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Arrival of Gandhi and Early Movements | Indian Modern H… — Transcript

गांधीजी के भारत आगमन और चंपारण, अहमदाबाद, खेड़ा सत्याग्रहों के माध्यम से भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में उनका योगदान।

Key Takeaways

  • गांधीजी के आगमन के बाद भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में अहिंसा और सत्याग्रह की नीति प्रमुख हुई।
  • चंपारण, अहमदाबाद और खेड़ा सत्याग्रह गांधीजी के नेतृत्व में सफल लोकल आंदोलन थे।
  • गांधीजी ने मध्य मार्ग अपनाकर किसानों और मजदूरों के हितों के लिए समझौता किया।
  • इन आंदोलनों ने ब्रिटिश सरकार को किसानों की समस्याओं को स्वीकारने और सुधार करने पर मजबूर किया।
  • गांधीजी की रणनीतियों ने स्वतंत्रता संग्राम को व्यापक जन आंदोलन में बदल दिया।

Summary

  • गांधीजी जनवरी 1915 में साउथ अफ्रीका से भारत लौटे और नेशनल मूवमेंट की दिशा बदली।
  • उनकी आइडियोलॉजी सत्याग्रह और अहिंसा पर आधारित थी, जो जैनिज्म, हिंदू धर्म और टॉलस्टॉय के विचारों से प्रेरित थी।
  • फर्स्ट वर्ल्ड वार के दौरान गांधीजी ने लोकल लेवल पर चंपारण, अहमदाबाद और खेड़ा सत्याग्रहों में हिस्सा लिया।
  • चंपारण में यूरोपियन प्लांटर्स किसानों को नील की खेती के लिए मजबूर कर रहे थे, जिससे किसान परेशान थे।
  • गांधीजी ने राजकुमार शुक्ला और अन्य स्थानीय नेताओं के साथ मिलकर किसानों की समस्या का सर्वे किया।
  • तीन कठिया सिस्टम और किसानों पर लगाए गए अन्य अन्यायों को गांधीजी ने ब्रिटिश सरकार के सामने रखा।
  • अहमदाबाद मिल वर्कर्स की हड़ताल में गांधीजी ने अहिंसा का पालन करते हुए उनका समर्थन किया।
  • गांधीजी ने आमरण अनशन कर वर्कर्स का मनोबल बढ़ाया और मिल मालिकों को समझौते के लिए मजबूर किया।
  • खेड़ा सत्याग्रह में भी गांधीजी किसानों के साथ खड़े हुए और उनकी फसल खराब होने पर लगान माफी की मांग की।
  • इन आंदोलनों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी और गांधीजी की लोकप्रियता बढ़ाई।

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00:01
Speaker A
अराइवल ऑफ गांधी और अर्ली मूवमेंट्स। दोस्तों, अपनी पिछली वीडियो में हम इंडियन नेशनल मूवमेंट के 1917 से 18 तक की बैंड्स को कर चुके हैं। इसके बाद का जो टाइम पीरियड है, उसे गांधियन एरा के नाम से जाना जाता है।
00:16
Speaker A
जाता है नेशनल मूवमेंट की दिशा तो पुरी तरह बदली जाति है साथ ही यह पीरियड आजादी के बाद के भारत को भी दिशा दिखाने का कम करता है आज हम इसी को शुरू करने वाले हैं हम जानेंगे की कैसे गांधीजी इंडिया के नेशनल मूवमेंट
00:35
Speaker A
नेशनल मूवमेंट की दिशा तो पूरी तरह बदली जाती है। साथ ही यह पीरियड आजादी के बाद के भारत को भी दिशा दिखाने का काम करता है। आज हम इसी को शुरू करने वाले हैं। हम जानेंगे कि कैसे गांधीजी इंडिया के नेशनल मूवमेंट को एक नई डायरेक्शन देते हैं। साथ ही उनकी आइडियोलॉजी और शुरुआत के कुछ इंपॉर्टेंट मूवमेंट्स को भी कर करेंगे। तो आई शुरू करते हैं।
00:59
Speaker A
में डिटेल में कर कर चुके हैं साउथ अफ्रीका में किया गए उनके कम के बड़े में सिर्फ एजुकेटेड क्लास की नहीं बल्कि आम जनता भी जान गई थी इसीलिए इंडिया में उनकी पहचान एक सफल लीडर के रूप में बन चुकी थी
01:13
Speaker A
दोस्तों, गांधीजी जनवरी 1915 में साउथ अफ्रीका से इंडिया वापस आते हैं। उनके साउथ अफ्रीकन कैंपेन को हम अपनी पिछली वीडियो में डिटेल में कर चुके हैं। साउथ अफ्रीका में किया गए उनके काम के बारे में सिर्फ एजुकेटेड क्लास ही नहीं बल्कि आम जनता भी जान गई थी। इसीलिए इंडिया में उनकी पहचान एक सफल लीडर के रूप में बन चुकी थी।
01:31
Speaker A
गांधीजी की एडोलॉजी प्रेरित थी उनकी मदर के आदर्श से जैनिज्म फिलासफी से हिंदुइज्म से और लियो टॉलस्टॉय के विचारों से इंडिया आने के बाद अपने राजनैतिक गुरु गोखले के खाने पर गांधी जी एक साल तक देश घूमते हैं
01:47
Speaker A
साउथ अफ्रीका में संघर्ष के दौरान ही नेशनल मूवमेंट के लिए गांधीजी की आइडियोलॉजी भी डेवलप होती है। उनकी आइडियोलॉजी का बेस सत्य और अहिंसा पर आधारित सत्याग्रह था। इसके अलावा गांधीजी सर्वोदय, यानी कि सभी के विकास में बिलीव करते थे।
02:01
Speaker A
नहीं यहां तक की वह वार के लिए सोल्जर रिक्रूट करने में भी ब्रिटिश की हेल्प करते हैं इसके लिए उन्हें रिक्रूटिंग सार्जेंट ऑफ डी गवर्नमेंट के नाम से भी जाना जाता है साथ ही वार में उनकी सर्विसेज के लिए
02:15
Speaker A
गांधीजी की आइडियोलॉजी प्रेरित थी उनकी मदर के आदर्श से, जैनिज्म फिलॉसफी से, हिंदूइज्म से और लियो टॉलस्टॉय के विचारों से। इंडिया आने के बाद अपने राजनीतिक गुरु गोखले के कहने पर गांधीजी एक साल तक देश घूमते हैं, जिससे वो देश और उसके लोगों की हालात को अच्छे से समझ सकें।
02:42
Speaker A
की नील की खेती करने के लिए फोर्स कर रहे थे जिसकी वजह से यहां के किसान बहुत परेशान थे ना तो वो अपनी जरूर के अनुसार फूड क्रॉप्स गो कर सकते थे और ना ही उन्हें इंडिगो के लिए सही दम ही मिलते थे
02:56
Speaker A
गांधीजी उस समय चल रही होम रूल एजीटेशन के फीवर में नहीं थे क्योंकि उन्हें लगता था कि वार के बीच में ब्रिटेन से होम रूल की डिमांड करना सही नहीं। यहां तक कि वह वार के लिए सोल्जर रिक्रूट करने में भी ब्रिटिश की हेल्प करते हैं। इसके लिए उन्हें रिक्रूटिंग सार्जेंट ऑफ द गवर्नमेंट के नाम से भी जाना जाता है। साथ ही वार में उनकी सर्विसेज के लिए ब्रिटिश गवर्नमेंट उन्हें किंग्स हेंडमेडल भी देती है।
03:13
Speaker A
बराबर होता था शुरुआत में तो किसने को इसके अच्छे दम मिलते थे इसलिए वह इंडिगो की खेती के लिए तैयार हो गए इंडिगो को रिप्लेस करने लगती हैं ऐसी सिचुएशन में अपने प्रॉफिट को मैक्सिमाइज करने के लिए यूरोपियन प्लांटर्स किसने से
03:32
Speaker A
फर्स्ट वर्ल्ड वार के दौरान ही गांधीजी इंडिया में कुछ लोकल लेवल आंदोलन का हिस्सा भी बनते हैं, जैसे चंपारण, अहमदाबाद और खेड़ा सत्याग्रह।
03:46
Speaker A
पुलिस और ज्यूडिशरी की हेल्प से उन्हें डराया धमकाया जाता था इस वजह से यहां के किसने की हालात बहुत ही खराब हो चुकी थी गांधी जी को इसके बड़े में राजकुमार शुक्ला नाम के एक व्यक्ति से पता चला है
03:59
Speaker A
दोस्तों, बिहार के चंपारण जिला में यूरोपियन प्लांटर्स किसानों को इंडिगो, यानी की नील की खेती करने के लिए फोर्स कर रहे थे, जिसकी वजह से यहां के किसान बहुत परेशान थे। ना तो वो अपनी जरूरत के अनुसार फूड क्रॉप्स उगा सकते थे और ना ही उन्हें इंडिगो के लिए सही दाम ही मिलते थे।
04:15
Speaker A
पास चंपारण जान का समय नहीं था लेकिन राजकुमार शुक्ला उनका पीछा नहीं छोड़ते वह गांधीजी को हर जगह फॉलो करते हैं और उनसे रिक्वेस्ट करते हैं की वह एक बार चंपारण चलकर किसने की हालात खुद देख लेने फाइनली
04:31
Speaker A
यहां जो सिस्टम चल रहा था, उसे तीन कठिया सिस्टम कहा जाता था। इसका मतलब था कि किसान को कम से कम तीन कठ्ठा जमीन पर इंडिगो की खेती करनी होती थी। कठ्ठा लैंड मेजरमेंट की एक यूनिट थी, जिसमें 20 कठ्ठा एक बीघा के बराबर होता था।
04:49
Speaker A
जाते हैं इसके बाद गांधीजी राजेंद्र प्रसाद नरहरि पारीक जी बी कृपलानी और महादेव देसाई जैसे लोकल लीडर्स के साथ मिलकर एक टीम बनाते हैं यह लोग किसने की समस्या को सही तरीके से समझना के लिए एक सर्वे शुरू करते हैं
05:05
Speaker A
शुरुआत में तो किसानों को इसके अच्छे दाम मिलते थे, इसलिए वह इंडिगो की खेती के लिए तैयार हो गए। इंडिगो को रिप्लेस करने लगती हैं। ऐसी सिचुएशन में अपने प्रॉफिट को मैक्सिमाइज करने के लिए यूरोपियन प्लांटर्स किसानों से हाई रेंट और लीगल फीस की डिमांड करने लगते हैं। साथ ही किसानों को फोर्स किया जाता है कि वो यूरोपियंस द्वारा फिक्स किए गए प्राइसेस पर अपने प्रोड्यूस को बेचें। और अगर किसान इंडिगो उगाने से मना करते तो पुलिस और ज्यूडिशरी की हेल्प से उन्हें डराया धमकाया जाता था।
05:21
Speaker A
निकालना के लिए खुद ही एक कमेटी सेटअप करती है गांधीजी को इस कमेटी का मेंबर बने के लिए इनवाइट किया जाता है गांधीजी कमेटी के मेंबर्स को कन्वेंस करने में कामयाब होते हैं की तीन कठिया सिस्टम पुरी तरह गलत है और इसे पॉलिश करने की
05:37
Speaker A
इस वजह से यहां के किसानों की हालात बहुत ही खराब हो चुकी थी। गांधीजी को इसके बारे में राजकुमार शुक्ला नाम के एक व्यक्ति से पता चला है, जो चंपारण के ही एक किसान थे। राजकुमार शुक्ला गांधीजी से मिलकर उन्हें चंपारण के किसानों की मदद करने के लिए कहते हैं।
05:56
Speaker A
यहां पर यह समझना जरूरी है की किसने की फूल कंपनसेशन की डिमांड नहीं मनी जाति लेकिन गांधीजी मिडिल पाठ और कंप्रोमाइज में यकीन करते थे चंपारण के बाद गांधी जी को मार्च 1918 में अहमदाबाद से बुलावा जाता है यहां कॉटन में
06:14
Speaker A
उस समय यानी कि 1916 में गांधीजी कांग्रेस का सेशन अटेंड करने के लिए लखनऊ में थे। उनके पास चंपारण जाने का समय नहीं था, लेकिन राजकुमार शुक्ला उनका पीछा नहीं छोड़ते। वह गांधीजी को हर जगह फॉलो करते हैं और उनसे रिक्वेस्ट करते हैं कि वह एक बार चंपारण चलकर किसानों की हालात खुद देख लें।
06:28
Speaker A
की जाए जिससे वो वो टाइम इन्फ्लेशन में खुद को मैनेज कर सके लेकिन मिलन्स सिर्फ 20% की बढ़ोतरी के लिए तैयार थे इसलिए वर्कर्स हड़ताल पर चले जाते हैं मिल ऑनर्स और वर्कर्स के बीच के रिश्ते और खराब होने
06:43
Speaker A
फाइनली गांधीजी उन्हें प्रॉमिस करते हैं कि वह कोलकाता की विजिट के बाद चंपारण पहुंच जाएंगे। गांधीजी जब कोलकाता पहुंचते हैं, तब राजकुमार शुक्ला उन्हें चंपारण ले जाने के लिए वहां पहले से ही मौजूद होते हैं। 1917 की शुरुआत में गांधीजी चंपारण पहुंच जाते हैं।
07:07
Speaker A
भी थे अनसूया बहन गांधीजी से इस डिस्प्यूट में इंटरव्यू करने की रिक्वेस्ट करती है वैसे तो गांधीजी अंबालाल साराभाई के दोस्त थे अंबालाल जी ने अहमदाबाद में आश्रम बनाने के लिए गांधीजी को डोनेशन भी दी थी लेकिन इसके बावजूद गांधीजी यहां वर्कर्स के साथ
07:27
Speaker A
इसके बाद गांधीजी राजेंद्र प्रसाद, नरहरि पारीक जी, बी कृपलानी और महादेव देसाई जैसे लोकल लीडर्स के साथ मिलकर एक टीम बनाते हैं। यह लोग किसानों की समस्या को सही तरीके से समझने के लिए एक सर्वे शुरू करते हैं।
07:43
Speaker A
के दौरान पुरी तरह अहिंसा का पालनपुर करने की सलाह भी वर्कर्स को देते हैं इसके बाद भी जब मिलो ने नहीं मानते तो वर्कर्स का मनोबल बढ़ाने के लिए गांधीजी खुद आमरण अंश पर बैठ जाते हैं ये पहले मौका था जब
07:57
Speaker A
गांधीजी की एक्टिविटीज को देखकर लोकल ब्रिटिश ऑफिसर्स थोड़ा घबरा जाते हैं। उन्हें डर लगता है कि कहानी साउथ अफ्रीका की तरह गांधीजी यहां भी कोई बड़ा आंदोलन ना खड़ा कर दें। इसलिए ब्रिटिश गवर्नमेंट इंडिगो कल्टीवेटर की समस्या का हल निकालने के लिए खुद ही एक कमेटी सेटअप करती है। गांधीजी को इस कमेटी का मेंबर बनने के लिए इनवाइट किया जाता है।
08:18
Speaker A
अहमदाबाद स्ट्राइक के दौरान ही गांधी जी को खेड़ा आने का इनविटेशन मिल जाता है यहां पर 1918 में ड्रॉट की वजह से किसने की फसल बर्बाद हो गई थी रिवेन्यू कोर्ट में प्रोविजन था की नॉर्मल प्रोड्यूस की तुलना में अगर 14th से भी गम की पैदावार
08:35
Speaker A
गांधीजी कमेटी के मेंबर्स को कन्वेंस करने में कामयाब होते हैं कि तीन कठिया सिस्टम पूरी तरह गलत है और इसे पॉलिश करने की जरूरत है। साथ ही इंडिगो प्लांटर्स के साथ एग्रीमेंट करते हैं कि उन्होंने किसानों से जो इलीगल फीस वसूल किया था, उसका 25% किसानों को कंपनसेशन अमाउंट के रूप में वापस करें। इस तरह चंपारण के किसानों की समस्या हल हो जाती है।
08:53
Speaker A
का देती है की अगर किसान टैक्स नहीं देंगे तो उनकी प्रॉपर्टीज जप्त कर ली जाएगी खेड़ा में गांधीजी का साथ देने के लिए वल्लभभाई पटेल नरहरि पारीक मोहनलाल पांड्या और रवि शंकर व्यास जैसे लीडर्स मौजूद थे यह लोग गांव जाकर किसने को
09:10
Speaker A
यहां पर यह समझना जरूरी है कि किसानों की फुल कंपनसेशन की डिमांड नहीं मानी जाती, लेकिन गांधीजी मिडिल पाथ और कंप्रोमाइज में यकीन करते थे।
09:32
Speaker A
तब भी किसान सरदार पटेल का साथ नहीं छोड़ दें और फर्स्ट नॉन कोऑपरेशन आंदोलन में बने रहते हैं आखिर में गवर्नमेंट किसने के साथ समझौते के लिए मां जाति है साल 1919 के लिए टैक्स को सस्पेंड कर दिया जाता है
09:47
Speaker A
चंपारण के बाद गांधीजी को मार्च 1918 में अहमदाबाद से बुलावा जाता है। यहां कॉटन मिलर्स और वर्कर्स के बीच प्लेग बोनस के डिस्कंटीन्यूएशन के इशू पर डिस्प्यूट खड़ा हो गया था। मिल ऑनर्स बोनस खत्म कर देना चाहते थे और वर्कर्स की डिमांड थी कि इसके बदले में उनके वेजेस में 50% की बढ़ोतरी की जाए, जिससे वो उस टाइम इन्फ्लेशन में खुद को मैनेज कर सकें।
10:02
Speaker A
पहचान बना लेते हैं इन लोकल लेवल इवेंट्स के बाद अब बड़ी थी एक जो इंडिया मूवमेंट की गांधीजी का पहले जो इंडिया लेवल का आंदोलन कौन सा था और वो किस तरह से होता है आई जानते हैं दोस्तों गांधी जी को उम्मीद थी की वर्ल्ड
10:25
Speaker A
लेकिन मिल ऑनर्स सिर्फ 20% की बढ़ोतरी के लिए तैयार थे, इसलिए वर्कर्स हड़ताल पर चले जाते हैं। मिल ऑनर्स और वर्कर्स के बीच के रिश्ते और खराब होने लगते हैं। जब हड़ताल पर गए वर्कर्स को डिसमिस किया जाना लगता है और मुंबई से विवर्स को बुलाने का डिसीजन लिया जाता है।
10:42
Speaker A
वर्ल्ड वार के दौरान इंडियन रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज को सरप्राइज करने के लिए ब्रिटिश डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट 1915 लेकर आए थे यह इमरजेंसी क्रिमिनल डॉ था मतलब वोट जैसी इमरजेंसी सिचुएशन के दौरान किसी भी तरह की रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटी को
10:59
Speaker A
ऐसी सिचुएशन में हेल्प के लिए वर्कर्स अनुसुइया साराभाई के पास पहुंचते हैं। अहमदाबाद मिल ऑनर्स संगठन के प्रेसिडेंट भी थे। अनुसुइया बहन गांधीजी से इस डिस्प्यूट में इंटरव्यू करने की रिक्वेस्ट करती हैं।
11:43
Speaker A
ऑफ इंडिया एक्ट को इंडेफिनिटी टाइम के लिए एक्सटेंड करने का रेकमेंडेशन दिया यही एक्ट फिर रोलेट एक्ट के नाम से जाना जाता है हालांकि इसका ऑफिशल नाम अनक्कल और रिवॉल्यूशनरी क्राइम एक्ट 1919 है इस एक्ट का इनाम था ब्रिटिशर्स के खिलाफ किसी भी
12:01
Speaker A
वैसे तो गांधीजी अंबालाल साराभाई के दोस्त थे। अंबालाल जी ने अहमदाबाद में आश्रम बनाने के लिए गांधीजी को डोनेशन भी दी थी, लेकिन इसके बावजूद गांधीजी यहां वर्कर्स के साथ खड़े होते हैं। अनुसुइया जी भी वर्कर्स को सपोर्ट करती हैं और गांधीजी का पूरा साथ देती हैं।
12:15
Speaker A
के जय में डाला जा सकता था स्पेशल कोर्ट बनाए गए रौलट एक्ट से रिलेटेड जिसमें तीन जज की बेंच फैसला करती थी और इनके फैसला के खिलाफ किसी भी तरह की अपील नहीं की जा शक्ति थी इसलिए इस एक्ट को नो अपील नो
12:30
Speaker A
गांधीजी वर्कर्स से वेजेस में 50% की जगह 35% बढ़ोतरी की डिमांड पर हड़ताल करने के लिए कहते हैं। इसके साथ ही हड़ताल के दौरान पूरी तरह अहिंसा का पालन करने की सलाह भी वर्कर्स को देते हैं।
12:48
Speaker A
लीग जैसे ऑर्गेनाइजेशंस को भी अपने साथ जोड़ने हैं इसके बाद जगह सत्याग्रह सभा की गई और फिर फैसला किया गया की सिक्स्थ अप्रैल 1990 को रौलट एक्ट के विरोध में पूरे देश में हड़ताल की जाएगी सब कुछ प्लेन के हिसाब से ही हो रहा था की तभी
13:06
Speaker A
इसके बाद भी जब मिलर्स नहीं मानते तो वर्कर्स का मनोबल बढ़ाने के लिए गांधीजी खुद आमरण अनशन पर बैठ जाते हैं। यह पहला मौका था जब इंडिया में किसी पॉलिटिकल कॉल के लिए गांधीजी हंगर स्ट्राइक करते हैं। और फाइनली केस सामने रखना के लिए मान जाते हैं।
13:22
Speaker A
लीडर्स की अरेस्ट के बड़े में सुनकर गुस्से में ए जाते हैं भीड़ गवर्नमेंट प्रॉपर्टी को अपना निशाना बनाने लगती है और पूरा पंजाब गुस्से की आज में जलने लगता है सिचुएशन को कंट्रोल करने के लिए 11th अप्रैल को पंजाब में मार्शल
13:39
Speaker A
हड़ताल वापस ले ली जाती है और ट्रिब्यूनल वर्कर्स की 35% हाई की डिमांड को मान लिया जाता है। अहमदाबाद स्ट्राइक के दौरान ही गांधीजी को खेड़ा आने का इनविटेशन मिल जाता है।
13:54
Speaker A
बड़ी संख्या में लोगों के कठे होने की खबर मिलने पर जनरल डायर अपनी ट्रूप्स को ओपन फायर करने का ऑर्डर दे देते हैं फायर करने से पहले पब्लिक को किसी भी तरह की वारंग भी नहीं दी जाति इसमें हजारों निहत्थे लोग
14:10
Speaker A
यहां पर 1918 में ड्रॉट की वजह से किसानों की फसल बर्बाद हो गई थी। रिवेन्यू कोर्ट में प्राविजन था कि नॉर्मल प्रोड्यूस की तुलना में अगर 14वीं से भी कम की पैदावार होती है तो किसान का लगान माफ किया जा सकता है।
14:30
Speaker A
आहट कर देती हैं इसलिए 18 अप्रैल 1990 को गांधीजी इस आंदोलन को वापस ले लेते हैं और वह इस सत्याग्रह को एक हिमालय जितनी बड़ी गलती बताते हैं कंक्लुजन दोस्तों इस तरह गांधीजी का पहले जो इंडिया लेवल का मूवमेंट एक तरह से फूल हो जाता है
14:57
Speaker A
किसानों की एक ऑर्गेनाइजेशन गुजरात सभा ब्रिटिश अथॉरिटीज के पास पिटीशन भेजती है कि साल 1918 के लिए रिवेन्यू एसेसमेंट को सस्पेंड कर दिया जाए, लेकिन गवर्नमेंट कुछ भी सुनने के लिए तैयार नहीं थी। वो यहां तक कहती है कि अगर किसान टैक्स नहीं देंगे तो उनकी प्रॉपर्टीज जप्त कर ली जाएगी।
15:14
Speaker A
शुरू करते हैं और वो आंदोलन था नॉन कोऑपरेशन यानी की सहयोग आंदोलन इस आंदोलन के बड़े में हम अपनी नेक्स्ट वीडियो में चर्चा करेंगे
Topics:गांधीजीभारतीय राष्ट्रीय आंदोलनचंपारण सत्याग्रहअहमदाबाद मिल हड़तालखेड़ा सत्याग्रहसत्याग्रहअहिंसाब्रिटिश शासननेशनल मूवमेंटUPSC इतिहास

Answers

Frequently Asked Questions

गांधीजी भारत कब लौटे और उनका स्वागत कैसे हुआ?

गांधीजी जनवरी 1915 में साउथ अफ्रीका से भारत लौटे। उनके साउथ अफ्रीका में किए गए काम की जानकारी आम जनता तक पहुंच चुकी थी, जिससे उनकी पहचान एक सफल नेता के रूप में बन चुकी थी।

चंपारण सत्याग्रह की मुख्य समस्या क्या थी?

चंपारण में यूरोपियन प्लांटर्स किसानों को नील की खेती के लिए मजबूर कर रहे थे, जिससे किसान अपनी जरूरत के अनुसार फसल नहीं उगा पा रहे थे और उन्हें उचित दाम भी नहीं मिल रहे थे।

गांधीजी ने अहमदाबाद मिल हड़ताल में किस प्रकार भूमिका निभाई?

गांधीजी ने वर्कर्स के साथ खड़े होकर अहिंसा का पालन करते हुए उनका मनोबल बढ़ाया और जब मिल मालिक नहीं माने तो आमरण अनशन किया, जिससे अंततः मिल मालिक समझौते के लिए मजबूर हुए।

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