सिंगापुर की सफाई मॉडल से सीखें, जिसने स्लम सुधार, कड़े नियम और आधुनिक सीवरेज से शहर को विश्व का सबसे साफ बनाया।
Key Takeaways
- साफ-सफाई के लिए सरकारी प्रतिबद्धता और कड़े नियम जरूरी हैं।
- स्लम सुधार और बेहतर आवास से स्वास्थ्य समस्याएं कम होती हैं।
- प्रदूषण नियंत्रण और नदियों की सफाई से पर्यावरण सुधरता है।
- सामाजिक जागरूकता और दंड व्यवस्था से गंदगी फैलाने वालों पर नियंत्रण होता है।
- सिंगापुर मॉडल को भारतीय शहरों में लागू किया जा सकता है।
What the video covers
- 1950 तक सिंगापुर दुनिया के सबसे गंदे शहरों में से एक था, जहां स्लम और खराब सैनिटेशन था।
- ली कोन यू ने 1959 में प्रधानमंत्री बनकर क्लीन एंड ग्रीन सिंगापुर को प्राथमिकता दी।
- स्लमवासियों को पब्लिक हाउसिंग में स्थानांतरित किया गया जहां बेहतर सैनिटेशन था।
- ओपन नालियों की जगह अंडरग्राउंड सीवरेज नेटवर्क बनाया गया।
- गंदगी फैलाने वालों पर भारी जुर्माना और करेक्टिव वर्क ऑर्डर लागू किया गया।
- 1992 में चुइंगम्स पर प्रतिबंध लगाया गया क्योंकि उनकी सफाई में सरकार को भारी खर्च होता था।
- सिंगापुर रिवर को साफ करने के लिए 1977 में 10 साल की डेडलाइन रखी गई और भारी सफाई की गई।
- प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों और फार्मों को रीलोकेट या बंद किया गया।
- 10 साल में सिंगापुर रिवर इतना साफ हुआ कि मछलियां और ऑटर्स वापस आ गए।
- आज सिंगापुर विश्व के सबसे साफ शहरों में गिना जाता है।
Full Transcript — Download SRT & Markdown
Speaker A
अगर इंडियन सिटीज को साफ-सुथरा बनाना है तो सिंगापुर से सीखना पड़ेगा। 1950 तक सिंगापुर पूरे वर्ल्ड की डर्टिएस्ट सिटीज में से एक था। ज्यादातर पपुलेशन स्लम्स में रहती थी जहां टॉयलेट्स और ड्रेनेज सिस्टम नहीं था। लोग लिटरली टॉयलेट्स की
Speaker A
जगह बकेट्स का इस्तेमाल करते थे। ह्यूमन, एनिमल और इंडस्ट्रियल वेस्ट को डंप करने के चलते सिंगापुर रिवर का पानी काला पड़ चुका था और कोलेरा, टाइफाइड और टीबी जैसी बीमारियों से हजारों लोगों की जान जा रही थी। फिर 1959 में प्राइम मिनिस्टर बने ली
Speaker A
कोन यू जिन्होंने क्लीन एंड ग्रीन सिंगापुर को अपनी प्रायोरिटी बनाया। सबसे पहले उन्होंने लाखों लोगों को स्लम से रीओकेट करके पब्लिक हाउसिंग में डाला जहां प्रॉपर सैनिटेशन सिस्टम था जिससे ह्यूमन वेस्ट का इशू काफी हद तक सॉल्व हो गया।
Speaker A
फिर उन्होंने पूरे देश में ओपन नालियां नहीं बल्कि जमीन के अंदर पाइप्स लगा के एक अंडरग्राउंड सीवरेज नेटवर्क बना दिया। गंदगी फैलाने वालों पर हजारों सिंगापुर डॉलर्स का फाइन लगने लगा और 1992 में करेक्टिव वर्क ऑर्डर लाया गया जिसमें
Speaker A
गंदगी फैलाने वालों को घंटों तक ब्राइट वेस्ट पहनकर [संगीत] स्ट्रीट साफ करनी होती थी और फिर पेपर में इनकी फोटो छपती थी ताकि कोई और गंदगी ना करें। इसी साल इन्होंने चुइंगम्स को भी कंप्लीटली बैन कर दिया क्योंकि केवल इन्हें साफ करने के लिए
Speaker A
सरकार को लाखों डॉलर्स खर्च करने पड़ते थे। सिंगापुर रिवर को साफ करने के लिए 1977 में 10 साल की डेडलाइन रखी गई। करीब 6,40,000 क्यूबिक मीटर स्लज को मैनुअली रिमूव किया गया और पोल्यूटिंग फैक्ट्रीज़, पिग और डक फार्म्स को रीलोकेट या बंद किया
Speaker A
गया। केवल 10 साल में यह नदी इतनी क्लीन हो गई कि यहां फिश और ऑटर्स भी वापस आ गए। और आज इन्हीं स्ट्रेटजीस के चलते सिंगापुर पूरे वर्ल्ड की वन ऑफ द क्लीनेस्ट सिटीज में से एक है।
Topics:सिंगापुर सफाई मॉडलली कोन यूस्लम सुधारसैनिटेशनसीवरेज नेटवर्कसिंगापुर रिवर सफाईगंदगी नियंत्रणस्वच्छता अभियानचुइंगम प्रतिबंधशहरी विकास











