बेनजीर भुट्टो की हत्या के रहस्यों और 27 दिसंबर 2007 के हमले की सियासी पृष्ठभूमि की गहराई से पड़ताल।
Key Takeaways
- बेनजीर भुट्टो की हत्या केवल एक हमले का परिणाम नहीं बल्कि लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक साजिश थी।
- सिक्योरिटी के बावजूद हमले की सफलता ने पाकिस्तान की राजनीतिक अस्थिरता को उजागर किया।
- बेनजीर की वापसी ने देश में राजनीतिक उथल-पुथल को बढ़ावा दिया।
- एनआरओ समझौते ने राजनीतिक समीकरणों को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- 27 दिसंबर का हमला पाकिस्तान की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ।
What the video covers
- 27 दिसंबर 2007 को रावलपिंडी के लियाकत बाग में हुए हमले का विवरण।
- बेनजीर भुट्टो की पाकिस्तान वापसी और उस समय की राजनीतिक स्थिति।
- दुबई एयरपोर्ट से शुरू होने वाली वापसी यात्रा और कराची में उनका भव्य स्वागत।
- सिक्योरिटी खतरों के बावजूद राजनीतिक रैलियों में बेनजीर की मौजूदगी।
- जनरल परवेज मुशर्रफ की सरकार और बेनजीर के बीच एनआरओ के तहत हुए समझौते।
- कारसाज़ हमले के बाद देश में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता।
- सिक्योरिटी इंतजामों की समीक्षा और उनकी कमियों का उल्लेख।
- 27 दिसंबर के हमले के बाद देश में फैली अफरातफरी और शोक की स्थिति।
- हमले के पीछे छिपे राजनीतिक हितों और साजिशों की संभावना।
- बेनजीर भुट्टो के जीवन और मौत से जुड़े अनसुलझे सवाल और विवाद।
Chapters
- 00:00रावलपिंडी लियाकत बाग में हमले का प्रारंभिक दृश्य
- 01:02दुबई एयरपोर्ट से बेनजीर की वापसी की तैयारी
- 02:03एनआरओ समझौते और राजनीतिक पृष्ठभूमि
- 03:07कराची में भव्य स्वागत और सुरक्षा इंतजाम
- 04:02हमले की शुरुआत और अफरातफरी
- 06:02हमले के बाद की स्थिति और बेनजीर की सुरक्षा
- 07:06सियासी गतिविधियां और सुरक्षा चिंताएं
- 08:08रावलपिंडी जलसा और हमले की तैयारी
- 09:07हमले का निर्णायक क्षण और परिणाम
- 11:09हमले के बाद की जांच और विवाद
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Speaker A
रावलपिंडी के लियाकत बाग में हजारों लोग खुशी से नारे लगा रहे थे। सफेद रंग की एक लैंड क्रूजर हुजूम के दरमियान आहिस्ता-आहिस्ता आगे बढ़ रही थी। गाड़ी के सनरूफ से एक मुस्कुराता हुआ चेहरा बाहर आया। हाथ फज़ा में बुलंद हुआ। कैमरों की
Speaker A
फ्लैशाइट्स मुसलसल चमक रही थीं। इसी हुजूम के अंदर सिर्फ चंद कदम के फासले पर एक शख्स खामोशी से खड़ा था। उसकी नजरें सिर्फ एक सिम्त पर जमी हुई थीं। किसी ने उस पर तवज्जो नहीं दी क्योंकि अगले चंद लम्हों
Speaker A
में ऐसा होने वाला था जिसका तसवुर वहां मौजूद हजारों लोगों ने कभी [संगीत] नहीं किया था। पहले तीन आवाजें सुनाई दीं। फिर एक हौलनाक धमाका। धुआं, चीखें, बगदर, टूटे हुए शीशे, बिखरे हुए झंडे और चंद ही लम्हों में पूरा मंजर
Speaker A
बदल चुका था। [संगीत] लेकिन असल सवाल यह नहीं कि इस शाम क्या हुआ? असल सवाल यह है कि क्या यह सब सिर्फ चंद सेकंड में हुआ था? या फिर इसकी बुनियाद कई माह पहले रखी जा चुकी थी। आज हम सिर्फ एक हमले की कहानी
Speaker A
नहीं सुनेंगे। हम उन वाक्यात का सफर करेंगे जिन्होंने आहिस्ता-आहिस्ता पाकिस्तान को इस मुकाम [संगीत] तक पहुंचाया। यह कहानी शुरू होती है रावलपिंडी से नहीं बल्कि सैकड़ों मील दूर दुबई के एक हवाई अड्डे से। अक्टूबर 2007 [संगीत] दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट सुबह के
Speaker A
इब्तदाई औकात हवाई अड्डे [संगीत] के वीआईपी लाउंज में गैर मामूली सरगर्मी थी। सिक्योरिटी अहलकार मुसलसल आमद रफ्त कर रहे थे। सहाफी अपने कैमरे तैयार कर रहे थे। जबकि दुनिया भर के न्यूज़ चैनल्स की नजरें सिर्फ एक शख्सियत पर मरकूस थी। बेनजीर
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भुट्टो आठ साल का जला वतनी खत्म होने वाली थी। वह पाकिस्तान वापस जाने की [संगीत] तैयारी कर रही थी। यह महज एक सफर नहीं था। यह एक ऐसी वापसी थी जिस पर सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि दुनिया के कई
Speaker A
दारुल हुकूमतों की नजरें लगी हुई थीं। उन दिनों पाकिस्तान शदीद सियासी बोहरान से गुजर रहा था। मुल्क में इंतखाबादत की तैयारियां जारी थीं। सियासी कशीदगी बढ़ रही थी और इख्तेदार के एवानों में मुस्तकबिल के बारे में मुसलसल मुलाकातें
Speaker A
हो रही थीं। इसी दौरान जनरल परवेज मुशर्रफ की हुकूमत और बेनजीर भुट्टो के दरमियान कौमी मफामत ऑर्डिनलेंस यानी [संगीत] एनआरओ के हवाले से मुजाकरात हुए। जिनमें बैनुल अकवामी सिफारती किरदार का भी जिक्र किया जाता है। इस मुआयदे ने पाकिस्तानी सियासत
Speaker A
का रुख बदल दिया। कुछ लोगों के नजदीक यह जमहूरी अमल को आगे बढ़ाने की कोशिश थी। जबकि नाकदीन के नजदीक उसके पीछे ताकतवर सियासी मफादात मौजूद थे। लेकिन एक हकीकत सब जानते थे। [संगीत] बेनजीर भुट्टो वापस आ रही थी और उनकी वापसी सिर्फ एक सियासी
Speaker A
खबर नहीं थी। यह एक ऐसा वाकया था जिसके असरात पूरे मुल्क में महसूस किए जा रहे थे। रवानगी से पहले मुख्तलिफ जराय से सिक्योरिटी खतशात की इत्तलात [संगीत] सामने आ चुकी थी। इन इत्तलात में मुमकिना खतरात का जिक्र किया गया था और बेनजीर
Speaker A
[संगीत] भुट्टो खुद भी मुतादद मवाके पर अपनी सिक्योरिटी के बारे में तशवीश जाहिर कर चुकी थी। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने वापसी का फैसला तब्दील नहीं किया। चंद घंटों बाद जहाज पाकिस्तान की फजाई हुदूद में दाखिल हो चुका था। खिड़की के बाहर
Speaker A
नीचे फैला हुआ शहर आहिस्ता-आहिस्ता करीब आ [संगीत] रहा था। यह कराची था। एक ऐसा शहर जो चंद ही घंटों बाद अपनी तारीख के सबसे बड़े सियासी इस्तकबाल में से एक का गवाह बनने वाला था। 18 अक्टूबर 2007 [संगीत]
Speaker A
दोपहर ढल रही थी जब जहाज ने जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रनवे को छुआ। जहाज के रुकते ही पूरे शहर में एक ही खबर जंगल की आग की तरह फैल गई। बेनजीर भुट्टो वापस आ गई हैं। एयरपोर्ट के बाहर सड़कें
Speaker A
इंसानों से भर चुकी थीं। जहां तक नजर जाती थी सुर्ख सब और स्याह परचम हवा में लहरा रहे थे। लोग इमारतों [संगीत] की छतों पर खड़े थे। कुछ दरख्तों पर चढ़े हुए थे। कुछ बिजली के खंभों से लिपटे। सिर्फ एक झलक
Speaker A
देखने [संगीत] की कोशिश कर रहे थे। फज़ा नारों से गूंज रही थी। ढोल बज रहे थे। गुलाब की पत्तियां [संगीत] फज़ा में बरस रही थीं। कई लोगों की आंखों में खुशी के आंसू थे। बहुत से कारकुनों के लिए यह
Speaker A
सिर्फ एक सियासी रहनुमा की वापसी नहीं थी बल्कि बरसों के इंतजार का इख्तताम था। एयरपोर्ट के अंदर सख्त सिक्योरिटी मौजूद थी। बुल्क [संगीत] प्रूफ गाड़ियां तैयार खड़ी थीं। दर्जनों अहलकार मुसलसल अतराफ का जायजा ले रहे थे। लेकिन [संगीत] एयरपोर्ट
Speaker A
की हुदूद खत्म होते ही एक मुख्तलिफ मंजर शुरू हो गया। सफेद रंग का खुसूसी बुल प्रूफ ट्रक आहिस्ता-आहिस्ता शहर की सड़कों पर आगे बढ़ने लगा। ट्रक के ऊपर बनाया गया महफूज़ प्लेटफार्म [संगीत] जहां बेनजीर भुट्टो खड़ी थी। वो बार-बार हाथ हिलाकर
Speaker A
कारकुनों के नारों का जवाब दे रही थी। कभी दाएं तरफ, कभी बाएं तरफ। हर चंद लम्हों बाद वो मुस्कुराते हुए हुजूम का शुक्रिया अदा करती। [संगीत] लेकिन इसी दौरान कैमरों की नजरों से दूर कुछ और भी हो रहा था। शहर
Speaker A
के मुख्तलिफ हिस्सों में सिक्योरिटी इदारे मुसलसल एक दूसरे से राबते में थे। हर गैर मामूली हरकत पर नजर रखी जा रही थी क्योंकि पहले से मौजूद सिक्योरिटी खतशात ने इंतजामिया को गैर मामूली एहतियात पर मजबूर कर रखा था। जुलूस आहिस्ता-आहिस्ता आगे बढ़
Speaker A
रहा था। लेकिन एक मसला पैदा हो चुका था। हुजूम तवक्को से कहीं ज्यादा था। इतना ज्यादा कि गाड़ी [संगीत] कई-कई मिनट तकरीबन रुकी रहती। लोग हर तरफ से करीब आने की कोशिश कर रहे थे। हर शख्स सिर्फ एक
Speaker A
तस्वीर, एक सलाम या एक नजर चाहता था। वक्त गुजरता जा रहा था। सूरज आहिस्ता-आहिस्ता गुरूब होने लगा। शहर की रोशनियां जलना शुरू हो गईं। लेकिन जुलूस अभी भी अपनी मंजिल से बहुत दूर था। रात गहरी होती जा रही थी। कारसाज़ के इलाके की तरफ बढ़ते हुए
Speaker A
माहौल में एक अजीब सी बेचैनी महसूस होने लगी। किसी को मालूम नहीं था कि चंद लम्हों बाद यह खुशी का समंदर एक खौफनाक मंजर में बदलने वाला है और फिर अचानक एक जोरदार धमाका हुआ। लोग संभल भी ना पाए थे कि फ़ौरन
Speaker A
दूसरा धमाका गूंज उठा। चंद लम्हे पहले जो सड़क नारों से गूंज रही थी, अब वहां हर तरफ चीखें सुनाई दे रही थीं। [संगीत] धुआं आसमान की तरफ बुलंद हो रहा था। गाड़ियां रुक चुकी थीं। लोग जान बचाने के लिए हर सिम
Speaker A
भाग रहे थे। कई अफराद जमीन पर जख्मी पड़े थे। हर तरफ शदीद अफरातफरी थी। इब्तदाई इत्तलात [संगीत] के मुताबिक इस हमले में बड़ी तादाद में लोग जाबाहक और जख्मी हुए। लेकिन एक खबर ने सबको हैरान कर दिया। बेनजीर भुट्टो इस हमले में महफूज़ रहीं।
Speaker A
वो उस वक्त बुल्ट प्रूफ हिस्से के अंदर मौजूद थीं। हमले ने इस्तकबाल को मातम में बदल दिया था। पूरा मुल्क सक्ते में आ गया। एक सवाल हर जबान पर था। अगर इतनी सख्त सिक्योरिटी के बावजूद ऐसा हमला हो सकता है
Speaker A
तो क्या खतरा अभी खत्म हुआ है? शायद नहीं क्योंकि यह सिर्फ आगाज था और अगले चंद हफ्तों में ऐसे वाक्यात होने वाले थे जो बेनजीर भुट्टो को एक बार फिर रावलपिंडी [संगीत] के इसी शहर की तरफ ले जाएंगे जहां
Speaker A
तारीख उनका इंतजार कर रही थी। कारसाज़ हमले के बाद पूरा मुल्क सोग में डूब गया [संगीत] था। टेलीविजन चैनल्स मुसलसल एक ही मंजर दिखा रहे थे जली हुई गाड़ियां, तबाहशुदा सड़क और हर तरफ बिखरा हुआ मलबा। यह वाज़ हो चुका था कि खतरा हकीकी है और यह
Speaker A
भी कि आइंदा हर जलसा पहले से ज्यादा हसास होगा। इसी दौरान बेनजीर भुट्टो ने मुख्तलिफ मवाके पर अपनी सिक्योरिटी से मुतालिक खतशात का इज़हार [संगीत] किया और मुतालिका हुकाम को इजाफी हिफाजती इदामात की दरखास्त भी की। सियासी सरगर्मियां कुछ
Speaker A
दिनों के लिए सुस्त जरूर हुईं लेकिन रुकी नहीं। इंतखाबी मुहिम दोबारा शुरू हुई। एक शहर से दूसरा शहर, एक जलसे से अगला जलसा। बेनजीर भुट्टो मुसलसल आवाम के दरमियान मौजूद रहीं। उनका मौकफ वाजे था। वह इंतखाबी मुहिम अधूरी छोड़ने के लिए तैयार
Speaker A
नहीं थी। दिसंबर 2007 का आखिरी हफ्ता फज़ा पहले से ज्यादा कशीदा महसूस हो रही थी। पेशावर में जलसे के बाद वह इस्लामाबाद पहुंचे। अगली सुबह उनकी मुलाकात अफगानिस्तान के सदर हामिद करजई से हुई। मुख्तलिफ जराय के मुताबिक इस [संगीत]
Speaker A
मुलाकात में सिक्योरिटी खतशात पर भी गुफ्तगू हुई। बाद के बरसों में इस हवाले से मुख्तलिफ बयानात सामने आए जिनमें यह दावा भी शामिल था [संगीत] कि उन्हें एहतियात बरतने का मशवरा दिया गया था। ताम इन मुलाकातों की तमाम तफसीलात सरकारी तौर
Speaker A
पर मुकम्मल तौर पर वाज़ नहीं हो सकी। मुलाकात खत्म हुई। गाड़ी वापस रवाना हुई लेकिन इंतखाबी [संगीत] शेड्यूल तब्दील नहीं हुआ। इसी दिन अगला जलसा तय था। मकाम रावलपिंडी लियाकत पाक। यह सिर्फ एक सियासी जलसागाह नहीं थी। यह
Speaker A
पाकिस्तान की तारीख का एक ऐसा मकाम था जिसके साथ एक और बड़ा साहा पहले ही जुड़ा [संगीत] हुआ था। 1951 में पाकिस्तान के पहले वजीर एआम लियाकत अली [संगीत] खान इसी मकाम पर कातिलाना हमले में जान से हाथ धो
Speaker A
बैठे थे। इसी वजह से लियाकत बाग का नाम हमेशा तारीख के अहम अबबाब में शामिल रहा। 27 दिसंबर 2007 दोपहर रावलपिंडी की फज़ा सर्द थी। लेकिन शहर के मुख्तलिफ रास्तों पर गैर मामूली रश था। काफिले मुसलसल लियाकत बाग की तरफ बढ़ रहे थे। कुछ लोग
Speaker A
बसों में आए थे। कुछ मोटरसाइकिलों पर और बहुत से पैदल चलते हुए जलसागाह तक पहुंच रहे थे। जल्द ही बाग लोगों से भर गया। [संगीत] स्टेज के सामने इंसानों का समंदर दिखाई दे रहा था। हर तरफ पार्टी के परचम
Speaker A
थे, नारे थे और कैमरों की रोशनियां। दूसरी तरफ सिक्योरिटी अहलकार मुसलसल अपनी पोजीशनें संभाल रहे थे। दाखिली रास्तों पर चेकिंग जारी थी। बुल्ट प्रूफ [संगीत] गाड़ी भी तैयार खड़ी थी। मगर इतने बड़े आवामी इश्तमा में मुकम्मल सिक्योरिटी फरामहम करना एक मुश्किल चैलेंज था। शाम के
Speaker A
करी
Speaker A
था। तकरीर खत्म हुई। लोग अभी भी अपनी जगह खड़े थे। किसी को जल्दी नहीं थी। हर शख्स चाहता था [संगीत] कि वापसी से पहले एक आखिरी बार अपनी कायद को करीब से देख ले। [संगीत] शाम तकरीबन 5:00 बजे के बाद
Speaker A
बेनजीर भुट्टो स्टेज से नीचे उतरी। सिक्योरिटी अहलकार फौरी तौर पर उनके गिर्द जमा हो गए। वो सफेद लैंड क्रोज़र में बैठ गई। गाड़ी [संगीत] आहिस्ता-आहिस्ता मरकजी गेट की तरफ पड़ने लगी। गेट के बाहर हजारों लोग पहले ही जमा थे। हर तरफ मोबाइल फोन
Speaker A
फजा में बुलंद थे। लोग हाथ हिला रहे थे। कुछ गाड़ी के साथ-साथ दौड़ रहे थे। हर कोई एक आखिरी झलक महफूज करना चाहता था। गाड़ी चंद मीटर आगे बढ़ी। रफ्तार बहुत कम थी और फिर एक ऐसा फैसला हुआ जिसने आने वाले चंद
Speaker A
सेकंड हमेशा के लिए तारीख का हिस्सा बना दिए। बेनजीर भुट्टो ने सनरूफ से बाहर आकर कारकुनों को जवाब देने का फैसला किया। उन्हें शायद अंदाजा भी नहीं था कि हुजूम के अंदर कोई और भी उनका इंतजार कर रहा है।
Speaker A
शाम तकरीबन 5:14। सफेद लैनक्र क्रोज़र लियाकत बाग के मरकजी दरवाजे से चंद ही फासले पर थी। बेनजीर भुट्टो सनरूफ से बाहर आई। उन्होंने मुस्कुराते हुए दोनों तरफ खड़े कारकुनों की तरफ हाथ हिलाया। सफेद दुपट्टा सर्द हवा में लहरा रहा था। यह उनकी ज़िंदगी के आखिरी
Speaker A
आवामी लम्हात थे। चंद ही कदम के फासले पर खड़ा एक शख्स तेजी से आगे बढ़ा। अगले चंद सेकंड में फायरिंग की आवाजें सुनाई दी। उसके फ़ौरन बाद एक ताकतवर धमाका हुआ। हर तरफ धुआं फैल गया। लोग बदहवास होकर
Speaker A
मुख़्तलिफ सिमतों में भागने लगे। नारों की जगह चीखों ने ले ली। सड़क पर हर तरफ अफरातफरी थी। गाड़ी के शीशे टूट चुके थे। टायर मुतासिर हुए। सिक्योरिटी अहलकार फौरन गाड़ी के [संगीत] गिर्द जमा हुए। गाड़ी के अंदर मौजूद अफराद ने देखा कि बेनजीर
Speaker A
भुट्टो शदीद जख्मी हो चुकी थी। ड्राइवर ने एक लम्हा जाया किए बगैर गाड़ी का रुख रावलपिंडी जनरल अस्पताल की तरफ मोड़ दिया। रास्ता हुजूम से भरा हुआ था। सायरन बज रहे थे। गाड़ी ट्रैफिक के दरमियान रास्ता बनाती हुई आगे बढ़ [संगीत] रही थी।
Speaker A
अस्पताल में इमरजेंसी नाफिज कर दी गई। डॉक्टरों की टीम फरी तौर पर मुतहरिक हुई। हर मुमकिन कोशिश की गई। लेकिन शाम को बेनजीर भुट्टो के इंतकाल की तस्दीक [संगीत] कर दी गई। यह खबर चंद ही मिनटों में पूरे पाकिस्तान और फिर दुनिया भर में
Speaker A
फैल गई। मुल्क के मुख्तलिफ शहरों में शदीद रद्दे अमल सामने आया। बाजार बंद होने लगे। ट्रैफिक रुक गई। लोग टेलीविजन स्क्रीनों के सामने जमा हो गए। लेकिन सानहा सिर्फ यहीं खत्म नहीं हुआ। उसके बाद शुरू हुआ सवालों का एक ना खत्म होने वाला [संगीत]
Speaker A
सिलसिला। वाक्य के फ़ौरन बाद जाए वक़आ को साफ़ किए जाने के फैसले पर शदीद तनकीद [संगीत] हुई। क्योंकि नाकदीन के मुताबिक इससे मुमकिना फॉरेंसिक शवाहिद मुतासिर हो सकते थे। बाद में इस फैसले पर मुख्तलिफ़ तहकीकात और रिपोर्ट्स में भी सवालात उठाए
Speaker A
गए। फिर एक और बहस शुरू हुई। सरकारी हुकाम ने इब्तदाई बयानात में कहा कि मौत की वजह धमाके के असर से सर का गाड़ी के सनरूफ के हिस्से से टकराना थी। दूसरी जानिब मुताद सियासी रहनुमाओं, ऐनी शाहदीन और बाज़
Speaker A
मुबसरीन ने इस [संगीत] मौक़किफ़ से इख्तलाफ़ किया। इस वाक्य की तहकीकात में बादजा मुख्तलिफ़ इदारे शामिल [संगीत] हुए। जिनमें बर्तानवी तफ्तीशी माहरीन और बाद में अकवामे मुत्तहदा [संगीत] की तहकीकाती टीम भी शामिल थी। इन तहकीकात में हमले, सिक्योरिटी इंतजामात [संगीत]
Speaker A
और मुख्तलिफ फैसलों का जायजा लिया गया। ताम कई अहम सवाल ऐसे रहे जिन पर मुख्तलिफ आरा सामने आई और जिन पर आज भी मुकम्मल इत्तेफाक राय मौजूद नहीं। असल मंसूबासा कौन था? क्या तमाम जिम्मेदारों तक रसाई हो सकी? क्या इस साने को रोका जा सकता था? यह
Speaker A
ऐसे सवाल हैं जिन पर आज भी मुहकन, सहाफी, सियासतदान और तारीखदान बहस करते हैं। 28 दिसंबर 2007 सिंध का गरी खुदाबश हजारों सोगवार खामोशी के साथ जमा थे। बेनजीर भुट्टो को [संगीत] उनके वालिद जुल्फिकार अली भुट्टो के पहलू में सुपुरदे खाक कर
Speaker A
दिया गया। एक बाप खत्म हो चुका था। लेकिन उस बाप से जुड़े सवाल खत्म नहीं हुए। बरसों गुजर गए। हुकूमतें बदली, तहकीकात हुई, रिपोर्ट्स शाया हुई। लेकिन 27 दिसंबर 2007 [संगीत] की वह शाम आज भी पाकिस्तान की सियासी
Speaker A
तारीख के अहम तरीन और मुतनाजे वाक्यात में शुमार होती है। और शायद लियाकत बाग की सर्द हवाएं आज भी इसी सवाल का जवाब तलाश कर रही हैं।
Topics:बेनजीर भुट्टोरावलपिंडी हमलापाकिस्तान राजनीतिएनआरओपरवेज मुशर्रफसिक्योरिटी खतरेकराची स्वागतकारसाज़ हमलासियासी साजिश27 दिसंबर 2007











