सर रतन टाटा और शांतनु नायडू का स्टार्टअप गुड फेलोज एल्डरली की देखभाल के लिए युवा ग्रैजुएट्स को जोड़ता है।
Key Takeaways
- बुजुर्गों की अकेलापन और दैनिक समस्याओं को हल करने के लिए नया स्टार्टअप।
- युवा ग्रैजुएट्स को बुजुर्गों के साथ जोड़ने का अभिनव मॉडल।
- साइकोलॉजिकल और पर्सनल वेरिफिकेशन के जरिए भरोसेमंद सेवा।
- सामाजिक और भावनात्मक सपोर्ट पर फोकस।
- व्यावसायिक सफलता से ज्यादा दिलों को छूने वाली पहल।
What the video covers
- सर रतन टाटा ने हाल ही में एक नया स्टार्टअप गुड फेलोज लॉन्च किया है।
- भारत में लगभग 1.5 करोड़ बुजुर्ग बिना किसी सपोर्ट के अकेले रहते हैं, जिससे उन्हें दैनिक जीवन में समस्याएं होती हैं।
- गुड फेलोज स्टार्टअप इस समस्या को हल करने के लिए बनाया गया है।
- यह स्टार्टअप युवा, सहानुभूतिपूर्ण और शिक्षित ग्रैजुएट्स को एल्डरली के साथ जोड़ता है।
- ग्रैजुएट्स को साइकोलॉजिकल टेस्ट, बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और पर्सनल इंटरव्यू के माध्यम से चुना जाता है।
- ग्रैजुएट्स को गुड फेलोज और बुजुर्गों को ग्रैंडपालेस कहा जाता है।
- गुड फेलोज बुजुर्गों के साथ क्वालिटी टाइम बिताते हैं, शॉपिंग, डॉक्टर विजिट और टेक्नोलॉजी सीखने में मदद करते हैं।
- यह स्टार्टअप सामाजिक और भावनात्मक सपोर्ट प्रदान करता है।
- स्टार्टअप की वैल्यूएशन वैन बिलियन डॉलर नहीं हो सकती, लेकिन यह दिलों को छूने की क्षमता रखता है।
- सर रतन टाटा की पहल सामाजिक उद्यमिता का एक उदाहरण है।
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Speaker A
सर रतन टाटा ने रिसेंटली एक नया स्टार्टअप लॉन्च किया है। पूरे इंडिया में करीब 1.5 करोड़ एल्डरली पापुलेशन बिना किसी सपोर्ट के अकेले रहती है, जिस कारण वो लोनी फुल करते हैं और आगे होने के कारण उन्हें अपने
Speaker A
डेली के कामों में भी प्रॉब्लम्स आती हैं। और इसी प्रॉब्लम को सॉल्व करता है शांतनु नायडू और सर रतन टाटा का स्टार्टअप गुड फेलोज। गुड फेलो साइकोलॉजिकल टेस्ट, बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और पर्सनल इंटरव्यूज के थ्रू इम्पैथेटिक और एजुकेटेड यंग ग्रैजुएट्स को आईडेंटिफाई करता है और
Speaker A
उन्हें एल्डरली के साथ मैच करता है। इस स्टार्टअप में ग्रैजुएट्स को गुड फेलोज और एल्डरली इसको ग्रैंडपालेस कहा जाता है। गुड फेलोज का काम होता है कि वो अपने ग्रैंडपा के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं, उनके साथ वो शॉपिंग और डॉक्टर विजिट पे जाएं और एवं
Speaker A
उन्हें टेक्नोलॉजी सीखने में भी हेल्प करें। सर रतन टाटा बैक दिस। इस स्टार्टअप की वैल्यूएशन भले ही वैन बिलियन डॉलर्स ना हो, लेकिन ये बिलियन ऑफ हार्ट को टच करने की कैपेबिलिटी जरूर रखता है।
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