इजराइल-पैलेस्टाइन संघर्ष की धार्मिक और राजनीतिक जड़ें, इतिहास और वर्तमान स्थिति का विस्तार से विश्लेषण।
Key Takeaways
- इजराइल-पैलेस्टाइन संघर्ष की जड़ें धार्मिक और ऐतिहासिक हैं।
- तीनों धर्मों के पवित्र स्थलों पर नियंत्रण विवाद का मुख्य कारण है।
- यूरोप में यहूदियों के प्रति पूर्वाग्रह ने संघर्ष को बढ़ावा दिया।
- अंतरराष्ट्रीय राजनीति ने इस क्षेत्रीय विवाद को और जटिल बनाया।
- समझने के लिए धार्मिक, ऐतिहासिक और राजनीतिक पहलुओं को समग्र रूप से देखना आवश्यक है।
What the video covers
- इजराइल और पैलेस्टाइन के बीच संघर्ष की शुरुआत और 1948 में इजराइल के गठन की कहानी।
- तीनों प्रमुख इब्राहीमी धर्मों (यहूदी, इस्लाम, और ईसाई) की धार्मिक मान्यताओं और उनके विवाद।
- जेरूसलम के पवित्र स्थलों का महत्व और उनके नियंत्रण को लेकर धर्मों के बीच टकराव।
- यहूदी धर्म के मंदिरों का इतिहास और उनका विनाश।
- इस्लामिक दृष्टिकोण से मस्जिद अल-अक्सा का महत्व और अल इसरा वल मेराज की घटना।
- यूरोप में एंटीसेमिटिज्म का उदय और यहूदियों के खिलाफ हिंसा।
- धार्मिक मतभेदों के कारण राजनीतिक और सामाजिक तनाव।
- ब्रिटेन, अमेरिका, यूरोप और अन्य देशों की भूमिका और प्रभाव।
- पैलेस्टाइन में यहूदियों की आबादी वृद्धि और शरणार्थियों का मुद्दा।
- इजराइल के पहले प्रधानमंत्री डेविड बिन गुरियन के आदेश और संघर्ष की राजनीतिक रणनीतियाँ।
Chapters
- 00:00इजराइल-पैलेस्टाइन संघर्ष की शुरुआत और 1948 का ऐलान
- 02:14तीनों इब्राहीमी धर्मों के बीच धार्मिक मतभेद
- 04:03तीनों धर्मों के पवित्र स्थलों का महत्व
- 05:19यहूदी मंदिरों का इतिहास और धार्मिक महत्व
- 09:15जेरूसलम में धार्मिक विवाद और खूनखराबा
- 11:19ब्रिटेन और अंतरराष्ट्रीय राजनीति की भूमिका
- 13:05पैलेस्टाइन में यहूदियों की आबादी और शरणार्थी समस्या
- 14:08इजराइल के पहले प्रधानमंत्री के आदेश और राजनीतिक रणनीतियाँ
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Speaker A
उससे पूछा जाता है कि आपने कितने पैलेंस को मारा? वह मुस्कुरा कर कहता है कि मेरे पास ऑटोमेटिक बंदूक थी, मैंने गिना नहीं, चलाता चला गया। जूज ये कहते हैं कि भाई हमारा जो मुल्क बनेगा, जो नेशनल होम बनेगा, वो यही बनेगा, इसी पलेस्टाइन के अंदर। पलेस्टाइन के मुसलमान जो कि वो कहते हैं कि ऐसे कैसे? यह हमारा देश है, इसमें तुम आकर कैसे कब्जा कर सकते हो? 1948 में डेविड बिन गुरियन ऐलान कर देते हैं कि क्या? आज से इजराइल एक अलग देश है।
Speaker A
हिंदुस्तान सिर्फ एक अकेला ऐसा मुल्क था जिसने धर्म के नाम पर इस बंटवारे को रिजेक्ट कर दिया, पर रिफ्यूजी जूज यहीं नहीं रुके। यूएन ने उन्हें जितना एरिया दिया था, यह उससे कहीं ज्यादा कैप्चर कर लेते हैं। आज हमारी यह दुनिया चार हिस्सों में बट चुकी है। एक वह जो बोल रहे हैं, दूसरे वो जो कुछ कर रहे हैं। गजा के भीतर रहकर कवर करने वाले फलस्तीनी पत्रकारों की मिसाल आपको दुनिया में नहीं मिलेगी। तीसरे वो जो मजे ले रहे हैं क्या?
Speaker A
इजराइली यहूदी ही यदुवंशी हैं, खतरा ज्यादा दिख रहा है। अ देखिए, लगातार यहां पे रोक के जा रहे हैं। और चौथे वो जो खामोश हैं। सेलीना गोमेज ने अनाउंसड ह डिसिजन टू डिलीट हर [संगीत]। सोशल मीडिया पर हर रोज आ रही इन तस्वीरों को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे हम इंटरनेट और एआई के दौर में नहीं बल्कि कत्लेआम और रॉकेट्स के दौर में जी रहे हैं, जहां जिसके पास ताकत है, वह कुछ भी कर सकता है। लेडीज एंड जेंटलमेन, द बाइबल सेज,
Speaker A
देर इज अ टाइम फॉर पीस एंड टाइम फॉर वर। दिस इज टाइम फॉर वर। तो चलिए, आपको एक कहानी सुनाता हूं। कहानी ख्वाबों की, उन ख्वाबों की जो ना जाने कबके जमीन में दफन हो गए। ले ए जेंटल प्रेस गा बिकमिंग ग्रेव च। यह कहानी है कत्लेआम की। यह कहानी है हक और इंसाफ की। यह कहानी है पलेस्टाइन और इजराइल से निकले उस शोर की जिसे दुनिया ने पिछले 106 सालों से ही नहीं सुना। कम्न द 106 एनिवर्सरी ऑफ द बशन क्या है? यह मुद्दा क्यों? यह मसला बार-बार हमारे आगे आकर खड़ा हो जाता है। कैसे अमेरिका, यूरोप, ब्रिटेन, जर्मनी, हिटलर ने मिलकर पलेस्टाइन और इजराइल को जन्म दिया और किस तरह जूज वर्सेस क्रिश्चियन का यह मसला जू वर्सेस मुस्लिम का मुद्दा बन गया है, जानेंगे इस वीडियो में।
Speaker A
वीडियो को शुरू करने से पहले दो बातें बिल्कुल क्लियर कर देना चाहता हूं। पहली बात तो यह कि इस वीडियो को बनाने का मेरा मकसद यह नहीं कि मैं किसी को पॉइंट आउट करूं या कोई राय बनाऊं। वीडियो बनाने का मेरा मकसद यह है कि इजराइल और पलेस्टाइन के इस पूरे कॉन्फ्लेट की हम जड़ को समझ सकें। आखिर यह मसला कैसे शुरू हुआ और किस तरह यह बार-बार कई सालों से हमारे सामने आकर खड़ा हो जा रहा है। दूसरा यह कि
Speaker A
हो सकता है कि कुछ लोगों को वीडियो लंबी लगे। कुछ सेकुलर लोग ये कहें कि अरे भाई, तुमने तो इसमें रिलीजस हिस्ट्री घुसा दी, का तो कोई तुक नहीं है। तो अलग-अलग टाइम स्टैंप पर जाकर आप इस वीडियो को देख सकते हैं और अपनी समझ के हिसाब से वीडियो के आखिर में अपनी राय बना सकते हैं। चलिए शुरू करते हैं। इजराइल और पलेस्टाइन के पूरे कॉन्फ्लेट को समझने के लिए हमें इसके रिलीजियस सेंटीमेंट को समझना पड़ेगा कि किस तरह से यह मसला धर्म के नाम पर शुरू किया गया।
Speaker A
देखिए, दुनिया के दो सबसे बड़े मजहब हैं, क्रिश्चियनिटी और इस्लाम। जहां दुनिया में तकरीबन 31 प्रतिशत ईसाई रहते हैं, तो वहीं मुसलमानों की आबादी 25 प्रतिशत है। इसी में बहुत पीछे एक और मजहब है जिसे हम कहते हैं जुडा इज्म यानी यहूदी मजहब। अब यह तीनों मजहब, जूडा इज्म, क्रिश्चियनिटी और इस्लाम, एक ही खानदान का हिस्सा हैं जिसे हम आमतौर पर कहते हैं इब्राहिम रिलीजन। अगर आप इन तीनों धर्मों की किताबों को पढ़ेंगे या सिर्फ गल भी करेंगे तो आपको पता चल जाएगा कि इन तीनों धर्मों में प्रोफेट इब्राहिम का जिक्र किया गया है। ये तीनों मानते हैं कि खुदा सिर्फ एक है, वही है जो सारी कायनात को चलाता है और वही है जो आखिर में सबके मरने के बाद उन्हें जिंदा करेगा और उनसे उनकी करनी का सवाल और जवाब करेगा। और इसी करनी की बुनियाद पर खुदा यह फैसला करेगा कि किसको हेल में भेजा जाए और किसको हेवन में भेजा जाए। अब देखिए, यह तीनों धर्म एक दूसरे से कितने मिलते जुलते हैं, लेकिन
Speaker A
उसके बावजूद भी इनमें अक्सर प्रॉब्लम्स आती रहती हैं जिसकी वजह बहुत सिंपल है। यहूदी मजहब जो कि इस इब्राहिम रिलीजन में सबसे पहला मजहब है, ये लोग कहते हैं कि ईसा मसीह प्रॉफिट है ही नहीं, इसलिए ईसाइयत, क्रिश्चियनिटी एक झूठा धर्म है। दूसरे नंबर पर मुस्लिम मजहब के बारे में जूस कहते हैं कि प्रोफेट मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जो इस्लाम की टीचिंग दे रहे हैं, उनका मैसेज तो ठीक है पर यह बंदा ठीक नहीं है क्योंकि प्रॉफिट तो आएगा और इन्हीं टीचिंग्स के साथ आएगा, लेकिन वह हमारी लीनियस में से होगा, हमारी आल में से होगा, एक सऊदी अरब का एक आम आदमी, एक सौदागर। हमारा प्रॉफिट नहीं हो सकता। और इस तरह जूज मुस्लिम मजहब को भी झूठ देते हैं। अब जब
Speaker A
जूज इस्लाम और क्रिश्चियनिटी, इन दोनों ही मजहब को झुठला देते हैं तो इनकी मान्यताओं को, इनके यकीन को वो कोई ज्यादा इंपॉर्टेंस नहीं देते। आप इसका अंदाजा इस मैप से लगा सकते हैं। यह है इजराइल के जेरूसलम का नक्शा। यहां 2 किलोमीटर का यह एरिया मुस्लिम, क्रिश्चियंस और जूस के लिए काफी मायने रखता है। सबसे पहले इस कंपाउंड की तरफ आते हैं जूज और मुस्लिम के लिए ये पूरा कंपाउंड एक होली साइट है। इस कंपाउंड को जूज टेंपल माउंट के नाम से बुलाते हैं।
Speaker A
वहीं मुस्लिम इसे अल हरम अल शरीफ या सिर्फ मस्जिद अल अकसा के नाम से पुकारते हैं। इस अल अकसा मस्जिद के बारे में मुसलमान यह यकीन करते हैं कि उनके आखिरी नबी प्रोफेट मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बुराक नाम के जानवर पर यहां बैठकर आए। उन्होंने इस मस्जिद में गुजरे हुए प्रोफेट जैसे प्रोफेट मूसा, प्रोफेट ईसा, प्रोफेट इब्राहिम अल सलाम के साथ नमाज पढ़ी और फिर वह यहां से एक पत्थर पर पैर रखकर खुदा से मिलने के लिए चले [संगीत] गए। जिस पत्थर पर उन्होंने पैर रखा, उसकी जगह पर डो ऑफ द रॉक बनवाया गया। इस्लामिक हिस्ट्री में इस पूरे मामले को अल इसरा वल मेराज का सफर कहते हैं। आज दुनिया भर के मुसलमान काबा की तरफ मुंह करके नमाज पढ़ते हैं, लेकिन आज से 1400 साल पहले मुसलमानों का पहला किबला मस्जिद अल अकसा थी और इसी वजह से मक्का और मदीना के बाद की तीसरी सबसे इंपॉर्टेंट साइट है मुसलमानों के लिए।
Speaker A
अल्लाह अब समझते हैं कि यह साइट जूस के लिए क्यों इंपॉर्टेंट है। जूस की किताब है, जिसको हम हिब्रू बाइबल भी कहते हैं। इसमें मेंशन है कि प्रोफेट इब्राहीम से खुदा ने कहा कि वह अपने बेटे को सैक्रिफाइस कर दे। उन्होंने खुदा की बात मानी और जब वह उस बच्चे को सैक्रिफाइस करने ही वाले थे तो खुदा ने उस बच्चे की जगह उनकी गोद में एक भेड़ का बच्चा रख दिया, जिसके बाद खुदा ने इब्राहिम अली सलाम से कहा कि यह उनका एक टेस्ट [संगीत] था। तीनों धर्म यह मानते हैं कि ऐसा हुआ था, पर जूस इससे दो कदम आगे बढ़कर यह यकीन करते हैं कि यह पूरा वाकया मोराया के पहाड़ पर हुआ था। और इस यकीन के चलते करीब 1000 साल पहले किंग सोलोमन ने यहां एक मंदिर बनवाया, जिसको इन्होंने नाम दिया फर्स्ट टेंपल। इसके कुछ वक्त के बाद इस पहले मंदिर को बेबीलॉन सिविलाइजेशन ने बर्बाद कर दिया। 500 साल बाद एक और मंदिर बनवाया जाता है, जिसको जूस कहते हैं होली ऑफ द होलीज, एक ऐसी जगह जो पवित्र से भी ज्यादा पवित्र, इतनी पाक जगह कि जहां पर एक आम जीव का जाना भी बैन है। सिर्फ जूस के बड़े स्कॉलर्स ही वहां जा सकते थे। यह मंदिर 600 साल तक ऐसे ही खड़ा रहता है, पर 70 एडी में रोमंस इसको तोड़ देते हैं। पूरा मंदिर गिर जाता है, पर यह दीवार बच जाती है, जिसको कहते हैं द वेस्टर्न वॉल और आज भी कई यहूदी यहां जाकर अपनी इबादत करते हैं। अब अगर इस एरिया से थोड़ा सा 2 किलोमीटर दूर चले जाएं तो यह है चर्च ऑफ द होली सेपल का, जिसको कांस्टेंटिन द ग्रेट ने बनवाया था क्योंकि क्रिश्चियंस ये मानते हैं कि यह वो जगह है जहां जूज ने पहले ईसा मसीह को टॉर्चर किया और फिर कील ठोक कर सूली पर चढ़ा दिया। और इसी वजह से जूज और क्रिश्चियन इन दोनों के बीच अक्सर तनाव बना रहता है। पर यहां एक और प्रॉब्लम है। जूज ये मानते हैं कि मुराया का यह पहाड़ डोम ऑफ द रॉक के नीचे है और इनका तीसरा मंदिर यानी थर्ड टेंपल इस डोम ऑफ द रॉक पर ही बनना चाहिए।
Speaker A
उनके प्रॉफिट के आने से पहले या आने तक 34 यर्स ल इंस्टिट्यूट है बन प्रपे फॉर द रिबिल्डिंग ऑफ द होली टेपल एंड रिनल ऑ द डिवाइन सर्विस। तो यह पूरा जेरूसलम का एरिया तीनों ही धर्मों के लिए बहुत ज्यादा मायने रखता है। हर धर्म यह चाहता है कि इस जेरूसलम के एरिया पर उसका कब्जा हो या वह उसको कंट्रोल करें और इसी विवाद के चलते कई सालों से बेइंतहा खून बहाया जा चुका है। अब समझते हैं इस पूरे मामले की पॉलिटिकल हिस्ट्री। 1850 में यूरोप के अंदर एक आइडियोलॉजी बनी जिसे एंटीसेमिटिज्म का नाम दिया गया। इसमें क्रिश्चियन ने जूस को खुलेआम मानना शुरू कर दिया। उनका मानना था कि जूज बाहर से आकर हमारे यहां राज करते हैं, हमारे ईसा मसीह को भी इन्होंने मारा है और अगर इस कौम को खत्म नहीं किया गया तो यह एक दिन हमें खत्म कर देगी। यह बिल्कुल यूपी बिहार वाला मामला है, कैसे यूपी वाले बिहारी को गाली देते कि हमारी स्टेट में आके हमारी नौकरियां खाते हैं, हमारी अपॉर्चुनिटी खाते हैं। समझिए, यूरोप में यह हाल इतना बुरा था कि हर रोज जूस की लाखों लाशें गिराई जा रही थीं। इसके चलते 1896 सेमिटिज्म से बचने के लिए सिर्फ भागना काफी नहीं है बल्कि यहूदियों को साथ मिलकर रहना चाहिए, उनका अपना देश, अपनी एक भाषा होनी चाहिए ताकि आगे कोई उन्हें इस तरह से मार ना।
Speaker A
हैं और अपनी समझ के हिसाब से वीडियो के आखिर में अपनी राय बना सकते हैं चलिए शुरू करते हैं इजराइल और पलेस्टाइन के पूरे कॉन्फ्लेट को समझने के लिए हमें इसके रिलीजियस सेंटीमेंट को समझना पड़ेगा कि किस तरह से यह मसला धर्म के नाम पर शुरू
Speaker A
किया गया देखिए दुनिया के दो सबसे बड़े मजहब हैं क्रिश्चियनिटी और इस्लाम जहां दुनिया में तकरीबन 31 पर ईसाई रहते तो वहीं मुसलमानों की आबादी 25 पर है है इसी में बहुत पीछे एक और मजहब है जिसे हम कहते
Speaker A
हैं जुडा इज्म यानी यहूदी मजहब अब यह तीनों मजहब जूडा इज्म क्रिश्चियनिटी और इस्लाम एक ही खानदान का हिस्सा है जिसे हम आमतौर पर कहते हैं इब्राहिम रिलीजन अगर आप इन तीनों धर्मों की किताबों को पढ़ेंगे या सिर्फ गल भी करेंगे तो आपको पता चल जाएगा
Speaker A
कि इन तीनों धर्मों में प्रोफेट इब्राहिम का जिक्र किया गया है ये तीनों मानते हैं कि खुदा सिर्फ एक है वही है जो सारी कायनात को चलाता है और वही है जो आखिर में सबके मरने के बाद उन्हें जिंदा करेगा और
Speaker A
उनसे उनकी करनी का सवाल और जवाब करेगा और इसी करनी की बुनियाद पर खुदा यह फैसला करेगा कि किसको हेल में भेजा जाए और किसको हेवन में भेजा जाए अब देखिए यह तीनों धर्म एक दूसरे से कितने मिलते जुलते हैं लेकिन
Speaker A
उसके बावजूद भी इनमें अक्सर प्रॉब्लम्स आती रहती है जिसकी वजह बहुत सिंपल है यहूदी मजहब जो कि इस इब्राहिम रिलीजन में सबसे पहला मजहब है ये लोग कहते हैं कि ईसा मसीह प्रॉफिट है ही नहीं इसलिए ईसाइयत क्रिश्चियनिटी एक झूठा द रम है दूसरे नंबर
Speaker A
पर मुस्लिम मजहब के बारे में जूस कहते हैं कि प्रोफेट मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वा वसल्लम जो इस्लाम की टीचिंग दे रहे हैं उनका मैसेज तो ठीक है पर यह बंदा ठीक नहीं है क्योंकि प्रॉफिट तो आएगा और इन्हीं
Speaker A
टीचिंग्स के साथ आएगा लेकिन वह हमारी लीनियस में से होगा हमारी आल में से होगा एक सऊदी अरब का एक आम आदमी एक सौदागर हमारा प्रॉफिट नहीं हो सकता और इस तरह जूज मुस्लिम मजहब को भी झुट देते हैं अब जब
Speaker A
जूज इस्लाम और क्रिश्चियनिटी इन दोनों ही मजहब को झु ला देते हैं तो इनकी मान्यताओं को इनके यकीन को वो कोई ज्यादा इंपॉर्टेंस नहीं देते आप इसका अंदाजा इस मैप से लगा सकते हैं यह है इजराइल के जेरूसलम का
Speaker A
नक्शा यहां 2 किलोमीटर का यह एरिया मुस्लिम क्रिश्चियंस और जूस के लिए काफी मायने रखता है सबसे पहले इस कंपाउंड की तरफ आते हैं जूज और मुस्लिम के लिए ये पूरा कंपाउंड एक होली साइट है इस कंपाउंड को जूज टेंपल माउंट के नाम से बुलाते हैं
Speaker A
वहीं मुस्लिम इसे अल हरम अल शरीफ या सिर्फ मस्जिद अल अकसा के नाम से पुकारते हैं इस अल अकसा मस्जिद के बारे में मुसलमान यह यकीन करते हैं कि उनके आखिरी नबी प्रोफेट मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वालि वसल्लम एक
Speaker A
बुराक नाम के जानवर पर यहां बैठकर आए उन्होंने इस मस्जिद में गुजरे हुए प्रोफेट जैसे प्रोफेट मूसा प्रोफेट ईसा प्रोफेट इब्राहिम अल सलाम के साथ नमाज पढ़ी और फिर वह यहां से एक पत्थर पर पैर रखकर खुदा से
Speaker A
मिलने के लिए चले [संगीत] गए जिस पत्थर पर उन्होंने पैर रखा उसकी जगह पर डो ऑफ द रॉक बनवाया गया इस्लामिक हिस्ट्री में इस पूरे मामले को अल इसरा वल मेराज का सफर कहते हैं आज दुनिया भर के
Speaker A
मुसलमान काबा की तरफ मुंह करके नमाज पढ़ते हैं लेकिन आज से 1400 साल पहले मुसलमानों का पहला किबला मस्जिद अल अकसा थी और इसी वजह से मक्का और मदीना के बाद की तीसरी सबसे इंपॉर्टेंट साइट है मुसलमानों के लिए
Speaker A
अल्लाह अब समझते हैं कि यह साइट जूस के लिए क्यों इंपॉर्टेंट है जूस की किताब है जिसको हम हिब्रू बाइबल भी कहते हैं इसमें मेंशन है कि प्रोफेट इब्राहीम से खुदा ने कहा कि वह अपने बेटे को सैक्रिफाइस कर दे
Speaker A
उन्होंने खुदा की बात मानी और जब वह उस बच्चे को सैक्रिफाइस करने ही वाले थे तो खुदा ने उस बच्चे की जगह उनकी गोद में एक भेड़ का बच्चा रख दिया जिसके बाद खुदा ने इब्राहिम अली सलाम से कहा कि यह उनका एक
Speaker A
टेस्ट [संगीत] था तीनों धर्म यह मानते हैं कि ऐसा हुआ था पर जूस इससे दो कदम आगे बढ़कर यह यकीन करते हैं कि यह पूरा वाकया मोराया के पहाड़ पर हुआ था और इस यकीन के चलते करीब 1000 साल पहले किंग सोलोमन ने यहां एक
Speaker A
मंदिर बनवाया जिसको इन्होंने नाम दिया फर्स्ट टेंपल इसके कुछ वक्त के बाद इस पहले मंदिर को बेबीलॉन सिविलाइजेशन ने बर्बाद कर दिया 500 साल बाद एक और मंदिर बनवाया जाता है जिसको ज्यूस कहते हैं होली ऑफ द होलीज एक ऐसी जगह जो पवित्र से भी
Speaker A
ज्यादा पवित्र इतनी पाक जगह कि जहां पर एक आम जीव का जाना भी बैन है सिर्फ जूस के बड़े स्कॉलर्स ही वहां जा सकते थे यह मंदिर 600 साल तक ऐसे ही खड़ा रहता है पर 70 एडी में रोमंस इसको तोड़ देते हैं पूरा
Speaker A
मंदिर गिर जाता है पर यह दीवार बच जाती है जिसको कहते हैं द वेस्टर्न वॉल और आज भी कई यहूदी यहां जाकर अपनी इबादत करते हैं अब अगर इस एरिया से थोड़ा सा 2 किलोमीटर दूर चले जाए तो यह है चर्च ऑफ द
Speaker A
होली सेपल का जिसको कांस्टेंटिन द ग्रेट ने बनवाया था क्योंकि क्रिश्चियंस ये मानते हैं कि यह वो जगह है जहां जूज ने पहले ईसा मसीह को टॉर्चर किया और फिर कील ठोक कर सूली पर चढ़ा दिया और इसी वजह से जूज और क्रिश्चियन इन
Speaker A
दोनों के बीच अक्सर तनाव बना रहता है पर यहां एक और प्रॉब्लम है जूज ये मानते हैं कि मुराया का यह पहाड़ डोम ऑफ द रॉक के नीचे है और इनका तीसरा मंदिर यानी थर्ड टेंपल इस डोम ऑफ द रॉक पर ही बनना चाहिए
Speaker A
उनके प्रॉफिट के आने से पहले या आने तक 34 यर्स ल इंस्टिट्यूट है बन प्रपे फॉर द रिबिल्डिंग ऑफ द होली टेपल एंड रिनल ऑ द डिवाइन सर्विस तो यह पूरा जेरूसलम का एरिया तीनों ही धर्मों के लिए बहुत ज्यादा
Speaker A
मायने रखता है हर धर्म यह चाहता है कि इस जेरूसलम के एरिया पर उसका कब्जा हो या वह उसको कंट्रोल करें और इसी विवाद के चलते कई सालों से बेइंतहा खून बहाया जा चुका है अब समझते हैं इस पूरे मामले की पॉलिटिकल
Speaker A
हिस्ट्री 1850 में यूरोप के अंदर एक आइडियो जीी बनी जिसे एंटीसेमिटिज्म का नाम दिया गया इसमें क्रिश्चियन ने जूस को खुलेआम मानना शुरू कर दिया उनका मानना था कि जूज बाहर से आकर हमारे यहां राज करते हैं हमारे ईसा मसीह को भी इन्होंने मारा
Speaker A
है और अगर इस कौम को खत्म नहीं किया गया तो यह एक दिन हमें खत्म कर दगी यह बिल्कुल यूपी बिहार वाला मामला है कैसे यूपी वाले बिहारी को गाली देते कि हमारी स्टेट में आके हमारी नौकरियां खाते हैं हमारी
Speaker A
अपॉर्चुनिटी खाते हैं समझिए यूरोप में यह हाल इतना बुरा था कि हर रोज जूस की लाखों लाशें गिराई जा रही थी इसके चलते 18960 सेमिटिज्म से बचने के लिए सिर्फ भागना काफी नहीं है बल्कि यहूदियों को साथ मिलकर रहना चाहिए उनका अपना देश अपनी एक
Speaker A
भाषा होनी चाहिए ताकि आगे कोई उन्हें इस तरह से मार ना सके कुछ सालों बाद स्विटजरलैंड में एक कॉन्फ्रेंस की जाती है यहां मीटिंग में यह तय किया जाता है कि जूज मिलकर रहेंगे अपना देश बनाएंगे और रहने के लिए जरो सलम से
Speaker A
ज्यादा कोई अच्छी जगह नहीं जहां इनका तीसरा मंदिर बनेगा इस पूरे मूवमेंट को जायो निज्म का नाम दिया गया इसके बाद दुनिया भर के जूस जेरूसलम माइग्रेट करने लगे इस मूड से कि अब वह यही साथ मिलकर रहेंगे और अपना देश
Speaker A
बनाएंगे 186 से 19 आ जाती है जाजम का मूवमेंट अब भी चल रहा है फमर अमेरिकन 4000 रेफ अइ पो लेन फर्स्ट वर्ड वर शुरू हो जाती है कं इ व वि [संगीत] जनी देखते देख देखते जर्मनी हारने लग जाता
Speaker A
है जानिस मूवमेंट के लोग महसूस करते हैं कि इस वॉर में इंग्लैंड की जीत पक्खी है तो वो इंग्लैंड के ऊपर दबाव बनाने लगते कि ब्रिटिश उनकी भी हेल्प करें और उनको भी सपोर्ट करें कि वह पलेस्टाइन के अंदर अपना
Speaker A
एक नेशनल होम बना सकें ब्रिटिश जूस की इस नेशनल होम बनाने वाले आईडिया के बारे में काफी सोचते हैं और 2 नवंबर 1917 में ब्रिटिश के फॉरेन सेक्रेटरी आर्थर बेलफोर एक लेटर लिखते हैं जिसमें वो ये कहते हैं
Speaker A
कि ब्रिटिश गवर्नमेंट यह अप्रूव करती है कि जूस के लिए पलेस्टाइन के अंदर एक नेशनल होम का इंतजाम होना चाहिए और इसको फैसिलिटेट करने के लिए यह ब्रिटिश अपना बेस्ट देने की कोशिश करेंगे अब कमाल की बात यह कि इस वक्त पलेस्टाइन
Speaker A
के अंदर 10 पर से भी कम जूस की आबादी थी ब्रिटिशर्स ने पलेस्टाइन में रहने वाले बाकी 90 पर आबादी जिसमें क्रिश्चियन ज्यादातर अरबी बोलने वाले लोग और कुछ और धर्मों के लोग मौजूद थे उनसे इस बारे में
Speaker A
ना तो कोई राय ली और ना कोई मशवरा किया जिसकी वजह से 1920 में पलेस्टाइन के अंदर दंगे शुरू हो जाते हैं गवर्नमेंट इंपोज द बल फर डिक्लेरेशन वच इज अड बाय ऑल अरब्स इन द नियर ईस्ट इस वक्त तक पलेस्टाइन में रहने वाले लोग
Speaker A
यह बात समझ जाते हैं कि ये ब्रिटिशर्स फूट डालो राज करो वाली नीति अपना रहे हैं जो उन्होंने हिंदुस्तान में भी किया दूसरा यह कि ब्रिटिशर्स कैसे पलेस्टाइन के अंदर जूस का नेशनल होम बना सकते हैं जबकि यहां पर यानी पलेस्टाइन के
Speaker A
अंदर जूस की आबादी 10 पर से भी कम है अब इस पूरे मामले को ऐसे समझिए कि 1959 में में चाइना से बचकर दलाईलामा हिंदुस्तान आए हमने उन्हें शरण दी हमने उनसे कहा कि भाई आप बिल्कुल टेंशन मत
Speaker A
लीजिए आप आराम से अपनी कम्युनिटी के साथ यहां रहिए य आपको कोई टच नहीं करेगा अब कुछ दिनों बाद दलाई लामा हम हिंदुस्तानियों पर हावी हो जाएं व हमसे कहे कि भाई साहब ऐसा है अब यह जो देश है
Speaker A
ना तुम्हारा हिंदुस्तान यह अब से दलाई देश कहलाएगा जितनी भी पॉलिसी यहां बनाई जाएंगी जितने भी फैसले यहां लिए जाएंगे वो तिब्बतन कम्युनिटी को ध्यान में रखकर किया जाएगा तो आपको कैसा लग ओबवियसली गुस्सा आगा दिमाग खराब हो जाएगा
Speaker A
बिल्कुल सेम पलेस्टाइन के लोगों को इस वक्त लग रहा था सो ू देम इट सीम अब द 600 700 शुड गिव अप देर लैंड देर होम्स देर विलेजस देर टाउन एंड हैंड देम ओवर टू अ माइनोटी च वास डिस्पस थ्र आउट पलेस्टाइन
Speaker A
इसकी वजह से जूस मुस्लिम और क्रिश्चियन के बीच एक लंबा तनाव चलता चला जाता है यहां तक कि सेकंड वर्ल्ड व वर शुरू हो जाती है स्टेट ऑफ वर वंस मोर एसिस्ट बिटवीन ग्रेट ब्रिटन एंड जर्मनी हिटलर यहूदियों का जेनोसाइड शुरू
Speaker A
करता है इस लेवल पर जूस को मारा जाता है कि कुछ ही सालों के अंदर 60 लाख से भी ज्यादा जूस की हत्या कर दी जाती है अरब देश देखते हैं कि जर्मनी जूस को मार रहा है तो वह जर्मनी से हाथ मिला लेते हैं
Speaker A
उसका सपोर्ट करने लग जाते हैं इधर जूस के पास पहले से ही यूके का सपोर्ट था तो वो यूएसए और यूएसएसआर को सपोर्ट करने लग जाता है इधर दूसरी तरफ हिटलर के कत्लेआम से परेशान पूरी दुनिया के जूज जेरूसलम
Speaker A
माइग्रेट करने लग जाते हैं 1944 तक आते-आते पलेस्टाइन का यह हाल हो जाता है कि 31 पर आबादी वहां जूज की हो जाती है इस बढ़ती आबादी से परेशान पलेस्टाइन के मुस्लिम क्रिश्चियन जूस के खिलाफ रिवोल्ट करते हैं पर उसके बावजूद
Speaker A
दिन पर दिन पलेस्टाइन में जूस की आबादी बढ़ती चली जाती है वर्ल्ड वॉर टू में जर्मनी की हार हो जाती है साइ एंड साउंड्स ऑफ विक्टरी इन यूरोप एको अक्रॉस द अटलांटिक एंड अराउंड द वर्ल्ड यूके यूएसएसआर और यूएसए की जीत से
Speaker A
जाहिर सी बात है कि जूज का भी फायदा होगा और बेइंतहा फायदा हुआ भी ब्रिटिशर्स ने कहा कि भाई ऐसा है कि हम मुसलमानों क्रिश्चियन और जो भी पलेस्टाइन में लोग रह रहे हैं वो और यह रहे जूज इनके बीच सुलह
Speaker A
करा देते हैं पर ब्रिटिशर्स की हर कोशिश नाकाम हो जाती है जूज ये कहते हैं कि भाई हमारा जो मुल्क बनेगा जो नेशनल होम बनेगा वो यही बनेगा इसी पलेस्टाइन के अंदर वहीं पलेस्टाइन के मुसलमान जो कि ज्यादातर
Speaker A
आबादी थी वो कहते हैं कि ऐसे कैसे यह हमारा देश है इसमें तुम आकर कैसे कब्जा कर सकते हो यह फसाद इतना बढ़ जाता है इतना बढ़ जाता है कि ब्रिटिशर्स ये पूरा का पूरा मामला यूएन को रेफर कर देते
Speaker A
[संगीत] हैं 299 नवंबर 1947 को यूनाइटेड नेशन की जनरल असेंबली में एक रेजोल्यूशन पास किया जाता है इसको कहते हैं रेजोल्यूशन 181 जिसमें ये बताया जाता है कि पलेस्टाइन को तीन हिस्सों में बांटा जाएगा पहली बनेगी जुश स्टेट दूसरी बनेगी पलेस्टाइन स्टेट और
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तीसरा बचा जेरूसलम का ये एरिया यह यूनाइटेड नेशन के अंडर रहेगा असमली ऑफ द यूनाइटेड नेशंस जज मेड इट्स डिसिजन ऑन पलेस्टाइन द जश स्टेट कलर्ड लाइट द अरब स्टेट डार्क जेरूसलम इंटरनेशनलाइज इस पूरे बंटवारे को लेकर जमकर पॉलिटिक्स होती है उस वक्त यूएन के
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अंदर यूएसएसआर यूएसए यूके की करनी पकड़ होती है जिसकी वजह से पलेस्टाइन का एक बड़ा हिस्सा इजराइल को दे दिया जाता है यूएन की इस मीटिंग में 33 वोट इसके फेवर में पड़ते हैं और तीन वोट इसके खिलाफ
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पड़ते हैं और 10 कंट्रीज इस मामले में वोट करने से इंकार कर देती हैं शायद आपको जानकर यह हैरानी हो कि अरब मुल्कों के अलावा हिंदुस्तान सिर्फ एक अकेला ऐसा मुल्क था जिसने धर्म के नाम पर इस बंटवारे
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को रिजेक्ट कर दिया इसके खिलाफ वो ईरान नो इराक नो इंडिया नो शायद पंडित नेहरू को यह अंदाजा था कि धर्म के नाम पर जब देश बांटे जाते हैं तो खून बहता है वही हाल पलेस्टाइन में भी हुआ बड़े-बड़े हिस्टोरियन दुनिया के
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समझदार लोग यह कहते हैं कि यूएन को यह चाहिए था कि यह इतना हिस्सा जहां जूज आकर बस गए थे इजराइल को दे देता और जहां पर पहले से पहले के लोग रह रहे थे उनके लिए जगह छोड़ देता पर ऐसा हुआ नहीं जिसकी वजह
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से 13 मुल्कों ने यह फैसला मानने से मना कर दिया अब यूएन इस फैसले पर दोबारा विचार करता इस बारे में कुछ सोचता कुछ और फैसला लेता ताकि सबकी सहमति बन सके उससे पहले ही 1948 में डेविड बेन गुरियन जो कि उस वक्त
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इजराइली कम्युनिटी के बहुत बड़े लीडर थे ऐलान कर देते हैं क्या से इजराइल एक अलग देश है य प्रो इपें [संगीत] स्टलर प्रोम पलेन स्टेट ऑ पेन गुरियन के इस डिक्लेरेशन के बाद थर हजल का व ख्वाब कि अपना देश अपनी भाषा
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होनी चाहिए पूरा हो जाता है सादा लफ्जों में कहे तो जानिस मूवमेंट कामयाब हो जाता है बाकी के देश बन गुरियन की इस हरकत पर कुछ कहते कुछ करते कोई एक्शन लेते उससे पहले ही यूएसए और यूएसएसआर इजराइल को
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एक जुश स्टेट घोषित कर देते हैं यूएसए और यूएसएसआर के इस सपोर्ट से हुआ यह कि पलेस्टाइन के अंदर जो रिफ्यूजी जूस थे अब उनकी पहचान इजराइली के नाम से होने लगी और जहां जो पहले से बसे हुए लोग थे उन्हें
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पलेटी नियन कहा जाने लगा जो किराए पर आए थे जो रिफ्यूजी आए थे अब उनको एक अलग देश मिल गया था और उस देश में जाहिर सी बात है पलेस्टाइन के कुछ लोगों का हिस्सा भी था जहां पहले से लोग रह रहे थे तो वो इन
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लोगों प निकालने लग जाते हैं कि भाई यह जगह खाली करो क्योंकि यूएन के प्लान के अकॉर्डिंग यह हिस्सा हमारा है और ठीक इस दिन से एक ऐसी सिविल वॉर शुरू हुई जो पूरे एक साल [प्रशंसा] [संगीत] चली पूरे पलेस्टाइन में दंगे शुरू हो गए
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जूज पलेस्टाइन में बसे लोगों को उनके इलाकों से निकालने लगे घर लूटे गए कई हजार जाने चली गई और देखते ही देखते एक एक ही साल में करीब 75 लाख पैलेडियंस को उनके घर उनके इलाकों से बेदखल कर दिया गया 500
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गांव खाली कराए गए पर रिफ्यूजी जूज यानी इजराइली यहीं नहीं रुके यूएन ने उन्हें जितना एरिया दिया था ये उससे कहीं ज्यादा कैप्चर कर लेते हैं ऊपर का यह पूरा इलाका और यह कोने में सिमटा हुआ आधे से ज्यादा
Speaker A
इलाका भी जू अपने कब्जे में कर लेते हैं बस ये छोटा सा टुकड़ा रह जाता है जिसको हम कहते हैं गाजा पट्टी 1948 के खत्म होते-होते हा यह हो गया कि यह ब्लू कलर का पूरा एरिया इजराइल ने अपने कब्जे में कर
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लिया जो करीब 78 पर एरिया है इस पूरे इलाके का ये ग्रीन वाला एरिया कहलाता है वेस्ट बैंक जो कि जॉर्डन के कंट्रोल में चला गया जहां आप यह स्टार देख रहे हैं वो एरिया है जेरूसलम इसको कंट्रोल तो करना था
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यूएन को पर यह आधा वेस्ट बैंक के पास चला गया और आधा पलेटी नियस के पास रही यह गाजा पट्टी ये इजिप्ट के हिस्से में चली गई शायद आपको जानकर ये ताज्जुब होगा कि तंतुरा नाम की इस डॉक्यूमेंट्री में कुछ
Speaker A
इराली सोल्जर्स के इंटरव्यू लिए गए जो इस वक्त यहां मौजूद थे 1947 1948 के दौर में इन्होंने बताया कि इजराइल के पहले प्राइम मिनिस्टर यानी डेविड बिन गुरियन इनको आर्डर देते थे कि इन पलेटी नियन को इनके घरों से
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निकालो और जब यह घरों से निकल जाए चले जाए भाग जाए तो फिर इनके घरों के ऊपर ट्रैक्टर चला दो ताकि वहां कोई रहता भी था इसका नामो निशान बाकी भी तंतुरा नाम की डॉक्यूमेंट्री में अमित सर कोहिन नाम के एक आदमी का इंटरव्यू लिया
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जाता है उसे पूछा जाता है कि आपने कितने पले को मारा मुस्कुरा कर कहता है कि मेरे पास ऑटोमेटिक बंदूक थी मैंने गिना नहीं चलाता चला गयाला [संगीत] और इस तरह पलेस्टाइन और इजराइल का फॉर्मेशन हुआ एक देश दो देशों में बट गया
Speaker A
आज पलेस्टाइन का यह हाल है कि इस छोटे से इलाके में अब तक करीब 14 लाख लोग बेघर हो चुके हैं 9500 लोगों ने एयर स्ट्राइक्स में अपनी जाने खो दी हैं पूरा गाजा एक बद हवासी के आलम में है कोई मां अपने बच्चे
Speaker A
को मलवे में ढूंढ रही है तो कोई बच्चा अपने मां-बाप को खो चुका है कौन बचा कौन जिया किसी को होश नहीं रात के बाद अगली सुबह होगी भी या नहीं इन लोगों को नहीं पता आज ये जो हो रहा है ये कुछ नया नहीं
Speaker A
है हमस का हमला इजराइल के उस जुल्म का जवाब है जो पिछले कई सालों से करता चला आ रहा है ये मैं नहीं कह रहा ये खुद यूएन के सेक्रेटरी जनरल ने कहा है इट इज इंपोर्टेंट टू आल्सो रिकॉग्नाइज द अटैक्स
Speaker A
बाय आमाज ड नॉट हैपन इन अ वकम द पलेस्ट नियन पीपल हैव बीन सब्जेक्टेड टू 56 इयर्स ऑफ सफोकेटिंग ऑक्यूपेशन उम्मीद करता हूं वीडियो पसंद आई होगी बात समझ आई होगी यह वीडियो पहला पार्ट है इजराइल और पलेस्टाइन के कॉन्फ्लेट का
Speaker A
इसमें हमने जाना कि कैसे 1948 तक आते-आते पलेस्टाइन जो एक मुल्क था वो दो में बट गया वीडियो का अगला पार्ट मैं जल्दी ही अपलोड करूंगा जिसमें हम जानेंगे कि कैसे धीरे-धीरे धीरे धीरे इजराइल ने अपने सेटलर्स को वहां भेजना शुरू कर दिया पहला
Speaker A
नकबा दूसरा नकबा ओस्लो अकॉर्ड क्या है यह सब जानेंगे वीडियो के अगले पार्ट में हो सकता है पर हमारे पासपास क्या हो रहा है यह जानना जरूरी है जो मसले खड़े हो रहे हैं जो आवाजें उठाई जा रही हैं जो शोर मच रहा है
Speaker A
उसके पीछे की हिस्ट्री क्या है वह असल में मसला शुरू कैसे हुआ इसको जानना बहुत जरूरी है ताकि सही आवाज उठाई जा सके ताकि सही फैसला लिया जा सके ताकि सही साइट चुनी जा सके उम्मीद करता हूं आपने अब तक अपनी राय
Speaker A
बना ली होगी वीडियो कैसी लगी मुझे कमेंट में जरूर बताइएगा आदाब [प्रशंसा]
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