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Who is Prophet Muhammad (PBUH) ? - Ep 1 - The World’s First AI-Visualized Seerah Series!

यह वीडियो पैगंबर मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की जिंदगी और सीरत के महत्व को आसान और मजेदार तरीके से समझाता है।

Key Takeaways

  • सीरतुल नबी पढ़ना हर मुसलमान पर फर्ज है।
  • सीरत के बिना कुरान की सही समझ संभव नहीं।
  • पैगंबर की जिंदगी से इंसान अपने चरित्र और व्यवहार को सुधार सकता है।
  • सीरत पढ़ने से मोहब्बत और ईमान दोनों मजबूत होते हैं।
  • सीरतुल नबी हमें जीवन के कठिन दौर में सुकून और हिम्मत देती है।

What the video covers

  • पैगंबर मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की जिंदगी और उनके संदेश की शुरुआत मक्का से हिजरत के साथ होती है।
  • कुरान को समझने के लिए सीरतुल नबी का ज्ञान आवश्यक है क्योंकि कुरान एक नॉन-लीनियर किताब है।
  • सीरत पढ़ना फर्जुल ऐन है, यानी हर मुसलमान पर यह जरूरी है कि वह नबी की जिंदगी को जाने।
  • सीरतुल नबी से मोहब्बत बढ़ती है और यह ईमान के मुकम्मल होने की शर्त भी है।
  • सीरत का मतलब है नबी की जिंदगी का सफर जिसमें उनके शमाइल (अखलाक), मगाजी (जंगें) और एहवाल (हालात) शामिल हैं।
  • पैगंबर की जिंदगी से इंसान सीख सकता है कि कैसे एक अच्छा इंसान, बाप, दोस्त, लीडर और पड़ोसी बनना है।
  • सीरत पढ़ने से न केवल ज्ञान बढ़ता है बल्कि यह दिल को सुकून और उम्मीद भी देता है।
  • अल्लाह ने इंसानों को नबी बनाया ताकि वे एक जीवित उदाहरण बन सकें, फरिश्ते नहीं।
  • सीरत पढ़ना पैगंबर की अजमत और सम्मान को बनाए रखने के लिए भी जरूरी है।
  • वीडियो में सीरतुल नबी की शुरुआत, महत्व और इसके तकनीकी पहलुओं को सरल भाषा में समझाया गया है।

Answers

Questions about this video

सीरतुल नबी क्या है?

सीरतुल नबी का मतलब है पैगंबर मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की जिंदगी का सफर, जिसमें उनके व्यवहार, जंगें और जीवन की परिस्थितियां शामिल होती हैं।

क्यों सीरतुल नबी पढ़ना जरूरी है?

सीरतुल नबी पढ़ना इसलिए जरूरी है क्योंकि यह ईमान के मुकम्मल होने की शर्त है, इससे हम पैगंबर की जिंदगी को समझकर उनसे सीखते हैं और कुरान की बेहतर समझ होती है।

सीरतुल नबी पढ़ने से क्या लाभ होते हैं?

सीरतुल नबी पढ़ने से मोहब्बत बढ़ती है, जीवन में सुकून मिलता है, हम अपने चरित्र को सुधारते हैं और पैगंबर की अजमत और सम्मान को बनाए रखने में मदद मिलती है।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
यह बात है मोहम्मद। इरा पढ़ो अपने रब के नाम से पढ़ो। सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम। नबी का पैगाम मक्का से हम आपके साथ हिजरत करेंगे। ये बात है इंसानों और जिन्नातों के रहबर की। मेरे दादा ने खुद अपनी आंखों से [संगीत]
00:26
Speaker A
चांद के दो टुकड़े होते देखे थे। अरे, वह देखो चांद की तरफ। सैयदीना यह बात है सीरतु नबी की। मोहम्मद नबी उम्मी आज मिनट से पहले सेकंड के बाद हम फौरन स्टेटस लगा देते हैं। आई लव मोहम्मद। या रसूल अल्लाह।
00:51
Speaker A
लेकिन अफसोस अपने आप से यह सवाल करना भूल जाते हैं कि कौन थे मोहम्मद सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम। इबने इसहाक नबी की सीरत लिखना आसान नहीं। ये जो बेड़ा तुमने उठाया है काफी हिम्मत का लेकिन बहुत मुश्किल काम है।
01:07
Speaker A
कितनी बीवियां थी उनकी, क्या नाम थे उनके, वो कौन सी सन में पैदा हुए, खदीजा के इंतकाल के बाद मैंने [संगीत] नबी को मुस्कुराते नहीं देखा। सही सही कहते हो। पूरा साल होने को आया। अल्लाह सुभान ताला ने आखिरी नबी के लिए
01:23
Speaker A
मक्का को ही क्यों चुना? और क्या कुरान को बगैर सीरतु नबी जाने समझा जा सकता है?
01:29
Speaker A
भाई ताजीम, मुझे कुरान की ये आयत समझ नहीं आ रही। यहां बात किस बारे में हो रही है?
01:35
Speaker A
ये आयत जंगे [संगीत] बद्र के बारे में है। जब अल्लाह ने गैबी मदद भेजी थी। अच्छा। और इसमें दूसरे नबियों का भी जिक्र है ना?
01:44
Speaker A
हां बिल्कुल। आदम, इदरीस, खून, साले, नूत, इब्राहिम, इस्माइल, इसहाक, याकूब [संगीत] यूसुफ, अय्यूब, शोएब, मूसा, हारून, नूह सबका जिक्र है इसमें। अगर आप ये सब नहीं जानते तो अपने आप से सवाल कीजिए कि शैतान का ऐसा कौन सा वसवसा है कि
02:06
Speaker A
जिंदगी के इतने साल गुजारने के बाद भी उसने आपको अपने नबी से जिसकी मोहब्बत का आप दावा करते हैं, महरूम रखा हुआ कि रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मेरे घर में मेरी बारी के दिन मेरे लब्बे और सीने के दरमियान वफात पाई। इसीलिए मैं
02:26
Speaker A
लेकर आया हूं बच्चों के लिए और बड़ों के लिए सीरतु नबी की एक सीरीज जिसमें हम बहुत आसान और मजेदार तरीके से आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की जिंदगी को जानेंगे। तो चलिए [संगीत] ये सफर मैं और आप मिलकर शुरू
02:41
Speaker A
करते हैं। अस्सलाम वालेकुम। यह हमारी सीरतु नबी सीरीज के सफर का पहला कदम है। मैं कोशिश करूंगा कि बहुत आसान और मजेदार तरीके से हम और आप सीरतु नबी पढ़ सकें। क्योंकि हम सब लोग जिंदगी के आखिरी सांस पर अशद अल्ला
02:57
Speaker A
इलाहा इल्लल्लाह मोहम्मद रसूल्लाह कहना चाहते हैं। लेकिन उसके लिए बहुत ज्यादा जरूरत है इस बात की कि हम अल्लाह और उसके रसूल को जानते हो, पहचानते हो। मुद नबी [संगीत] उी अल्ली वसल्लम। अब सबसे पहले सवाल ये खड़ा होता है कि यार
03:21
Speaker A
सीरतु नबी पढ़नी क्यों है? इसका फायदा [संगीत] क्या है? उसके लिए ये वीडियो देखिए। विजय दीनाना जॉन और हार कर जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं। हम यहां के रॉबिन हुड हैं। रॉबिनहुड पांडे। यह वीडियोस देख के, इन एक्टर्स को
03:35
Speaker A
देख के आप जरूर हैरान हो गए होंगे। तो देखिए इंसान का जो नेचर है ना वो बड़ा इमिटेटिंग है। अच्छा लगता है उसे दूसरों की नकल उतारना। जिनसे वो इंस्पायर होता है। जिनको वो आइडलाइज करता है। उनके जैसा
03:46
Speaker A
बनने की कोशिश करता है। कुरान में यह बात आई है कि हम जानते हैं [संगीत] कि तुम्हारा नेचर इमिटेटिंग है। तुम दूसरों की नकल करोगे। उनके जैसा बनने की कोशिश करोगे। तो हमने तुम्हारे लिए दुनिया की सबसे सबसे सबसे बेहतर एग्जांपल सेट की है।
04:01
Speaker A
इनकी पैरवी करो। इनको फॉलो करो। एंड देयर आर ओवर 50 व इन द कुरान दैट कमांड अस टू टेक द प्रोफेस एस एन एक्सकुम। रसूल्लाह उस हसना फरमाया ऐ मुसलमानों तुम्हारे लिए अल्लाह के रसूल में एक उसवा है, नमूना है, बेहतरीन नमूना। अब जबकि ये बात
04:22
Speaker A
साबित हो चुकी है कि ये कुरान में अल्लाह सुान ताला ने हम सबको हुकुम दिया है तो उलमाओं की राय यह है कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी को जानना फर्जुल ऐन है। फर्दुल ऐन क्या होता है? यानी, हर
04:34
Speaker A
इंडिविजुअल के ऊपर यह फर्ज है कि वह अपने नबी की जिंदगी को जाने। क्योंकि आप बिना जाने, बिना पहचाने कैसे किसी को फॉलो कर सकते हैं। दूसरा, यह ईमान के मुकम्मल होने की शर्त है। अरबी जबान में इसे शर्तों
04:47
Speaker A
सेहतुल ईमान कहते हैं। यानी [संगीत] ईमान के कंप्लीट होने की एक कंडीशन है। और तीसरी बहुत बहुत बहुत इंपॉर्टेंट बात। आशिक क्या चाहता है? [संगीत] आशिक चाहता है कि उसे उसके महबूब की खबर मिलती रहे। अच्छा, अह उसे वह बात पसंद है? क्या? उसे
05:02
Speaker A
वो नीला रंग पसंद है? पीले नहीं, गुलाबी वाले फूल दीजिए। मेरी बेगम को वही पसंद है। अक्सर आशिक इस तरह के सवाल करते हैं अपने महबूब से रिलेटेड। तो अगर आप आशिक रसूल हैं। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से
05:17
Speaker A
मोहब्बत करते हैं। तो बेशक आप भी यह जानना चाहते होंगे। वो कैसे दिखते थे, वो कैसे चलते थे, वो कैसे नाराज होते थे। ये सब चीजें हम अपने नबी के बारे में जानेंगे। तभी हम उनसे मोहब्बत कर पाएंगे [संगीत]
05:29
Speaker A
क्योंकि इल्म और जानकारी से मोहब्बत बढ़ती है। अल्लाह से इफ यू लव अल्लाह देन फॉलो मी एंड अल्लाह लव यू। तो इसलिए मोहब्बत बढ़ाने के लिए सीरतु नबी को पढ़ना बेइंतहा जरूरी है। इसके अलावा एक हदीस में आता है
05:47
Speaker A
कि तुम में से किसी भी इंसान का ईमान जब तक मुकम्मल नहीं, जब तक कि वो अपनी औलाद से ज्यादा, अपने मां-बाप से ज्यादा, अपने माल से ज्यादा आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मोहब्बत ना करता हो। जैसे-जैसे मैं आपको
05:59
Speaker A
जान रहा हूं, हर लम्हा मेरी मोहब्बत आपके लिए और गहरी होती जा रही है। मेरे इजराइली भाई, आपका अखलाक ही आपके सच्चे होने की गवाही देता है। इसके अलावा सीरत और क्यों इंपॉर्टेंट है?
06:14
Speaker A
देखिए बगैर सीरत नबी को पढ़े आप कुरान को नहीं समझ सकते [संगीत] क्योंकि कुरान एक नॉन लीनियर बुक है। अभी कुछ बात हो रही है और अचानक से कुछ और बात होने लगी। अब ये जो अचानक वाला एंगल है ना ये आपकी लाइफ से
06:26
Speaker A
बिल्कुल खत्म हो जाएगा अगर आपने सीरतुल नबी को पढ़ा हुआ है। इसके अलावा अल्लाह सुभाना ताला चाहते तो फरिश्तों को नबी बनाकर भेज [संगीत] देते। जिनके पर होते जो हवा में उड़ रहे होते और लोग उन्हें देख के
06:37
Speaker A
फौरन ईमान ले आते। लेकिन फिर लोग क्या कहते हैं? अरे भाई उनके जैसे कैसे बन सकते हैं? वह तो फरिश्ते थे। इसीलिए अल्लाह सुभाना ताला ने इंसानों को रसूल और नबियों में से चुना है। ताकि वो हमारे लिए एक
06:49
Speaker A
लिविंग एग्जांपल बन सके। ताकि उन्हें हम देखकर सीख सके कि कैसे एक अच्छा बाप बनना है। एक अच्छा दोस्त बनना है। एक अच्छा बेटा बनना है। एक अच्छा लीडर बनना है। एक अच्छा साथी बनना है। एक अच्छा पड़ोसी बनना
07:02
Speaker A
है। सल्ली वसल्लम। तो हमारे अखलाक के लिए बहुत ज्यादा जरूरी है। हमारे माहौल और माशरे के लिए बहुत ज्यादा जरूरी है कि हम सबको सीरतु नबी का पता होना चाहिए। इल्म होना चाहिए। इसके अलावा जिंदगी के किसी मोड़ पर जब आप उदास
07:19
Speaker A
होंगे ना आपको लगेगा कि शायद अब जीना आसान नहीं। अब वापस यह दिल दोबारा से धड़क नहीं पाएगा। तब यह सीरत ही होगी जो आपको एकदम बाहों में भर लेगी। आपको सुकून देगी। आपको ऑप्टिमिस्टिक बनाए रखेगी। आपको एहसास
07:34
Speaker A
दिलाएगी कि नबी की जिंदगी में ऐसे ऐसे मकाम आए हैं कि सुन के आपका दिल फट पड़ेगा। लेकिन फिर भी [संगीत] हमारे नबी ने कभी किसी के लिए कुछ बुरा नहीं चाहा। हिम्मत रखी। अल्लाह पे भरोसा रखा। मुद
07:48
Speaker A
नबी उी। और सबसे ज्यादा जरूरी, सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट क्या है? आप सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम की अजमत को, उनके ऑनर को, उनकी डिग्निटी को मेंटेन करने के लिए हमेशा ऊंचा रखने के लिए सीरतु नबी पढ़ना बेइंतहा जरूरी है। ताकि जब कोई उन पर उंगली उठाए
08:07
Speaker A
ना तो आपके पास उसका जवाब मौजूद हो। व्हड द प्रोफेट मोहम्मद सल्ला वसल्लम आयशा एज ऑफ़। तो मेरे ख्याल से अब ये बात एकदम क्लियर हो चुकी है कि हमें सीरत पढ़नी क्यों चाहिए? तो [संगीत] अब इससे एक और सवाल
08:18
Speaker A
निकल कर आता है कि एक्चुअली सीरत है क्या? व्हाट इज सीरा? तो देखिए सबसे पहले यह समझिए कि सीरा एक स्ट्रेस फ्री सब्जेक्ट है। कोई टेंशन नहीं है उसके अंदर। उसमें होने वाले इंसिडेंट को, लोकेशनेशंस को, तारीखों को आपको याद रखने की जरूरत ही
08:32
Speaker A
नहीं है। क्योंकि सीरतुल नबी का मकसद चीजों को याद करना नहीं है बल्कि अपने अंदर एक बदलाव लेकर आना है। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ अपनी मोहब्बत को बढ़ाना है। नबी का पैगाम मक्का से हम आपके साथ हिजरत
08:50
Speaker A
करेंगे। अब बात करते हैं टेक्निकल आस्पेक्ट पे कि भाई सीरा है क्या? तो सीरा एक अरबी का लफ्ज़ है जो सारा के लफ्ज़ से आया है जिसका मतलब होता है सफर करना। तो जब आप कहते हैं सीरतु नबी तो इसका मतलब होता है नबी की
09:09
Speaker A
जिंदगी का सफर। अब चुकि ये एक सफर है तो सफर में बड़े पड़ाव भी आते हैं। कहीं रुकना भी होता है, कहीं चलना भी होता है, कहीं ठहरना भी होता है। तो इस सफर में कौन-कौन से पड़ाव हैं? सबसे पहला शमाइल यानी के
09:21
Speaker A
आपके अखलाक कैसे थे? आप दिखते कैसे थे? आप चलते कैसे थे? आप बातें कैसे करते थे?
09:27
Speaker A
आपके गुस्सा होने का अंदाज क्या था? आपके मुस्कुराने का तरीका क्या था? ये सब बातें ये सारे शामाइल हमें सीरतु नबी में मिलते हैं। अब अगला पड़ाव क्या है? मगाजी यानी के बैटल्स। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी में बहुत सारी जंगे हुई, बहुत सारी
09:42
Speaker A
गजवा हुई। जिन जंगों में जिन एक्सपेडिशन में वो पर्सनली शामिल थे। तो हम उन जंगों [संगीत] के बारे में भी पढ़ेंगे जिससे इस्लाम को फैलाने में आसानी हुई, फतेह मिली। इसके अलावा जो तीसरा और आखिरी पॉइंट है वो
10:02
Speaker A
है एहवाल यानी कंडीशंस। [संगीत] अब कैसी कंडीशन? वो हालात जब आप भूखे थे। वो हालात जब आप अकेले थे। वो हालात जब आप सहाबाओं के साथ थे। यानी आपकी फिजिकल कंडीशन, आपकी सोशल कंडीशन, आपकी इमोशनल स्टेट। भूख की वजह से मैंने पेट पर पत्थर बांधा
10:22
Speaker A
हुआ है। अल्लाह के नबी ने दो [संग
10:35
Speaker A
तो हमारा अदब यह होना चाहिए कि हम यह महसूस करें कि यह जो 1520 मिनट मैं निकाल रहा हूं यह सिर्फ और सिर्फ मेरे और मेरे नबी के लिए है। डिस्ट्रैक्शन से अपने आप को दूर कर लीजिए। अब सात आसमानों के ऊपर से आने वाली उस
10:49
Speaker A
गैरी मदद की वजह से आप सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम का दिल मुमईन हो गया। इसके अलावा इमाम मालिक रदी अल्लाह ताला अनू का जो तरीका था वो यह था कि वो वजू करके खुशबू लगा के अपने माहौल को एक सुकून भरा बनाकर
11:03
Speaker A
उसके बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की [संगीत] बात करते थे क्योंकि नबी-ए पाक को खुशबू बेइंतहा पसंद थी और खुशबू एक सदका जारिया है क्योंकि लगा तो उसे आप रहे हैं लेकिन कुछ देर के बाद उसका फायदा दूसरे
11:15
Speaker A
लोग उठा रहे हैं। आपको तो खुशबू आना ही बंद हो जाती है और इंशाल्लाह ताला इससे आपका माहौल एलिवेट होगा। पढ़ने में भी मजा आएगा और एक तरीका और एक अदब हम सीखेंगे। सबा कहते हैं कि हमें नबी के घर से निकलने
11:26
Speaker A
का इल्म खुशबू के झोंकों से होता था। पता चल जाता था खुशबुओं से कि नबी तशरीफ ला रहे हैं। तो अब हम आते हैं अपने आखिरी सवाल पर [संगीत] कि भाई ठीक है सीरा क्या होती है? हमें पता चल गया। सीरा क्यों
11:38
Speaker A
पढ़नी चाहिए? हमें यह भी पता चल गया। सीरा पढ़ने का तरीका अदब क्या होना चाहिए? हमें वो भी पता चल गया। अब सीरा कहां से पढ़नी है? ये तो बताइए। आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के गुजरने के 130 140 साल के बाद
11:50
Speaker A
एक हिस्टोरियन हुए इबने इसहाक उन्होंने सोचा कि भाई दीन इजिप्ट में अफ्रीका में परर्शिया में सारी दुनिया में फैल रहा है तो क्यों ना मैं आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी को एक [संगीत] जगह इकट्ठा करूं ताकि लोग उनके बारे में बेहतर
12:05
Speaker A
तरीके से जान सके और सब जगह एक बात मुकम्मल तौर पर पहुंच सके। इब्ने इसहाक नबी की सीरत लिखना आसान नहीं। यह जो भेड़ा तुमने उठाया है काफी हिम्मत का लेकिन बहुत मुश्किल काम है। मुश्किल तो है लेकिन आपकी सच्ची सीरत को
12:24
Speaker A
लोगों तक पहुंचाना जरूरी है। [हंसी] बेशक अल्लाह तुम्हारे काम में आसानी करे। अब क्योंकि इनकी खुद दो पुश्तें आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ रह चुकी थी। सहाबा थे इनके दादा परदादा तो इन्होंने अलग-अलग सहाबाओं के पोतों से
12:39
Speaker A
मिलकर आप सल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी के बारे में पूछ-पूछ [संगीत] कर वेरीफाई कर कर मल्टीपल सबाओं से सेम नरेशन को वेरीफाई करके इन्होंने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पूरी मुकम्मल जिंदगी का जो बायोडटा था वो जमा कर लिया और उसे
12:52
Speaker A
क्रोनोलॉजिकल ऑर्डर में लगा दिया यानी कि पहले ये हुआ फिर ये हुआ फिर ये हुआ कि रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मेरे घर में मेरी बारी के दिन मेरे लब्बे और सीने के दरमियान वफात पाई और आप सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम की मौत के वक्त
13:10
Speaker A
अल्लाह ने मेरा लुआब और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का लुआब इकट्ठा कर दिया लेकिन जैसा मैंने कहा ये एक हिस्टोरियन थे। ये कोई हदीस स्पेशलिस्ट [संगीत] नहीं थे। इसीलिए जब हम सीरतु नबी पढ़ते हैं तो हम वहां से कोई लीगल रूलिंग नहीं निकाल
13:24
Speaker A
सकते। ये नहीं कह सकते अरे नबी ने ऐसा काम किया था इसलिए मैं ऐसा कर रहा हूं। नहीं नहीं नहीं उसके लिए फिक एक अलग कैटेगरी है। उसके बारे में अलग से पढ़ना है। इसको तो हम सिर्फ अखलाकियात के तौर पर पढ़ते
13:34
Speaker A
हैं। अपने दिल को नरम करने के लिए पढ़ते हैं। जैसा हम पहले भी बात कर चुके हैं। जवाल ये देखो ये वाली हदीस और इस पन्ने पर भी एक कमजोर रिवायत है। इबने इसहाक की तहकीक में कुछ कमियां हैं। सही कहा। चलो
13:49
Speaker A
मुफ्ती साहब को खबर करते हैं। फिर कुछ वक्त गुजरा और इनके एक स्टूडेंट हुए। उनका नाम था इबने हशाम। इबने हशाम ने महसूस किया कि मेरे उस्ताद ने बहुत ज्यादा लंबा क्रोनोलॉजिकल ऑर्डर बना दिया। तो उन्होंने क्या किया? जो कमजोर हदीसे थी,
14:02
Speaker A
कमजोर रिवायत थी, उन्हें अलग निकाल दिया और फिर जाकर उन्होंने तीन वॉल्यूम की एक किताब बनाई जिसको हम सीरे इबने हशाम कहते हैं। ये किताब फैक्चुअली इतनी ज्यादा करेक्ट थी कि पूरी दुनिया के मुसलमानों ने इसे हाथों हाथ एक्सेप्ट [संगीत] कर लिया।
14:15
Speaker A
यहां तक के इब्ने कसीर, इमाम सुयूती, इमाम बैहकी इन सब उलमाओं की किताबें इबने हशाम की सीरतु नबी पर ही बेस्ड है। इसके अलावा दुनिया की हर किताब सीरतु नबी की इन तीन किताबों पर बेस्ड है। अब क्योंकि वक्त
14:29
Speaker A
बदलता चला गया, लोगों के पास वक्त कम हो गया या लोगों के पास उतनी अंडरस्टैंडिंग नहीं रही। तो सीरतु नबी को मुख्तसर किया जाने लगा, छोटा किया जाने लगा, समराइज किया जाने लगा। मखतूब अभी तक सीरत मुकम्मल नहीं की। कोशिश
14:43
Speaker A
करता हूं मगर वक्त नहीं मिल पाता। इन किताबों को पढ़ना भी उतना आसान नहीं है। अक्सर लोगों के लिए इसमें थोड़ी सी मुश्किल पेश आ सकती है। मुझे खुद ये किताब खत्म करने में तकरीबन ढाई तीन साल लगे
14:54
Speaker A
हैं। मैंने पार्ट टाइम इसको हर रोज पढ़ा है। दो ढाई घंटे दो ढाई घंटे ऑलमोस्ट। तब भी मुझे ढाई तीन साल लग गए। क्योंकि जब आप इस तरह की कोई किताब पढ़ते हैं तो वो आप अकेले नहीं पढ़ सकते। उसके लिए आपको किसी
15:04
Speaker A
ना किसी आलिम की जरूरत होती है। [संगीत] वो आलिम जो उस पेज की डिटेल्स को आपको बताए। तो मैंने डॉक्टर यासिर काजी हैं, शेख हमजा यूसुफ हैं, शेख अब्दुल नासिर अहमद जांगा हैं। इन सबको रेफर किया। इसके अलावा एक और किताब है अर रहीकुल मखतूम।
15:19
Speaker A
बहुत इंपॉर्टेंट किताब है सीरतु नबी की। इसके अलावा अगर आप अंग्रेजी में पढ़ने के बहुत ज्यादा शौकीन हैं। अबू बकर सिराजुद्दीन उर्फ़ मार्टिन लिंग की ये किताब पढ़ सकते हैं। मोहम्मद। मेरे ख्याल में अंग्रेजी में वन ऑफ द बेस्ट बुक है।
15:33
Speaker A
वन ऑफ द बेस्ट बुक। [संगीत] एंड ह नेम इन अ बिट मीन सिराजुद्दीन द लैंप दैट गाइड्स टू रिलजन एंड सो [संगीत] आई एम इटर्नली टू हिम लेकिन जैसा मैंने कहा कि हम एक कम्युनिटी है। हम एक परिवार एक फैमिली की तरह हैं।
15:50
Speaker A
तो आपको इन किताबों को खरीदने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। इन सब किताबों की पीडीएफ डिस्क्रिप्शन में मौजूद है। तो आप इन किताबों को डाउनलोड कीजिए। इनके 101 पेजेस प्रिंट करवाइए। आराम से पढ़िए और फिर अगली वाली वीडियो देखिए। तो उससे आपको
16:04
Speaker A
यह अंदाजा होगा कि किसी भी किताब को पढ़ने का तरीका क्या होता है। व्हाट इज द आर्ट ऑफ रीडिंग अ बुक? क्योंकि खाली किताब के पन्ने पढ़ लेने से बात खत्म नहीं हो जाती। उसकी गहराई में बहुत ज्यादा उतरना पड़ता
16:14
Speaker A
है। बहुत अच्छी लगी [संगीत] होगी। मैं पूरी कोशिश करूंगा कि आपको बहुत ज्यादा मजा आए। हर बात का फैक्ट हो, सबूत हो। आपके पास प्रूफ मौजूद हो और आप बिल्कुल भी बोर ना हो। और आप भी कोशिश करिएगा कि जुड़े रहें,
16:35
Speaker A
लगे रहें। तो अगर हो सके तो कमेंट सेक्शन के अंदर मुझे बताइएगा कि आपको ये वीडियो कैसी [संगीत] लगी। इसमें और क्या इंप्रूवमेंट किए जा सकते हैं। क्या आपको कोई नई बात सीखने को मिली? कुछ नया जानने को मिला? जैसा भी है मुझे जरूर बताइएगा।
16:47
Speaker A
मैं आपके कमेंट्स का इंतजार करूंगा। जजाकुल्लाह खैर। अस्सलाम वालेकुम। मुद नबी [संगीत] उी व
Topics:पैगंबर मोहम्मदसीरतुल नबीइस्लामकुरानहिजरतनबी की जिंदगीमोहब्बत रसूलहदीसइस्लामी इतिहासअखलाक

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