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The Child king of India! Akbar Badhshah

अकबर की कहानी, बचपन से बादशाह बनने तक, मुगल साम्राज्य की स्थापना और उसकी चुनौतियां।

Key Takeaways

  • अकबर ने कम उम्र में शासन संभाल कर मुगल साम्राज्य को मजबूत किया।
  • मनसबदारी सिस्टम ने सेना की संरचना और नियंत्रण में सुधार किया।
  • राजनीतिक चालों और दोस्ती के माध्यम से अकबर ने राजपूताना को जीतने की कोशिश की।
  • अकबर ने जाति और धर्म की परवाह किए बिना सेना में समानता स्थापित की।
  • कानून को सर्वोच्च मानते हुए अकबर ने अपने शासन को स्थिर किया।

What the video covers

  • अकबर ने 13 साल की उम्र में मुगल बादशाह के रूप में शासन संभाला।
  • हुमायूं की कठिनाइयों और संघर्षों के बाद अकबर की सल्तनत की नींव पड़ी।
  • हुमायूं ने ईरान से मदद लेकर कंधहार और काबुल पर कब्जा किया।
  • बैराम खान ने अकबर की गद्दी संभाली और दुश्मनों को हराकर साम्राज्य मजबूत किया।
  • माहम अंगा और उसके बेटे आदम खान ने सत्ता पर नियंत्रण किया लेकिन बाद में अकबर ने खुद शासन संभाला।
  • अकबर ने मनसबदारी सिस्टम लागू किया जिससे सेना को रैंक्स में बांटा गया और भ्रष्टाचार कम हुआ।
  • अकबर ने सेना में हर जाति और धर्म के लोगों को शामिल किया।
  • राजपूताना के कड़े युद्ध और राजनीतिक चालों से अकबर ने साम्राज्य का विस्तार किया।
  • अकबर ने कानून को सर्वोच्च माना और अपने सत्ताधारियों पर भी लागू किया।
  • मुगल साम्राज्य की मजबूती और विस्तार के लिए अकबर की रणनीतियाँ महत्वपूर्ण रहीं।

Answers

Questions about this video

अकबर ने अपनी सेना को कैसे व्यवस्थित किया?

अकबर ने मनसबदारी सिस्टम लागू किया जिसमें सेना को रैंक्स में बांटा गया और हर जनरल को मेरिट के आधार पर पद मिला। इससे भ्रष्टाचार कम हुआ और सेना मजबूत बनी।

हुमायूं को ईरान से क्या सहायता मिली?

ईरान के बादशाह ने हुमायूं को 14,000 सैनिक दिए, शर्त यह थी कि अगर हुमायूं हिंदुस्तान जीतता है तो कंधहार ईरान को मिलेगा। इससे हुमायूं ने कंधहार और काबुल पर कब्जा किया।

माहम अंगा और उसके बेटे आदम खान का अकबर के शासन में क्या रोल था?

माहम अंगा ने अकबर के शासन में प्रभाव बनाया और उसके बेटे आदम खान को जनरल बनाया, लेकिन बाद में आदम खान ने बगावत की, जिसे अकबर ने दबा दिया।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

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Speaker A
जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर। एक छोटा शहजादा जो सिर्फ 13 साल की उम्र में बादशाह बना। [संगीत] लेकिन आगे जाकर उसने हिंदुस्तान की तारीख की सबसे बड़ी एंपायर। [संगीत] द मुगल एंपायर। [संगीत] अकबर का बाप हुमायूं शेरशाह सूरी से बुरी तरह हार गया था। वो हिंदुस्तान से भागते हुए सिंध [संगीत] पहुंचा। यहीं सिंध में उसका बेटा पैदा हुआ जिसका नाम था अकबर। [संगीत] हुमायूं अपनी जान बचा के तो भाग गया था लेकिन वो अपनी सल्तनत को वापस लेना चाहता था। तो वो सिंध से अफगानिस्तान की तरफ रवाना हुआ। जहां उसके भाई कामरान की हुकूमत थी। [संगीत] लेकिन जैसे ही वो कंधहार पहुंचा तो बजाय इसके कि कामरान उसकी मदद करता, उसने उल्टा उसी के खिलाफ फौज भेज दी। इस टाइम शदीद सर्दी का मौसम था और बर्फबारी हो रही थी। और हुमायूं कोई और जंग लड़ने के लिए बिल्कुल भी [संगीत] तैयार नहीं था। तो उसने वहां से जल्दी भागने का प्लान बनाया। [संगीत] लेकिन अकबर इस वक्त सिर्फ एक साल का था और इतना छोटा सा बच्चा ऐसा सख्त सफर बर्दाश्त नहीं कर सकता था। तो उसने छोटे से अकबर को कंधाहार में अपने ही कैंप में छोड़ दिया और अकबर की मां को जबरदस्ती वहां से लेकर बड़े-बड़े पहाड़ जो बर्फ से भरे हुए थे उनको क्रॉस करके ईरान चला गया। हुमायूं का भाई जैसे ही फौज लेकर वहां पहुंचा उसे पता चला कि हुमायूं भाग गया। [संगीत] तो जैसे ही उसने कैंप के अंदर देखा तो वहां पे एक छोटा सा बच्चा था। उसने अकबर को अपने ही कंट्रोल में ले लिया और वापस काबुल अपने भाई कामरान के पास ले गया। हुमायूं सिर्फ 40 फौजियों के साथ बर्फ से भरे पहाड़ों से होते हुए ईरान की तरफ गया और रास्ते में खाने के लिए कुछ भी नहीं था तो उन्होंने अपने ही घोड़ों को फौजियों के हेलमेट में पका कर खाना [संगीत] शुरू किया और ऐसा करते-करते वो बहुत ही मुश्किलों से ईरान पहुंच गया। वहां काफी महीनों बाद हुमायूं की मुलाकात ईरान के बादशाह से हुई। और उसने हुमायूं के एजाज में बहुत ही बड़ी दावत दी। उसने हुमायूं से शिया बनने का वादा लिया और कहा कि एक शर्त पे तुम्हें फौज दूंगी। अगर हिंदुस्तान जीता तो कंधहार हमारा होगा। तो हुमायूं ने 14,000 ईरानी सोल्जर्स को लेकर कंधहार पर हमला किया और बड़ी ही आसानी से कंधहार को अपने कंट्रोल में ले लिया और यहां से काबुल को कब्जा करने के लिए अपनी फौज लेकर उसके किले को घेर लिया। जैसे ही कामरान को समझ आई कि वो यह जंग हारने वाला है तो उसने छोटे से अकबर को जो सिर्फ 4 साल का था किले की दीवार पर लाकर खड़ा कर दिया। अब दोनों तरफ से हमला और छोटा सा अकबर जोर-जोर से चीख रहा था और रो रहा था। अचानक हुमायूं के फौजी को एकदम रियलाइज हुआ कि दीवार पे तो एक छोटा सा बच्चा खड़ा है तो इन्होंने तीर रोक दिए और जल्दी से किला फतह करने के लिए अंदर चला और किला फतह कर लिया और ऐसे छोटे से अकबर की जान बच गई। अब कामरान पीछे से [संगीत] भाग गया और काबुल फतह हो गया। और यहां अकबर की मां जो बचपन में उससे जुदा हो गई थी, फाइनली अपने शहजादे से दोबारा मिली। अब हुमायूं बहुत ही स्ट्रांग हो चुका है। तो उसने एक बहुत बड़ी आर्मी तैयार की और अपने सबसे वफादार जनरल बैराम खान के अंडर उसे हिंदुस्तान पर हमला करने के लिए भेज दिया। बैराम खान बहुत ही आसानी से इलाके फतह करते हुए दिल्ली पहुंच गया। और फाइनली 15 साल बाद हुमायूं दिल्ली के तख्त पर दोबारा बैठ गया। लेकिन अब यह वो पुराना हुमायूं नहीं था। हुमायूं बहुत ज्यादा बदल चुका था। उसे पता था कि उसकी एंपायर उसकी अय्याशी और उसके नशों की वजह से उसे गई। [संगीत] लेकिन अब वो बहुत ही नेक और रिस्पांसिबल बन गया था। और कहा जाता है कि जब भी वो अजान सुनता था तो वो अल्लाह के सामने झुक जाता था। और इसी तरह एक दिन जब वो अजान सुनने के लिए झुका तो वो सीढ़ियों से फिसल कर गिर गया [संगीत] जिसकी वजह से वो मर गया। हुमायूं की यह बादशाहत सिर्फ 7 महीने रही। बैराम खान इस वक्त एक जंग में था और जैसे ही उसे पता चला कि हुमायूं मर गया है तो उसने जंग के मैदान में ही छोटे से अकबर जो सिर्फ 14 साल का बच्चा था उसे ताज पहनाया और कहा कि जब तक अकबर बड़ा नहीं होता तो यह हुकूमत मैं चलाऊंगा और ऐसा ही हुआ अगले 5 साल बैराम खान ने हर तरफ से दुश्मनों को खत्म कर दिया और मुगल एंपायर को स्ट्रांग बना दिया। अब जब अकबर 19 साल का हो गया तो उसकी रजाई मां जिसके हाथों में अकबर बचपन से पला पड़ा था, अकबर उसकी हर बात मानता था क्योंकि जब अकबर काबुल में अपने चाचा के पास था तो उसके चाचा ने अपनी एक नौकरानी को अकबर का ख्याल रखने के लिए कहा था। उस नौकरानी का नाम माहम अंगा था और अकबर को बचपन से उसी ने ही पाला था। तो आराम आराम से उसने अकबर को उसके सबसे वफादार जनरल जिसको अकबर प्यार से खान बाबा कहता था, उसी के खिलाफ करना शुरू कर दिया और हर दिन बैराम खान के खिलाफ झूठी कहानियां बनाती थी और कहती थी कि यह शिया आर्मी चीफ सिर्फ अपने ही लोगों को लगा रहे हैं। तो अकबर आराम आराम से बैराम खान के खिलाफ होने लगा और एक दिन बैराम खान ने एक बहुत बड़ी गलती कर दी। उसने अकबर के एक बहुत ही खास नौकर को गलती से मार दिया। तो जब अकबर को पता चला उसने बैराम खान को बुलाया और कहा कि खान बाबा आप रिटायर हो जाएं और हज के लिए चले जाएं। और यहां पे माहम अंगा अपने प्लान में कामयाब हो गई। और हुकूमत का असल कंट्रोल माहम अंगा और उसके बेटे आदम खान के पास आ गया। जो इल्जाम माहम अंगा बैराम खान पे लगाती थी, अब वही काम वह खुद करने लगी। अकबर सिर्फ नाम का बादशाह था और सारा कंट्रोल और पावर उसकी रजाई मां के पास थी। तो क्या होना [संगीत] था? अब माहम अंगा का बेटा आदम खान एक बहुत ही बड़ा जनरल बन गया। और अकबर ने उसे मलवा पर हमला करने के लिए भेजा। लेकिन जब आदम खान ने मलवा कब्जा कर लिया, तो उसने उल्टा अकबर के खिलाफ ही बगावत कर दी। तो अकबर एक बहुत बड़ी फौज लेकर खुद मलवा गया और आदम खान को कैप्चर करके वापस अपने महल ले आ गया। मगर आदम खान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया और फिर अकबर के खिलाफ बगावत करने की कोशिश करने लगा। तो फाइनली अकबर ने अपनी फौज को हुकुम दिया कि इसे महल की सबसे ऊंची छत से [संगीत] नीचे फेंक दो। जब फौजियों ने उसे फेंका तो वो मरा नहीं। [संगीत] उन्होंने फिर उसे घसीट के वापस छत पर ले गए और एक बार फिर फेंका जिसकी वजह से आदम खान मर गया। माहम अंगा अपने बेटे की मौत की खबर सुनकर पागलों की तरह चीखने लगी और रोने लगी। और इसी गम की वजह से वो कुछ अरसे बाद मर गई। और फाइनली अकबर ने अपनी बादशाहत का कंट्रोल अपने ही हाथ में ले लिया। और यहां से अकबर पहली दफा असल बादशाह बन गया। अकबर ने सबसे पहले एक नया सिस्टम बनाया जिसमें अकबर ने अपनी पूरी आर्मी को रैंक्स में डिवाइड कर लिया ताकि आज के बाद कोई भी उससे ज्यादा पावरफुल ना बने। इस सिस्टम का नाम था मनसबदारी सिस्टम जिसमें हर जनरल को एक रैंक दिया जाता था। सबसे छोटा रैंक होता था कि एक कमांडर के अंडर 10 फौजी और सबसे बड़ा रैंक 5000 और 7000 फौजियों का कमांडर होता था। और ये सारे कमांडर्स मेरिट के बेस पर आते थे। कोई ताल्लुक और सिफारिश नहीं चलती थी। अकबर ने आर्मी चीफ का ओदा खत्म कर दिया था और सारी आर्मी को छोटे जनरल्स में डिवाइड कर लिया था। ताकि कोई भी यह सारी फौज अकबर के अलावा कंट्रोल ना कर सके। इन जनरल्स को बार-बार ट्रांसफर किया जाता था ताकि वो किसी एक इलाके में अपनी पर्सनल हुक्मरानी ना बना सके और फौज और जनरल्स की सैलरी डायरेक्ट गवर्नमेंट देती थी ताकि कोई भी जनरल अपनी फौज को पैसों से ना कंट्रोल कर सके। अकबर ने मार्किंग और फेस सिस्टम बनाया। अब आप सोच रहे होंगे मार्किंग और फेस सिस्टम क्या है? असल में उस जमाने में लोगों को पता नहीं चलता था कि कौन फौजी है। तो इसीलिए बहुत ज्यादा करप्शन होती थी। तो अकबर ने हुकुम जारी किया कि हर फौजी का फेस डिस्क्रिप्शन एक पेपर पर लिखा जाएगा और उसी से करप्शन रोकी जाएगी ताकि हर फौजी का पता हो और मार्किंग सिस्टम का मतलब था कि हर घोड़े पे एक मार्क होगा। जैसे आजकल गाड़ियों पे नंबर प्लेट होता है। और ये सिस्टम असल में अलाउद्दीन खिलजी ने लांच किया था। लेकिन उसकी स्टोरी फिर कभी सब्सक्राइब। अकबर ने अपनी फौज में हर कास्ट, हर रिलीजन और हर तबके के लोगों को शामिल किया ताकि कोई एक ग्रुप फौज में ज्यादा ताकतवर ना बन सके। और अकबर ने यह साबित किया कि कानून से बड़ा कोई भी नहीं है। चाहे वो उसका सوتेला भाई ही क्यों ना हो। इसी सिस्टम की वजह से मुगल एंपायर बहुत ज्यादा पावरफुल बन गई थी। और अगले 200 साल के लिए हुकूमत है। लेकिन अब जब अकबर ने सारा कंट्रोल अपने ही हाथ में ले लिया, उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा चैलेंज राजपूताना को फतह करना था। क्योंकि राजपूत कोई आम कौम नहीं थी। वो बहुत [संगीत] ही बेस्ट फाइटर्स थे। और वो किसी सूरत भी सरेंडर नहीं करते थे। जब उनको पता चल जाता था कि वो हारने वाले हैं तो उनकी औरतें जोहर करती थी। मतलब एक साथ खड़ी हो के सब सुसाइड करते थे। [संगीत] और उनके मर्द साका करते थे। मतलब दुश्मन पर खुदकश हमला करते थे। और अकबर को इस सब का पता था तो उसने जंग के बजाय यहां एक सियासी चाल चली कि एक तरफ अकबर ने राजपूत के इलाकों को कब्जा करना शुरू किया। और दूसरी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाना शुरू किया। एक दफा अकबर सफर पर जा रहा था तो एक राजपूत राजा अकबर से मिलने आया और उनसे मदद मांगी। क्योंकि अकबर का एक गवर्नर उनको तंग कर रहा था और कहते हैं कि अकबर ने जैसे ही उसे देखा तो उसे 5 साल पुरानी स्टोरी याद आई कि एक बार इसी राजा भरमल ने एक मुगल कमांडर की मुश्किल वक्त में मदद की थी। यह किस्सा जब अकबर को सुना।
00:29
Speaker A
तरह हार गया था। वो हिंदुस्तान से भागते हुए सिंध [संगीत] पहुंचा। यहीं सिंध में उसका बेटा पैदा हुआ जिसका नाम था अकबर। [संगीत] हुमायूं अपनी जान बचा के तो भाग गया था लेकिन वो अपनी सल्तनत को वापस लेना चाहता
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Speaker A
था। तो वो सिंध से अफगानिस्तान की तरफ रवाना हुआ। जहां उसके भाई कामरान की हुकूमत थी। [संगीत] लेकिन जैसे ही वो कंधहार पहुंचा तो बजाय इसके कि कामरान उसकी मदद करता। उसने उल्टा उसी के खिलाफ फौज भेज दी। इस टाइम शदीद
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Speaker A
सर्दी का मौसम था और बर्फबारी हो रही थी। और हुमायूं कोई और जंग लड़ने के लिए बिल्कुल भी [संगीत] तैयार नहीं था। तो उसने वहां से जल्दी भागने का प्लान बनाया। [संगीत] लेकिन अकबर इस वक्त सिर्फ एक साल का था और
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Speaker A
इतना छोटा सा बच्चा ऐसा सख्त सफर बर्दाश्त नहीं कर सकता था। तो उसने छोटे से अकबर को कंधाहार में अपने ही कैंप में छोड़ दिया और अकबर की मां को जबरदस्ती वहां से लेकर बड़े-बड़े पहाड़ जो बर्फ से
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Speaker A
भरे हुए थे उनको क्रॉस करके ईरान चला गया। हुमायूं का भाई जैसे ही फौज लेकर वहां पहुंचा उसे पता चला कि हुमायूं भाग गया। [संगीत] तो जैसे ही उसने कैंप के अंदर देखा तो वहां पे एक छोटा सा बच्चा था। उसने अकबर
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Speaker A
को अपने ही कंट्रोल में ले लिया और वापस काबुल अपने भाई कामरान के पास ले गया। हुमायूं सिर्फ 40 फौजियों के साथ बर्फ से भरे पहाड़ों से होते हुए ईरान की तरफ जा और रास्ते में खाने के लिए कुछ भी नहीं था
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Speaker A
तो उन्होंने अपने ही घोड़ों को फौजियों के हेलमेट में पका कर खाना [संगीत] शुरू किया और ऐसा करते-करते वो बहुत ही मुश्किलों से ईरान पहुंच गया। वहां काफी महीनों बाद हुमायूं की मुलाकात ईरान के बादशाह से हुई। और उसने हुमायूं के एजाज में बहुत ही
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Speaker A
बड़ी दावत दी। उसने हुमायूं से शिया बनने का वादा लिया और कहा कि एक शर्त पे तुम्हें फौज दूंगी। अगर हिंदुस्तान जीता तो कंधहार हमारा होगा। तो हुमायूं ने 14,000 ईरानी सोल्जर्स को लेकर कंधहार पर हमला कर और बड़ी ही आसानी से कंधहार को अपने
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Speaker A
कंट्रोल में ले और यहां से काबुल को कब्जा करने के लिए अपनी फौज लेकर उसके किले को घेर लिया। जैसे ही कामरान को समझ आई कि वो यह जंग हारने वाला है तो उसने छोटे से अकबर को जो सिर्फ 4 साल का था किले की
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Speaker A
दीवार पर लाकर खड़ा कर दिया। अब दोनों तरफ से हमला और छोटा सा अकबर जोर-जोर से चीख रहा था और रो रहा था। अचानक हुमायूं के फौजी को एकदम रियलाइज हुआ कि दीवार पे तो एक छोटा सा बच्चा खड़ा है तो इन्होंने तीर रोक दिए और
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Speaker A
जल्दी से किला फतह करने के लिए अंदर चला और किल्ला फतह कर लिया और ऐसे छोटे से अकबर की जान बच गई। अब कामरान पीछे से [संगीत] भाग गया और काबुल फतह हो गया। और यहां अकबर की मां जो बचपन में उससे जुदा हो गई
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Speaker A
थी। फाइनली अपने शहजादे से दोबारा मिली। अब हुमायूं बहुत ही स्ट्रांग हो चुका है। तो उसने एक बहुत बड़ी आर्मी तरह और अपने सबसे वफादार जनरल बैराम खान के अंडर उसे हिंदुस्तान पर हमला करने के लिए भेज दिया।
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Speaker A
बैराम खान बहुत ही आसानी से इलाके फतह करते हुए दिल्ली पहुंच गया। और फाइनली 15 साल बाद हुमायूं दिल्ली के तख्त पर दोबारा बैठ गया। लेकिन अब यह वो पुराना हुमायूं नहीं था। हुमायूं बहुत ज्यादा बदल चुका था। उसे पता था कि उसकी
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Speaker A
एंपायर उसकी अय्याशी और उसके नशों की वजह से उसे गई। [संगीत] लेकिन अब वो बहुत ही नेक और रिस्पांसिबल बन गया था। और कहा जाता है कि जब भी वो अजान सुनता था तो वो अल्लाह के सामने झुक
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Speaker A
जाता था। और इसी तरह एक दिन जब वो अजान सुनने के लिए झुका तो वो सीढ़ियों से फिसल कर गिर गया [संगीत] जिसकी वजह से वो मर गया। हुमायूं की यह बादशाहत सिर्फ 7 महीने रही। बैराम खान इस
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Speaker A
वक्त एक जंग में था और जैसे ही उसे पता चला कि हुमायूं मर गया है तो उसने जंग के मैदान में ही छोटे से अकबर जो सिर्फ 14 साल का बच्चा था उसे ताज पहनाया और कहा कि जब तक अकबर बड़ा नहीं होता तो यह हुकूमत
05:13
Speaker A
मैं चलाऊंगा और ऐसा ही हुआ अगले 5 साल बैराम खान ने हर तरफ से दुश्मनों को खत्म कर दिया और मुगल एंपायर को स्ट्रांग बना दिया अब जब अकबर अकबर 19 साल का हो गया तो उसकी रजाई मां जिसके हाथों में अकबर बचपन से
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Speaker A
पला पड़ा था। अकबर उसकी हर बात मानता था क्योंकि जब अकबर काबुल में अपने चाचा के पास था तो उसके चाचा ने अपनी एक नौकरानी को अकबर का ख्याल रखने के लिए कहा था। उस नौकरानी का नाम माहम अंगा था और अकबर को
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Speaker A
बचपन से उसी ने ही पाला था। तो आराम आराम से उसने अकबर को उसके सबसे वफादार जनरल जिसको अकबर प्यार से खान बाबा कहता था उसी के खिलाफ करना शुरू कर दिया और हर दिन बैराम खान के खिलाफ झूठी कहानियां बनाती
06:06
Speaker A
थी और कहती थी कि यह शिया आर्मी चीफ सिर्फ अपने ही लोगों को लगा रहे हैं। तो अकबर आराम आराम से बैराम खान के खिलाफ होने लगा और एक दिन बैराम खान ने एक बहुत बड़ी गलती कर दी। उसने अकबर के एक बहुत ही खास नौकर
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Speaker A
को गलती से मार दिया। तो जब अकबर को पता चला उसने बैरम खान को बुलाया और कहा कि खान बाबा आप रिटायर हो जाएं और हज के लिए चले जाएं। और यहां पे माहम अंगा अपने प्लान में कामयाब हो गई। और हुकूमत का असल
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Speaker A
कंट्रोल माहम अंगा और उसके बेटे आदम खान के पास आ गया। जो इल्जाम माहम अंगा बैरम खान पे लगाती थी। अब वही काम वह खुद करने लगी। अकबर सिर्फ नाम का बादशाह था और सारा कंट्रोल और पावर उसकी रजाई मां के पास थी।
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Speaker A
तो क्या होना [संगीत] था? अब महाभंगा का बेटा आदम खान एक बहुत ही बड़ा जनरल बन गया। और अकबर ने उसे मलवा पर हमला करने के लिए भेजा। लेकिन जब आदम खान ने मलवा कब्जा कर लिया, तो उसने उल्टा अकबर के खिलाफ ही बगावत कर
07:13
Speaker A
दी। तो अकबर एक बहुत बड़ी फौज लेकर खुद मलवा गया और आदम खान को कैप्चर करके वापस अपने महल ले आ गया। मगर आदम खान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया और फिर अकबर के खिलाफ बगावत करने की कोशिश करने लगा। तो
07:31
Speaker A
फाइनली अकबर ने अपनी फौज को हुकुम दिया कि इसे महल की सबसे ऊंची छत से [संगीत] नीचे फेंक दो। जब फौजियों ने उसे फेंका तो वो मरा नहीं। [संगीत] उन्होंने फिर उसे घसीट के वापस छत पर ले गए और एक बार फिर फेंका जिसकी वजह से आदम
07:49
Speaker A
खान मर गया। माम अंगा अपने बेटे की मौत की खबर सुनकर पागलों की तरह चीखने लगी और रोने लगी। और इसी गम की वजह से वो कुछ अरसे बाद मर गई। और फाइनली अकबर ने अपनी बादशाहत का कंट्रोल अपने ही हाथ में ले
08:08
Speaker A
लिया। और यहां से अकबर पहली दफा असल बादशाह बन गया। अकबर ने सबसे पहले एक नया सिस्टम बनाया जिसमें अकबर ने अपनी पूरी आर्मी को रैंक्स में डिवाइड कर लिया ताकि आज के बाद कोई भी उससे ज्यादा पावरफुल ना बने। इस सिस्टम का
08:31
Speaker A
नाम था मनसबदारी सिस्टम जिसमें हर जनरल को एक रैंक दिया जाता था। सबसे छोटा रैंक होता था कि एक कमांडर के अंडर 10 फौजी और सबसे बड़ा रैंक 5000 और 7000 फौजियों का कमांडर होता था। और ये सारे कमांडर्स
08:50
Speaker A
मेरिट के बेस पर आते थे। कोई ताल्लुक और सिफारिश नहीं चलती थी। अकबर ने आर्मी चीफ का ओदा खत्म कर दिया था और सारी आर्मी को छोटे जनरल्स में डिवाइड कर लिया था। ताकि कोई भी यह सारी फौज अकबर के अलावा कंट्रोल
09:08
Speaker A
ना कर सके। इन जनरल्स को बार-बार ट्रांसफर किया जाता था ताकि वो किसी एक इलाके में अपनी पर्सनल हुक्मरानी ना बना सके और फौज और जनरल्स की सैलरी डायरेक्ट गवर्नमेंट देती थी ताकि कोई भी जनरल अपनी फौज को
09:23
Speaker A
पैसों से ना कंट्रोल कर सके। अकबर ने मार्किंग और फेस सिस्टम बनाया। अब आप सोच रहे होंगे मार्किंग और फेस सिस्टम क्या है?
09:32
Speaker A
असल में उस जमाने में लोगों को पता नहीं चलता था कि कौन फौजी है। तो इसीलिए बहुत ज्यादा करप्शन होती थी। तो अकबर ने हुकुम जारी किया कि हर फौजी का फेस डिस्क्रिप्शन एक पेपर पर लिखा जाएगा और उसी से करप्शन
09:47
Speaker A
रोकी जाएगी ताकि हर फौजी का पता हो और मार्किंग सिस्टम का मतलब था कि हर घोड़े पे एक मार्क होगा। जैसे आजकल गाड़ियों पे नंबर प्लेट होता है। और ये सिस्टम असल में अलाउद्दीन खिलजी ने लांच किया था।
10:01
Speaker A
लेकिन उसकी स्टोरी फिर कभी सब्सक्राइब। अकबर ने अपनी फौज में हर कास्ट, हर रिलीजन और हर तबके के लोगों को शामिल किया ताकि कोई एक ग्रुप फौज में ज्यादा ताकतवर ना बन सके। और अकबर ने यह साबित किया कि कानून
10:17
Speaker A
से बड़ा कोई भी नहीं है। चाहे वो उसका सुतेला भाई ही क्यों ना हो। इसी सिस्टम की वजह से मुगल एंपायर बहुत ज्यादा पावरफुल बन गई थी। और अगले 200 साल के लिए हुकूमत है। लेकिन अब जब अकबर ने सारा कंट्रोल अपने ही
10:34
Speaker A
हाथ में ले लिया। उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा चैलेंज राजपूताना को फतह करना था। क्योंकि राजपूत कोई आम कौम नहीं थी। वो बहुत [संगीत] ही बेस्ट फाइटर्स थे। और वो किसी सूरत भी सरेंडर नहीं करते थे। जब उनको पता चल जाता था कि वो हारने वाले हैं
10:52
Speaker A
तो उनकी औरतें जोहर करती थी। मतलब एक साथ खड़ी हो के सब सुसाइड करते थे। [संगीत] और उनके मर्द साका करते थे। मतलब दुश्मन पर खुदकश हमला करते थे। और अकबर को इस सब का पता था तो उसने जंग के बजाय यहां एक
11:09
Speaker A
सियासी चाल चली कि एक तरफ अकबर ने राजपूत के इलाकों को कब्जा करना शुरू किया। और दूसरी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाना शुरू किया। एक दफा अकबर सफर पर जा रहा था तो एक राजपूत राजा अकबर से मिलने आया और उनसे
11:27
Speaker A
मदद मांगी। क्योंकि अकबर का एक गवर्नर उनको तंग कर रहा था और कहते हैं कि अकबर ने जैसे ही उसे देखा तो उसे 5 साल पुरानी स्टोरी याद आई कि एक बार इसी राजा भरमल ने एक मुगल कमांडर की मुश्किल वक्त में मदद
11:44
Speaker A
की थी। यह किस्सा जब अकबर को सुनाया तो उसने इस राजा और उसकी फैमिली को अपने महल में बुला लिया। इस टाइम अकबर एक जंगली हाथी को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा था कि अचानक वो हाथी पागल हो गया और लोगों की
12:00
Speaker A
तरफ तेजी से जाने लगा तो लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। लेकिन जैसे ही उन्होंने देखा तो सिर्फ राजपूत राजा और उसकी फैमिली ही अकबर को बचाने के लिए उधर खड़ी थी। राजपूतों की इस बहादुरी
12:18
Speaker A
और वफादारी ने अकबर को बहुत ज्यादा इंप्रेस किया था। [संगीत] उन्होंने राजा से कहा कि हम आपका हमेशा ख्याल रखेंगे और आपको इज्जत देंगे। तो जब इसी राजा ने अकबर से मदद मांगी तो अकबर ने फौरन ही हां कर दी और जवाब में राजा ने
12:35
Speaker A
अपनी बेटी जोधाबाई जिसको बाद में मरियम जमानी कहा जाता था। का रिश्ता अकबर से करने की ऑफर की। तो अकबर ने उससे शादी करने का फैसला किया। क्योंकि इस शादी से अकबर की जिंदगी का सबसे बड़ा चैलेंज बगैर जंग किए हासिल हो
12:55
Speaker A
सकता था। और राजपूतों को राजी करने के लिए अकबर ने उनकी यह शर्त मान ली कि वो जोधाबाई को जबरदस्ती मुसलमान होने पर मजबूर नहीं करेगा। और महल में उसे अपना रिलीजन प्रैक्टिस करने की पूरी आजादी देगा। [संगीत]
13:12
Speaker A
और यह भी कहा कि राजपूत अपने इलाके के बादशाह रहेंगे। इसी दोस्ती की वजह से उन्होंने राजा मानसिंह को अपना सबसे बड़ा जनरल बनाया। [संगीत] और राजपूतों को इतनी इज्जत दी कि मुगल एंपायर का सबसे बड़ा दुश्मन अब मुगल एंपायर का सबसे बड़ा दोस्त
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Speaker A
बन गया। यही वो डिप्लोमेसी थी जिसने अकबर को अकबर-ए-आज़म बना दिया। लेकिन एक राजपूत राजा जिसका नाम महाराणा प्रताप था वो इस सबके बहुत ज्यादा खिलाफ था। वो कहता था कि राजपूत ने अपने आप को मुगल एंपायर के सामने सरेंडर कर लिया है।
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Speaker A
तो बजाय इसके कि अकबर उससे बात करने के लिए किसी मुसलमान जनरल को भेजता। अकबर ने उसी राजपूत के जनरल राजा मानसिंह को उससे बात करने के लिए भेजा। लेकिन उसने कहा कि जाओ और अकबर जो कि तुम्हारा फूफा है उसे भी लेके आओ। और इस
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Speaker A
हरकत की वजह से अकबर ने मानसिंह को हुकुम दिया कि जाओ और हमला करो। बहुत लड़ाई के बाद फाइनली महाराणा प्रताप ये जंग हार गया। और अकबर ने पूरे राजपूतों को अपने ही कंट्रोल में ले लिया। और यहां
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Speaker A
से अकबर ने मुगल एंपायर में रिफॉर्म्स करना शुरू कर दिया। सबसे पहले जंग की वजह से जो गुलाम बनते थे अकबर ने उसे खत्म कर दिया। उस जमाने में हिंदुओं में एक रिवाज था कि जब हस्बैंड मरता था तो बीवी उसके
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जनाजे पे अपने आप को जिंदा जला देती थी। तो अकबर ने यह रिवाज खत्म कर दिया। इसको खत्म किया जाए। और हुकुम दिया कि वो बेवा दूसरे मर्द से शादी भी करेगी। ऐसे बहुत से रिफॉर्म्स करने की वजह से मुगल अंपायर अपनी पीक पर
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Speaker A
पहुंच गई थी। सिंह जी और अकबर इंडिया का सबसे ताकतवर बादशाह बन गया था। लेकिन यहां पे अकबर ने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती की। उसने एक नया दीन बना लिया जिसका नाम दीन इलाही था। तो सब ने यह
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Speaker A
दीन मानने से इंकार कर दिया। [संगीत] मुसलमानों ने कहा कि यह काफिर हो गया है। और हिंदुओं ने कहा कि यह इस्लाम का एक नया वर्जन है। असल में जब मुगल एंपायर बहुत स्ट्रांग हो गई थी तो डिफरेंट रिलीजंस
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Speaker A
छोटी-छोटी बातों पे एक दूसरे से लड़ते थे। [संगीत] जिसकी वजह से इतनी बड़ी एंपायर यूनाइट नहीं हो रही थी। और अकबर इस सबसे ज्यादा मायूस हो गया था और अपनी पूरी एंपायर को वो यूनाइट करना चाहता था। तो अकबर ने एक इबादतखाना बनाया। यहां पे
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पहले सिर्फ मुसलमान बहस करते थे और छोटी-छोटी बातों पर लड़ते थे। और एक दूसरे पर कुफ के फतवे भी लगाते थे। ये सब काफिर हो गए हैं। तो अकबर ने इस सबसे तंग आकर मुगल एंपायर के सबसे बड़े इमाम को हटा दिया। और खुद
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खुदबा देना शुरू किया। और एक और बड़े आलिम को चीफ जस्टिस के ओदे से हटाकर खुद चीफ जस्टिस बन गए। [संगीत] आराम आराम से अकबर ने इस इबादतखाने में बाकी रिलीजंस के लोगों को भी बुलाना शुरू किया। जिससे अकबर को हर मजहब की समझ आने
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लगी और फाइनली अकबर ने इन सब डिबेट्स के बाद एक नया दीन बनाने का प्लान बनाया जिसका नाम था दीन इलाही। तो क्या होना था?
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अकबर ने मस्जिदों को अस्तबल बनाना शुरू किया। जहां पे घोड़े खड़े करना शुरू किया। नमाज और अजान पर पाबंदी लगा दी। और हज करना खत्म कर दिया। बादशाह को सजदा करना स्टार्ट करवाया। कुरान और हदीस पढ़ने पर पाबंदी लगा दी। दाढ़ी शेफ करना मस्ट कर
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दिया। [संगीत] और जबरदस्ती अपना दीन फैलाने के लिए पूरे सल्तनत की मशीनरी को लगा दिया। [संगीत] लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। असल में यह सब झूठ था [संगीत] और जिन आलिमों को अकबर ने निकाला था वही लोग अकबर के खिलाफ ये झूठी
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Speaker A
कहानियां बना रहे थे। कुछ लोग कहते हैं कि ये दीन नहीं था बल्कि ये एक पॉलिटिकल स्टेप था पूरी एंपायर को यूनाइट करने के लिए। [संगीत] सबसे पहला चेंज ये था कि सब सलाम, सत श्री अकार नमस्ते के बजाय
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Speaker A
अल्लाहू अकबर कहेंगे। अकबर और जवाब में उनको जल्ला जलालू कहना हो। जल्ला चला गया। सब लोग अपनी बर्थडे सेलिब्रेट करेंगे। और बाकी लोगों को दावत पे बुलाएंगे। लोग अपनी जिंदगी में दावत देंगे। बजाय इसके कि वो मौत के बाद सदका और खैरात
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Speaker A
करें। और सब लोग बाकी रिलीजंस की इज्जत करेंगे। अकबर कहता था कि खुदा एक है लेकिन उस तक पहुंचने के रास्ते अलग-अलग हैं। अकबर ने यह दीन फैलाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं की। वह अगर चाहता, तो वह सबको
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Speaker A
मजबूर कर सकता था। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह दीन सिर्फ 18-19 लोगों ने ही कबूल किया था और अकबर के अपने कुछ मिनिस्टर्स ने भी यह दीन कबूल नहीं किया था। लेकिन अकबर ने उनको कुछ नहीं
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Speaker A
कहा। अब क्या यह एक पॉलिटिकल सिस्टम था? या एक दीन इट इज अप टू। अकबर ने 50 साल हुकूमत की और एक ऐसा सिस्टम बनाया जिससे मुगल एंपायर अपनी पीक पर पहुंच और अगले 200 साल के लिए हुकूमत की।
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Speaker A
लेकिन ये सिस्टम एक बहुत बड़े बादशाह से इंस्पायर होकर बनाया जिसका नाम था अलाउद्दीन खिलजी। सब्सक्राइब
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