कल्पसार प्रोजेक्ट: गुजरात में 60 किमी लंबी दीवार से ताजे पानी का तालाब बनाकर सूखे को खत्म करने का भारत का महा प्रयास।
Key Takeaways
- कल्पसार प्रोजेक्ट गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में सूखे की समस्या को हल करने के लिए बनाया जा रहा है।
- 60 किमी लंबी दीवार समुद्री पानी को रोककर ताजा पानी को संरक्षित करेगी।
- प्रोजेक्ट के कारण परिवहन सुविधाओं में भी सुधार होगा।
- भौगोलिक और तकनीकी चुनौतियों के कारण प्रोजेक्ट में भारी देरी और लागत वृद्धि हुई है।
- यह परियोजना भारत के सबसे बड़े जल संरक्षण और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है।
What the video covers
- गुजरात के गल्फ ऑफ खंभर में 60 किमी लंबी दीवार बनाकर समुद्री पानी को रोकने का प्रयास।
- चार नदियों से आने वाला ताजा पानी समुद्र में बह जाता है, जिससे सौराष्ट्र क्षेत्र में सूखे की समस्या होती है।
- कल्पसार प्रोजेक्ट के तहत ताजा पानी का 16,000 वर्ग किलोमीटर का ताजा पानी का तालाब बनाया जाएगा।
- दीवार के ऊपर 16 लेन का हाईवे और 4 लेन की रेलवे लाइन बनेगी, जिससे भावनगर से सूरत की दूरी आधी हो जाएगी।
- प्रोजेक्ट की शुरुआत 1987 में हुई थी, लेकिन कठिन भौगोलिक और भौतिक परिस्थितियों के कारण अभी तक पूरा नहीं हुआ।
- यह क्षेत्र भूकंप प्रवण है, समुद्र की मिट्टी नरम है और यहां 13 मीटर की ज्वार-भाटा होती है, जिससे निर्माण मुश्किल है।
- प्रोजेक्ट का बजट 3,800 करोड़ से बढ़कर 13,33,000 करोड़ तक पहुंच चुका है।
- इस प्रोजेक्ट को 'कल्पसार' यानी 'विश फुलफिलिंग लेक' कहा जाता है, लेकिन देरी के कारण आलोचक इसे 'काल्पनिक सरोवर' भी कहते हैं।
- प्रोजेक्ट से आसपास के नौ जिलों की सिंचाई जरूरतें पूरी होंगी और सूखे की समस्या कम होगी।
- समुद्री पानी को रोककर ताजा पानी को संरक्षित करने का यह एक अनूठा और महत्त्वाकांक्षी प्रयास है।
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Speaker A
इंडिया यहां समुंदर में एक 60 कि.मी. लंबी दीवार बना रहा है। गुजरात के नीचे यहां है गल्फ ऑफ खंभर। जहां हर साल चार नदियों से आने वाला करोड़ों टन फ्रेश वाटर डंप हो जाता है और सॉल्टी वाटर में कन्वर्ट हो जाता है। वहीं दूसरी ओर गुजरात के सौराष्ट्र रीजन में सालों से ड्रॉट की प्रॉब्लम आ रही है। लेकिन अगर इन नदियों के पानी को रोक लिया जाए तो ड्रॉट की प्रॉब्लम सॉल्व हो सकती है। इसीलिए इंडिया प्लान कर रहा है कल्पसार प्रोजेक्ट जिसमें
Speaker A
भावनगर से भरूच तक एक 60 कि.मी. की वॉल एक डाई बनाई जाएगी जो सी वाटर को अंदर आने से रोक देगी। फिर लो टाइड्स के वक्त गेट्स खोल के ऑलरेडी मौजूद साल्ट वाटर को ग्रेजुअली निकाला जाएगा। वहीं दूसरी तरफ
Speaker A
नदियों का फ्रेश वाटर भी यहां बहता रहेगा और एक 16000 स्क्वायर किलोमीटर का फ्रेश वाटर लेक बना देगा जो आसपास के नौ डिस्ट्रिक्ट्स के इरीगेशन नीड्स को संभाल लेगा। आल्सो इस दीवार के ऊपर बनेगा एक 16 लेन हाईवे और चार लेन रेलवे लाइन जिससे
Speaker A
भावनगर से सूरत जाने में जो पहले 356 कि.मी. लगते थे वो गिर के 177 कि.मी. पे आ जाएगा। वैसे इस प्रोजेक्ट का आईडिया आज से 40 साल पहले 1987 का है। लेकिन यहां का सी बेड क्ले जैसा सॉफ्ट है। यह अर्थक्वेक
Speaker A
प्रोन एरिया है और यहां 13 मीटर्स की टाइड्स होती हैं। जिस कारण यहां कंस्ट्रक्शन बेहद मुश्किल है। इसीलिए यह प्रोजेक्ट आज भी स्टार्ट नहीं हो पाया है और इसका बजट ओरिजिनली 3,800 करोड़ से बढ़कर आज 13,33,000 करोड़ तक पहुंच चुका
Speaker A
है। इस प्रोजेक्ट का नाम है कल्पसार यानी विश फुलफिलिंग लेक। लेकिन इतना डिले होने के कारण आज इसके क्रिटिक्स इसे कल्पसार नहीं बल्कि काल्पनिक सरोवर बुलाते।
Speaker A
है। इस प्रोजेक्ट का नाम है कल्पसार यानी विश फुलफिलिंग लेक। लेकिन इतना डिले होने के कारण आज इसके क्रिटिक्स इसे कल्पसार नहीं बल्कि काल्पनिक सरोवर बुलाते
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