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Har Insaan Ghaate Mein Hai :Why Surah Al-Asr Was Revealed ? H

सूरह अल-असर की वजह और महत्व, इंसान के वक्त की कीमत और इस सूरत का आज के जीवन में प्रभाव।

Key Takeaways

  • हर इंसान घाटे में है सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए, नेक काम किए और दूसरों को नेकी की तरकीब दी।
  • वक्त सबसे बड़ी पूंजी है जिसे सही जगह खर्च करना जरूरी है।
  • सूरह अल-असर हमें वक्त की कीमत और जीवन के सही उद्देश्य की याद दिलाती है।
  • मक्का के शुरुआती दौर में कुरान के खिलाफ विरोध के बावजूद इसका संदेश दिलों में उतर गया।
  • आज के समय में भी सूरह अल-असर का संदेश उतना ही प्रासंगिक और जरूरी है।

What the video covers

  • सूरह अल-असर कुरान की सबसे छोटी लेकिन महत्वपूर्ण सूरतों में से एक है।
  • यह सूरत इंसान की उम्र और वक्त की कीमत पर जोर देती है, जो कतरा-कतरा पिघलती है।
  • मक्का के शुरुआती दौर में इस सूरत का नाजिल होना और उस समय के विरोधी हालात।
  • सूरह अल-असर में अल्लाह की कसम और इंसान के घाटे में होने की बात।
  • सूरत के तीन मुख्य शब्दों के गहरे अर्थ और उनका सामाजिक संदर्भ।
  • सूरह अल-असर की शिक्षा के अनुसार, केवल ईमान लाना ही नहीं बल्कि नेक काम करना और दूसरों को भी नेकी की तरकीब देना जरूरी है।
  • वक्त की कीमत को समझाने के लिए एक कहानी के माध्यम से वक्त के सही उपयोग का महत्व।
  • आज के मॉडर्न जीवन में सूरह अल-असर का प्रासंगिकता और इसका रियलिटी चेक।
  • वीडियो में AI मास्टर क्लास का प्रचार भी है जो वक्त के सही उपयोग पर आधारित है।
  • सूरह अल-असर का जीवन में प्रभाव और कामयाबी के लिए इसके संदेश को अपनाने की जरूरत।

Answers

Questions about this video

सूरह अल-असर क्यों महत्वपूर्ण है?

सूरह अल-असर इंसान के वक्त की कीमत और जीवन में सही उद्देश्य की याद दिलाती है। यह बताती है कि हर इंसान घाटे में है सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए, नेक काम किए और दूसरों को नेकी की तरकीब दी।

सूरह अल-असर कब और क्यों नाजिल हुई थी?

सूरह अल-असर मक्का के शुरुआती दौर में नाजिल हुई थी जब कुरान का पैगाम धीरे-धीरे आम हो रहा था और मक्का के सरदार इसे रोकने की कोशिश कर रहे थे। यह सूरत उस दौर के विरोध और चुनौती को दर्शाती है।

सूरह अल-असर का आज के जीवन में क्या महत्व है?

आज के मॉडर्न जीवन में सूरह अल-असर का संदेश वक्त की बर्बादी से बचने और जीवन को सही दिशा में लगाने का रियलिटी चेक है, जो हर इंसान को अपने वक्त का सही उपयोग करने की प्रेरणा देता है।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:01
Speaker A
ये बात है कुरान की। बगदाद की रेवड़ी ले जाओ। आओ आओ ऐसी ताजी मछलियां ले लो मिलेगा। ताज़ाजी मछलियां। गरमा गरम नान खाओ। आओ आओ ताज़ी मछलियां ले लो। नहीं मिलेगा। ऐ लोगों उधर गरमा गरम नान है। इधर तुम्हारे मुसलमान भाई की जान है।
00:23
Speaker A
ताज़ी मछलियां ले लो। मुसलमानों रहम खाओ मुझ पर। मेरी बर्फ पिघल रही है। अल्लाह के वास्ते जल्दी करो। मेरी पूंजी पानी बन रही है। ठंडी-ठंडी बर्फ खरीद लो। मौलाना आप उदास लग रहे हैं। बर्फ खरीद लो। नहीं नहीं अपने मुसलमान भाई।
00:42
Speaker A
मैं बस उस बर्फ वाले को देख रहा हूं। जमाल आज इस बर्फ वाले ने मुझे पूरा कुरान समझा दिया। व अस्र इनल इंसान लफी खुस्र। इंसान की उम्र भी बिल्कुल इसी बर्फ की तरह कतरा-कतरा पिघल रही है। और अगर जिंदगी की
00:56
Speaker A
शाम ढलने से पहले हमने सौदा [संगीत] ना किया तो मुनाफा तो दूर इंसान अपनी असल पूंजी भी पानी कर देगा। मुसलमानों अल्लाह के वास्ते जल्दी करो। [संगीत] ये बात है वक्त की। ये बात है सूर अल अस्र की।
01:21
Speaker A
सूर अल अस्र कुरान की सबसे छोटी सूरतों में से एक सूरत है। इस सूरत की इतनी ज्यादाेंस है मुस्लिम ट्रेडिशन के अंदर कि बचपन में ही हर बच्चे को सूर अल अस्र याद करा दी जाती है। और आज के इस मॉडर्न दौर
01:36
Speaker A
में अपना वक्त बर्बाद कर रहे इंसान के लिए इस सूरत से बड़ा कोई रियलिटी चेक नहीं। [संगीत] टू द [संगीत] क्या है सूर अल अस्र के नाजिल होने के पीछे का वाकया और क्यों जब अल्लाह सबसे बड़ा है तब भी वो वक्त की कसम खाता है
02:13
Speaker A
अस्र की कसम कसम के इंसान नुकसान में है। उस [गला साफ़ करने की आवाज़] वक्त की कसम जिसे उसने खुद बनाया है। और किस तरह यह सूरत दुनिया के हर इंसान को टाइम वेस्टर होने का एहसास दिलाती है। और सबसे ज्यादा
02:27
Speaker A
जरूरी सवाल कि 1400 साल पहले नाजिल हुई इस सूर का क्या काम है आज हमारी जिंदगी में?
02:33
Speaker A
[संगीत] इन सब सवालों के जवाब जानेंगे इस वीडियो में। स्कॉलर्स के अकॉर्डिंग सूर अल अस्र मक्का के शुरुआती दौर में नाज़िल हुई। उस दौर में नाज़िल हुई जब कुरान का पैगाम आहिस्ता-आहिस्ता आम हो रहा था। और इसकी ताकत को देखकर अबू जहल और अबू लहब जैसे
02:55
Speaker A
मक्का के सरदार पूरी तरह खौफजदा थे। वो किसी भी कीमत पर लोगों को कुरान सुनने से रोकना चाहते थे। यहां तक कि इन लोगों के जुल्म की इंतहा इस हद तक बढ़ गई कि ये लोग मक्का में दाखिल होने वाले काफिलों को आम
03:09
Speaker A
लोगों को मक्का की सरहदों पर रोक दिया करते और उनसे कहा करते कि अपने कानों में रुइयां ठूस लो क्योंकि मक्का के अंदर एक ऐसा शख्स घूम रहा है जिसकी बात सुनते ही तुम अपना दीन छोड़ दोगे। खुशामदीद आइए आइए। मक्का में आपका
03:26
Speaker A
इस्तकबाल है। बहुत शुक्रिया। हमें अबू जहल से मिलना है। सरदार अंदर ही है। आइए। सरदार ने काफिले को रुकवा दिया है। क्या तुमने सुना?
03:46
Speaker A
हां, मैं भी देख कर आ रहा हूं। शायद वो इधर ही आ रहे हैं। अबू जहल तुमने हमारा काफिला क्यों रोका?
03:56
Speaker A
क्या तुम जानते हो मैं कौन हूं? आप कौन हैं? मैं अच्छी तरह जानता हूं। आपको रोकने के पीछे मेरा एक मकसद है। कैसा मकसद?
04:05
Speaker A
गुलाम। जी सरदार। आप लोग रुई उठा लीजिए। इसका क्या करना है? यह रुई अपने कानों में डाल लीजिए। यह कैसा बेहूदा मजाक है? यह कोई मजाक नहीं है। मक्का में एक ऐसा जादूगर घूम रहा है जिसकी बातों में अजीब कशिश है। जो भी उसके
04:23
Speaker A
लफ्ज सुनता है वो अपने बाप दादा के दीन से फिर जाता है। लात और उज्जा की कसम यह तो बड़ी फिक्र की बात है। इससे बड़ी बात तो यह है कि वो मेरा भतीजा है। [गाना गाने की आवाज़][संगीत]
04:42
Speaker A
अल्लाह सुभाना ताला ने सूर फसिलत में इस बात को मेंशन भी किया है कि किस तरह ये लोग अपने कान बंद कर लिया करते थे शोर मचाया करते थे कि बस किसी सूरत हाल कुरान की आवाज इनके कानों में ना पड़ सके
04:56
Speaker A
और काफिर कहने लगे कि इस कुरान को सुना ही ना करो और जब पढ़ने लगे तो शोर मचा दिया करो ताकि तुम गालिब रहो। वो कहते हैं ना कि बंदा प्लान बनाता है और अल्लाह मुस्कुराता है। इसीलिए मक्का के इन
05:08
Speaker A
जालिमों का प्लान बिल्कुल फेल होता रहा। क्योंकि जब आप कुरान मजीद के आखिरी हिस्से को खोलेंगे तो आपको वो सारी सूरतें नजर आएंगी जो मक्का के अर्ली पीरियड में नाजिल हुई। और ये सारी सूरतें इतनी छोटी हैं, इतनी छोटी हैं कि कानों में उंगलियां जाने
05:23
Speaker A
से पहले ये सूरतें दिल में उतर जाया करती थीं। और ऐसा कई बार हुआ कि लोगों ने कोशिश की कि वो कुरान मजीद को ना सुने। लेकिन जैसे ही कुरान मजीद का कलाम उनके [गला साफ़ करने की आवाज़] कानों में गया
05:34
Speaker A
वो बात उनके दिल में उतर गई और वो सोचने पर मजबूर हो गए कि यह बात हो क्या रही है ये तो कोई इंसानी कलाम नहीं सुभान अल्लाह [गाना गाने की आवाज़] क्या आपको मोहम्मद के कलाम से डर नहीं
05:47
Speaker A
लगता जो आपने अपने कानों से रुई निकाल दी आप तो कह रहे थे कि जादुई कलाम लोगों को उनके दीन से दूर कर देता है शाजिया अल्लाह की कसम उस कलाम के कुछ लफ्ज कान में पड़ते ही मैं बेचैन हो गया। ना
06:04
Speaker A
जाने क्यों पर मुझे वो कलाम सच्चा लगता है। इसलिए आज मैं उसे सुनने के बाद ही फैसला करूंगा कि कौन झूठा है और कौन सच्चा बेहतर खैर छोड़ो ये बात अब मैं चलता हूं। आप बेफिक्र होकर तिजारत के लिए जाइए।
06:21
Speaker A
हम ला इलाहा इल्ला सुभान का [गाना गाने की आवाज़] [संगीत] इस्लामिक ट्रेडिशन की ऑलमोस्ट हर किताब में हमें ये बात मिलती है कि जब दो सहाबी एक दूसरे से मिला करते और एक दूसरे से फिर जुदा हुआ करते तो वो सलाम वालेकुम कहने से
06:43
Speaker A
पहले सूर अल अस्र को पढ़ा करते। माशा्लाह मक्का में भी भीड़ बढ़ने लगी है। इस बार हाजियों की तादाद काफी है। अल्लाह का शुक्र है। इसी वजह से कमाई भी बढ़ रही है। और हम तो चाहते हैं कि ज्यादा से
07:04
Speaker A
ज्यादा लोग दीन इस्लाम में आए क्योंकि यही दीन हक है। इंसान जितनी जल्दी मान ले कि अल्लाह एक है, उतना उसके हक में बेहतर है। यह लीजिए आपका घोड़ा तैयार है। इसकी कीमत क्या अदा करूं? पैसों की जरूरत नहीं छोटा
07:19
Speaker A
सा काम था। शुक्रिया। इजाजत दीजिए अब और याद रखिए वस्र इनल इंसान लफी खुस्र। बेशक हर इंसान घाटे में है। सिवाय उनके जो ईमान लाए नेक अमल किए और दूसरों को नेकी की तरगीब दी। अस्सलाम वालेकुम। वालेकुम अस्सलाम।
07:45
Speaker A
सूर अल अस्र की क्या अहमियत है? वो हमारी जिंदगी में क्याेंस रखती है? इस बात को समझने के लिए यह कहानी सुनिए कि एक परेशान आदमी को एक रोज एक बेहद अमीर आदमी मिला। इस अमीर आदमी ने इस परेशान
08:00
Speaker A
आदमी के साथ एक मिस्टीरियस कॉन्ट्रैक्ट साइन किया। जिस कॉन्ट्रैक्ट में यह बात तय हुई मैं तुम्हारा पूरा कमरा नोटों की गड्डियों से भर दूंगा। लेकिन शर्त यह है कि अगर उन्हें वक्त रहते खर्च नहीं किया तो वह सब अपने आप राख बन जाएंगी। [हंसी]
08:16
Speaker A
यह गरीब आदमी मान गया और कॉन्ट्रैक्ट साइन होते ही खाली कमरा नोटों से भर गया। शुरुआत में उस आदमी ने खूब मेहनत की। पहले एक नया घर लिया। फिर एक चमकती हुई गाड़ी ली। फिर अपने हर अरमान, हर शौक को पूरा
08:30
Speaker A
करता चला गया। और जब इस आदमी का दिल इस दुनिया की लज्जतों से भर गया। तब उसने सोचा कि लाओ इस पैसे को थोड़ा बहुत सही जगह भी खर्च कर देता हूं। और इसीलिए उसने कुछ अस्पताल बनवाए। कभी [संगीत] किसी गरीब
08:41
Speaker A
की झोपड़ी को मकान में बदल दिया। कभी किसी गरीब को खाना खिला दिया। लेकिन हर गुजरते दिन के साथ यह नोट धीरे-धीरे कम होते रहे। इसकी आंखें दुनिया की रौनक से इतनी चौंधिया [संगीत] गई कि इसे इन नोटों का
08:55
Speaker A
ख्याल ना रहा। वो भूल गया कि एक कमरा है जहां इस लम्हे भी हर सेकंड उसकी दौलत राख हो रही है। वो भूल गया वो वादा कि उसे अपने माल को सही जगह पर खर्च करना है। और फिर देखतेदेखते ये आदमी उम्र के 50 बरस को
09:11
Speaker A
पहुंच गया। एक बहुत बड़ी बीमारी ने इसको आ पकड़ा। इसने सोचा अरे कोई बात नहीं कमरे में तो दौलत भरी पड़ी है। इलाज करवा लूंगा। और जब कांपते हाथों से इसने दरवाजा खोला तो यह वहीं उसी लम्हे दहलीज पर जम
09:24
Speaker A
गया। हर [संगीत] गड्डी हर नोट राख बन चुका था और उस राख के ढेर में अभी भी एक नोट बाकी था और जैसे ही उसने वो आखिरी नोट उठाया वो नोट भी राख बनकर बिखर गया और यह मंजर देखते ही वो आदमी वहीं जमीन पर
09:46
Speaker A
गिर पड़ा। इस कहानी में जो नोटों की गड्डियां हैं ना वो असल में हमारा वक्त है। वो वक्त जो अल्लाह सुभाना ताला हमारी जिंदगी के अकाउंट में हमारे पैदा होने से पहले ही क्रेडिट कर देता है। अब आप इस वक्त को खर्च करें या ना करें।
10:05
Speaker A
इसको सही जगह लगाएं या ना लगाएं। आप इसे फिजूल चीजों में लगाएं या फिर काम के मकसद में खर्च करें। यह वक्त खत्म होता चला जाएगा। और एक दिन जब हम दरवाजा खोलेंगे तो वक्त की सारी गड्डियां गायब हो चुकी
10:18
Speaker A
होंगी। और उस लम्हे जब बंदा अपने रब से मिलेगा तो कहेगा काला रब्बे उर्जून ए मेरे रब मुझे वापस भेज [संगीत] दे। मैं वापस से तेरी इबादत करूंगा। मैं वो काम करूंगा जो एक्चुअल में मीनिंगफुल है। मौत बरहक है [गाना गाने की आवाज़]
10:37
Speaker A
बस जो है तेरे पास यही वक्त [गाना गाने की आवाज़] है। हमने अभी जाना कि इस दुनिया में जो सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट है, जो सबसे बड़ी पूंजी है इंसान के पास वो उसका वक्त है। और इसीलिए [संगीत] अगर आप इस दौर के सबसे
10:54
Speaker A
बड़े रेवोल्यूशन एआई को सीखना चाहते हैं तो मैंने आप लोगों के लिए एक मास्टर क्लास को डिजाइन [संगीत] किया है। 3 घंटे की क्लास में फ्री और पेड एआई टूल का इस्तेमाल करके हम वीएफएक्स बनाना सीखेंगे। और यही नहीं इस क्लास में हम जानेंगे कि
11:09
Speaker A
[संगीत] किस तरह से थंबनेल बनानी है, पोस्टर्स बनाने हैं, मोशन डिजाइनिंग करनी है, वीएफएक्स [संगीत] करने हैं, नशीद बनानी है। साथ ही सीखेंगे कि किस तरह से प्रेजेंटेशंस को बनाया जाता है। कैसे एआई की मदद से वायरल जाने वाली स्क्रिप्ट्स को
11:23
Speaker A
लिखा जाता है। तो अगर आप एक स्टूडेंट [संगीत] हैं, एक होममेकर हैं या कोई जॉब या बिजनेस करते
11:35
Speaker A
सीख सकते हैं। और इन केस अगर आप इस क्लास को मिस भी कर देते हैं तब भी आप अगले 30 दिनों तक इस क्लास को अटेंड कर सकते हैं। [संगीत] चैप्टर वाइज अपने पेज पर देख सकते हैं। तो जाइए www.muk.com
11:50
Speaker A
पर जाकर आप हमारी इस क्लास को [संगीत] रजिस्टर कर सकते हैं। जिसका लिंक मैंने डिस्क्रिप्शन में भी अवेलेबल करा दिया है। लर्न [संगीत] कीजिए ताकि आप इस दौर में कहीं पीछे ना रह जाएं। चलिए अब हम समझते हैं सूर अल अस्र को आसान तरीके से [संगीत]
12:04
Speaker A
सिनेमैटिक अंदाज में। अबू अरवा वो सूरत तो सुनाओ जो नबी पर नाज़िल हुई थी। क्यों नहीं?
12:12
Speaker A
बिस्मिल्लाहहिर्रहमानिर्रहीम व्र इन [गाना गाने की आवाज़] इंफीस इल्लज़ आनु व तवा हक व तवा [गाना गाने की आवाज़] सब कुरान मजीद का जो मेन टॉपिक है मेन सब्जेक्ट है वो है हिदायत यानी के इंसान को गाइड करना प्रैक्टिकल और स्पिरिचुअल
12:44
Speaker A
दोनों लेवल पर। इमाम शाफी के अकॉर्डिंग कुरान मजीद के अंदर कोई और सूरत नाजिल ना हुई होती तब भी यह इंसान के लिए काफी [संगीत] थी इनफ थी। इस सूरत को समझने के लिए हमें पहली और दूसरी दोनों आयतों को एक
12:58
Speaker A
साथ समझना होगा। तो पहली और दूसरी आयत क्या है? व अस्र इनल इंसान लफी खुस। कसम है जमाने की कि बेशक इंसान खसारे में है, नुकसान में है। लेकिन यहां पर एक बड़ी हैरान करने वाली बात है कि भाई कसम अपने
13:16
Speaker A
से बड़ी चीज की खाई जाती है सामने वाले को इस बात का यकीन दिलाने के लिए कि मैं झूठ नहीं बोल रहा। लेकिन [संगीत] जब हम जानते हैं इस बात को मानते हैं यकीन करते हैं कि अल्लाह सुभाना ताला सबसे [संगीत] बड़े हैं
13:29
Speaker A
तो वो क्यों कसम खा रहे हैं और वो भी ऐसी चीज की जो उन्होंने खुद बनाई है जमाने की कसम वक्त की कसम तो ऐसा क्यों हो रहा है इस बात के जवाब में इमाम राज़वी रहमुल्लाह बयान करते हैं जब अल्लाह सुभाना ताला
13:42
Speaker A
कुरान मजीद में कहता है कसम है जैतून की कसम है व की तो असल में इसका मतलब यह हो रहा है कि वहां पर उस चीज को गवा गवाही के तौर पर बयान किया जा रहा है। एज ए प्रूफ
13:56
Speaker A
उसे सामने लाया जा रहा है और इंसान से कहा जा रहा है कि ए इंसान अपनी तेजी से पिघलती हुई उम्र को देख बंद मुट्ठी से [संगीत] रेत की तरह फिसलते हुए वक्त को महसूस कर। यहां तक कि अपने मोबाइल के स्क्रीन टाइम
14:10
Speaker A
को देख। हिस्ट्री को देख और महसूस कर, एनालाइज कर कि न जाने कितने ताकतवर लोग आए और मिट्टी में मिल गए। उन्होंने आलीशान महल बनाए, बड़े-बड़े पिरामिड्स बनाए। पर आज उनमें से किसी भी इंसान का नाम लेने वाला बाकी नहीं। और जब अल्लाह सुभाना ताला
14:26
Speaker A
यहां कसम खा रहे हैं तो असल में इंसान को झंझोड़ कर कह रहे हैं कि तेरी बेबसी का ये आलम है कि तू दुनिया का सबसे अमीर आदमी हो, सबसे ताकतवर आदमी हो, सबसे बड़ा जादूगर हो। तब भी [संगीत] तू एक गुजरे हुए
14:37
Speaker A
लम्हे को, एक गुजरे हुए सेकंड को वापस नहीं ला सकता। तो इसीलिए कहा गया व अस्र कसम है व की जमाने [संगीत] की। लेकिन अब एक और सवाल खड़ा होता है कि अरे भाई अल्लाह सुभाना ताला ने अस्र का इस्तेमाल
14:53
Speaker A
ही क्यों किया? वक्त के लिए तो अरबी जबान के अंदर और भी बहुत सारे लफ्ज मौजूद हैं। जैसे [संगीत] जबान या जमाना है, जैसे वक्त है, जैसे दहर है, जैसे हीन है। तो जब इतने सारे लफज़ पहले ही अरबी जबान में मौजूद हैं, तो फिर
15:08
Speaker A
अस्र के लफज़ को इस्तेमाल करने के पीछे का क्या राज है? इस बात को रागिब अल असफहानी अपनी किताब में मेंशन करके बताते हैं कि अस्र के लफज़ के अंदर अरेबिक में असल में तीन लफ्ज और छुपे हुए हैं। अस्र का लफज़
15:22
Speaker A
असारा से निकला है जिसका मतलब होता है निचोड़ना। हर एक गुजरते लम्हे इंसान की उम्र बढ़ती चली जा रही है। वो कमजोरी की तरफ कदम बढ़ाता चला जा रहा है। दूसरा मतलब होता है शाम का वक्त यानी दिन ढलने की
15:37
Speaker A
घड़ी। जब सूरज डूबने का वक्त होता है, तब इसे भी अस्र का वक्त कहते हैं। और तीसरा है जमाना यानी हिस्ट्री। तो, जब अल्लाह सुभाना ताला ने यहां पर वल अस्र का इस्तेमाल किया, तो वक्त के दो पहलुओं को
15:50
Speaker A
बेनकाब कर दिया। यानी कि अल्लाह ने ये बात समझा दी के ए इंसान अपने गुजरते हुए वक्त को देख। उस वक्त को देख जो रेत की तरह तेरे हाथ से निकल गया है। और उस वक्त को देख जो अभी भी थोड़ा सा तेरी मुट्ठी में
16:04
Speaker A
बाकी है। और जब भी यकीन ना आए तो फिर तारीख के यानी हिस्ट्री के पन्नों को पलट कर देख। अपने मां-बाप के चेहरे की झुर्रियों को देख, अपनी औलाद के बढ़ते कदमों को देख, दिन [संगीत] को ढलते देख,
16:17
Speaker A
शाम को होते देख और वक्त किसी को नहीं बखशता। क्या नहीं बखशता? तो दूसरी आयत में कहा गया इन इंसान खुसरो इन्ना पे जब बात आ गई तो यानी कि अब इस बात के अंदर कोई डाउट शामिल नहीं है कि
16:32
Speaker A
हर इंसान हर इंडिविजुअल नुकसान में है। यानी कि इस दूसरी आयत में हर इंडिविजुअल पर्सन से [संगीत] वन टू वन बात हो रही है। डायरेक्ट कहा जा रहा है कि भैया तुम खसारे में हो। अगर यहां पर कहा जाता कौम, यहां
16:47
Speaker A
पर कहा जाता लोग तो बहुत ज्यादा इस बात के चांसेस थे कि हर इंसान यह कहता हां सही कह रहे हो। वो [संगीत] लोग तो बेचारे बड़े खसारे में हैं। मैं सेफ हूं। और जब अल्लाह सुभाना ताला ने यहां पर लाम का इस्तेमाल
17:00
Speaker A
कर दिया तो ये बात अब डबल पक्की हो जाती है कि अल्लाह कह रहे हैं कि इंसान खसारे के अंदर है। फी के लफ्ज का मतलब होता है अंदर होना। यानी [संगीत] इंसान खसारे के अंदर डूबा हुआ है। ऐसा नहीं है कि खसारे
17:13
Speaker A
के या नुकसान के आसपास है। नहीं नहीं नहीं। बिल्कुल जैसे मछली डूबी होती है ना पानी में बिल्कुल उसी सूरते हाल इंसान को इस बात का कोई एहसास नहीं है कि वो खसारे के अंदर नुकसान के अंदर डूबा हुआ है।
17:26
Speaker A
कुरान की टर्मिनोलॉजी में इस घाटे को यानी खसारे को तीन लेवल पर डिफाइड किया जाता है। सबसे पहला है खुस्र जिसका मतलब है घाटा शुरू हो चुका है। तो जब यहां पर खुस्र का लफ्ज़ इस्तेमाल कर दिया गया तो
17:39
Speaker A
अब यह बात बिल्कुल क्लियर हो गई कि जिस लम्हे इंसान पैदा हुआ उसी लम्हे उसका घाटा होना शुरू होता चला गया। वक्त उसके हाथ से फिसलता चला गया। दूसरा लेवल है खसारा यानी घाटा मुकम्मल हो चुका है। कंप्लीट हो चुका
17:54
Speaker A
है और गुजरते वक्त के साथ और गहरा होता चला जा रहा है। तीसरा है खुसरान। खुसरान यानी भैया दिवालियां निकल गया। बर्बाद हो गए। कंप्लीट तबाही आ गई है। अब ऐसा घाटा, ऐसा नुकसान हो चुका है कि अब दोबारा इससे
18:10
Speaker A
रिकवर नहीं हुआ जा सकता। तो इस दूसरी आयत का निचोड़ ये है कि दुनिया का हर इंसान खुस्र में है, नुकसान में है। इन इंसान खुस के जो इस वक्त से फायदा नहीं उठाते गुजरता जाता। एक दना कहता है मैं नहीं
18:25
Speaker A
कहता कि नफा कर या नुकसान कर तेरी मर्जी है जो कुछ करना है ना हर जूद जल्द कर ले फिर ये वक्त मिलेगा नहीं अब जब मैं इस आयत को पढ़ रहा था ना तो मेरे अंदर एक सवाल
18:37
Speaker A
पैदा हुआ और वो सवाल ये था कि भाई वक्त तो हर चीज का खर्च हो रहा है ना इस दुनिया में अल्लाह ने जानवरों को भी बनाया है वो जानवर भी खत्म हो रहे हैं पेड़ पौधों को भी बनाया है उनका भी वक्त खर्च हो रहा है
18:49
Speaker A
तो [संगीत] यहां पर इंसान को ही क्यों पॉइंट आउट करके कहा जा रहा है कि भाई तुम्हारा वक्त वक्त खराब हो रहा है। और जब मैंने इस आयत पे थोड़ा गौर किया तब मुझे इस बात का जवाब समझ में आया कि घाटा सिर्फ
18:59
Speaker A
उसका हो सकता है जिसके पास कैपिटल हो जिसके पास पूंजी हो और सौदा करने का इख्तियार हो। जब हम जानवरों को देखते हैं ना तो हम देखते हैं कि उनके पास टाइम तो है वक्त तो उन्हें मिला [संगीत] हुआ है
19:11
Speaker A
लेकिन उन्हें सौदा करने का कोई इख्तियार नहीं है। कोई राइट नहीं है। यानी अगर शेर को भूख लगेगी तो वह शिकार करेगा और शिकार कर कर खाएगा। इसी तरह अगर गाय को घास खानी है तो वो घास खाएगी। तो हर चीज जो अल्लाह
19:24
Speaker A
सुभाना ताला ने बनाई है वो अपनी फितरत पर काम कर रही है। पेड़ का काम है फल देना आपको फल दे रहा है। फूल का काम है खुशबू देना वो आपको खुशबू दे रही है। [संगीत] लेकिन सिर्फ एक इंसान ऐसी चीज है जो अपनी
19:36
Speaker A
फितरत से हटके अलग-अलग तरह के काम करता है। तो यानी दुनिया की हर चीज अपनी फितरत पर है। वही काम कर रही है जो उसे करने के लिए पैदा किया गया है सिवाय इंसान के। मौत बरहक है [गाना गाने की आवाज़]
19:52
Speaker A
बस जो है तेरे पास यही वक्त है [गाना गाने की आवाज़] अब मैं लिखी उम्मीद तो यहां पर हुस्र के लफ्ज़ से लॉस ऑफ़ अपॉर्चुनिटी की बात हो रही है मौके की बर्बादी की बात की जा रही है प्रॉब्लम पता
20:13
Speaker A
चल गई अब चाहिए सॉल्यूशन तो क्या है सशन उसके लिए अल्लाह सुभाना ताला ने अगली आयत में बताया इलज़ना तवा हक व तवा सब्र दुनिया का हर इंसान नुकसान में है सिवाय उनके जो ईमान लाए और नेक अमल करते रहे और आपस में एक दूसरे को
20:34
Speaker A
अच्छाई की तल्कीन करते रहे सब्र रखने की ताकीद करते रहे। जब यहां [संगीत] पर इल्लाह का लफ्ज इस्तेमाल किया गया। तो इस लव ने एक हकीकत साफ कर दी कि घाटे से बचने वाले लोग बहुत थोड़े होंगे जो [संगीत] इस
20:49
Speaker A
घाटे से बच पाएंगे। वो बड़ा मशहूर शेर है कि सुबह होती है, शाम होती है। जिंदगी यूं ही तमाम होती है। तो कौन है वो लोग? वो मुझ जैसे और आप जैसे ही तो लोग हैं जिन्होंने अपनी जिंदगी को बेफिजूल चीजों
21:03
Speaker A
में जाया कर दिया, खर्च कर दिया। तो तर्जुमा क्या हुआ? जमाना गवाह है। तमाम इंसान अज़म हलाकत में है। दोचार होंगे अज़म तबाही से सिवाय उनके। यहां पे अब इस्तेना हो रहा है एक्सेप्शन। लेकिन वो एक्सेप्शन किन के लिए है? इल्लज़ना आम आनु सिवाय उनके
21:20
Speaker A
जो ईमान लाए। अगला लफ्ज़ है अलज़ना। इससे पहले [संगीत] सिंगुलर में बात की गई है। यानी कि इंसान की बात की गई है। पर जब अलजीना इस्तेमाल किया गया तो जमा की बात हो रही है। जमात की बात हो रही है। ग्रुप
21:33
Speaker A
ऑफ पीपल की बात हो रही है। प्लूरल में बात हो रही है। यानी घाटा और नुकसान इंडिविजुअल लेवल पर हो रहा है। इंसान अकेले तबाह हो रहा है। और जब बचने की बात हो रही है तो ग्रुप ऑफ पीपल की बात हो रही
21:45
Speaker A
है। जमात की बात हो रही है। लोगों की बात हो रही है। और वो लोग कौन होंगे जो बचेंगे? उसके लिए आगे बताया आमनु यानी वो लोग जो ईमान लेकर आए। अब देखिए माशा्लाह मैं और आप ईमान वाले हैं। बचपन में ही
21:57
Speaker A
सिखा दिया ला इलाहा इल्लल्लाह मोहम्मदुर रसूल्लाह। लेकिन क्या ईमान लाना सिर्फ यही बात है कि हमने मान लिया कि अल्लाह एक है। ऐसा बिल्कुल नहीं है। क्योंकि शैतान भी तो मानता है कि अल्लाह एक है। बल्कि उसने तो
22:10
Speaker A
अल्लाह सुभाना ताला से वन टू वन बात भी की है। जब हम इस लफ्ज की गहराई में पहुंचते हैं ना तो स्कॉलर्स कहते हैं कि ईमान के दो लेवल होते हैं। सबसे पहला लेवल होता है कि इंसान अपने दिल से माने और यकीन करे कि
22:23
Speaker A
अल्लाह एक है। और फिर दूसरा लेवल है कि इंसान अपने दिमाग से इस बात का यकीन करे के हां अल्लाह एक है और जो उसने हुकुम दिया है, वह मुझे मानना है। लेकिन जनरली हम लोगों के साथ क्या होता है कि हम दिल
22:36
Speaker A
से तो मानते है कि अल्लाह एक है। लेकिन दिमाग से नहीं मानते की अल्लाह एक है। कैसे? अगर इस बात पे यकीन हो कि जिस लम्हे मैं इस कागज पर साइन करता हूं कि हां जी मैं क्रेडिट कार्ड लेने को तैयार हूं। मैं
22:47
Speaker A
ईएमआई पर सामान लेने को तैयार हूं। अपनी छोटी और बड़ी जरूरतों के लिए उधार लेने को तैयार हूं। जिसमें ब्याज शामिल है। उसी लम्हे मैंने अल्लाह सुभाना ताला से जंग का ऐलान कर दिया। यह ऐलान कर दिया कि हां जी
23:00
Speaker A
होती है जंग होती रहे। मैं लडूंगा अल्लाह सुभाना ताला से। तो क्या हुआ कि हम दिल से तो अल्लाह को मानते हैं लेकिन [संगीत] दिमाग से नहीं मानते। तो ऐसे लोग चाहिए जो लोग दिल और दिमाग दोनों से ईमान वाले हो।
23:15
Speaker A
फिर अगला लेवल क्या है? अगली बात बता दी व आमिल स्वालिहाती। [संगीत] यानी वो लोग जिन्होंने नेक काम किए और नेक काम सिर्फ तहज्जुद पढ़ना नहीं है। सिर्फ नमाज पढ़ना नहीं है। सिर्फ तस्बीह घुमाना नहीं है। बल्कि नेक काम क्या है? छोटी से
23:31
Speaker A
छोटी चीज भी नेक काम है। अगर आपने अपने दिल में यह इरादा कर लिया कि मैंने इस ग्रुप में शामिल होना है। और फिर तीसरा लेवल, तीसरी शर्त क्या बताई गई? व तवासो बिल हक़। और वो लोग जो एक दूसरे को हक की
23:44
Speaker A
तल्कीन करते रहे, हक के लिए मोटिवेट करते रहे। यहां पर जो तवासो का लफ्ज है उसका मतलब होता है एक दूसरे को नसीहत करना याद दिलाना। क्या याद दिलाना कि भैया यह वन वे नहीं है बल्कि ये तो टू वे हाईवे है। मैं
24:00
Speaker A
तुम्हें याद दिलाऊं। तुम मुझे याद दिलाओ। मौत बरकत है। [गाना गाने की आवाज़] बस जो है तेरे पास यही वक्त है। [चीखने की आवाज़] [चीखने की आवाज़] ऐ बेवकूफ क्यों अपना वक्त ऐसी चीजों में बर्बाद करता है जो ना तुझे यहां कोई फायदा
24:25
Speaker A
देंगी और ना वहां कोई फायदा देंगी। अब होगा क्या कि जब आप हक बात कहना शुरू करेंगे एक दूसरे के साथ अच्छा मामला पेश करना शुरू करेंगे, समझाना शुरू करेंगे, उसी लम्हे सारी प्रॉब्लम आकर खड़ी हो जाएंगी। हर इंसान आपको दबाने की कोशिश
24:39
Speaker A
करेगा। बीच बाजार गाली देगा, गिरेबान पकड़ेगा। तभी अल्लाह सुभाना ताला ने क्या कह दिया व तवास सब्र और वो लोग जो एक दूसरे को सब्र की तल्कीन करते रहे मोटिवेट करते रहे कि अगर आप इस आयत में देखेंगे ना तो शुरुआत के जो
24:56
Speaker A
दो लफज़ हैं वो असल में आपकी [संगीत] पर्सनल लाइफ को ईमान और अमल को बता रहे हैं इल्लज़ना आमुल स्वाहात यानी ईमान वाले लोग और नेक अमल करने वाले लोग लेकिन बाकी के जो लफज़ हैं व तवास बिल हक व तवास सब्र
25:10
Speaker A
ये दोनों लफज़ असल में सोशल लोग सोसाइटी की बात कर रहे हैं। इस्लाम इस बात को गवारा नहीं करता कि बंदा अपने कमरे में बैठ के तस्बीह पढ़ता रहे और दुनिया जो है उसके आसपास की बुराइयों में मुब्तला रहे और यह
25:23
Speaker A
आदमी कोई एफर्ट ना लगाए। नहीं नहीं नहीं अगर आपको कामयाब होना है इस एक्सेप्शन लिस्ट के अंदर आना है तो फिर आपको एज ए ग्रुप काम करना होगा। खुद भी अच्छे काम करने होंगे और अपने जानने वालों को, अपने
25:35
Speaker A
रिश्तेदारों को, अपने आसपोस दोस्तों को भी [संगीत] अच्छे काम करने की दावत देनी होगी। और अगर आप ऐसा नहीं करते तो फिर आप इस एक्सेप्शन लिस्ट से बाहर हैं। और इस पर बस नहीं करते। फिर व तवासा बिल
25:48
Speaker A
हक़ आपस में एक दूसरे को वो ताकीद करते रहते हैं। साथियों के वो एक काफिला होता है, जमात होती है। जिसको देखते हैं कि ये पीछे रह रहा है, गिर रहा है। उसको उठाते हैं। साथ लेकर चलते हैं। सही बातें जो दीन
26:01
Speaker A
ने बताई, वो एक दूसरे को सिखाते रहते हैं। ये तालीम होगी। अगली आयत अरे, अगली आयत तो है ही नहीं। सिर्फ [संगीत] तीन आयतों के बाद बात खत्म हो गई। लेकिन यहां पर इनाम की तो बात ही नहीं हो रही। यह बताया ही नहीं जा रहा कि
26:14
Speaker A
भाई क्या रिवॉर्ड मिलेगा। ठीक है? अगर हम इस कैटेगरी से बच गए तो मिलना चाहिए ना जन्नत मिलेगी और हम लोग हूरों के साथ रहेंगे। कोई रिवॉर्ड की बात ही नहीं की जा रही। तो ऐसा क्यों किया जा रहा है? जब हम
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Speaker A
इसको थोड़ा सा डीप में पढ़ते हैं ना तो स्कॉलर्स के अकॉर्डिंग इस सूरत के अंदर रिवॉर्ड की बात ना होना असल में सूरत को बेइंतहा पॉजिटिव बनाता है। यह बात समझाता है कि इंसान अभी भी आप बाजार के अंदर खड़े
26:39
Speaker A
हुए हो। वक्त अभी भी आपकी मुट्ठी में [संगीत] है। जो बर्बाद हो गया सो हो गया। कोई नहीं। लेकिन इस लम्हे अभी अगर सांस चल रही है तो दुनिया के बाजार में सौदा जारी है। अभी भी तुम चाहो तो इस वक्त को सही से
26:53
Speaker A
यूटिलाइज कर सकते हो। इन चार शर्तों को पूरा कर सकते हो। और जो इंसान इन चार शर्तों को पूरा कर लेगा वो नुकसान से बच जाएगा। और जो इंसान नुकसान से बच जाएगा ऑटोमेटिक सी बात है कि वो फायदे में ही
27:07
Speaker A
होगा। मौत बरहक है। बस जो है तेरे पास यही वक्त [गाना गाने की आवाज़] है। चलिए अब जल्दी से समझते हैं कि इस पूरी आयत के अंदर बात क्या हुई है। तो सबसे पहले कहा गया व अस्र कि कसम है उस वक्त की
27:29
Speaker A
जो इंसान को निचोड़ रहा है। उसे बुढ़ापे की तरफ बढ़ा रहा है। कसम है उस वक्त की जो दिन ढल रहा है। और कसम है उस वक्त की उस हिस्ट्री की जो गुजर चुकी है। और वह वक्त जो अब तुम्हारे हाथ में बचा है उसकी कसम
27:44
Speaker A
है। क्या कसम है? इनल इंसान खुस्र दुनिया का हर एक इंडिविजुअल नुकसान में है। सिर्फ वही बच पाएंगे जो एज ए ग्रुप काम कर रहे होंगे। एक दूसरे के साथ एक दूसरे को अच्छाई की तरफ मोटिवेट कर रहे होंगे। और
28:00
Speaker A
जब कोई मुश्किल आएगी अच्छाई करते हुए तब वो एक दूसरे को सब्र की तल्लकीन करेंगे। क्योंकि अल्लाह सुभाना ताला ने बता दिया कि कामयाब वही है जो अपने वक्त को सही से यूटिलाइज कर ले क्योंकि वक्त गवाह है कि
28:14
Speaker A
हर इंसान खसारे में है और वक्त गुजर रहा है और एक दिन खत्म हो जाएगा जब वापस लौटने का कोई चांस नहीं तो ये चार चीजें जब हो गई जमा ईमान नेक अमल और लोगों को भी दीन की तलकीन और फिर खुद भी और साथियों को भी
28:29
Speaker A
साबित कदम रखने की कोशिश अल्लाह फरमाता है ये नहीं खसारे में इनकीिगियां कारमद हैं। कामयाब हैं। चलिए अब हम समझते हैं कि यह सूरत हमारी आज 2026 में हमारी जिंदगी को किस तरह से इंपैक्ट करती है। क्या रेलेवेंस है इसका।
28:45
Speaker A
[संगीत] हम अक्सर प्रोकस्टिनेट करते रहते हैं। सूर्य अलसुरा हमें समझाती है कि आपके अकाउंट के अंदर फ्यूचर तो है ही नहीं। बात तो सारी प्रेजेंट टेंस में हो रही है। जो है अभी है इसी लम्हे है। इसीलिए अभी
28:59
Speaker A
करूंगा, कल करूंगा, हो जाएगा। यह सब अपनी जिंदगी से निकाल दीजिए। जो भी करना है इसी लम्हे करिए ताकि आप अपने अपनी फैमिली के इस दुनिया के काम आ सके। एक नेक स्वाह इंसान बन सके। अगला आईना है हमारा स्क्रीन
29:15
Speaker A
[संगीत] टाइम। अपना मोबाइल उठाइए और अपने मोबाइल को उठाकर अपना स्क्रीन टाइम चेक [संगीत] कीजिए। ऑन एन एवरेज हम मान लेते हैं कि चलो 2 घंटे का स्क्रीन टाइम है आपका। अब जरा सोचिए कि अल्लाह सुभाना ताला ने अगर इंसान को 60 साल की जिंदगी दी है
29:28
Speaker A
तो यह 60 साल की जिंदगी में 2 घंटे 5 साल बन जाते हैं। इन पांच सालों में वो क्या नहीं कर सकता था? कोई नई लैंग्वेज [संगीत] सीख सकता था। कोई नई स्किल सीख सकता था। कोई अच्छा कोर्स कर सकता था। अपने वक्त को
29:41
Speaker A
और बेहतर जगह लगा सकता था। और जब अल्लाह सुभाना ताला कहेंगे हां जी साहब ये [संगीत] 5 साल जो आपने रील देखते हुए गुजारे हैं। इससे फायदा क्या हुआ? जरा इसका हिसाब दे दीजिए। कोशिश ये करनी है कि
29:51
Speaker A
अपनी स्क्रीन टाइम को [संगीत] लिमिट कीजिए। जैसे ही याद आए अस्तकफुल्लाह कहिए, मोबाइल साइड में रखिए और यूटिलाइज कीजिए उस टाइम को। दुनिया [संगीत] की जितनी भी सेल्फ हेल्प बुक है, जितने भी बड़े-बड़े मोटिवेटर्स हैं ना वो सब आपको बताएंगे कि
30:04
Speaker A
अगर जिंदगी के अंदर कामयाब होना है तो ब्लेंडर्स लगा लो घोड़े की तरह। अपने ऊपर फोकस करो और आगे बढ़ते रहो। लेकिन कुरान हमें सिखाता है कामयाब होने की शर्त ये है कि आप अपने साथ-साथ दूसरे को भी कामयाबी
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Speaker A
की तल्लकीन करें। तो आज क्यों ना सूरज डूबने से पहले कोई ऐसा दोस्त बनाया जाए जिसे यह सूरत को समझाया जाए। क्यों ना आज अगली नमाज में वस इन इंसान खुस्र पढ़ी जाए। क्यों ना आज अपने साथी से अपने दोस्त
30:31
Speaker A
से कहा जाए कि चल आज सहाबा वाला काम करते हैं। याद रखियो भैया हर इंसान नुकसान में है सिवाय उनके जिन्होंने नेक अमल किए। [हंसी] उम्मीद करता हूं कि ये वीडियो आपको पसंद आई होगी। बात समझ आई होगी। जिंदगी के
30:47
Speaker A
शुरुआती दिनों में बच्चों को समझाना बड़ा जरूरी होता है कि वक्त की क्याेंस है। किस तरह से हक पर रहना है। [संगीत] और इसी बात को बड़े दिलकश अंदाज से समझाने के लिए मैंने आप लोगों के लिए एक वर्क बुक को
30:58
Speaker A
डिजाइन [संगीत] किया है। अगर आप इस वर्क बुक को डाउनलोड करना चाहते हैं तो आप हमारी वेबसाइट www.mub.com पर जाकर इसे डाउनलोड कर सकते हैं। मैंने इसे हिंदी, इंग्लिश, उर्दू तीनों जबानों में आपके लिए अवेलेबल करा दिया है। और याद
31:11
Speaker A
रखिए अभी सांस बाकी है। अभी मैं और आप इस दुनिया के बाजार में खड़े हुए हैं। सौदा कर सकते हैं तो क्यों ना मुनाफे का सौदा करें। जजाकुल्लाह खैर अस्सलाम वालेकुम। दादा अब्बू आप भी एआई सीखेंगे। क्यों नहीं? इल्म की कोई उम्र नहीं होती।
31:28
Speaker A
आप मेरा रजिस्ट्रेशन जल्दी से कर दीजिए। [संगीत] लर्न कीजिए ताकि आप भी अर्न कर सकें।
Topics:सूरह अल-असरकुरानवक्त की कीमतइस्लामिक शिक्षामक्का का इतिहासईमान और नेक काममुस्लिम ट्रेडिशनवक्त प्रबंधनधार्मिक व्याख्याAI मास्टर क्लास

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