चीन की बीजिंग के नीचे बनी सीक्रेट अंडरग्राउंड सिटी जहाँ लाखों लोग रहते हैं, जिन्हें 'रैट ट्राइब' कहा जाता है।
Key Takeaways
- बीजिंग के नीचे बनी अंडरग्राउंड सिटी का इतिहास और उसका उद्देश्य।
- महंगी हाउसिंग की वजह से युवा ग्रेजुएट्स के लिए सस्ता आवास एक बड़ी चुनौती।
- स्थानीय लोग अंडरग्राउंड स्पेस को आवासीय उपयोग में बदलकर समाधान निकाले।
- 'रैट ट्राइब' नामक समुदाय की अस्तित्व और उनकी जीवनशैली।
- सरकार ने इस अंडरग्राउंड आवास को वैधता दी है, लेकिन जीवन की कठिनाइयाँ बरकरार हैं।
What the video covers
- 1960 में चीन ने सोवियत यूनियन के न्यूक्लियर अटैक से बचने के लिए बीजिंग के नीचे तीन-चार मंजिल गहरी अंडरग्राउंड सिटी बनाई।
- इस अंडरग्राउंड सिटी में टनल्स, बॉम्ब शेल्टर्स, स्कूल और हॉस्पिटल्स शामिल थे, जो लगभग 85 स्क्वायर किलोमीटर क्षेत्र में फैली थी।
- 1980 में चीन और सोवियत यूनियन के रिश्ते सुधरने के बाद न्यूक्लियर खतरा खत्म हो गया और यह अंडरग्राउंड सिटी भुला दी गई।
- 1990 के बाद बीजिंग में कॉलेज ग्रेजुएट्स की संख्या बढ़ी, लेकिन महंगी हाउसिंग की वजह से वे सस्ते आवास की तलाश में थे।
- स्थानीय लोगों ने अंडरग्राउंड टनल्स और शेल्टर्स को छोटे-छोटे रूमों में बदलकर कम किराए पर ग्रेजुएट्स को देना शुरू किया।
- इन रूमों में प्राकृतिक रोशनी नहीं होती, और 30-30 लोग एक बाथरूम और किचन साझा करते हैं।
- दीवारों पर फंगस होती है और रहने की स्थिति बेहद खराब है, इसलिए इन्हें 'रैट ट्राइब' कहा जाता है।
- सरकार ने इस अंडरग्राउंड आवास को कानूनी मान्यता दे दी है।
- आज भी लगभग 10 लाख लोग इस 'रैट ट्राइब' का हिस्सा हैं और अंडरग्राउंड टनल्स में रहते हैं।
Full Transcript — Download SRT & Markdown
Speaker A
चाइना में सीक्रेटली लाखों लोग जमीन के नीचे रहते हैं। एक्चुअली, 1960 में चाइना को डर था कि सोवियत यूनियन उनके ऊपर न्यूक्लियर अटैक कर देगा। इसी से बचने के लिए उनके लीडर माओ जेडोंग ने बीजिंग शहर से तीन से चार मंजिल नीचे टनल्स, बॉम्ब शेल्टर्स, स्कूल्स और इवन हॉस्पिटल्स बनवा दिए। बेसिकली, उन्होंने एक 85 स्क्वायर किलोमीटर बड़ी अंडरग्राउंड सिटी बना डाली। लेकिन फिर 1980 में चाइना और सोवियत यूनियन के रिलेशंस नॉर्मल हो गए और एक न्यूक्लियर अटैक का खतरा खत्म हो गया।
Speaker A
इसीलिए इवेंचुअली लोग उस अंडरग्राउंड सिटी को भी भूल गए। लेकिन 20 साल बाद जब चाइना में कॉलेज एजुकेशन बढ़ी तो लाखों ग्रेजुएट्स जॉब अपॉर्चुनिटीज के लिए बीजिंग शहर में माइग्रेट करने लगे। बट प्रॉब्लम यह थी कि यहां की हाउसिंग बहुत
Speaker A
एक्सपेंसिव थी और इनके पास इतना रेंट देने के पैसे नहीं थे और यह डेस्पिरेटली चीप हाउसिंग ढूंढ रहे थे। इसी को देखते हुए लोकल रेजिडेंट्स ने शहर के नीचे बनी टनल्स और बॉम्ब शेल्टर्स को लिविंग स्पेसेस में कन्वर्ट करना शुरू कर दिया और कम रेंट पे
Speaker A
इन ग्रेजुएट्स को देने लगे। इस अंडरग्राउंड सिटी में रूम्स बेहद छोटे हैं। नेचुरल लाइट जीरो है। 30-30 लोग एक बाथरूम और किचन शेयर करते हैं और फंगस लगी दीवारों के बीच में रहते हैं। अनफॉर्चूनेटली यह लोग बिल्कुल रैट्स की
Speaker A
तरह अंडरग्राउंड टनल्स में रहते हैं और इसीलिए इन्हें द रैट ट्राइब कहा जाता है। गवर्नमेंट ने तो इसे लीगल डिक्लेअर कर दिया, लेकिन आज भी करीब 10 लाख लोग रैट ट्राइब का हिस्सा
Speaker A
तरह अंडरग्राउंड टनल्स में रहते हैं और इसीलिए इन्हें द रैट ट्राइब कहा जाता है। गवर्नमेंट ने तो इसे लीगल डिक्लेअर कर दिया, लेकिन आज भी करीब 10 लाख लोग रैट ट्राइब का हिस्सा
Topics:चीनअंडरग्राउंड सिटीबीजिंगरैट ट्राइबन्यूक्लियर अटैकमाओ जेडोंगटनेल्सबॉम्ब शेल्टर्ससस्ता आवासग्रेजुएट्स











