सुल्तान मोहम्मद गौरी की कहानी, जिन्होंने हिंदुस्तान में पहली बार मुसलमानों की हुकूमत स्थापित की।
Key Takeaways
- मुसलमानों की सत्ता स्थापित करने के लिए दृढ़ संकल्प और लंबी तैयारी आवश्यक थी।
- गौरी ने हार के बाद भी हार नहीं मानी और पुनः तैयारी कर विजय प्राप्त की।
- युद्ध में रणनीति और साहस का महत्वपूर्ण योगदान होता है।
- इतिहास में छोटे से क्षेत्र से बड़े साम्राज्य की स्थापना संभव है।
- मुसलमानों का भारत और यरूसलम पर शासन लंबे समय तक कायम रहा।
What the video covers
- 1000 साल पहले मुसलमानों की स्थिति वर्तमान जैसी थी और युवाओं ने सत्ता संभालने का निर्णय लिया।
- शबुद्दीन मोहम्मद गौरी ने अफगानिस्तान से एक नई एंपायर बनाई जो हिंदुस्तान में पहली मुसलमान हुकूमत बनी।
- गौरी ने यरूसलम को मुसलमानों के कब्जे में वापस लाने वाले सुल्तान सलाहाउद्दीन अयूबी से प्रेरणा ली।
- गौरी ने कठिन रेगिस्तान पार कर हिंदुस्तान पर हमला किया लेकिन पहली बार हार का सामना किया।
- 12 साल की तैयारी के बाद गौरी ने फिर से हिंदुस्तान पर हमला किया और कई इलाकों को अपने नियंत्रण में लिया।
- पृथ्वीराज चौहान के साथ कई युद्ध हुए, जिनमें गौरी ने अंततः विजय प्राप्त की।
- गौरी की फौज ने रणनीतिक हमले और घोड़ों की मदद से बड़े युद्धों में सफलता पाई।
- पृथ्वीराज चौहान को गौरी ने माफ कर अजमेर का गवर्नर बनाया, लेकिन बाद में बगावत हुई।
- मुसलमानों का हिंदुस्तान और यरूसलम पर राज लगभग 700 साल तक जारी रहा।
- गौरी की हत्या के बाद भी उनकी बनाई हुई एंपायर ने मुसलमानों की सत्ता को मजबूत रखा।
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Speaker A
आज दुनिया में मुसलमानों के साथ जो हो रहा है, ये कोई पहली दफा नहीं है। आज से 1000 साल पहले मुसलमानों की एक्ज़ैक्ट यही सिचुएशन थी। इसी टाइम उस जमाने के यंग लोगों ने फैसला किया कि हम इस पूरे सिस्टम का कंट्रोल अब
Speaker A
अपने हाथ में लें और मुसलमानों को दोबारा पूरी दुनिया की सुपर पावर बनाएंगे। अकबर तो अफगानिस्तान के एक छोटे से इलाके से एक यंग लड़का सामने आया, जिसका नाम था शबुद्दीन मोहम्मद गौरी। गौरी ने अपने बड़े भाई के साथ मिलकर
Speaker A
अफगानिस्तान के एक छोटे से इलाके से एक नई एंपायर बनाना शुरू किया, जिसने आगे जाकर हिंदुस्तान की तारीख में पहली बार मुसलमानों की हुकूमत बनाई। अब गौरी अंपायर जब स्ट्रांग हुई तो गौरी ने फैसला किया कि अब वक्त आ गया है कि वो
Speaker A
अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा गोल हिंदुस्तान पर मुसलमानों की हुकूमत स्टार्ट करें। और दूसरी तरफ यहां से बहुत दूर इजिप्ट से एक यंग लड़का इस पूरे इलाके का नया सुल्तान बन गया। और उसकी जिंदगी का सिर्फ एक ही गोल था कि मैंने किसी तरह भी यरूसलम
Speaker A
को वापस मुसलमानों के कब्जे में लेना। जिसका नाम था सुल्तान सलाहाउद्दीन अयूबी। मैन आई एम सलाहाउद्दीन। अब गौरी जब बहुत स्ट्रांग हो तो उसने अपनी पूरी फौज को हिंदुस्तान पर हमला करने के लिए रवाना किया। लेकिन हिंदुस्तान पर हमला करने के लिए
Speaker A
उसके पास सिर्फ एक ही रास्ता था और वो था एक बहुत बड़ा डेजर्ट। क्योंकि ऊपर के रास्ते पर किसी और की हुकूमत थी। अब वो जब इस डेजर्ट में पहुंचा तो उसे पता चला कि यह इतना खतरनाक डेजर्ट
Speaker A
है कि यहां खाने-पीने के लिए कुछ भी नहीं है। और उसकी पूरी फौज को इतनी प्यास लगी कि कहा जाता है कि वो अपने घोड़ों का खून पीने लगी। इसी तरह इस पूरी फौज ने बहुत ही मुश्किलों से यह सारा डेजर्ट क्रॉस कर लिया।
Speaker A
जैसे ही उन्होंने इस डेजर्ट को क्रॉस किया तो उन्होंने देखा कि सामने हिंदुस्तान की एक बहुत ही बड़ी फौज खड़ी है। हिंदुस्तान की इस फौज ने गौरी को ऐसा फंसा लिया कि गौरी के पास भागने के लिए कोई रास्ता भी
Speaker A
नहीं था और बहुत ही बुरी तरह गौरी की फौज को मारने लगी। गौरी शदीद जख्मी हो गया। और किसी तरीके से अपनी जान बचाकर वहां से भाग गया। इतनी बुरी तरह हारने के बाद गौरी को समझ आ गई कि हिंदुस्तान को फतह करना कोई बच्चों
Speaker A
का खेल नहीं है। और उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा गोल हिंदुस्तान को फतह करना सिर्फ एक ड्रीम ही रहता है। लेकिन उसने हार नहीं मानी और अगले 12 साल खुद को स्ट्रांग करने लगा। सबसे पहले उसने पाकिस्तान का यह ऊपर वाला
Speaker A
इलाका सारा अपने कंट्रोल में ले लिया क्योंकि वो अब हिंदुस्तान पर हमला कभी भी उस डेजर्ट से नहीं करना चाहता जिसकी वजह से वो बहुत ही बुरी तरह से हारा था। जब यह पूरा इलाका उसके कंट्रोल में आ
Speaker A
गया तो उसने अपनी तैयारी और भी ज्यादा स्पीड कर ली। एक दिन एक घोड़ा फुल स्पीड वहां पहुंचा और उसने गौरी को एक लेटर दिया। गौरी ने जब वो लेटर खोला तो उसमें लिखा था खलीफातुल मुस्लिमीन और मशरिक मगरब के
Speaker A
सुल्तानों के नाम बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम। अल्लाह ने इस्लाम को इस फतह से इज्जत बक्शी और शहरों की दुल्हन यरूसलम को उसके असली घर वापस पहुंचा दिया। 90 साल के अंधेरे के बाद वो शहर जो पहला क़बला और तीसरा मुकद्दस हरम है। आज बिल
Speaker A
आखिर पाक कर दिया गया है। डोम ऑफ द रॉक से क्रॉस हटा दिया गया है। अब वहां अजान की गूंज है। जहां तकरीबन एक सदी से सिर्फ घंटियों का शोर था। आज वहां कुरान की तिलावत हो रही है।
Speaker A
जहां कभी उन बातों का जिक्र था जिसकी खुदा ने इजाजत नहीं दी थी। इस्लाम का नूर अपने घर वापस लौट आया है और जुल्म का अंधेरा खत्म हो गया है। हरम मुकद्दस बहाल हो चुका है। रास्ता साफ है। दुनिया जान ले अलस
Speaker A
आजाद है। सुल्तान सलाहाउद्दीन अयूबी। यह लेटर पढ़कर उसे कितनी खुशी हुई होगी। जिस तरह आज अगर कोई आकर हमें बताए कि फस्तीन आजाद हो गया। अब गौरी को इतनी मोटिवेशन मिल गई थी कि वो किसी सूरत भी रुकने वाला नहीं था। और 12
Speaker A
साल बाद फुल तैयारी के साथ फाइनली अपनी पूरी फौज को लेकर हिंदुस्तान पर हमला करने के लिए रवाना हुआ। जब वो हिंदुस्तान में एंटर हुआ तो बड़ी आसानी से उसने सारे इलाके अपने कंट्रोल में लेना शुरू किया और आगे बढ़ता गया
Speaker A
और फाइनली उसने हिंदुस्तान के एक बहुत बड़े किले को फतह कर लिया। इस वक्त यहां का राजा एक 25 साल का लड़का था, जिसका नाम था पृथ्वीराज चौहान। और गौरी को पता था कि ये छोटा सा लड़का मेरा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता।
Speaker A
जब पृथ्वीराज चौहान को गौरी के हमले का पता चला तो वो अपनी पूरी फौज को तैयार करके गौरी पर हमले के लिए आ गए। और फाइनली ये दोनों फौजें एक दूसरे के सामने आ गई। एक तरफ पृथ्वीराज के 50,000 की फौजी
Speaker A
और दूसरी तरफ गौरी की 20,000 की फौजी। जंग शुरू होते ही गौरी ने अपने सेंटर को हमला करने का आर्डर दिया। वो तेजी से आगे गए और तीर मारने लगे। लेकिन पृथ्वीराज की फौज बहुत ज्यादा थी और बहुत ही डिसिप्लिन थी। तो इन तीरों से
Speaker A
उनको कोई फर्क नहीं पड़ा। और पृथ्वीराज ने यही मौका देखकर अपनी पूरी फौज को हमला करने का आर्डर दिया। यह देखकर गौरी की फ्रंट वाली फौज पीछे भाग गई। लेकिन पृथ्वीराज की फौज फुल स्पीड उनका पीछा करने लगी।
Speaker A
और फाइनली पृथ्वीराज की फौज गौरी की मेन फौज तक पहुंच गई। यहां बहुत सख्त जंग शुरू। कुछ टाइम के लिए गौरी की फौज ने पृथ्वीराज की फौज को रोका। लेकिन वो बहुत ही ज्यादा थी तो गौरी की फौज आराम आराम से मरने लगी,
Speaker A
जिसकी वजह से वो पीछे हटने लगी। गौरी ने जब यह सब देखा तो वो एकदम हैरान हो गया कि ये कैसे हो सकता है? हम कैसे हार सकते हैं? कि मेरी 12 साल की मेहनत जाया हो गई तो
Speaker A
बजाय इसके कि वो पीछे भागता, उसने अपने घोड़े को फुल स्पीड दुश्मन की फौज की तरफ रवाना किया और गौरी का एक ही टारगेट था इस फौज का जनरल जो एक बहुत ही बड़े हाथी पर बैठा हुआ था।
Speaker A
गौरी फुल स्पीड अपने घोड़े पर उसकी तरफ जा रहा था। एकदम गौरी ने अपना स्पेयर उस जनरल की तरफ फेंका। लेकिन वो मिस हो गया। अब उस जनरल ने वापस गौरी पर बहुत ही तेजी से अपना स्पेयर मारा
Speaker A
और वो सीधा जाकर गौरी को लगा और गौरी एक ही वार में अपने घोड़े से नीचे गिर गया। और गौरी जमीन पर पड़ा हुआ था। 12 साल जिस हिंदुस्तान को हासिल करने के लिए उसने मेहनत की, अब वो हिंदुस्तान उसे कभी नहीं मिल सकता
Speaker A
था। उसकी हार भी एक ऐसे राजा के हाथों हुई थी जो सिर्फ 25 साल का था। अब गौरी की बची कुछ फौज वहां से भाग गई और दूर एक सेफ जगह पहुंच के उन्होंने अपने कैंप्स लगाए। अभी तक सबको पता चल गया था कि गौरी अब हम
Speaker A
में नहीं रहा। सारी रात ये सब टेंशन में रहे। अगली सुबह जब वो जागे तो उन्होंने देखा कि दूर से कुछ फौजी एक जख्मी बंदे को अपने साथ लेके आ रहे हैं। जब उन्होंने गौर से देखा तो उन्हें पता
Speaker A
चला कि ये तो शबुद्दीन गौरी है। तो उन्होंने गौरी को जल्दी से अपने कैंप पहुंचाया। फिर उन्होंने उन बंदों से पूछा कि सुल्तान बचा कैसे? तो वहां खड़े गुलाम ने बताया कि जब सुल्तान अपने घोड़े से नीचे गिरा था, वो बेहोश हो गया था। और राजा
Speaker A
की फौज उसे नहीं जानती थी कि यह सुल्तान है या एक आम सोल्जर है। तो सुल्तान भी उसी तरह वहीं पड़ा था। रात को जब राजा की फौज वापस चली गई तो हम वहां सुल्तान को ढूंढने के लिए गए। इसी टाइम सुल्तान को थोड़ा सा
Speaker A
होश आ गया था। जब उसने हमारी आवाज सुनी तो उसने हमें आवाज दी। तो हमने सुल्तान को बचा लिया और कंधे पर उठाकर किसी तरीके से हम यहां आपके पास इन्हें ले आए। लेकिन कुछ हिस्टोरियन कहते हैं कि नहीं, जब गौरी को
Speaker A
स्पेयर लगा इसी टाइम एक गुलाम ने उसे अपने घोड़े में बचा लिया। एनी हाउ गौरी अपनी फौज के पास वापस पहुंच गया था। वो जख्मी गौरी को अपने साथ लेकर आराम आराम से अफगानिस्तान की तरफ रवाना हुआ। गौरी शदीद
Speaker A
जख्मी था लेकिन उसे समझ नहीं आ रही थी कि वो लोगों को फेस कैसे करेगा क्योंकि वो दूसरी दफा जंग आ रहा था और वो भी 12 साल की मेहनत के बाद। अब जैसे ही वो अफगानिस्तान पहुंचे तो गौरी बहुत ज्यादा
Speaker A
गुस्से में था। स्पेशली अपने उन जनरल्स पर जो जंग छोड़ कर भागे थे। तो उसने उन जनरल्स के गले पर अजीब-अजीब चीजें रख कर पूरे शहर में घुमाया। ताकि इसके बाद कोई जुर्रत भी ना कर सके ऐसी हरकत करने की। अब
Speaker A
गौरी के पास दो रास्ते थे। एक यह कि वो हिंदुस्तान का ख्वाब छोड़ कर आराम की जिंदगी गुजारे। लेकिन गौरी ने फैसला किया कि अब आराम मुझ पर हराम है। और उसने हिंदुस्तान पर हमले की दोबारा तैयारी शुरू
Speaker A
कर दी। और फाइनली सिर्फ एक साल बाद गौरी ने एक बहुत बड़ी फौज तैयार करके हिंदुस्तान की तरफ दोबारा रवाना हुए। इस बार बड़े-बड़े जनरल्स रास्ते में गौरी की आर्मी को ज्वाइन करने लगे। इन्हीं जर्नल्स में से एक जनरल ने पूछा कि सुल्तान सिर्फ
Speaker A
एक साल में आपने दोबारा इतनी तैयारी कैसे कर ली? तो गौरी ने कहा कि मैं पूरा साल ना तो रात को सोया हूं ना अपने घर गया हूं। मैंने एक दिन भी सुकून से नहीं गुजारा बल्कि पूरे साल मैंने इसी
Speaker A
जंग के लिए तैयारी की। गौरी आगे बढ़ता गया और दोबारा उस किले को फतह कर दिया जो उसने पिछले साल फतह किया था। और वहां से गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को एक लेटर भेजा कि मुसलमान हो जाओ और मेरी
Speaker A
हुकूमत को एक्सेप्ट करो। लेकिन राजा ने साफ-साफ इंकार कर दिया और अपने बाकी राजाओं के साथ मिलकर एक बहुत बड़ी फौज तैयार करके हमले के लिए रवाना हो गए। ये दोनों फौजें एक बार फिर उसी मैदान में एक दूसरे के सामने आ गई। एक तरफ गौरी की
Speaker A
500 की फौज और दूसरी तरफ पृथ्वीराज चौहान की 1 लाख की फौज। इसी टाइम राजा ने गौरी को एक मैसेज भेजा। तुम ऐसा करो कि जंग छोड़कर इज्जत से वापस चले जाओ और जितने भी इलाके तुम्हारे कंट्रोल में हैं उसे वापस हमारे हवाले कर।
Speaker A
दो। क्योंकि तुम्हें हमारी फौज को पता है हमने पिछली दफा तुम्हारा क्या हाल किया। इस बार उससे बुरा हाल कर। लेकिन अगर फिर भी तुम हमारे साथ जंग करना चाहते हो तो हमारे ये खतरनाक हाथी, हाई स्पीड घोड़े
Speaker A
और खून के प्यासे सोल्जर्स तुम्हें तबाह बर्बाद कर देंगे। गौरी ने जैसे ही यह सुना तो उसने जवाब दिया कि असल में मैं खुद भी लड़ना नहीं चाहता। मैं तो यहां मजबूर हूं क्योंकि मुझे मेरे बड़े भाई जो हमारी पूरी अंपायर
Speaker A
का सुल्तान है उसने भेजा है। आप मुझे सिर्फ इतना टाइम दें कि मैं एक बंदा अफगानिस्तान भेज के उससे सिर्फ इजाजत मांगूं। राजा ने कहा ठीक है हम इंतजार करेंगे। राजा की बहुत बड़ी फौज थी और गौरी उसके
Speaker A
मुकाबले का था ही नहीं। तो उसने आराम से सारी रात अय्याशी की। दिल मिसरिया में और फिर सो गए। अब जब राजा की फौज सो रही थी तो अचानक कैंप के बाहर बहुत ज्यादा शोर स्टार्ट हुआ। जैसे ही उन्होंने बाहर आके देखा तो गौरी
Speaker A
की सारी फौज बिल्कुल उनके सामने खड़ी। और गौरी की फौज ने डायरेक्ट हमला कर दिया। यह देखकर राजा की फौज इधर-उधर भागने लगी और उनका पूरा डिसिप्लिन टूट गया। राजा यह देखकर हैरान हो गया कि ये कैसे हो सकता
Speaker A
है? सारी रात तो गौरी अपने कैंप में बैठा हुआ था और अब अचानक ये यहां कैसे?
Speaker A
असल में यह गौरी का प्लान था। उसने रात के टाइम अपने कैंप में कुछ सोल्जर्स को आग जलाए रखने का हुकुम दिया। ताकि राजा की आर्मी को लगे कि गौरी वहीं पर है। लेकिन वो अपनी सारी फौज को लेकर
Speaker A
दूसरी साइड निकल गया। और सूरज निकलने से पहले वो अपनी सारी फौज लेकर पृथ्वीराज चौहान के कैंप के बिल्कुल करीब खड़ा था। सुबह-सुबह जब पृथ्वीराज सो रहा था, तो गौरी के एक फौज के ग्रुप ने उसके कैंप पर
Speaker A
हमला कर दिया। जिससे राजा की फौज का डिसिप्लिन बिल्कुल टूट गया और बहुत से हाथी भी मारे गए। गौरी ने अपनी फौज को चार ग्रुप्स में डिवाइड कर लिया और खुद इस फौज के पीछे खड़ा हुआ। उसने अपनी एक साइड की फौज को हुकुम दिया
Speaker A
कि जाकर हमला करो। गौरी की ये फौज फुल स्पीड आगे बढ़ती और जाकर राजा की फौज पर तीर मारने। राजा की फौज को बिल्कुल टाइम ही नहीं मिल रहा था कि वो अपने आप को सेट करें। क्योंकि इस बार गौरी की ये स्ट्रेटजी
Speaker A
बिल्कुल डिफरेंट थी। सारे आर्चरर्स घोड़े पर सर्कल में तीर मारते थे। जिससे उनके तीर बिल्कुल रुक ही नहीं रहे थे। क्योंकि जो बंदा तीर मारता था वो आगे इसी सर्कल में जाके उसे टाइम मिलता था रीलोड करने का।
Speaker A
तो इस सर्कल की वजह से उनके तीर बिल्कुल रुक ही नहीं रहे थे और इस तरह वो राजा की फौज पर कंटीन्यूअसली तीर मार रहे थे। तो राजा ने जब ये देखा तो उसने अपने एक साइड की फौज को हमला करने के लिए कहा।
Speaker A
जब वो हमले के लिए आगे बढ़े तो गौरी की फौज पीछे भागने लगी और अपनी मेन फौज के पास आ गई। फिर होरी ने अपनी दूसरी साइड की फौज को कहा कि जाओ और हमला करो। वो भी इसी
Speaker A
स्ट्रेटजी के साथ राजा की फौज पर तीर मारने लगे। और जब राजा की फौज ने हमला किया तो वो भी पीछे भागने लगे। और इसी तरह सारा दिन यही होता गया। जिससे राजा की फौज बहुत ज्यादा थक गई। इसी टाइम गौरी ने अपनी सारी फौज को
Speaker A
हमला करने का और दोनों फौजों में बहुत ही सख्त जंग स्टार्ट हो गई। लेकिन राजा की फौज गौरी की फौज से इतनी ज्यादा थी कि उसे इतना फर्क नहीं पड़ रहा था। तो उसने अपनी सेंटर की फौज को कहा कि
Speaker A
जाओ और इनसाइड्स को स्ट्रांग करो। लेकिन जैसे ही राजा का सेंटर खाली हुआ तो गौरी एकदम अपने घोड़े पर फुल स्पीड सेंटर की तरफ रवाना हुआ। पृथ्वीराज चौहान ये देखकर एकदम हंसने लगा। कि ये अकेला बंदा मेरा क्या बिगाड़ सकता
Speaker A
है। लेकिन जैसे ही वो थोड़ा आगे आया तो राजा ने देखा कि पीछे से 12,000 घोड़ों ने गौरी को जॉइ कर लिया और तेजी से सेंटर में घुसकर राजा की फौज को चारों तरफ से घेर लिया। असल में जंग से पहले ही गौरी ने अपने
Speaker A
12,000 एलट फौज को पीछे खड़ा किया था और बाकी फौज को चार ग्रुप्स में डिवाइड करके उन्हीं से हमला करा रहा था और वो इसी मौके का इंतजार कर रहा था कि जैसे ही सेंटर खाली होगा तो वो इस फौज को
Speaker A
लेकर हमला करें। इसी स्ट्रेटजी की वजह से राजा की फौज भागने लगी और बाकी फौज को गौरी ने क्रश कर दिया। और फाइनली मुसलमान ये जंग जीतू अकबर। गौरी ये देखकर कितना खुश हुआ होगा क्योंकि इस दिन के लिए उसने अपनी सारी जिंदगी
Speaker A
मेहनत की थी और इतनी बार हारा था कि दोबारा उठने का कोई चांस ही नहीं था लेकिन फिर भी उसने हार नहीं मानी और अब फाइनली गौरी की जिंदगी का सबसे बड़ा गोल हिंदुस्तान पर मुसलमानों की हुकूमत पूरी पूरा हो गया था।
Speaker A
गौरी ने पृथ्वीराज को माफ कर दिया और अजमेर का गवर्नर बना दिया। क्योंकि इन दोनों के नाम पे कॉइंस भी ल्च की गई जो कि आज तक हिंदुस्तान के एक बहुत बड़े म्यूजियम में मौजूद है। लेकिन कुछ अरसे बाद पृथ्वीराज ने बगावत कर
Speaker A
दी और गौरी ने उसे मारकर उसी के बेटे को नया गवर्नर बना दिया। अब यह पूरा इलाका जब गौरी के कंट्रोल में आया। गौरी ने अपने गुलाम जनरल को अपनी फौज का कमांडर बनाया और हुकुम दिया कि आगे बढ़ते जाओ और बाकी
Speaker A
सारा इलाका फतह करो। इस जनरल का नाम था कुतुबुद्दीन ऐबक। वो जनरल बड़ी तेजी से आगे बढ़ता गया और कुछ ही अरसे में उसने बंगाल तक का पूरा इलाका गौरी सल्तनत में शामिल कर लिया। अब गौरी अफगानिस्तान से बंगाल तक इस पूरी
Speaker A
एंपायर को कंट्रोल कर रहा था। और दूसरी तरफ सुल्तान सलाउद्दीन अयूबी ने भी क्रिश्चियंस को हराकर जेरूसलम से भगा दिया था। और जेरूसलम को बिल्कुल आजाद कर दिया था। किसी की जुर्रत नहीं थी कि वो मुसलमानों का कुछ बिगाड़ सके।
Speaker A
जिससे मुसलमान एक बार फिर दुनिया की सुपर पावर बन गए। और अगले 700 साल तक हिंदुस्तान और जेरूसलम पर मुसलमानों का ही राज था। सुल्तान मोहम्मद गौरी की इतनी बड़ी एंपायर को मामूली से गुलाम गवर्नर्स ही लीड कर
Speaker A
रहे थे। क्योंकि गौरी ने इनको बेटों की तरह पाला था। एक दफा गौरी से किसी ने पूछा कि सुल्तान आपके बाद इतनी बड़ी एंपायर को कौन संभालेगा?
Speaker A
आपके तो कोई बेटे ही नहीं। गौरी ने जवाब दिया कि दूसरे बादशाहों के एक या दो बेटे होंगे। मेरे हजारों बेटे हैं। मेरे ये टर्किश गुलाम जिनको मैंने बेटों की तरह पाला है। यही मेरी सल्तनत के वारिस होंगे और मेरे
Speaker A
बाद इन सारे इलाकों में मेरा मिशन जिंदा रखेंगे और ऐसा ही होगा। एक दफा सुल्तान मोहम्मद गौरी अपने कैंप में मगरिब की नमाज पढ़ रहा था। अचानक कुछ लोग कैंप के पीछे गार्ड्स को मारकर कैंप में एंटर हो गए। इस टाइम
Speaker A
सुल्तान सजदे में था। एक बंदा आगे बढ़ा और उसने सुल्तान की गर्दन पर खंजर मारा। सुल्तान एकदम जख्मी हो गया। ये देखते ही बाकी बंदों ने इतनी दफा सुल्तान को खंजर मारा कि सुल्तान का जिस्म खून से भर गया।
Speaker A
और इसी वजह से सुल्तान मोहम्मद गौरी हिंदुस्तान का पहला मुसलमान सुल्तान शहीद हो गया। जिस साल गौरी को शहीद किया गया इसी साल दुनिया की तारीख में एक नया टाइटल सामने आया। और वो एक ऐसे लीडर को मिला
Speaker A
जिसने आगे जाकर दुनिया की तारीख की सबसे बड़ी अंपायर्स में से एक एंपायर और ये टाइटल था चंगेज खान। सब्सक्राइब
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