मध्यकालीन भारत में 13 प्रमुख जौहरों का इतिहास, कारण और उनका सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व।
Key Takeaways
- जौहर एक सांस्कृतिक या सैन्य प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि अस्तित्व और सम्मान की रक्षा का अंतिम उपाय था।
- यह केवल विशेष ऐतिहासिक और सामाजिक परिस्थितियों में ही हुआ।
- जौहर के पीछे महिलाओं और बच्चों पर होने वाले अत्याचारों का भय था।
- इतिहास में जौहर को सही ढंग से समझना और उसकी पीड़ा को स्वीकार करना आवश्यक है।
- युद्धों में हर बार जौहर नहीं हुआ, यह एक दुर्लभ और विशेष घटना थी।
What the video covers
- भारत में कुल 13 रिकॉर्डेड जौहर हुए, जिनका एक विशिष्ट पैटर्न था।
- 1000 से 1500 ईस्वी तक विभिन्न राजपूत वंशों के बीच युद्ध हुए लेकिन जौहर नहीं हुआ।
- अंग्रेजों के शासनकाल में भी कई युद्ध हुए, पर जौहर का कोई रिकॉर्ड नहीं।
- पहला रिकॉर्डेड जौहर 712 ईस्वी में सिंध में हुआ था, मोहम्मद बिन कासिम के आक्रमण के दौरान।
- खिलजी, तुगलक, बाबर, अकबर और औरंगजेब के आक्रमणों के दौरान जौहर के प्रमुख मामले दर्ज हैं।
- जौहर केवल अस्तित्व के खतरे, कैद, दासता और अत्याचार के डर से हुआ, न कि सांस्कृतिक प्रतिक्रिया या सैन्य असफलता से।
- यह एक भयावह अनुष्ठान था जिसमें महिलाओं ने मौत को चुना ताकि वे शोषण से बच सकें।
- जौहर को ग्लोरिफाई करने की बजाय उसके पीछे की पीड़ा और मजबूरियों को समझना जरूरी है।
- यह प्रथा केवल भारत में विशेष परिस्थितियों में हुई और अन्यत्र इसका कोई उदाहरण नहीं।
- युद्ध की क्रूरता में पीड़ित पक्ष पर सामूहिक अत्याचार होते थे, जिससे जौहर जैसे कदम उठाने पड़ते थे।
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Speaker A
प्रॉब्लम यह नहीं है कि हम जौहर को ग्लोरिफाई करते हैं। प्रॉब्लम यह है कि हमने जौहर को ढंग से ग्लोरिफाई किया नहीं है। ऐसी कौन सी चीज है? ऐसी कौन सी हैवानियत है कि औरत तुम्हारे हाथ लगाने से मौत ज्यादा प्रेफर करती है?
Speaker A
हमारे देश में टोटल 13 रिकॉर्डेड जौहर हैं। और उन सबका एक स्पेसिफिक पैटर्न है मैं सारे के सारे जौहर बताऊंगा। मेडिवल टाइम में कौन से कॉन्फ्लिक्ट में बिल्कुल जौहर नहीं हुआ और कौन से कॉन्फ्लिक्ट में स्पेसिफिकली जौहर हुआ?
Speaker A
1000 से लेकर 1500 एडी तक चालुक्याज और परमारस। परमारस और चौहान। चौहान और गदावलास, सिसोदिया और राठौड़। राठौड़ और परमारस, राठौड़ और कछवास। इन सबके बीच में लड़ाइयां हुई लेकिन कभी भी जौहर नहीं हुआ।
Speaker A
उसके बाद अंग्रेज 200 साल तक जब भारत को सब्जुगेट किए, ग्रूसम वॉर्स होती थी प्लासी की, बक्सर की, कर्नाटिक की, एंग्लो मैसोर, एंग्लो मराठा, एंग्लो सिख, एंग्लो बुरखा वॉर। तबाही थी अतः लेकिन किसी ने भी बेसिकली जौहर नहीं किया।
Speaker A
देश में 13 बार जौहर हुआ और पता है हर बार क्या कॉमन था?
Speaker A
ये देखो सबसे पहला जो रिकॉर्डेड जौहर है वो 712 एडी का है सिंध में। वहां पर एक हिंदू राजा हुआ करता था, अटैकर थे मोहम्मद बिन कासिम। उसके बाद जौहर हुआ था जैसलमेर में 1294 और 1326 में खलजी और तुगलक की फोर्स के द्वारा।
Speaker A
1301 में रणथंबोर में हुआ था। अलाउद्दीन खिलजी बेसिकली इनवेडर था। 1303, 1535 और 1568 चित्तौड़गढ़ में खलजी, बहादुर शाह और अकबर ये तीनों के तीनों रिस्पेक्टिवली चित्तौड़गढ़ में जौहर हुए थे जब इनकी फोर्सेस ने अटैक किया था।
Speaker A
1528, 1532, 1543 में रायसेन और चंदेरी में बाबर, शेरशाह सूरी और मुगल्स के अटैक्स के दौरान। और 1634 और 1710 जो सबसे लास्ट, जो लेटेस्ट जौहर हुए थे देश में, औरंगजेब और मीर फजुला के अटैक के दौरान।
Speaker A
मतलब कि जब राजपूत और मराठा लड़ रहे हैं, यूरोपियन कॉलोनाइजर्स लड़ने लग रहे हैं। 1000 से 1500 एडी और 1750 से 1850 तक जितने भी युद्ध हुए थे उसमें लॉस ऑफ टेरिटरी हुई। पॉलिटिकल [गला साफ़ करने की आवाज़] सबजुगेशन हुआ।
Speaker A
इकोनमिक एक्सट्रेक्शन हुआ। लेकिन जौहर के जीरो इंसिडेंट। 13 मेजर इंसिडेंट हैं जौहर के। इस्लामिक सल्तनत खलजी, तुगलक, बाबर और अकबर के दौरान। सिर्फ और सिर्फ तभी एक्जिस्टेंशियलिस्ट थ्रेट नहीं था।
Speaker A
सिर्फ और सिर्फ वो फियर ऑफ कैप्चर, एनस्लेवमेंट और जो टारगेटेड रेट्रिब्यूशन होती है, जो हैवानियत होती है मैरिड लड़कियों के ऊपर, अनमैरिड लड़कों के ऊपर, 12 साल की लड़की के ऊपर, बूम से निकाल के फीटस के ऊपर तक नेक्रोफीलिया।
Speaker A
जौहर कभी भी जर्रिक कल्चरल रिएक्शन नहीं था, मिलिट्री फेलियर को और ना ही कोई जौहर को ग्लोरिफाई करता है। इट वाज़ अ मॉर्बिड रिचुअल ऑन इमोलेशन। को ऑनर नहीं कर रहे पर उसके पीछे जो डिबिलिटेटिंग सेंटीमेंट था उसके बारे में जौहर है।
Speaker A
सवाल यह उठता है ऐसी कौन सी सिचुएशन थी कि लोग मौत को चुन रहे हैं उसके अल्टरनेटिव की बजाय। पीपल डोंट अंडरस्टैंड व्हाट चोकर वाज़ एंड दे डोंट अंडरस्टैंड एंड व्हाट डोज फीमेल्स वर गोइंग थ्रू। ऐसी कौन सी मजबूरी है कि आग में कूदना पड़ रहा है और सिर्फ पर्टिकुलर केस में।
Speaker A
इट नेवर हैपेंड, इट इज़ नॉट एनीवेयर एल्स। डन वॉर जब भी होती है तो एक विनर होता है, एक लूजर होता है। हर जगह पे जौहर नहीं हो रहा है। वॉर की ब्रूटैलिटी यह होती है कि जब भी जो विक्टिम साइड होती है, उसको मास मास रेप और मास कॉन्क्वेस्ट के तहत उसका तबाह कर दिया जाता है।
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