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The Birth of ******

यह वीडियो अमेरिका-इजराइल रिश्तों की इतिहासिक पृष्ठभूमि और यहूदी-मुस्लिम-क्रिश्चियन संघर्ष की कहानी बताता है।

Key Takeaways

  • अमेरिका और इजराइल के बीच गहरा ऐतिहासिक और राजनीतिक संबंध है जो आज भी मजबूत है।
  • यहूदी, मुसलमान और क्रिश्चियन के बीच सदियों पुराने धार्मिक और राजनीतिक संघर्ष ने मध्य पूर्व की राजनीति को प्रभावित किया।
  • मुस्लिम शासन के दौरान यहूदियों को सम्मान मिला, लेकिन यूरोप में क्रिश्चियन उत्पीड़न ने उन्हें आर्थिक रूप से सक्रिय बनाया।
  • यहूदियों ने आर्थिक शक्ति हासिल कर अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • इजराइल की स्थापना और फिलस्तीन पर कब्जा आज भी क्षेत्रीय संघर्ष का मुख्य कारण है।

What the video covers

  • अमेरिका और इजराइल के गहरे राजनीतिक और ऐतिहासिक रिश्तों की शुरुआत और कारणों की व्याख्या।
  • ईसा अल सलाम के समय से यहूदी, मुसलमान और क्रिश्चियन के बीच के विवादों और संघर्षों का वर्णन।
  • रोमन साम्राज्य के तहत यहूदियों की दमनकारी स्थिति और उनके फिलस्तीन से विस्थापन की कहानी।
  • मुस्लिमों द्वारा फिलस्तीन की विजय और यहूदियों को पुनः अधिकार देने का इतिहास।
  • यूरोप में क्रिश्चियनों द्वारा मुसलमानों और यहूदियों के खिलाफ युद्ध और उत्पीड़न।
  • सलाहउद्दीन अयूबी के नेतृत्व में मुसलमानों और यहूदियों का एकजुट होना।
  • स्पेन में मुसलमानों और यहूदियों का संघर्ष और उस्मानिया सल्तनत में शरण।
  • यहूदियों का यूरोप में आर्थिक सफलता और व्यापार में वृद्धि, साथ ही भूमि खरीदने पर प्रतिबंध।
  • रस्ट चाइल्ड परिवार द्वारा अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग की स्थापना और यूरोप में यहूदियों की आर्थिक ताकत।
  • फिलस्तीन में इजराइल की स्थापना, इसके पीछे की राजनीतिक योजनाएं और फिलिस्तीनियों पर प्रभाव।

Answers

Questions about this video

अमेरिका हमेशा इजराइल का समर्थन क्यों करता है?

वीडियो में बताया गया है कि अमेरिका और इजराइल के बीच एक गहरा ऐतिहासिक और राजनीतिक रिश्ता है, जो धार्मिक, आर्थिक और रणनीतिक कारणों से मजबूत हुआ है।

यहूदी और मुसलमानों के बीच दोस्ती कब और कैसे हुई?

मुस्लिमों के मदीना की रियासत बनने के बाद और खासकर सलाहउद्दीन अयूबी के नेतृत्व में यहूदी और मुसलमानों ने एकजुट होकर फिलस्तीन पर कब्जा किया और लंबे समय तक अमन से रहे।

यहूदी यूरोप में क्यों जमीन नहीं खरीद सकते थे?

क्रिश्चियन शासकों ने यहूदियों को यूरोप में रहने की अनुमति दी लेकिन जमीन खरीदने और राजनीति में भाग लेने से प्रतिबंधित किया, जिससे यहूदियों ने व्यापार और बैंकिंग में सफलता हासिल की।

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00:00
Speaker A
कभी सोचा है कि पूरी दुनिया में बदनाम होने के बाद अमेरिका आखिर क्यों इजराइल का साथ कभी नहीं छोड़ता। आई लव इजराइल, आई लव इज अमेव इन्वेंटराइल। ऐसा लगता है लैला मजनू और रोमियो जूलियट के बाद अमेरिका और
00:24
Speaker A
इजराइल की लव स्टोरी पूरी दुनिया याद रखेगी। रिलेशनशिप, लेकिन ये दोस्ती हमेशा से ऐसे नहीं थी, बल्कि दुनिया में एक वक्त ऐसा था कि जब यहूदी और क्रिश्चियंस एक दूसरे से नफरत करते थे। ये पूरी कहानी एक ही इंसान के साथ शुरू
00:50
Speaker A
होती है। ईसा अल सलाम। आज से 2000 साल पहले जब दुनिया के सारे यहूदी फिलस्तीन के इलाके में रहते थे। यहां उनके पास कोई ताकत नहीं थी। क्योंकि फिलस्तीन पर एक बहुत बड़ी सुपर पावर रोमन एंपायर का राज
01:07
Speaker A
था, जिन्होंने यहूदियों को बिल्कुल गुलामों की तरह रखा हुआ था और इन पर बहुत सख्त जुल्म किया करते थे। रोमन एंपायर के इस जुल्म को देखकर यहूदी स्कॉलर्स को समझ आ गई कि अब तोरात में बताई गई सारी निशानियां पूरी हो चुकी हैं
01:24
Speaker A
और वक्त आ चुका है कि यहूदियों को बचाने के लिए दुनिया में उनका मसीहा आए। अब यहूदी स्कॉलर्स का यह ख्याल था कि जब यह मसीहा आएगा, वो सबसे पहले यहूदी स्कॉलर्स के साथ हाथ मिलाएगा। इन्हें शाबाशी देगा और इनका दोस्त बनेगा। लेकिन
01:41
Speaker A
ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ। ईसा अल सलाम बार-बार लोगों को जमा करके इन यहूदी स्कॉलर्स के खिलाफ बोलने लगे और लोगों को यह समझाने लगे कि आज हमारे रिलीजन को इन यहूदी स्कॉलर्स ने बिगाड़ दिया। और ईसा अल
01:54
Speaker A
सलाम की इन्हीं बातों की वजह से यहूदी स्कॉलर्स उनसे नफरत करने लगे और रोमन एंपायर के साथ मिलकर ईसा अल सलाम को मारने की साजिश करने लगे। यहूदी स्कॉलर्स ने रोमन एंपायर पर बहुत प्रेशर डाला कि वो किसी तरह ईसा अल सलाम
02:10
Speaker A
को मौत की सजा सुना दें। जिस पर रोमन एंपायर के गवर्नर ने उनसे कहा कि ठीक है, हम इस शख्स को मौत की सजा तो सुना देंगे, लेकिन याद रखना ईसा का खून हम रोमंस पर नहीं, तुम यहूदियों
02:24
Speaker A
पर होगा। ये सुनकर यहूदियों ने उन्हें कहा कि आप टेंशन ना लें। ईसा का खून हम पर और हमारी नस्लों पर होगा। अब ईसा अल सलाम तो यहूदियों की साजिश से बच गए। लेकिन ईसा अल सलाम के जाने के बाद
02:38
Speaker A
यहूदी कभी भी फस्तीन में चैन से नहीं रह सके। क्योंकि ईसा अल सलाम के जाने के कुछ ही अरसे बाद रोमन एंपायर और यहूदियों के दरमियान एक बहुत बड़ी जंग हुई, जिसमें रोमन एंपायर ने यहूदियों को बिल्कुल कुचल दिया और हजारों यहूदियों को
02:54
Speaker A
मार खाया। यरूसलम में यहूदियों की सबसे होली जगह, द सेकंड टेंपल को गिरा दिया। और सारे यहूदियों को हमेशा के लिए फस्तीन से भगा दिया। जिसके बाद मजबूरन यहूदी फस्तीन को छोड़कर पूरी दुनिया में फैल गए और अगले 500 साल
03:15
Speaker A
तक दुनिया के हर यहूदी की यह ख्वाहिश थी कि किसी तरह दुनिया में कोई मिरेकल हो और यहूदी वापस फिलस्तीन की तरफ जा सके। और एग्जैक्टली ऐसा ही हुआ। यहूदियों के फस्तीन से निकलने के 500 साल बाद दुनिया
03:28
Speaker A
में एक नई रियासत बनी। मदीना की रियासत। अल्लाहहु अकबर। मुसलमानों की ये खिलाफत कुछ ही सालों में इतनी तेजी से फैली
03:51
Speaker A
कि खलीफा उमर बिन खत्ताब के दौर में मुसलमानों ने रोमन एंपायर की कमर बिल्कुल तोड़ दी। और उनसे फलस्तीन और जेरूसलम
04:05
Speaker A
फतह कर लिया। जेरूसलम सरेंडर करने से पहले रोमन एंपायर के क्रिश्चियंस ने हजरत उमर के सामने एक ही शर्त रखी थी कि आप किसी भी हाल में यहूदियों को यहां आने की इजाजत ना दें। लेकिन हजरत उमर ने उनकी बात नहीं
04:19
Speaker A
मानी और यहूदियों को भी जेरूसलम आने की इजाजत दी, जिसे हम पूरा एक्सप्लेन कर चुके हैं। हजरत उमर के इस ऑर्डर के बाद अगले 400 साल तक दुनिया के यहूदी और मुसलमान एक दूसरे के बहुत ही अच्छे दोस्त थे और
04:39
Speaker A
क्रिश्चियंस इनके दुश्मन थे। लेकिन 400 साल तक फस्तीन पर हुकूमत करने के बाद फिलस्तीन को मुसलमानों के हाथों से छीन लिया गया। हुआ यह कि यूरोप में एक नया पोप आया। पोप अर्बन। ये एक बहुत ही खतरनाक पोप था।
04:55
Speaker A
जिसने आते ही यूरोप की आवाम और बादशाहों को मुसलमानों के खिलाफ जंग लड़ने का हुक्म दिया ताकि क्रिश्चियंस मुसलमानों से अपनी होली सिटी जेरूसलम दोबारा छीन सके। जिसके बाद यूरोप के क्रिश्चियंस ने मिलकर मुसलमानों पर हमला कर दिया।
05:12
Speaker A
लेकिन यहां मसला यह था कि उस वक्त के मुसलमान बादशाह अपनी अय्याशियों में और आपस की जंगों में इतना मशरूफ थे कि वो क्रिश्चियंस की इस फौज से नहीं लड़ सके। इसीलिए क्रिश्चियंस ने बहुत ही आसानी से पूरे फस्तीन पर कब्जा कर लिया
05:27
Speaker A
और बहुत ही बेदर्दी से मुसलमानों को मारने लगा। कहा जाता है कि एक वक्त ऐसा था कि मस्जिद-ए-असा में पांव रखने की जगह भी नहीं थी क्योंकि वो मुसलमानों की लाशों से भरी हुई थी। अब क्रिश्चियंस की जंग तो मुसलमानों के
05:42
Speaker A
साथ थी, लेकिन वो मुसलमानों से ज्यादा नफरत यहूदियों से करते थे क्योंकि इन्हीं यहूदियों ने बहुत साल पहले क्रिश्चियंस के खुदा जीसस क्राइस्ट को मारने की साजिश की थी। तो क्रिश्चियंस मुसलमानों को मारने के साथ-साथ यहूदियों का भी पीछा करने लगे।
05:59
Speaker A
जिसे देखकर यहूदियों के बच्चे और औरतें इन क्रिश्चियन से भागकर अपने टेंपल्स और सिनेगॉग्स में छुप गए। और जैसे ही खुसेडर्स को इसका पता चला, उन्होंने यहूदियों की इन सारी बिल्डिंग्स को आग लगा दी और हजारों यहूदियों को जिंदा जला दिया।
06:20
Speaker A
जिसके बाद अगले 90 इयर्स तक मुसलमान फस्तीन को दोबारा फतह नहीं कर सके। आखिर दुनिया में मुसलमानों का एक नया लीडर आया। सलाहाउद्दीन अयूबी। वालेकुम सलाम। जिन्होंने दुनिया के मुसलमानों को दोबारा यूनाइट करके फस्तीन पर एक बार फिर हमला किया।
06:39
Speaker A
और इस हमले में दुनिया के सारे यहूदियों ने मिलकर सलाहाउद्दीन अयूबी को सपोर्ट किया। यहां तक कि दुनिया के सबसे बड़े यहूदी स्कॉलर मेमोडी ग्रेटेस्ट, सलाहाउद्दीन अयूबी के साथ इस जंग में शामिल थे और उनके पर्सनल डॉक्टर थे। जिसके
06:57
Speaker A
बाद सलाहाउद्दीन ने ऑफ कोर्स फस्तीन को दोबारा फतह किया और इस तरह एक बार फिर मुसलमान और यहूदी अमन और सुकून के साथ रहने लगे। और सिर्फ फस्तीन में नहीं बल्कि दुनिया में जहां भी मुसलमानों की हुकूमत थी, यहूदी वहां बहुत ही इज्जत की जिंदगी
07:14
Speaker A
गुजारते थे और हमेशा क्रिश्चियन से दूर रहने की कोशिश करते थे। दुनिया के सबसे ताकतवर यहूदी फस्तीन में नहीं बल्कि मुसलमानों की एक दूसरी हुकूमत उंदलस स्पेन में थे। स्पेन एक जमाने में मुसलमानों का सबसे रिच और ताकतवर इलाका था, जहां
07:33
Speaker A
मुसलमानों की 800 साल से हुकूमत थी और मुसलमानों से स्पेन छीनना इंपॉसिबल था। लेकिन 800 साल के बाद एक बार फिर यूरोप के क्रिश्चियन लीडर्स ने मिलकर मुसलमानों के स्पेन पर हमला कर दिया। और आखिर मुसलमानों से पूरा स्पेन छीन
07:50
Speaker A
लिया। [प्रशंसा] उदुलस स्पेन को फतह करने के बाद क्रिश्चियन लीडर्स ने मुसलमानों और यहूदियों को दो ऑप्शंस दिए। या तो अपने रिलीजंस को छोड़कर क्रिश्चियन बनो और या स्पेन को छोड़कर हमेशा के लिए यहां से निकल जाओ। तो ऑफकोर्स अपना रिलिजन तो
07:57
Speaker A
मुसलमानों और यहूदियों ने नहीं छोड़ना था। तो अब ये सब कंफ्यूज थे कि स्पेन को छोड़कर कहां जाए?
08:15
Speaker A
यह देखकर उस वक्त के उस्मानिया सल्तनत के बादशाह सुल्तान बयाजदत ने मुसलमानों और यहूदियों को दावत दी कि वो स्पेन को छोड़कर उस्मानिया सल्तनत की तरफ आएं, जहां उस्मानिया सल्तनत के बादशाह उनका अच्छा ख्याल रखेंगे। अब यहां पर एक
08:29
Speaker A
क्वेश्चन है कि अगर दुनिया के मुसलमान और यहूदी अभी सिर्फ 500 साल पहले तक एक दूसरे के इतने अच्छे दोस्त थे, तो फिर दरमियान में ऐसा क्या हुआ कि यहूदी और क्रिश्चियंस एक साथ मिलकर मुसलमानों के दुश्मन बन गए।
08:49
Speaker A
ये समझना बहुत ही इंपॉर्टेंट है। इसके कुछ ही अरसे बाद जब कोलंबस ने अमेरिका डिस्कवर किया। आहिस्ता-आहिस्ता यूरोप और अमेरिका की इकॉनमी बहुत तेजी से आगे बढ़ने लगी। ये देखकर मुसलमान इलाकों में रहने वाले यहूदी भी पहली बार यूरोप की तरफ शिफ्ट होने लगे।
09:04
Speaker A
जहां उन्होंने एक बहुत ही सीक्रेट ऑर्गेनाइजेशन इलुमिनाटी बनाई। और फिर शैतान और जिन्नात के साथ मिलकर काला जादू करके बहुत सारा पैसा बनाया। और फिर इन पैसों से पूरी दुनिया को अपने कंट्रोल में लिया। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। यह सब बस
09:22
Speaker A
कहानियां हैं। अगर जादू से पैसे बनने होते तो दुनिया का सबसे अमीर आदमी ईलॉन मस्क नहीं बल्कि कोई बाबा होता। लेकिन अगर जादू और जिन्नात से यहूदियों ने मदद नहीं ली, तो फिर कैसे यहूदियों ने पूरी दुनिया की इकॉनमी को अपने कंट्रोल में
09:40
Speaker A
लिया, ये बहुत ही इंटरेस्टिंग स्टोरी है। जब यहूदी मुसलमान इलाकों को छोड़कर आहिस्ता-आहिस्ता यूरोप की तरफ शिफ्ट होने लगे, वहां यूरोप के क्रिश्चियंस अब भी यहूदियों से सख्त नफरत करते थे। इसीलिए इन यहूदियों को कंट्रोल में रखने के लिए यूरोप के क्रिश्चियंस ने एक कानून
09:54
Speaker A
बनाया कि यहूदी यूरोप में रह तो सकते हैं, लेकिन यूरोप की जमीनें नहीं खरीद सकते। और साथ यह भी कहा कि यहूदी यूरोप की पॉलिटिक्स और फौज से हमेशा दूर रहेंगे। तो ऑफकोर्स अब यहूदियों के पास यूरोप में
10:12
Speaker A
सिर्फ एक ही काम बचा था। बिजनेस, जिसके बाद यूरोप के सारे यहूदी बड़े-बड़े ट्रेडर्स और बिजनेसमैन बनने लगे। इस तरह यहूदियों के पास आहिस्ता-आहिस्ता बहुत सारा पैसा जमा हो गया। लेकिन अब मसला यह था कि यहूदी इस सारे पैसे के साथ कोई भी जमीन नहीं
10:25
Speaker A
खरीद सकते थे और क्रिश्चियंस के सारे पैसे जमीनों में खर्च हो जाते थे। तो अब यूरोप में आहिस्ता-आहिस्ता ऐसी सिचुएशन बनी कि क्रिश्चियंस का सारा पैसा जमीनों में बंद होने की वजह से उनके पास कोई कैश नहीं होता था। और ऑन द अदर हैंड यहूदी
10:40
Speaker A
यूरोप में कोई जमीन नहीं खरीद सकते थे। इसीलिए उनके पास बहुत सारा पैसा पड़ा होता था। जिसके बाद यहां से क्रिश्चियंस यहूदियों से सूद पर कर्जे लेने लगे। अब यहूदियों के रिलिजन में भी सूद पर कर्जा देना हराम है। लेकिन सिर...
10:53
Speaker A
कर्जे लेने लगे। उस जमाने में यहूदियों से सूद पर कर्ज लेना इतना आम हो चुका था कि एक फेमस राइटर विलियम शेक्सपियर ने अपनी नवेल्स में यहूदियों से सूद पर कर्ज लेने का जिक्र किया है। आखिर यहूदियों ने इस सूद के
11:09
Speaker A
निजाम से इतना पैसा बनाया कि वो यूरोप के हर शहर में छोटे-छोटे बैंक्स बनाने लगे। लेकिन अब जब यूरोप में यहूदी अपनी पावर की पीक पर थे। यहां पर एक बहुत बड़ा मसला हुआ। जब भी यूरोप का कोई बादशाह यहूदियों
11:24
Speaker A
को उनका कर्ज वापस नहीं कर सकता था तो वह अपने इलाके के सारे यहूदियों को मारकर वहां से भगा देता था। जिससे यहूदियों का बिजनेस काफी खराब हो रहा था। तो अब यहूदी सोचने लगे कि अब उन्हें इन छोटे-छोटे
11:37
Speaker A
बैंकों की बजाय एक सेंट्रलाइज्ड इंटरनेशनल बैंक की जरूरत है। और ऐसा ही हुआ। आखिर जर्मनी के एक ताकतवर यहूदी ने दुनिया का पहला इंटरनेशनल बैंक बनाया। और इस यहूदी का नाम था मायर रस्ट चाइल्ड। रस्ट चाइल्ड का बैन कुछ ही सालों में इतना ताकतवर बना
11:55
Speaker A
कि उसने अपने पांच बेटों को यूरोप के हर सिटी की तरफ भेजा और उन सबको हुकुम दिया कि यूरोप के हर कैपिटल सिटी में जाकर वहां का सबसे बड़ा बैंक बनाओ। यह दुनिया का पहला इंटरनेशनल बैंक था और इसका फायदा यह
12:09
Speaker A
था कि यूरोप की हर बड़ी सिटी में होने की वजह से यूरोप का कोई भी बादशाह इनका बिजनेस खत्म नहीं कर सकता था। क्योंकि जब भी कोई एक भाई कमजोर होता था, उसके बाकी सारे भाई मिलकर उसे बचा लेते थे। इस
12:21
Speaker A
रॉस्टाइल फैमिली के पास इतना पैसा था कि उस वक्त की स्पेनिश एंपायर, फ्रेंच एंपायर और ब्रिटिश एंपायर सब इन्हीं के पैसों से चलती थी। लेकिन रॉस्टाइल फैमिली को अपनी असल ताकत तब मिली जब यूरोप में एक बहुत बड़ी जंग शुरू की।
12:37
Speaker A
इस जंग को फ्रांस का एक बहुत बड़ा बादशाह नेपोलियन लीड कर रहा था। नेपोलियन की ताकत पूरे यूरोप में बहुत तेजी से फैल रही थी। लेकिन नेपोलियन को सबसे बड़ा नुकसान तब पहुंचा जब रस्ट के पांचों भाइयों नेपोलियन को नहीं बल्कि
12:56
Speaker A
ब्रिटिश एंपायर को सपोर्ट किया। जिसके बाद ब्रिटिश एंपायर ने रस्ट फैमिली के पैसों से नेपोलियन को हरा दिया। इस जंग में रस्टाइल के पास इतनी ताकत थी कि कहा जाता है यूरोप में कुछ भी हो उसकी सबसे पहले खबर रस्ट फैमिली तक पहुंचती थी
13:15
Speaker A
और फिर वो इस खबर को ब्रिटिश एंपायर के बादशाह तक पहुंचाते थे और इस तरह रस्ट की मदद से ब्रिटिश एंपायर दुनिया की सबसे बड़ी सुपर पावर बनी। अब यहूदी यूरोप में अपनी ताकत की पीक पर थे। यूरोप की सारी
13:28
Speaker A
बड़ी जॉब्स यहूदियों के पास थी। यूरोप के सबसे पढ़े लिखे लोग भी यहूदी थे और यूरोप की सारी इकॉनमी का कंट्रोल भी यहूदियों के पास था। तो अब यहूदी आहिस्ता-आहिस्ता सोचने लगे कि 2000 साल पहले हम कमजोर थे।
13:42
Speaker A
इसीलिए रोमन एंपायर ने हमें फस्तीन से निकाल दिया था। लेकिन अब हम अपनी ताकत की वजह से दोबारा फस्तीन में जाकर आबाद होंगे। और यहां से दुनिया में पहली बार सीक्रेट जायनिज्म शुरू हुआ। 4000 यहूदी पूरी दुनिया से फस्तीन की तरफ छुप छुप कर
14:02
Speaker A
शिफ्ट होना शुरू हुए। और वहां के गरीब अरबों से डबल ट्रिपल प्राइस पर फस्तीन की जमीनें खरीदने लगे। इन जमीनों को खरीदने में यहूदियों की सबसे बड़ी मदद वही रॉ चाइल्ड फैमिली कर रही थी। यहूदी फिलस्तीन की मेनम जगह नहीं बल्कि बिल्कुल खाली और
14:21
Speaker A
बंजर जमीनें खरीद रहे थे। इसीलिए फिलस्तीन के अरब भी खुशी से ट्रिपल प्राइस पर यहूदियों को यह जमीनें बेचने लगे। यहूदियों ने फस्तीन में अपनी सबसे बड़ी जमीन अहूजात बई में खरीदी जो बिल्कुल एक खाली और बंजर इलाका था। लेकिन आज उसी खाली
14:36
Speaker A
इलाके को इजराइल का कैपिटल तलवीफ कहा जाता है। जो आज दुनिया की सबसे एडवांस सिटीज में से एक है। ये देखकर पूरी दुनिया से और भी ज्यादा यहूदी फिलस्तीन में आबाद होने लगे। जिसके बाद यहूदियों ने अपनी जुबान में फस्तीन
14:55
Speaker A
में न्यूज़पेपर्स, रेडियो और टीवी के शोज़ शुरू किए। और इस तरह आखिर 2000 साल बाद फस्तीन की जमीन पर ही जबान दोबारा सुनाई देने लगी। अब तक यहूदी ये सब कुछ अकेले कर रहे थे। लेकिन यहां से उनको दुनिया में अपना सबसे
15:13
Speaker A
अच्छा दोस्त मिला। अमेरिका के इवेंजलिकल क्रिश्चियंस। गॉड गव देम दैट लैंड दे ओ दैट लैंड। अचानक अमेरिका में एक किताब लिखी गई। जीसस इज कमिंग। जिसमें दुनिया के क्रिश्चियंस के लिए एक बहुत बड़ा मैसेज था कि मेरे क्रिश्चियन
15:31
Speaker A
भाइयों जाग जाओ। क्योंकि बहुत जल्द दुनिया में जीसस वापस आने वाला है। और जीसस दुनिया में तभी वापस आएंगे जब फिलस्तीन में यहूदियों का अपना मुल्क होगा। इस किताब ने अमेरिका के सारे रिकॉर्ड्स तोड़ दिए और छपते ही मिलियंस ऑफ कॉपीज भेजे और
15:52
Speaker A
पूरे अमेरिका के क्रिश्चियंस के दिमाग में यह बात बैठ गई कि जीसस तभी वापस आएंगे जब फिलस्तीन में इजराइल का अपना मुल्क हो। यह बुक इतनी फेमस थी कि अमेरिका के लोगों ने मिलकर उस वक्त के प्रेसिडेंट की तरफ लेटर
16:05
Speaker A
भी लिखा कि प्लीज फिलस्तीन में इजराइल का मुल्क बनाएं। अब जब अमेरिका के आवाम का सपोर्ट यहूदियों के पास था। आखिर जाइनिस्ट दुनिया के सामने आए और स्विट्जरलैंड में अपनी पहली मीटिंग की जिसमें जाइनिज्म के लीडर थियोडोर हर्ज़ेल ने
16:23
Speaker A
पूरी दुनिया के सामने आकर कहा कि मैं आज ऐसी बात करने जा रहा हूं जिस पर मुझे पता है तुम सब मुझ पर हसोगे। फॉलस्तीन में 2000 साल बाद यहूदियों का अपना मुल्क होगा। यहूदी जो ऑफ कोर्स एक इंपॉसिबल बात थी।
16:38
Speaker A
लेकिन थियोडोर ने कहा कि याद रखना आज से 50 साल बाद मेरी यह बात पूरी होकर रही। यह इतनी जबरदस्त प्रेडिक्शन थी कि इस मीटिंग के एकक्टली 50 साल बाद इजराइल की रियासत कायम हुई। फाइनली बाय द ग्रेस ऑफ़ गॉड।
16:58
Speaker A
जाइनिस्ट अपने इस मिशन में इतने कमिटेड थे कि उन्होंने इसी मीटिंग में पहली बार इजराइल का झंडा भी पब्लिश किया। इस मीटिंग के कुछ ही अरसे बाद थियोडोर ने दो लोग फस्तीन की तरफ भेजे ताकि वो छुप-छुप कर जेरूसलम के हालात उन तक पहुंचा
17:15
Speaker A
सके। जिन्होंने जेरूसलम से वापस थियोडोर की तरफ एक सीक्रेट मैसेज भेजा कि दुल्हन मतलब जेरूसलम है तो बहुत खूबसूरत लेकिन मसला यह है कि वो किसी और की बीवी है। क्योंकि फस्तीन पर उस वक्त किसी और की नहीं बल्कि
17:30
Speaker A
उस्मानिया खिलाफत की हुकूमत थी। और उसके खलीफा सुल्तान अब्दुल हमीद एक बहुत ही सख्त इंसान थे। इसीलिए थियोडोर हज़ल सीधा उस्मानिया खलीफा से मिलने पहुंचे और उनको एक ऑफर दी कि हम जायनिस्ट उस्मानिया सल्तनत का बहुत बड़ा कर्जा उतार
17:50
Speaker A
देंगे। अगर सुल्तान अब्दुल हमीद फस्तीन का इलाका यहूदियों को दे दे। लेकिन सुल्तान अब्दुल हमीद ने थियोडोर को जवाब दिया कि अगर तुम लोग मेरे जिस्म के टुकड़े-टुकड़े भी करो ना तब भी मैं फस्तीन तुम लोगों के हवाले कभी नहीं करूंगा।
18:08
Speaker A
और यहां से उस्मानिया सल्तनत और जाइनस की लड़ाई शुरू हुई। अब जायनेस सीधा जाकर अपने पुराने दोस्त ब्रिटिश एंपायर से अपने मुल्क की भीख मांगने लगे। अब फस्तीन में यहूदी मुल्क बनना तो इंपॉसिबल था। इसीलिए ब्रिटिश एंपायर ने जायनिस्ट को दो ऑफर्स दी कि तुम
18:26
Speaker A
लोग फलस्तीन को छोड़कर युगांडा और अर्जेंटीना में से कोई भी इलाका चूज़ करो और वहां अपना मुल्क बनाओ। लेकिन यहूदियों ने ब्रिटिश एंपायर से क्लियरली कहा कि जिस तरह जर्मनी में जर्मंस, फ्रांस में फ्रेंच और इंग्लैंड में इंग्लिश लोग रहते हैं।
18:42
Speaker A
उसी तरह यहूदी भी दुनिया में एक ही जगह फस्तीन में ही रहेंगे। दुनिया के सारे जाइनिस्ट मिलकर कोशिश करने लगे कि किसी तरह अब उस्मानिया सल्तनत को गिरा दिया जाए और ऐसा ही हुआ। कुछ ही अरसे बाद दुनिया की
18:55
Speaker A
सबसे बड़ी जंग शुरू हुई वर्ल्ड वॉर वन। एंड ऑफ कोर्स वर्ल्ड वॉर शुरू होते ही ब्रिटिश एंपायर एक बार फिर अपने पुराने दोस्त रॉस्टाइल फैमिली की तरफ मदद के लिए देखने लगे। और उन्हें खुश करने के लिए ब्रिटिश एंपायर ने रस्टाइल फैमिली से वादा
19:18
Speaker A
किया कि अगर इस वर्ल्ड वॉर के बहाने से हमने फिलस्तीन उस्मानिया खिलाफत से छीन लिया तो वहां हम आपके लिए इजराइल का नया मुल्क बनाएंगे। जिसके बाद ऑफ कोर्स पूरी दुनिया के यहूदी ब्रिटिश एंपायर के साथ खड़े हो गए। और ब्रिटिश एंपायर ने आसानी
19:35
Speaker A
से फस्तीन उस्मानिया खिलाफत से छीन लिया। और जेरूसलम जैसी होली सिटी फतह करने के बाद ब्रिटिश एंपायर के फॉरेन मिनिस्टर आर्थर बेलफोर्ड ने दुनिया के सबसे ताकतवर यहूदी वाल्टर रस्टाइल की तरफ एक लेटर भेजा जिसमें उसने क्लियरली कहा कि ब्रिटिश
19:51
Speaker A
एंपायर अपनी फुल ताकत के साथ इजराइल का मुल्क बनाने की कोशिश करेगी। अब बेलफोर खुद तो एक क्रिश्चियन था लेकिन वो इस सबसे कई साल पहले लिखी जाने वाली किताब जीसस इस कमिंग से बहुत इंस्पायर्ड था। लेकिन अब
20:04
Speaker A
मसला यह था कि जब ब्रिटिश एंपायर ने 1917 में इजराइल की रियासत बनाने का ऐलान किया। उस वक्त फिलस्तीन में सिर्फ 10% यहूदी थे और बाकी 90% मुसलमान थे। जिससे रॉस्टाइल और बाकी जायनिस्ट को समझ आ गई कि अगर हम
20:20
Speaker A
इजराइल की रियासत बनाना चाहते हैं तो हमें फस्तीन में अपनी आबादी बढ़ानी होगी। इसीलिए वर्ल्ड वॉर वन के बाद पूरी दुनिया से यहूदी फस्तीन की तरफ तेजी से शिफ्ट होने लगे। नाउ जिस तरह बहुत साल पहले ब्रिटिश एंपायर
20:35
Speaker A
ने रस्टाइल फैमिली की मदद से नेपोलियन को हराया था। अब उन्होंने उसी रस्ट की मदद से वर्ल्ड वॉर वन में उस्मानिया खिलाफत और जर्मनी को बिल्कुल तोड़ दिया था। जिसके बाद ब्रिटिश एंपायर तो वर्ल्ड वॉर जीतने का जश्न मना रहे थे। लेकिन जर्मन आवाम को
20:52
Speaker A
समझ आ गई थी कि इस जंग में किसने और कैसे उनके साथ बगावत की। असल में सबसे बहुत साल पहले रस्टाइल बिजनेस जर्मनी से ही शुरू हुआ था। लेकिन अब जब वर्ल्ड वॉर का टाइम आया तो रस्टाइल जर्मनी को छोड़कर ब्रिटिश एंपायर को
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Speaker A
सपोर्ट कर रहे थे। जिससे आहिस्ता-आहिस्ता जर्मन आवाम में यहूदियों के लिए गुस्सा बढ़ने लगा और यहां से दुनिया में एक नए लीडर की एंट्री होती है। एडोल्फ हिटलर ने आते ही जर्मन आवाम को यह बात समझाने की कोशिश की कि हम तो वर्ल्ड वॉर
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Speaker A
जीतने वाले थे। सिर्फ इन यहूदियों की गद्दारी की वजह से हम यह जंग बेशर्मी से हार गए। हिटलर जब भी स्पीच करता था, उसकी बातें और स्टाइल ऐसा होता था कि जर्मनी का बच्चा-बच्चा उसकी हर बात पर यकीन करता था।
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Speaker A
जिसके बाद हिटलर ने जर्मनी में यहूदियों के सारे बिजनेसेस बंद कर दिए और इवन जर्मनी में रचाइल्ड का सबसे पहला बैंक, 200 साल पुराना बैंक बंद कर दिया। हिटलर की फौज आहिस्ता-आहिस्ता पूरे यूरोप को फतह करने लगी और यूरोप की हर सिटी में जाकर
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Speaker A
वहां के यहूदियों को मारने लगी। यह देखकर यूरोप के सारे यहूदी हिटलर से अपनी जान बचाकर भागने लगे और इस ओपोरर्चुनिटी को यूज करके रस्ट चाइल्ड के बाकी भाइयों ने इन सारे यहूदियों को फस्तीन की तरफ भेजना शुरू किया और फिलस्तीन में एक बार फिर
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Speaker A
यहूदियों की पापुलेशन तेजी से बढ़ने लगी जब वर्ल्ड वॉर वन खत्म हुई। फिलस्तीन में सिर्फ 10% यहूदी थे। लेकिन वर्ल्ड वॉर टू खत्म होने के बाद 30% से भी ज्यादा यहूदी थे। वर्ल्ड वॉर टू तो ब्रिटिश एंपायर ने जीत
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ली थी। लेकिन इस जंग में उनका इतना नुकसान हुआ था कि अब वो इस ग्रेट एंपायर को और नहीं संभाल सकते थे। इसीलिए इंडिया, पाकिस्तान, श्रीलंका जैसी कंट्रीज ब्रिटिश एंपायर से आजाद होने लगी। यह देखकर फस्तीन के जाइनेस्ट भी ब्रिटिश एंपायर को कहने
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Speaker A
लगे कि अब अपना वादा पूरा करो और यहां पर एक यहूदी रियासत बनाओ। लेकिन मसला यह था कि अब भी फिलस्तीन में सिर्फ 30% यहूदी थे और बाकी सारे मुसलमान थे। जिसकी वजह से ब्रिटिश एंपायर इतनी जल्दी इजराइल की
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Speaker A
रियासत बनाने के लिए तैयार नहीं थी। यह देखकर फस्तीन के यहूदी और जाइनिस्ट अपने पुराने दोस्त ब्रिटिश एंपायर के खिलाफ होने लगे और पहली बार जाइनिस्ट ब्रिटिश एंपायर पर ही हमले करने लगे। अब एक ऐसी सिचुएशन थी कि मुसलमान और यहूदी
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Speaker A
सब ब्रिटिश एंपायर के खिलाफ लड़ रहे थे। इसीलिए ब्रिटिश एंपायर ने आखिर तंग आकर फस्तीन का मसला यूनाइटेड नेशंस के सामने पेश किया और कहा अब आप ही फैसला करें कि फस्तीन के साथ क्या होना चाहिए। जिसके बाद
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Speaker A
यूनाइटेड नेशंस ने आज तक अपनी हिस्ट्री का सबसे स्टूपिड फैसला किया। डिसीजन यूनाइटेड नेशंस ने फैसला किया कि फिलस्तीन को तीन हिस्सों में डिवाइड कर दिया जाएगा। फिलस्तीन का सबसे बड़ा हिस्सा सिर्फ 33% आबादी वाले यहूदियों को दिया जाएगा। और
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Speaker A
फिलस्तीन के 66% मुसलमानों को फिलस्तीन का छोटा सा हिस्सा दिया जाएगा और जेरूसलम को एक इंटरनेशनल सिटी बना दिया जाएगा। यह ऐसा ही है कि एक केक को 10 लोगों में डिवाइड कर दिया जाए। आधा केक तीन लोगों को और आधा
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Speaker A
केक बाकी सात लोगों को दिया जाए। जो एक बहुत ही अनफेयर फैसला था। जब यूएन ने अपना यह फैसला जाइनिस और फस्तीन में मुसलमान कमेटी के सामने रखा तो ऑफ कोर्स यहूदी तो इस फैसले पर बहुत बड़ा जश्न मनाने लगे।
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Speaker A
लेकिन फिलस्तीन की मुसलमान कमेटी ने यूएन के इस फैसले को बिल्कुल रिजेक्ट कर दिया। मुसलमानों की इस कमेटी के हेड का नाम अमीन अल हुसैनी था जो पूरे फस्तीन का ग्रैंड मुफ्ती था। ब्रिटिश एंपायर और जाइनस इस बंदे से पहले से ही नफरत करते थे। क्योंकि
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Speaker A
वर्ल्ड वॉर टू में इस ग्रैंड मुफ्ती ने ब्रिटिश एंपायर के खिलाफ जाकर जर्मनी के हिटलर को सपोर्ट किया था। बल्कि हिटलर के साथ पर्सनल मीटिंग्स भी की थी और इवन हिटलर के लिए एक मुसलमान आर्मी भी बनाना चाहता था। जैसे ही मुसलमानों ने यूएन के
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Speaker A
प्लान को रिजेक्ट किया, अचानक इजराइल के रस्ट स्ट्रीट पर जायनेस्ट का लीडर दुनिया के सामने आया और कहा मुसलमानों की इस ढिठाई की वजह से आज हम यह ऐलान करते हैं कि अब आधा फस्तीन नहीं पूरा फस्तीन हमारा
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Speaker A
होगा। और इसी के साथ डेविड बनोरियन ने इजराइल की आजादी का ऐलान कर दिया। यह ना यह ऐलान उसने अपने ज़ाइनस लीडर थियोडोर हर्ज़ेल की बहुत बड़ी तस्वीर के नीचे किया था जिसने इस दिन से एग्जैक्ट 50 साल पहले
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Speaker A
कहा था कि आज से 50 साल बाद दुनिया में इजराइल की रियासत बनेगी और एग्जैक्टली ऐसा ही हुआ। इजराइल की आजादी के सिर्फ 11 मिनट बाद सुपर पावर अमेरिका ने इजराइल के मुल्क को एक्सेप्ट कर लिया। जिसके बाद सोवियत यूनियन और बाकियों ने भी
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ऐसा ही किया। जिनमें सिर्फ एक इस्लामिक कंट्री थी जिसने इजराइल को एक्सेप्ट किया। रजा शाह का ईरान। अब जब इजराइल के सारे यहूदी आजादी का जश्न मना रहे थे। उसके सिर्फ एक दिन बाद इजराइल के पास पांच अरब कंट्रीज ने इजराइल पर
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Speaker A
हमला कर दिया। लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। इजराइल ने अमेरिका और ब्रिटिश की मदद से इन बड़े-बड़े अरब कंट्रीज को क्रश कर दिया। बल्कि इस जंग से इजराइल का साइज और भी बढ़ गया। और जो हिस्सा यूएन ने मुसलमानों को
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Speaker A
देने का वादा किया था, वह भी मुसलमानों के हाथ से निकल गया। अब इजराइल के लिए फ़स्तीन में सिर्फ एक ही मसला था कि अभी भी फिलस्तीन में मुसलमानों की आबादी यहूदियों से डबल थी। इसीलिए इजराइल के बनते ही
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Speaker A
उन्होंने अपना सबसे पहला काम यह किया कि उन फिलस्तीनियों को जो यहां पर हजार साल से आबाद थे, हमेशा के लिए फिलस्तीन से निकालने लगा। इजराइल ने फिलस्तीनियों की बड़ी-बड़ी सिटीज और 500 विलेजेस को तबाह कर दिया। और जो मुसलमान इजराइल के इस
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Speaker A
जुल्म के बाद भी फिलस्तीन छोड़कर नहीं जा रहे थे। कहा जाता है इजराइल ने उनके पानी के कुओं और पाइपों में जहर मिलाकर उन सबको मार डाला और इस तरह एक ही साल में 8 लाख फ़िलस्तीनी मुसलमान फिलस्तीन को छोड़कर
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Speaker A
हमेशा के लिए चले गए और इन फिलस्तीनियों के खाली घरों को भरने के लिए पूरी दुनिया से 7 लाख यहूदी इजराइल की तरफ आए जिससे फिलस्तीन में यहूदियों की आबादी 60 और 70% तक चली गई और आज तक इजराइल इसी स्ट्रेटजी
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Speaker A
को बार-बार यूज़ करता है। हर कुछ सालों बाद इजराइल कोई ना कोई बहाना बनाकर फस्तीनियों को फस्तीन से निकालता रहता है ताकि फस्तीन से मुसलमानों का नामोनिशान हमेशा के लिए मिट जाए और यहां सिर्फ और सिर्फ यहूदी जाइनिस्ट की हुकूमत है।
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Speaker A
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