सुल्तान सलाहुद्दीन अय्यूबी की फस्तीन की फतह और मुसलमानों के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाएं।
Key Takeaways
- सलाहुद्दीन अय्यूबी ने फस्तीन को दोबारा मुसलमानों के कब्जे में लाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- जेरूसलम का इस्लामिक इतिहास गहरा और तीन बड़ी धर्मों के लिए पवित्र है।
- मुसलमानों के बीच सिविल वॉर ने फस्तीन को कमजोर किया जिससे क्रूसेडर्स को फायदा मिला।
- डोम ऑफ द रॉक जैसी इमारतें इस्लामी स्थापत्य कला की पहचान हैं।
- सलाहुद्दीन की जीत ने मुसलमानों में एकता और शांति का संदेश दिया।
What the video covers
- दमिश्क से मक्का हज के लिए मुसलमानों के काफिले पर जालिम बादशाह का हमला और सलाहुद्दीन अय्यूबी की प्रतिक्रिया।
- फस्तीन और जेरूसलम का इस्लामिक इतिहास, पैगंबरों का संबंध और मुसलमानों द्वारा जेरूसलम की पहली शांति से फतह।
- खलीफा उमर रज़ अल्लाह अनहु द्वारा जेरूसलम की शांति से फतह और मस्जिद उल अक्सा की स्थापना।
- बनू उमैया खानदान का उदय, मुआविया और यजीद के दौर की सिविल वॉर और कर्बला का दर्दनाक इतिहास।
- अब्दुल मलिक द्वारा डोम ऑफ द रॉक का निर्माण और इस्लामी स्थापत्य कला में उसका महत्व।
- अब्बासी खिलाफत का उदय और पतन, फस्तीन पर मुसलमानों के दो बड़े साम्राज्यों के बीच संघर्ष।
- सलजुक और फातिमिस के बीच फस्तीन के लिए जंग और जेरूसलम की तबाही।
- मुसलमानों के अंदर चल रही सिविल वॉर और यूरोप के शक्तिशाली बादशाह की नजरें।
- सलाहुद्दीन अय्यूबी की फस्तीन की मुहिम और क्रूसेडर्स के खिलाफ लड़ाई।
- सलाहुद्दीन की जीत के बाद जेरूसलम में शांति और मुसलमानों के लिए एक नया युग।
Chapters
- 00:00काफिले पर हमला और सलाहुद्दीन की प्रतिक्रिया
- 04:06जेरूसलम की पहली शांति और खलीफा उमर का योगदान
- 07:36बनू उमैया का उदय और सिविल वॉर
- 11:15सलजुक और फातिमिस की जंग और जेरूसलम की तबाही
- 14:51सलाहुद्दीन अय्यूबी की फस्तीन मुहिम
- 20:08सलाहुद्दीन की जीत और जेरूसलम में शांति
- 23:40क्रूसेडर्स के खिलाफ लड़ाई और मुसलमानों की एकता
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Speaker A
आज से तकरीबन 1000 साल पहले एक बहुत बड़ा काफिला मुसलमानों की कैपिटल दमश्क से हज करने के लिए मक्का की तरफ जा रहा था।
Speaker A
[गाना गाने की आवाज़] लेकिन जैसे ही ये काफिला फस्तीन पहुंचा इस काफिले पर [हंसी]
Speaker A
एक बहुत ही जालिम बादशाह ने हमला कर दिया। काफिले का सारा माल लूट लिया और काफिले के लोगों को टॉर्चर करने लगा। यहां तक कि उसने औरतों को भी नहीं छोड़ा। [चीखने की आवाज़] लेकिन ये इस आदमी की बहुत बड़ी गलती थी।
Speaker A
[हंसी] क्योंकि इस काफिले के अंदर पूरे मुसलमान दुनिया की सबसे पावरफुल औरत भी थी। [संगीत] एक आदमी यह खबर लेकर वापस दमशक पहुंचा और दमशक पहुंचते ही वो सीधा बादशाह के दरबार पहुंचा और उसने बादशाह को बताया कि किस
Speaker A
तरह इस जालिम आदमी ने आपकी बहन और मुसलमानों पर जुल्म किए हैं। इस औरत का भाई कोई आम आदमी नहीं था। बल्कि वो पूरी मुसलमान दुनिया का सबसे बड़ा बादशाह था। और उसका नाम था सुल्तान सलाहाउद्दीन अयूबी। अल्लाहहु अकबर।
Speaker A
और यहां से सलाहाउद्दीन अयूबी ने फस्तीन को दोबारा फतह करने की तैयारी शुरू की। और कहा जाता है हमले से पहले सलाहाउद्दीन फस्तीन की हिस्ट्री को गौर से पढ़ने लगा। पर वेट फस्तीन को तो इससे पहले ही हजरत
Speaker A
उमर ने फतह कर लिया था। तो फिर आखिर फिलस्तीन मुसलमानों के हाथ से निकला कैसे?
Speaker A
फस्तीन जेरूसलम का इस्लाम के साथ बहुत ही गहरा रिश्ता है। क्योंकि [संगीत] फलस्तीन वो इलाका है जहां अल्लाह ने अपने सबसे ज्यादा पैगंबर भेजे। [संगीत] इब्राहिम अल सलाम, दाऊद अल सलाम और ईसा अल सलाम जैसे पैगंबर और फस्तीन के अंदर जेरूसलम वो शहर
Speaker A
है। जिसे दुनिया के तीन बड़े रिलीजंस अपनी होली सिटी समझते हैं। बल्कि आज से 1400 साल पहले जब रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मक्का में थे। अल्लाह ने उन्हें एक ही रात में मक्का से जेरूसलम पहुंचाया। [संगीत] जहां उन्होंने बैतुल मकदस में खड़े होकर
Speaker A
अपने से पहले आने वाले सारे पैगंबरों की इमामत की। जिसके बाद यहीं से आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक ही रात में आसमानों का सफर किया। [संगीत] लेकिन जब तक आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दुनिया में थे मुसलमान कभी भी जेरूसलम तक
Speaker A
नहीं पहुंच सके। [हौसला बढ़ाने की आवाज़] उस जमाने के फस्तीन पर [संगीत] एक बहुत बड़ी सुपर पावर का राज था। द ग्रेट रोमन एंपायर। लेकिन आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी जिंदगी में मुसलमानों को पहले यह बता दिया
Speaker A
था कि एक दिन मुसलमान पैगंबरों के शहर [संगीत] जेसलम को जरूर फतह करेंगे। और बिल्कुल ऐसा ही हुआ। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बाद पहले खलीफा अबू बकर रज़ अल्लाह अनहु ने रोमन एंपायर पर हमला कर दिया। जिसके बाद दूसरे खलीफा उमर बिन खत्ताब रज़
Speaker A
अल्लाह अनो ने रोमन और परर्जियन एंपायर को क्रश कर दिया और मुसलमानों की फौजे सीधा फुल स्पीड जेरूसलम के पास पहुंची और जेरूसलम को हर तरफ से घेर लिया। यह देखकर जेरूसलम का लीडर रोमन एंपायर के बादशाह से मदद की भीख [संगीत] मांगने लगा।
Speaker A
लेकिन हजरत उमर ने रोमन एंपायर की कमर ऐसे तोड़ी थी कि रोमन एंपायर के बादशाह ने जेरूसलम की कोई मदद नहीं की। ये देखकर जेरूसलम के लीडर ने ऐलान किया कि अगर खलीफा उमर खुद मेरे पास आएगा तो मैं जेरूसलम बगैर किसी
Speaker A
जंग के मुसलमानों के सामने सरेंडर कर दूंगा। जब हजरत उमर को मदीना में इस बात का पता चला, उन्होंने फौरन मदीना में हजरत अली को अपनी जगह मुसलमानों का लीडर बनाया और खुद जेरूसलम की तरफ रवाना हुए। जेरूसलम के लीडर ने हजरत उमर की सादगी को
Speaker A
देखकर जेरूसलम उनके सामने सरेंडर कर दिया। इस तरह खलीफा उमर रज़ अल्लाह अनो मुसलमानों को लेकर पहली बार एक कतरा भी खून का बहाए बगैर पैगंबरों के शहर जेरूसलम एंटर हुए। जिसके बाद हजरत उमर जेरूसलम के अंदर बैतुल
Speaker A
मकदस पहुंचे। बैतुल मकदस वही जगह थी जहां इससे हजारों साल पहले सुलेमान अली सलाम ने एक बहुत बड़ी मस्जिद बनाई थी। जिसे उसके बाद दो दफा बहुत ही बुरी तरह तबाह कर दिया गया था। और अब जब खलीफा उमर वहां पहुंचे
Speaker A
वहां कोई भी मस्जिद नहीं थी बल्कि उसे एक कचरे का ढेर बनाया हुआ था। इसीलिए सबसे पहले हजरत उमर ने ये जगह साफ कराई और फिर यहां लकड़ियों से एक छोटी सी सिंपल मस्जिद बनाई। हजरत बिलाल रजला अनू ने अजान दी और
Speaker A
मुसलमानों ने यहां पहली बार नमाज पढ़ी। हजरत उमर की ये छोटी सी मस्जिद आज एक बहुत ग्रैंड मस्जिद है जिसे मस्जिद उल अक्सा कहा जाता है। ला इलाहा इल्ल्लाह [संगीत] हजरत उमर के बाद मुसलमानों के नए खलीफा हजरत उस्मान बने जिन्होंने [संगीत]
Speaker A
जेरूसलम शहर को और भी डेवलप किया। यहां बड़े-बड़े कुएं बनाए और नई सड़कें बनाई। [संगीत] और हजरत उस्मान के दौर में फस्तीन और इस सारे इलाके के गवर्नर का नाम मुआविया रज अल्लाह अनू था। हजरत [संगीत] उस्मान के बाद मदीना के सारे
Speaker A
मुसलमानों ने अपना नया खलीफा हजरत अली रज़ अल्लाह अनो को बनाया। [संगीत] हजरत अली की हुकूमत पूरे खिलाफत में फैल गई। सिवाय एक इलाके के शाम जिसमें फस्तीन भी शामिल था। क्योंकि यहां के गवर्नर मुआविया रज़ अल्लाह अनो ने खलीफा अली रज़
Speaker A
अल्लाह अनहु के हाथ पर बैत नहीं की थी। और यहां से इस्लाम की पहली सिविल शुरू हुई जिसके बाद हजरत अली की पूरी खिलाफत में फस्तीन उनके कंट्रोल से बाहर रहा। हजरत अली के बाद मुसलमानों ने अपना नया खलीफा
Speaker A
हजरत हसन रज़ अल्लाह अनो को बनाया। लेकिन जैसे ही हजरत हसन यहां खलीफा बने वहां मुआविया रज़ अल्लाह अनो ने अपनी खिलाफत की बैत लेना शुरू की। और उन्होंने अपनी इस खिलाफत की बैत कहीं और नहीं बल्कि जेरूसलम
Speaker A
शहर के अंदर ली। [संगीत] इसके कुछ ही अरसे बाद हजरत हसन रज़ अल्लाह अनो ने आखिर मुसलमानों की इस सिविल वॉर को खत्म करने के लिए अपनी खिलाफत छोड़ दी। जिसके बाद हजरत मुआविया पूरी दुनिया के मुसलमानों के
Speaker A
नए लीडर बने। [संगीत] और मुसलमानों में एक खानदान की हुकूमत शुरू हुई। बनू उमैया। हजरत मुआविया के बाद उनका बेटा यजीद बादशाह [संगीत] बना। और यजीद के बादशाह बनते ही मुसलमानों में एक बार फिर एक बहुत बड़ी सिविल वॉर शुरू
Speaker A
हुई। और इसी यजीद के दौर में इस्लाम का सबसे दर्दनाक वाकया पेश आया। कर्बला जिसमें यजीद की फौजों ने रसूल्लाह सल्ला अलैहि वसल्लम के खानदान अहले बैत के बहुत सारे मेंबर्स को बेरहमी से शहीद कर दिया। कर्बला के बाद मुसलमानों के अंदर यह सिविल
Speaker A
वॉर इसी तरह चलती रही और यह एक बहुत बड़ी कंफ्यूजन थी कि आखिर यह सिविल वॉर कौन जीतेगा?
Speaker A
इसके कुछ ही अरसे बाद एक आदमी आखिर इस पूरी सिविल वॉर को जीत गया। बनू उमैया खानदान का बादशाह अब्दुल मलिक। आज बहुत सारे लोग इस अब्दुल मलिक को नहीं जानते। लेकिन अब्दुल मलिक उस जमाने में एक बहुत ही ताकतवर बादशाह था जिसने बादशाह
Speaker A
बनने के बाद जेरूसलम के शहर में एक बहुत ही फेमस बिल्डिंग बनाई जो आज तक अपनी जगह पर खड़ी है और यह आज तक दुनिया की सबसे मशहूर बिल्डिंग्स में से एक है द डोम ऑफ द रॉक। यह बिल्डिंग डोम ऑफ द रॉक पहली इस्लामिक
Speaker A
बिल्डिंग थी [संगीत] जिसके ऊपर ऐसा गोल गुंबद डोम बनाया गया था। और यहीं से इसी बिल्डिंग से मुसलमानों में एक ऐसा ट्रेंड [संगीत] शुरू हुआ जो आज तक चला आ रहा है कि ऑलमोस्ट सारी मस्जिदों पर इसी तरह
Speaker A
डोम्स बनाए जाते हैं। कहा जाता है अब्दुल मलिक ने यह बिल्डिंग बनाकर इसके अंदर कुछ कुरान की आयतें लिखी और उसके साथ-साथ इस बिल्डिंग के अंदर बड़ा सा अपना नाम लिखवाया। [संगीत] जिसके बाद अब्दुल मलिक ने हजरत उमर की
Speaker A
बनाई हुई मस्जिद अक्सा को एक बहुत बड़ी ग्रैंड मस्जिद बनाई। फस्तीन इसके बाद आने वाले कई सालों तक इसी तरह बनू उमैया खानदान के कंट्रोल में रहा। लेकिन आखिर उमैया खानदान को चैलेंज करने के लिए एक नया खानदान खड़ा हुआ। जिन्होंने तेजी से
Speaker A
पूरी उमैया खिलाफत को खत्म कर दिया। और इसी तरह मुसलमानों में एक नई खिलाफत बनी। अब्बासी खिलाफत। जिसके बाद आने वाले कई सालों तक फस्तीन अब्बासियों के कंट्रोल में रहा। लेकिन जैसे कि हमेशा होता है आहिस्ता-आहिस्ता [संगीत] अब्बासी खिलाफत
Speaker A
की ताकत टूटने लगी और अब्बासी खिलाफत का कंट्रोल कमजोर होने लगा। इसीलिए आहिस्ताआहिस्ता अब्बासी खिलाफत टूटने लगी और आखिर मुसलमानों की ये खिलाफत कई छोटे-छोटे टुकड़ों में बट गई। अब यहां से कहानी थोड़ी मुश्किल होने वाली है। मुसलमान अब जब बहुत सारे छोटे हिस्सों
Speaker A
में बट चुके थे तो इस टूटे हुए खिलाफत में भी मुसलमानों की दो एंपायर्स ऐसी थी जिनके पास सबसे ज्यादा ताकत थी। [संगीत] और इन दो मुसलमान एंपायर्स का आपस में कंपटीशन चल रहा था कि इन दोनों में से कौन
Speaker A
फस्तीन पर कब्जा करेगा। तो अब मुसलमान फस्तीन को फतह करने के लिए आपस में एक दूसरे के साथ ही लड़ रहे थे। इसीलिए आने वाले कई सालों तक फस्तीन कभी एक एंपायर के पास होता था और कभी दूसरी
Speaker A
एंपायर के पास। [संगीत] आखिर एक साल इन दो बड़ी एंपायर्स सलजुक और फातिमिस की फस्तीन के लिए एक बहुत बड़ी जंग हुई। [चीखने की आवाज़] यह जंग इतनी खतरनाक है। कि इसकी वजह से पैगंबरों का शहर जेरूसलम जिसे इससे पहले मुसलमान खलीफाओं ने बहुत
Speaker A
ज्यादा डेवलप किया था। अब इन मुसलमानों की ही जंगों की वजह से तबाह हो गया। इसकी दीवारें और टावर्स बहुत ही कमजोर हो गए थे। अब जब मुसलमान आपस में ही एक दूसरे के साथ इतनी बड़ी-बड़ी जंगे लड़ रहे थे और
Speaker A
लड़-लड़ कर फस्तीन को बहुत ही कमजोर कर दिया था। मुसलमानों को बिल्कुल पता नहीं था कि उनकी इन्हीं लड़ाईयों की वजह से आगे उनके साथ क्या होने वाला है। [संगीत] जब मुसलमान आपस में लड़ रहे थे। यहां से बहुत दूर यूरोप का सबसे ताकतवर
Speaker A
आदमी मुसलमानों की इन जंगों को बहुत ही गौर से देख रहा था। यह वो आदमी था जिसके सामने यूरोप के बड़े-बड़े बादशाह अपना सर झुकाते थे। और यूरोप का हर आम आदमी इसे ही अपना लीडर मानता था। और इसका न
Speaker A
की वजह से आने वाले 200 साल तक मुसलमानों और क्रिश्चियंस के दरमियान तारीख की सबसे बड़ी जंग जो आज तक पूरी दुनिया को याद है और जिनका नाम था द क्रूसेट होप अर्बन ने अपनी स्पीच शुरू की। ऐ लोगों सुनो
Speaker A
आज मैं यह ऐलान करता हूं यूरोप का जो भी क्रिश्चियन इस नई होली जंग में हमारा साथ देगा उसकी जिंदगी के पिछले सारे गुनाह माफ कर दिए जाएंगे और वो सीधा जन्नत में जाएगा पू की इन बातों ने क्रिश्चियंस के अंदर एक
Speaker A
नई आग भड़काई थी और पू की इन बातों से क्रिश्चियंस मुसलमानों के साथ एक बहुत बड़ी जंग के लिए तैयार हुए [चीखने की आवाज़] इस स्पीच के बाद पोप ने अपने खास लोगों को पूरे यूरोप में फैला दिया।
Speaker A
ये लोग हर जगह जाकर यूरोप के आम लोगों को मुसलमानों के खिलाफ जंग के लिए भड़काते रहते थे। जिसमें ये लोग बहुत सारे झूठ भी बोलते थे कि मुसलमान फिलस्तीन में क्रिश्चियंस पर बहुत जुल्म करते हैं और क्रिश्चियंस के सबसे होली चर्च में
Speaker A
मुसलमानों ने घोड़े और कुत्ते बांधे हुए हैं। आखिर इन बातों से आहिस्ता-आहिस्ता यूरोप [संगीत] के क्रिश्चियंस मुसलमानों से जंग के लिए तैयार होने लगे। ये देखकर पोप ने पूरे यूरोप में ऐलान किया कि अगले साल हम सब [संगीत] मिलकर मुसलमानों के
Speaker A
फस्तीन पर हमला करेंगे। और उसे छीन लेंगे। अब जब पोप यूरोप में इस फौज को तैयार कर रहा था, अचानक यूरोप के छोटे से गांव से एक बूढ़ा सा गरीब और फकीर आदमी अपना गधा लेकर अकेले फिलस्तीन की तरफ रवाना हुआ।
Speaker A
[संगीत] रास्ते में यह फकीर हर गांव में खड़े होकर जोर-जोर से लोगों से कहता था कि हम अगले साल नहीं बल्कि आज ही फस्तीन फतह करेंगे। चलो। मेरे साथ। इस फकीर की बातें सुनकर लोग बहुत मोटिवेट हुए और आहिस्ता-आहिस्ता इसके साथ इस सफर
Speaker A
में जुड़ने लगे। और आखिर इस बुड्ढे के साथ इतने लोग जुड़ गए कि इसके और इसके गधे के पीछे 20,000 की फौज चल रही थी। लेकिन यह कोई फौज फौज नहीं थी बल्कि सिर्फ आम लोग थे। जो अपने घरों से कुल्हाड़ियां, हथोड़े
Speaker A
और बेलचे लेकर मुसलमानों से पस्तीन छीनने जा रहे थे। तो ऑफकोर्स जैसे ही ये लोग मुसलमानों के इलाकों में एंटर हुए थोड़ी ही देर में इन्हें समझ आ गई कि यहां आकर इन्होंने बहुत बड़ी गलती की है। क्योंकि अब तक इनका ख्याल था कि
Speaker A
मुसलमान दुनिया भी यूरोप की तरह एक गरीब इलाका है। लेकिन यहां पहुंचते ही इन्हें समझ आ गई कि ऐसा बिल्कुल नहीं। मुसलमान उस जमाने में दुनिया के सबसे बड़े सुपर पावर थे। [चीखने की आवाज़] और मुसलमानों की टेक्नोलॉजी दुनिया की
Speaker A
सबसे टॉप पर थी। जिस तरह आज यूरोप के शहरों को देखकर मुसलमान हैरान होते हैं। उसी तरह ये लोग उस जमाने में यूरोप से आकर मुसलमानों के शहरों को देखकर हैरान हुए। तो अब अपने बेलचे और कुल्हाड़ियां लेकर जैसे ये लोग
Speaker A
थोड़ा आगे बढ़े अचानक मुसलमानों की ऑर्गेनाइज्ड फौज ने इन्हें हर तरफ से घेर लिया। और कुछ ही घंटों में इस 20,000 की फौज को खत्म कर दिया। मुसलमानों ने इनको इतनी आसानी से मारा था कि यह खबर पूरे यूरोप में फैल गई। इसीलिए
Speaker A
अगले साल पोप ने ऐसी बेलचे और कुल्हाड़ियों वाली फौज नहीं बल्कि एक बहुत बड़ी डेढ़ लाख लोगों की ऑर्गेनाइज्ड फौज बनाई। मुसलमानों में इतनी ताकत नहीं थी कि वो एक ही टाइम में इतनी बड़ी फौज से लड़ सके।
Speaker A
क्योंकि अब मुसलमान वो पुरानी एक खिलाफत नहीं थी बल्कि बहुत छोटे-छोटे हिस्सों में टूट चुके थे। इसीलिए यह फौज यूरोप से रवाना हुई और आहिस्ता-आहिस्ता मुसलमानों को मारते हुए फस्तीन की तरफ बढ़ती गई। और तेजी से फिलस्तीन के ये [संगीत] सारे
Speaker A
इलाके फतह कर लिए। और आखिर मार्च करते-करते यह फौज पैगंबरों के शहर जेसलम पहुंची और उसे हर तरफ से घेर लिया। जेरूसलम से पहले ही मुसलमानों की आपस की लड़ाईयों की वजह से इतना कमजोर हो चुका था कि अब मुसलमान इसे बचा नहीं सके। और कुछ
Speaker A
ही देर में जैसे ही यह फौज एंटर हुई उन्होंने सीधा सबसे पहले एक मैसेंजर यूरोप अपने पोप की तरफ भेजा। कहा जाता है कई दिन सफर करके जैसे ही यह मैसेंजर अपने पोप [संगीत] के पास पहुंचा। इससे कुछ ही देर
Speaker A
पहले पोप मर चुका था। मतलब पोप [संगीत] अर्बन ने कभी अपना ख्वाब पूरा होते हुए नहीं देखा। अब तक सबको लग रहा था कि क्रिश्चियंस की यह फौज एक होली फौज है जो अपने लिए नहीं बल्कि अपने खुदा के लिए लड़
Speaker A
रही है। लेकिन यहां पर सबको समझ आने लगी कि यह क्रूसेडर्स कोई होली फौज नहीं बल्कि एक टेररिस्ट ऑर्गेनाइजेशन है। क्योंकि कहा जाता है जेरूसलम पर कब्जे के बाद क्रूसेडर्स ने सिर्फ 10 दिन के अंदर-अंदर 1 लाख मुसलमानों को शहीद कर दिया।
Speaker A
[चीखने की आवाज़] जिसमें औरतें, बच्चे और बड़े-बड़े स्कॉलर्स भी शामिल थे। कहा जाता है मस्जिद अक्सा और उसके आसपास मुसलमानों का इतना खून बह रहा था कि अगर कोई इस खून में खड़ा हो जाए तो यह खून उसके घुटनों तक पहुंचता था। फिलस्तीन के
Speaker A
यहूदी भी जो अब तक मुसलमानों के अंडर बहुत अच्छी जिंदगी गुजार रहे थे। इन क्रूसेडर्स ने उन्हें भी नहीं छोड़ा और जेरूसलम के यहूदियों को भी मारने लगे। कहा जाता है इनसे जान बचाकर यहूदियों के औरतें और बच्चे अपने टेंपल में छुप गए और दरवाजे
Speaker A
बंद कर दिए। लेकिन ये देखकर क्रूसेडर्स ने इन्हें निकालने के बजाय बाहर से पूरे टेंपल को ही आग लगा दी। और सारे यहूदी जलकर राख हो गए। [चीखने की आवाज़] अब जब मुसलमान और यहूदी मर चुके थे तो
Speaker A
क्रुसेडर्स के ये सारे जुल्म खुद अपने क्रिश्चियंस ने ही लिखे हैं। एक क्रूसेडर खुद कहता है कि उस दिन हमने इतने मुसलमानों को मारा था कि मुसलमानों के खून से हमारे जिस्म लाल हो चुके थे। और फिर इसी तरह खून से भरे हुए हम अपने
Speaker A
चर्च गए। और वहां हमने अपने खुदा से कहा कि आज हमने मुसलमानों से अपना बदला पूरा कर दिया है। इस तरह वो जेरूसलम जिसे इससे 400 साल पहले खलीफा उमर बिन खत्ताब रज़ अल्लाह अनो ने एक कतरा खून का बहाए बगैर फतह किया था। आज
Speaker A
400 साल बाद इन क्रिश्चियंस ने लाखों लोगों को मारकर उसे मुसलमानों से छीन लिया। [संगीत] फस्तीन इस तरह आसानी से छीन जाना मुसलमानों के लिए बहुत ही शर्म की बात थी। लेकिन इस दौर में फिलस्तीन का जाना लाजमी
Speaker A
था ताकि मुसलमानों को पता चले कि उनकी आपस की जंगों की वजह से आज उनकी दुनिया में कोई औकात नहीं रही। क्योंकि फिलस्तीन के जाते ही आहिस्ताआहिस्ता दुनिया के हर मुसलमान को समझ आने लगी कि हमारी आपस की
Speaker A
जंगों की वजह से आज हम इस हाल तक पहुंचे हैं और यहां से अब मुसलमानों की बारी थी कि वो आपस की दुश्मनियां तोड़कर एक हो जाए और दोबारा फस्तीन पर हमला करके इसे फतह करू अकबर [चीखने की आवाज़]
Speaker A
और ऐसा ही हुआ। यहां से मुसलमानों के सबसे बड़े लीडर्स में से एक सलाहाउद्दीन अयूबी का वक्त शुरू होता है। लेकिन [संगीत] वेट सलाहाउद्दीन वो अकेला आदमी नहीं था जिसने जेरूसलम को दोबारा फतह करने की कोशिश की थी। बल्कि सलाहाउद्दीन
Speaker A
अयूबी से पहले भी कुछ बादशाह ऐसे थे जो फिलस्तीन के लिए इन क्रुसेडर्स से लड़े थे। यहां से कहानी में एक बहुत बड़ा ट्विस्ट आता है। जैसे ही क्रुसेडर्स ने जेरूसलम पर कब्जा किया उसके बाद जो भी मुसलमान लीडर
Speaker A
फिलस्तीन के लिए आवाज उठाता था। अचानक वो गायब हो जाता था या उसे मार दिया जाता था। इसीलिए अचानक मुसलमान दुनिया में बड़े-बड़े जनरल्स और लीडर्स बिल्कुल खामोशी से कत्ल होने लगे। किसी को समझ नहीं आ रही थी कि आखिर यह हो
Speaker A
क्या रहा है और ये कर कौन रहा है। लेकिन चाहे जितना भी बड़ा आदमी हो उसे आसानी से मार दिया जाता था। तो अब क्वेश्चन ये है आखिर ये लोग थे कौन?
Speaker A
[संगीत] इन लोगों को जाना जाता था इनके बहुत ही यूनिक नाम से अलहाशाश। जिन्हें इंग्लिश में कहा जाता था द असेस। [संगीत] ये ऐसे ट्रेंड वॉरियर्स थे कि इनके लिए कहीं भी किसी को भी मारना कोई मसला नहीं
Speaker A
था। [संगीत] चाहे वो जितना भी बड़ा आदमी क्यों ना हो। इन्हें बस अपने लीडर के एक इशारे का इंतजार होता था और इनका यह नाम हशाशीन हशीश से निकला था। जो एक बहुत ही फेमस नशा है। और इन्हें यह इसलिए कहा जाता था
Speaker A
क्योंकि जब भी यह अपने टारगेट पर हमला करते थे उससे पहले इन्होंने बहुत ज्यादा आशीष का नशा किया होता था। और कहा जाता है अपने टारगेट को मारते ही यह सब अपने हेड क्वार्टर में जमा होते थे और फिर वहां एक
Speaker A
बहुत बड़ी हशीश पार्टी होती थी। [संगीत] इन हशाशीन [चीखने की आवाज़] ने मुसलमानों के छोटे जनरल से लेकर खलीफाओं तक को अससनेट किया [संगीत] था और यह अपने टारगेट्स को इतनी बुरी तरह कत्ल करते थे कि एक बार एक मुसलमान शहर में एक औरत
Speaker A
पकड़ी गई और जब उसके घर की तलाशी ली गई तो पता चला कि यह औरत भी हाशाशीन की मेंबर है। क्योंकि इसके बेड के नीचे इस औरत ने एक कुआं बनाया हुआ था और जब इसके बेड को हटाया गया उसके नीचे 40 लाशें पड़ी हुई
Speaker A
थी। यहां तक कि मुसलमानों के शहरों में यह बात मशहूर हो चुकी थी कि जो भी आदमी रात तक अपने घर नहीं पहुंचा तो समझो वो गया। क्योंकि रात के अंधेरे में सारी सड़कों पर सिर्फ हशाशीन का कंट्रोल होता था। और ऐसा
Speaker A
नहीं था कि किसी ने इनको रोकने की कोशिश नहीं की। जब एक मुसलमान बादशाह ने हशाशीन पर हमले की कोशिश की और अगले दिन जब वह अपने कैंप में नींद से उठा उसने देखा कि उसके सर के पास एक कागज और खंजर लगा हुआ
Speaker A
है। [संगीत] जिसमें क्लियरली लिखा हुआ था कि अगर तुम अपनी हरकतों से बाज नहीं आए तो अगली बार यह खंजर तुम्हारी गर्दन पर होगा। अब जब एक तरफ फस्तीन मुसलमानों के हाथ से निकल चुका था। मुसलमान छोटे-छोटे हिस्सों
Speaker A
में टूटे हुए थे और रातों को सड़कों पर हशाशीन का कंट्रोल होता था। अचानक एक दिन एक काफिला मुसलमानों के एक शहर से दूसरे शहर की तरफ जा रहा था। इस काफिले के सरदार को कुछ ही दिन पहले उसके शहर से जबरदस्ती
Speaker A
भगा दिया गया था। और अब जब यह काफिला रस्ते में था इसी सफर के दरमियान इस सरदार का बेटा पैदा हुआ। लेकिन अपने बेटे की पैदाइश पर खुश होने की बजाय यह सरदार इतने गुस्से में था कि उसने कहा यह मेरा बेटा
Speaker A
एक मनहूस बच्चा है। क्योंकि इसके पैदा होते ही हमें अपने शहर से निकाल दिया गया है। बल्कि कहा जाता है सरदार ने एक बार अपने बेटे को मारने का भी सोचा। लेकिन आखिर सरदार को इसके दोस्त ने रोक दिया और
Speaker A
कहा ऐसा ना करें। इस बच्चे की कोई गलती नहीं है और ना ही यह कोई मनहूस बच्चा है। इसे जिंदा रहने दें। क्या पता आगे जाकर यही बच्चा आपकी आंखों की ठंडक बने। और क्या पता यह एक जमाने में एक बहुत बड़ा
Speaker A
बादशाह बने। [संगीत] इस आदमी की बात बिल्कुल सही थी क्योंकि आगे जाकर ऐसा ही हुआ है। यह बच्चा आगे जाकर मुसलमानों का सबसे बड़ा बादशाह बना। और इस बच्चे का नाम था सुल्तान सलाहाउद्दीन अयूबी। [संगीत] इसी तरह यह काफिला आगे बढ़ता रहा और आखिर
Speaker A
एक नए इलाके में एंटर हुआ और इस नए इलाके पर जंगियों का राज था और उसी नई एंपायर में आहिस्ता-आहिस्ता सलाहाउद्दीन बड़ा होता गया। सलाहाउद्दीन जब बड़ा हो रहा था मुसलमान दुनिया कमजोर तो थी लेकिन अब भी दुनिया में इस्लाम का गोल्डन एज चल रहा
Speaker A
था। और मुसलमानों के हर शहर में बड़ी-बड़ी लाइब्रेरीज थी और दुनिया के सबसे बड़े स्कॉलर्स मुसलमान ही थे। सलाहाउद्दीन के लिए सबसे अच्छी बात यह थी कि वो जहां पर बड़ा हो रहा था उस इलाके का बादशाह एक
Speaker A
बहुत ही नेक आदमी था जो अपने लोगों का बहुत ज्यादा ख्याल रखता था और उसका नाम था सुल्तान नूरुद्दीन जंगी। नूरुद्दीन वो बादशाह था जिसने फस्तीन दोबारा फतह करने की सबसे बड़ी कोशिश की थी। इसीलिए नूरुद्दीन ने पूरी दुनिया से मुसलमानों के
Speaker A
बड़े-बड़े स्कॉलर्स को अपने कैपिटल दमक बुलाया था। ताकि यह स्कॉलर्स मुसलमानों की नई जनरेशन को मतलब उस जमाने की जजी को इस्लाम के बड़े-बड़े हीरोस के बारे में [चीखने की आवाज़] सिखा सकें और उनके ज़हनों में यह ख्वाब डाल
Speaker A
सके कि एक दिन वो जेरूसलम को दोबारा फतह करें। अब जब ये स्कॉलर्स नई जनरेशन को पढ़ा रहे थे। इन्हीं बच्चों में से एक सलाहाउद्दीन अयूबी भी था। और यहीं से सलाहाउद्दीन को अपनी जिंदगी का मकसद मिला। यह वही जगह थी जहां सलाहाउद्दीन ने पहली
Speaker A
बार किताबों में रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बारे में पढ़ा कि किस तरह उन्होंने मुश्किलों से निकलकर मदीना की रियासत बनाई थी। किस तरह अबू बकर रज़ अल्लाह अनो हर मुश्किल वक्त में आप सल्ला अलह वसल्लम के साथ खड़े थे। किस तरह
Speaker A
खलीफा उमर बिन खत्ताब रज़ अल्लाह अनो ने उस जमाने की सुपर पावर्स को क्रश कर दिया था। किस तरह उस्मान रज़ अल्लाह अनो ने अपनी सारी दौलत आप सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के कदमों में [संगीत] बिछा दी थी। और किस तरह
Speaker A
मौला अली रज़ अल्लाह इस्लाम की हर जंग में शेर की तरह लड़े थे। [संगीत] और कहा जाता है पढ़ने लिखने के साथ-साथ सलाहाउद्दीन बचपन से ही घोड़े और तलवार चलाने की भी [चीखने की आवाज़] ट्रेनिंग ले रहे थे
Speaker A
और तलवार की ये ट्रेनिंग वो किसी और से नहीं बल्कि अपने ही चाचा शिरकू से लेता था। सलाहाउद्दीन का यह चाचा शेरको कोई आम आदमी नहीं बल्कि उस जमाने के सबसे बड़े बादशाह नूरुद्दीन जंगी का एक बहुत बड़ा और खास
Speaker A
जनरल था। और आखिर जब इसी शहर दमश्क में सलाहाउद्दीन की उम्र 30 साल हुई। बादशाह नूरुद्दीन ने सलाहाउद्दीन के चाचा शिरकू को इजिप्ट फतह करने का हुक्म दिया। लेकिन जाने से पहले शेरकू अपने ही भतीजे सलाहाउद्दीन को भी साथ लेकर गया जिसे उसने
Speaker A
खुद ट्रेन किया था। अब जब सलाहाउद्दीन और उसके चाचा एक बहुत बड़ी फौज लेकर इजिप्ट की तरफ जा रहे थे। [संगीत] यहां पर मसला यह था कि इजिप्ट की फौज बहुत ही बड़ी थी। इसीलिए शिरकों की फौज में कुछ
Speaker A
लोग घबराने लगे। जिसे देखकर सलाहाउद्दीन और शेरकों ने सारे जनरल्स की मीटिंग बुलाई। [संगीत] इस मीटिंग में कुछ जनरल्स बार-बार शेरकू से कह रहे थे कि हमें यह जंग नहीं करनी चाहिए [संगीत] क्योंकि सामने इजिप्ट की फौज हमसे बहुत ज्यादा बड़ी है। इस मीटिंग
Speaker A
में इन जनरल्स की आंखों में ऐसी बेगैरती देखकर सलाहाउद्दीन खड़ा हुआ [संगीत] और अपने चाचा से कहा कि यहां जो कोई भी यह कह रहा है कि उसे जंग नहीं करनी। तो वो वापस जाए और अपने बीवी और बच्चों के साथ घर में
Speaker A
छुप कर बैठे। इस यंग सलाहाउद्दीन के जज्बे को देखकर शिरकों ने अपने जनरल से कहा, आपने सबसे पहले घबराना नहीं है। इसी के साथ यह फौज इजिप्ट की तरफ रवाना हुई और एक बहुत सख्त जंग के बाद आखिर पूरा
Speaker A
इजिप्ट फतह कर लिया। जिसके बाद सलाहाउद्दीन का चाचा पूरे इजिप्ट का गवर्नर बना। लेकिन जैसे ही वो गवर्नर बना, [संगीत] उसके सिर्फ 2 महीने बाद सलाहाउद्दीन का यह चाचा फौत हो गया। और उसके फौत होते ही सारे जनरल्स ने मिलकर
Speaker A
सलाहाउद्दीन अयूबी को सिर्फ 32 साल की उम्र में पूरे इजिप्ट का गवर्नर बना दिया। अब जब सलाहाउद्दीन इजिप्ट में नूरुद्दीन जंगी का गवर्नर बना। इसी के साथ नूरुद्दीन जंगी पूरी इस्लामिक दुनिया का सबसे बड़ा बादशाह बना। और अब वक्त आ चुका था कि
Speaker A
फाइनली नूरुद्दीन अपने ख्वाब को पूरा करने के लिए आगे बढ़े और फस्तीन को दोबारा फतह करें। जिसके बाद कहा जाता है नूरुद्दीन जंगी ने एक बहुत खूबसूरत मेंबर तैयार कराया और सबसे कहा कि जब मैं फिलस्तीन फतह करूंगा
Speaker A
इंशा्लाह मैं खुद यह मिंबर मस्जिद अक्सा के अंदर रखवाऊंगा। तो अब जब नूरुद्दीन हमले की तैयारियां कर ही रहा था, अचानक एक दिन उसकी तबीयत खराब होने लगी और इसके कुछ ही [संगीत] दिन बाद नूरुद्दीन इस दुनिया से चला गया।
Speaker A
[गाना गाने की आवाज़] [संगीत] और वो फिलस्तीन फतह करने का अपना ख्वाब पूरा नहीं कर सका। [संगीत] नूरुद्दीन के जाने के बाद वही हुआ जो खिलाफत राश्ता के बाद मुसलमानों में हमेशा होता है। नूरुद्दीन के बाद उसका बेटा
Speaker A
मुसलमानों का नया बादशाह बना। लेकिन यहां मसला यह था कि नूरुद्दीन के इस बेटे की उम्र सिर्फ और सिर्फ 11 साल थी। जब नूरुद्दीन जैसे बादशाह के बाद यह 11 साल का बच्चा उसके तख्त पर बैठा। यह देखकर
Speaker A
नूरुद्दीन की पूरी एंपायर में सारे गवर्नरों की आपस में लड़ाई शुरू हुई कि कौन इस छोटे से बच्चे को काबू [संगीत] करके इस पूरी एंपायर का बादशाह बनेगा। और एक बार फिर मुसलमान आपस में लड़ने लगे। और आहिस्ता-आहिस्ता यह लड़ाई इतनी बढ़ गई
Speaker A
कि इवन फिलस्तीन के क्रूसेडर्स ने भी एक बार मुसलमानों पर हमले की कोशिश की। अब जब मुसलमानों के हालात इतने खराब थे। यह देखकर नूरुद्दीन की बीवी इस्मत खातून को समझ आई कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो
Speaker A
सुल्तान नूरुद्दीन का फस्तीन को फतह करने का ख्वाब कभी पूरा नहीं हो सकेगा। इसीलिए इस औरत ने हालात को ठीक करने के लिए फौरन एक लेटर लिखा। इस मत खातून [संगीत] की तरफ से मिस्र के गवर्नर सलाहाउद्दीन के नाम।
Speaker A
आपके सुल्तान नूरुद्दीन इस दुनिया से जा चुके हैं और इनके जाने के बाद इनके गवर्नरों ने इनके तख्त के लिए जंग शुरू कर दी हैं। और अगर सही चलता रहा तो नूरुद्दीन का ख्वाब कभी पूरा नहीं हो सकेगा। [संगीत]
Speaker A
तो अब इससे पहले कि यह धोखेबाज लोग इस तख्त पर बैठे। [संगीत] आप फौरन आकर इस सल्तनत और नूरुद्दीन के बेटे को बचाएं। और यह लेटर लिखते ही उसने यह लेटर सीधा इजिप्ट के गवर्नर सलाहाद्दीन [संगीत] के पास भेजा।
Speaker A
अब यहां से बहुत दूर सलाहाउद्दीन इजिप्ट में आराम से बैठा हुआ था और उसे इन हालात का कुछ पता नहीं था। जैसे ही यह लेटर सलाहाउद्दीन के पास पहुंचा और उसने यह लेटर पढ़ा। यह देखकर कहा जाता है
Speaker A
सलाहाउद्दीन को बहुत गुस्सा आया। सलाहाउद्दीन ने फौरन नूरुद्दीन की बीवी की तरफ इस लेटर का जवाब भेजा [संगीत] और कहा नूरुद्दीन की मौत की खबर मेरे लिए किसी तूफान से कम नहीं है। इसी के साथ सलाहाउद्दीन ने कहा कि जिसने
Speaker A
भी नूरुद्दीन के बाद मुसलमानों की इस एंपायर को कमजोर करने की कोशिश की है। मैं वहां खुद आकर [संगीत] एक-एक से बदला लूंगा। इसी के साथ सलाहाउद्दीन अपनी फौज लेकर फुल स्पीड नूरुद्दीन के कैपिटल दमश की तरफ रवाना
Speaker A
हुआ। इससे पहले जो सारे गवर्नर्स आपस में लड़ रहे थे। अब सलाहाउद्दीन के आने की खबर सुनकर सारे गवर्नरों की टांगे कांपने लगी। कुछ कैपिटल छोड़कर भाग गए। कुछ ने हथियार फेंक कर सरेंडर कर दिया। और आखिर जैसे ही
Speaker A
सलाहाउद्दीन दमश की गेट के सामने पहुंचा बगैर किसी भी शोरशराबे के दमशक के लोगों ने सलाहाउद्दीन के लिए गेट्स खोल दिए। सलाहाउद्दीन दमशक एंटर हुआ। [संगीत] और इस तरह सलाहाउद्दीन एक कतरा भी खून का बहाए बगैर। सिर्फ 37 साल की ऐज में पूरी
Speaker A
दुनिया का सबसे ताकतवर बादशाह बना। इस तरह इस पूरे इलाके का कंट्रोल सलाहाउद्दीन अयूबी के हाथ में आया। इवन मक्का और मदीना भी सलाहाउद्दीन के कंट्रोल में था। [संगीत] अब जब यहां सलाहाउद्दीन सुल्तान बना। क्रूसेडर्स ने सलाहाउद्दीन अयूबी के साथ
Speaker A
एक एग्रीमेंट की। [संगीत] कि आने वाले कई सालों तक मुसलमान और क्रिश्चियंस एक दूसरे पर हमला नहीं करेंगे। अब सलाहाउद्दीन चाहता तो ये एग्रीमेंट फाड़ कर जेरूसलम पर इसी वक्त हमला कर सकता था। क्योंकि सलाउद्दीन को अच्छी तरह पता था कि
Speaker A
जेरूसलम क्रिश्चियंस की सबसे होली सिटी है और वो इसे डिफेंड करने के लिए अपने खून के आखिरी कतरे तक लड़ेंगे। [चीखने की आवाज़][कराहने की आवाज़] इसीलिए सलाहाउद्दीन ने यह एग्रीमेंट साइन कर ली और जेरूसलम पर हमले से पहले
Speaker A
सलाहाउद्दीन ने अपना रुख मुसलमानों की तरफ किया कि वो मुसलमानों की आपस की जंगे खत्म करके मुसलमानों को यूनाइट कर सके। जिसके बाद सलाहाउद्दीन की फौजें हर तरफ फैल गई और एक के बाद एक किला फतह करने लगी। अकबर
Speaker A
इसी के साथ सलाहाउद्दीन ने हर तरफ बड़े-बड़े मुसलमान स्कॉलर्स को फैला दिया। ताकि ये स्कॉलर्स जाकर मुसलमानों की यंग जनरेशन को मोटिवेट करें कि वो मुसलमानों की आपस की जंगे छोड़कर फिलस्तीन के बारे में सोचे। जिससे आहिस्ता-आहिस्ता यंग
Speaker A
मुसलमानों के ज़हनों में एक बहुत बड़ा चेंज आने लगा और कहा जाता है आहिस्ताआहिस्ता सलाहाउद्दीन की वजह से मुसलमान दुनिया में एक वक्त ऐसा भी आया कि हर मुसलमान की जुबान पर सिर्फ दो ही वर्ड्स थे जेरूसलम और जंग।
Speaker A
तो अब इस तरह जब सलाहाउद्दीन हर तरफ मुसलमानों को यूनाइट करने की कोशिश कर रहा था। अचानक एक दिन जब सलाहाउद्दीन एक जंग के दौरान अपने कैंप में था। अचानक कैंप के बाहर कुछ आवाजें आई। [संगीत] तीन खतरनाक हशाशीन।
Speaker A
सलाहाउद्दीन की पूरी फौज और उसकी पूरी सिक्योरिटी को चकमा देकर किसी तरह दुनिया के सबसे ताकतवर आदमी सलाहाउद्दीन के कैंप के अंदर घुस गए। एक ने सीधा जाकर सलाहाउद्दीन के सर पर हमला किया। [संगीत] लेकिन सलाहाउद्दीन अपनी हेलमेट की
Speaker A
वजह से बच गया। यह सुनकर सलाहाउद्दीन के गार्ड्स अंदर आए और फिर सलाहाउद्दीन और गार्ड्स ने मिलकर तीनों हशाशीन को मार डाला। कहा [संगीत] जाता है जब तीसरा असेसन जमीन पर अपनी आखिरी सांसे ले रहा था। तब भी अपने आखिरी मोमेंट्स में भी वो अपने
Speaker A
ब्लेड से सलाहाउद्दीन को मारने की कोशिश कर रहा था। जिससे सलाहाउद्दीन के चेहरे पर जख्म भी लगा। यह सब देखकर कहा जाता है सलाहाउद्दीन अपने कैंप में कुछ देर बिल्कुल शौक में बैठा हुआ था और वो हैरान था कि आखिर यह हशाशीन
Speaker A
किस तरह के वैशी और दरिंदे लोग हैं। [संगीत] खैर सलाहाउद्दीन वो वाहिद बंदा था जिसने अब हशाशीन से भी अपनी जान बचा ली थी। [संगीत] यह वाकया सलाहाउद्दीन के लिए बहुत ही शॉकिंग था। इसीलिए सलाहाउद्दीन ने अपनी पूरी सिक्योरिटी बदल दी और इस वाक्य के
Speaker A
बाद अपनी पूरी फौज का रुख इन हशाशीन के हेड क्वार्टर्स की तरफ किया [संगीत] और सलाहाउद्दीन हशाशीन के बड़े-बड़े किलों को गिराने लगा। सलाहाउद्दीन ने हजारों हशाशीन को मार डाला। लेकिन फिर भी सलाहाउद्दीन इन्हें दुनिया से खत्म नहीं कर सका। आखिर इन हशाशीन को
Speaker A
आगे जाकर दुनिया के एक बहुत बड़े बादशाह ने हमेशा के लिए खत्म कर दिया और वो इसलिए क्योंकि ये बादशाह इन हशाशीन से भी ज्यादा वैशी थे और इसका नाम था चंगेज खान। अब आखिर सलाहाउद्दीन के पास इतनी ताकत आ
Speaker A
चुकी थी कि वो बिल्कुल तैयार था कि वो फलस्तीन पर हमला करें और 400 साल बाद फस्तीन को उसी तरह फतह करें जिस तरह खलीफा उमर बिन खत्ताब ने फतह किया था तो अब सलाहाउद्दीन सिर्फ एक बहाने और मौके का इंतजार कर रहा था और आखिर ऐसा
Speaker A
ही हुआ एक बहुत बड़ा काफिला मुसलमानों की कैपिटल दमश्श्श्क से हज करने के लिए मक्का की तरफ जा रहा था। लेकिन जैसे ही ये काफिला फस्तीन पहुंचा इस काफिले पर [हंसी] एक बहुत ही जालिम बादशाह ने हमला कर दिया।
Speaker A
काफिले का सारा माल लूट लिया। और काफिले के लोगों को टॉर्चर करने लगा। [चीखने की आवाज़] यहां तक कि उसने औरतों को भी नहीं छोड़ा। लेकिन ये इस आदमी की बहुत बड़ी गलती थी। [हंसी] क्योंकि इस काफिले के अंदर पूरे मुसलमान
Speaker A
दुनिया की सबसे पावरफुल औरत भी थी। इस जालिम आदमी का नाम रेनाल्ड डिशेटॉन था। [हंसी] एक आदमी यह खबर लेकर वापस दमश्क [संगीत] पहुंचा। और दमशक पहुंचते ही वो सीधा बादशाह के दरबार पहुंचा और उसने बादशाह को बताया कि किस तरह इस जालिम आदमी ने आपकी
Speaker A
बहन और मुसलमानों पर जुल्म किए हैं। यह सुनकर सलाहाउद्दीन को बहुत गुस्सा आया और उसने फौरन रेनाल्ड की तरफ हुकुम भेजा कि वो इसी वक्त इन कैदियों को छोड़ दे। लेकिन रेनाल्ड इतना बेशर्म आदमी था। उसने जवाब क्या भेजा पता है? रेनार्ड ने सलाहाउद्दीन
Speaker A
से कहा जाओ और अपने पैगंबर मोहम्मद से कहो कि वो इन कैदियों को मुझसे छुड़ाए। अब यह बात सुनकर कहा जाता है सलाहाउद्दीन का गुस्सा कंट्रोल से बाहर हो चुका था। [संगीत] और यहीं पर सलाहाउद्दीन ने कसम खाई कि इस
Speaker A
रेनाल्ड का सर मैं अपने हाथों से काटूंगा। इसी के साथ सलाहाउद्दीन ने अपनी पूरी एंपायर में खबर भेजी और हुक्म दिया [संगीत] कि पूरी फौज जंग के लिए रेडी हो जाए। जैसे ही मुसलमानों की फौज जमा हुई, सलाहाउद्दीन इस पूरी फौज को लेकर फस्तीन
Speaker A
की तरफ रवाना हुए। जैसे ही सलाहाउद्दीन की फौज फस्तीन एंटर हुई, सबसे पहले उन्होंने इस किले पर हमला किया। और इस किले को घेर लिया। यह एक ऐसा किला था जिसके पीछे साफ पानी का एक बहुत [संगीत] बड़ा तालाब था। जैसे ही मुसलमानों
Speaker A
की फौज यहां पहुंची वहां जेरूसलम में भी क्रूसेडर्स का अब नया बादशाह आ चुका था और उसने भी क्रिश्चियंस की फौज को रेडी होने का हुक्म दिया और जैसे ही फौज तैयार हुई जेरूसलम का बादशाह यह फौज लेकर
Speaker A
सलाहाउद्दीन की तरफ रवाना हुआ। लेकिन अब यहां मसला यह था कि इस घुसेडर फौज ने जुलाई के महीने में फस्तीन के गर्म डेजर्ट को क्रॉस करके सलाहाउद्दीन तक पहुंचना था। और ऊपर से इस पूरे रास्ते में इस इतनी बड़ी फौज के लिए बहुत ही कम पानी
Speaker A
के कुएं थे। इसीलिए जाने से पहले क्रूसेडर्स के बादशाह ने अपने सारे जनरल्स की मीटिंग बुलाई। [हौसला बढ़ाने की आवाज़] और अपने इन जनरल्स से पूछा कि हमें क्या करना चाहिए? जहां कुछ समझदार जनरल्स ने कहा कि हमें इस गर्म डेजर्ट में मरने के
Speaker A
बजाय यहीं पर बैठकर सलाहाउद्दीन का इंतजार करना चाहिए। लेकिन यह सुनकर इनका वही जालिम गवर्नर रेनाल्ड और कहा कि नहीं बल्कि हमें खुद जाकर सलाहाउद्दीन पर हमला करना चाहिए। क्योंकि खुदा की मदद हमारे साथ है और वैसे भी वहां
Speaker A
किले के पास पानी का इतना बड़ा तालाब है कि वहां पहुंचकर हम सब आराम से पानी पी लेंगे। आखिर इस मीटिंग में रेनाल्ड की बात मानी गई और क्रूसेडर्स जुलाई के महीने में इस गर्म डेजर्ट को क्रॉस करने लगे। और
Speaker A
बगैर किसी पानी के इसी तरह यह फौज डेजर्ट में चलती रही। लेकिन इन सबके दिलों में एक ही उम्मीद थी कि इस रास्ते के एंड में यह सब उस तालाब से पानी पी सकेंगे। आखिर कई दिनों तक इसी
Speaker A
तरह सफर करके यह फौज तालाब के करीब पहुंच गई। इस फौज को दूर से तालाब दिखने लगा। लेकिन जैसे ही ये फौज थोड़ी आगे बढ़ी, इस फौज के हर सोल्जर ने देखा कि इनके और तालाब के दरमियान सुल्तान सलाहाउद्दीन की
Speaker A
पूरी फौज खड़ी है। असल में इससे पहले ही सलाहाउद्दीन को अच्छी तरह पता था कि जब यह क्रुसेडर्स यहां पहुंचेंगे, यह बहुत ही थके हुए और प्यासे होंगे। इसीलिए सलाहाउद्दीन ने पहले से अपनी पूरी फौज को पानी के सामने खड़ा कर दिया था।
Speaker A
तो अब अगर इन क्रूसेडर्स ने पानी पीना था तो उन्हें पहले सलाहाउद्दीन की फौज से गुजर कर जाना था। इसीलिए इन प्यासे क्रुसेडर्स ने मुसलमानों पर हमला कर दिया। क्रिश्चियंस की फौज मुसलमानों से बड़ी थी। इसीलिए यहां पर हितन की जमीन पर एक बहुत
Speaker A
बड़ी और खतरनाक जंग शुरू हुई। और क्रुसेडर्स कोशिश कर रहे थे किसी तरह वो उस पानी तक पहुंच जाए। लेकिन सलाहाउद्दीन ने उन्हें ऐसा करने नहीं दिया। और आहिस्ता-आहिस्ता सलाहाउद्दीन की फौज क्रिश्चियंस को घेरने लगी। [संगीत] कहा जाता है यह सब कुछ ऊपर
Speaker A
से सलाहाउद्दीन अयूबी देख रहा था। जैसे ही मुसलमानों की फौज ने उन्हें घेरा। सलाहाउद्दीन के बेटे ने उनसे कहा कि अब्बा जान मुबारक हो। आप यह जंग जीत रहे हैं। लेकिन सलाहाउद्दीन ने अपने बेटे से कहा, नहीं। जब तक उनके बादशाह का कैंप अपनी जगह
Speaker A
पर खड़ा है, हम यह जंग नहीं जीतेंगे। वहां जंग में मुसलमान और भी क्रिश्चियंस को पीछे धकेलने लगे। और [संगीत] जंग के दरमियान झाड़ियों को आग लगाने से हर तरफ धुआं फैला हुआ था। यह देखकर सलाहाउद्दीन के बेटे ने उनसे दोबारा कहा, अब्बा जान
Speaker A
मुबारक हो हम जीत रहे हैं। लेकिन सलाहाउद्दीन ने फिर वही बात कही कि जब तक बादशाह का कैंप खड़ा [संगीत] है हम नहीं जीते। आखिर मुसलमानों की फौज ने ऑर्गेनाइज होकर क्रिश्चियंस को हर तरफ से घेर लिया और कुछ ही देर में हजारों क्रूसेडर्स मरने
Speaker A
लगे और आहिस्ता-आहिस्ता मुसलमानों ने उनके बादशाह को भी घेर लिया। यह देखकर सलाहाउद्दीन के बेटे ने तीसरी बार कहा कि अब्बा जान आप जंग जीत रहे हैं। लेकिन सलाहाउद्दीन ने कहा नहीं जब तक बादशाह का वो और जैसे ही सलाहाउद्दीन यहां तक पहुंचा
Speaker A
अचानक बादशाह का कैंप गिर गया। [संगीत] ये देखते ही सलाहाउद्दीन ने आंखें बंद की और जमीन पर गिर गया और अल्लाह [संगीत] को सजदा किया और कहा अब हम यह जंग जीत चुके हैं। इस तरह मुसलमानों ने क्रुसेडर्स की पूरी
Speaker A
फौज तबाह कर दी [नाक से की जाने वाली आवाज़] और जो लोग जिंदा बच गए मुसलमान उन्हें कैदी बनाने लगे। [संगीत] इन्हीं कैदियों में मुसलमानों ने क्रूसेडर्स के बादशाह को भी पकड़ लिया। और सबसे बड़ी बात यह थी रसूल अल्लाह
Speaker A
सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की गुस्ताखी करने वाला रेनाल्ड भी मुसलमानों के हाथ जिंदा आया। [संगीत] जैसे ही सलाहाउद्दीन को पता चला उसने फौरन बादशाह और रेनाल्ड को अपने पास अपने कैंप बुलाया और जब सलाहाउद्दीन ने देखा कि दोनों को प्यास लगी हुई है। यह देखकर
Speaker A
सलाहाउद्दीन ने बादशाह को एक प्याले में पानी या जूस दिया। [संगीत] बादशाह ने इस प्याले से खुद भी पिया और फिर यह प्याला रेनाल्ड को दे दिया। अब उस जमाने का कल्चर यह था [संगीत] कि जब भी कोई बादशाह किसी को कुछ ऑफर करता था, इसका
Speaker A
मतलब यह था कि बादशाह ने उसे माफ कर दिया है। लेकिन अब जब रेनाल्ड ने भी इस प्याले से पिया यह देखकर सलाहाउद्दीन को गुस्सा आया और उसने गुस्से में रेनाल्ड से कहा कि हम अपने मेहमानों का बहुत ख्याल रखते हैं।
Speaker A
लेकिन तुम मेरे मेहमान नहीं हो। और यह प्याला मैंने तुम्हें नहीं बल्कि तुम्हारे बादशाह ने दिया है। और फिर सलाहाउद्दीन ने रेनाल्ड से कहा कि तुम वो आदमी हो जिसने हमारे पैगंबर मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की गुस्ताखी की थी। और अब मैं पूरी
Speaker A
उम्मत की तरफ से तुमसे इसका बदला लूंगा। लेकिन सलाहाउद्दीन में सब्र भी इतना ज्यादा था कि रोनाल्ड को मारने से पहले सलाहाउद्दीन ने उसे कहा कि गुस्ताखी तो तुमने की है लेकिन अगर तुम इस्लाम कबूल करके तौबा कर लो तो मैं तुम्हें माफ कर
Speaker A
दूंगा। लेकिन ऑफ कोर्स रेनाल्ड ने कहा नहीं। इसी के साथ सलाहाउद्दीन ने अपनी तलवार निकाली और एक ही बार में रेनाल्ड का सर काट कर अपनी कसम पूरी कर दी। लेकिन फिर भी सलाहाउद्दीन इतने गुस्से में था कि उसने रेनार्ड की लाश पकड़ी और उसे
Speaker A
घसीट कर बादशाह के सामने लेकर आया। कहा जाता है यह देखकर बादशाह कांपने लगा। क्योंकि उसे लगा कि अब अगली बारी उसकी होगी। लेकिन सलाहाउद्दीन ने बादशाह से कहा "रिलैक्स।" तुम्हें मैं कुछ नहीं कहूंगा। हमारा यह रिवाज नहीं कि एक बादशाह दूसरे बादशाह को
Speaker A
मारे। इस तरह सलाहाउद्दीन ने क्रूसेडर्स की पूरी फौज को एक ही वार में खत्म कर दिया था। और अब बगैर कोई टाइम जाया किए सलाहाउद्दीन अपनी पूरी फौज लेकर पैगंबरों के शहर जेरूसलम की तरफ रवाना हुआ। अब वहां जेरूसलम में बच्चे-बच्चे को इस
Speaker A
बात का अच्छी तरह पता था कि आगे उनके साथ क्या होने वाला है। और सब जेरूसलम की दीवारों पर खड़े होकर सिर्फ सलाहाउद्दीन की फौज का इंतजार कर रहे थे। आखिर जेरूसलम की दीवार से एक आदमी ने दूर से एक मुसलमान सोल्जर देखा और कहा
Speaker A
सलाहाउद्दीन पहुंच चुका है। लेकिन बाकियों ने उसे कहा कि ये तो सिर्फ एक आदमी है। लेकिन उसने कहा नहीं सलाहाउद्दीन पहुंच चुका है। सलाहाउद्दीन की फौज ने आते ही जेरूसलम को चारों तरफ से घेर लिया। अब यहां सबसे बड़ा
Speaker A
मसला यह था। जेरूसलम का बादशाह सलाहाउद्दीन की कैद में था। मतलब जेरूसलम शहर का कोई लीडर नहीं था। इसीलिए जेरूसलम के लोगों ने वहीं पर अपना एक नया बादशाह बनाया। बेलियन। यह नया बादशाह बेलियन एक बहुत ही जहीन
Speaker A
आदमी था। इसके पास बहुत थोड़ी सी फौज थी। लेकिन बेलियन के लिए सब अपनी जान देने के लिए तैयार थे। [चीखने की आवाज़] यह देखकर सलाहाउद्दीन ने इस जनरल की तरफ एक मैसेज भेजा और कहा यह शहर जेरूसलम हम
Speaker A
मुसलमानों और तुम क्रिश्चियंस के लिए सबके लिए एक होली सिटी है। इसीलिए मैं नहीं चाहता कि यहां हम कोई खून बहाए तुम्हें भी पता है यह जंग तुम जीत तो नहीं सकते। तो अब अच्छा यही होगा कि हथियार फेंको और
Speaker A
सरेंडर कर दो। लेकिन जेरूसलम के इस नए बादशाह ने सलाहाउद्दीन की बात नहीं मानी। तो ऑफकोर्स क्या होना था? सलाहाउद्दीन की फौज ने फुल ताकत से हमला किया। लेकिन जेरूसलम के अंदर क्रिश्चियंस बहादुरी से लड़ रहे थे। मुसलमान इसलिए
Speaker A
बहादुरी से लड़ रहे थे कि पिछले ऑलमोस्ट 90 इयर्स से जेरूसलम की मस्जिद अक्सा में कोई अजान नहीं दी गई थी। बल्कि मस्जिद अक्सा को इन्होंने एक घोड़े बांधने की जगह बनाई थी। और पिछले 90 इयर्स में यह
Speaker A
मुसलमानों के पास पहला मौका था कि वो इस शहर को दोबारा फतह करें। [चीखने की आवाज़] लेकिन सामने क्रिश्चियंस इसलिए बहादुरी से लड़ रहे थे क्योंकि उन्हें पता था कि 90 साल पहले जब इन्होंने इस शहर को फतह किया
Speaker A
था तो उन्होंने मुसलमानों पर कितना जुल्म किया था। 1 लाख मुसलमानों को मारा था। तो अब इन क्रिश्चियंस का ख्याल था कि अगर मुसलमान इस सिटी को फतह करेंगे वो भी हमसे एक-एक मुसलमान का बदला लेंगे। इसीलिए दोनों फौजे अपनी फुल ताकत के साथ
Speaker A
खून के आखिरी कतरे तक लड़ रहे थे। अगले 5 दिन तक सलाहाउद्दीन की तोपें इसी तरह हमला करती रही। [संगीत] और आखिर 5 दिन की सख्त लड़ाई के बाद फाइनली सलाहाउद्दीन की एक तोप ने जेरूसलम की दीवार का एक
Speaker A
हिस्सा गिरा दिया। और इस दीवार के गिरते ही जेरूसलम के अंदर सबको समझ आ गई कि अब सलाहाउद्दीन [संगीत] को रोकना इंपॉसिबल है। इसीलिए जेरूसलम के अंदर से उनके बादशाह ने सलाहाउद्दीन की तरफ एक पैगाम भेजा कि मैं
Speaker A
जेरूसलम का बादशाह सलाहाउद्दीन के साथ मिलना चाहता हूं। सलाहाउद्दीन ने यह ऑफर एक्सेप्ट की। और इन दोनों लीडर्स की मीटिंग शुरू। सबसे पहले सलाहाउद्दीन ने बेलियन से पूछा कि बताओ तुम्हारा क्या इरादा है?
Speaker A
शहर कब हमारे हवाले करोगे। बेलियन ने सलाहाउद्दीन को क्लियरली बता दिया कि हम जेरूसलम को इतनी आसानी से जाने नहीं देंगे। बल्कि हम सब अपने खून के आखिरी कतरे तक आपसे लड़ेंगे। और अगर फिर भी हम ना जीते तो हम इस
Speaker A
पैगंबरों के शहर जेरूसलम को आग लगा देंगे। जिससे आपकी मस्जिद अा भी नहीं बचेगी। सलाहाउद्दीन ने बेलियन से पूछा कि अगर तुम इस तरह हर चीज को आग लगाओगे तो उससे तो तुम्हारा चर्च भी जल जाएगा। जिस पर बेलियन
Speaker A
ने कहा कि मुझे किसी भी चीज की कोई परवाह नहीं है। चाहे जो भी हो मैं इस पूरे शहर को आग लगाकर रहूंगा। क्योंकि बेलियन को पता था अगर यह शहर उसने सरेंडर कर दी सलाहाउद्दीन इस शहर के हर क्रिश्चियन को
Speaker A
मार डालेगा। तो अब बेलियन की बातें सुनकर सलाहाउद्दीन ने थोड़ा सोचा और फिर बेलियन को एक ऐसी ऑफर दी जो वो कभी सोच भी नहीं सकता था। सलाहाउद्दीन ने बेलियन से कहा कि मैं जेरूसलम फतह करके इसके अंदर हर
Speaker A
क्रिश्चियन को माफ कर दूंगा। जेरूसलम में हर चर्च का [संगीत] अच्छे से ख्याल रखूंगा। और अगर कोई भी क्रिश्चियन जेरूसलम को छोड़कर जाना चाहे वो सिर्फ थोड़ा सा टैक्स देकर जेरूसलम से बगैर किसी खतरे के जा [संगीत] सकेगा। यह सुनकर
Speaker A
बेलियन बिल्कुल हैरान रह गया क्योंकि उसे पता था कि इससे 90 इयर्स पहले जब क्रिश्चियंस ने इस शहर पर कब्जा किया था। [संगीत] उन्होंने यहां के हर मुसलमान को मार डाला था। मस्जिद अक्सा को घोड़े बांधने की जगह बना दी [संगीत] थी। और पूरे
Speaker A
जेरूसलम शहर को मुसलमानों के खून से लाल कर दिया था। और अब सलाहाउद्दीन [संगीत] वो सब कुछ भुलाकर हम सारे क्रिश्चियंस को माफ करने के लिए तैयार है। और आखिर वो बेरियम जो इससे पहले जेरूसलम को जलाने वाला था।
Speaker A
अब सलाहाउद्दीन की बातें सुनकर उसने सलाहाउद्दीन से कहा कि अगर आपकी यही ऑफर है तो फिर मैं जेरूसलम आपके सामने सरेंडर करता हूं। देन अंडर [संगीत] दी टर्म्स आई सरेंडर जेरूसलम। इसी के साथ आखिर 90 इयर्स बाद मुसलमान
Speaker A
दोबारा जेरूसलम एंटर हुए। [संगीत] इससे आगे जो हुआ वो ऑलमोस्ट वैसा ही था कि जब इससे 500 साल पहले रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सहाबा के साथ मक्का के शहर एंटर हुए थे। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मक्का फतह
Speaker A
करके उन सारे लोगों को माफ कर दिया था जो बहुत सालों से मुसलमानों पर जुल्म कर रहे थे। इस दिन फतेह मक्का के बारे में सलाहाउद्दीन ने बचपन से पढ़ा था। इसीलिए अब जब वो मुसलमानों को लेकर जेरूसलम एंटर
Speaker A
हुए सलाहाउद्दीन ने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत को फॉलो करते हुए जेरूसलम के हर क्रिश्चियन को माफ कर दिया [संगीत] और जेरूसलम की हर गली में ऐलान कराए कि आप सब माफ कर दिए गए हो जिसके बाद सलाहाउद्दीन सीधा मस्जिद अक्सा
Speaker A
की तरफ गया और मस्जिद अक्सा को साफ करके इधर वही मेंबर रखवाया जो इससे बहुत साल पहले सलाहाउद्दीन के मास्टर नूरुद्दीन ने बनाया था। 90 साल बाद मस्जिद अक्सा में दोबारा अजान दी गई। और एक बार फिर मुसलमान सफों में खड़े हुए
Speaker A
और सुल्तान सलाहाउद्दीन ने सबको नमाज पढ़ाई। [गाना गाने की आवाज़] अब [संगीत] जब जेरूसलम आजाद हो चुका था। आहिस्ता-आहिस्ता क्रूसेडर्स थोड़े से पैसे देकर अपने आप को आजाद करा रहे थे। [संगीत] और फिर जेरूसलम छोड़कर जा रहे थे। और
Speaker A
सलाउद्दीन भी बहुत सारे लोगों को बगैर पैसों के माफ कर रहा था। आहिस्ता-आहिस्ता सलाउद्दीन ने ऐलान कराया कि बूढ़े क्रिश्चियंस को पैसे देने की कोई जरूरत नहीं। [संगीत] बच्चों को भी कोई पैसे देने की जरूरत नहीं। और फिर औरतों को भी बगैर
Speaker A
पैसों के आजाद करने लगा। यह सब देखकर सलाहाउद्दीन के कुछ जनरल्स बिल्कुल भी खुश नहीं थे। आखिर सलाहाउद्दीन के सामने बहुत सारे ऐसे जवान लड़के लाए गए जिन्होंने मुसलमानों के खिलाफ जंग भी की थी और इन लड़कों के पास अपने आप को आजाद
Speaker A
करने के लिए कोई पैसा नहीं था। तो अब सलाहाउद्दीन ने इन्हें गुलाम बनाने के बजाय सलाहाउद्दीन वापस अपने कैंप के अंदर गया और कैंप के अंदर सलाहाउद्दीन का अपना पर्सनल जितना भी सोना पड़ा था उसे लेकर बाहर आया और फिर अपने पैसों से एक-एक
Speaker A
क्रिश्चियन को आजाद कराने लगा। ये देखकर सलाहाउद्दीन का भाई भी अपना सोना लेकर आया और उसने 1000 क्रिश्चियनस को आजाद किया। आगे जाकर इन्हीं क्रिश्चियंस ने सलाहाउद्दीन की ये बातें पूरी यूरोप में फैलाई जिसकी वजह से आज तक पूरा यूरोप
Speaker A
सलाद्दीन को एक हीरो मानता है। प्रोटेक्ट क्रिश्चियन चर्च दे और सिर्फ यही नहीं बल्कि कहा जाता है एक टाइम ऐसा भी था कि सलाहाउद्दीन एक क्रिश्चियन औरत के बच्चे को ढूंढने के लिए जेरूसलम के बाजारों में खुद फिर रहा था।
Speaker A
अब [संगीत] जब यह सारे क्रिश्चियन जेरूसलम को छोड़कर जा रहे थे, इन क्रिश्चियंस में जेरूसलम का लीडर बेलियन भी था। लेकिन जाने से पहले सलाउद्दीन ने उसे अपने पास बुलाया और उसे कहा कि आप सब जेरूसलम छोड़कर जा तो
Speaker A
रहे हैं। लेकिन [संगीत] याद रखें यह सिटी हमारी तरह आपके लिए भी होली सिटी है। और आप सारे क्रिश्चियंस जब भी दोबारा जेरूसलम आना चाहे जेरूसलम के दरवाजे हमेशा आपके लिए खुले होंगे। इस तरह एक बार फिर सलाहाउद्दीन की लीडरशिप
Speaker A
में मुसलमान क्रिश्चियंस और [संगीत] यहूदी सब मिलकर बिल्कुल अमन के साथ जेरूसलम में रहने लगे। इस तरह खलीफा उमर रज अल्लाह अनो के बाद सुल्तान सलाहाउद्दीन ने एक बार फिर जेरूसलम फतह कर लिया। जो मुसलमानों के लिए तो एक बहुत ही खुशी
Speaker A
और जश्न की बात थी। लेकिन यहां से बहुत दूर यूरोप में हर तरफ माथम छाया हुआ था। बल्कि लोग इतने शौक में थे कि [संगीत] कहा जाता है जब मुसलमानों की जीत की खबर यूरोप के पोप तक पहुंची। पोप इस खबर के कुछ ही
Speaker A
दिन बाद मर गया। इसीलिए नए पॉप ने आते ही दोबारा पूरे यूरोप में ऐलान किया कि हम फिलस्तीन को इतनी आसानी से नहीं जाने दे सकते बल्कि हम सब मिलकर सलाहाउद्दीन से बदला लेंगे। और इस नई जंग के लिए पोप ने एक बहुत बड़ी
Speaker A
फौज बनाना शुरू की। बल्कि इस फौज को फंड [संगीत] करने के लिए पोप ने यूरोप की गरीब आवाम पर एक नया टैक्स लगाया। जिसका नाम था सलादन टैक्स। मतलब यूरोप का हर आदमी अपने पैसों का 10% पोप को देगा ताकि वो सलादन
Speaker A
से दोबारा फस्तीन छीन सके। और जैसे ही ये फौज तैयार हुई यूरोप का सबसे बड़ा बादशाह रिचर्ड द लायनहार यह फौज लेकर फस्तीन की तरफ रवाना हुआ। और आखिर बड़ी-बड़ी कश्तियों में यह फौज फस्तीन पहुंची और एक बार फिर फस्तीन में एक बहुत बड़ी जंग शुरू
Speaker A
हुई। [संगीत] जिसके बाद अगले 5 साल तक सलाहाउद्दीन इसी तरह जेरूसलम को डिफेंड करता रहा। लेकिन आखिर 5 साल तक लड़ने के बाद भी क्रूसेडर सलाहाउद्दीन से यह जंग नहीं जीत सके और आखिर 5 साल बाद क्रुसेडर्स ने हार
Speaker A
मान ली। और सिर्फ दो-तीन किलो के अलावा पूरा फस्तीन खाली करके वापस यूरोप की तरफ चले गए। अब जब सलाहाउद्दीन ने बार-बार यूरोप के बादशाहों को हरा दिया था। यह देखकर सलाहाउद्दीन ने अपने जनरल से कहा कि अब
Speaker A
मेरा इरादा यह है कि मैं फस्तीन के बाद सीधा यूरोप की तरफ बढ़ूं और आहिस्ताआहिस्ता पूरे यूरोप को फतह [संगीत] करूं। लेकिन अब जब सलाहाउद्दीन यूरोप पर हमले की तैयारी कर रहा था। उसके सिर्फ एक [संगीत] साल बाद अचानक सलाहाउद्दीन की तबीयत खराब
Speaker A
होने लगी। और सलाहाउद्दीन की जिंदगी के आखिरी दिन करीब आने लगे। कहा जाता है सलाहाउद्दीन ने मरने से पहले अपने भाई और बेटों को बुलाया और उनसे कहा याद रखना मैंने जिंदगी में जो भी किया है सिर्फ और
Speaker A
सिर्फ अल्लाह को खुश करने के लिए किया है। और फिर कहा मेरे बेटों याद रखना मेरे बाद मुसलमानों पर जुल्म मत करना। और इस तरह सुल्तान सलाहाउद्दीन अयूबी इस दुनिया से चले गए। कहा जाता है सलाहाउद्दीन की मौत
Speaker A
[संगीत] की खबर पूरी दुनिया में फैल गई और मुसलमान ऐसे रो रहे थे कि कोई आम बादशाह नहीं बल्कि कोई अजीम खलीफा दुनिया से गया हो। फौत [संगीत] होने के बाद जब सलाहाउद्दीन के माल का हिसाब लगाया गया। सलाहाउद्दीन
Speaker A
के पास एक सोने के सिक्के और कुछ सिल्वर कॉइंस के अलावा और कुछ भी नहीं था। जिसके बाद सुल्तान सलाहाउद्दीन को उसी के कैपिटल दमशक में दफना दिया गया और सलाहाउद्दीन की खबर आज भी उसी तरह मौजूद है
Speaker A
सलाहाउद्दीन ने फस्तीन को ऐसे फतह किया कि आने वाले कई सदियों तक सिर्फ मुसलमान नहीं बल्कि यूरोप के क्रिश्चियंस भी सलाहाउद्दीन को एक हीरो मानते थे और खलीफा उमर रज़ अल्लाह अनहु के बाद अब सलाहाउद्दीन ने फस्तीन ऐसे फतह किया था कि अगले 700
Speaker A
इयर्स तक कोई भी मुसलमानों से दोबारा फस्तीन नहीं छीन सका। लेकिन आखिर 700 साल बाद जब फस्तीन पर उस्मानिया खिलाफत का राज दुनिया की तारीख की सबसे बड़ी जंग शुरू हुई वर्ल्ड वॉर वन। इस वर्ल्ड वॉर में उस्मानिया खिलाफत ने उस
Speaker A
जमाने की एक सुपर पावर जर्मनी का साथ दिया और दोनों साथ मिलकर जंग लड़ रहे थे। उस्मानिया खिलाफत ने यह जंग वर्ल्ड वॉर वन बहुत बहादुरी से लड़ी। लेकिन आखिर बहुत कोशिश के बाद भी उस्मानिया खिलाफत यह जंग हार गई।
Speaker A
और आहिस्ता-आहिस्ता उस्मानिया खिलाफत टूटने लगी। और आखिर उस्मानिया सल्तनत इतनी कमजोर हुई कि उनके हाथ से फस्तीन एक बार फिर चला गया। जिसके बाद फलस्तीन उस जमाने की सबसे बड़ी सुपर पावर ब्रिटिश एंपायर के कंट्रोल में [चीखने की आवाज़]
Speaker A
ुद्दीन के शहर में उसकी कब्र के पास आया और फिर इस बेशर्म जनरल ने सलाहाउद्दीन की कब्र को लात मारी और कहा सलाद दिन सलाहुद्दीन वी आर बैक इसी तरह उस्मानिया खिलाफत के टूटने के कुछ ही अरसे बाद फस्तीन एक बार फिर मुसलमानों
Speaker A
के हाथ से छीन लिया गया और फ़स्तीन में पहली बार एक नई रियासत बनी इज़राइल विक्ट्री विल बी और आज से कुछ साल पहले जब अमेरिका ने मुसलमान कंट्रीज पर हमला किया उस वक्त के अमेरिकन प्रेसिडेंट जॉर्ज बुश
Speaker A
ने इस नई जंग को भी उसी तरह एक क्रूसेड का नाम दिया। दिस दिस वॉर ऑनर पिछली बार जब फस्तीन मुसलमानों से छीना गया था उसे फिर 90 इयर्स बाद सुल्तान सलाहाउद्दीन [संगीत] ने दोबारा फतह किया था। इस बार फस्तीन के जाने के ऑलमोस्ट 80
Speaker A
इयर्स पूरे हो चुके हैं। हो सकता है आज हम इतने कमजोर हैं कि हम अपना पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दें। आई लव इज आई लव। और या हो सकता है ऐसा ना हो क्योंकि क्या पता आज भी एक सलाहााउद्दीन पैदा हो चुका
Speaker A
हो। [संगीत] जो भी हो एक बात क्लियर है सारी दुनिया के मुसलमानों की नजरें उसी आदमी की तलाश में है जो खलीफा उमर बिन खत्ताब [संगीत] रज अल्लाह और सुल्तान सलाहाउद्दीन अयूबी के बाद एक बार फिर मुसलमानों के लिए फस्तीन
Speaker A
फतह करेगा। [संगीत] सब्सक्राइब।
Topics:सलाहुद्दीन अय्यूबीफस्तीनजेरूसलममुसलमान इतिहासक्रूसेडर्सडोम ऑफ द रॉकबनू उमैयाअब्बासी खिलाफतइस्लामिक स्थापत्यसिविल वॉर











