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3000 Years of Israel Vs Palestine | The Kohistani

फलस्तीन और इसराइल का 3000 सालों का संघर्ष, धार्मिक इतिहास और विभिन्न बादशाहों की भूमिका का विस्तृत वर्णन।

Key Takeaways

  • फलस्तीन का संघर्ष केवल आधुनिक नहीं, बल्कि हजारों साल पुराना है।
  • धार्मिक ग्रंथों में फलस्तीन के अधिकार को लेकर विभिन्न व्याख्याएं हैं।
  • इतिहास में कई बादशाहों ने जेरूसलम को कब्जा किया, लेकिन मुसलमानों ने शांति से शासन किया।
  • सुल्तान सलाहुद्दीन अयूबी ने धार्मिक सहिष्णुता का उदाहरण प्रस्तुत किया।
  • आधुनिक संघर्ष की जड़ें ऐतिहासिक और धार्मिक विवादों में गहरी हैं।

What the video covers

  • फलस्तीन और इसराइल के बीच 3000 सालों से चल रही लड़ाई का ऐतिहासिक और धार्मिक संदर्भ।
  • मूसा अल सलाम के नेतृत्व में बनी इसराइल की इजिप्त से मुक्ति और फलस्तीन पर कब्जे की पहली कोशिश।
  • तौरा में वर्णित इब्राहिम अल सलाम की औलाद इसहाक और इस्माइल के बीच अधिकार का विवाद।
  • दाऊद और सुलेमान अल सलाम के शासनकाल में जेरूसलम की विजय और टेंपल का निर्माण।
  • बैबिल और रोमन साम्राज्यों द्वारा जेरूसलम पर हमले और यहूदियों की गुलामी।
  • इस्लाम के उदय और हजरत उमर द्वारा जेरूसलम की शांति पूर्ण विजय।
  • क्रुसेडर्स द्वारा जेरूसलम पर हमला और मुसलमानों व यहूदियों पर अत्याचार।
  • सुल्तान सलाहुद्दीन अयूबी द्वारा जेरूसलम की पुनः विजय और धार्मिक सहिष्णुता।
  • मुस्लिम, यहूदी और क्रिश्चियन समुदायों का जेरूसलम में लंबे समय तक शांति से रहना।
  • आधुनिक काल में ऑटोमन साम्राज्य का पतन और ब्रिटिश-अरब गठबंधन के प्रभाव।

Answers

Questions about this video

फलस्तीन और इसराइल के बीच संघर्ष की शुरुआत कब हुई?

संघर्ष की शुरुआत लगभग 3000 साल पहले हुई जब मूसा अल सलाम ने बनी इसराइल को इजिप्त की गुलामी से आजाद कराया और फलस्तीन पर कब्जे की कोशिश की।

तौरा में फलस्तीन के अधिकार को कैसे दर्शाया गया है?

तौरा में लिखा है कि फलस्तीन इब्राहिम अल सलाम की औलाद के लिए है, लेकिन यह अधिकार केवल इसहाक की औलाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इस्माइल की औलाद को भी इसका हक है।

हजरत उमर ने जेरूसलम पर कब्जा कैसे किया और उनका रवैया कैसा था?

हजरत उमर ने बिना किसी रक्तपात के जेरूसलम पर कब्जा किया और सभी धर्मों को आजादी दी, जिससे जेरूसलम में शांति स्थापित हुई।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:01
Speaker A
फलस्तीन यह सिर्फ आज का मसला नहीं बल्कि पिछले 3000 साल से इस सिटी को कब्जा करने की लड़ाई चल रही है। आज से 3300 साल पहले अल्लाह ने मूसा अल सलाम को हुक्म दिया कि बनी इसराइल यहूदी को इजिप्त में फिरौन की गुलामी से निकालकर आजाद कर दो। और फिर बहुत मुश्किल से फिरौन ने आखिर बनी इसराइल को आजाद कर दिया, जिसके बाद मूसा अल सलाम बनी इसराइल को लेकर फलस्तीन के पास आए और कहा कि इस सिटी पर हमला करो। लेकिन बनी इसराइल ने कहा कि आप और आपका रब जाकर लड़े, हम यह लड़ाई नहीं करने वाले, जिसकी वजह से अल्लाह ने 40 साल तक इन्हें इस डेजर्ट में रहने की सजा दी। जिधर मूसा अल सलाम पर आसमानी किताब तौरा नाजिल हुई और इस तौरा के पहले चैप्टर द बुक ऑफ जेनेसिस में क्लीयरली लिखा है, साफ-साफ लिखा है कि यह इलाका फलस्तीन अल्लाह ने सिर्फ और सिर्फ इब्राहिम अल सलाम की औलाद के लिए रखा है। जिसकी वजह से आज तक यह जितनी लड़ाइयां चल रही हैं, यह इसलिए है क्योंकि यहूदी एक क्लेम करते हैं कि तौरा की इस आयत के मुताबिक जेरूसलम और फलस्तीन पर सिर्फ और सिर्फ बनी इसराइल का हक है। क्योंकि बनी इसराइल इब्राहीम अल सलाम की औलाद इसहाक अल सलाम की औलाद में से है। एंड इट मेक्स सेंस, तब तो इनको मिलना चाहिए। लेकिन तौरा में लिखा है कि यह इलाका इब्राहिम अल सलाम की औलाद के लिए है, सिर्फ इसहाक अल सलाम की औलाद के लिए नहीं। इब्राहिम अल सलाम के एक नहीं बल्कि दो बेटे थे, इसहाक और इस्माइल। इसहाक अल सलाम वाज द फादर ऑफ बनी इसराइल, बट इस्माइल अल सलाम को अरबों का फादर समझा जाता है। और यह बात सिर्फ हम नहीं, इवन यहूदी भी इस बात को मानते हैं। तो इन्हीं की किताब तौरा के मुताबिक फलस्तीन पर सिर्फ इसहाक अल सलाम की औलाद का हक नहीं है, बल्कि इस्माइल अल सलाम की औलाद अरबों का भी हक है। मूसा अल सलाम के साथ 40 साल डेजर्ट में रहने के बाद आखिर बनी इसराइल ने यूशा जोशुआ की लीडरशिप में फलस्तीन को फतह कर लिया। लेकिन कुछ ही अर्से बाद यह सिटी इनके हाथ से दोबारा निकल गई और फिर अगले 300 साल तक बनी इसराइल इस सिटी को दोबारा हासिल नहीं कर सके। लेकिन 300 साल बाद बनी इसराइल ने दाऊद अल सलाम की लीडरशिप में इस सिटी जेरूसलम को दोबारा फतह कर लिया। और उनके बेटे सुलेमान अल सलाम ने यहां पहली दफा अल्लाह की इबादत के लिए एक मस्जिद, एक टेंपल बनाया। सुलेमान अल सलाम के बाद यहूदियों ने फलस्तीन और जेरूसलम पर 400 साल तक हुकूमत की। लेकिन 400 साल बाद बैबल इराक में एक बहुत ही ताकतवर एंपायर बन चुकी थी, जिसके बादशाह बख्ते नसर ने अपनी एंपायर को बढ़ाने के लिए फलस्तीन पर हमला कर दिया और जेरूसलम को तबाह बर्बाद कर दिया। और उसके अंदर हजारों यहूदियों को शहीद भी किया और उस टेंपल को भी तबाह कर दिया जो सुलेमान अल सलाम ने बनाया था। और जितने यहूदी जिंदा बच गए थे, उन सारों को गुलाम बनाकर अपने कैपिटल बैबल इराक ले गए और 70 साल तक यहूदी इराक की गुलामी करते रहे। लेकिन 70 साल बाद इराक पर ईरान के एक बहुत ही नेक बादशाह सायरस द ग्रेट ने हमला कर दिया, जिसे हम जुलकरनैन के नाम से जानते हैं। सायरस द ग्रेट ने की इस हुकूमत को फतह कर लिया और यहां जितने भी यहूदी थे, उन सारों को वापस फलस्तीन भेजा और उन्हें फंड्स भी दिए कि वापस जाकर सुलेमान अल सलाम के टेंपल को दोबारा बना जो इससे पहले तबाह कर दिया गया था। जिसके बाद यहूदियों ने फिर फलस्तीन पर 400 साल तक हुकूमत की। लेकिन फिर इन पर एक ऐसी हुकूमत ने हमला किया जिसने सारे यहूदियों को यहां से 600 साल तक बाहर निकाल दिया। द ग्रेट रोमन एंपायर और बनी इसराइल पर इतना जुल्म किया जो इससे पहले किसी ने भी नहीं किया था। यहूदियों ने रोमन एंपायर से लड़ने की भी कोशिश की, लेकिन रोमन एंपायर ने हजारों यहूदियों को कत्ल किया। और हालात इतने खराब हुए कि यहूदी रोमन एंपायर से छुपकर गुफाओं में रहने लगे। और रोमन एंपायर ने बैतुल मकदस जिसे पहले सुलेमान अल सलाम और फिर जुलकरनैन ने बनाया था, दोबारा तबाह बर्बाद कर दिया। और उसके बाद यह टेंपल आज तक दोबारा नहीं बन सका। रोमन एंपायर ने फलस्तीन और जेरूसलम पर 600 साल तक हुकूमत की। लेकिन 600 साल बाद रोमन एंपायर ने एक ऐसी गलती की जो उसे कभी नहीं करनी चाहिए थी। उन्होंने अरब में बहुत ही तेजी से फैलते हुए नए रिलीजन इस्लाम पर हमला करने की कोशिश की। लेकिन इस्लामिक रिलीजन और खिलाफत इतनी तेजी से फैलती गई कि कुछ ही सालों में रोमन और पर्सियन एंपायर दोनों को फतह कर लिया। जिसके बाद हजरत उमर दुनिया के सबसे ताकतवर बादशाह बन गए जिनकी हुकूमत अलेक्जेंडर द ग्रेट की एंपायर से थी बहुत बड़ी थी। आखिर मुसलमान रोमन एंपायर को फतह करते-करते जेरूसलम के दरवाजे तक पहुंचे। रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पहले ही कह दिया था कि मुसलमान एक दिन जेरूसलम जरूर फतह करेंगे। आप मुसलमानों के पास दो ऑप्शन हैं, या तो जेरूसलम को उसी तरह तबाह किया जाए जो इससे पहले बाकी बादशाहों ने किया था, और या इसका सीज मुहास कर ले। आखिर छ महीने बाद जेरूसलम के गवर्नर सफ्री ने कहा कि मैं यरूशलम सिर्फ एक ही शर्त में मुसलमानों के हवाले करूंगा कि मुसलमानों के बादशाह उमर खुद आकर मुझसे मिले। तो खालिद बिन वलीद रज अल्लाह ताला अन्हो ने सोचा कि अब मुसलमानों के अमीरुल मोमिनीन को क्यों डिस्टर्ब किया जाए। तो वो खुद उमर बनकर सफ्री से मिलने गए क्योंकि खालिद बिन वलीद रज अल्लाह ताला अन्हो की अपीयरेंस बिल्कुल हजरत उमर से मिलती जुलती थी और दोनों की हाइट भी बिल्कुल सेम थी, ऑलमोस्ट 7 फुट। लेकिन वह एक शख्स हजरत उमर से पहले ही मिल चुका था, तो उन्होंने कहा कि यह हजरत उमर नहीं हो सकते। तो मजबूरन खालिद बिन वलीद रज अल्लाह ताला अन्हो को हजरत उमर उस वक्त दुनिया के सबसे ताकतवर बादशाह को जेरूसलम बुलाना पड़ा। सोफ्रोनिया अस फुल लग्जरी गोल्ड और सिल्वर पहनकर बिल्कुल तैयार हो गया क्योंकि इतने बड़े बादशाह उनसे मिलने आ रहे थे। लेकिन सफ्री स और पूरा जेरूसलम यह देखकर हैरान हो गया कि बादशाह का गुलाम ऊंट पर बैठा हुआ है और बादशाह खुद बिल्कुल आम कपड़ों में पैदल चलकर आ रहा है। यह मंजर जेरूसलम वालों के लिए बहुत शॉकिंग था क्योंकि इससे पहले जब भी किसी बादशाह ने जेरूसलम पर फतह हासिल की है, उसने इस सिटी को तबाह बर्बाद कर दिया था और यहां की गलियों को खून से भर दिया था। लेकिन अब यह एक बादशाह आया है जो उन सारों से ज्यादा ताकतवर है, लेकिन बगैर किसी सी फौज के और बिल्कुल आम कपड़ों में। ऐसा इससे पहले कभी भी नहीं हुआ था। हजरत उमर ने सारे रिलीजन को आजादी दी और बगैर कोई खून बहाए सफ्री स ने जेरूसलम को हजरत उमर के हवाले किया। लेकिन उन्होंने एक शर्त यह भी रखी कि मुसलमान यहूदियों को जेरूसलम आने की इजाजत नहीं देंगे। लेकिन हजरत उमर ने उसकी यह शर्त नहीं मानी और यहूदियों को भी बैतुल मुकद्दस आने की इजाजत दी। और इस तरह पहली दफा जेरूसलम इब्राहिम अल सलाम के बेटे इस्माइल अल सलाम की औलाद के पास आया। इसके बाद ऑलमोस्ट 350 साल तक मुसलमान, क्रिश्चियन और यहूदी जेरूसलम में बिल्कुल पीस और अमन के साथ रहने लगे। लेकिन फिर 350 साल बाद क्रिश्चियन ने पूरे यूरोप से फौज जमा करके जेरूसलम पर दोबारा हमला कर दिया। उस वक्त मुसलमानों के आपस में बहुत लड़ाइयां चल रही थीं, जिसका फायदा उठाकर क्रुसेडर्स ने आसानी से जेरूसलम को फतह कर लिया। और जेरूसलम फतह करने के बाद मुसलमानों और यहूदियों पर अनबिलीवर्स किया और हजारों मुसलमानों और यहूदियों को शहीद कर दिया। और मस्जिदों और सिनेगॉग को भी नष्ट कर दिया। और हिस्ट्री में लिखा है कि क्रुसेडर्स ने जेरूसलम की गलियों को मुसलमानों के खून से भर दिया था। और इवन मस्जिदे अकसा को भी मस्जिद से एक महल, पैलेस में बदल दिया था। यहूदियों के औरतों और बच्चों ने अपनी जान बचाकर अपने आप को सिनेगॉग लिया, लेकिन क्रुसेडर्स ने इन सारे बिल्डिंग्स को आग लगा दी और इनके बच्चों और औरतों को जिंदा जला दिया। और यह सब सिर्फ हमने कहा है बल्कि यह ऑथेंटिक हिस्ट्री का हिस्सा है जिसे यूरोपीयंस भी मानते हैं। इसके बाद इन क्रुसेडर्स ने जेरूसलम पर ऑलमोस्ट 90 इयर्स तक हुकूमत की। लेकिन फिर 90 इयर्स बाद मुसलमानों के एक बहुत बड़े बादशाह सुल्तान सलाहुद्दीन अयूबी ने पूरी मुस्लिम दुनिया से फौज जमा करके जेरूसलम को दोबारा क्रिश्चन से छीनकर फतह कर लिया। और उस वक्त सारी क्रिश्चियंस का यह ख्याल था कि अब सलाहुद्दीन हमसे उसी तरह बदला लेगा जिस तरह हमने लाखों मुसलमानों को शहीद किया था। लेकिन सलाहुद्दीन अयूबी ने बिल्कुल हजरत उमर की तरह सारे क्रिश्चन को माफ कर दिया। इवन क्रिश्चन भी इस बात पर हैरान हुए और सलाहुद्दीन से पूछा कि जब हमने फतह किया तो हमने हर मुसलमान को कत्ल किया था। लेकिन सलाहुद्दीन अयूबी ने उन्हें कहा, "आई एम नसन, आई एम सला सला।" सलाहुद्दीन अयूबी ने इन सारे रिलीजन को दोबारा आजादी दी और मस्जिद अकसा महल बना दिया गया था, उसे दोबारा मस्जिद बनाया और उधर पहली नमाज अदा की। जेरूसलम को जब भी किसी बादशाह ने फतह किया, हमेशा इधर बहुत खून बहाया है, सिवाय मुसलमानों के जिन्होंने हमेशा बिल्कुल पीस और अमन के साथ इस सिटी को फतह किया। सलाहुद्दीन अयूबी के बाद एक बार फिर सारे अब्राहम रिलीजन जेरूसलम में बिल्कुल पीस और अमन के साथ 800 साल तक रहे। 800 साल तक। 800 साल बाद और आज से 100 साल पहले जब जेरूसलम पर ऑटोमन एंपायर की हुकूमत थी, तो वर्ल्ड वॉर वन के बाद अरबों ने ब्रिटिश के साथ मिलकर उस्मानिया खिलाफत को हमेशा के लिए खत्म कर दिया कि हम अरबों पर यह टर्किश लोग आके क्यों हुकूमत कर रहे हैं। तो इस नेशनलिज्म की वजह से फलस्तीन भी मुसलमानों के हाथ से निकल गया। लेकिन थोड़े ही अर्से पहले ब्रिटिश और यहूदियों की आपस में डील हो चुकी थी कि अगर ब्रिटिश को यह इलाके मिले तो वह इधर एक यहूदी स्टेट बनाएंगे।
00:16
Speaker A
गुलामी से निकालकर आजाद कर दो और फिर बहुत मुश्किल से फिरौन ने आखिर बनी इसराइल को आजाद कर दिया जिसके बाद मूसा अल सलाम बनी इसराइल को लेकर फलस्तीन के पास आए और कहा कि इस सिटी पर हमला करो लेकिन बनी इराल ने
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Speaker A
कहा कि आप और आपका रब जाकर लड़े हम यह लड़ाई नहीं करने वाले जिसकी वजह से अल्लाह ने 40 साल तक इन्हें इस डेजर्ट में रहने की सजा दी जिधर मूसा अल सलाम पर आसमानी किताब तौरा नाजिल हुई और इस तौरा के पहले
00:45
Speaker A
चैप्टर द बुक ऑफ जेनेसिस में क्लीयरली लिखा है साफ-साफ लिखा है कि यह इलाका फलस्तीन अल्लाह ने सिर्फ और सिर्फ इब्राहिम अल सलाम की औलाद के लिए रखा है जिसकी वजह से आज तक यह जितनी लड़ाइयां चल रही यह इसलिए है क्योंकि यहूदी एक क्लेम
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Speaker A
करते हैं कि तौरा की इस आयत के मुताबिक जेरूसलम और फलस्तीन पर सिर्फ और सिर्फ बनी इसराइल का हक है क्योंकि बनी इसराइल इब्राहीम अल सलाम की औलाद इसहाक अल सलाम की औलाद में से है एंड इट मेक्स सेंस तब
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Speaker A
तो इनको मिलना चाहिए लेकिन तौरा में लिखा है कि यह इलाका इब्राहिम अल सलाम की औलाद के लिए सिर्फ इसहाक अल सलाम की औलाद के लिए नहीं इब्राहिम अल सलाम के एक नहीं बल्कि दो बेटे थे इसहाक और इस्माइल इसहाक
01:26
Speaker A
अल सलाम वाज द फादर ऑफ बनी इसराइल बट इस्माइल अल सलाम को अरबों का फादर समझा जाता है और यह बात सिर्फ हम नहीं इवन यहूदी भी इस बात को मानते हैं तो इन्हीं की किताब तौरा के मुताबिक फलस्तीन पर
01:37
Speaker A
सिर्फ इसहाक अल सलाम की औलाद का हक नहीं है बल्कि इस्माइल अल सलाम की औलाद अरबों का भी हक है मूसा अल सलाम के साथ 40 साल डेजर्ट में रहने के बाद आखिर बनी इसराइल ने यूशा जोशुआ की लीडरशिप में फलस्तीन को
01:50
Speaker A
फतह कर लिया लेकिन कुछ ही अर्से बाद यह सिटी इनके हाथ से दोबारा निकल गई और फिर अगले 300 साल तक बनी इसराइल इस सिटी को दोबारा हासिल नहीं कर सके लेकिन 300 साल बाद बनी इसराइल ने दाऊद अल सलाम की
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Speaker A
लीडरशिप में इस सिटी जेरूसलम को दोबारा फतह कर लिया और उनके बेटे सुलेमान अल सलाम ने यहां पहली दफा अल्लाह की इबादत के लिए एक मस्जिद एक टेंपल बनाया सुलेमान अल सलाम के बाद यहूदियों ने फलस्तीन और जेरूसलम पर
02:16
Speaker A
400 साल तक हुकूमत की लेकिन 400 साल बाद बैबल इराक में एक बहुत ही ताकतवर एंपायर बन चुकी थी जिसके बादशाह बख्ते नसर ने अपनी एंपायर को बढ़ाने के लिए फलस्तीन पर हमला कर दिया और जेरूसलम को तबाह बर्बाद कर दिया और उसके अंदर
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Speaker A
हजारों यहूदियों को शहीद भी किया और उस टेंपल को भी तबाह कर दिया जो सुलेमान अल सलाम ने बनाया था और जितने यहूदी जिंदा बच गए थे उन सारों को गुलाम बनाकर अपने कैपिटल बैबल इराक लेके और 70 साल तक यहूदी
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Speaker A
इराक की गुलामी करते रहे लेकिन 70 साल बाद इराक पर ईरान के एक बहुत ही नेक बादशाह सायरस द ग्रेट ने हमला कर दिया जिसे हम जुलकरनैन के नाम से जानते हैं सायरस द ग्रेट ने की इस हुकूमत को फतह कर लिया और
03:02
Speaker A
यहां जितने भी यहूदी थे उन सारों को वापस फलस्तीन भेजा और उन्हें फंड्स भी दिए कि वापस जाकर सुलेमान अल सलाम के टेंपल को दोबारा बना जो इससे पहले तबाह कर दिया गया था जिसके बाद यहूदियों ने फिर फलस्तीन पर
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Speaker A
400 साल तक हुकूमत की लेकिन फिर इन पर एक ऐसी हुकूमत ने हमला किया जिसने सारे यहूदियों को यहां से 600 साल तक बाहर निकाल दिया द ग्रेट रोमन एंपायर और बनी इसराइल पर इतना जुल्म किया जो इससे पहले
03:27
Speaker A
किसी ने भी नहीं किया था यहूदियों ने रोमन एंपायर से लड़ने की भी कोशिश की लेकिन रोमन एंपायर ने हजारों यहूदियों को कत्ल किया और हालात इतने खराब हुए कि यहूदी रोमन एंपायर से छुपकर गारों में रहने लगे
03:39
Speaker A
और रोमन एंपायर ने बैतुल मकद जिसे पहले सुलेमान अल सलाम और फिर जुलकरनैन ने बनाया था दोबारा तबाह बर्बाद कर दिया और उसके बाद यह टेंपल आज तक दोबारा नहीं बन सका रोमन एंपायर ने फलस्तीन और जेरूसलम पर 600
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Speaker A
साल तक हुकूमत की लेकिन 600 साल बाद रोमन एंपायर ने एक ऐसी गलती की जो उसे कभी नहीं करनी चाहिए थी उन्हो उन्होंने अरब में बहुत ही तेजी से फैलते हुए नए रिलीजन इस्लाम पर हमला करने की कोशिश की लेकिन
04:06
Speaker A
इस्लामिक रिलीजन और खिलाफत इतनी तेजी से फैलती गई कि कुछ ही सालों में रोमन और पर्सियन एंपायर दोनों को फतह कर लि जिसके बाद हजरत उमर दुनिया के सबसे ताकतवर बादशाह बन गए जिनकी हुकूमत अलेक्जेंडर द ग्रेट की एंपायर से थी बहुत बड़ी थी आखिर
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Speaker A
मुसलमान रोमन एंपायर को फतह करते-करते जेरूसलम के दरवाजे तक पहुंचे रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अहि वसल्लम ने पहले ही कह दिया था कि मुसल मान एक दिन जेरूसलम जरूर फतह करेंगे आप मुसलमानों के पास दो ऑप्शन या तो जेरूसलम को उसी तरह तबाह किया जाए जो
04:37
Speaker A
इससे पहले बाकी बादशाहों ने किया था और या इसका सीज मुहास कर ले आखिर छ महीने बाद जेरूसलम के गवर्नर सफ्री ने कहा कि मैं यरूशलम सिर्फ एक ही शर्त में मुसलमानों के हवाले करूंगा कि मुसलमानों के बादशाह उमर
04:53
Speaker A
खुद आकर मुझसे मिले तो खालिद बिन वलीद रज अल्ला ताला अन्हो ने सोचा कि अब मुसलमानों के अमीरुल मोमिनीन को क्यों डिस्टर्ब किया जाए तो वो खुद उमर बनकर सफ्री से मिलने गए क्योंकि खालिद बिन वलीद रज अल्ला ताला अन्
05:05
Speaker A
की अपीयरेंस बिल्कुल हजरत उमर से मिलती जुलती थी और दोनों की हाइट भी बिल्कुल सेम थी ऑलमोस्ट 7 फुट लेकिन वह एक शख्स हजरत उमर से पहले ही मिल चुका था तो उन्होंने कहा कि यह हजरत उमर नहीं हो सकते तो
05:17
Speaker A
मजबूरन खालिद बिन वलीद रज अल्ला ताला अहो को हजरत उमर उस वक्त दुनिया के सबसे ताकतवर बादशाह को जेरूसलम बुराना पड़ा सोफ्रोनिया अस फुल लगजरी गोल्ड और सिल्वर पहनकर बिल्कुल तैयार हो गया क्योंकि इतने बड़े बादशाह उनसे मिलने आ रहे थे लेकिन
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Speaker A
सफ्री स और पूरा जेरूसलम यह देखकर हैरान हो गया कि बादशाह का गुलाम ऊंट पर बैठा हुआ है और बादशाह खुद बिल्कुल आम कपड़ों में पैदल चलकर आ रहा है यह मंजर जेरूसलम वालों के लिए बहुत शॉकिंग था क्योंकि इससे
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Speaker A
पहले जब भी किसी बादशाह ने जेरूसलम पर फतह हासिल की है उसने इस सिटी को तबाह बर्बाद कर दिया था और यहां की गलियों को खून से भर दिया था लेकिन अब यह एक बादशाह आया है जो उन सारों से ज्यादा ताकतवर है लेकिन
05:59
Speaker A
बगैर किसी सी फौज के और बिल्कुल आम कपड़ों में ऐसा इससे पहले कभी भी नहीं हुआ था हजरत उमर ने सारे रिलीजस को आजादी दी और बगैर कोई खून बहाए सफ्री स ने जेरूसलम को हजरत उमर के हवाले किया लेकिन उन्होंने एक
06:13
Speaker A
शर्त यह भी रखी कि मुसलमान यहूदियों को जेरूसलम आने की इजाजत नहीं देंगे लेकिन हजरत उमर ने उसकी यह शर्त नहीं मानी और यहूदियों को भी बैतुल मुकद्दस आने की इजाजत दी और इस तरह पहली दफा जेरूसलम इब्राहिम अल सलाम के बेटे इस्माइल अल सलाम
06:28
Speaker A
की औलाद के पास आया इसके बाद ऑलमोस्ट 350 साल तक मुसलमान क्रिश्चियन और यहूदी जेरूसलम में बिल्कुल पीस और अमन के साथ रहने लगे लेकिन फिर 350 साल बाद क्रिश्चन ने पूरे यूरोप से फौज जमा करके जेरूसलम पर
06:44
Speaker A
दोबारा हमला कर दिया उस वक्त मुसलमानों के आपस में बहुत लड़ाइयां चल रही थी जिसका फायदा उठाकर क्रुसेडर्स ने आसानी से जेरूसलम को फतह कर लिया और जेरूसलम फतह करने के बाद मुसलमानों और यहूदियों पर अनबिलीवर्स किया और हजारों मुसलमानों और
07:01
Speaker A
यहूदियों को शहीद कर दिया और मस्जिदों और सिनेगोर कर दिया और हिस्ट्री में लिखा है कि क्रुसेडर्स ने जेरूसलम की गलियों को मुसलमानों के खून से भर दिया था और इवन मस्जिदए अकसा को भी मस्जिद से एक महल
07:15
Speaker A
पैलेस में बदल दिया था यहूदियों के औरतों और बच्चों ने अपनी जान बचाकर अपने आप को सिनेगोर लिया लेकिन क्रुसेडर्स ने इन सारे बिल्डिंग्स को आग लगा दी और इनके बच्चों और औरतों को जिंदा जला दिया और यह सब
07:29
Speaker A
सिर्फ हमने कहते हैं बल्कि यह ऑथेंटिक हिस्ट्री का हिस्सा है जिसे यूरोपीयंस भी मानते हैं इसके बाद इन क्रुसेडर्स ने जेरूसलम पर ऑलमोस्ट 90 इयर्स तक हुकूमत की लेकिन फिर 90 इयर्स बाद मुसलमानों के एक बहुत बड़े बादशाह सुल्तान सलाहुद्दीन
07:45
Speaker A
अयूबी ने पूरी मुस्लिम दुनिया से फौज जमा करके जेरूसलम को दोबारा क्रिश्चन से छीनकर फतह कर लिया और उस वक्त सारी क्रिश्चियंस का यह ख्याल था कि अब सलाहुद्दीन हमसे उसी तरह बदला लेगा जिस तरह हमने लाखों मुसलमानों को शहीद किया था लेकिन
08:01
Speaker A
सलाहुद्दीन अयूबी ने बिल्कुल हजरत उमर की तरह सारे क्रिश्चन को माफ कर दिया इवन क्रिश्चन भी इस बात पर हैरान हुए और सलाहुद्दीन से पूछा कि जब हमने फतह किया तो हमने हर मुसलमान को कत्ल किया था लेकिन
08:16
Speaker A
सलाहुद्दीन अयूबी ने उन्हें कहा आई एम नसन आईम सला सला सलाहुद्दीन अयूबी ने इन सारे रिलीजन को दोबारा आजादी दी और मस्जिद अकसा महल बना दिया गया था उसे दोबारा मस्जिद बनाया और उधर पहली नमाज अदा की जेरूसलम को जब भी
08:36
Speaker A
किसी बादशाह ने फतह किया हमेशा इधर बहुत खून बहाया है सिवाय मुसलमानों के जिन्होंने हमेशा बिल्कुल पीस और अमन के साथ इस सिटी को फतह किया सलाहुद्दीन अयूबी के बाद एक बार फिर सारे अब्राहम रिलीजन जेरूसलम में बिल्कुल पीस और अमन के साथ
08:51
Speaker A
800 साल तक रहे 800 साल लेक 800 साल बाद और आज से 100 साल पहले जब जेरूसलम पर ऑटोमन एंपायर की हुकूमत थी तो वर्ल्ड वॉर वन के बाद अरबों ने ब्रिटिश के साथ मिलकर उस्मानिया खिलाफत को हमेशा
09:08
Speaker A
के लिए खत्म कर दिया कि हम अरबों पर यह टर्किश लोग आके क्यों हुकूमत कर रहे हैं तो इस नेशनलिज्म की वजह से फलस्तीन भी मुसलमानों के हाथ से निकल गया लेकिन थोड़े ही अर्से पहले ब्रिटिश और यहूदियों की आपस
09:21
Speaker A
में डील हो चुकी थी कि अगर ब्रिटिश को यह इलाके मिले तो वह इधर एक यहूदी स्टेट बनाए गए और यह मुआय हुआ क्यों था क्योंकि इस से पहले यहूदी यूरोप के हर फील्ड बिजनेस साइंस मेडिकल बैंकिंग हर चीज में बहुत
09:36
Speaker A
स्ट्रांग हो चुके थे जिसकी वजह से यहूदी यूरोप के सबसे ताकतवर और रिच कम्युनिटी बन गए तो इनकी सपोर्ट हासिल करना ब्रिटिश के लिए सबसे जरूरी था और पिछले 1800 साल से यहूदियों के पास अपना कोई भी मुल्क नहीं
09:49
Speaker A
था तो उनमें से कुछ यहूदियों ने चायनिज म की सोच शुरू की कि हमारा यहूदियों का भी एक अपना मुल्क होना चाहिए और इसके लिए उन्होंने इसी फलस्तीन के इलाके को चुना और यह मुल्क हासिल करने के लिए उन्होंने हर
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Speaker A
तरफ से कोशिश शुरू की यहूदियों ने इवन उस्मानी खलीफा सुल्तान अब्दुल हमीद से भी डील करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने साफ इंकार कर दिया जिसकी वजह से यहूदियों को समझ आ गई कि अगर अपना मुल्क बनाना है तो
10:14
Speaker A
उस्मानिया सल्तनत को खत्म करना जरूरी है और जैसे ही वर्ल्ड वॉर वन के बाद ऑटोमन एंपायर खत्म हुई और फलस्तीन ऑटोमन एंपायर से ब्रिटिश की तरफ चला गया तो यहूदी पूरी दुनिया से इसी सीक्रेट प्लान के तहत फलस्तीन शिफ होना शुरू हुए और फलस्तीन के
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Speaker A
मुसलमानों से जमीनें डबल ट्रिपल प्राइस पर खरीदने लगे क्योंकि पैसा तो उनके पास बहुत था ब्रिटिश एंपायर ने भी बेलफोर डिक्लेरेशन में यहूदियों के एक अलग स्टेट होने को सपोर्ट किया ताकि वर्ल्ड वॉर्स में यहूदियों का सपोर्ट और पैसे दोनों
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Speaker A
हासिल कर सके और स्पेशली वर्ल्ड वॉर ट के बाद यूरोप में हिटलर के यहूदियों पर जुल्म के बाद यहूदी और भी ज्यादा पूरी दुनिया से फलस्तीन में जमा होने लगे और फलस्तीन में आहिस्ता आहिस्ता लड़ाइयां बढ़ने लगी जिसकी
10:58
Speaker A
वजह से यूएन ने एक फैसला सुनाया कि फलस्तीन को तीन हिस्सों में डिवाइड किया जाएगा एक हिस्सा फलस्तीन दूसरा इजराइल और तीसरा जेरूसलम जो इन दोनों में से किसी का भी नहीं होगा बल्कि यहां यूएन की हुकूमत होगी और इसमें सब रिलीजस को आजादी होगी
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Speaker A
जिस पर अरब मुबार्क ने इस फैसले की सख्त मुखालफत की और इजराइल के आजाद होने के सिर्फ एक दिन बाद इजराइल पर हर तरफ से हमला कर दिया इजिप्ट जॉर्डन सीरिया तीनों की फौज एक साथ इजराइल में दाखिल हुई लेकिन
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Speaker A
बहुत ही बेशर्मी से अरब मुबार्क यह जंग हार गए और एक ऐसे मुल्क से हारे जो उनसे साइज में बहुत छोटा और जो इस जंग से सिर्फ एक दिन पहले आजाद हुआ था इस हार की वजह से जो प्लान यूएन ने इस जंग से पहले बताया था
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Speaker A
उसका सिर्फ 40 पर इलाका [संगीत] फलस्तीनियंस ने फतह कर लिया और इवन जेरूसलम की आधी सिटी को भी फतह कर लिया इजराइल अकेले यह जंग नहीं लड़ रहा था बल्कि इसके साथ पूरी दुनिया का सपोर्ट भी था इवन रशिया और यूएस दोनों का सपोर्ट
12:01
Speaker A
इजराइल के साथ था इजराइल ने ये इलाके फतह करके टाइम बिल्कुल भी जाया नहीं किया और 7 लाख अरबों को फलस्तीन से बाहर निकाल दिया 7 लाख जिसकी वजह से फलस्तीन में आहिस्ता आहिस्ता यहूदी ज्यादा और अरबी कम होने लगे
12:16
Speaker A
इस जीत के बाद इजराइल बहुत स्ट्रांग बन गया और पूरी दुनिया से और भी ज्यादा यहूदी इजराइल में जमा होने लगे इसके बाद यहूदियों ने अपने आप को अरब के बिल्कुल सेंटर में एक बहुत ही मजबूत हुकूमत बना ली
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Speaker A
थी लेकिन फिर भी यह दो इलाके वेस्ट बैंक और गाज इजराइल के कंट्रोल में नहीं थे लेकिन आज से ऑलमोस्ट 60 साल पहले 1967 में कुछ मिसअंडरस्टैंडिंग्स की वजह से यहां जंग एक बार फिर शुरू हो गई और एक बार फिर
12:44
Speaker A
इजिप्ट जॉर्डन सीरिया वर्सेस यह छोटा सा इजराइल लेकिन सिर्फ छ दिनों में इजराइल ने इन तीनों मुल्कों को हरा दिया और सिर्फ छ दिनों में इजराइल ने अपना साइज तीन गुना बढ़ा लिया अरब मुमा दोबारा अपने से एक
13:00
Speaker A
बहुत ही छोटे मुल्क से बहुत ही बुरी तरह हार गए यह ऐसा है कि आज खबीब हिज्बुल्लाह से हार जाए और वो भी दो मर्तबा अरब मुबार्क के दो दफा इजराइल से हारने के बाद उनकी आवाम अपने नेशनलिस्ट हुक्मरानों के
13:14
Speaker A
खिलाफ हो गई और नेशनलिज्म कौम को छोड़कर एक नई सोच की तरफ बढ़ने लगी द मुस्लिम ब्रदरहुड अख्वान उल मुस्लिम जो मिस्र के एक स्कूल टीचर हसन उल बन्ना ने बनाई थी और जो एक पाकिस्तानी स्कॉलर मौलाना मौदी के
13:29
Speaker A
खयालात से इंस्पायर्ड है इससे पहले अफगान मुस्लिमन का अरब में सिर्फ मजाक उड़ता था लेकिन इस हार के बाद अख्वान मुस्लिम ने अरब आवाम से कहा कि यह जंगे अरब के मुसलमान नहीं बल्कि यह नेशनलिस्ट हारे हैं जो सिर्फ नाम के मुसलमान हैं और इनका कोई
13:44
Speaker A
जिसके बाद अरब की आवाम इस नई सोच मुस्लिम ब्रदरहुड की तरफ आने लगी हमास भी इसी अख्वान उल मुस्लिमन से इंस्पायर्ड एक ग्रुप है लेकिन अख्वान मुस्लिमन वायलेंस के खिलाफ इस जीत के बाद इजराइल ने वेस्ट बैंक गाजा और जेरूसलम सब पर कब्जा कर लिया
14:00
Speaker A
और आज तक यह सारे इलाके इजराइल से दोबारा कोई भी नहीं छीन सका
Topics:फलस्तीनइसराइलजेरूसलममूसा अल सलामतौरासुलेमान अल सलामहजरत उमरसुल्तान सलाहुद्दीनक्रुसेडर्सधार्मिक संघर्ष

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