चंगेज खान के मंगोलों और भारत के सुल्तानों के बीच युद्ध की ऐतिहासिक कहानी, जिसमें बलबन और अलाउद्दीन खिलजी की रणनीतियाँ शामिल हैं।
Key Takeaways
- मंगोलों ने विश्व के बड़े हिस्सों पर कब्जा किया लेकिन हिंदुस्तान पर कब्जा नहीं कर सके।
- सुल्तान बलबन और अलाउद्दीन खिलजी ने मंगोलों से बचाव के लिए नई रणनीतियाँ और मजबूत सेनाएँ बनाई।
- मंगोलों के हमलों को रोकने के लिए किलेबंदी और दोहरी रक्षा प्रणाली प्रभावी साबित हुई।
- अलाउद्दीन खिलजी ने आर्थिक और सैन्य सुधारों के जरिए भारत की सुरक्षा को मजबूत किया।
- इतिहास में मंगोलों और भारत के सुल्तानों के बीच संघर्ष ने भारतीय साम्राज्य की मजबूती को दर्शाया।
What the video covers
- चंगेज खान ने एक छोटी जगह से मंगोलियन एंपायर बनाया और विश्व के कई हिस्सों पर कब्जा किया।
- हिंदुस्तान मंगोलों के लिए एक चुनौती था, जिसे हिमालय, समुद्र और पाकिस्तान के रास्ते से घेरा गया था।
- सुल्तान बलबन ने मंगोलों से बचाव के लिए पहली बार एक प्रशिक्षित सेना बनाई और दो डिफेंस लाइनें स्थापित कीं।
- शहजादे मोहम्मद ने मंगोलों को युद्ध में हराया लेकिन बाद में मंगोलों के हमले में शहीद हो गया।
- बलबन की मृत्यु के बाद अलाउद्दीन खिलजी ने मंगोलों से मुकाबले के लिए बड़ी सेना और नया आर्थिक सिस्टम बनाया।
- अलाउद्दीन खिलजी ने दक्षिण भारत पर कब्जा करने के लिए एक किले पर 7 महीने तक घेराबंदी की।
- मंगोलों ने दिल्ली पर कई बार हमला किया लेकिन अलाउद्दीन खिलजी की रणनीति से वे सफल नहीं हो सके।
- मंगोलों की वापसी के समय उनके देश में बगावत हो गई, जिससे हिंदुस्तान बच गया।
- अलाउद्दीन खिलजी ने मंगोलों को कड़ी सजा दी और भविष्य में हमलों को रोकने के लिए संदेश दिया।
- वीडियो में मंगोलों और भारत के सुल्तानों के बीच संघर्ष की विस्तृत और रोचक कहानी प्रस्तुत की गई है।
Chapters
- 00:00चंगेज खान और मंगोलियन एंपायर का उदय
- 01:17मंगोलों का हिंदुस्तान पर खतरा और सुल्तान बलबन की तैयारी
- 02:19बलबन की सेना और मंगोलों के खिलाफ पहली लड़ाई
- 03:23शहजादे मोहम्मद की वीरता और मृत्यु
- 07:45अलाउद्दीन खिलजी का उदय और मंगोलों से मुकाबला
- 08:46दक्षिण भारत पर कब्जे की तैयारी और किले की घेराबंदी
- 10:47किले की घेराबंदी और पद्मावती की कहानी का मिथक
- 11:48मंगोलों का दिल्ली पर हमला और अलाउद्दीन की रणनीति
- 12:44मंगोलों की वापसी और भारत की सुरक्षा
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Speaker A
चंगेज खान हो गए। एक यतीम बच्चा जिसने बहुत ही छोटे से इलाके से एक नई एंपायर स्टार्ट की और मुसलमानों जैसी बड़ी-बड़ी सुपर पावर्स को क्रश कर लिया। पूरी दुनिया का कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया। [संगीत] लेकिन एक इलाका ऐसा था जिसे वो कभी भी
Speaker A
कंट्रोल नहीं कर सका जिसका नाम था हिंदुस्तान। [संगीत] हिंदुस्तान तीन तरफ से बंद था। ऊपर बहुत बड़े पहाड़ हिमालय जहां बहुत ज्यादा बर्फ होती है। नीचे बहुत बड़ा समंदर द इंडियन ओशन और हिंदुस्तान पर हमला करने के लिए सिर्फ
Speaker A
एक ही रास्ता था। द गेटवे टू इंडिया जिसे आज हम पाकिस्तान कहते हैं। इस वक्त यहां एक गुलाम नया सुल्तान बन गया था। जिसका नाम था सुल्तान बलबन। जब बलबन सुल्तान बना तो मंगोलों का खौफ इंडिया पर इतना ज्यादा
Speaker A
था जैसा कि आपके घर के बाहर एक शेर खड़ा हो। इस खतरे का पता हमें इस मैप से चलेगा। ये है हिंदुस्तान और इसके साथ ये है द मंगोलियन एंपायर। जिसे चंगेज खान के मरने के बाद अब उसके
Speaker A
बेटे कंट्रोल कर रहे हैं। और सिर्फ 50 साल में यह एंपायर मंगोलिया के एक छोटे से इलाके से स्टार्ट होकर एक तरफ इजिप्ट के बॉर्डर पर और दूसरी तरफ जापान के समंदरों तक फैल चुकी थी। और अब इनकी नजर एक तरफ
Speaker A
इजिप्ट पर थी और दूसरी तरफ यहां दरमियान में हिंदुस्तान पर थी। इजिप्ट और हिंदुस्तान दोनों के लीडर्स को मंगोलों ने ही गुलाम बनाया था और दोनों गुलाम से सुल्तान बने थे। और अब इन दो गुलामों का मुकाबला दुनिया की
Speaker A
तारीख की सबसे बड़ी अंपायर्स में से एक के साथ। मंगोलों ने पहले इजिप्ट पर हमला किया। इजिप्ट में गुलाम से सुल्तान बनने वाले सुल्तान बेबर्स ने उनको ऐसा हराया कि इसके बाद मंगोल कभी भी उससे आगे जा ही
Speaker A
नहीं सके। ये बहुत ही इंटरेस्टिंग स्टोरी होने वाली है। लेकिन फिर कभी तो सब्सक्राइब। अब यहां सुल्तान बलबन ने हिंदुस्तान को मंगोलों से बचाने के लिए फुल तैयारियां शुरू कर दी। सबसे पहले उसने एक बहुत ही स्ट्रांग आर्मी
Speaker A
बनाना शुरू किया क्योंकि पहले ऐसे होता था कि हर गवर्नर के पास अपनी फौज होती थी। और जब भी बादशाह को जरूरत होती थी तो वो इन्हीं गवर्नर से फौज मांगता था। [संगीत] लेकिन बलबन को पता था कि हम इन पुराने
Speaker A
फारग तरीकों से मंगोलों का मुकाबला नहीं कर सकते। [संगीत] हमें एक नई स्ट्रेटजी बनानी है। तो बलबन ने एक नया सिस्टम बनाया और पहली दफा एक ट्रेंड आर्मी बनाई जो डायरेक्ट सुल्तान के अंडर होती थी। अब हिंदुस्तान पर हमले का
Speaker A
वाहिद रास्ता था नॉर्दन पाकिस्तान। [संगीत] क्योंकि नीचे बहुत बड़ा डेजर्ट था। बलबन ने इस रास्ते को कवर करने के लिए एक नई डिफेंस लाइन बनाई। जहां बड़े-बड़े किले बनाए और पुराने किलों को दोबारा सेट कर दिया। और जो फौज उसने ट्रेन की थी, उसमें से
Speaker A
सबसे स्ट्रांग फौज को इन्हीं किलों में रहने के लिए भेज दिया। और फौज का मोराल हाई रखने के लिए उसने अपने सबसे बड़े बेटे शहजादे मोहम्मद को इस पूरी फौज का कमांडर बना दिया। जिसका हेड क्वार्टर था पाकिस्तान की सिटी
Speaker A
मुल्तान। प्यारी ये फौज 24 घंटे एक्टिव रहती थी। [संगीत] लेकिन बलबन को मंगोलों का इतना डर था कि उसने इसके पीछे एक दूसरी डिफेंस लाइन भी बनाई। उसमें भी 24 घंटे एलर्ट फौज खड़ी होती थी। और इस ग्रुप का कमांडर उसने अपने दूसरे
Speaker A
बेटे को बनाया कि अगर मंगोल फौज पहली लाइन क्रॉस करके आगे आ जाए तो ये दूसरी लाइन उनको रोकेगी। अब ये तैयारियां जब अपनी पीक पर थी तो मंगोलों की एक बहुत बड़ी फौज फुल स्पीड हिंदुस्तान पर हमला करने के लिए आ रही थी।
Speaker A
जब बलबन के बड़े बेटे शहजादे मोहम्मद को इसके बारे में पता लगा तो उसने सबसे पहले अपनी फौज को तैयार किया और यह दोनों फौजें एक रिवर के पास एक दूसरे के सामने आ गई। यहां बहुत ही खतरनाक जंग स्टार्ट। प्रिंस
Speaker A
मोहम्मद इतनी बहादुरी के साथ लड़ा कि मंगोलों की इतनी खतरनाक फौज आखिर हार कर पीछे भागने लगी और सुल्तान बलबन की स्ट्रेटजी की वजह से हिंदुस्तान मंगोलों से बच गया। अकबर [चीखने की आवाज़] सुल्तान की फौज इस जीत की खुशी मनाने लगी।
Speaker A
वेलकम एंड द और हर तरफ यह बात फैल गई कि शहजादे मोहम्मद ने मंगोलों को अब बुरी तरह हरा कर भगा दिया है। लेकिन इस जंग ने शहजादे मोहम्मद को थका दिया था। तो वो आराम करने के लिए अपने कुछ
Speaker A
ही फौजियों को लेकर दरिया के पास चला गया। अचानक जंगल से मंगोल फौजियों ने शहजादे पर हमला कर दिया। [संगीत] और चारों तरफ से शहजादे को घेर लिया। जब शहजादे मोहम्मद को पता चला कि अब कोई रास्ता नहीं तो उन्होंने फुल बहादुरी के
Speaker A
साथ अपनी तलवार निकाल के उन सब से लड़ना शुरू किया। लेकिन दुश्मन की फौज बहुत ज्यादा थी। अचानक एक तीर शहजादे को लगा और वो उधर ही गिर गया और मैदान जंग में ही शहीद हो गया। सुल्तान बलबन इस टाइम बहुत बूढ़ा हो चुका था।
Speaker A
उसे पहले खुशखबरी मिली कि हम जंग जीत गए हैं। [संगीत] लेकिन इसके बाद उसे बताया गया कि आपका सबसे बड़ा बेटा इस जंग में शहीद हो गया है। [संगीत] यह बात जैसे ही उसने सुनी उसे बहुत बड़ा शौक मिला। इस गम ने उसकी सेहत को तबाह कर
Speaker A
दिया और ठीक 2 साल बाद वो मर गया। अगले कुछ सालों में इस पूरी सल्तनत का कंट्रोल एक नए खानदान के हाथ में आ गया। जिसके सबसे जीनियस सुल्तान का नाम था अलाउद्दीन खिलजी। अलाउद्दीन खिलजी जब सुल्तान बना
Speaker A
उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा चैलेंज था मंगोल। मंगोलों से बचने के लिए अलाउद्दीन खिलजी ने इंडिया की तारीख में पहली बार एक बहुत बड़ी आर्मी बनाना शुरू किया। और इस आर्मी को कंट्रोल करने के लिए एक पूरा नया
Speaker A
इकोनॉमिक सिस्टम बनाया। अब जब यह तैयारियां चल ही रही थी, मंगोल एक बहुत बड़ी फौज के साथ हिंदुस्तान की तरफ रवाना हुए [संगीत] और फाइनली ये दोनों फौजें एक दूसरों के आमने-सामने आ गई। जंग शुरू होने से पहले ही अलाउद्दीन खिलजी के
Speaker A
राइट साइड के जनरल ने हमला कर दिया। जिसकी वजह से मंगोल की एक साइड पीछे हटने लगी। यह जंग हमने इस वीडियो में बहुत ही डिटेल से एक्सप्लेन की है। यह जंग जीतने के बाद अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी जिंदगी का
Speaker A
सबसे बड़ा ड्रीम पहली बार साउथ इंडिया को अपने कंट्रोल में लेने के लिए तैयारियां शुरू कर ली। और एक बहुत ही बड़ी आर्मी लेकर एक किले की तरफ रवाना से हमें छीन सकता है पर हमारे गुरूर को नहीं। वहां पहुंचकर उसने किले को चारों
Speaker A
तरफ से घेर लिया। अलाउद्दीन खिलजी को लगा था कि हम इस किले को बहुत ही आसानी से बनाएंगे। अकबर लेकिन वहां जाके पता चला कि यह किला फतह करना कोई बच्चों का खेल नहीं है। तो अलाउद्दीन खिलजी ने बाहरी अपने कैंप्स
Speaker A
लगाए [संगीत] और इस किले पर लगातार हमले शुरू कर दिए। एक महीना गुजर गया। लेकिन वो किला किसी सूरत भी कंट्रोल नहीं हो रहा था। ऐसा करते-करते दूसरा महीना भी गुजर गया। लेकिन कोई फायदा नहीं। और फिर तीसरा महीना भी ऐसे ही गुजर गया।
Speaker A
वहां पर सब ने अलाउद्दीन से कहा कि ये कोई इतना इंपॉर्टेंट किला नहीं है। ये एक आम किला है। इसे फतह करने की जरूरत क्या है? और हम इतने अरसे दिल्ली से दूर नहीं रह सकते। क्योंकि पीछे मंगोलों का खतरा भी
Speaker A
है। लेकिन अलाउद्दीन खिलजी किसी सूरत भी हार मानने के लिए तैयार नहीं था। और अगले 7 महीने उधर ही अपने कैंप्स लगा के बैठ गया। कि जब तक यह किला फतह नहीं हो तब तक मैं कभी भी वापस नहीं जाऊंगा। चाहे जो भी हो
Speaker A
और फिर 7 महीने के बाद बहुत ही मुश्किलों से वो किल्ला फतह हो गया। [संगीत] वहां की सारी औरतों ने एक बहुत बड़ी आग में कूद कर जोहर कर दिया। [संगीत] इससे 200 साल बाद एक सूफी शायर ने इस पर
Speaker A
एक पोएम लिखी और बताया कि असल में अलाउद्दीन खिलजी किला फतह करने नहीं आया था बल्कि वो यहां की सबसे खूबसूरत रानी जिसका नाम पद्मावती था उसके लिए आया था [संगीत] और 7 महीने से पद्मावती के इश्क में और
Speaker A
मोहब्बत में ही वापस नहीं गया लेकिन लेकिन ये सब झूठ है क्योंकि 200 साल तक किसी हिस्टोरियन ने ऐसा कुछ भी नहीं लिखा। अब अलाउद्दीन खिलजी जब इस किले को फतह करने का जश्न मना रहा था तो अचानक उसे खबर मिली कि एक बहुत बड़ी
Speaker A
मंगोल फौज तेजी से दिल्ली पर हमला करने के लिए आ रही है। [संगीत] जैसे ही ये खबर अलाउद्दीन खिलजी को मिली तो उसकी खुशी एकदम टेंशन में पड़ी और बजाय इसके कि वो सेलिब्रेशंस करता वो अपनी कुछ फौज को लेकर फुल स्पीड दिल्ली की तरफ
Speaker A
रवाना हुआ और इतना स्पीड गया कि वो मंगोल से पहले ही दिल्ली पहुंच गया। लेकिन उसकी फौज बहुत ज्यादा थकी हुई थी और जंग में बारिशों की वजह से उसके वेपन्स और घोड़े भी तबाह हो गए थे। और जब अलाउद्दीन खिलजी ने गवर्नरों से मदद
Speaker A
मांगी तो वो भी अलाउद्दीन खिलजी की हेल्प नहीं कर सकते थे। क्योंकि मंगोलों ने दिल्ली तक आने के सारे रास्ते बंद कर दिए थे और कोई भी खिलजी की मदद के लिए नहीं आ सकता। अब जब अलाउद्दीन खिलजी को पता लग गया कि
Speaker A
मैं डायरेक्ट मंगोल की फौज का मुकाबला नहीं कर सकता। उसने दिल्ली के पास ही एक किले में अपना कैंप बना लिया जिसके तीन साइड से दरिया था और सिर्फ एक ही रास्ते से मंगोल हमला कर सकते थे। तो उन्होंने उस
Speaker A
रास्ते को भी बचाने के लिए एक बहुत बड़ी खंदक खो दी। [संगीत] अलाउद्दीन खिलजी इस किले के अंदर अपनी फौज के साथ बैठ गया। मंगोलों ने 2 महीने तक यहां पे सख्तरीन हमले किए। लेकिन वो इस किले में एंटर ही नहीं हो
Speaker A
सके। तो उन्होंने दिल्ली के बड़े-बड़े स्टोर्स जो अलाउद्दीन खिलजी ने एक नए इकोनॉमिक सिस्टम की वजह से बनाए थे उनको लूटना शुरू किया और हर तरफ तबाही मचा दी। [संगीत] इसी टाइम मंगोलों को पता चला कि उनके अपने मुल्क में बगावत हो गई है। तो
Speaker A
वो फौरन वापस चले गए और ऐसे अलाउद्दीन खिलजी की लीडरशिप में हिंदुस्तान मंगोलों से एक बार फिर बच गया। लेकिन इससे कुछ ही साल बाद मंगोलों ने एक बार फिर एक बहुत
Speaker A
फैमिलीज को भी साथ लेके आए थे। अलाउद्दीन खिलजी ने बहुत ही मुश्किल जंग के बाद किसी तरीके से इन मंगोलों को हरा दिया। लेकिन इस बार अलाउद्दीन खिलजी मंगोलों को उन्हीं की जुबान में ऐसा सबक सिखाना चाहता था कि उनकी नस्लें याद रखें और वो
Speaker A
हिंदुस्तान पर कभी हमला करने की जुर्रत भी ना कर सके। [संगीत] तो अलाउद्दीन खिलजी ने हुकुम दिया कि जितने भी मंगोल पकड़े गए उन सबको ले आओ। जब वो सब लाए गए तो अलाउद्दीन खिलजी ने हुकुम दिया कि इन सबको बड़े-बड़े हाथियों
Speaker A
[संगीत] के पैरों के नीचे कुचल दो। और फिर अलाउद्दीन ने हुकुम दिया कि इनकी खोपड़ियों का मीनार बनाओ। वहां मेन किले के सामने उनकी खोपड़ियों के बड़े-बड़े टावर्स बनाए गए। इन जंगों में तकरीबन 1 लाख मंगोलों को मारा गया था।
Speaker A
और उनकी बीवी बच्चों को गुलाम बनाकर बेच दिया गया था। इन पनिशमेंट से मंगोल दुनिया को एक मैसेज गया कि अगर दोबारा हिंदुस्तान पर हमला करने की कोशिश भी की तो इससे भी बुरा हाल होगा तुम्हारा। इससे पूरे मंगोल
Speaker A
इतना डर गए थे कि उन्होंने इसके बाद 100 साल तक हिंदुस्तान पर कोई बड़ा हमला नहीं किया। लेकिन इससे 100 साल बाद दुनिया की तारीख में एक नया लीडर सामने आया। वो चंगेज़ खान की औलाद में से नहीं था। लेकिन उसने बहुत
Speaker A
ही चालाकी से पूरी मंगोल एंपायर को अपने ही कंट्रोल में ले लिया जिसका नाम था अमीर तैमूर जिसे हम तैमूर लंग भी कहते हैं। उसने दिल्ली की तारीख का सबसे खतरनाक हमला किया। कहा जाता है कि उसने दिल्ली पहुंचते ही एक
Speaker A
ही रात में 1 लाख लोगों के सर काटे और दिल्ली को तबाह और बर्बाद करने। फिर हिंदुस्तान को वापस अपने पैरों पे खड़ा होने के लिए बहुत ज्यादा टाइम लगा और 100 साल बाद इसी तैमूर की नस्ल से एक बंदे
Speaker A
ने पूरे हिंदुस्तान का कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया। जिसका नाम था जहीरुद्दीन मोहम्मद बाबर। बाबर ने एक नई एंपायर बनाई जिसका नाम था द मुगल एम। इसी एंपायर में हिंदुस्तान दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमीज़ में से एक बना। [संगीत]
Speaker A
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Topics:चंगेज खानमंगोल आक्रमणसुल्तान बलबनअलाउद्दीन खिलजीहिंदुस्तान का इतिहासमंगोलियन एंपायरभारत मंगोल युद्धमुगल इतिहासमध्यकालीन भारतसैन्य रणनीति











