसोस है और जहन्नुम है ऐसे इबादत करने वालों के लिए जो अपनी इबादत से गाफिल हैं। और यह उल्टी सीधी इबादत भी शो ऑफ के
24:13
Speaker A
लिए करते हैं, दिखावे के लिए करते हैं और [संगीत] इनके दिल इतने सख्त हो चुके हैं कि छोटी-छोटी चीजें भी यह शेयर नहीं करते। जब इन्हें दौलत मिल जाती है तो अब उसको रोक-रोक कर रखते हैं। किसी और तक उसका कोई
24:25
Speaker A
फैज ना पहुंच जाए। चलिए अब इस सूरत का रेलेवेंस समझते हैं कि आज हमारी जिंदगी में इसका [संगीत] क्या काम है। इस सूरत में जो गौर करने वाली बात है वो बात ये है कि इस सूरत के अंदर अल्लाह सुभाना ताला ने
24:37
Speaker A
ईमान और अखलाक दोनों को एक साथ कनेक्ट [संगीत] कर दिया है। यानी अब आपकी दीन और दुनिया अलग नहीं है बल्कि वो एक ही है। क्योंकि सूरत का पहला हाफ हमें बताता है कि दिल के अंदर ईमान ना होने की पहली
24:50
Speaker A
निशानी यह है कि आपका रवैया लोगों के साथ खराब होगा। इसकी मिसाल आजकल हम अपनी सोसाइटी में बहुत आराम से देखते हैं। लोग काम करवाने के बाद पैसे नहीं देते। [संगीत] नौकरियों में तनख्वाहओं को लेट कर दिया करते हैं। मेहनत करने वालों का पसीना सूख
25:04
Speaker A
के नमक हो गया। लेकिन आपकी जेब से उसका हक नहीं निकला। बड़ा भाई, बड़ी बहन या किसी का घर में इंतकाल हो गया। आप उसके बच्चे को अपने घर ले आए। अब जी कहने को तो बड़ा एहसान किया जा रहा है लेकिन अपनी औलाद तो
25:17
Speaker A
पसरी पड़ी [संगीत] है और यह बेचारा यतीम आपके घर के सारे काम कर रहा है और आपको कोई फर्क भी नहीं पड़ रहा क्योंकि आपके लिए इतना नॉर्मल हो चुका है ये कि आपको लगता ही नहीं है कि आप कोई खराबी या कोई
25:27
Speaker A
बुराई कर रहे हैं या किसी का कोई हक मार रहे हैं। बेचारे यतीम से तू बहुत काम लेती है। अरे [संगीत] जाओ बाजी घर में रहते हैं तो हाथ तो बटाना ही पड़ता है। थोड़ा अपने लाडले से भी करवा लिया कर।
25:38
Speaker A
अल्लाह सुभाना ताला ने इस ही एटीट्यूड [संगीत] रखने वाले लोगों की इबादत पर वल कहा है। जहन्नुम का अज़ाब उनके लिए लिखा है। क्योंकि यह हो ही नहीं सकता कि एक इंसान जो अल्लाह का खौफ रखता हो वह किसी
25:50
Speaker A
का माल रोक ले। उसे तो हर वक्त ही फिक्र सवार रहेगी कि भैया ऐसा ना हो कि अगले पल मेरी आंखें बंद हो जाए और मैं इसकी पेमेंट ना [संगीत] दे पाऊं। सूरह का सेकंड हाफ हमें बताता है कि वो नमाजी जो नमाज को टाल
26:02
Speaker A
कर पढ़ते हैं। तो आप अपनी नमाजों से बहुत ज्यादा गाफिल है। आपको लग तो रहा है कि आपने नमाज पढ़ ली। टक्करें मार के आप आ गए। लेकिन असल में आपने इबादत नहीं की। आपने सिर्फ एक दिखावा [संगीत] किया, एक
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Speaker A
बोझ उतारा। ऐ वक्त निकल रहा है। नमाज पढ़ लो। अभी 10 मिनट है। [संगीत] पढ़ लूंगी। तुम अपनी पढ़ लो। तो इन कंक्लूजन की सूरत हमें एक फार्मूला देती है। क्या है वो फार्मूला? आखिरत पर ईमान प्लस अच्छा अखलाक प्लस बार-बार
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Speaker A
बेहतरीन इबादत की कोशिश करना इज इक्वल टू वंडरफुल ईमान। इस्लाम इज दैट सिंपल व्लाह इट इज दैट सिंपल एवरीथिंग एल्स इज जस्ट द डिटेल्स अब आखरी बात ठीक है मैं समझ गया लेकिन अब मुझे लग रहा है कि शायद मैं तामिल मिसकीन
26:51
Speaker A
वाली कैटेगरी में हूं नहीं अब मुझे लग रहा है कि मैं शायद साहून वाली कैटेगरी में हूं तो मैं ऐसा क्या करूं बहुत सिंपल है मेरे ख्याल में तीन काम कर लेंगे तो हम लोग इंशाल्लाह ताला अल्लाह के फेवरेट बंदे
27:02
Speaker A
बन जाएंगे वो क्या करना है सबसे पहला काम अगर आपने किसी की पेमेंट रोकी हुई है किसी का हक रोका हुआ है आपकी जकात साथ रुकी हुई है। फटाफट इस बोझ को उतारें। जल्द से जल्द देके इससे निपटारा हासिल करें। दूसरा काम
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Speaker A
जैसे ही अजान हो फौरन इरादा बना लें कि अब मुझे नमाज पढ़ने जाना है। मैं नमाज को टालूंगा नहीं। आखिरी वक्त पर अपनी नमाज नहीं पढूंगा ताकि हम अनस सलाते साहून वाली कैटेगरी से बाहर हो जाए। तीसरी बात खुद भी
27:28
Speaker A
शेयरिंग सीखें और अपने बच्चों को भी शेयरिंग और केयरिंग सिखाएं। मैं जानता हूं अम्मियों के लिए कभी-कभी थोड़ा मुश्किल हो जाता है। वो चाहती हैं कि पूरा पराठा गुड्डू ही खाए। लेकिन इससे लाइफ में आगे जाके गुड्डू बड़ा कंजूस बड़ा बखील हो
27:41
Speaker A
जाएगा ना। तो उसको शेयरिंग और केयरिंग सिखाएं ताकि आप यमनल माऊून वाली कैटेगरी से बाहर निकल पाएं। गुड्डू एक पराठा एक्स्ट्रा रख दिया है। फ्रेंड्स [संगीत] के साथ शेयर करना है। ठीक है?
27:56
Speaker A
उम्मीद करता हूं वीडियो पसंद आई होगी। बात समझ आई होगी। मेरा मकसद है कि मैं कुरान को इतने सिनेैटिक अंदाज से और आसान तरीके से समझाऊं कि इससे आपके अंदर एक शौक पैदा हो। आप जाके खुद किताबें पढ़ें जो मैंने
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Speaker A
डिस्क्रिप्शन लिंक में सारी अवेलेबल करा दी है। जाके पढ़िए ताकि आप कुरान को समझ सकें और बेहतर तरीके से। अगर आपको मेरा यह वीडियो अच्छा लगा और आप मुझे [संगीत] एज ए क्रिएटर सपोर्ट करना चाहते हैं तो आप इस
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Speaker A
क्यूआर कोड को स्कैन करके आप हमारी YouTube कम्युनिटी को जॉइ कर सकते हैं। जिसमें हम एआई के बारे में, सीरतु [संगीत] नबी के बारे में इस तरह की वीडियोस हम कैसे बनाते हैं, वह सारी इनसाइट आपके साथ शेयर करेंगे। आपके [संगीत] सपोर्ट से हम
28:33
Speaker A
और बड़ी टीम बना सकते हैं और बेहतर और बढ़िया और जल्दी वीडियोस को प्रोड्यूस कर सकते हैं। दुआओं में याद रखिएगा जजाक अल्लाह खैर। अस्सलाम वालेकुम अरत दीनिकज़ यतीम व मिसकीन
Topics:सूरह अल-माऔनकुरानइस्लामगरीबीयतीममिसकीनदीन और दुनियापैगंबर मोहम्मदसामाजिक न्यायमक्का

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