Skip to content

Fatah e Jerusalem | Umar bin Khattab | Umar Series 6

यह वीडियो जेरूसलम की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता, मुसलमानों द्वारा इसकी फतह, और हजरत उमर की भूमिका पर केंद्रित है।

Key Takeaways

  • जेरूसलम तीन प्रमुख धर्मों के लिए एक पवित्र और महत्वपूर्ण शहर है।
  • मुसलमानों ने हजरत उमर के नेतृत्व में बिना रक्तपात के जेरूसलम की फतह की।
  • इतिहास में पैगंबरों और धार्मिक हस्तियों की भूमिका जेरूसलम की महत्ता को बढ़ाती है।
  • फलस्तीन की भू-राजनीतिक स्थिति सदियों से संघर्ष और धार्मिक महत्व का केंद्र रही है।
  • हजरत उमर ने फतह के बाद अमन और न्याय का उदाहरण प्रस्तुत किया।

What the video covers

  • जेरूसलम को तीन बड़े धर्मों के लिए एक पवित्र शहर माना जाता है, जिसमें यहूदी, ईसाई और मुस्लिम शामिल हैं।
  • मुसलमानों ने हजरत उमर की खिलाफत में रोमन और पर्जन साम्राज्यों को हराकर जेरूसलम को बिना खून खराबे के फतह किया।
  • फतह के दौरान मुसलमानों ने शहर को घेर कर सरेंडर का इंतजार किया और स्थानीय प्रीस्ट स्रो नियस ने हजरत उमर से मिलने की शर्त रखी।
  • जेरूसलम की इतिहास में पैगंबर इब्राहिम, दाऊद, सुलेमान और मूसा जैसे कई महत्वपूर्ण धार्मिक हस्तियां जुड़ी हैं।
  • बनी इसराइल की उत्पत्ति, उनकी मिस्र में गुलामी, और मूसा के नेतृत्व में मुक्ति की कहानी भी वीडियो में विस्तार से बताई गई है।
  • यहूदियों, ईसाइयों और मुसलमानों के बीच जेरूसलम की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डाला गया है।
  • हजरत उमर ने जेरूसलम की फतह के बाद शहर के लोगों के अधिकारों का सम्मान किया और अमन कायम रखा।
  • वीडियो में फलस्तीन की भू-राजनीतिक और धार्मिक पृष्ठभूमि को कुरान और बाइबल के संदर्भों के साथ समझाया गया है।
  • मुसलमानों की फौजों की रणनीतियों और युद्धों जैसे रमक, कादसिया, और यरब की लड़ाइयों का वर्णन किया गया है।
  • जेरूसलम की फतह के बाद के सामाजिक और धार्मिक परिवर्तनों को भी वीडियो में दर्शाया गया है।

Answers

Questions about this video

जेरूसलम को तीनों धर्मों के लिए क्यों पवित्र माना जाता है?

जेरूसलम में पैगंबर इब्राहिम, दाऊद, सुलेमान सहित कई धार्मिक हस्तियों का इतिहास जुड़ा है। यहूदी, ईसाई और मुस्लिम तीनों धर्मों के लिए यह एक पवित्र शहर है क्योंकि यहां बैतुल मकद, चर्च और मस्जिदे अक्सा जैसी महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल मौजूद हैं।

हजरत उमर ने जेरूसलम की फतह के बाद क्या कदम उठाए?

हजरत उमर ने जेरूसलम की फतह के बाद शहर को बिना खून खराबे के कब्जा किया और स्थानीय लोगों के अधिकारों का सम्मान किया। उन्होंने अमन और न्याय कायम रखा और खुद शहर आकर सरेंडर स्वीकार किया।

मुसलमानों ने जेरूसलम की फतह कैसे की?

मुसलमानों ने रोमन और पर्जन साम्राज्यों को हराकर जेरूसलम को चारों तरफ से घेर लिया। उन्होंने शहर को तलवार से जीतने के बजाय शांति से सरेंडर का इंतजार किया, जिससे बिना रक्तपात के यह फतह संभव हुई।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:01
Speaker A
फलस्तीन जेरूसलम दुनिया की सबसे इंपॉर्टेंट सिटी है, द कैपिटल ऑफ इल क्योंकि जेरूसलम और उसके आसपास अल्लाह ने अपने हजारों पैगंबर भेजे जैसे कि इब्राहिम, दाऊद और सुलेमान अलैहि सलाम। और यहूदियों के मुताबिक इस सिटी यरूशलम का नाम सबसे पहले एक बहुत बड़े
00:21
Speaker A
पैगंबर नूह अल सलाम के बेटे सामने रखा, जिसका मतलब है यरूशलम, द सिटी ऑफ पीस। लेकिन उस टाइम से लेकर आज तक इस सिटी ने कभी पीस नाम की कोई चीज देखी ही नहीं, क्योंकि जेरूसलम दुनिया के तीन बड़े
00:37
Speaker A
रिलीजन यहूदी, क्रिश्चियनिटी और इस्लाम सबके लिए एक होली सिटी है। क्योंकि जेरूसलम के अंदर यह जो जगह है जिसे बैतुल मकद कहा जाता है, इसकी यह साइड वेस्टर्न वॉल है, जो आज यहूदियों के लिए सबसे होली जगह है। यहां
00:54
Speaker A
से थोड़ी दूर एक चर्च है, जो आज क्रिश्चन के लिए सबसे होली साइट है, क्योंकि क्रिश्चन का मानना है कि इस चर्च के नीचे आज तक ईसा अल सलाम की खाली कब्र मौजूद है। और इसी बैतुल मकद के ऊपर मस्जिदए अक्सा भी
01:09
Speaker A
बनी हुई है, क्योंकि बैतुल मकद मुसलमानों के लिए भी मक्का और मदीना के बाद दुनिया की सबसे होली जगह है। जब रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मक्का में थे, उन्होंने कई साल तक मक्का के लोगों को इस्लाम की तरफ आने की दावत दी।
01:25
Speaker A
लेकिन उनकी बहुत कोशिश के बाद भी मक्का के सिर्फ कुछ ही लोगों ने उनकी बात पर इस्लाम कबूल किया, और यह लोग भी मक्का के कोई पावरफुल लोग नहीं बल्कि इनमें बहुत सारे ऐसे थे जो मक्का के सबसे कमजोर लोगों में
01:36
Speaker A
से थे, जिसकी वजह से मक्का के लोग इन पर बहुत जुल्म किया करते थे। इस सब के बाद भी आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इन सब से कहते रहते कि आज तो मुसलमान कमजोर हैं, लेकिन एक दिन ऐसा जरूर आएगा कि मुसलमान रोमन और
01:49
Speaker A
पर्जन एंपायर दोनों को फतह करेंगे, जिस पर मक्का के लोग उनका बहुत मजाक उड़ाते थे और कहते थे कि यह लोग हमारा यहां मक्का में मुकाबला नहीं कर सकते, रोमन और पर्जन एंपायर से कैसे लड़ेंगे। लेकिन अब रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की वफात
02:04
Speaker A
के कुछ ही साल बाद मुसलमानों ने उमर बिन खताब रज अल्लाह ताला अ की खिलाफत में रोमन और पर्जन एंपायर दोनों को रमक और कादसिया जैसी जंगों में पूरी तरह हरा दिया था। और इन दोनों एंपायर्स को हराने के बाद अब
02:16
Speaker A
मुसलमानों की दोनों बड़ी फौज मदीना से हजरत उमर रज अल्लाह ताला अन्हो के ऑर्डर्स का इंतजार कर रही थी कि अब हमें इससे आगे और कहां जाना चाहिए। तो मदीना से सीधा एक लेटर पर्जन एंपायर साद बिन अबी वकास की
02:28
Speaker A
तरफ गया और हजरत उमर ने उन्हें ऑर्डर किया कि अब तुमने तब तक नहीं रुकना जब तक पर्जन एंपायर का कैपिटल पतई फतह ना हो जाए और पूरी पर्जन एंपायर मुसलमानों के कंट्रोल में ना आ जाए, तब तक तुमने पीछे नहीं हटना।
02:42
Speaker A
तो साद बिन अबी वकास मुसलमानों की फौज के साथ पूरी पर्जन एंपायर को फतह करने के लिए रवाना हुए। पर्जन एंपायर में तो मुसलमानों की फौज आहिस्ता आहिस्ता कैपिटल की तरफ बढ़ने लगी। अब वहां रोमन एंपायर मुसलमानों ने यरब की जंग जीतने के बाद बहुत तेजी से
02:57
Speaker A
उन सारे इलाकों को दोबारा फतह कर लिया था जिन्हें वो इससे पहले छोड़ चुके थे। और इस सारे इलाके को फतह करने के बाद आप मुसलमान मदीना से हजरत उमर रज अल्लाह ताला अ के ऑर्डर का इंतजार कर रहे थे। तो फौरन
03:09
Speaker A
मदीना से हजरत अबू उबैद के लिए एक लेटर पहुंचा कि मुसलमानों की पूरी ताकत को साथ लेकर रोमन एंपायर की सबसे गली सिटी, पैगंबरों की सिटी जेरूसलम की तरफ जाओ और उसे खिलाफत के कंट्रोल में लाओ। तो अबू
03:22
Speaker A
उबैद मुसलमानों की पूरी ताकत लेकर शाम से जेरूसलम की तरफ रवाना हुए। और इस तरह मुसलमानों की यह अजीम फौज पहली बार फलस्तीन में एंटर हुई। रमक जैसी खतरनाक जंग जीतने के बाद अब पूरी रोमन एंपायर में मुसलमानों को रोकने वाला कोई भी नहीं था।
03:39
Speaker A
तो मुसलमानों ने सीधा जाकर जेरूसलम के शहर को चारों तरफ से घेर लिया। लेकिन मुसलमान यह नहीं चाहते थे कि जेरूसलम को भी बाकी सिटीज की तरह जंगों और तलवारों से फतह किया जाए, क्योंकि मुसलमानों को पता था कि यह
03:51
Speaker A
पैगंबरों का शहर है और वह नहीं चाहते थे कि सिटी में कोई खून खराबा हो। तो मुसलमानों ने इस शहर के चारों तरफ अपने कैंप्स लगाए और आराम से इस सिटी के सरेंडर का इंतजार करने लगे। लेकिन जेरूसलम
04:05
Speaker A
के सबसे बड़े प्रीस्ट स्रो नियस ने मुसलमानों की इतनी बड़ी फौज देखकर भी आसानी से सरेंडर नहीं किया और बार-बार अपने रोमन बादशाह हकल की तरफ लेटर्स भेजता रहा कि आप रोमन एंपायर की पूरी फौज के साथ क्रिश्चियंस के सबसे होली शहर जेरूसलम को
04:21
Speaker A
मुसलमानों के हाथों से बचाएं। लेकिन अगले चार महीने तक स्रो नियस की बहुत कोशिश के बाद भी पूरी रोमन एंपायर से एक जनरल भी उसकी मदद के लिए नहीं आया, क्योंकि यर्म के मैदान में खालिद बिन वलीद ने रोमंस की कमर ऐसी तोड़ी कि अब वो
04:38
Speaker A
मुसलमानों के सामने अपना सर कभी नहीं उठा सकते थे। आखिर चार महीने के बाद स्रो नियस का हौसला टूट गया और उन्होंने जेरूसलम से मुसलमानों के आर्मी चीफ अबू उबैद की तरफ सरेंडर करने के लिए एक लेटर भेजा। लेकिन इस
04:51
Speaker A
लेटर में उसने बहुत ही एक अजीब डिमांड लिखी थी कि मैं इस सिटी को सिर्फ एक शर्त पर मुसलमानों के हवाले करूंगा कि इस इस्लामिक एंपायर के खलीफा उमर बिन खताब खुद आकर मुझसे मिलें। लेकिन आखिर क्यों स्रो
05:05
Speaker A
नियस खालिद बिन वलीद, अबू उबैद और बाकी सारे जनरल्स के बजाय हजरत उमर के सामने ही क्यों सरेंडर करना चाहते थे? क्योंकि स्रो नियस को जेरूसलम की हिस्ट्री के बारे में बहुत अच्छी तरह पता था और उसे पता था कि
05:18
Speaker A
पिछले हजारों साल से जब भी किसी बादशाह ने इस सिटी को फतह किया, उसने यहां की एक एक चीज को तबाह किया। जेरूसलम और फलस्तीन की स्टोरी यहां से बहुत पहले शुरू होती है और यह स्टोरी इतनी इंटरेस्टिंग है कि बाइबल और कुरान ने
05:33
Speaker A
बार-बार दुनिया के बाकी सारे इलाकों से ज्यादा इसी इलाके, फलस्तीन की हिस्ट्री बयान की है। फलस्तीन की स्टोरी स्टार्ट होती है इब्राहिम अल सलाम के [संगीत] साथ, कि जब इब्राहिम अल सलाम आज से 4000 साल पहले जेरूसलम से बहुत दूर इराक की
05:50
Speaker A
सिटी ऊन में पैदा हुए, जो उस जमाने में दुनिया की सबसे बड़ी सिटी थी और उस सिटी के कुछ बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स आज भी दुनिया में मौजूद हैं। इब्राहिम अल सलाम इसी सिटी में बड़े हुए और बड़े होकर उन्होंने इस
06:02
Speaker A
सिटी के रिलीजन से बगावत कर दी और वहां के सारे लोगों से यह कहा कि अपने खुदाओं को छोड़कर एक अल्लाह की तरफ आओ। तो ऑफ कोर्स वहां के लोगों ने उनकी बात नहीं मानी, लेकिन फिर भी इब्राहिम अल सलाम अपने मिशन
06:15
Speaker A
से पीछे नहीं हटे। और आखिर वहां के बादशाह को एक दिन इतना गुस्सा आया कि उन्होंने हुक्म दिया कि एक बहुत बड़ी आग जलाकर इब्राहिम को उस आग में फेंक दिया जाए। लेकिन जैसे ही उन्होंने इब्राहीम अल सलाम
06:26
Speaker A
को इस आग में फेंका, तो वहां खड़े सारे लोगों ने पहली बार एक बहुत ही अजीब मंजर देखा कि इब्राहीम अल सलाम बिल्कुल सही सलामत वहां सबके सामने इस आग से चलकर बाहर निकले। इस वाकए के बाद ऊर शहर के लोग
06:40
Speaker A
इब्राहीम अल सलाम की ताकत से डर गए और उन पर और जुल्म करना छोड़ दिया। और इब्राहिम अल सलाम भी अल्लाह के हुकुम से ऊर सिटी को छोड़कर पहली बार फलस्तीन के इलाके में आबाद हुए। ना इब्राहिम अल सलाम के दो बेटे
06:53
Speaker A
थे, इस्माइल और इसहाक। इसहाक अल सलाम की औलाद में अल्लाह ने हजारों पैगंबर भेजे हैं, लेकिन इस्माइल अल सलाम की औलाद से सिर्फ एक पैगंबर भेजा गया है। इस्माइल अल सलाम तो फलस्तीन को छोड़कर अरब जाकर मक्का में आबाद हुए, लेकिन इसहाक अल सलाम अपने वालिद
07:08
Speaker A
इब्राहिम अल सलाम की वफात के बाद यही फलस्तीन में ही रहे। और उनके बेटे याकूब अल सलाम जिन्हें इसराइल के नाम से भी जाना जाता है, और इन्हीं की औलाद को याकूब अल सलाम की औलाद को आज बनी इसराइल कहा जाता
07:21
Speaker A
है। याकूब अल सलाम के एक बेटे यूसुफ अल सलाम अपने भाइयों के जुल्म की वजह से फलस्तीन छोड़कर इजिप्त में आबाद हुए। और यही मिसर में बड़े होकर यूसुफ अल सलाम पूरे मिस्र के प्राइम मिनिस्टर बने, जिसके कुछ ही अर्से बाद फलस्तीन के इलाके में एक
07:37
Speaker A
बहुत बड़ा कैद आया, जिससे वहां के लोगों के खाने पीने की चीजें बिल्कुल खत्म हो गईं। और यहां के लोग मजबूरन खाना पना ढूंढने के लिए उस वक्त के सुपर पावर इजिप्ट की तरफ गए ताकि वहां से उनको कुछ मिल सके, जिसमें
07:50
Speaker A
यूसुफ अल सलाम के 11 भाई भी शामिल थे। आखिर यूसुफ अल सलाम की वजह से उनके सारे भाई और बाप याकूब अल सलाम सब फलस्तीन के इलाके को छोड़कर उन्हीं के पास इजिप्ट में आबाद हुए। बनी इसराइल में उस जमाने से लेकर आज तक एक
08:04
Speaker A
बहुत ही जबरदस्त क्वालिटी रही है कि ये जहां भी जाते हैं, बहुत ही तेजी से उस इलाके के सबसे ताकतवर लोग बन जाते हैं। इसी तरह इजिप्ट में भी बनी इसराइल के इन 12 भाइयों के बेटे बहुत तेजी से इजिप्शियंस
08:16
Speaker A
को पीछे छोड़कर इजिप्ट के सबसे ताकतवर और रिच लोग बन गए। यह देखकर आहिस्ता आहिस्ता इजिप्शियंस को समझ आ गई कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो बहुत जल्द हम सारे बनी इसराइल के गुलाम बन जाएंगे। तो आखिर इजिप्ट की ताकत
08:30
Speaker A
और फिरौन ने यह फैसला किया कि इससे पहले कि हम इजिप्शियंस इन बनी इसराइल के गुलाम बने, हम ही इन्हें अपना गुलाम बना देते हैं। जिसके बाद इजिप्शियंस ने बनी इसराइल को कमजोर करने के लिए जबरदस्ती इनके सारे
08:40
Speaker A
बिजनेसेस बंद कर दिए, उनके घरों के अंदर से सब कुछ लूट लिया और बिल्कुल हिटलर की तरह सारे बनी इसराइल को एक जगह पर जमा करके इन्हें अपना गुलाम बना दिया। इसी तरह अगले 400 साल तक बनी इसराइल इजिप्शियंस की
08:54
Speaker A
गुलामी करते रहे। आखिर अल्लाह ने इनकी तरफ अपना एक पैगंबर भेजा, मूसा अल सलाम, जिन्होंने बनी इसराइल को 400 साल की गुलामी के बाद इजिप्ट से निकालकर वापस अपने ग्रेट ग्रैंडफादर इब्राहिम अल सलाम के इलाके फलस्तीन की तरफ रवाना किया।
09:11
Speaker A
यहूदियों की किताब तौरा के मुताबिक एक ही दिन में 6 लाख लोग इजिप्ट को छोड़कर रवाना हुए।
09:23
Speaker A
में गुलाम थे तो उसी टाइम फलस्तीन में कुछ नए बहुत ही ताकतवर कबीले अमलेकाइट्स और एमराइड आबाद हो चुके थे तो अल्लाह ने मूसा अल सलाम को हुकम दिया कि बनी इसराइल के इन 12 कबीलों को अमलेकाइट्स के साथ जंग के
09:37
Speaker A
लिए तैयार करो तो मूसा अल सलाम ने ऐसा ही किया और पूरा बनी इसराइल जंग के लिए तैयार हो गया लेकिन जंग से एक रात पहले ही मूसा अल सलाम ने अमलेकाइट्स की ताकत का अंदाजा लगाने के लिए बनी इसराइल के कुछ जासूस रात
09:50
Speaker A
को उनकी तरफ भेजे लेकिन अब जब बनी इसराइल जंग के लिए बिल्कुल रेडी खड़े तो अचानक उन जासूसों ने वापस आकर बताया कि हम बनी इसराइल उन लोगों का मुकाबला कभी भी नहीं कर सकते क्योंकि यह एमराइड और बाकी कबीले
10:03
Speaker A
हमसे बहुत ही ज्यादा ताकतवर और रिच लोग हैं और उनके पास हथियार भी हमसे बहुत ज्यादा है यह सुनकर बनी इसराइल का सारा हौसला बिल्कुल टूट गया और उन्होंने अपने सारे हथियार फेंककर मूसा अल सलाम से कहा कि आप और आपका रब जाकर लड़े हम इन लोगों
10:19
Speaker A
से नहीं लड़ने वाले बनी इसराइल की इस हरकत से अल्लाह को उन पर बहुत सख्त गुस्सा आया और उसने तौरा में मूसा अल सलाम से कहा कि मैंने बनी इसराइल को इतनी ज्यादा निशानियां दि दिखाई लेकिन इस सब के बाद भी
10:31
Speaker A
इन्होंने मेरे लिए लड़ने से इंकार कर दिया तो अब तुम सब बनी इसराइल अगले 40 साल तक इसी डेजर्ट में रहोगे और तुम्हारा एक-एक बंदा इसी डेजर्ट में मरेगा यही तुम सबकी सजा है यहां तक कि तुम सबकी कबर भी इसी
10:46
Speaker A
डेजर्ट में ही बनेंगी और एगजैक्टली ऐसा ही हुआ अगले 40 साल में बनी इसराइल की जो गुलाम जनरेशन इजिप्ट के फिरौन से आजाद होकर निकली थी इन 40 सालों में वह बिल्कुल खत्म हो गई लेकिन इन सबके साथ मूसा और
11:00
Speaker A
हारून अल सलाम भी इस दुनिया से चले गए इन 40 सालों में बनी इसराइल की एक नई जनरेशन आजाद सोच के साथ बड़ी हुई और उन्होंने यूशा बिन नून अल सलाम की लीडरशिप में आखिर पूरे फलस्तीन को फतह कर
11:14
Speaker A
लिया और इस तरह बनी इसराइल 500 साल के बाद दोबारा फलस्तीन में आबाद हुए यूशा अल सलाम ने पूरे फलस्तीन को फतह करने के बाद फलस्तीन को 12 हिस्सों में डिवाइड कर दिया और बनी इसराइल के 12 कबीलों के हवाले किया
11:28
Speaker A
और इन सबके ऊपर कोई एक बादशाह नहीं बल्कि हर कबीले को कंट्रोल करने के लिए उनके ऊपर जजेस का एक ग्रुप बिठाया जो वक्त के साथ-साथ बनी इसराइल के सारे फैसले करने लगे और इसी तरह अगले 300 साल तक बनी
11:40
Speaker A
इसराइल के यही जजेस पूरे फलस्तीन पर हुकूमत करते रहे लेकिन आहिस्ता आहिस्ता वक्त के साथ-साथ यह जजेस करप्ट होते गए और कुछ पैसों के लिए तौरा की आयात को बिगाड़ करर अपने मर्जी के फैसले देने लगे यहीं से
11:53
Speaker A
तौरा जो मूसा अल सलाम पर नाजिल हुई थी आहिस्ता आहिस्ता चेंजेज आने लगे जिसकी वजह से तौरा की अस असली प्योर शकल इन जजेस की वजह से आहिस्ता आहिस्ता दुनिया से खत्म होने लगी और यह जजेस इतने करप्ट थे कि
12:05
Speaker A
अल्लाह ने इन्हें रोकने के लिए अपने पैगंबर भी भेजे तो इन जजेस ने यह जानकर भी कि वो पैगंबर है उन्हें कत्ल करवा दिया आखिर इन जजेस की 300 साल की करप्शन की वजह से बनी इसराइल बहुत ही कमजोर हो गए जिसका
12:19
Speaker A
फायदा उठाकर पास के एक ताकतवर नए कबीले जिन्हें फिलिस्तीनस कहा जाता था बनी इसराइल पर आकर हमला कर दिया और इस कौम के लीडर का नाम जालू था जिसने बहुत तेजी से बनी इसराइल से ये सारे इलाके छीन लिए और
12:32
Speaker A
इवन उनके कैपिटल जेरूसलम को भी फतह कर लिया अब इससे बनी इसराइल के लोगों को आखिर 300 साल बाद समझ आ गई कि इन्हीं जजेस के गलत फैसलों की वजह से आज हम सब बर्बाद हो चुके हैं तो वो सब उस वक्त के पैगंबर
12:44
Speaker A
सैमुअल के पास चमा हुए और उनसे रिक्वेस्ट की कि आप इन जजेस को हटाकर पूरे बनी इसराइल के लिए एक यूनाइटेड ताकतवर बादशाह चूज करें ताकि हम इन दुश्मनों का मुकाबला कर सके तो सैमुअल ने बनी इसराइल का पहला
12:57
Speaker A
बादशाह चूज किया जिसका नाम था तालू तो तालू बनी इसराइल की फौज को लेकर जालूद से लड़ने के लिए रवाना हुआ और दोनों फौज एक दूसरे के आमने-सामने हुई जंग से पहले जालूद अपनी फौज से सामने आया और बनी
13:09
Speaker A
इसराइल को लड़ने का चैलेंज दिया लेकिन काफी देर तक बनी इसराइल से किसी ने भी आगे जाकर इसका चैलेंज एक्सेप्ट नहीं किया क्योंकि जालूद कोई आम इंसान नहीं था यहूदियों और मॉडर्न एस्टिमेट्स के मुताबिक जालूद की हाइट ऑलमोस्ट 9 फुट के करीब थी
13:22
Speaker A
आजकल कुछ लोग समझते हैं कि जालूद कुछ ज्यादा ही बड़ा था ऑलमोस्ट एक पहाड़ जैसी हाइट थी उसकी लेकिन यह बिल्कुल गलत बल्कि जालूद के हाइट के करीब मॉडर्न जमाने में भी एक इंसान गुजरा है रॉबर्ट डलो जिसकी
13:34
Speaker A
हाइट को देखकर जालूद की हाइट का अंदाजा लगाया जा सकता है जालूद काफी देर तक खड़े होकर बनी इसराइल को जंग के लिए चैलेंज करता रहा आखिर बनी इसराइल की फौज से एक यंग लड़का दाऊद जालूद से लड़ने के लिए
13:45
Speaker A
सामने आया लोगों ने दाऊद को समझाने की कोशिश भी की कि ऐसा मत करो क्योंकि दाऊद और जालूद की हाइट में ऑलमोस्ट इतना बड़ा डिफरेंस था और जालूद भी इस छोटे से लड़के को देखकर हंसने लगे लेकिन जैसे ही लड़ाई शुरू हुई तो दाऊद
13:59
Speaker A
अल सलाम ने दूर से एक पत्थर घुमाकर सीधा जालूद की तरफ फेंका और यह पत्थर सीधा जाकर जालूद के सर पर लगा और वो वहां सबके सामने दाऊद अल सलाम की एक ही वार से जख्मी होकर जमीन पर गिर गए अपने लीडर को इतनी आसानी
14:14
Speaker A
से गिरते हुए देखकर उसकी सारी फौज का मोराल बिल्कुल डाउन हो गया यह देखकर तालू ने बनी इसराइल को हमले का हुकम दिया और कुछ ही देर में जालूद की पूरी फौज जंग छोड़कर भाग गए जंग में दाऊद अल सलाम की
14:25
Speaker A
बहादुरी देखकर वो पूरे बनी इसराइल में एज अ वरियर मशहूर हुए और तालू के बाद दाऊद अल सलाम पूरे फलस्तीन के बादशाह बने दाऊद अल सलाम फलस्तीन के सबसे ताकतवर बादशाह थे लेकिन उनकी वफात के बाद उनके बेटे सुलेमान
14:38
Speaker A
अल सलाम को अल्लाह ने ऐसी बाद शत दी जो उनके बाद पूरी दुनिया में किसी को नहीं मिली मतलब अल्लाह ने सुलेमान अल सलाम को हवाओं परिंदों जिन्नात सब पर कंट्रोल दिया था और इसी ताकत को यूज करके उन्होंने अपने
14:51
Speaker A
कैपिटल जेरूसलम में एक बहुत बड़ी मस्जिद बनाई जिसे आज टेंपल ऑफ सोलोमन कहा जाता है यह टेंपल उस जमाने में दुनिया की सबसे बड़ी बिल्डिंग्स में से से एक और कहा जाता है कि यह सिर्फ एक इबादत की जगह नहीं
15:02
Speaker A
बल्कि बनी इसराइल का पार्लियामेंट भी जहां से सुलेमान अ सलाम अपनी पूरी एंपायर को चलाते थे सुलेमान अल सलाम की वफात के बाद बनी इसराइल ने उनके बेटे रोह बोम को पूरे फलस्तीन का नया बादशाह बनाया लेकिन रोह
15:13
Speaker A
बोम अपने वालिद सुलेमान की तरह कोई जहीन बादशाह नहीं था जिसकी वजह से इसके खिलाफ पूरे फलस्तीन में बगावत होने लगी और इस तरह सुलेमान अल सलाम की अजीम एंपायर दो हिस्सों में डिवाइड हो गए इस डिवीजन में
15:24
Speaker A
एक तरफ बनी इसराइल के 10 कबीले आबाद हुए और दूसरी तरफ सिर्फ दो कबी ले रहे और यह सब आपस में ही लड़ने लगे जिससे अगेन बनी इसराइल इतने कमजोर हुए कि एक दूसरी कौम ने बनी इसराइल के इन 10 कबीलों पर हमला कर
15:37
Speaker A
दिया और बनी इसराइल के इन 10 ट्राइब्स को हमेशा के लिए फलस्तीन से निकाल दिया यहूदी स्कॉलर्स के मुताबिक यह 10 ट्राइब्स फलस्तीन को छोड़कर ईस्ट की तरफ गए और वहीं बरबाद हुए आज बहुत सारे हिस्टोरियंस यह समझते हैं कि यह 10 ट्राइब्स कोई और नहीं
15:52
Speaker A
बल्कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के पठान पख्तून कबीले हैं अब पीछे फलस्तीन में सिर्फ दो ही कबीले रह गए और इन में भी बड़ा कबीला यहूदा कबीला था और इसी कबीले की वजह से आहिस्ता आहिस्ता इनका नाम बनी इस्राइल से चेंज होकर यहूदी पड़ा लेकिन इन
16:07
Speaker A
यहूदियों पर भी कुछ अरसे बाद बेबिलोनिया एंपायर के बादशाह बख्ते नसर ने हमला कर दिया और फलस्तीन में ऐसी तबाही मचाई कि लाखों यहूदियों को कत्ल किया और सुलेमान अल सलाम की बनाई हुई मस्जिद टेंपल ऑफ सोलोमन को भी आग लगा दी और जो यहूदी जिंदा
16:22
Speaker A
बचे थे उन सबको गुलाम बनाकर अपने कैपिटल बैबल ले गया और इस तरह सुलेमान अल सलाम की यह अजीम एंपायर हमेशा के लिए खत्म हो गई और इस तरह यहूदी एक बार फिर बिल्कुल फिरौन की तरह अगले 50 साल तक एक दूसरे बादशाह के
16:36
Speaker A
गुलाम बने लेकिन 50 साल के बाद अल्लाह ने यहूदियों को दोबारा बचाने के लिए अपना एक बंदा भेजा सायरस द ग्रेट जो उस जमाने में ईरान पर्शियन एंपायर का पहला बड़ा बादशाह था जिसने अपनी पूरी फौज लेकर बेबिलोनिया
16:50
Speaker A
एंपायर पर हमला कर दिया और इन्हें खत्म कर दिया और यहूदियों को गुलामी से निकालकर वापस फलस्तीन और जेरूसलम की तरफ भेजा और इन्हें पैसे भी दिए कि जा कर सुलेमान अल सलाम के उस टेंपल को दोबारा बनाओ आज बहुत
17:03
Speaker A
सारे मुसलमान स्कॉलर्स ऐसे भी जो सायरस द ग्रेट को जुलकरनैन समझते हैं जिसे हम फिर कभी एक्सप्लेन करेंगे तो सब्सक्राइब सायरस द ग्रेट की मदद से एक बार फिर यहूदी फलस्तीन के इलाके में आबाद हुए और फलस्तीन वापस आकर सबसे पहले यहूदियों ने सुलेमान
17:17
Speaker A
अल सलाम के टेंपल को उसी जगह पर दोबारा बनाया जहां इससे पहले बनाया गया था यह टेंपल आज तो दुनिया में मौजूद नहीं है लेकिन इस टेंपल की एक दीवार वेस्टर्न वॉन आज भी वहां मौजूद है और यह दीवार यहूदियों
17:29
Speaker A
के लिए उतनी ही इंपॉर्टेंट है जितना मुसलमानों के लिए काबा है इसके बाद अगले 500 साल तक यहूदी इसी तरह फलस्तीन में आबाद रहे लेकिन 500 साल बाद अब दुनिया में एक नई सुपर पावर बन चुकी थी द ग्रेट रोमन
17:43
Speaker A
एंपायर जिन्होंने आकर फलस्तीन को दोबारा यहूदियों के हाथों से छीन लिया और उसे अपनी ग्रेट एंपायर का एक छोटा सा प्रोविंस बनाया अब जब सारे यहूदी रोमन एंपायर के अंडर अपनी जिंदगी गुजार रहे थे तो अल्लाह ने इनकी
17:58
Speaker A
तरफ अपना एक अज अजम पैगंबर भेजा ईसा अलैहि सलाम उस वक्त तक यहूदी इतने करप्ट हो चुके थे कि वो अल्लाह की तरफ से भेजे गए पैगंबरों की भी बातें नहीं सुनते थे बल्कि इससे पहले उन्होंने जकरिया और यया अल सलाम
18:10
Speaker A
को भी जान से मार दिया था ईसा अल सलाम ने यहूदियों को समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन सिर्फ कुछ लोगों के अलावा बाकी सारे यहूदियों ने ईसा अल सलाम की बात नहीं मानी और उन्हें एक झूठा पैगंबर कहा और सारे
18:21
Speaker A
यहूदियों ने रोमन एंपायर के साथ मिलकर ईसा अल सलाम को मारने की साजिश की और जैसे ही ये सब मिलकर ईसा अल सलाम को मारने वाले थे बिलकुल आखिरी टाइम में अल्लाह ने उन्हें बचा लिया और उन्होंने ईसा अल सलाम की बजाय
18:34
Speaker A
एक दूसरे शख्स को सूली पर चढ़ाकर मार दिया अब ईसा अल सलाम तो दुनिया से चले गए लेकिन यहूदियों और रोमंस के दरमियान आहिस्ता आहिस्ता लड़ाइयां शुरू होने लगी ईसा अल सलाम के बाद अल्लाह ने यहूदियों को कभी भी
18:45
Speaker A
माफ नहीं किया क्योंकि ईसा अल सलाम के बाद आज तक यहूदियों के पास और कोई पैगंबर नहीं भेजा गया और ईसा अल सलाम के खिलाफ साजिश करने पर अल्लाह ने यहूदियों से ऐसा बदला लिया कि उनके जाने के कुछ ही अरसे बाद
18:57
Speaker A
रोमंस और यहूदियों की लड़ाई शुरू हुई और रोमंस ने यहूदियों को ऐसा तबाह किया कि अगले 2000 साल तक यहूदी दोबारा फलस्तीन में आबाद नहीं हो सके रोमंस ने फलस्तीन में लाखों यहूदियों को मारा और इवन यहूदियों के मेन टेंपल सुलेमान अल सलाम के
19:11
Speaker A
टेंपल को भी आग लगाकर गिरा दिया जिसके बाद आज तक यहूदी यह टेंपल दोबारा नहीं बना सके लेकिन यहूदियों का मानना है कि आखिरी जमाने में उनका एक मसीह आएगा जो दोबारा जेरूसलम की इसी जगह पर उनका तीसरा और
19:24
Speaker A
आखिरी टेंपल बनाएगा और तब यहूदी पूरी दुनिया पर हुकूमत करेंगे और रोमंस ने यद यहूदियों पर हमेशा के लिए पाबंदी लगा दी कि यहूदियों को अपनी होली सिटी जेरूसलम की तरफ आने की इजाजत नहीं है और अगले 600 साल
19:36
Speaker A
तक रोमन एंपायर ही फलस्तीन पर हुकूमत करती रही और इन्हीं 600 साल के दौरान अपने रिलीजन को छोड़कर पूरी रोमन एंपायर ने क्रिश्चियनिटी को अपना रिलीजन बनाया यहां तक स्टोरी सिर्फ इब्राहीम अल सलाम के एक बेटे इसहाक अल सलाम के नस्ल के बारे में
19:50
Speaker A
थी लेकिन यहां से दुनिया की स्टोरी बिल्कुल बदल जाती क्योंकि इब्राहिम अल सलाम के पहले बेटे इस्माइल अल सलाम जो इससे हजारों साल पहले फलस्तीन को छोड़ कर अरब में आबाद हुए थे अल्लाह ने उन्हीं के नस्ल में से अपना आखिरी पैगंबर भेजा
20:03
Speaker A
मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अब जब मक्का में रसूलल्लाह सल्ला वसल्लम लोगों को इस्लाम की दावत दे रहे थे तो उसी टाइम एक बार फिर फलस्तीन पर हमला किया गया लेकिन इस बार यह हमला पर्जन एंपायर के बादशाह ने किया उसने जेरूसलम को फतह करके
20:18
Speaker A
यहां 1 लाख क्रिश्चन को मार दिया और अगेन जेरूसलम की पूरी सिटी को तबाह कर दिया और यहां के चर्चस को भी आग लगा दी और उस क्रॉस को भी अपने साथ वहां से ले गए जिस पर क्रिश्चियन समझते हैं कि ईसा अल सलाम
20:30
Speaker A
को मारा गया था आज भी दुनिया के हर चर्च में इसी क्रॉस की कॉपी बनाकर लगाई जाती है इस सब के कुछ ही अर्से बाद रोमन एंपायर ने पर्शियंस को तो हरा दिया और जेरूसलम को दोबारा आबाद कर लिया ये इतनी अजीम जंग थी
20:43
Speaker A
कि कुरान के सूर रोम में इस जंग के बारे में आयात भी भेजी गई जिसे हम इस वीडियो में एक्सप्लेन कर चुके हैं इस सब के बाद रोमन एंपायर ने तो पर्शियंस को हरा दिया और अपने क्रॉस को वापस लाकर पूरे जेरूसलम
20:54
Speaker A
की सिटी को दोबारा आबाद किया और अब रोमन एंपायर का ख्याल था कि उन्हें चैलेंज करने वाला दुनिया में आप कोई भी नहीं लेकिन साथ ही अरब में मुसलमानों की खिलाफत बहुत तेजी से आगे बढ़ रही थी और मुसलमानों की खिलाफत
21:05
Speaker A
इतनी मजबूत हो चुकी थी कि कुछ ही सालों में हजरत उमर रज अल्लाह ताला अन्हो की खिलाफत में एक बार फिर जेरूसलम को चारों तरफ से घेर लिया गया नाउ जेरूसलम के लीडर सफ्री उस को इस सिटी के हिस्ट्री का बहुत अच्छी तरह पता
21:20
Speaker A
था और उसे पता था कि इससे पहले जिसने भी इस सिटी को फतह किया उसने इस सिटी की एक-एक चीज को तबाह किया तो अब सफ्री अस इस बात से डर रहा था कि अब मुसलमान भी इस सिटी का वही हाल ना करें जो इससे पहले
21:31
Speaker A
बाकियों ने किया था सफ्री जेरूसलम से अपने बादशाह हरक की तरफ लेटर्स भेजता रहा कि वोह आकर इसकी मदद कर सके लेकिन 4 महीने गुजरने के बाद भी कोई भी उसकी मदद के लिए नहीं आया तो उसने मजबूरन इस सिटी को
21:43
Speaker A
सरेंडर करने का इरादा किया लेकिन सरेंडर से पहले उसने एक बहुत ही अजीब डिमांड रखी जो इससे पहले किसी ने भी नहीं रखी थी सफ्री अस ने मुसलमानों के जनरल अबू उबैद की तरफ लेटर भेजा कि मैं सिर्फ एक ही शर्त
21:54
Speaker A
पर इस अजीम सिटी को मुसलमानों के सामने सरेंडर करूंगा कि मुसलमानों के खलीफा उमर बिन खत्म खुद आकर मुझसे मिले क्योंकि सफर नियस के दिल में अब जेरूसलम को बचाने की सिर्फ एक ही उम्मीदी खलीफा उमर बिन खत्म
22:06
Speaker A
क्योंकि सफ्री अस ने इससे पहले हजरत उमर के बारे में बार-बार सुना था कि हजरत उमर दुनिया के बाकी सारे बादशाहों से बहुत ही डिफरेंट है बल्कि वो अपने आप को बादशाह कहलवान भी पसंद नहीं करते और दुनिया का
22:18
Speaker A
सबसे ताकतवर इंसान होने के बाद भी बिल्कुल आम लोगों की तरह जिंदगी गुजारते हैं हजरत उमर रजला ताला अन की यही सिंपलीसिटी की स्टोरीज पूरी दुनिया में मशहूर हो चुकी थी कि एक बार एक रोमन जनरल मुसलमानों की
22:29
Speaker A
कैपिटल मदीना है और सहाबा से कहा कि मुझे खलीफा उमर से मिलना है उस जनरल का ख्याल था कि हजरत उमर जरूर किसी बहुत बड़े महल या पैलेस में रह रहे होंगे कि मुसलमानों का इतना अजीम खलीफा जिसके नाम से पूरी
22:41
Speaker A
दुनिया कामती है एक दरख्त के नीचे पत्थर पर सर रखकर आराम फरमा रहे हैं हजरत उमर रज अल्लाह ताला अन्हो की इसी सादगी का सफ्री उस को बहुत अच्छी तरह पता था और उसे पता था कि जेरूसलम को तबाही से सिर्फ हजरत उमर
22:52
Speaker A
ही बचा सकते हैं तो अबू उबैद ने मजबूरन हजरत उमर रज अल्ला ताला अन्हो की तरफ खत भेजा कि बगैर किसी खून खराबे के अब जरू मुस्लम को सिर्फ आप ही फतह कर सकते हैं यह देखकर हजरत उमर रज अल्लाह ताला अन्हो ने
23:02
Speaker A
सारे बड़े सहाबा को अपने पास जमा किया और उनसे पूछा कि अब मुझे क्या करना चाहिए जिस पर हजरत उस्मान रजि अल्ला ताला अन्हो ने मशवरा दिया कि आपको जेरूसलम की तरफ नहीं जाना चाहिए क्योंकि रोमंस ऑलमोस्ट ये जंग
23:13
Speaker A
हार चुके हैं और अब उनकी इतनी औकात नहीं है कि खलीफा खुद उनके पास जाए लेकिन वहां पर हजरत अली रज अल्लाह ताला अन्हो की राय यह थी कि हजरत उमर को जेरूसलम की तरफ जरूर जाना चाहिए उमर रज अल्लाह ताला अन्हो को
23:24
Speaker A
वहां सबसे ज्यादा हजरत अली रजि अल्ला ताला अन्हो की राय पसंद आई इसी के साथ हजरत उमर रजि अल्ला ताला अन्हो अपनी खिलाफत में पहली बार मदीना को छोड़कर फलस्तीन की तरफ रवाना हुए और वहां रोमन एंपायर में भी
23:35
Speaker A
मुसलमानों की सारी फौज यह सुनकर अपने खलीफा का बेसब्र से इंतजार करने लगी लेकिन जाने से पहले हजरत उमर ने अली रजि अल्लाह ताला अन्हो को अपने पास बुलाया और मदीना के साथ-साथ पूरे अरब का कंट्रोल हजरत अली
23:46
Speaker A
के हवाले करके वहां से चले गए पहली बार कोई खलीफा अरब से बाहर निकल रहा था इतनी बड़ी इस्लामिक एंपायर का खलीफा हजरत उमर कुछ ही सहाबा के साथ मदीना से जेरूसलम की तरफ रवाना हुए मदीना और जेरूसलम के
23:58
Speaker A
दरमियान 1400 किमी का डिफरेंस है और इसे ऊंटों पर कवर करने में ऑलमोस्ट एक महीना लग जाता था लेकिन इस इतने लंबे सफर के लिए भी हजरत उमर के पास सिर्फ एक ऊंट कुछ खाने पीने की चीजें और साथ कुछ ही सहाबा थे
24:11
Speaker A
जबकि हजरत उमर उस वक्त दुनिया के सबसे ताकतवर लोगों में से एक थे इसके मुकाबले में अगर आजकल के मुस्लिम लीडर्स को देखा जाए जैसे ही हजरत उमर वहां एंटर हुए तो वहां खालिद बिन वलीद और यजद बिन अबी
24:25
Speaker A
सुफियान उनको वेलकम करने के लिए खड़े थे और इन दोनों ने इस इंपोर्टेंट दिन की वजह से बहुत ही कीमती और महंगे कपड़े पहने थे हजरत उमर ने जब इन दोनों के महंगे कपड़े देखे तो उन्हें बहुत सख्त गुस्सा आया और
24:35
Speaker A
उन्होंने जमीन से कुछ पत्थर उठाकर इन दोनों की तरफ फेंके और कहा कि ये तुम लोगों ने क्या पहना है इतनी जल्दी तुमने हमारे तरीके छोड़कर रोमंस के तरीके अपना लिए हैं अब जैसे ही हजरत उमर यहां पहुंचे
24:46
Speaker A
तो वहां जेरूसलम के क्रिश्चन को भी खबर मिल गई कि हजरत उमर सिर्फ उनकी रिक्वेस्ट पर मदीना से चलकर यहां पर आए हैं तो सोफ्रोनिया उस ने अपना मैसेंजर हजरत उमर रज अल्ला ताला अन्हो के पास मुसलमानों का
24:55
Speaker A
हेड क्वार्टर भेजा और यहीं पर हजरत उमर ने अपनी जिंदगी की सबसे इंपोर्टेंट एग्रीमेंट जिसे आज तक पूरी दुनिया याद करती है साइन की और यह तारीख में पहली बार था कि किसी बादशाह ने जेरूसलम को इस तरह फतह किया
25:07
Speaker A
बिस्मिल्लाह रहमान रहीम यह अमान अल्लाह के बंदे अमीरुल मोमिनीन उमर बिन खत्म की तरफ से तमाम क्रिश्चियंस के लिए है कि अगर वह जेरूसलम को छोड़कर जाना चाहे तो जा सकते हैं और अगर यहीं पर रहना चाहे तो उन्हें
25:20
Speaker A
यहां कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा मुसलमान किसी चर्च को नहीं गिराए मुसलमान किसी से उनका माल नहीं छीने गे किसी को जबरदस्ती इस्लाम लाने पर मजबूर नहीं किया जाएगा यहां तक कि किसी के साथ बदसलूकी रेसिजम भी नहीं किया जाएगा मुसलमान किसी
25:34
Speaker A
से भी जबरदस्ती उनकी जमीनें नहीं छीने गे बाकी हर सिटी की तरह इन्हें मुसलमानों को टैक्स जजिया देना पड़ेगा इस एग्रीमेंट में हजरत उमर और क्रिश्चन के दरमियान सिर्फ एक ही चीज पर क्लैश आया यहूदी क्योंकि क्रिश्चियन यहूदियों से इतनी नफरत करते थे
25:48
Speaker A
कि पिछले 600 साल से रोमंस ने यहूदियों के जेरूसलम आने पर पाबंदी लगा दी थी हालांकि यह यहूदियों के लिए सबसे इंपॉर्टेंट जगह थी क्रिश्चियंस ने जेरूसलम सरेंडर करने से पहले यही डिमांड रखी थी कि मुसलमान भी बिल्कुल पहले की तरह यहूदियों के इस सिटी
26:02
Speaker A
में आने पर पाबंदी लगा द लेकिन हजरत उमर को इनकी यह बात पसंद नहीं आई और इस एग्रीमेंट में लिखा कि यहूदी जब भी जेरूसलम आना चाहे आ सकते हैं लेकिन हजरत उमर को पता था कि अगर 600 साल बाद यहूदी
26:13
Speaker A
दोबारा आकर जेरूसलम में आबाद हुए तो यहां के क्रिश्चियंस और यहूदियों के दरमियान बहुत बड़ी लड़ाई शुरू हो गई क्योंकि यह सिटी सब रिलीजस के लिए एक होली सिटी थी तो हजरत उमर ने ऑर्डर दिया कि यहूदी यहां आ
26:24
Speaker A
तो सकते हैं लेकिन यहां रह नहीं सकते हजरत उमर रज अल्ला ताला अन्हो का यह ऑर्डर इ इतना ब्रिलियंट था क्योंकि अगर आज देखा जाए जब से यहूदी फलस्तीन आकर जबरदस्ती आबाद हुए हैं तब से लेकर आज तक फलस्तीन
26:35
Speaker A
में एक अन एंडिंग वॉर चल रही है जो आज तक जारी है यह एग्रीमेंट लिखने के बाद हजरत उमर ने रसूलल्लाह सल्ला वसल्लम की अंगूठी से इस एग्रीमेंट पर मोहर लगाई और खालिद बिन वलीद और बाकी सारे जनरल्स इस पर गवाही
26:48
Speaker A
लिखी नाउ इस मुआद से सबसे ज्यादा खुशी यहूदियों को हुई क्योंकि पूरी दुनिया के यहूदियों ने 600 साल गुजरने के बाद पहली बार हजरत उमर रज अल्ला ताला अहो की वजह से अपनी होलि सिटी जेरूसलम को दोबारा देखा ये
27:00
Speaker A
वही यहूदी थे जो इससे पहले हमेशा रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और इस्लाम के खिलाफ साजिशें करते रहते थे लेकिन अब जब मुसलमानों को ताकत मिली तो मुसलमानों ने क्रिश्चियंस के सामने खड़े होकर यहूदियों के लिए आवाज उठाई सफ्री असस
27:13
Speaker A
का यह मैसेंजर जब हजरत उमर रज अल्लाह ताला अन्हो की एग्रीमेंट लेकर वापस जेरूसलम पहुंचा तो वहां सारे क्रिश्चियंस इसे पढ़कर सेलिब्रेट करने लगे क्योंकि उनका ख्याल था कि पिछले हर बादशाह की तरह हजरत उमर भी इस सिटी को फतह करने के बाद तबाह
27:25
Speaker A
कर देंगे लेकिन हजरत उमर रज अल्लाह ताला अन्हो ने ऐसा नहीं किया और तारीख में पहली बार बगैर किसी खून खराबे के बिल्कुल अमन के साथ जेरूसलम फतह कर लिया अब हजरत उमर रजि अल्लाह ताला अन्हो का नाम जेरूसलम के
27:36
Speaker A
हर क्रिश्चन की जबान पर था और यहां के सारे लोग इस अजीम बादशाह को पहली बार देखने के लिए इंतजार करने लगे तो हजरत उमर रज अल्ला ताला अन्हो भी मुसलमानों के हेड क्वार्टर को छोड़कर पहली बार जेरूसलम की
27:48
Speaker A
तरफ रवाना हुए जैसे ही हजरत उमर रज अल्ला ताला अन्हो जेरूसलम के बाहर मुसलमानों की फौज के करीब पहुंचे तो वहां अबू उबैद रजि अल्लाह ताला अन और बाकी मुसलमानों ने उनका वेलकम किया उन मुसलमान जनरल्स ने जब हजरत
27:59
Speaker A
उमर रज अल्लाह ताला अह के सादा और पुराने कपड़े देखे तो उन्होंने हजरत उमर रज अल्लाह ताला अंह से रिक्वेस्ट की कि आप ये पुराने कपड़े चेंज करके कुछ नए और महंगे कपड़े पहने और हजरत उमर रज अल्लाह ताला
28:08
Speaker A
अनहुई सवारी के लिए एक खूबसूरत घोड़ा भी लेकर आए लेकिन हजरत उमर रज अल्लाह ताला अन्हो ने उन सबसे कहा कि नहीं एक जमाना था कि हम दुनिया के सबसे कमजोर और बैकवर्ड लोगों में से थे और आज जो हमें यह इज्जत
28:20
Speaker A
मिली है वह हमारे कपड़ों या सवारी की वजह से नहीं बल्कि सिर्फ और सिर्फ इस्लाम की वजह से मिली है यह कहते ही हजरत उमर रज अल्ला ताला अन्हो यहां से जरू मुलम की तरफ रवाना हुए अब यहां पे एक बहुत ही
28:30
Speaker A
इंटरेस्टिंग स्टोरी और एक बहुत बड़ी कंफ्यूजन भी है कि हजरत उमर रज अल्लाह ताला अहो अपने गुलाम के साथ सिर्फ एक ही ऊंट पर जेरूसलम की तरफ गए रास्ते में यह दोनों बारी-बारी इस ऊंट की सवारी करते थे
28:41
Speaker A
और जैसे ही ये दोनों जेरूसलम पहुंचे तो ऊंट पर हजरत उमर ने बल्कि उनके गुलाम बैठे हुए थे यह स्टोरी हम सबने बचपन से बार-बार सुनी है लेकिन यह बिल्कुल एक अनऑथेंटिकेटेड चारों तरफ से जेरूसलम को घेर रखा था उनके
29:00
Speaker A
और जेरूसलम की गेट के दरमियान इतना फासला था ही नहीं कि जिसके लिए ऊंट को बार-बार चेंज किया जाए इसके अलावा मुसलमानों की फौज में उस वक्त हजारों ऊंट मौजूद थे उनमें से भी किसी ऊंट को यूज किया जा सकता
29:11
Speaker A
था और अगेन ये स्टोरी किसी भी इस्लामिक ऑथेंटिक बुक में नहीं लिखी हुई इन सब चीजों को देखकर यही लगता है कि ये स्टोरी बाद में आने वाले लोगों ने अपनी तरफ से बनाई और इस्लामिक हिस्ट्री की लेटेस्ट बुक
29:22
Speaker A
तारीख उम्मते मुस्लिमा में भी इस स्टोरी को एक अनऑथेंटिकेटेड खुद जाकर रिसर्च करें और चैट जीबीटी से मत पूछे वोह आपको गलत बताए खुद रिसर्च करें हजरत उमर रजला ताला अन्हो सीधा जेरूसलम के अंदर एंटर हुए और वहां के सारे लोग उनकी
29:37
Speaker A
सिंपलीसिटी देखकर बहुत इंप्रेस हुए जेरूसलम में क्रिश्चियंस के लीडर सफ्री हजरत उमर को सीधा उस चर्च की तरफ ले गए जो आज तक क्रिश्चियंस के लिए सबसे होली जगह है हजरत उमर जब चर्च में ही थे तो नमाज का
29:48
Speaker A
वक्त हुआ सफ्री अस ने वहीं पर हजरत उमर को चर्च के अंदर ही नमाज पढ़ने की रिक्वेस्ट की लेकिन हजरत उमर ने वहां नमाज नहीं पढ़ी और कहा कि अगर मैंने यहां पर नमाज पढ़ ली तो मु मुसलमान जरूर इस चर्च को एक दिन
30:00
Speaker A
मस्जिद में कन्वर्ट करेंगे और हजरत उमर नहीं चाहते थे कि मुसलमान क्रिश्चियंस की इस होली जगह को बदल दें और हजरत उमर की बात बिल्कुल सही थी क्योंकि आज इस चर्च के करीब ही उमर बिन खत्म के नाम से एक मस्जिद
30:11
Speaker A
बनाई गई हजरत उमर यहां से सीधा बैतुल मकद की तरफ गए और देखा कि रोमंस ने यहूदियों की नफरत की वजह से बैतुल मकद को गंदगी का ढेर बनाया हुआ है तो हजरत उमर बाकी सहाबा के साथ खुद अपने हाथों से बैतुल मकद की
30:23
Speaker A
सफाई करने लगे हजरत उमर रज अल्लाह ताला अन्हो ने बैतुल मकद की पूरी सफाई के बाद यहां पर हाबा की एक मीटिंग बुलाई कि हमें यहां पर मस्जिद कौन सी जगह पर बनानी चाहिए तो काब रजि अल्लाह ताला अन्हो ने मशवरा
30:33
Speaker A
दिया जो इस्लाम लाने से पहले यहूदी थे कि हमें मस्जिद बैतुल मकद के इस पत्थर के पीछे बनानी चाहिए ताकि हम बैतुल मकद और काबा दोनों को सामने रखकर नमाज पढ़ सके लेकिन इस बात पर हजरत उमर को बहुत सख्त
30:45
Speaker A
गुस्सा आया और उन्होंने काब से कहा कि तुमसे अभी तक यहूदियों की आदतें नहीं निकली उसके बाद हजरत उमर रज अल्ला ताला अन्हो ने हुकम दिया कि मस्जिद को बैतुल मकद के इस पत्थर के आगे बनाई जाए जिसका
30:56
Speaker A
मुंह काबा की तरफ हो और पीठ यहूदियों के इस पत्थर की तरफ क्योंकि अब दुनिया का किबला बदल चुका है और यहीं से पहली बार मस्जिदए अक्सा की बुनियाद रखी गई और आज तक जब भी मुसलमान मस्जिदए अक्सा में नमाज
31:08
Speaker A
पढ़ते हैं तो बैतुल मकद का यह पत्थर और उसके ऊपर यह बिल्डिंग उनके पीठ के पीछे होती है उमर रज अल्ला ताला अन्हो के हुकम से मुसलमानों ने यहां पर एक छोटी सी लकड़ियों की मस्जिद बनाई और मस्जिद बनाने
31:19
Speaker A
के बाद हजरत उमर ने बिलाल रजि अल्लाह ताला अन्हो से रिक्वेस्ट की जो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की वफात के बाद यहीं शाम में आबाद हो चुके थे और हजरत बिलाल ने यह अहद किया था कि आप आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
31:29
Speaker A
की वफात के बाद वो दोबारा कभी भी अजान नहीं देंगे लेकिन अब यह इतना अजीम दिन था और खलीफा उमर रज अल्ला ताला अन का ऑर्डर भी था तो हजरत बिलाल रजि अल्लाह ताला अहो आगे आए और उन्होंने पहली बार बैतुल मकद पर
31:41
Speaker A
खड़े होकर अजान देना शुरू की हजरत बिलाल रज अल्ला ताला अन की अजान को सुनकर वहां मौजूद सारे सहाबा रोने लगे क्योंकि यही बिलाल आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जमाने में भी मदीना में अजान दिया करते थे यह वो जमाना था जब मुसलमानों के पास कुछ
31:55
Speaker A
भी नहीं था यहां तक कि कई दिन तक उन के पास खाने पीने की चीजें भी नहीं होती थी लेकिन इस सब के बाद भी आप सल्लल्लाहु अ वसल्लम मुसलमानों से कहते रहते थे कि एक दिन ऐसा जरूर आएगा कि मुसलमान रोमन और
32:08
Speaker A
पर्जन एंपायर दोनों को हराए यहां तक कि जेरूसलम को भी फतह करेंगे और आज मुसलमान इन दोनों अंपायर्स को हराकर दुनिया के सुपर पावर बन चुके थे और वही बिलाल रज अल्ला ताला अ दोबारा अजान दे रहे थे उस दिन से लेकर आज तक पिछले
32:27
Speaker A
1400 साल से हर दिन बैतुल मकद में उसी तरह अजान दी जाती है और इस तरह इस अजीम सिटी पैगंबरों की सिटी जेरूसलम को बगैर कोई खून बहाए हजरत उमर रज अल्ला ताला अ ने फतह कर लिया लेकिन जेरूसलम की फतह को तो
32:41
Speaker A
रसूलल्लाह सल्लम ने पहले ही बता दिया था लेकिन इसके साथ ही आप सल्लल्लाहु अल वसल्लम ने एक और भी बहुत शॉकिंग बात कही थी कि एक दिन जंगे तबू के दौरान आप सल्लल्लाहु अल वसल्लम अपने कैंप में बैठे
32:52
Speaker A
हुए थे तो उन्होंने पास बैठे एक सहाबी से कहा कि मुझसे कयामत की कुछ निशानियां सुनो मेरी मौत जेरूसलम की फतह और इस फतह के बाद एक ऐसी बीमारी जो तुम मुसलमानों को ग्रेट नंबर्स में मारेगी और जेरूसलम फतह करने के
33:09
Speaker A
बाद एगजैक्टली ऐसे ही हुआ इस बीमारी ने हजारों मुसलमानों की जान ली और मुसलमानों के बड़े-बड़े जनरल्स अबू उबैद यजद और माज बिन जबल शहीद हुए और इन्हीं के साथ दुनिया की तारीख के सबसे बड़े जनरल खालिद बिन
33:23
Speaker A
वलीद भी अपने जिस्म पर जख्मों की वजह से इस दुनिया से चले गए इन सब बड़े-बड़े जनरल्स की वफात के अब कुछ नए लोगों को चांस मिला कि वह सामने आकर लीडर्स बन सके जिनमें से एक का नाम था मुआविया बिन अबी
33:35
Speaker A
सुफियान सब्सक्राइब
Topics:जेरूसलमफलस्तीनहजरत उमरइस्लामिक इतिहासफतहरोमन साम्राज्यपर्जन साम्राज्यपैगंबरमस्जिदे अक्साधार्मिक इतिहास

Get More with the SozAI App

Transcribe recordings, audio files, and YouTube videos — with AI summaries, speaker detection, and unlimited transcriptions.

Or transcribe another YouTube video here →