नेपाल में लोकतंत्र आंदोलन से लेकर 2025 तक के राजनीतिक संकट और युवाओं के विरोध की कहानी।
Key Takeaways
- नेपाल में लोकतंत्र के बाद भी राजनीतिक स्थिरता नहीं आई।
- राजनीतिक नेतृत्व में भ्रष्टाचार और सत्ता संघर्ष आम रहे।
- युवाओं में बेरोजगारी और असंतोष बढ़ा।
- जनता ने लगातार विरोध और आंदोलन के माध्यम से अपनी आवाज उठाई।
- सोशल मीडिया प्रतिबंध ने विरोध को और भड़का दिया।
What the video covers
- 2006 में नेपाल में किंग ज्ञानेंद्र के ऑटोक्रेटिक शासन के खिलाफ लोकतंत्र आंदोलन हुआ।
- लोकतंत्र आने के बाद भी नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता बनी रही, 14 सरकारें बदलीं।
- प्रधानमंत्रियों के बीच सत्ता की कुर्सी के लिए म्यूजिकल चेयर खेली गई।
- केपी शर्मा ओली, पुष्पा कमल दहल और शेर बहादुर प्रमुख राजनीतिक नेता रहे।
- इन नेताओं के शासन में एयरबस प्रोक्योरमेंट स्कैंडल और कई अन्य भ्रष्टाचार हुए।
- युवाओं में बेरोजगारी 20% तक पहुंच गई और रोजाना 2000 लोग विदेश नौकरी के लिए गए।
- 2020 में पेंडेमिक मिसमैनेजमेंट के खिलाफ 'इनफ इज इनफ' कैंपेन चला।
- 2022 में 'नो नॉट अगेन' मूवमेंट ने पुराने नेताओं के पुनः चुनाव का विरोध किया।
- 2025 में 'नेपो किड्स' कैंपेन ने राजनीतिक परिवारों की लग्जरी जिंदगी को उजागर किया।
- सितंबर 4 को सोशल मीडिया बैन के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए, कई लोगों की जान गई।
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Speaker A
नेपाल भले ही आज चल रहा हो, लेकिन इसकी चिंगारी तो करीब 20 साल पहले ही उठ गई थी। 2006 में नेपाल में लोकतंत्र आंदोलन हुआ, जिसमें लोगों ने किंग ज्ञानेंद्र के ऑटोक्रेटिक रूल को खत्म करने की मांग की।
Speaker A
यह मूवमेंट सक्सेसफुल हुआ और वहां डेमोक्रेसी आ गई, लेकिन हालात बद से बदतर हो गए। 208 से लेकर अब तक नेपाल में 14 सरकारें बदल चुकी हैं। किसी भी सरकार ने अपना फाइव ईयर टर्म पूरा नहीं किया। लेकिन
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इससे भी बड़ी प्रॉब्लम यह थी कि ज्यादातर समय केपी शर्मा ओली, पुष्पा कमल दहल और शेर बहादुर इन तीनों में से ही कोई पीएम बनता था। एलेजेडली यह नेक्सस बनाके पीएम की कुर्सी के साथ म्यूजिकल चेयर खेल रहे
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थे। इनके रूल में मल्टी मिलियन डॉलर एयर बस प्रोक्योरमेंट स्कैंडल हुआ। प्लस कई और स्कैम्स हुए। यूथ अनइंप्लॉयमेंट 20% तक पहुंच गई। जिस कारण ऑन एवरेज 2000 नेपालियों को हर दिन नौकरियों के लिए अब्रॉड जाना पड़ा। इसीलिए 2020 में लोगों
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का गुस्सा भड़कने लगा। लोगों ने इनफ इज इनफ कैंपेन चला के पेंडेमिक मिसमनेजमेंट के खिलाफ आवाज उठाई। 2022 में नो नॉट अगेन मूवमेंट ने रिसाइकल्ड लीडर्स को चुनने के खिलाफ आवाज उठाई और अभी 2025 में फ्रस्ट्रेटेड यूथ ने नेपो किड्स कैंपेन
Speaker A
चलाया, जिसमें उन्होंने पॉलिटिशियंस के बच्चों की लग्जरियस लाइफ को एक्सपोज किया, जो करप्शन से फंडेड थी। लिमिट क्रॉस हुई जब सेप्टेंबर 4 को गवर्नमेंट ने सभी सोशल मीडिया एप्स को बैन कर दिया। जजी के लिए यह उनकी आवाज दबाने जैसा था। इसीलिए
Speaker A
सप्टेंबर एड्स को पूरे देश में प्रोटेस्ट चालू हो गए। कई लोगों की जान चली गई।
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