तमिलनाडु की नागा नदी को 20,000 महिलाओं ने मिलकर रिवाइव किया, जिससे खेती और जलस्तर में सुधार हुआ।
Key Takeaways
- स्थानीय महिलाओं की भागीदारी से नदी पुनरुद्धार संभव है।
- ग्राउंड वाटर स्तर बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग आवश्यक है।
- सरकारी योजनाओं के साथ सामुदायिक सहयोग से स्थायी परिणाम मिलते हैं।
- जल संरक्षण से कृषि और ग्रामीण जीवन में सुधार होता है।
- नदी पुनर्जीवन मॉडल को अन्य नदियों में भी सफलतापूर्वक लागू किया जा सकता है।
What the video covers
- तमिलनाडु के वेलोर जिले में नागा नदी 1990 तक सूख गई थी, जिससे किसान कर्ज में डूब गए और शहर छोड़ने को मजबूर हुए।
- 2014 में डॉक्टर चंद्रशेखर कुप्पन ने नदी को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया और बेस फ्लो की वैज्ञानिक अवधारणा को अपनाया।
- उन्होंने नदी के आसपास 20 फीट गहरे रिचार्ज वेल्स और बोल्डर चेक डैम्स बनाए ताकि बारिश का पानी ग्राउंड वाटर में समा सके।
- मॉनसून के बाद ग्राउंड वाटर स्तर बढ़ा और सूखे पड़े वेल्स में पानी भरने लगा।
- मनरेगा योजना के तहत 20,000 महिलाओं को प्रशिक्षण देकर 1000 से अधिक चेक डैम्स और 3,800 रिचार्ज वेल्स बनाए गए।
- इस प्रयास से पानी का स्तर बढ़ा, खेती संभव हुई और नागा नदी साल भर बहने लगी।
- इस मॉडल को अपनाकर तमिलनाडु में लगभग 25 नदियों को 45,000 महिलाओं ने पुनर्जीवित किया है।
Full Transcript — Download SRT & Markdown
Speaker A
कैसे तमिलनाडु की 20,000 वुमेन ने एक मरी हुई नदी को रिवाइव किया। वेलोर डिस्ट्रिक्ट में बहती है नागा नदी। कुछ डिकेड्स पहले तक यहां की पूरी फार्मिंग इसी पर टिकी हुई थी। लेकिन फिर 1990 तक यह कंप्लीटली सूख गई। फार्मर्स कर्ज में डूब गए और बहुतों को शहर छोड़कर जाना पड़ा। लेकिन फिर 2014 में डॉक्टर चंद्रशेखर कुप्पन ने इस सिचुएशन को बदलने का ठान लिया। एज अ वालंटियर उन्होंने ऑलरेडी आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के मल्टीपल रिवर रिवाइवल प्रोजेक्ट्स को क्लोजली ऑब्जर्व किया था। उन्हें पता था कि नागा नदी तभी फ्लो होगी जब उसके नीचे का ग्राउंड वाटर लेवल सफिशिएंटली हाई हो। इतना हाई कि पानी नेचुरली रिवर बेड में सीप कर सके। वरना बारिश के बावजूद कुछ समय बाद नदी वापस सूख जाएगी। चैट जीपिटी ने बताया कि इस साइंटिफिक कांसेप्ट को बेस फ्लो कहते हैं। एक्चुअली यहां लगातार बोरवेल से पानी निकालने से ग्राउंड वाटर डिप्लीट हो गया था और बिल्डिंग्स, रोड्स और डिफॉरेस्टेशन ने वाटर का ग्राउंड के नीचे जाने का रास्ता भी रोक दिया था। इसीलिए उन्होंने नदी के अराउंड 20 फीट गहरे रिचार्ज वेल्स बनाए ताकि बारिश के बाद पानी इनमें इकट्ठा हो जाए और सीधा ग्राउंड के अंदर जाए। साथ ही इन्होंने बारिश के दौरान बनने वाली छोटी स्ट्रीम्स में तीन बोल्डर चेक डैम्स बना दिए ताकि पानी की स्पीड स्लो हो जाए और जमीन को इसे सोक करने का टाइम मिले। अब जैसे ही अगला मॉनसून आया तो ग्राउंड वाटर बढ़ गया और आसपास के सात वेल्स जो सालों से सूखे पड़े थे उनमें पानी भरने लगा। इसी सक्सेस को देखते हुए उन्हें गवर्नमेंट की मनरेगा स्कीम के थ्रू पहले 20 फिर 1000 फिर फाइनली 20,000 वुमेन वर्कर्स का साथ मिला। इन्हें ट्रेनिंग दी गई जिसके बाद इन्होंने केवल वेलोर डिस्ट्रिक्ट में 1000 से ज्यादा बोल्डर चेक डैम्स और 3,800 रिचार्ज वेल्स बना दिए। एज अ रिजल्ट वाटर लेवल बढ़ा। फार्मिंग वापस पॉसिबल हुई और सबसे इंपॉर्टेंट सालों से गायब हो चुकी नागा नदी दोबारा साल भर फ्लो करने लगी। आज इसी मॉडल को यूज करके 45,000 वुमेन तमिलनाडु की करीब 25 रिवर्स को रिवाइव कर रही।
Speaker A
गए और बहुतों को शहर छोड़कर जाना पड़ा। लेकिन फिर 2014 में डॉक्टर चंद्रशेखर कुप्पन ने इस सिचुएशन को बदलने का ठान लिया। एज अ वालंटियर उन्होंने ऑलरेडी आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के मल्टीपल रिवर रिवाइवल प्रोजेक्ट्स को क्लोजली ऑब्जर्व
Speaker A
किया था। उन्हें पता था कि नागा नदी तभी फ्लो होगी जब उसके नीचे का ग्राउंड वाटर लेवल सफिशिएंटली हाई हो। इतना हाई कि पानी नेचुरली रिवर बेड में सीप कर सके। वरना बारिश के बावजूद कुछ समय बाद नदी वापस सूख
Speaker A
जाएगी। चैट जीपिटी ने बताया कि इस साइंटिफिक कांसेप्ट को बेस फ्लो कहते हैं। एक्चुअली यहां लगातार बोरवेल से पानी निकालने से ग्राउंड वाटर डिप्लीट हो गया था और बिल्डिंग्स, रोड्स और डिफॉरेस्टेशन ने वाटर का ग्राउंड के नीचे जाने का
Speaker A
रास्ता भी रोक दिया था। इसीलिए उन्होंने नदी के अराउंड 20 फीट गहरे रिचार्ज वेल्स बनाए ताकि बारिश के बाद पानी इनमें इकट्ठा हो जाए और सीधा ग्राउंड के अंदर जाए। साथ ही इन्होंने बारिश के दौरान बनने वाली छोटी स्ट्रीम्स में तीन बोल्डर चेक डैम्स
Speaker A
बना दिए ताकि पानी की स्पीड स्लो हो जाए और जमीन को इसे सोक करने का टाइम मिले। अब जैसे ही अगला मॉनसून आया तो ग्राउंड वाटर बढ़ गया और आसपास के सात वेल्स जो सालों से सूखे पड़े थे उनमें पानी भरने लगा। इसी
Speaker A
सक्सेस को देखते हुए उन्हें गवर्नमेंट की मनरेगा स्कीम के थ्रू पहले 20 फिर 1000 फिर फाइनली 20,000 वुमेन वर्कर्स का साथ मिला। इन्हें ट्रेनिंग दी गई जिसके बाद इन्होंने केवल वेलोर डिस्ट्रिक्ट में 1000 से ज्यादा बोल्डर चेक डैम्स और 3,800
Speaker A
रिचार्ज वेल्स बना दिए। एज अ रिजल्ट वाटर लेवल बढ़ा। फार्मिंग वापस पॉसिबल हुई और सबसे इंपॉर्टेंट सालों से गायब हो चुकी नागा नदी दोबारा साल भर फ्लो करने लगी। आज इसी मॉडल को यूज करके 45,000 वुमेन तमिलनाडु की करीब 25 रिवर्स को रिवाइव कर
Speaker A
रही
Topics:तमिलनाडुनदी पुनर्जीवननागा नदीग्राउंड वाटरचंद्रशेखर कुप्पनमनरेगा योजनाबोल्डर चेक डैमरिचार्ज वेल्समहिला सशक्तिकरणकृषि सुधार











