Speaker A
इंडिया के इस नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट ने पूरी दुनिया को जेलस कर दिया है। पिछले कई डिकेड से इंडिया के पास ऐसा एक भी डीप वाटर पोर्ट नहीं था, जहां 18 प्लस मीटर ड्राफ्ट वाली बड़ी शिप्स डॉक कर सकें। इसीलिए हम अपने 75% इंटरनेशनल ट्रेड के लिए फॉरेन कंट्रीज के पोर्ट्स पे डिपेंडेंट थे। मतलब बड़ी शिप्स पहले कोलंबो या सिंगापुर के पोर्ट्स में आती थी और फिर फीडर वेसल्स में गुड्स को इंडिया भेजा जाता था। इन सब में इंडिया को हर साल 200 से 400 मिलियन का लॉस हो रहा था।











