9 अप्रैल 2022 की रात पाकिस्तान की सियासी इतिहास की सबसे अहम रात थी, जब इमरान खान की सरकार को तहरीक अदम एतमाद के जरिए चुनौती मिली।
Key Takeaways
- तहरीक अदम एतमाद ने पाकिस्तान की सियासत में गहरा संकट पैदा किया।
- डिप्टी स्पीकर की रूलिंग ने राजनीतिक गतिरोध को बढ़ावा दिया।
- इमरान खान ने असेंबली भंग कराकर नए चुनाव की राह चुनी।
- सुप्रीम कोर्ट की भूमिका इस संवैधानिक विवाद में निर्णायक थी।
- सामान्य जनता ने राजनीतिक प्रक्रियाओं में गहरी दिलचस्पी दिखाई।
What the video covers
- 9 अप्रैल 2022 की रात पाकिस्तान की सियासत में एक निर्णायक मोड़ थी, जब वज़ीर एआज़म इमरान खान का राजनीतिक भविष्य मतों के नतीजों पर टिका था।
- तहरीक अदम एतमाद (नो कॉन्फिडेंस मोशन) पेश की गई और इसके इर्द-गिर्द सियासी जंग तेज हो गई।
- हुकूमत और हिस्स इख्तलाफ दोनों ही अपने-अपने नंबर्स का दावा कर रहे थे और राजनीतिक माहौल बेहद गर्म था।
- डिप्टी स्पीकर कासिम सूरी ने तहरीक अदम एतमाद को एक बाहरी दखल के रूप में खारिज कर दिया, जिससे राजनीतिक संकट गहरा गया।
- इमरान खान ने कौमी असेंबली को भंग करने की सलाह दी, जिसे राष्ट्रपति ने मान लिया और असेंबली तहलील कर दी गई।
- सियासी विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां इस मामले की सुनवाई हुई और निर्णय का इंतजार था।
- सामान्य जनता भी इस राजनीतिक प्रक्रिया और तहरीक अदम एतमाद के महत्व को समझने लगी थी, जो पाकिस्तान की राजनीति में एक नया अध्याय था।
- इस घटना ने पाकिस्तान की सियासी दिशा को बदल दिया और आने वाले वर्षों तक इसके प्रभाव महसूस किए गए।
- इमरान खान का राजनीतिक किरदार इस घटना के बाद बदल गया, जहां उनका फोकस सरकार चलाने से ज्यादा राजनीतिक संदेश देने पर केंद्रित हो गया।
- यह पूरी घटना पाकिस्तान के लोकतांत्रिक और संवैधानिक ढांचे की परीक्षा थी।
Chapters
- 00:009 अप्रैल 2022 की रात और राजनीतिक माहौल
- 01:32सियासी कशीदगी और पार्टियों की रणनीतियाँ
- 03:08आम जनता की राजनीतिक समझ और तहरीक अदम एतमाद
- 04:41कौमी असेंबली में तहरीक अदम एतमाद पेश
- 06:17डिप्टी स्पीकर की रूलिंग और राजनीतिक प्रतिक्रिया
- 07:52असेंबली भंग और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
- 09:19सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और राजनीतिक परिणाम
- 10:58सियासी बदलाव और इमरान खान का नया राजनीतिक किरदार
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Speaker A
9 अप्रैल 2022 रात के 12:00 बजने में सिर्फ चंद मिनट बाकी थे। पाकिस्तान का वज़ीर एआज़म अपना ओहदा खो भी सकता था और बचा भी सकता था। इस्लामाबाद जाग रहा था। पार्लियामेंट हाउस की रोशनियां अभी तक जल रही थीं। करोड़ों पाकिस्तानी टेलीविजन
Speaker A
स्क्रीनों के सामने बैठे थे। कोई पलकें झपकना नहीं चाहता था। किसी को मालूम नहीं था कि अगले चंद घंटों में क्या होने वाला है। क्या इमरान खान अपनी हुकूमत बचा लेंगे? क्या तहरीक अदम एतमाद कामयाब हो जाएगी? [संगीत] या फिर आखिरी लम्हे में कोई
Speaker A
ऐसा फैसला सामने आएगा जो पूरी सियासी बसात ही बदल देगा। लेकिन शायद इस रात का सबसे बड़ा राज यह नहीं था कि क्या होने वाला है बल्कि सबसे बड़ा सवाल यह था कि आखिर पाकिस्तान एक ऐसी रात तक पहुंचा कैसे जहां
Speaker A
एक मुंतखब वज़ीर आजम का सियासी मुस्तकबिल सिर्फ चंद वोटों के फासले पर खड़ा था। और शायद आपको यह जानकर हैरत हो कि [संगीत] इस कहानी की शुरुआत 9 अप्रैल से सिर्फ चंद दिन पहले नहीं हुई थी। इसकी बुनियाद कई
Speaker A
हफ्ते पहले रखी जा चुकी थी। इख्तेदार के ऐवानों में एक खामोश जंग शुरू हो चुकी थी। [संगीत] सियासी मुलाकातें हो रही थीं। नंबर्स गिने जा रहे थे। हिकमते अमलियां बनाई जा रही थीं और पाकिस्तान की सियासी तारीख एक ऐसे मोड़ की तरफ बढ़ रही थी
Speaker A
जिसके असरात आज भी महसूस किए जा सकते हैं। लेकिन इस पूरी कहानी को समझने के लिए हमें वक्त के पहिये को चंद हफ्ते पीछे [संगीत] ले जाना होगा। साल 2022 पाकिस्तान को मुख्तलिफ मुआशी और सियासी चैलेंजेस का सामना था। हुकूमत और हिस्स इख्तलाफ के
Speaker A
दरमियान सियासी कशीदगी मुसलसल बढ़ रही थी। कौमी असेंबली के अंदर और बाहर सियासी सरगर्मियां मामूल से कहीं ज्यादा तेज हो चुकी थीं। दूसरी जानिब हिज्ब इख्तलाफ की जमातें अपने सियासी इख्तलाफात के बावजूद एक [संगीत] नुक्त पर मुत्तफिक दिखाई दे
Speaker A
रही थीं। और वो नुक्ता था इमरान खान की हुकूमत के खिलाफ पार्लिमानी रास्ता इख्तियार करना। लेकिन यहां एक अहम सवाल पैदा होता है। आखिर किसी मुंतखब वज़ीर एआम को ओदे से कैसे अलग किया जा सकता है? उसका जवाब पाकिस्तान के आईन में मौजूद है। आईने
Speaker A
ए पाकिस्तान का आर्टिकल 95 वज़ीर एआम के खिलाफ तहरीक अदम एतमाद पेश करने का तरीकाकार बयान करता है। अगर कौमी असेंबली की मतलूबा अक्सरियत वज़ीर आजम पर अपने एतमाद का इज़हार ना करें, तो वज़ीर-ए-आज़म अपने ओहदे पर बरकरार नहीं रह सकते। यह पाकिस्तान के
Speaker A
जमहूरी और पार्लिमानी निजाम का एक आईनी हिस्सा है। लेकिन अब असल सवाल यह था क्या हिस्स इख्तलाफ के पास मतलूबा नंबर्स [संगीत] मौजूद थे? यही वो सवाल था जो पूरे मुल्क में ज़रे बहस था। हुकूमत अपने नंबर्स मुकम्मल होने का दावा कर रही थी। हिस्स
Speaker A
[संगीत] इख्तलाफ अपनी कामयाबी के बारे में पुर एतमाद दिखाई दे रही थी और सबकी नजरें उन जमातों पर मरकूज़ थीं जिन्हें हम इत्तेहादी [संगीत] जमातें कहते हैं क्योंकि पार्लीमानी निजाम में बाज औकात सिर्फ चंद निशिस्तें भी हुकूमत के मुस्तकबिल का फैसला [संगीत] कर
Speaker A
देती हैं। इस्लामाबाद के सियासी राहदारियों में मुलाकातों का सिलसिला तेज हो चुका था। हर मुलाकात ब्रेकिंग न्यूज़ बन रही थी। हर रोज सिर्फ एक सवाल पूछा जा रहा था। आखिर हुकूमत के पास कितने नंबर्स हैं और हिस्स इख्तलाफ के पास कितने? लेकिन
Speaker A
शायद इस सियासी बोहरान का सबसे दिलचस्प [संगीत] पहलू अभी बाकी था। पाकिस्तान की तारीख में शायद पहली मर्तबा लाखों लोग सिर्फ सियासी जलसों में दिलचस्पी नहीं ले रहे थे। बल्कि कौमी असेंबली के तरीकेकार को भी समझने की कोशिश कर रहे थे। तहरीक
Speaker A
अदम एतमाद क्या होती है? उसके लिए कितने वोट दरकार होते हैं? अगर यह कामयाब हो जाए तो क्या होता है? यह सवालात [संगीत] आम गुफ्तगू का हिस्सा बनते जा रहे थे और फिर सियासी मंजरनामे ने एक और अहम मोड़ लिया।
Speaker A
इमरान खान ने अपने आवामी खिताबात में यह मौकफ [संगीत] इख्तियार किया कि उनकी हुकूमत को हटाने के लिए बैरूनी मुदाखलत की कोशिश की जा रही है। [संगीत] दूसरी जानिब हिजब इख्तलाफ ने इन इल्ज़ामात को मुस्तरद करते हुए उसे मुकम्मल तौर पर एक आईनी और
Speaker A
पार्लिमानी अमल करार दिया। बाद में इस मामले पर मुख्तलिफ मुख्तलिफ कानूनी और सियासी मवाहिज़ भी सामने [संगीत] आए। ताम इस मौजू पर मुख्तलिफ फरीकान के मौक़फ़ एक दूसरे से मुख्तलिफ रहे। इसीलिए उन्हें उन्हीं के सियासी मौक़फ़ के तौर पर समझना
Speaker A
ज़रूरी है। इधर इस्लामाबाद की सियासी फज़ा पहले से कहीं [संगीत] ज्यादा गर्म होती जा रही थी। मार्च 2022 अपने इख्तताम की तरफ बढ़ रहा था और अब ऐसा महसूस होने लगा था कि पाकिस्तान की सियासत एक ऐसे मकाम के
Speaker A
करीब पहुंच चुकी है जहां से वापसी [संगीत] शायद मुमकिन नहीं होगी। यह सिर्फ हुकूमत और हिस्स इख्तलाफ की सियासी जंग नहीं रही थी। यह हुकूमत की बका और इख्तेदार की तब्दीली के दरमियान एक फैसला कुन मौरका बन चुका था। फिर वह दिन आ गया। पाकिस्तान की
Speaker A
कौमी असेंबली में एक दस्तावेज जमा करवाई गई। बजाहिर यह सिर्फ चंद सफ़हात थे, लेकिन हकीकत में यही सफ़ाद आने वाले [संगीत] सियासी तूफान का ऐलान थे। इस दस्तावेज़ का नाम था तहरीक अदम एतमाद। अब सवाल यह नहीं था कि सियासी बोहरान पैदा होगा या नहीं?
Speaker A
बल्कि सवाल यह था कि इस बोहरान का इख्तताम कहां होगा? क्या इमरान खान अपनी हुकूमत बचा लेंगे? क्या हिस्ब इख्तलाफ मतलूबा अक्सरियत हासिल कर लेगी? या फिर पाकिस्तान की सियासत एक ऐसा मोड़ लेने वाली थी जिसका किसी ने तसवुर भी नहीं किया था। लेकिन
Speaker A
शायद किसी को अंदाजा नहीं था कि सिर्फ चंद दिन बाद कौमी असेंबली के अंदर होने वाला एक फैसला पूरे मुल्क को हैरान कर देगा। एक रूलिंग सुनाई जाएगी। एक असेंबली तहलील होगी और फिर पूरे पाकिस्तान की नजरें सिर्फ एक इमारत पर मरकूज़ हो जाएंगी।
Speaker A
सुप्रीम कोर्ट ऑफ पाकिस्तान। लेकिन आखिर 3 अप्रैल 2022 को ऐसा क्या हुआ था जिसने पाकिस्तान को एक गैर मामूली आईनी और सियासी बोहरान में दाखिल कर दिया। 3 अप्रैल 2022 यह सिर्फ एक तारीख नहीं थी। यह वह दिन था जिसने पाकिस्तान की सियासी
Speaker A
तारीख का रुख बदल देना था। इस्लामाबाद में सूरज मामूल के मुताबिक तुलू हुआ था। लेकिन सियासी माहौल मामूल के मुताबिक नहीं था। पूरे मुल्क की नजरें सिर्फ एक इमारत पर मरकूस थीं। कौमी असेंबली आज सवाल सिर्फ एक था। क्या वज़ीर एआम इमरान खान के खिलाफ
Speaker A
तहरीक अदम एतमाद पर वोटिंग हो जाएगी या हुकूमत आखिरी लम्हे तक कोई ऐसा सियासी रास्ता निकालने में कामयाब हो जाएगी जिससे इख्तेदार बरकरार रखा जा सके? कौमी असेंबली का इजलास शुरू हुआ। हुकूमत और हिस्ब इख्तलाफ दोनों को मालूम था कि अब हर
Speaker A
गुजरता लम्हा गैर मामूली अहमियत इख्तियार कर चुका है। पार्लियामेंट हाउस के अंदर होने वाली हर पेशरफ्त ब्रेकिंग न्यूज़ बन रही थी। करोड़ों पाकिस्तानी बराएरा नशरियात देख रहे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले चंद [संगीत] मिनट पाकिस्तान की
Speaker A
आईनी और सियासी तारीख के सबसे ज्यादा जेरे बहस आने वाले लम्हात में शामिल होने वाले हैं। और फिर वो लम्हा आ गया। तहरीक अदम एतमाद पर वोटिंग की कारवाई आगे बढ़ने [संगीत] से पहले डिप्टी स्पीकर कौमी असेंबली कासिम सूरी ने अपनी रूलिंग सुनाई।
Speaker A
उनका मौक़फ़ यह था [संगीत] कि तहरीक अदम एतमाद एक मुबईना बैरूनी मुदाखलत के तनाजुर में आईन के आर्टिकल पांच से मुतसादिम है जो रियासत [संगीत] के साथ वफादारी से मुतालिक है। इसी बुनियाद पर उन्होंने तहरीक अदम एतमाद को मुस्तरद करार [संगीत]
Speaker A
दे दिया। सिर्फ चंद सेकंड के लिए पूरा मुल्क जैसे खामोश हो गया। यह वह मंजर था जिसकी शायद किसी ने पेशगोई नहीं की थी। एक तरफ हुकूमती बेंचों पर खुशी का इज़हार किया जा रहा था। जबकि [संगीत] दूसरी जानिब
Speaker A
हिज्ब इख्तलाफ इस फैसले को आईन और पार्लीमानी रिवायत के मनाफी करार दे रही थी। चंद ही लम्हों में पाकिस्तान एक नए सियासी और आईनी बोहरान में दाखिल हो चुका था। लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई थी। कौमी असेंबली की कारवाई खत्म होने के कुछ
Speaker A
ही देर बाद उस वक्त के वज़ीर आजम इमरान खान ने कौम से खिताब किया। उन्होंने ऐलान किया [संगीत] कि वह नए इंतखाबादत की तरफ जाना चाहते हैं और इस मकसद के लिए सदर मुमिकत को कौमी असेंबली तहलील करने की एडवाइस
Speaker A
[संगीत] भेज दी गई है। उस वक्त के सदर मुमिकत डॉक्टर आरिफ अलवी ने वज़ीर आजम की एडवाइस पर कौमी असेंबली तहलील कर दी। सिर्फ चंद घंटों के अंदर पाकिस्तान की [संगीत] सियासत मुकम्मल तौर पर तब्दील हो चुकी थी। तहरीक अदम एतमाद मुस्तरद हो चुकी
Speaker A
थी। कौमी असेंबली तहलील हो चुकी थी और मुल्क नए इंतखाबादत की बहस में दाखिल हो चुका था। लेकिन असल [संगीत] सियासी और आईनी जंग अब शुरू होने वाली थी। हुकूमत का मौक़फ़ यह था कि नए इंतखाबादत ही सियासी
Speaker A
बोहरान का बेहतरीन हल है। दूसरी जानिब हिज्ब इख्तलाफ का मौक़िफ था [संगीत] कि तहरीक अदम एतमाद को वोटिंग के बगैर मुस्तरद नहीं किया जा सकता था और कौमी असेंबली की तहलील भी इसी वजह से आईन के मुताबिक नहीं थी।
Speaker A
पाकिस्तान अब दो मुख्तलिफ सियासी मौक़फ़ [संगीत] के दरमियान खड़ा था। एक तरफ नए इंतखाबादत का मुतालबा था और दूसरी तरफ आईनी अमल को वहीं से बहाल करने का मुतालबा किया जा रहा था जहां उसे रोका गया था। अब
Speaker A
यह मामला पार्लियामेंट के फ्लोर से निकल कर पाकिस्तान की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच चुका था। सुप्रीम कोर्ट ऑफ पाकिस्तान। इस्लामाबाद की सियासी फज़ा पहले से कहीं ज्यादा कशीदा हो चुकी थी। कोई यकीन से नहीं कह सकता था कि अगले चंद दिनों
Speaker A
[संगीत] में क्या होने वाला है। क्या मुल्क नए इंतखाबादत की तरफ जाएगा। क्या कौमी असेंबली दोबारा बहाल [संगीत] होगी या फिर कोई तीसरा रास्ता सामने आएगा। लेकिन एक बात तय थी पाकिस्तान अपनी आईनी तारीख के एक ऐसे बाब में दाखिल हो चुका था ज
Speaker A
फैसला अब सियासी जलसों में नहीं बल्कि आइन की तशरीह के जरिए होना था। चंद घंटों के अंदर यह मामला सुप्रीम कोर्ट ऑफ पाकिस्तान के सामने पहुंच गया। मुल्क की आला तरीन अदालत ने इस मामले की समात का आगाज किया।
Speaker A
अब बहस सियासी नारों पर नहीं बल्कि आईन के अल्फाज पर होने वाली थी। एक-एक आईनी शक पड़ी जा रही थी। एक-एक कानूनी नुक्त पर तफसीली दलाइल दिए जा रहे थे। पूरे मुल्क की [संगीत] नजरें इस्लामाबाद की उस इमारत
Speaker A
पर मरकूस थी। जहां चंद जुमले पाकिस्तान की सियासी तारीख का रुख मुतयन करने वाले थे। सुप्रीम कोर्ट के पांच रुकनी बेंच के सामने बुनियादी सवालात यह थे। क्या डिप्टी स्पीकर कौमी असेंबली तहरीक अदम एतमाद को इस [संगीत] अंदाज में मुस्तरद करने का
Speaker A
इख्तियार रखते थे? क्या वजीर आजम की जानिब से कौमी असेंबली तहलील करने की एडवाइस आईन के मुताबिक थी? और क्या कौमी असेंबली अपनी आईनी हैसियत बरकरार रखती है? यह सिर्फ एक हुकूमत का मुकदमा नहीं था। यह पाकिस्तान के पार्लिमानी निजाम, आईनी तशरीह और
Speaker A
जमहूरी अमल के बारे में एक इंतहाई अहम मुकदमा बन चुका था। अदालत के कमरा-ए समात में होने वाली कारवाई को पूरा मुल्क गैर मामूली दिलचस्पी से देख रहा था। टेलीविजन स्क्रीनों पर हर रोज यही खबरें नशर हो रही
Speaker A
थी। सियासी तजिया निगार मुख्तलिफ इमकानात पर गुफ्तगू कर रहे थे। किसी के नजदीक मुल्क नए इंतखाबादत की तरफ जा रहा था। जबकि कोई कौमी असेंबली की बहाली की पेशगोई कर रहा था। 5 दिन तक दलाइल जारी रहे। हुकूमत और दरख्वास्त गुजारों के वकला ने
Speaker A
अपने-अपने मौकिफ अदालत के सामने पेश किए। आईने ए पाकिस्तान के मुख्तलिफ आर्टिकल ज़रे बहस आए, सियासी और कानूनी हलकों में मुसलसल यही सवाल [संगीत] गर्दिश कर रहा था कि आखिर सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या होगा? वक्त मुसलसल गुजर रहा था। पाकिस्तान
Speaker A
इंतजार कर रहा था और फिर पूरा मुल्क एक तारीख का इंतजार करने लगा। 7 अप्रैल 2022.
Speaker A
वो दिन जिसका इंतजार करोड़ों पाकिस्तानी कर रहे थे। क्या कौमी असेंबली बहाल होगी? क्या तहरीक अदम एतमाद दोबारा जिंदा हो जाएगी? या फिर मुल्क नए इंतखाबादत की तरफ बड़ जाएगा। शायद किसी के पास इन सवालों का यकीनी जवाब नहीं था। लेकिन एक बात जरूर तय
Speaker A
थी। सुप्रीम कोर्ट के चंद जुमले सिर्फ एक हुकूमत का मुस्तकबिल तय नहीं करने वाले थे। बल्कि वह पाकिस्तान के आईनी और पार्लीमानी निजाम के बारे में एक अहम मिसाल भी कायम करने वाले थे। और जब 7 अप्रैल की सुबह तुलू हुई तो पूरे
Speaker A
पाकिस्तान की नजरें सिर्फ एक इमारत पर मरकूस थी सुप्रीम कोर्ट ऑफ पाकिस्तान। क्योंकि चंद लम्हों बाद सुनाया जाने वाला फैसला सिर्फ एक अदालती फैसला नहीं होने वाला था। बल्कि वो पाकिस्तान की सियासी तारीख के अहम तरीन फैसलों में से एक बनने
Speaker A
वाला था। लेकिन शायद इस कहानी का सबसे सनसनीखेज हिस्सा अभी बाकी [संगीत] था। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सिर्फ 48 घंटे बाकी रह जाने वाले थे। 48 घंटे जो एक वज़र आजम के सियासी मुस्तकबिल [संगीत] का फैसला करने वाले थे और फिर आने
Speaker A
वाली थी पाकिस्तान की सियासी तारीख की तवील [संगीत] तरीन रात 9 अप्रैल 2022 की रात वो रात जिसमें करोड़ों पाकिस्तानी सुबह होने तक जागते रहे। सुप्रीम कोर्ट ऑफ पाकिस्तान ने अपने मुत्तफ़ाका मुख्तसिर फैसले में करार दिया कि 3 अप्रैल को
Speaker A
डिप्टी स्पीकर कौमी असेंबली की रूलिंग आइन और कानून के मनाफी थी और इसकी कोई कानूनी हैसियत नहीं थी। अदालत ने यह भी करार दिया कि [संगीत] वजीर आजम की एडवाइस पर कौमी असेंबली की दहलील आइन के मुताबिक नहीं थी
Speaker A
और कौमी असेंबली अपनी आईनी हैसियत में बरकरार रहेगी। अदालत ने कौमी असेंबली को बहाल करते हुए हुकुम दिया कि तहरीक अदम एतमाद पर आइन के मुताबिक वोटिंग करवाई जाए। इस मकसद [संगीत] के लिए 9 अप्रैल 2022 को कौमी असेंबली का इजलास बुलाने की
Speaker A
हिदायत भी जारी की गई। यह एक तारीखी फैसला था। मुल्क भर में इस फैसले पर मुख्तलिफ सियासी रद्दे [संगीत] अमल सामने आया। हुकूमत के नाकदीन ने उसे आईन की बालादस्ती का फैसला करार दिया। जबकि इमरान खान और उनकी जमात ने इस फैसले पर अपने तहफुजात और
Speaker A
कानूनी व सियासी मौकिफ का इज़हार किया। लेकिन एक हकीकत अब बिल्कुल वाज़ हो चुकी थी। तहरीक अदम एतमाद खत्म नहीं हुई थी। बल्कि अब वो अपने आखिरी और फैसला कुंदन मरहले में दाखिल हो चुकी थी। और अब पाकिस्तान में सिर्फ एक तारीख ज़रे बहस थी।
Speaker A
9 अप्रैल [संगीत] 2022। सिर्फ 48 घंटे बाकी थे। सिर्फ दो दिन। दो दिन जो [संगीत] एक वज़र आजम के सियासी मुस्तकबिल का फैसला करने वाले थे। इस्लामाबाद में सियासी सरगर्मियां अपने उरूज पर पहुंच चुकी थी। हुकूमत और हिस्स
Speaker A
इख्तलाफ [संगीत] दोनों अपनी-अपनी हिकमते अमली को आखिरी शक्ल दे रहे थे। टेलीविजन स्क्रीनों पर सिर्फ एक सवाल बार-बार दोहराया जा रहा था। आखिर हुकूमत के पास कितने नंबर्स हैं और हिस्ब इख्तलाफ [संगीत] के पास कितने वक्त मुसलसल गुजर
Speaker A
रहा था? फिर 9 अप्रैल की सुबह तुलू हुई। यह सिर्फ एक आम दिन नहीं था। यह पाकिस्तान की पार्लिमानी [संगीत] तारीख के अहम तरीन दिनों में से एक था। इस्लामाबाद की फजा मामूल से मुख्तलिफ महसूस हो रही थी।
Speaker A
पार्लियामेंट हाउस के बाहर गैर मामूली सरगर्मियां जारी थी। न्यूज़ चैनल्स अपनी बराहेरा नजरियात जारी रखे हुए थे। सोशल मीडिया पर सिर्फ एक मौजू ज़ेररे बहस था। आज क्या होने [संगीत] वाला है? आज फैसला होना था। एक तरफ इमरान खान की हुकूमत [संगीत]
Speaker A
थी जो तकरीबन 4 बरस तक इख्तदार में रहने के बाद अपनी सियासी बका की जंग लड़ रही थी। दूसरी जानिब हिस्ब इख्तलाफ थी जो उस तहरीक अदम एतमाद को कामयाबी से हमकिनार करने के लिए अपनी पार्लीमानी [संगीत] अक्सरियत पर पुर एतमाद दिखाई दे रही थी।
Speaker A
लेकिन शायद किसी को अंदाजा नहीं था कि यह [संगीत] दिन इतना तवील हो जाएगा कि रात गुजरने के बावजूद इसका इख्तताम नहीं होगा। कौमी असेंबली का इजलास शुरू हुआ। पूरा मुल्क लम्हा बलम्हा पेशरफ्त का इंतजार कर रहा [संगीत] था लेकिन घंटे गुजरते जा रहे
Speaker A
थे और तहरीक अदम एतमाद पर वोटिंग नहीं हो रही थी। सुबह दोपहर में तब्दील हो गई। दोपहर शाम में बदल गई और फिर शाम ने रात का रूप धार लिया मगर फैसला अभी तक नहीं आया था। टेलीविजन स्क्रीनों पर सिर्फ एक
Speaker A
सवाल दिखाई दे रहा था। आखिर वोटिंग कब होगी? पाकिस्तान जाग रहा था। इस्लामाबाद से कराची तक, लाहौर से पेशावर तक, कोएटा से गिलगित बल्तिस्तान तक लाखों लोग कौमी असेंबली की कारवाई को गैर मामूली दिलचस्पी से देख रहे थे। शायद पाकिस्तान की तारीख
Speaker A
में पहली मर्तबा इतनी बड़ी तादाद में लोग पार्लीमानी कारवाई को इतनी तवज्जो से देख रहे थे। रात के [संगीत] 10:00 बज चुके थे। फिर 11:00 बज गए और फिर घड़ी की सुइयां आधी रात के करीब पहुंचने लगी। सियासी
Speaker A
तजिया निगार मुख्तलिफ इमकानात पर गुफ्तगू कर रहे थे। सोशल मीडिया पर कयास आराइयां जारी थी। कोई हुकूमत के बच जाने की पेशगोई कर रहा था और कोई इख्तेदार की मुंतकली को नागजीर करार दे रहा था। लेकिन फिर एक और
Speaker A
गैर मुतवके पेशरफ्त सामने आई। उस वक्त के स्पीकर कौमी असेंबली असद कैसर ने अपने खिताब में कहा कि वह एवान [संगीत] की कारवाई को खुश असलूबी से चलाने की कोशिश करते रहे हैं और मौजूदा सियासी हालात में वह अपने ओहदे [संगीत] से मुस्ताफी होने का
Speaker A
फैसला करते हैं। यह एक ऐसा लम्हा था जिसने पूरे मुल्क की तवज्जो अपनी जानिब मजूल कर ली। चंद लम्हों बाद इजलास की सदारत पैनल ऑफ चेयरमैन के रुकुन अयास सादिक ने संभाल ली। अब सबको महसूस होने लगा था कि फैसला
Speaker A
बहुत करीब आ चुका है। घड़ी की सुइयां मुसलसल आगे बढ़ रही थी। [संगीत] आधी रात करीब आ रही थी। लाखों लोग अभी तक जाग रहे थे और फिर वो लम्हा आ गया जिसका इंतजार पूरा पाकिस्तान कई हफ्तों से कर रहा था।
Speaker A
तहरीक अदम एतमाद पर वोटिंग का अमल मुकम्मल किया गया। कौमी असेंबली के सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक इमरान खान के खिलाफ तहरीक [संगीत] अदम एतमाद के हक में 174 वोट डाले गए। जो मतलूबा सादा अक्सरियत से ज्यादा थे और इसी के साथ एक नई तारीख रकम हो गई।
Speaker A
इमरान खान पाकिस्तान की तारीख के पहले वजीर एआज़म बन गए जो तहरीक अदम एतमाद के नतीजे में अपने ओहदे से अलग हुए। कौमी असेंबली के अंदर तारीख लिखी जा चुकी थी। [संगीत] यह सिर्फ एक सियासी तब्दीली नहीं थी बल्कि पाकिस्तान के पार्लिमानी निजाम
Speaker A
की तारीख का [संगीत] एक गैर मामूली वाकया था। एक मुंतखब वजीर आजम आइन के तहत पार्लीमानी अमल के जरिए अपने ओहदे से अलग हुए थे। लेकिन इस लम्हे के जज्बात मुख्तलिफ थे। किसी के लिए यह आईन और पार्लिमान की फतह थी। किसी के लिए यह
Speaker A
जमहूरी अमल की कामयाबी थी और किसी के लिए यह एक ऐसी हुकूमत का खात्मा था जिससे करोड़ों लोग उम्मीदें वाबस्ता किए हुए थे। इसीलिए 9 अप्रैल 2022 को आज भी मुख्तलिफ सियासी नुक्ता नजर से देखा जाता है। लेकिन
Speaker A
एक हकीकत ऐसी है जिस पर इख्तलाफ नहीं किया जा सकता। वो यह कि इस रात पाकिस्तान की सियासी [संगीत] तारीख का एक नया बाप लिखा जा चुका था। जब पार्लियामेंट हाउस की रोशनियां मध्यम होना शुरू हुई तो एक
Speaker A
सियासी बाब इख्तताम पजीर हो चुका था। लेकिन शायद इस कहानी का सबसे अहम सवाल अभी बाकी था। क्या यह इमरान खान की सियासी कहानी का इख्तताम था या फिर हकीकत इसके बिल्कुल बरक्स थी। [संगीत] क्योंकि इख्तदार से अलदगी के सिर्फ चंद दिन बाद
Speaker A
पाकिस्तान की सियासत एक [संगीत] ऐसे नए मरहले में दाखिल होने वाली थी जिसके असरात आने वाले बरसों तक महसूस किए जाने थे और शायद किसी ने यह तसवुर भी नहीं किया था कि 9 अप्रैल 2022 सिर्फ एक इख्तताम नहीं
Speaker A
बल्कि एक नए सियासी बाप का आगाज साबित होगा। लेकिन इस रात के बाद पाकिस्तान में ऐसा क्या कुछ बदला यह जानेंगे हम इस कहानी के आखिरी और सबसे अहम हिस्से में जब 9 अप्रैल 2022 की रात इख्तताम पजीर हुई तो
Speaker A
सिर्फ एक हुकूमत खत्म नहीं हुई थी बल्कि पाकिस्तान की सियासत एक [संगीत] नए दौर में दाखिल हो चुकी थी। पार्लियामेंट हाउस के दरवाजे बंद हो रहे थे। [संगीत] लेकिन मुल्क भर में सियासी बहस का एक नया बाप खुल चुका था। करोड़ों पाकिस्तानी सिर्फ एक
Speaker A
सवाल का जवाब तलाश कर रहे थे। आखिर चंद हफ्तों में ऐसा क्या हुआ कि एक मुंतखब वजीर आजम अपने ओदे [संगीत] से अलग हो गया और उससे भी बड़ा सवाल यह था कि क्या यह इमरान खान की सियासी कहानी का इख्तताम था?
Speaker A
शायद इस सवाल का जवाब आने वाले चंद दिनों ने दे दिया था। 10 अप्रैल 2022 की सुबह पाकिस्तान एक नए सियासी मंजरनामे के साथ बेदार हुआ। कौमी असेंबली में नई हुकूमत की तशकील का अमल शुरू हो चुका था। दूसरी
Speaker A
जानिब इमरान खान वज़ारत उज़्मा के मंसब से अलग हो चुके थे। लेकिन वह पाकिस्तानी सियासत के मरकज से अलग नहीं [संगीत] हुए थे। बल्कि हकीकत यह थी कि अब उनकी सियासत एक नए मरहले में दाखिल हो रही थी। अगर
Speaker A
2018 का इमरान खान एक उम्मीदवार था तो 2022 के बाद का इमरान खान एक मुख्तलिफ सियासी किरदार [संगीत] के साथ आवाम के सामने आ रहा था। उनके खिताबात का मेहवर अब हुकूमत चलाने से ज्यादा अपने सियासी मौकफ को आवाम [संगीत] तक पहुंचाना था। वह
Speaker A
मुसलसल यह मौकफ़ इख्तियार कर रहे थे कि उनकी हुकूमत को एक गैर मामूली सियासी अमल के जरिए खत्म किया गया। जबकि उनके सियासी मुखालीफ़िन इसे मुकम्मल तौर पर आईनी और जमहूरी अमल का नतीजा करार दे रहे थे। [संगीत] पाकिस्तान की सियासत एक मर्तबा
Speaker A
फिर दो मुख्तलिफ सियासी बयानियों के दरमियान तकसीम होती हुई महसूस हो रही थी। लेकिन शायद इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू अभी सामने आना बाकी था। बहुत से सियासी तजिया निगार यह समझ रहे थे कि इख्तदार से अलदगी [संगीत] के बाद इमरान
Speaker A
खान की सियासी मकबूलियत में कमी वाक होगी। पाकिस्तान की सियासी तारीख में कई मर्तबा ऐसा हो चुका था कि इख्तेदार से अलग होने के बाद सियासी जमातें आवामी सतह पर अपनी साबका कुत बरकरार ना रख सकें। मगर 2022 का
Speaker A
पाकिस्तान शायद मुख्तलिफ था। इख्तदार से अलदगी के [संगीत] चंद ही दिन बाद इमरान खान ने मुल्क के मुख्तलिफ शहरों में आवामी इश्तमात से खिताब करना शुरू कर दिया। इन इ्तमात में आवाम की बड़ी तादाद ने शिरकत की। इनके हामी इसे आवामी हिमायत का इजहार
Speaker A
करार दे रहे थे। जबकि सियासी मुखालिफन इसकी मुख्तलिफ सियासी तशरीहात पेश कर रहे थे। एक बात अलबत्ता सब तस्लीम कर रहे थे। इमरान खान अब भी पाकिस्तान की सियासत के अहम तरीन किरदारों में से एक थे और फिर
Speaker A
पाकिस्तानी सियासत में एक ऐसा लफ्ज गैर मामूली अहमियत इख्तियार करने लगा जिसे आने वाले कई महीनों तक मुसलसल सुना जाना था। अब ललज वक्त इंतखाबादत यह मुतालबा सिर्फ एक सियासी नारा नहीं रहा था बल्कि एक बड़े सियासी मौकफ की शक्ल इख्तियार कर चुका था।
Speaker A
दूसरी जानिब नई हुकूमत अपने आईनी मैंडेट और हुकूमती जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ रही थी। पाकिस्तान की सियासत अब सिर्फ हुकूमत और हिस्स इख्तलाफ के दरमियान एक मामूल की सियासी कशमकश नहीं रही थी। यह एक ऐसे सियासी दौर में दाखिल हो चुकी थी
Speaker A
जिसके असरात आने वाले [संगीत] बरसों तक महसूस किए जाने थे। शायद यही वजह है कि 9 अप्रैल 2022 की रात को सिर्फ एक तारीख के तौर पर याद नहीं किया जाता बल्कि उसे पाकिस्तान की मुआसिर सियासी तारीख के
Speaker A
[संगीत] एक अहम मोड़ के तौर पर देखा जाता है। उस रात एक वज़र आजम अपने ओहदे से अलग हुआ। एक नई हुकूमत वजूद में आई। एक नया सियासी बाप शुरू हुआ और करोड़ों पाकिस्तानी [संगीत] एक नई सियासी हकीकत के
Speaker A
साथ आगे बढ़ रहे थे। लेकिन अगर इस पूरी कहानी से एक सवाल आज भी जिंदा है तो वह यह नहीं कि हुकूमत कैसे खत्म हुई बल्कि असल सवाल यह है कि इस रात ने पाकिस्तान को कितना बदल दिया? क्या यह सिर्फ इख्तदार की
Speaker A
तब्दीली थी या फिर यह पाकिस्तान की सियासत के एक नए बाप की इब्तदा थी। शायद इस सवाल का जवाब हमें पाकिस्तान के बदलते हुए सियासी मंजरनामे में दिखाई देता है। 2022 के बाद पाकिस्तान में सियासी शूर और सियासी वाबस्तगी के [संगीत] इजहार की
Speaker A
शिद्दत पहले से कहीं ज्यादा नुमाया दिखाई दी। लाखों लोग जो कभी सियासी इस्तिलाहात से वाकिफ नहीं थे वो आईन कौमी असेंबली तहरीक अदम एतमाद और पार्लिमानी तरीकेकार पर गुफ्तगू करते नजर आए। पाकिस्तानी [संगीत] सियासत सिर्फ सियासी रहनुमाओं तक महदूद
Speaker A
नहीं रही थी बल्कि आम शहरी भी इस बहस का हिस्सा बन चुके थे। यह इस पूरी कहानी का एक अहम पहलू था। लेकिन इस रात ने एक और हकीकत भी हमारे सामने रखी। जम्हूरियत सिर्फ इंतखाबात का नाम नहीं होती बल्कि यह
Speaker A
एक मुसलसल आईनी अमल का नाम है। पार्लिया, अदालतें, आईनी इदारे और आवाम यह सब मिलकर एक जमहूरी निजाम की बुनियाद बनते हैं। जब भी किसी सियासी बोहरान का सामना होता है तो इन इदारों का किरदार तारीख के सफा में
Speaker A
हमेशा के लिए महफूज़ हो जाता है। 9 अप्रैल 2022 की रात भी इसीलिए गैर मामूली थी। क्योंकि इस रात पाकिस्तान ने पार्लिमानी निजाम के एक ऐसे मरहले का मुशायदा किया [संगीत] जो इससे पहले कभी पेश नहीं आया था। एक मुंतखब वजीर आजम तहरीक अदम एतमाद
Speaker A
के नतीजे में अपने ओहदे से अलग हुए। यह एक तारीख हकीकत है और इसी हकीकत ने इस [संगीत] रात को पाकिस्तान की सियासी तारीख का मुस्तकिल हिस्सा बना दिया। लेकिन शायद इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है
Speaker A
कि तारीख कभी इख्तताम नहीं लिखती। वो हमेशा आगाज लिखती है। 9 अप्रैल 2022 को एक बाप बंद हुआ था। मगर इसी लम्हे कई नए अबवाब ने जन्म [संगीत] लिया था। एक नई हुकूमत का आगाज हुआ। एक नई सियासी
Speaker A
जद्दोजहद शुरू हुई। नए सियासी बयानिए सामने आए और पाकिस्तान की सियासत एक ऐसे सफर पर रवाना हुई जिसके असरात आज भी महसूस किए जा रहे हैं। शायद इसीलिए 9 अप्रैल 2022 की रात के बारे में लोगों की आराम
Speaker A
मुख्तलिफ हो सकती हैं। किसी के नजदीक यह आईनी अमल की कामयाबी थी। किसी के नजदीक [संगीत] एक सियासी नाइंसाफी और किसी के नजदीक पाकिस्तान की सियासत में एक नए बाप का आगाज। जमहूरी मुआशरों में ऐसे इख्तलाफात राय अपनी जगह मौजूद रहते हैं।
Speaker A
मगर एक हकीकत ऐसी है जिस पर इख्तलाफ करना मुश्किल है। वो यह कि इस रात ने पाकिस्तान को बदल [संगीत] दिया था। और शायद इसीलिए तारीख जब कभी 9 अप्रैल 2022 [संगीत] की तरफ पलट कर देखेगी तो वह सिर्फ यह नहीं
Speaker A
पूछेगी कि एक हुकूमत कैसे खत्म हुई? [संगीत] बल्कि वह यह सवाल भी पूछेगी कि इस एक रात ने पाकिस्तान की सियासत को कितना बदल दिया और शायद इस सवाल का मुकम्मल जवाब अभी तारीख ने लिखना बाकी है क्योंकि बाज
Speaker A
फैसलों की बाजगश्त चंद बरसों तक नहीं बल्कि नस्लों तक सुनाई देती है और 9 अप्रैल 2022 इन्हीं रातों में से एक रात थी। जब इस्लामाबाद की सड़कों पर खामोशी उतर रही थी तब पाकिस्तान की सियासी तारीख [संगीत] एक नए बाब में दाखिल हो रही थी।
Speaker A
पार्लियामेंट हाउस की इमारत वही थी। आईन के अल्फाज भी वही थे। जमहूरी निजाम भी अपनी जगह मौजूद था। लेकिन कुछ तो था जो हमेशा के लिए बदल चुका था। और शायद आने वाली नस्लें जब 9 अप्रैल 2022 के बारे में
Speaker A
पढ़ेंगी तो वह सिर्फ यह नहीं पूछेंगी कि इस रात क्या हुआ था। वह यह भी पूछेंगी कि इस रात के बाद पाकिस्तान क्या बन गया था?
Speaker A
क्योंकि बाज रातें खत्म नहीं होती। वह तारीख बन जाती हैं। और 9 अप्रैल 2022 उन्हीं रातों में से एक रात थी।
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