इस वीडियो में हदीस की सही व्याख्या के माध्यम से बताया गया है कि औरतें जहन्नुम में क्यों ज्यादा जाएंगी और इसका असली मतलब क्या है।
Key Takeaways
- हदीस का असली मतलब एहसान और शुक्र की कमी से जुड़ा है, न कि महिलाओं की नैतिक या धार्मिक कमी।
- नाशुक्री पुरुषों और महिलाओं दोनों में होती है, इसलिए दोष केवल महिलाओं पर नहीं।
- सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भ को समझे बिना हदीस की गलत व्याख्या से महिलाओं के खिलाफ पूर्वाग्रह बढ़ता है।
- औरतों ने इस हदीस को सुधार के लिए सदका देकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
- हदीस में 'अकल' और 'दीन' का मतलब इस्लामी कानून की सीमाओं से है, न कि सामान्य बुद्धिमत्ता।
What the video covers
- मशहूर हदीस 'औरतें सबसे ज्यादा जहन्नुम में जाएंगी' की गलतफहमी और उसका सही अर्थ समझाया गया है।
- हदीस का संदर्भ और उस समय की सामाजिक परिस्थिति का वर्णन किया गया है।
- औरतों द्वारा हदीस पर सवाल उठाने और नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का सम्मानजनक जवाब दिया जाना बताया गया।
- हदीस में 'नाशुक्री' यानी एहसान का न करना मुख्य कारण बताया गया है, जो मर्द और औरत दोनों में हो सकता है।
- शुक्र और ग्रेटट्यूड की कमी को हदीस का मूल विषय बताया गया है, न कि औरतों की कम अक्ल या कम दीनता।
- औरतों ने इस हदीस को सुनकर सदका दिया और सुधार की कोशिश की।
- मर्दों की भी नाशुक्री और कम मेहनत की आलोचना की गई है, जो समाज में आम है।
- हदीस में 'अकल' और 'दीन' की कमी का मतलब इस्लामी कानून की एक सीमा है, न कि सामान्य बुद्धिमत्ता।
- कयामत के समय महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा होने की भविष्यवाणी और इसका सामाजिक संदर्भ समझाया गया।
- वीडियो में हदीस की सही तफसीर और सामाजिक सन्दर्भ को उजागर कर गलतफहमियों को दूर करने की कोशिश की गई है।
Chapters
- 00:00परिचय और हदीस का परिचय
- 01:05हदीस की सामाजिक और धार्मिक गलतफहमियां
- 02:13हदीस का ऐतिहासिक संदर्भ और सहाबियों की प्रतिक्रिया
- 04:42नाशुक्री और शुक्र की कमी का महत्व
- 05:53मर्दों और औरतों में नाशुक्री का तुलनात्मक विश्लेषण
- 07:01अकल और दीन की व्याख्या
- 11:22कयामत की भविष्यवाणी और वर्तमान संदर्भ
- 14:36निष्कर्ष और हदीस की सही समझ
Full Transcript — Download SRT & Markdown
Speaker A
ये बात इतनी देर से क्या समझा रहे हम तुमको? अरे सुनो तो, हम तो बस बात ही कर रहे हैं। आपकी इन्हीं बातों में आकर मैंने आपसे शादी कर ली, वरना मैं भी किसी अच्छे घराने में होती। कोई पूछ भी नहीं रहा था तुम्हें। शुक्र करो कि हम मिल गए, वरना अब तक घर बैठी होती।
Speaker A
[संगीत] अब तो लगता है घर ही बैठे रहते तो बेहतर था। कम से कम जिंदगी सुकून से गुजर रही होती। अम्मी मारेंगी? देख नीररी, दोनों लदरे हट। बेफिक्र होकर। हां तो हमारी कौन सी मजे में कट रही है? जब से तुमसे शादी हुई है, जिंदगी जहर बन गई है।
Speaker A
जहर अगर किसी ने घोला है तो आपकी बहन ने घोला है हमारी जिंदगी में। कितनी बार कहा है तुमसे जुबान को लगाम दिया करो।
Speaker A
अरे हम क्यों लगाम दें अपनी जुबान को?
Speaker A
[संगीत] इसलिए कि यही जुबान एक दिन तुम्हें जहन्नुम का रास्ता दिखाएगी। जहन्नुम में जाएं हमारे दुश्मन। हदीस नहीं सुनी तुमने? जहन्नुम में सबसे ज्यादा औरतें होंगी। और इंशाल्लाह उनमें से एक तुम भी होगी। देख लेना।
Speaker A
अगर आप एक औरत हैं तो अपनी जिंदगी में आपने कभी ना कभी यह जुमला जरूर सुना होगा कि औरतें सबसे ज्यादा जहन्नुम में जाएंगी। किसी ने अपनी बहन से कहा होगा। किसी ने बीवी को चुप कराने के लिए बोला होगा। किसी ने महफिल में हंसकर कह दिया होगा और किसी ने तो इस पर मीम बना दिया होगा।
Speaker A
आज नबी-ए-पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की एक ऑथेंटिक हदीस आधा अधूरा इल्म रखने वालों के लिए हथियार बन चुकी है।
Speaker A
[संगीत] एक ऐसा हथियार जिसे वो जब चाहे, जिस सूरत हाल चाहे, अपनी सहूलत के हिसाब से औरतों के ऊपर चला देते हैं। और हैरानी और ताज्जुब की बात यह है कि गाली बके मर्द, गुटखा खाए मर्द, सिगरेट फूंके मर्द, नजरों के पर्दे का एहतराम ना करे मर्द,
Speaker A
[संगीत] बीवी की नाशुरी और मां की बेहुरमती करे मर्द। और इन सबके बावजूद जहन्नुम की ठेकेदारी औरतों के नाम लिख दी गई है।
Speaker A
[रोने की आवाज़] और इससे बड़ा सवाल यह है कि जो मर्द इस हदीस को एक ताने की तरह इस्तेमाल करते हैं, क्या वो इस बात का इल्म रखते हैं
Speaker A
[गला साफ़ करने की आवाज़] कि नबी पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जब ये बात कही तो वो किस सुरते हाल में कही गई और क्या ये लोग जानते हैं कि इस हदीस के बताने के बाद औरतों ने क्या किया और शायद बहुत थोड़े होंगे जो ये जानते होंगे कि इस हदीस के अंदर कयामत की ऐसी पेशगोइया छुपी हुई है जिसे आज यूएन की रिपोर्ट भी साबित कर रही है।
Speaker A
तो अगर आपने अपनी पूरी जिंदगी में किसी से ये हदीस सुनी है या फिर इस हदीस ने आपके दिल को चोट पहुंचाई है, आप इसकी हकीकत को नहीं जानते तो अगले 10 मिनट में वर्ड बाय वर्ड इस हदीस को डिकोड करेंगे और अगले 10 मिनट में इंशाल्लाह आप इस हदीस की हकीकत को जान जाएंगे। सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम।
Speaker A
आज से 1400 साल पहले यह ईद का दिन था। ईद की नमाज पढ़ाई जा चुकी थी। बाहर खुले मैदान में जिसे मुसल्ला कहते हैं। सैकड़ों लोग बैठे थे। नबी-ए-पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लोगों को दीन की बातें बता रहे थे। अल्लाह को राजी करने का तरीका समझा रहे थे। सहाबा आपकी बातों को गौर से सुन रहे थे। कुछ सहाबा आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने बैठे थे तो कुछ आपसे दूर।
Speaker A
कोई आपसे सवाल पूछ रहा था तो आपको कोई सुन रहा था। हर किसी की नजर बस आपके चेहरे मुबारक के दीदार के लिए आई थी। हिजरत के बाद मदीना में यह मंजर आम था जब आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सहाबाओं के साथ गुफ्तगू करते, उन्हें दीन की बातें समझाया करते और फिर अल्लाह के नबी ने शायद ईद के खुदबे के बाद या फिर ईद के खुदबे से पहले औरतों की तरफ देखा और उनसे फरमाया, ऐ औरतों, ज्यादा सदका दो और बहुत इस्तकफार किया करो क्योंकि अल्लाह ने मुझे जहन्नुम दिखाई और मैंने देखा कि उसमें सबसे ज्यादा तादाद औरतों की है।
Speaker A
ये बात सुनकर सहाबियात हैरान रह गई। रसूल अल्लाह ने ऐसी बात क्यों कही?
Speaker A
ऐसा क्यों कहा आपने? रसूल अल्लाह क्या कह रहे हैं? और शायद इसी दिन से एक ऐसी गलतफहमी की बुनियाद पड़ी जो आज भी हमारे माशरे में एक ताने की तरह, एक गलतफहमी की तरह जिंदा है।
Speaker A
[हंसी] तुम्हें पता है मारिया, कल पापा अम्मी से कह रहे थे कि सारी औरतें जहन्नुम में जाएंगी। तुम भी एक लड़की हो इसलिए तुम भी जाओगी।
Speaker A
हम उसी खुले मैदान में जहां औरतें मर्दों के ठीक पीछे वाली सफ में खड़ी थी। भरे मजमे के बीच एक औरत खड़ी हुई। इन्हें हदीस में सफाल खदन कहा गया है। बाकार हिम्मत वाली सांवले गालों वाली औरत। रिवायत में उनका हुलिया तक मौजूद है कि उनका रंग जरा सांवला सा था। उनके गाल हल्के सांवले थे। और एक लम्हे के लिए हर सहाबिया की नजर उनकी तरफ उठ गई। हर सहाबी के कान उनके सवाल की तरफ लग गए।
Speaker A
अरेबिया एक ऐसी सोसाइटी जहां औरतों की कोई हैसियत ना थी। आदमी जिस तरह चाहता औरत को रौंदता और आज वही औरत हजारों की भीड़ में बेखौफ बेबाक खड़े होकर सवाल कर रही थी। पर किसी मर्द की हिम्मत ना थी कि वो औरत को रोके, उसे टोके। क्योंकि ये नबी ए पाक के सहाबा थे जिन्हें अल्लाह के रसूल ने सिखाया था कि मोमिन मर्दों को आंखों का पर्दा है। वो उन औरतों की तरफ ना देखें जो उनकी मेहरम नहीं। और मुसलमान औरतों को बताया था कि नाहरम से पर्दा करो। अपने हक के लिए आवाज उठाओ और सिवाय अल्लाह के किसी से ना डरो। और यह सहाबियां भी अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सच्ची मानने वाली थी। ये किसी से ना डरी और बेखौफ होकर बहिम्मत इन्होंने अल्लाह के नबी मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वहि वसल्लम से बड़े अदब से पूछा।
Speaker A
ऐ अल्लाह के रसूल, हम औरतें जहन्नुम में ज्यादा क्यों हैं? क्या अपने कुफ्र की वजह से? या अल्लाह को ना मानने की वजह से?
Speaker A
नबी-ए पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इन सहाबिया के सवाल को सुनकर उन्हें डांटा नहीं। उन्हें भरी महफिल में शर्मिंदा नहीं किया बल्कि बड़े अदब और एहतराम से सहाबिया को जवाब दिया। क्योंकि तुम अपने शौहरों की नाशुक्री करती हो। अगर कोई शौहर जिंदगी भर एहसान करे और फिर एक दिन तुम्हें उसकी कोई बात पसंद ना आए तो फौरन कह देती हो, "तुमसे मुझे कभी कोई भलाई ना मिली।"
Speaker A
रसूल्लाह ने सही फरमाया। सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बात हक है। हां बिलकुल आपने सही फरमाया, उसमें कोई शक नहीं। नोट कीजिए इस हदीस में कुफ्र का लफ्ज मेंशन है, यानी औरतें कुफ्र करती हैं, लेकिन कौन सा कुफ्र?
Speaker A
बिल्कुल यही बात बाकी के सहाबा और सहाबियात ने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछी। जिसके जवाब में अल्लाह के रसूल ने कहा कि तुम अपने शोहरों के साथ किए गए एहसान की नाशुक्री करती हो। यहां देखिए एहसान का लफ्ज मेंशन किया गया है जिसका मतलब है वो जो जिंदगी भर तुम्हारे साथ रहता है उसका कुफ्र करना, उसके एहसान को भुला देना। यानी ये पूरी हदीस असल में शुक्र और ग्रेटट्यूड के बारे में बात करती है और ये जो शुक्र करने की जो कमी है, सिर्फ औरतों में नहीं होती बल्कि ये तो मर्दों के अंदर भी पाई जाती है। ना जाने
Speaker A
[संगीत] कितनी सारी औलादें हैं जो अपने मां-बाप की नाशुक्री करती हैं। अब्बा, आपको यह बात माननी पड़ेगी कि आज हम जो भी हैं अपनी मेहनत की बदौलत हैं। और वैसे भी अब्बा, आपने हमारे लिए आखिर किया ही क्या है? आप जाइए अपनी नमाज रोजा कीजिए। कहां इन चक्करों में पड़े हैं। वैसे भी ऑफिस का काम बहुत है।
Speaker A
ना जाने
Speaker A
[संगीत] कितने सारे मर्द हैं जो मुंह में निवाला डालने से पहले एक लम्हे के लिए भी नहीं सोचते कि इस निवाले के पीछे ना जाने कितने घंटों की मेहनत है। जिस्म की झुलसती हुई गर्मी है। और उसके बावजूद बस निवाला मुंह में डालते ही कमियां निकाल देते हैं। खाना कैसा बना है। थोड़ा नमक कम है।
Speaker A
[गाना गाने की आवाज़] तो यहां तक ये बात समझ में आई कि ये हदीस असल में नाशुक्री के बारे में बताती है। इन ग्रेटट्यूड के बारे में बताती है और नाशुक्री मर्द और औरत दोनों में हो सकती है और होती भी है। और उस दिन उस मैदान में औरतों ने इस नसीहत को हाथों हाथ लिया और नबी-ए पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का जवाब सुनते ही औरतों ने अपने कान की बालियां, अपनी उंगलियों की अंगूठियां उतार कर बिलाल रदी अल्लाहहु अनो की चादर में सदके के तौर पर डाल दी। क्योंकि यह अल्लाह के नबी की हिदायत थी कि औरतों सदका करो क्योंकि तुम अक्सर नाशुक्री करती हो।
Speaker A
और आज भी हम अपने माशरे के अंदर देखते हैं कि औरत है जो घर को बनाती है, औरत है जो आदमी को पालती है, औरत है जो जिंदगी चलाती है लेकिन इतनी मेहनत के बावजूद कभी-कभी वो जज्बात में आकर, गुस्से में आकर वो अपने सारे किए कराए के अमल पर पानी फेर देती है। तुम्हारे खानदान में किसी को रिश्तों की परवाह ही नहीं है। कोई मिलने तक नहीं आता। हां हां, जैसे तुम्हारे खानदान वाले तो बहुत अच्छे हैं। कभी इतना भी नहीं होता कि हमें एक दावत पर ही बुला ले। तुम्हारे खानदान वाले तो बड़े बुला रहे हैं। तुम्हारे मामू के लड़के ने नेटवर्क मार्केटिंग में हमारे पैसे डुबो दिए। कहता था 2 साल में Audi लेगा। अब खुद पुरानी साइकिल पर धक्के खा रहा है।
Speaker A
और तुम्हारी अम्मी, मैंने उनकी इतनी खिदमत की, फिर भी खाला से जाकर कह रही थी, "बहू तो काम से जी चुराती है। तुमसे शादी करके मेरी जिंदगी खराब हो गई है।" और आपसे शादी करके भी मुझे आज
Speaker A
[संगीत] तक कोई सुख चैन नसीब नहीं हुआ।
Speaker A
अब इस हदीस के उस हिस्सों को समझते हैं जिसको लेकर सबसे ज्यादा गलतफहमियां हमारे माशरे में फैली हुई हैं। जब हम इस हदीस को पढ़ते हैं तो अल्लाह के रसूल ने यहां ये भी कहा कि मैंने तुम औरतों से ज्यादा अकल और दीन में कमी वाला कोई और नहीं देखा जो एक समझदार मर्द को भी उसकी अकल से गाफिल कर दें। ऊपर से पढ़ने पर लगता है कि अरे नबी पाक मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम औरतों को कम अक्ल कह रहे हैं, कम दीन।
Speaker A
असल में नाशुक्री के बारे में बताती है। इन ग्रेटट्यूड के बारे में बताती है और नाशुक्री मर्द और औरत दोनों में हो सकती है और होती भी है। और उस दिन उस मैदान में औरतों ने इस नसीहत को हाथों हाथ लिया और
Speaker A
नबी-ए पाक सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम का जवाब सुनते ही औरतों ने अपने कान की बालियां अपनी उंगलियों की अंगूठियां उतार कर बिलाल रदी अल्लाहहु अनो की चादर में सदके के तौर पर डाल दी। क्योंकि यह अल्लाह के नबी की हिदायत थी के औरतों सदका करो
Speaker A
क्योंकि तुम अक्सर नाुक्री करती हो और आज भी हम अपने माशरे के अंदर देखते हैं के औरत है जो घर को बनाती है औरत है जो आदमी को पालती है औरत है जो जिंदगी चलाती है लेकिन इतनी मेहनत के बावजूद कभी-कभी वो
Speaker A
जज्बात में आकर गुस्से में आकर वो अपने सारे किए कराए के अमल पर पानी फेर देती है। तुम्हारे खानदान में किसी को रिश्तों की परवाह ही नहीं है। कोई मिलने तक नहीं आता। हां हां जैसे तुम्हारे खानदान वाले तो
Speaker A
बहुत अच्छे हैं। कभी इतना भी नहीं होता कि हमें एक दावत पर ही बुला ले। तुम्हारे खानदान वाले तो बड़े बुला रहे हैं। तुम्हारे मामू के लड़के ने नेटवर्क मार्केटिंग में हमारे पैसे डुबो दिए। कहता था 2 साल में Audi लेगा। अब खुद पुरानी
Speaker A
साइकिल पर धक्के खा रहा है। और तुम्हारी अम्मी, मैंने उनकी इतनी खिदमत की, फिर भी खाला से जाकर कह रही थी, बहू तो काम से जी चुराती है। तुमसे शादी करके मेरी जिंदगी खराब हो गई है। और आपसे शादी करके भी मुझे आज [संगीत] तक
Speaker A
कोई सुख चैन नसीब नहीं हुआ। अब इस हदीस के उस हिस्सों को समझते हैं जिसको लेकर सबसे ज्यादा गलतफहमियां हमारे माशरे में फैली हुई हैं। जब हम इस हदीस को पढ़ते हैं तो अल्लाह के रसूल ने यहां ये
Speaker A
भी कहा कि मैंने तुम औरतों से ज्यादा अकल और दीन में कमी वाला कोई और नहीं देखा जो एक समझदार मर्द को भी उसकी अकल से गाफिल कर दें। ऊपर से पढ़ने पर लगता है कि अरे नबी पाक मोहम्मद सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम
Speaker A
औरतों को कम अक्ल कह रहे हैं, कम दीन वाला कह रहे हैं। और बस यहीं पर आकर जो गाफिल हैं, जो कम पढ़े लिखे हैं वो रुक जाते हैं और तानाकशी शुरू कर देते हैं। लेकिन जो इल्म वाले हैं वो दीन के हदीसों के गहरे
Speaker A
समुंदर में उतरना शुरू कर देते हैं और वहां से एक से एक मोती चुनकर लेकर आते हैं। जब आप इस हदीस की और गहराई में उतरेंगे तब आपको पता चलेगा कि सहाबा ने ये बात सुनने के बाद आप सल्लल्लाहहु अलैहि
Speaker A
वसल्लम से पूछा प्यारे नबी औरतों में अक्ल की कमी का क्या मतलब है? प्यारे नबी हम औरतें जानना चाहती हैं कि अक्ल की कमी से क्या मुराद है?
Speaker A
आप सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया क्या दो औरतों की गवाही एक मर्द के बराबर नहीं। यहां पर बात असल में दिमाग की नहीं हो रही बल्कि इस्लामिक लॉ की हो रही है। जब आप इस्लामिक लॉ को पढ़ेंगे तो जब भी कोई
Speaker A
बिज़नेस की बात आएगी या फिर कोई लेनदेन या कर्ज़ की बात आएगी, तब गवाही के लिए दो औरतें चाहिए या फिर एक मर्द चाहिए। यानी के अल्लाह सुभाना ताला ने दो औरतों की गवाही को एक मर्द की गवाही के बराबर रखा
Speaker A
है। और ये बात हमें सूरह बकरा में साफ-साफ मिलती है। और अपने में से दो मर्दों को ऐसे मामले के गवाह कर लिया करो। और अगर दो मर्द ना हो तो एक मर्द और दो औरतें जिनको तुम गवाह
Speaker A
पसंद करो काफी हैं। तो ये जो अकल का लफ्ज है ये दिमाग के लिए नहीं इस्तेमाल किया गया बल्कि ये इस्लामिक लॉ की एक लीगल लिमिटेशन है। एक स्पेसिफिक लिमिटेशन है। और जब यहां दीन के लफज़ का इस्तेमाल हो रहा है तो यहां पर दीन की कमी
Speaker A
का मतलब ये नहीं कि उनका ईमान कमजोर होता है। बल्कि यहां पर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ये बताना चाह रहे हैं कि औरत की लाइफ में जब वो खास दिन आते हैं ना जब वो नमाज़ नहीं पढ़ सकती, रोज़े नहीं रख सकती,
Speaker A
इबादत नहीं कर सकती। जब अल्लाह सुभाना ताला की तरफ से उन खास दिनों में उसे इबादत से छुट्टी मिल जाती है। तब अगर मर्द के कंपैरिजन में औरत की इबादत को देखा जाए, तो औरत की नमाज़ें कम निकलेंगी
Speaker A
आदमियों की नमाजों के मुकाबले। हालांकि जो स्कॉलर्स हैं वो यह कहते हैं कि अगर कोई लेडी रेगुलर नमाज की पाबंद है तो महीने के उन खास दिनों में भी अल्लाह सुभाना ताला उसे उसी तरह से नमाज का सवाब देते हैं
Speaker A
जैसा कि आम दिनों में उसे मिला करता है। तो यहां अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम औरतों को क्या समझा रहे हैं कि मर्द तुम्हारे कंपैरिजन में ज्यादा नमाज़ें पढ़ते हैं, ज्यादा कुरान पढ़ते हैं, ज्यादा रोज़ रखते हैं। बगैर पॉज के पूरे
Speaker A
साल इबादत करते हैं। उसके बावजूद भी औरत के पास वो ताकत है, औरत का वो मकाम है कि अगर वो चाहे तो अपने इमोशनल इन्फ्लुएंस से, अपनी कशिश [संगीत] से आदमी को सही रास्ते से भटका सकती है। तो यहां पर रसूल
Speaker A
अल्लाह सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम औरतों को ये हिदायत कर रहे हैं, समझा रहे हैं, एक एडवाइस दे रहे हैं कि तुम अपनी ताकत का सही इस्तेमाल करो। लानतान से बचा करो। और अगर हो सके तो खूब सदका दिया करो और
Speaker A
गुस्से में आकर अपने शौहर की सारी नेमतों को ठुकरा ना दिया करो। ये सांस [गाना गाने की आवाज़] भी एक दिन खामोश हो जानी [गाना गाने की आवाज़] है। अब अक्सर एक सवाल लोगों के ज़हन में आता है
Speaker A
कि अगर जहन्नुम में औरतें ज्यादा होंगी तो क्या जन्नत में मर्द ज्यादा होंगे? पर ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। जब आप हदीस पर रोशनी डालते हैं तो अल्लाह के नबी ने कहा कि मैंने जहन्नुम में झांक कर देखा और देखता
Speaker A
क्या हूं कि वहां पर ज्यादा औरतें हैं और जब मैंने जन्नत में झांक कर देखा तो मैंने देखा कि वहां पर ज्यादा गरीब हैं। यानी कि यहां पर मर्द और औरत के तो कंपैरिजन की बात हो ही नहीं रही है कि मर्द ज्यादा
Speaker A
जन्नत में जाएंगे और औरतें ज्यादा जहन्नुम में जाएंगी। बल्कि अल्लाह के नबी ने गरीब का लफ्ज इस्तेमाल किया है। अब गरीब तो आदमी भी हो सकता है, औरत भी हो सकती है। आइए इस हदीस को आज की करंट सिचुएशन में
Speaker A
देखते [संगीत] हैं। साइंस और डाटा की रोशनी में। आज दुनिया में हर 100 औरतों पर लगभग 101 मर्द हैं। यानी फिलहाल अभी भी मर्दों की तादाद औरतों से थोड़ी सी ज्यादा है। लेकिन यूएन की रिपोर्ट मेंशन करती है
Speaker A
कि कुछ आने वाली सदियों में अंदाजन साल 2088 तक औरतें पूरी दुनिया में मर्दों से ज्यादा हो जाएंगी। क्यों? क्योंकि औरतें अक्सर मर्दों से ज्यादा जीती हैं। अगर आप डाटा उठाकर देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि आमतौर पर एक औरत की जिंदगी 76 साल 4 महीने
Speaker A
होती है। जबकि एक मर्द सिर्फ 71 साल 2 महीने तक जीता है। और जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, यह फर्क और साफ होता चला जाता है। 100 साल की उम्र पर आते-आते हर एक मर्द पर चार औरतें जिंदा [संगीत] होती
Speaker A
हैं। और आज दुनिया में लगभग 26 करोड़ से ज्यादा औरतें बेवा हैं। और कमाल की बात पता है क्या है? आज से 1400 साल पहले ना कोई [संगीत] डाटा था, ना कोई सेंसस था, ना कोई यूएन था, ना कोई पॉपुलेशन रिकॉर्ड था। उसके
Speaker A
बावजूद अल्लाह के नबी मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें कयामत की निशानियों में से एक निशानी यह बताई थी कि औरतें आखिरत आने के करीब आदियों से कहीं ज्यादा हो जाएंगी। [संगीत] और देखते ही देखते ही मर्द इतने कम हो जाएंगे कि 50 औरतों की
Speaker A
देखभाल के लिए सिर्फ एक मर्द बाकी रहेगा। अब जरा सोच कर देखिए कि वो क्या मंजर होगा जब औरतें इस दुनिया की एब्सोल्यूट मेजॉरिटी होंगी और आदमी तादाद में जरा से होंगे। बेटा तुम शादी के बारे में सीरियस तो हो
Speaker A
ना? जी हां मैं शादी और करियर दोनों के बारे में बहुत सीरियस हूं। जी नहीं। वो तो इसे बस पढ़ने का शौक था तो हमने शौक पूरा कर दिया। हां। तब ठीक है। कभी-कभी लड़के ज्यादा पढ़ लेते हैं तो सपने देखना शुरू कर देते हैं।
Speaker A
तो जब अगली बार दीन का हवाला देके इस्लाम के नाम पर कोई आपको रोकने की आपका दिल दुखाने की कोशिश करे ना तो उन सहाबिया को याद कीजिएगा जिन्हें सफाल खदन का खिताब दिया गया है। वो बावकार हिम्मत वाली लेडी
Speaker A
और बस उसी हिम्मत की तरह आप भी तलाश कीजिएगा उस सच की जो किताबों में छुपा है। ताकि दीन के नाम पर आपको कोई बेवकूफ ना बना सके। हदीस नहीं सुनी तुमने? जहन्नुम में सबसे ज्यादा औरतें होंगी। असद साहब क्या आप बता सकते हैं कि इस हदीस
Speaker A
की तफसीर आपने [संगीत] किस आलिम से ली है? तफसीर हमने तो अपने बड़ों से सुना है। उम्मीद करता हूं कि आपको वीडियो पसंद आई होगी। अगर हो सके तो हमारे इस पेज को सपोर्ट कीजिए। कमेंट कीजिए क्योंकि आपके
Speaker A
कमेंट से मुझे एक हिम्मत मिलती है, एक ताकत मिलती है। मेरा मकसद है कि हम आने वाली नस्लों का सुधार करें और बहुत सारी गलतफहमियां जो हमारे बीच बाकी रह गई हैं, उन्हें [संगीत] खत्म किया जाए। जजाकुम्लाह खैर। अस्सलाम वालेकुम। अगर आप इस दौर का
Speaker A
सबसे बड़ा रेवोल्यूशन एआई को सीखना चाहते हैं, घर बैठे अपनी इनकम को शुरू करना चाहते हैं, अपने ख्वाबों को एक शेप एक आकार देना चाहते हैं, तो अभी www.rermub.com पर जाकर हमारी ai master क्लास को जॉइ करें। लर्न कीजिए ताकि आप भी अर्न कर
Speaker A
सकें। दादा अब्बू आप भी एi सीखेंगे। क्यों नहीं? इल्म की कोई उम्र नहीं [संगीत] होती। आप मेरा रजिस्ट्रेशन जल्दी से कर दीजिए।
Topics:हदीसऔरतेंजहन्नुमनाशुक्रीशुक्रइस्लामनबी मोहम्मदसहाबियाधार्मिक व्याख्यासामाजिक संदर्भ











