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Cricket Bat History! 😮

क्रिकेट बैट का इतिहास और विकास, अंडरआर्म से राउंड आर्म बॉलिंग तक के बदलावों का प्रभाव।

Key Takeaways

  • क्रिकेट बैट का डिजाइन बॉलिंग स्टाइल के अनुसार विकसित हुआ।
  • अंडरआर्म से राउंड आर्म बॉलिंग तक के बदलाव ने बैट के आकार को प्रभावित किया।
  • बैट का स्वीट स्पॉट और वजन बॉल के बाउंस के अनुसार बदला गया।
  • आज का बैट समान चौड़ाई और हल्का होता है ताकि बेहतर प्रदर्शन हो सके।

What the video covers

  • शुरुआत में क्रिकेट बैट हॉकी स्टिक जैसा कर्व्ड होता था।
  • 16-20वीं सदी में अंडरआर्म बॉलिंग होती थी जिसमें बॉल जमीन पर रोल करती थी।
  • इस वजह से बैट का कर्व्ड एंड रोल होती बॉल से बेहतर कांटेक्ट के लिए डिजाइन किया गया था।
  • 1770 में लेंथ बॉलिंग की अनुमति मिली, जिससे बॉल बाउंस करने लगी।
  • इस बदलाव के कारण बैट का आकार रेक्टेंगुलर और फ्लैट होने लगा।
  • शुरुआत में बैट नीचे से ज्यादा वाइड होता था क्योंकि बॉल ज्यादा बाउंस नहीं करती थी।
  • 1835 में राउंड आर्म बॉलिंग लीगलाइज हुई, जिससे बॉल का बाउंस और बढ़ गया।
  • बॉल के बाउंस बढ़ने पर बैट का स्वीट स्पॉट ऊपर शिफ्ट किया गया।
  • बैट को हल्का बनाया गया और उसकी चौड़ाई ऊपर से नीचे तक समान कर दी गई।
  • आज के क्रिकेट बैट इसी विकास का परिणाम हैं।

Answers

Questions about this video

क्रिकेट बैट का प्रारंभिक डिजाइन कैसा था?

शुरुआत में क्रिकेट बैट हॉकी स्टिक की तरह कर्व्ड होता था क्योंकि बॉल अंडरआर्म बॉलिंग के दौरान जमीन पर रोल करती थी।

1770 में क्रिकेट के नियमों में क्या बदलाव आया था?

1770 में लेंथ बॉलिंग की अनुमति मिली, जिससे बॉल को बाउंस करके फेंकना संभव हुआ और बैट का आकार रेक्टेंगुलर और फ्लैट होने लगा।

राउंड आर्म बॉलिंग के बाद बैट में क्या बदलाव हुए?

1835 में राउंड आर्म बॉलिंग लीगलाइज होने के बाद बॉल का बाउंस बढ़ गया, जिससे बैट का स्वीट स्पॉट ऊपर शिफ्ट किया गया और बैट हल्का तथा समान चौड़ाई वाला बनाया गया।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

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Speaker A
क्रिकेट का बैट शुरुआत में ऐसा नहीं, बल्कि ऐसा दिखता था। बिल्कुल एक हॉकी स्टिक की तरह। एक्चुअली 16-20 में जब क्रिकेट की शुरुआत हुई, तब केवल अंडरआर्म बॉलिंग की जाती थी। जिसमें बॉलर्स बॉल को जमीन में रोल करते हुए फेंकते थे और इसीलिए बैटर्स
00:15
Speaker A
ऐसा कर्व्ड एंड वाला बैट यूज किया करते थे ताकि वो रोल होती हुई बॉल से मैक्सिमम कांटेक्ट बना सकें। फिर 1770 में बॉलर्स को लेंथ बॉलिंग अलाउ कर दी गई। मतलब बॉलिंग तो अभी भी अंडरआर्म होती थी, लेकिन
00:28
Speaker A
अब बॉल को बाउंस करके थ्रो किया जा सकता था। इसी रूल के रिस्पांस में बैट का शेप भी रेक्टेंगुलर होने लगा और उसकी सरफेस फ्लैट होने लगी ताकि बैट का ऊपर वाला पार्ट भी यूज किया जा सके। लेकिन अभी भी
00:40
Speaker A
यह बैट्स ऊपर के कंपैरिजन में नीचे से ज्यादा वाइड होते थे। ऐसा इसलिए क्योंकि अंडर आर्म बॉलिंग के चलते बॉल्स ज्यादा बाउंस नहीं होती थी। जिस कारण ज्यादातर समय बैट का लोअर पार्ट ही यूज होता था। फाइनली 1835 में राउंड आर्म बॉलिंग
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Speaker A
लीगलाइज हो गई। जिस कारण बॉल्स पहले से काफी ज्यादा बाउंस होने लगी। इसी के चलते बैट का स्वीट स्पॉट थोड़ा ऊपर शिफ्ट किया गया। उन्हें थोड़ा हल्का बनाया गया और इवेंचुअली आज के बैट्स की चौड़ाई ऊपर से लेकर नीचे तक एक जैसी हो।
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